ट्रांसफर आदेश नहीं माना, फिर भी मिला राज्यपाल पुरस्कार, शिकायत के महीनों बाद जागा विभाग, व्याख्याता पर जांच शुरू
बिलासपुर : शासन के तबादला आदेशों का उल्लंघन करने के बावजूद राज्यपाल पुरस्कार मिलने का मामला अब बिलासपुर में तूल पकड़ता जा रहा है। सरकंडा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ व्याख्याता प्रवीण कुमार मिश्रा के खिलाफ शिकायत के बाद विभाग ने जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि वर्ष 2019 में तबादला आदेश जारी होने के बावजूद उन्होंने नई शाला में कार्यभार ग्रहण नहीं किया और पुरानी पदस्थापना वाली शाला में ही सेवाएं देते रहे।
गौरतलब हैं कि जिस शिक्षक पर शासन के आदेश का पालन नहीं करने का आरोप है, उसी का नाम बाद में राज्यपाल पुरस्कार के लिए नामित हुआ और उन्हें सम्मान भी मिल गया।
2019 में हुआ था तबादला

स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से 1 अक्टूबर 2019 को जारी तबादला आदेश में बिल्हा ब्लॉक के सरकंडा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ व्याख्याता प्रवीण कुमार मिश्रा का तबादला तखतपुर ब्लॉक के घुटकू स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय किया गया था। शिकायत के मुताबिक आदेश जारी होने के बाद भी उन्होंने नई शाला में जाकर कार्यभार ग्रहण नहीं किया। शिकायतकर्ता नीलकमल यादव ने इस मामले में कलेक्टर से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। शिकायत में जिला शिक्षा कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी संदेह हो रहा हैं।
हाईकोर्ट पहुंचे, लेकिन स्टे नहीं मिलने का दावा
शिकायतकर्ता के अनुसार तबादला आदेश को व्याख्याता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के बाद न्यायालय ने संबंधित शिक्षक को विभाग के समक्ष आवेदन देने और विभाग को उस पर निर्धारित अवधि में निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। शिकायतकर्ता का दावा है कि अदालत से तबादला आदेश पर स्थगन नहीं मिला था। इसके बावजूद नई शाला में ज्वाइनिंग नहीं दी गई। यही तथ्य अब जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि उस अवधि में शिक्षक की वास्तविक पदस्थापना और कार्यभार की स्थिति क्या थी तथा विभागीय रिकॉर्ड में इसे किस तरह दर्ज किया गया।
शिकायत रही लंबित , इधर पुरस्कार की प्रक्रिया बढ़ती रही आगे
आश्चर्य की बात यह हैं कि 20 फरवरी 2026 को शिकायत किए जाने के बाद भी लंबे समय तक जांच शुरू नहीं हुई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि करीब छह महीने तक मामला लंबित रहा। इसी दौरान संबंधित व्याख्याता का नाम राज्यपाल पुरस्कार के लिए आगे बढ़ा और उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी कर दिया गया। यदि शिक्षक के खिलाफ शासन के आदेश की अवहेलना से जुड़ी शिकायत लंबित थी, तो पुरस्कार के लिए नामांकन से पहले शिकायत और संबंधित रिकॉर्ड की जांच क्यों नहीं की गई?
सीएम ऑनलाइन शिकायत के बाद हरकत में आया विभाग
शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने के बाद मामला सीएम ऑनलाइन तक पहुंचा। इसके बाद शिक्षा विभाग सक्रिय हुआ और अब व्याख्याता के खिलाफ जांच शुरू की गई है। जांच की जिम्मेदारी सीनियर प्राचार्य राघवेंद्र गौरहा को दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रवीण कुमार मिश्रा के खिलाफ जांच चल रही है। उनके अनुसार करीब छह साल पहले तबादला हुआ था, लेकिन तबादला आदेश का पालन नहीं किए जाने की शिकायत सामने आई है।
फिलहाल जांच पूरी होने का इंतजार है। आरोपों की पुष्टि जांच और विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर ही होगी। लेकिन शासन के तबादला आदेश, लंबित शिकायत और उसी समय राज्यपाल पुरस्कार मिलने के घटनाक्रम ने बिलासपुर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया हैं।
