CG News: ₹182.98 करोड़ के मैनपावर भुगतान मामले में पूरक चालान, अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया के खिलाफ कार्रवाई
रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित CSMCL मैनपावर भुगतान मामले में जांच एजेंसी ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शासकीय शराब दुकानों में कर्मचारियों की तैनाती के नाम पर कथित अतिरिक्त भुगतान से जुड़े ₹182.98 करोड़ के मामले में तत्कालीन CSMCL प्रबंध निदेशक अरुणपति त्रिपाठी और मैनपावर एजेंसी से जुड़े बीआर लोहिया के खिलाफ EOW-ACB की विशेष अदालत में पूरक चालान पेश किया गया है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि मैनपावर एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारियों के वेतन, ओवरटाइम और अन्य मदों में वास्तविक भुगतान से अधिक राशि के बिल प्रस्तुत किए गए। एजेंसी के मुताबिक, इस प्रक्रिया में कथित तौर पर कमीशन का लेनदेन भी हुआ। मामले में त्रिपाठी न्यायिक रिमांड पर जेल में बंद हैं, जबकि लोहिया के फरार होने की स्थिति में उनके खिलाफ पूरक चालान पेश किए जाने की जानकारी दी गई है।
₹182.98 करोड़ के भुगतान मामले में क्या है आरोप?
जांच एजेंसी के अनुसार, शासकीय शराब दुकानों में कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पांच मैनपावर एजेंसियों को काम सौंपा गया था। आरोप है कि कर्मचारियों को देय राशि के भुगतान के नाम पर एजेंसियों ने ऐसे बिल प्रस्तुत किए, जिनमें अतिरिक्त भुगतान का दावा किया गया। एजेंसी का कहना है कि कुछ मामलों में कर्मचारियों को वास्तविक राशि दिए बिना या वास्तविक भुगतान से अधिक रकम दर्शाकर CSMCL से भुगतान प्राप्त किया गया। जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि अतिरिक्त भुगतान का हिस्सा कथित कमीशन के रूप में लिया जाता था। यह मामला कर्मचारियों के वेतन और सरकारी भुगतान व्यवस्था से जुड़ा होने के कारण जांच के दायरे में है। हालांकि, आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
ED की रिपोर्ट के सत्यापन के बाद दर्ज हुआ था मामला
जांच एजेंसी के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ED) से प्राप्त प्रतिवेदन का सत्यापन करने के बाद 5 अक्टूबर 2024 को मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद जांच में मैनपावर एजेंसियों, संबंधित अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल की गई। प्रकरण में नवीन प्रताप सिंह तोमर, अनवर ढेबर, मैनपावर एजेंसियों के संचालकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों सहित 12 आरोपियों के खिलाफ 18 मई 2026 को प्रथम चालान पेश किया जा चुका है। आगे की विवेचना में अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया की कथित संलिप्तता से जुड़े साक्ष्य मिलने का दावा करते हुए अब पूरक चालान पेश किया गया है।
निविदा की शर्तों में बदलाव कराने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, अरुणपति त्रिपाठी 9 मई 2019 से 13 मई 2023 तक CSMCL के प्रबंध निदेशक पद पर रहे। उनके पास निगम के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों के साथ निविदाओं तथा मैनपावर एजेंसियों के बिलों को मंजूरी देने से जुड़े अधिकार थे। जांच में आरोप लगाया गया है कि अनवर ढेबर के कहने पर निविदा की शर्तों में बदलाव कराया गया और कर्मचारियों के नाम पर अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था को मंजूरी दी गई। एजेंसी का दावा है कि इसी व्यवस्था के माध्यम से कथित कमीशन का लेनदेन किया गया।
हर महीने 70 से 80 लाख रुपये कमीशन मिलने का दावा
जांच एजेंसी ने कथित कमीशन के लेनदेन को लेकर भी कई दावे किए हैं। उसके अनुसार, सिद्धार्थ सिंघानिया विभिन्न एजेंसियों से नकद रकम एकत्र कर संबंधित लोगों तक पहुंचाता था। उसके कथन के आधार पर एजेंसी ने दावा किया कि सभी एजेंसियों से मिलाकर लगभग 70 से 80 लाख रुपये प्रतिमाह कमीशन प्राप्त होता था। जांच के मुताबिक, अक्टूबर 2019 से मार्च 2023 के बीच सुमीत फैसिलिटीज की ओर से लगभग ₹15.65 करोड़ दिए जाने की बात सामने आई। एजेंसी का यह भी दावा है कि त्रिपाठी के कार्यकाल के दौरान मैनपावर एजेंसियों से ₹28 से ₹32 करोड़ तक नकद कमीशन प्राप्त कर अनवर ढेबर तक पहुंचाने से जुड़े साक्ष्य मिले हैं।
इसके अलावा, त्रिपाठी के कार्यकाल के बाद भी नवीन प्रताप सिंह तोमर के माध्यम से कथित कमीशन वसूली जारी रहने और सेवा शुल्क तथा ओवरटाइम की राशि पर कमीशन की दर बढ़ाकर एक-तिहाई किए जाने का विवरण मिलने की बात कही गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, त्रिपाठी के हिस्से की कथित अवैध रकम में से करीब ₹3 करोड़ ED ने जब्त किए थे। इन सभी दावों की कानूनी स्थिति और साक्ष्यों का मूल्यांकन न्यायालय में होना बाकी है।
बीआर लोहिया की भूमिका को लेकर जांच एजेंसी का दावा
जांच एजेंसी के अनुसार, बीआर लोहिया ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड के संस्थापक थे। अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड भी इसी समूह की कंपनी बताई गई है। एजेंसी का आरोप है कि अधिकारियों को कथित नकद कमीशन देने की व्यवस्था लोहिया के निर्देश पर संचालित होती थी। बिल तैयार कराने, कमीशन की रकम जुटाने और उसके भुगतान से जुड़े कार्यों में उनकी भूमिका होने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी ने यह भी बताया कि कंपनी के कर्मचारी कथित तौर पर ₹28.80 लाख की कमीशन राशि पहुंचाने जा रहे थे, तभी ED की कार्रवाई के दौरान रकम जब्त की गई थी।
इन पांच कंपनियों के भुगतान की जांच
शासकीय शराब दुकानों में मैनपावर उपलब्ध कराने के लिए जिन पांच एजेंसियों को काम दिया गया था, उनके नाम हैं:
- सुमीत फैसिलिटीज लिमिटेड
- प्राइमवन वर्कफोर्स प्राइवेट लिमिटेड
- ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड
- अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड
- ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड
जांच के अनुसार, सेवा शर्तों में नियमित वेतन के अतिरिक्त ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के काम के भुगतान का प्रावधान था। एजेंसियों को पहले संबंधित कर्मचारियों को भुगतान करना था और उसके बाद CSMCL से राशि प्राप्त करनी थी। आरोप है कि कुछ बिलों में कर्मचारियों को वास्तविक भुगतान किए बिना या वास्तविक राशि से अधिक रकम दिखाकर भुगतान लिया गया। इसी प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर
₹182.98 करोड़ के इस मामले में पूरक चालान पेश होने के बाद अब न्यायालय में आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। जांच एजेंसी ने नए साक्ष्यों के आधार पर दो और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अदालत में विचार और साक्ष्यों का परीक्षण होना बाकी है। इस प्रकरण का अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल, मैनपावर भुगतान, निविदा शर्तों और कथित कमीशन से जुड़े पहलू जांच के केंद्र में हैं।
