सलाखों के बीच सजा भाई की कलाई पर राखी, छलकी बहनों की आंखें… छत्तीसगढ़ की जेलों में दिखा रक्षाबंधन का भावुक रंग
रायपुर। जेल की ऊंची दीवारें, चारों तरफ सुरक्षा और लोहे की सलाखें… लेकिन रक्षाबंधन के दिन इन सबके बीच भाई-बहन के रिश्ते की गर्माहट साफ नजर आई। छत्तीसगढ़ की जेलों में सोमवार को रक्षाबंधन का पर्व पारंपरिक रीति-रिवाज और भावनात्मक माहौल के बीच मनाया गया। बहनों ने अपने निरुद्ध भाइयों की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधा तो कई भाई भावुक नजर आए। इस दौरान एक बात सबसे खास रही, सलाखें रिश्तों को कैद नहीं कर सकीं। बहनों ने भाइयों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षित जीवन की कामना की, वहीं भाइयों ने भी बहनों की रक्षा करने और जीवन में सही रास्ते पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
प्रदेश की 33 जेलों में मनाया गया रक्षाबंधन
डीजी जेल हिमांशु गुप्ता के मुताबिक, प्रदेश की 5 केंद्रीय जेल, 22 जिला जेल और 6 उप जेलों में रक्षाबंधन का पर्व गरिमामय वातावरण में मनाया गया। जेल परिसरों में पहुंची बहनों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। तिलक, अक्षत और आरती के बाद बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। इस दौरान जेल प्रशासन की ओर से पूजा सामग्री और मिठाई की भी व्यवस्था की गई। कई जगहों पर भाई-बहन के इस मिलन का माहौल भावुक हो गया। लंबे समय बाद सामने बैठे भाई को राखी बांधते समय बहनों की आंखों में खुशी के साथ भावनाएं भी नजर आईं।
राखी के धागे के साथ जुड़ी उम्मीद
रक्षाबंधन को सिर्फ भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं माना जाता। यह भाई-बहन के बीच स्नेह, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक है। जेलों में मनाया गया यह पर्व इस मायने में और खास रहा कि यहां रिश्तों की भावनाएं परिस्थितियों और सलाखों की सीमाओं से कहीं बड़ी नजर आईं। बहनों ने भाइयों के बेहतर भविष्य और अच्छे जीवन की कामना की, जबकि बंदियों ने भी अपनी बहनों के प्रति सुरक्षा और सम्मान का भाव दोहराया।
जेलों में बनीं विशेष व्यवस्थाएं
रक्षाबंधन के मौके पर जेल प्रशासन ने परिजनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए। बहनों और अन्य परिजनों के लिए प्रतीक्षालय, पेयजल और सहायता काउंटर की व्यवस्था की गई, ताकि मुलाकात के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत रखा गया। जेल परिसर में आने वाले परिजनों की आवश्यक जांच और निर्धारित प्रक्रिया के बाद ही मुलाकात की अनुमति दी गई।
त्योहार के साथ सुधार की कोशिश
जेल प्रशासन के मुताबिक, ऐसे सांस्कृतिक और पारिवारिक आयोजन बंदियों को समाज और परिवार से भावनात्मक रूप से जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने कहा कि भारतीय परंपराओं से जुड़े पर्व बंदियों के भीतर मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और सकारात्मक सोच को मजबूत करने में मदद करते हैं। ऐसे आयोजन उनके जीवन में सुधार और समाज की मुख्यधारा से दोबारा जुड़ने की प्रेरणा दे सकते हैं।
सलाखों से बड़ी निकली रिश्तों की डोर
रक्षाबंधन के इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, परिवार और रिश्तों की भावनाएं खत्म नहीं होतीं। एक छोटी सी राखी ने जेल की दीवारों के बीच भी भाई-बहन के रिश्ते को वही अपनापन दिया, जो किसी घर के आंगन में दिखाई देता है। रक्षा-सूत्र की यह डोर सिर्फ कलाई पर नहीं बंधी, बल्कि उम्मीद, रिश्ते और बेहतर भविष्य की एक नई गांठ भी बांध गई।
