मनरेगा में फर्जी बिल के आरोपी उपयंत्री पर बड़ी कृपा: 2023 में बने सहायक अभियंता, अब ईई बनाने की फाइल पीएससी पहुँची

मनरेगा में फर्जी बिल के आरोपी उपयंत्री पर बड़ी कृपा: 2023 में बने सहायक अभियंता, अब ईई बनाने की फाइल पीएससी पहुँची

2016 में ही राजभवन दे चुका है अभियोजन की मंजूरी; 2023 का पदोन्नति आदेश रद्द करने की उठी माँग

 

रायपुर। जल संसाधन विभाग में दागी उपयंत्री को लगातार पदोन्नति की मलाई खिलाने का मामला सामने आया है। धरसींवा थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 207/2011 के नामजद आरोपी संदीप धवन को विभाग ने पहले 2023 में सहायक अभियंता बना दिया और अब उन्हें कार्यपालन अभियंता (ईई) बनाने की तैयारी चल रही है। जानकारी के अनुसार इसकी फाइल छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (पीएससी) तक पहुँच चुकी है। इधर मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को रायपुर अदालत में इसी आपराधिक मामले की पेशी लगी है।

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कागजों में रोलिंग और मुरूम, जमीन पर काम नहीं...

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धरसींवा जनपद पंचायत के तत्कालीन अतिरिक्त सीईओ लखन लाल सोनवानी ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। ग्राम पंचायत गुमा में मनरेगा मद से 2008-09 में गुमा से कारा पहुँच मार्ग निर्माण में भारी धांधली की गई थी। सड़क तीन टुकड़ों (0-500, 500-1000 और 1000-1500 मीटर) में कुल ₹12,57,600 की लागत से स्वीकृत हुई थी।

माप पुस्तिका (एमबी) में हजारों घन मीटर मिट्टी-मुरूम डालने और पानी डालकर रोलिंग कराने का फर्जी इंद्राज कर दिया गया। हकीकत में मौके पर न तो मुरूम बिछा और न ही रोलिंग कराई गई।

मटेरियल सप्लायर बोला,बिल और दस्तखत जाली

सड़क निर्माण में सामग्री आपूर्ति के लिए तेलीबांधा रायपुर की फर्म ‘नायर एसोसिएट’ के बिल लगाए गए थे। फर्म संचालक जय कुमार नायर ने पुलिस को दिए बयान में साफ कहा कि उसने सड़क का कोई काम नहीं किया है । बिल व लेटर पैड पर दर्ज लिखावट और हस्ताक्षर उसके नहीं हैं। सरकारी आदेश के अनुसार आरोपी इंजीनियर पर ₹2,60,640 का अधिक मूल्यांकन करने और फर्जी बिल-वाउचर लगाकर सरकारी खजाने की राशि हड़पने का आरोप तय हुआ।

2016 में ही सरकार दे चुकी है अभियोजन की मंजूरी

विभाग के पास 2016 से इस केस का पूरा कच्चा-चिट्ठा मौजूद था:

  •  08 मार्च 2016: मंत्रालय के अवर सचिव आर.के. नारद ने प्रमुख अभियंता से अभियोजन स्वीकृति पर तत्काल राय माँगी।
  •   17 मई 2016: प्रमुख अभियंता ने अधीक्षण और मुख्य अभियंता की अनुशंसा के साथ 588 पन्नों का मूल रिकॉर्ड भेजकर अभियोजन चलाने की सिफारिश की।
  •  22 जून 2016: विधि विभाग ने राज्यपाल के नाम से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के तहत मंजूरी आदेश जारी किया। इसमें आईपीसी की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120बी और 34 लगाई गई। आदेश में दर्ज था कि अमानत में खयानत और फर्जीवाड़े के पक्के आधार मौजूद हैं।
  •   24 जून 2016: आदेश की प्रति जल संसाधन और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिवों को भी भेजी गई थी।

 

अदालत में 7 गवाहों के बयान दर्ज, सभी खिलाफ

रायपुर न्यायलय में यह प्रकरण क्रमांक 12257/16 विचाराधीन है। इसमें 45 गवाहों की गवाही होनी है। अब तक जिन 7 गवाहों के बयान हुए हैं, वे सभी आरोपी के खिलाफ आए हैं। अगली पेशी 6 अक्टूबर 2026 को है।

सीलबंद लिफाफा ताक पर, उप सचिव की भूमिका संदिग्ध

आपराधिक केस पेंडिंग रहने पर नियमानुसार पदोन्नति ‘सीलबंद लिफाफा’ पद्धति में रखी जाती है। साथ ही डीपीसी और पीएससी के सामने पूरी सतर्कता रिपोर्ट रखना अनिवार्य होता है। आरोप है कि उप सचिव रविन्द्र मेढ़ेरकर ने आपराधिक प्रकरण की जानकारी छिपाकर पदोन्नति की फाइल आगे बढ़ाई।

गरियाबंद की कुर्सी की अंदरूनी खींचतान

चर्चा है कि गरियाबंद में पदस्थ प्रभारी कार्यपालन अभियंता एस.के. बर्मन को हटाकर आई.ए. सिद्दीकी के करीबी सहायक अभियंता आर.पी. साहू को कुर्सी सौंपने की योजना थी। इस फेरबदल में संदीप धवन बाधा बन रहे थे, जिसके बाद सिद्दीकी खेमे की तरफ से धवन के पुराने आपराधिक केस की फाइल बाहर लाई गई।

प्रमोशन आदेश निरस्त करने की माँग

शिकायतकर्ताओं ने शासन से माँग की है कि:

  •   वर्ष 2023 में नियम विरुद्ध दी गई सहायक अभियंता पदोन्नति तत्काल निरस्त कर संदीप धवन को मूल पद पर भेजा जाए।
  •   कार्यपालन अभियंता पदोन्नति की प्रक्रिया अदालत का फैसला आने तक रोकी जाए।
  •  पीएससी भेजी गई फाइल मँगाकर उसमें अपराध क्रमांक 207/2011 का ब्योरा दर्ज किया जाए।
  •   आपराधिक तथ्य छिपाने वाले जिम्मेदार अफसरों पर कड़ी कार्रवाई हो।

शासन से जवाब माँगते कुछ प्रश्न....

 * जब 2016 में अभियोजन आदेश की प्रति विभाग को मिल चुकी थी, तो 2023 में पदोन्नति कैसे दी गई?

 * क्या पदोन्नति समिति और पीएससी को अपराध क्रमांक 207/2011 की जानकारी दी गई है?

 * अदालत में ट्रायल चलने के बावजूद विभाग पदोन्नति की प्रक्रिया आगे क्यों बढ़ा रहा है?

इस प्रकरण में संदीप धवन, उप सचिव रविन्द्र मेढ़ेरकर और विभागीय अफसरों से संपर्क करने की कोशिश की गई। उनका पक्षप्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।)
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