Chhattisgarh News: जिंदा महिला को सरकारी रिकॉर्ड में दिखाया मृत, राशन भी बंद! पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने खाद्य मंत्री से मांगा जवाब
कवर्धा। छत्तीसगढ़ में राशन कार्डों के निरस्तीकरण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और पूर्व खाद्य मंत्री मोहम्मद अकबर ने रायपुर के सुभाष नगर निवासी साकरा बानो का मामला उठाते हुए आरोप लगाया है कि एक जीवित महिला को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज कर दिया गया, जिसके बाद उनका अंत्योदय राशन कार्ड निरस्त हो गया। अकबर ने खाद्य मंत्री से महिला का राशन कार्ड तत्काल बहाल करने, मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की है।
सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज करने का आरोप
मोहम्मद अकबर के मुताबिक, साकरा बानो जीवित हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्ज किए जाने के कारण उनका अंत्योदय राशन कार्ड निरस्त कर दिया गया। उन्होंने इस मामले में दस्तावेजों और वीडियो साक्ष्यों का हवाला देते हुए विभागीय सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। पूर्व मंत्री का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में इस तरह की कथित गलती से जरूरतमंद परिवार खाद्यान्न के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने मांग की कि संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर त्रुटि को तत्काल सुधारा जाए और महिला को मिलने वाला राशन फिर से शुरू कराया जाए। हालांकि, मामले में संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने आना अभी बाकी है।
दो साल में 1.17 लाख से ज्यादा राशन कार्ड निरस्त होने का दावा
मोहम्मद अकबर ने राशन कार्ड निरस्तीकरण के आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, लोकसभा में 22 जुलाई 2026 को दिए गए जवाब में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 2024 के दौरान 57,371 और वर्ष 2025 में 60,496 राशन कार्ड निरस्त किए गए।
इन आंकड़ों के मुताबिक, दोनों वर्षों में कुल 1,17,867 राशन कार्ड निरस्त हुए। अकबर ने सवाल किया कि इन कार्डों को निरस्त करने के लिए क्या मानदंड अपनाए गए और क्या प्रत्येक मामले में उचित सत्यापन किया गया था। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि प्रभावित परिवारों को कार्ड निरस्त होने की सूचना दी गई या नहीं और उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिला या नहीं।
प्रदेश में 83.33 लाख राशन कार्ड और 2.74 करोड़ सदस्य
पूर्व मंत्री ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में 83.33 लाख राशन कार्ड प्रचलन में हैं और इनमें करीब 2.74 करोड़ सदस्य पंजीकृत हैं। उन्होंने वर्ष 2025 की अनुमानित 3.08 करोड़ आबादी के आधार पर राज्य में पीडीएस कवरेज लगभग 89 प्रतिशत बताया। अकबर के मुताबिक, पात्र लोगों तक खाद्य सुरक्षा का लाभ पहुंचाने के लिए अभी और प्रयास करने की जरूरत है। इन आंकड़ों के आधार पर उन्होंने सरकार से राशन कार्ड बनाने, सत्यापन करने और निरस्त करने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की है। साथ ही, पात्र परिवारों को तकनीकी या रिकॉर्ड संबंधी त्रुटियों के कारण खाद्यान्न से वंचित होने से बचाने पर जोर दिया है।
खाद्य मंत्री से राशन कार्ड बहाल करने की मांग
साकरा बानो के मामले में मोहम्मद अकबर ने खाद्य मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनकी प्रमुख मांगें हैं कि महिला का अंत्योदय राशन कार्ड बहाल किया जाए, रिकॉर्ड में दर्ज मृत्यु संबंधी जानकारी की जांच हो और गलती के लिए जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने प्रदेश में निरस्त किए गए राशन कार्डों की समीक्षा कराने की मांग भी की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं गलत जानकारी या सत्यापन में चूक के कारण पात्र परिवारों के कार्ड तो निरस्त नहीं हुए।
राशन कार्ड सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल
यह मामला राशन कार्डों के सत्यापन और निरस्तीकरण की प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। यदि किसी पात्र व्यक्ति को रिकॉर्ड की गलती के कारण सरकारी खाद्यान्न योजना से बाहर कर दिया गया है, तो ऐसी त्रुटि को जल्द सुधारना और शिकायत के निवारण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है। फिलहाल, साकरा बानो के मामले में संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया और सरकारी रिकॉर्ड की स्वतंत्र पुष्टि सामने आने का इंतजार है। जांच से ही स्पष्ट होगा कि राशन कार्ड निरस्त करने में गलती हुई या नहीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
