बारिश थमी, धूल का गुबार और प्रदूषण का खेल,बिलासपुर का एक्यूआई 111 पहुंचा,
सफाई के नाम पर जारी हुए फंड, लेकिन सड़कों पर उड़ रही धूल; निर्माण एजेंसियां भी नियमों की कर रहीं अनदेखी
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ से 12 अक्टूबर को मानसून की विदाई होते ही बिलासपुर शहर धूल के गुबार और बढ़ते प्रदूषण की चपेट में आ गया है। 15 अक्टूबर को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट में बिलासपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) सबसे अधिक 111 दर्ज किया गया है, जबकि 50 से नीचे एक्यूआई को सुरक्षित माना जाता है। भास्कर की पड़ताल में यह मुख्य खुलासा हुआ है कि प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर के पीछे केवल मौसम का शुष्क होना जिम्मेदार नहीं है, बल्कि नगर निगम की सफाई व्यवस्था और डस्ट कंट्रोल के नाम पर खर्च किए गए लगभग 5 करोड़ रुपए के फंड का सही उपयोग न होना सबसे बड़ा कारण है। पिछले साल इसी तारीख (15 अक्टूबर) को शहर का एक्यूआई 102 था, जो लापरवाही के चलते इस बार 9 अंक और बढ़ गया है।
सफाई मशीनों की खरीद और टेंडर के दस्तावेजों में खेल
दक्षिण-पश्चिमी हवाओं का प्रभाव खत्म होने के बाद वातावरण में नमी घटी है, जिससे धूल के कण हवा में आसानी से घुल रहे हैं। दस्तावेजों के मुताबिक, नगर निगम ने शहर की मुख्य सड़कों पर धूल नियंत्रण (डस्ट कंट्रोल) और मैकेनाइज्ड स्वीपिंग के लिए पिछले वित्तीय वर्ष में करोड़ों के टेंडर जारी किए थे। इसमें मशीनों की खरीदी और संचालन के लिए ठेकेदारों को भारी भुगतान किया गया। हालांकि, सड़क किनारे चल रहे निर्माण और प्रमुख चौराहों के हालात बताते हैं कि सफाई का काम सिर्फ कागजों पर हो रहा है। आम सड़कों पर गाड़ियों के पीछे उड़ती धूल साफ देखी जा सकती है। इसके विपरीत, भिलाई ने डस्ट कंट्रोल में बेहतर काम किया है और अपना एक्यूआई पिछले साल के 70 से घटाकर 62 कर लिया है। वहीं रायपुर का एक्यूआई पिछले साल के 64 से बढ़कर 75 और कोरबा का 36 से बढ़कर 48 हो गया है, लेकिन स्थिति बिलासपुर जितनी खराब नहीं है।
निर्माण एजेंसियों द्वारा नियमों की अनदेखी और मॉनिटरिंग में फेल प्रशासन
शहर में चल रहे सीवरेज और सड़क निर्माण कार्यों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी निर्माण स्थल पर नियमित पानी का छिड़काव और मलबा ढककर रखना अनिवार्य है। लेकिन बिलासपुर में इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मानसून की विदाई के बाद रात का तापमान सामान्य से नीचे जाने और हवा की गति कम होने के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण की निचली परतों में जमा हो रहे हैं, जिससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है।
फाइलों में चल रहा डस्ट कंट्रोल
भुगतान हुआ, पर छिड़काव नहीं
नगर निगम के ऑडिट दस्तावेजों के अनुसार, सड़कों पर पानी छिड़काव के लिए जल विभाग के टैंकरों और प्राइवेट ठेकेदारों को बीते कुछ महीनों में लाखों रुपए से अधिक का भुगतान किया गया है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वर्तमान में शहर के किसी भी धूल भरे मार्ग पर पानी का छिड़काव नहीं हो पा रहा है।
मशीनों के मेंटेनेंस पर लाखों का खर्च
शहर की आबोहवा सुधारने के लिए लाई गई रोड स्वीपिंग मशीनों के मेंटेनेंस के नाम पर हर महीने भारी भरकम बिल पास हो रहा है। जानकारी के मुताबिक, जिन मशीनों के लिए बिल लग रहे हैं, उनमें से कई तकनीकी खराबी के चलते निगम के वर्कशॉप में ही खड़ी हैं।
अधिकारियों की मिलीभगत
सड़क निर्माण में लगी एजेंसियों पर डस्ट पॉल्यूशन फैलाने के एवज में पेनाल्टी लगाने का प्रावधान है, लेकिन पर्यावरण विभाग और निगम के अधिकारियों ने पिछले 6 महीने में एक भी बड़ी निर्माण एजेंसी पर कोई जुर्माना नहीं लगाया है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 16 अक्टूबर को एक-दो स्थानों पर 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है, जिससे सड़कों की धूल और उड़ेगी। और मौसम में बदलाव आएगा।
