क्षमता से 53% ज्यादा कैदी, फिर भी 200 बंदियों की ओपन जेल नहीं हो सकी शुरू, हाईकोर्ट में पेश आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ की जेलों में बंदियों की बढ़ती संख्या और सुधारात्मक व्यवस्था की धीमी रफ्तार ने जेल प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। राज्य की 33 जेलों में निर्धारित क्षमता से हजारों अधिक कैदी बंद हैं, जबकि भीड़ का दबाव कम करने के उद्देश्य से बेमेतरा जिले के पथर्रा गांव में प्रस्तावित 200 बंदियों की क्षमता वाली ओपन जेल अब तक शुरू नहीं हो सकी है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से पेश शपथपत्र में सामने आए आंकड़े जेलों की मौजूदा स्थिति और सुधार की जरूरत को रेखांकित करते हैं।
जेलों में 15,025 की क्षमता लेकिन बंदी 22,980
हाईकोर्ट में प्रस्तुत सरकारी शपथपत्र के अनुसार, 30 सितंबर तक प्रदेश की 33 जेलों (केंद्रीय कारागार, जिला जेल और उपजेलों) की कुल निर्धारित क्षमता 15,025 बंदियों की थी। इसके मुकाबले जेलों में 22,980 बंदी निरुद्ध थे। यानी निर्धारित क्षमता से 7,955 अधिक बंदी जेलों में रखे गए थे। आंकड़ों के मुताबिक, जेलों में बंदियों की संख्या उनकी निर्धारित क्षमता से करीब 53 प्रतिशत अधिक है। मौजूदा स्थिति में हर 100 बंदियों के लिए निर्धारित जगह पर औसतन 153 बंदियों का दबाव बन रहा है। ऐसे हालात में बैरकों में जगह, स्वच्छता, स्वास्थ्य सुविधाओं, सुरक्षा और बंदियों के प्रबंधन को लेकर चुनौतियां बढ़ना स्वाभाविक है।
200 बंदियों की ओपन जेल, लेकिन शुरुआत अब तक नहीं
जेलों में बढ़ती भीड़ को कम करने और बंदियों के सुधार एवं पुनर्वास को बढ़ावा देने के लिए बेमेतरा जिले के पथर्रा गांव में 200 बंदियों की क्षमता वाला ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन प्रस्तावित किया गया था। इस परियोजना के लिए अधिसूचना जारी की गई और 48 नए पदों के सृजन की प्रक्रिया भी सामने आई। सरकारी जानकारी के अनुसार, 21 सितंबर 2026 के आदेश के तहत शुरुआती तौर पर 15 कर्मचारियों की तैनाती को मंजूरी दी गई। इसके बावजूद सुरक्षा से जुड़े तकनीकी और मैदानी मुद्दों के कारण ओपन जेल अब तक शुरू नहीं हो पाई है। जेल अधीक्षक की नियुक्ति और सीधी भर्ती की अनुमति जैसे विषयों पर विचार जारी है।
कैदियों को हुनर और रोजगार से जोड़ने की पहल
जेलों में भीड़ की समस्या के बीच सरकार बंदियों के पुनर्वास और रिहाई के बाद उनके रोजगार की संभावनाएं बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठा रही है। इसी क्रम में 17 अगस्त को रायपुर स्थित जन शिक्षण संस्थान के साथ समझौता किया गया। इसके तहत बंदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर प्रमाणित करने की योजना है, ताकि जेल से बाहर आने के बाद वे रोजगार हासिल कर सकें और समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर पा सकें। इसके अलावा, बंदियों के पारिश्रमिक की दरों में बढ़ोतरी पर भी विचार किया जा रहा है। वहीं, 12 फरवरी को इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ हुए करार का उद्देश्य सजा पूरी कर बाहर निकलने वाले पात्र बंदियों को बैंक ऋण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में मदद करना है।
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया शपथपत्र, 2 दिसंबर को अगली सुनवाई
राज्य सरकार की ओर से पेश विस्तृत शपथपत्र को मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ ने रिकॉर्ड पर लिया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 दिसंबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।
कब होगी भीड़ कम
प्रदेश की जेलों में क्षमता से 7,955 अधिक बंदियों की मौजूदगी और 200 बंदियों की क्षमता वाली ओपन जेल का अब तक शुरू नहीं होना, दोनों ही स्थितियां जेल व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौती को उजागर करती हैं। व्यावसायिक प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता जैसी पहलें बंदियों के पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं, लेकिन इनके साथ जेलों में भीड़ कम करने, बुनियादी सुविधाएं बेहतर बनाने और लंबित परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की जरूरत भी बनी हुई है।
