अरपा-भैंसाझार बैराज घोटाला: ईपीसी का ठेका तोड़ा, अलग टेंडर निकाला और पहली ही बारिश में बह गए करोड़ों, अब रिटेनिंग वॉल में फिर वही खेल

अरपा-भैंसाझार बैराज घोटाला: ईपीसी का ठेका तोड़ा, अलग टेंडर निकाला और पहली ही बारिश में बह गए करोड़ों, अब रिटेनिंग वॉल में फिर वही खेल

बिलासपुर जिले में जल संसाधन विभाग की बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में शुमार अरपा-भैंसाझार बैराज प्रोजेक्ट फिर कटघरे में है। यह प्रोजेक्ट ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मोड पर जल संसाधन संभाग कोटा के तहत चल रहा है। इसका मकसद बैराज के साथ मुख्य नहर, माइनर, पुल-पुलिया का पूरा काम करके तीन विकासखंडों के 102 गांवों की करीब 25,000 हेक्टेयर जमीन को पानी देना था। शुरुआत में इसकी लागत 606 करोड़ रुपये थी। 25 नवंबर 2024 को राज्य सरकार ने इसे बढ़ाकर 1,141.90 करोड़ रुपये कर दिया। अब तक निर्माण एजेंसी को 317.59 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। मूल अनुबंध (क्रमांक डी.एल.07/13.09.2013) राधेश्याम अग्रवाल/सुनील अग्रवाल के नाम पर है, जिन्हें बैराज और उससे लगे सारे सुरक्षा काम निपटाने थे।

ठेके की शर्तों से खिलवाड़ और नया टेंडर

हमारे पास मौजूद सरकारी दस्तावेज गवाही दे रहे हैं कि अफसरों ने मूल शर्त को किनारे कर दिया। बैराज की सुरक्षा का काम — डाउन-स्ट्रीम बैंक/फ्लड प्रोटेक्शन — मूल ठेके से बाहर खींच लिया गया। इसके लिए पूरी तरह अलग अनुबंध (क्रमांक 10/डी.एल./2020-21) बनाकर नई निविदा बुलाई गई और काम दूसरी एजेंसी को थमा दिया गया। विभागीय सूत्रों की मानें तो यह कारनामा तत्कालीन कार्यपालन अभियंता आई.ए. सिद्दीकी ने तत्कालीन मुख्य अभियंता अजय सोमवार की मिलीभगत से किया। जबकि कायदे से यह काम उसी मूल ईपीसी ठेकेदार को करना था। प्रशासकीय मंजूरी के टुकड़े करके अलग से तकनीकी स्वीकृति लेते हुए करोड़ों की नई निविदा किस बिना पर बुलाई गई, यह बड़ा मुद्दा बन गया है।

पहली बारिश में खुल गई पोल

हसदेव कछार जल संसाधन विभाग बिलासपुर के मुख्य अभियंता जे.के. नेताम ने 22 अप्रैल 2026 को चेकिंग रिपोर्ट बनाई। इस रिपोर्ट में स्पष्ट दर्ज है कि नए ठेके के तहत बैराज के नीचे नदी के दोनों किनारों पर 500 मीटर लंबाई में जो बैंक प्रोटेक्शन बना था, वह जुलाई 2025 की बाढ़ में 112 मीटर लंबा और 15 मीटर चौड़ा हिस्सा पानी में बह गया। मुआयने में पता चला कि यह टूटा हुआ हिस्सा स्कावरिंग गेट के वाटर-वे (जल प्रवाह क्षेत्र) में बना था। पानी के तेज बहाव ने इसे उखाड़ फेंका। पीसीसी ब्लॉक के नीचे फिल्टर डाला ही नहीं गया था, जिससे मिट्टी बही और ब्लॉक धंस गए। रिपोर्ट में लिखा है कि मरम्मत कराने पर भी यह फिर टूटेगा—यानी पूरी की पूरी डिजाइन ही खोट वाली थी।

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इसी निरीक्षण रिपोर्ट में यह भी है कि मूल अनुबंध के तहत बना होइस्ट ब्रिज और गेट कई जगह से जंग खा रहे हैं। बायें किनारे पर स्टोन पिचिंग और बोल्डर टो का काम आज तक अधूरा पड़ा है। यह विभागीय निगरानी की सुस्ती की पोल खोलने के लिए काफी है।

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ठेकेदार ने खुद मानी डिजाइन की गलती

निर्माण एजेंसी मेसर्स द्वारका इंफ्रास्ट्रक्चर ने कोटा के कार्यपालन अभियंता को 19 जनवरी 2026 को पत्र लिखा। ठेकेदार ने खुद मान लिया है कि स्कावरिंग गेट के ढलान को ठीक गेट के सामने रखना, स्लूस के डाउन-स्ट्रीम स्लोप की गलत डिजाइन और पानी के तेज वेग से निपटने का इंतजाम न होना—ये सब तकनीकी खामियां हैं। इसके लिए ठेकेदार ने अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ लिया है। उसका कहना है कि पीसीसी ब्लॉक की जगह मजबूत प्रोटेक्शन वॉल बननी चाहिए थी। कुल मिलाकर, गलत डिजाइन पास की गई और नतीजा यह हुआ कि करोड़ों की सरकारी रकम पहली ही बरसात में खाक हो गई।

फिर वही पैंतरा: रिटेनिंग वॉल के नाम पर नई तैयारी

इस बड़े नुकसान के बाद भी किसी पर गाज नहीं गिरी। उल्टे तत्कालीन मुख्य अभियंता और अब प्रमुख अभियंता जितेंद्र नेताम ने मौका मुआयना करके फरमान सुना दिया कि टूटे हुए बैंक प्रोटेक्शन की जगह अब स्कावरिंग गेट के बाहर रिटेनिंग वॉल बनाई जाए। इसका नया एस्टिमेट तुरंत ऑफिस में पेश करने को कहा गया है। यह फ्लड प्रोटेक्शन या रिटेनिंग वॉल बैराज का ही हिस्सा है, जिसे मूल एजेंसी को करना था। इसे दोबारा अलग टेंडर निकालकर किसी और को सौंपने की पूरी पटकथा तैयार है। अगर ऐसा हुआ तो सरकारी खजाने की बर्बादी का दूसरा राउंड शुरू होगा और पुराने सबूत भी मिट्टी में मिल जाएंगे।

किसकी क्या जवाबदेही

कागजों और हालात के मुताबिक तीन स्तर पर अफसरों की भूमिका संदिग्ध है:

  •  तत्कालीन कार्यपालन अभियंता आई.ए. सिद्दीकी: आरोप है कि इन्होंने मूल ईपीसी मंजूरी तोड़कर बैराज सुरक्षा का काम दूसरे ठेकेदार को दिया।
  •  तत्कालीन मुख्य अभियंता अजय सोमवार: जिन्होंने सिद्दीकी का साथ देते हुए इस अलग काम को तकनीकी मंजूरी दी।
  •  वर्तमान प्रमुख अभियंता जितेंद्र नेताम: जो गलत डिजाइन पकड़ने के बाद भी किसी को जिम्मेदार ठहराए बिना, दोबारा नया एस्टिमेट बनवाकर अलग एजेंसी से काम कराने की फिराक में हैं।
  •   इनके अलावा वे सभी इंजीनियर भी घेरे में हैं जिन्होंने इस खोट वाली डिजाइन का प्रस्ताव रखा और उसे पास किया।
शिकायतकर्ता की मांग....
  •  आई.ए. सिद्दीकी को तुरंत सस्पेंड कर पूरे मामले की स्वतंत्र जांच हो।
  • गलत डिजाइन पास करने वाले अजय सोमवार समेत सभी अफसरों पर विभागीय कार्रवाई हो और डूबे हुए पैसों की वसूली की जाए
  • बैराज सुरक्षा का बचा हुआ कोई भी काम चाहे फ्लड प्रोटेक्शन हो या रिटेनिंग वॉल—बिना नया टेंडर निकाले मूल एजेंसी से ही कराया जाए 
  •  प्रमुख अभियंता जितेंद्र नेताम के रोल की भी निष्पक्ष जांच हो, ताकि पुरानी गड़बड़ियां न दोहराई जाएं।
  • जल संसाधन विभाग के सचिव स्तर पर पूरे मामले को परखा जाए ताकि पब्लिक के पैसे की लूट पर लगाम लगे।
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