शक के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती... गांजा तस्करी मामले में पकड़े गए शख्स को हाईकोर्ट से राहत
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक पुराने ड्रग केस में आरोपी को बरी कर दिया है। यह मामला 2010 का है, जब आरोपी के घर से 165 किलो गांजा बरामद किया गया था और उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था। हाईकोर्ट ने 2011 में स्पेशल कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया, क्योंकि अदालत को उसके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला।
जब्ती में मिलीं कमियां, गवाह पलटे
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जस्टिस संजय एस अग्रवाल और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की दो जजों की बेंच ने इस मामले पर फैसला सुनाया। हाईकोर्ट के अनुसार, जब्ती की प्रक्रिया में कई कमियां पाई गईं और ज्यादातर गवाह अपने बयान से मुकर गए। अदालत ने कहा कि केवल शक के आधार पर किसी को सजा नहीं दी जा सकती। पूरा मामला 22 मार्च 2010 का है। बलौदा थाने के सब इंस्पेक्टर डीएल मिश्रा को विष्णु कुमार सोनी के घर पर बड़ी मात्रा में गांजा होने की सूचना मिली थी। पुलिस ने विष्णु के घर छापा मारा और आठ बोरियों में 165 किलो गांजा बरामद किया। इसके अलावा, 15,240 रुपये नकद और एक तौलने की मशीन भी मिली थी। पुलिस ने विष्णु के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी)(2)(सी) के तहत मामला दर्ज किया था।
5 मार्च 2011 को स्पेशल कोर्ट ने सबूतों के अभाव में विष्णु को बरी कर दिया था। उस दौरान भी कई गवाहों ने पुलिस की कहानी को झूठा बताते हुए अपने बयान बदल दिए थे और पंचनामे में भी कई गड़बड़ियां मिली थीं। अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी स्पेशल कोर्ट के इस फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है।
