ट्रेनों के पेंट्रीकार में गड़बड़ियों का खुलासा, रेलवे की छापेमारी से मचा हड़कंप
बिलासपुर : रेल यात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के रेलवे के दावों के बीच पेंट्रीकार की हकीकत एक बार फिर सामने आ गई है। बिलासपुर जोनल मुख्यालय रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों में रेलवे की विशेष जांच टीम ने अचानक छापा मार कर खान-पान व्यवस्था की पोल खोल दी। पांच ट्रेनों की पैंट्रीकारों में जांच के दौरान कुल 27 अनियमितताएं सामने आई। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करते हुए रेलवे ने 22 हजार 5 सौ 5 रुपये का जुर्माना वसूला हैं। औचक निरीक्षण की खबर से पेंट्रीकार संचालकों और कर्मचारियों में खलबली मच गई। जांच टीम ने खान-पान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की और अनियमितताएं मिलने पर संबंधित मामलों में तत्काल कार्रवाई की। रेलवे की इस कार्रवाई ने ट्रेनों में यात्रियों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और पेंट्रीकार में नियमों के पालन की पोल खोल कर रख दी हैं।
किसी ट्रेन में सात, तो किसी में आठ गड़बड़ियां
रेलवे की जांच में हावड़ा-मुंबई सीएसएमटी मेल की पेंट्रीकार में सबसे अधिक आठ मामले सामने आए। इस ट्रेन से संबंधित मामलों में 4, हजार 6 सौ रुपये का जुर्माना वसूला गया। वहीं कोरबा-यशवंतपुर वैनगंगा एक्सप्रेस में सात अनियमितताएं मिलने पर 6, हजार 9 सौ रुपये का अर्थदंड लगाया गया हैं। गया-एलटीटी सुपरफास्ट एक्सप्रेस में छह मामलों में 3, हजार 3 सौ रुपये, शालीमार-एलटीटी ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस में दो मामलों में 2 हजार 6 सौ 80 रुपये और संतरागाछी-जबलपुर हमसफर एक्सप्रेस में चार मामलों में 5 हजार 25 रुपये की कार्रवाई की गई। इन आंकड़ों से साफ है कि अलग-अलग ट्रेनों की पैंट्रीकारों में नियमों के अनुपालन को लेकर रेलवे को सख्ती बरतनी पड़ रही है।
एक सप्ताह पूर्व भी चलाया गया था अभियान
पेंट्रीकार पर रेलवे की यह कार्रवाई कोई पहली घटना नहीं है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अनुराग सिंह के मार्गदर्शन में करीब एक सप्ताह पहले भी इसी तरह का विशेष जांच अभियान चलाया गया था। उस दौरान राजधानी एक्सप्रेस, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, आजाद हिंद एक्सप्रेस और ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस की पेंट्रीकार में अनियमितताएं पकड़ी गई थीं। जांच के दौरान कई कर्मचारी वैध मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र, पुलिस सत्यापन और पहचान पत्र के बिना काम करते पाए गए थे। इन मामलों में रेलवे ने 35 प्रकरण दर्ज कर कुल 24 हजार 8 सौ 55 रुपये का जुर्माना वसूला था।
यात्रियों की सेहत से खिलवाड़
लगातार सामने आ रही अनियमितताओं ने रेल यात्रियों के खान-पान की व्यवस्था से सेहत के साथ खिलवाड़ होता नज़र आ रहा हैं। ट्रेन में सफर करने वाले यात्री अक्सर पैंट्रीकार से मिलने वाले भोजन पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में भोजन की स्वच्छता, गुणवत्ता और कर्मचारियों की निर्धारित पात्रता से जुड़े नियमों का पालन बेहद जरूरी है। रेलवे की लगातार कार्रवाई से कैटरिंग संचालकों पर दबाव बढ़ा है। हालांकि, यात्रियों को वास्तव में साफ-सुथरा और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल रहा है या नहीं, इसका भरोसा तभी मजबूत होगा, जब जांच अभियान नियमित रूप से जारी रहें और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई हो। रेलवे की सख्ती से जुर्माने और छापेमारी के बाद ट्रेनों की पेंट्रीकार की व्यवस्था में कितना सुधार आता है और यात्रियों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के दावे धरातल पर कितने कारगर साबित होते हैं, यह आगे जा कर ही पता लगेगा।
