एफआईआर दर्ज, फिर भी पदोन्नतियों की झड़ी: खात्मा रिपोर्ट के खेल में आरोपी अफसर बना मुख्य अभियंता, एसीबी के 19 सवाल भी फाइलों में दफ्न....

एफआईआर दर्ज, फिर भी पदोन्नतियों की झड़ी: खात्मा रिपोर्ट के खेल में आरोपी अफसर बना मुख्य अभियंता, एसीबी के 19 सवाल भी फाइलों में दफ्न....

जल संसाधन विभाग का 'एनीकट-काजवे' घोटाला: जांच रोकने वाले अफसर को ही सौंप दी गईं मूल फाइलें, सुप्रीम कोर्ट के नियम भी ताक पर ..

 बिलासपुर/कोटा। जल संसाधन विभाग में भ्रष्टाचार और अफसरों की मेहरबानी का एक ऐसा कॉकटेल सामने आया है, जो किसी भी जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जिस अधिकारी के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज थी, उसे सजा मिलने के बजाय एक के बाद एक पदोन्नतियां देकर मुख्य अभियंता का प्रभार सौंप दिया गया। मामला 2009 के 'चांटापारा-II एनीकट कम काजवे' निर्माण से जुड़ा है, जिसमें फाइलों से चालाकी से 'काजवे' शब्द गायब कर दिया गया और लाखों रुपये की हेराफेरी हुई। अब सवाल यह उठ रहा है कि जिस आरोपी अफसर ने खुद अपने खिलाफ चल रही एसीबी जांच की फाइलें दबाईं, उसे विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) ने क्लीन चिट कैसे दे दी?

मेहरबानी का खेल: दागी अफसर को लगातार प्रमोशन

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इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मजाक सिस्टम के साथ हुआ है। आरोपी अधिकारी आई.ए. सिद्दीकी (तत्कालीन सहायक अभियंता) के खिलाफ अपराध क्रमांक 15/2018 दर्ज था। जब तक केस चला, तब तक जांच प्रभावित की गई। 26 मई 2023 को जैसे ही एसीबी ने अदालत में बिना मूल दस्तावेजों के खात्मा (क्लोजर) रिपोर्ट पेश की, ठीक एक महीने बाद 28 जून 2023 को सिद्दीकी को कार्यपालन अभियंता (EE) बना दिया गया।

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खेल यहीं नहीं रुका। कोर्ट से खात्मा स्वीकार होने के बाद 25 फरवरी 2026 को वे अधीक्षण अभियंता (SE) बन गए और वर्तमान में शासन की विशेष कृपा से मुख्य अभियंता के प्रभार पर काबिज हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इसी मामले में शामिल दो अन्य अधिकारियों की वेतनवृद्धि रोक दी गई, लेकिन गंभीर आरोपों में घिरे मामला के मुख्य मास्टर को इनाम स्वरूप प्रमोशन की सीढ़ियां चढ़ा दी गईं। क्या यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) का खुला उल्लंघन नहीं है?

 

नियमों की उड़ी धज्जियां: कहां गया सीलबंद लिफाफा?

शिकायतकर्ता ने पूछा है कि डीपीसी की बैठक में क्या श्री सिद्दीकी के खिलाफ लंबित अपराध और शिकायतों की जानकारी छिपाई गई थी? सुप्रीम कोर्ट ने 'के.वी. जानकीरमन प्रकरण (1991)' में स्पष्ट निर्देश दिया है कि आपराधिक या विभागीय जांच लंबित होने पर अधिकारी का प्रमोशन 'सीलबंद लिफाफा प्रक्रिया' के तहत रखा जाना चाहिए। फिर सतर्कता निकासी (Vigilance Clearance) किस आधार पर बांट दी गई?

खात्मा रिपोर्ट में नया खुलासा: एसीबी के सवालों पर विभाग की चुप्पी

इस घोटाले पर पर्दा डालने की स्क्रिप्ट भी पूरी फिल्मो जैसी है। एसीबी ने 25 जनवरी 2019 को जल संसाधन विभाग से 19 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर दस्तावेज मांगे थे। प्रशासकीय स्वीकृति, निविदा, टेस्ट रिपोर्ट से लेकर अंतिम बिल तक की जानकारी मांगी गई। 6 बार रिमाइंडर भेजे गए। पत्र में साफ लिखा था- "अपराध गंभीर है।" लेकिन विभाग ने चुप्पी साध ली। हद तो तब हो गई जब एसीबी ने सीआरपीसी की धारा 91 (दस्तावेज जब्त करने का कानूनी अधिकार) का इस्तेमाल किए बिना ही केस बंद कर दिया।

4 अक्टूबर 2024 को कोर्ट में विवेचक और रिटायर्ड एसपी एस.पी. करोसिया ने माना था कि विभाग ने अग्रिम जांच के लिए जरूरी कोई जानकारी नहीं दी।

आरोपी के ही हाथ में सौंप दी चाबी

आखिर दस्तावेज क्यों नहीं मिले? इसका जवाब और भी चौंकाने वाला है। 30 सितंबर 2022 को आरोपी सिद्दीकी ने खुद कोटा संभाग के कार्यपालन अभियंता का पद संभाल लिया। यानी, जिस मामले में वे खुद आरोपी थे, उससे जुड़े सभी मूल अभिलेख उन्हीं के नियंत्रण में आ गए। इसके ठीक 8 महीने बाद एसीबी ने बिना जांच पूरी किए फाइल बंद कर दी। क्या यह महज़ एक इत्तेफाक था?

फाइलों से ऐसे गायब किया गया 'काजवे'

यह पूरा घोटाला 17 सितंबर 2009 को शुरू हुआ था। योजना थी- "चांटापारा-II एनीकट कम काजवे"। जनता के पैसे से ऐसी संरचना बननी थी जो पानी भी रोके और ग्रामीण उस पर से आ-जा सकें। लेकिन तकनीकी स्वीकृति के वक्त फाइलों में जादू हुआ और 'काजवे' शब्द गायब कर दिया गया। मौके पर सिर्फ एक साधारण एनीकट तान दिया गया। काजवे का पैसा कहां गया, यह आज भी बड़ा रहस्य है।

तारीखों में दर्ज मेहरबानी का खेल 

  •  25 जनवरी 2019: एसीबी ने 19 बिंदुओं पर जानकारी मांगी, 6 रिमाइंडर भेजे।
  •   30 सितंबर 2022: आरोपी सिद्दीकी कोटा के ईई बने, सारी जांच फाइलें उनके हाथ में।
  •  26 मई 2023: मूल दस्तावेजों के बिना एसीबी ने कोर्ट में पेश की खात्मा रिपोर्ट।
  •  28 जून 2023: खात्मा पेश होने के महज 1 महीने बाद सिद्दीकी का ईई पद पर प्रमोशन।
  •   25 फरवरी 2026: खात्मा स्वीकार होने के बाद अधीक्षण अभियंता बने, अब मुख्य अभियंता का प्रभार।

 क्या कहते हैं सरकारी दस्तावेज़? 

  •  प्रशासकीय स्वीकृति: "चांटापारा-II एनीकट कम काजवे" (काजवे स्पष्ट रूप से शामिल था)
  •  मौके पर निर्माण: सिर्फ एनीकट (काजवे नदारद)
  •   एफआईआर की धाराएं: 120-बी, 467, 468, 471, 472 भादवि और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम। (लेकिन क्लोजर रिपोर्ट में कूटरचना की धाराओं पर कोई निष्कर्ष नहीं)।

 निलंबन और जांच की मांग

मामले के परिवादी लक्ष्मीकांत निर्णेजक ने अपने बयानों और शिकायतों में कहा है कि पूरा सिस्टम एक आरोपी को बचाने में लगा  है। श्री निर्णेजक ने शासन से मांग की है कि दागी अफसर की दोनों पदोन्नतियां और मुख्य अभियंता का प्रभार तत्काल निरस्त कर उन्हें निलंबित किया जाए। साथ ही, जांच को प्रभावित करने के लिए महत्वपूर्ण फाइलें दबाए रखने वाले अधिकारियों पर अलग से विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए। 

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