कौशल विकास पर सरकार के फोकस के बावजूद चिंताजनक हालात, 88% कामगारों के पास नहीं सही योग्यता
रायपुर। शैक्षणिक योग्यता के साथ कौशल विकास पर पिछले करीब एक दशक से सरकार के लगातार ध्यान देने के बावजूद धरातल पर स्थिति अभी भी निराशाजनक बनी हुई है। इंस्टीट्यूट फॉर कंपटीटिवनेस द्वारा जारी 'स्किल्स फॉर द फ्यूचर' रिपोर्ट ने आंकड़ों सहित दावा किया है कि वर्तमान में देश में 88 प्रतिशत कामगार कम योग्यता स्तर का रोजगार कर रहे हैं, जो बढ़ती बेरोजगारी के साथ एक बड़ी चुनौती बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि शैक्षिक कुशलता की बात करें तो बिहार की स्थिति सबसे खराब है, जबकि चंडीगढ़ तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति में है। वहीं, छत्तीसगढ़ का हाल भी चिंताजनक है, जहां 92 प्रतिशत कामगारों को निम्न कौशल वाला बताया गया है। इसका मतलब है कि प्रदेश में काम करने वाले लोगों में 92 प्रतिशत ऐसे हैं, जिनके पास उस काम का सही कौशल नहीं है जो वे कर रहे हैं। केवल 2.46 प्रतिशत लोग ही व्यावसायिक कार्यों के लिए प्रशिक्षित हैं। यह स्थिति सीधे तौर पर कार्य कुशलता और काम की गुणवत्ता पर असर डाल रही है।
हाल ही में केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने इस रिपोर्ट को जारी किया था। इंस्टीट्यूट फॉर कंपटीटिवनेस ने आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) का विश्लेषण करते हुए भारतीय कार्यबल की संरचना की एक विस्तृत तस्वीर प्रस्तुत की है। डेटा विश्लेषण पर आधारित इस रिपोर्ट में पाया गया है कि 2023 24 में लगभग 88 प्रतिशत कार्यबल कम योग्यता वाले व्यवसायों में कार्यरत है, जबकि केवल 10 12 प्रतिशत कामगार ही उच्च योग्यता वाली भूमिकाओं में लगे हुए हैं।
यह स्थिति देश और प्रदेश में लगातार बढ़ रही बेरोजगारी की समस्या को और गंभीर बनाती है। युवा उच्च शिक्षा प्राप्त कर अलग अलग डिग्रियां तो हासिल कर रहे हैं, लेकिन उनके पास किसी प्रकार का आवश्यक कौशल नहीं होने के कारण उन्हें रोजगार नहीं मिल पा रहा है। योग्यता के अभाव में निजी क्षेत्रों में युवाओं को काम मिलने में भारी कठिनाई हो रही है।
दूसरी तरफ, निजी क्षेत्रों और उद्योगों का कहना है कि उनके पास रोजगार के लिए आने वाले युवा अपने काम के लिए फिट नहीं हैं, यानी उनमें अपेक्षित कौशल की कमी है। ऐसे में युवाओं को डिग्री तो मिल रही है, लेकिन योग्यता की कमी से उन्हें नौकरी नहीं मिल पा रही है। यह पूरे देश के लिए एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
