छत्तीसगढ़ स्कूल युक्तियुक्तकरण: शिक्षा सुधार की पहल या बच्चों के भविष्य से खिलवाड़?....... टी एस सिंह देव 

छत्तीसगढ़ स्कूल युक्तियुक्तकरण: शिक्षा सुधार की पहल या बच्चों के भविष्य से खिलवाड़?....... टी एस सिंह देव 

रायपुर : छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित स्कूलों के युक्तियुक्तकरण के फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने इस नीति की कड़ी आलोचना करते हुए इसे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है और सरकार से इस्तीफे तक की मांग कर डाली है। छत्तीसगढ़ स्कूल युक्तियुक्तकरण का है मामला 

 

क्या है युक्तियुक्तकरण योजना और क्यों हो रहा है इसका विरोध?

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हाल ही में राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी किया है, जिसके तहत प्रदेश के लगभग 10,463 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया जाना है। इस योजना में कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बंद करना और एक ही परिसर में चलने वाले विभिन्न स्कूलों का विलय करना शामिल है। सरकार का तर्क है कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।छत्तीसगढ़ स्कूल युक्तियुक्तकरण

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पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव का कड़ा प्रहार

पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री टीएस सिंहदेव ने सरकार के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।अमानवीय और अव्यवहारिक नीति: उन्होंने इस नीति को ‘अमानवीय’ और ‘अन्यायपूर्ण’ करार देते हुए कहा कि यह प्रदेश के लाखों बच्चों के भविष्य के साथ एक ‘क्रूर मज़ाक’ है।शिक्षकों की कमी पर सवाल: श्री सिंहदेव ने सवाल उठाया कि नई व्यवस्था के तहत, जहां 60 से कम छात्रों वाले प्राथमिक विद्यालयों में केवल ‘एक धन एक’ (1+1) शिक्षक और मिडिल स्कूलों में ‘एक धन तीन’ (1+3) शिक्षकों का प्रावधान है (जो कि 2008 की नीति के अनुरूप बताया जा रहा है), वहां दो शिक्षक पहली से पांचवीं तक की इतनी कक्षाओं को प्रभावी ढंग से कैसे पढ़ा पाएंगे?

 

शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन: उन्होंने इसे शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) का स्पष्ट उल्लंघन भी बताया है।

सरकार से इस्तीफे की मांग: सिंहदेव ने यहां तक कह दिया कि यदि सरकार बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में अक्षम है, तो उसे या तो इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर शिक्षा व्यवस्था को निजी हाथों में सौंप देना चाहिए।

 

व्यापक चिंताएं और सरकार का पक्ष

इस नीति को लेकर न केवल राजनीतिक दलों, बल्कि कई शिक्षाविदों और अभिभावकों ने भी अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। उनकी मुख्य चिंता ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों की शिक्षा पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक प्रभाव को लेकर है। उन्हें डर है कि स्कूलों के बंद होने या विलय होने से बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए अधिक दूरी तय करनी पड़ सकती है, जिससे ड्रॉपआउट दर बढ़ सकती है।छत्तीसगढ़ स्कूल युक्तियुक्तकरण दूसरी ओर, राज्य सरकार का तर्क है कि यह कदम शैक्षणिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार का मानना है कि कम छात्र संख्या वाले स्कूलों में संसाधनों का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता और विलय से बेहतर शैक्षणिक माहौल और सुविधाएं प्रदान की जा सकेंगी।छत्तीसगढ़ स्कूल युक्तियुक्तकरण

आगे क्या? भविष्य की दिशा

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन चिंताओं और विरोध का किस प्रकार समाधान करती है। क्या यह नीति वास्तव में छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ कर पाएगी या यह महज एक राजनीतिक मुद्दा बनकर रह जाएगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, इस मुद्दे पर बहस जारी है और सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।छत्तीसगढ़ स्कूल युक्तियुक्तकरण

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