Bastar Flood News: बाढ़ में उजड़े घर, मुआवजे से भी कटी लोन की किस्त! तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर परिवार
जगदलपुर। बाढ़ का पानी उतर गया, लेकिन बस्तर के कुछ परिवारों की मुश्किलें अब भी कम नहीं हुई हैं। बारिश और बाढ़ में मकान ढहने के बाद घर दोबारा खड़ा करने की उम्मीद में मिली राहत राशि को लेकर अब नया विवाद सामने आया है। ग्राम पंचायत गुमडेल के आश्रित गांव कुरुषपाल, कौरपाल और कानापाल की महिलाओं का आरोप है कि सरकार से मिली 1 लाख 30 हजार रुपये की मुआवजा राशि में से भारतीय स्टेट बैंक की बड़ांजी शाखा ने कर्ज की किस्त काट ली। महिलाओं का कहना है कि जिस रकम से उन्हें घर बनाने और परिवार को संभालने की उम्मीद थी, उसमें कटौती के बाद उनकी परेशानी और बढ़ गई है। पीड़ित महिलाओं ने कलेक्टर से शिकायत कर राशि वापस दिलाने की मांग की है।
बाढ़ में मकान ढहे, राहत राशि में कटौती का आरोप
पीड़ित महिलाओं के मुताबिक, मूसलाधार बारिश और बाढ़ के कारण उनके मकान ढह गए थे। इसके बाद प्रभावित परिवारों को मकान के पुनर्निर्माण और नुकसान से उबरने के लिए 1.30 लाख रुपये की सहायता राशि मिली। महिलाओं का आरोप है कि रकम बैंक खातों में पहुंचने के बाद उसमें से कर्ज की किस्त काट ली गई। उनका कहना है कि कटौती से पहले उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई थी। ऐसे में घर दोबारा बनाने और जरूरी घरेलू खर्च पूरे करने के लिए उपलब्ध रकम कम हो गई। अब महिलाओं की मांग है कि मामले की जांच की जाए और यदि कटौती नियमों के विपरीत हुई है, तो संबंधित राशि उन्हें वापस दिलाई जाए।
महिला समूह से लिया था कर्ज, बाढ़ ने बिगाड़ा पूरा हिसाब
महिलाओं ने बताया कि उन्होंने आजीविका चलाने के लिए महिला समूह के माध्यम से कर्ज लिया था। इस रकम से वे मछली पालन और बकरी पालन जैसे काम करती थीं, ताकि परिवार का भरण-पोषण हो सके। लेकिन बाढ़ में मकान और घरेलू सामान को नुकसान पहुंचने के बाद उनके सामने आजीविका के साथ रहने की जगह जुटाने की चुनौती भी खड़ी हो गई। ऐसे समय में मुआवजे की रकम उनके लिए बेहद अहम थी। महिलाओं का कहना है कि राहत राशि में कथित कटौती के कारण घर की मरम्मत या पुनर्निर्माण और बच्चों की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। हालांकि, बैंक की ओर से कटौती के कारण और संबंधित ऋण की शर्तों पर आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
स्कूल खाली किया, अब तिरपाल के नीचे गुजर रहे दिन
बाढ़ से प्रभावित परिवारों को शुरुआत में नजदीकी स्कूल में अस्थायी आश्रय दिया गया था। लेकिन परीक्षाओं के कारण स्कूल खाली करना पड़ा। इसके बाद बेघर परिवारों को बच्चों के साथ प्लास्टिक के तिरपाल के नीचे रहने की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ बाढ़ से तबाह हुआ आशियाना, दूसरी तरफ आर्थिक तंगी और परिवार की जरूरतें, इन परिस्थितियों ने महिलाओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब उनके सामने सुरक्षित छत का इंतजाम करने के साथ बच्चों की देखभाल और रोजमर्रा का खर्च चलाने की चुनौती है।
कलेक्टर से लगाई गुहार, काटी गई रकम लौटाने की मांग
अपनी समस्याओं को लेकर पीड़ित महिलाओं ने जिला कलेक्टर को आवेदन सौंपा है। उन्होंने मुआवजा राशि से काटी गई रकम वापस दिलाने और मामले की जांच कराने की मांग की है। महिलाओं का कहना है कि आपदा के बाद मिली सहायता राशि उनके लिए घर दोबारा बनाने और परिवार को संकट से बाहर निकालने का सहारा है। ऐसे में कटौती के मामले में स्पष्टता और समय पर कार्रवाई जरूरी है। फिलहाल, महिलाओं की शिकायत पर प्रशासन की आगे की कार्रवाई और बैंक का पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि शिकायत की जांच के बाद राहत राशि से जुड़ी इस समस्या का क्या समाधान निकलता है।
