Gariaband News: 50 लाख का रपटा ध्वस्त, दर्जनों गांवों की राह बंद! एंबुलेंस तक की पहुंच ठप, खाट पर मरीजों को ले जाने की मजबूरी
मैनपुर। गरियाबंद जिले के बिन्द्रानवागढ़-सातधार मार्ग पर बना रपटा पुल बारिश की मार नहीं झेल सका और धंसकर क्षतिग्रस्त हो गया। पुल टूटने से क्षेत्र के दर्जनों गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को रोजमर्रा के काम, बच्चों की पढ़ाई और इलाज के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे गंभीर स्थिति आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर है, क्योंकि क्षतिग्रस्त रास्ते के चलते एंबुलेंस गांवों तक नहीं पहुंच पा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, मरीजों और गर्भवती महिलाओं को खाट या पैदल मुख्य मार्ग तक ले जाने की नौबत आ रही है। करीब 18 वर्ष पहले प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लगभग 50 लाख रुपये की लागत से बने इस रपटे के टूटने ने ग्रामीण कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
पुल टूटा तो थम गई जिंदगी की रफ्तार, स्कूल से अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल
रपटा पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद क्षेत्र में आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पानी के तेज बहाव और टूटे रास्ते के कारण आवाजाही जोखिम भरी हो गई है। स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं, कामकाज के लिए बाहर निकलने वाले लोगों और राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक, सबसे ज्यादा चिंता मरीजों को अस्पताल पहुंचाने को लेकर है। रास्ता बंद होने से बड़े वाहन और एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में आपात स्थिति में मरीजों को खाट पर उठाकर या पैदल मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ रहा है। गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार, वैकल्पिक रास्ते की मांग
पुल क्षतिग्रस्त होने से परेशान ग्रामीण मनबोध, सुरेश कुमार, रामेश्वर, वीरेंद्र कुमार और सूरज कुमार ने जिला प्रशासन व संबंधित विभाग से तत्काल राहत की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक स्थायी पुल का निर्माण नहीं होता, तब तक वैकल्पिक मार्ग या अस्थायी रपटे की व्यवस्था की जाए, ताकि आपातकालीन सेवाएं बहाल हो सकें और लोगों को राहत मिल सके।
विभाग ने माना-आवागमन पूरी तरह बंद, दोनों ओर लगाए चेतावनी बोर्ड
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, गरियाबंद के कार्यपालन अभियंता राहुल चंद्राकर ने बताया कि बारिश के दौरान रपटा धंस गया है और वहां से आवागमन पूरी तरह बंद है। लोगों को खतरे से आगाह करने के लिए रास्ते के दोनों ओर जिला प्रशासन की ओर से चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। रपटा किस विभाग या ग्राम पंचायत द्वारा बनाया गया था, इस संबंध में कार्यपालन अभियंता ने कहा कि पुराने रिकॉर्ड और फाइलों की जांच के बाद ही इसकी जानकारी दी जा सकेगी।
पहले से क्षतिग्रस्त था पुल, शिकायतों के बावजूद मरम्मत नहीं होने का आरोप
ग्राम पंचायत पतोरा के सरपंच कृष्णकुमार नाग ने बताया कि रपटा पुल का निर्माण करीब 18 वर्ष पहले प्रधानमंत्री ग्राम सड़क विभाग द्वारा 50 लाख रुपये से अधिक की लागत से कराया गया था। उनके मुताबिक, पुल धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त हो रहा था और इसकी शिकायत भी संबंधित विभाग से की गई थी, लेकिन समय रहते सुधार नहीं किया गया।
सरपंच के अनुसार, लगातार बारिश के बीच करीब एक सप्ताह पहले पुल धंस गया। इससे क्षेत्र के दर्जनों गांवों और पारा-टोला के हजारों लोगों का आवागमन बाधित हो गया है। उन्होंने क्षेत्र में बड़े पुल के निर्माण की आवश्यकता बताते हुए जल्द समाधान की मांग की है।
स्थायी पुल निर्माण की मांग, ग्रामीणों को राहत का इंतजार
बिन्द्रानवागढ़-सातधार मार्ग पर रपटा पुल के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों के सामने आवागमन के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं का भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है। फिलहाल रास्ते पर आवाजाही बंद है और ग्रामीण वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग प्रभावित गांवों तक संपर्क बहाल करने के लिए कब तक ठोस कदम उठाते हैं।
