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                <description>RSS Feed of National Jagat Vision</description>
                
                            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ के जजों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़कर 62 वर्ष हुई: सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पर राज्य शासन का फैसला, राजपत्र में अधिसूचना जारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर. छत्तीसगढ़ के जिला न्यायपालिका में सेवाएं दे रहे न्यायिक अधिकारियों की अधिवार्षिकी (सेवानिवृत्ति) आयु सीमा में दो साल की वृद्धि कर दी गई है। अब प्रदेश के न्यायिक अधिकारी 60 वर्ष के बजाय 62 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त होंगे। नवा रायपुर अटल नगर स्थित विधि और विधायी कार्य विभाग के कार्यालय से इस बाबत विधिवत आदेश जारी कर दिया गया है। शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 को जारी असाधारण राजपत्र (क्रमांक 520) में इसे प्राधिकार से प्रकाशित कर दिया गया है।</p>
<p>यह निर्णय माननीय सर्वोच्च न्यायालय के उन अंतरिम आदेशों के पूर्ण अनुपालन में लिया गया है, जो 'ऑल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/law/retirement-age-of-chhattisgarh-judges-increased-from-60-to-62/article-12498"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/image_search_1789477930717.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर. छत्तीसगढ़ के जिला न्यायपालिका में सेवाएं दे रहे न्यायिक अधिकारियों की अधिवार्षिकी (सेवानिवृत्ति) आयु सीमा में दो साल की वृद्धि कर दी गई है। अब प्रदेश के न्यायिक अधिकारी 60 वर्ष के बजाय 62 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त होंगे। नवा रायपुर अटल नगर स्थित विधि और विधायी कार्य विभाग के कार्यालय से इस बाबत विधिवत आदेश जारी कर दिया गया है। शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 को जारी असाधारण राजपत्र (क्रमांक 520) में इसे प्राधिकार से प्रकाशित कर दिया गया है।</p>
<p>यह निर्णय माननीय सर्वोच्च न्यायालय के उन अंतरिम आदेशों के पूर्ण अनुपालन में लिया गया है, जो 'ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन व अन्य बनाम भारत संघ व अन्य' प्रकरण में दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट में दायर रिट याचिका (सिविल) क्रमांक 1022/1989 के तहत शीर्ष अदालत ने 22 जुलाई 2026 तथा 5 अगस्त 2026 को विस्तृत आदेश पारित किए थे। इन आदेशों में निर्देशित किया गया था कि न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने के विषय पर राज्य सरकार तथा संबंधित उच्च न्यायालय को संयुक्त रूप से निर्णय लेना है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट के इन्हीं निर्देशों को दृष्टिगत रखते हुए, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (बिलासपुर) ने अपनी प्रशासनिक कार्यवाही पूर्ण की। बिलासपुर हाई कोर्ट ने अपने ज्ञापन (क्रमांक 517/ II-2-24/ 2023 (Part-III)/ Confdl./ 2026) दिनांक 12 अगस्त 2026 के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने का अपना निर्णय राज्य शासन को प्रेषित किया था।</p>
<p>हाई कोर्ट से ज्ञापन प्राप्त होने के उपरांत, राज्य शासन के विधि विभाग ने इस विषय पर अपनी अंतिम स्वीकृति प्रदान कर दी। विधि और विधायी कार्य विभाग, मंत्रालय (महानदी भवन) के प्रमुख सचिव मनीष कुमार ठाकुर के हस्ताक्षर से छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार यह अधिसूचना निर्गत की गई है।</p>
<p>सर्वोच्च न्यायालय की लंबी सुनवाई वाले इस प्रकरण में पारित निर्देशों और उच्च न्यायालय बिलासपुर के परिपालन के आधार पर, राज्य सरकार ने अधिवार्षिकी आयु बढ़ाने का यह आदेश अंतिम रूप से लागू कर दिया है। शासकीय मुद्रणालय, रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित इस राजपत्रित अधिसूचना के साथ ही आयु सीमा में वृद्धि का यह नियम प्रभावशील हो गया है। जिला न्यायालयों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों को अब अपनी सेवाएं देने के लिए दो वर्ष की अतिरिक्त अवधि प्राप्त हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कानून</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/law/retirement-age-of-chhattisgarh-judges-increased-from-60-to-62/article-12498</link>
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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 18:42:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Raipur No Flex Zone: कागजों में प्रतिबंध, सड़कों पर बैनर का कब्जा! नियमों की धज्जियां उड़ने पर निगम की कार्रवाई पर बड़े सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर। </strong>राजधानी रायपुर को साफ-सुथरा और व्यवस्थित शहर बनाने के लिए नगर निगम की ओर से समय-समय पर पोस्टर, फ्लैक्स और होर्डिंग को लेकर नियम बनाए जाते हैं। शहर के प्रमुख मार्गों को ‘नो फ्लैक्स जोन’ घोषित किया गया है और बिना अनुमति या निर्धारित मापदंडों के प्रचार सामग्री लगाने पर कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान भी है। लेकिन जमीनी तस्वीर इन नियमों से अलग नजर आ रही है।</p>
<p>शहर के कई प्रमुख मार्गों पर बिजली के खंभों, सरकारी परिसरों, सड़क किनारे की संरचनाओं और व्यावसायिक इमारतों पर बड़े-बड़े फ्लैक्स और बैनर लटके दिखाई दे रहे हैं। इनमें राजनीतिक नेताओं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/raipur-no-flex-zone-ban-on-papers-occupation-of-banners/article-12493"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/image-2026-09-15t150709.781.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर। </strong>राजधानी रायपुर को साफ-सुथरा और व्यवस्थित शहर बनाने के लिए नगर निगम की ओर से समय-समय पर पोस्टर, फ्लैक्स और होर्डिंग को लेकर नियम बनाए जाते हैं। शहर के प्रमुख मार्गों को ‘नो फ्लैक्स जोन’ घोषित किया गया है और बिना अनुमति या निर्धारित मापदंडों के प्रचार सामग्री लगाने पर कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान भी है। लेकिन जमीनी तस्वीर इन नियमों से अलग नजर आ रही है।</p>
<p>शहर के कई प्रमुख मार्गों पर बिजली के खंभों, सरकारी परिसरों, सड़क किनारे की संरचनाओं और व्यावसायिक इमारतों पर बड़े-बड़े फ्लैक्स और बैनर लटके दिखाई दे रहे हैं। इनमें राजनीतिक नेताओं के जन्मदिन और बधाई संदेश, धार्मिक-सामाजिक कार्यक्रमों के प्रचार, व्यावसायिक विज्ञापन और विभिन्न आयोजनों से जुड़े पोस्टर शामिल हैं। सवाल यह है कि जब कुछ मार्गों पर फ्लैक्स लगाने पर स्पष्ट प्रतिबंध है, तो वहां लगातार नए बैनर कैसे लग रहे हैं और उन्हें हटाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?<img src="https://lalluram.com/wp-content/uploads/2026/09/image-2026-09-15T145234.776-1024x580.jpg" alt="image-2026-09-15T145234.776-1024x580.jpg"/></p>
<p><strong>छह प्रमुख मार्ग घोषित हैं ‘नो फ्लैक्स जोन’</strong><br />नगर निगम की आउटडोर एडवरटाइजमेंट पॉलिसी के तहत शहर में सार्वजनिक स्थानों पर विज्ञापन और प्रचार सामग्री लगाने के लिए नियम निर्धारित किए गए हैं। बिना अनुमति, शुल्क या निर्धारित मापदंडों के विपरीत पोस्टर-बैनर लगाने पर कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान है। नगर निगम के 10 जोनों में पोस्टर और बैनर लगाने के लिए निर्धारित स्थान भी चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा शहर के कई प्रमुख मार्गों को नो फ्लैक्स जोन के तौर पर चिन्हित किया गया है।</p>
<p>इनमें महिला थाना से बूढ़ेश्वर मंदिर, तेलीबांधा थाना चौक से टाटीबंध, कोतवाली से जयस्तंभ चौक, सिविल लाइन और पचपेड़ी नाका से लालपुर ओवरब्रिज जैसे प्रमुख मार्ग शामिल बताए गए हैं। हालांकि कुछ स्थानों पर सरकारी कार्यक्रमों से संबंधित फ्लैक्स को नियमों के तहत छूट दिए जाने की बात भी सामने आती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रतिबंधित मार्गों पर निजी, राजनीतिक और व्यावसायिक प्रचार सामग्री किस अनुमति के आधार पर लग रही है?<img src="https://lalluram.com/wp-content/uploads/2026/09/image-2026-09-15T145159.908-1024x576.jpg" alt="image-2026-09-15T145159.908-1024x576.jpg"/></p>
<p><strong>नो फ्लैक्स रूट पर ही नजर आए बैनर</strong><br />जमीनी स्थिति का जायजा लेने पर कई जगह ऐसे पोस्टर और फ्लैक्स नजर आते हैं, जो निगम की नो फ्लैक्स व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं। महिला थाना से बूढ़ेश्वर मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर बिजली के खंभों में कवि सम्मेलन से संबंधित फ्लैक्स और ज्वेलर्स के व्यावसायिक विज्ञापन दिखाई देते हैं। इसी तरह भगत सिंह चौक से टाटीबंध की ओर जाने वाले मार्ग पर नुआखाई, भागवत कथा, इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर और फिल्मों के प्रचार से जुड़े पोस्टर-बैनर लगे दिखाई देने की बात सामने आई है। यदि ये प्रचार सामग्री बिना अनुमति लगाई गई है तो सवाल यह है कि इन्हें लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि इनके लिए अनुमति ली गई है, तो क्या यह अनुमति नो फ्लैक्स जोन के नियमों के अनुरूप है?</p>
<p><strong>सड़क के बीच सरकारी फ्लैक्स, विजिबिलिटी को लेकर सवाल</strong><br />रायपुर में कुछ जगहों पर सरकारी कार्यक्रमों और विभागीय प्रचार से जुड़े फ्लैक्स भी सड़क के आसपास और बीच के हिस्सों में दिखाई दे रहे हैं। आकाशवाणी चौक से खजाना चौक के बीच संस्कृति विभाग से संबंधित फ्लैक्स लगाए जाने की बात सामने आई है। ऐसे स्थानों पर लगाए गए बड़े फ्लैक्स वाहन चालकों की नजर और सड़क की विजिबिलिटी को प्रभावित कर सकते हैं। खासकर व्यस्त चौराहों और मोड़ वाले हिस्सों में यदि प्रचार सामग्री चालक की दृष्टि के सामने आती है तो सड़क सुरक्षा का सवाल भी जुड़ जाता है।<img src="https://lalluram.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-15-at-14.19.03-768x1024.jpeg" alt="WhatsApp-Image-2026-09-15-at-14.19.03-768x1024.jpeg"/></p>
<p>सरकारी फ्लैक्स को नियमों के तहत छूट है या नहीं, यह संबंधित अनुमति और स्थान के आधार पर तय होगा। लेकिन सड़क के ऐसे हिस्सों में प्रचार सामग्री लगाने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उससे यातायात व्यवस्था या वाहन चालकों की सुरक्षा प्रभावित न हो।</p>
<p><strong>खंभों पर झूलते फ्लैक्स, हादसे का खतरा</strong><br />मेकाहारा अस्पताल से भाजपा कार्यालय की ओर जाने वाले मार्ग पर भी नेताओं के जन्मदिन और बधाई संदेश वाले फ्लैक्स खंभों और सड़क किनारे लगे दिखाई देने की बात सामने आई है। इनमें कुछ फ्लैक्स एक तरफ झुके हुए हैं और कुछ ढीले तरीके से लटके नजर आते हैं। बारिश और तेज हवा के मौसम में ऐसे फ्लैक्स और बैनर के फटने या गिरने का खतरा बढ़ सकता है। यदि कोई बड़ा फ्लैक्स सड़क पर गिरता है तो इससे यातायात बाधित होने के साथ-साथ दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। यही वजह है कि फ्लैक्स का मुद्दा केवल शहर की खूबसूरती या अवैध विज्ञापन तक सीमित नहीं है। यह सीधे तौर पर सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों के सुरक्षित इस्तेमाल से जुड़ा विषय भी बन जाता है।<img src="https://lalluram.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-15-at-14.17.28-1024x768.jpeg" alt="WhatsApp-Image-2026-09-15-at-14.17.28-1024x768.jpeg"/></p>
<p><strong>MG Road पर भी बैनरों की भरमार</strong><br />शहर के प्रमुख व्यावसायिक इलाकों में शामिल MG Road पर भी विभिन्न कार्यक्रमों, गणेश चतुर्थी और राजनीतिक बधाई संदेशों से जुड़े पोस्टर और फ्लैक्स दिखाई देने की बात सामने आई है। एक व्यावसायिक इमारत पर करीब 10×20 फीट का बड़ा बधाई बैनर लगाए जाने का उल्लेख भी सामने आया है। इतने बड़े आकार के बैनर को यदि उचित तरीके से सुरक्षित नहीं किया गया हो तो तेज हवा या बारिश में इसके क्षतिग्रस्त होकर सड़क पर गिरने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में सवाल उठता है कि बड़े आकार के बैनर लगाने की अनुमति किन शर्तों पर दी जाती है? क्या इनकी नियमित जांच होती है? और यदि कोई बैनर निर्धारित नियमों के खिलाफ है तो उसे हटाने की कार्रवाई कितनी जल्दी की जाती है?</p>
<p><strong>'नो फ्लैक्स जोन' के बावजूद निगरानी पर सवाल</strong><br />नगर निगम द्वारा किसी मार्ग को नो फ्लैक्स जोन घोषित करना अपने आप में तभी प्रभावी माना जा सकता है, जब उस नियम का जमीन पर भी पालन हो। अगर प्रतिबंधित मार्गों पर लगातार नए फ्लैक्स दिखाई दे रहे हैं तो इससे निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या निगम की टीम इन प्रमुख मार्गों का नियमित निरीक्षण करती है? क्या किसी कर्मचारी या अधिकारी की जिम्मेदारी तय है? यदि है तो प्रतिबंधित सामग्री हटाने में देरी क्यों होती है? सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि निगम की ओर से अब तक कितने फ्लैक्स हटाए गए, कितने लोगों पर जुर्माना लगाया गया और कितने मामलों में संबंधित एजेंसी या विज्ञापनदाता के खिलाफ कार्रवाई हुई, इसका सार्वजनिक आंकड़ा क्या है?</p>
<p><strong>नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कार्रवाई पर उठाए सवाल</strong><br />नगर निगम की कार्रवाई को लेकर नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि निगम की कार्रवाई में समानता नहीं दिखाई देती।उनका कहना है कि छोटे दुकानदारों या व्यापारियों द्वारा दुकान के सामने पोस्टर लगाने पर कार्रवाई कर दी जाती है, लेकिन शहर के प्रमुख और प्रतिबंधित मार्गों पर बड़ी संख्या में लगे फ्लैक्स-बैनर के खिलाफ उसी तरह की सख्ती दिखाई नहीं देती। आकाश तिवारी ने यह भी कहा कि लटकते पोस्टर और बैनर केवल अव्यवस्था नहीं पैदा करते, बल्कि इनसे पहले भी दुर्घटनाओं का खतरा सामने आता रहा है। उनका कहना है कि निगम को औपचारिक अभियान चलाने के बजाय जिम्मेदारी तय कर स्थायी समाधान की दिशा में काम करना चाहिए। हालांकि नेता प्रतिपक्ष के इन आरोपों पर संबंधित मामलों में निगम की कार्रवाई और रिकॉर्ड की स्थिति अलग से स्पष्ट होना जरूरी है।<img src="https://lalluram.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-15-at-14.17.28-1-768x1024.jpeg" alt="WhatsApp-Image-2026-09-15-at-14.17.28-1-768x1024.jpeg"/></p>
<p><strong>निगम का दावा- अवैध फ्लैक्स के खिलाफ कार्रवाई जारी</strong><br />दूसरी ओर नगर निगम की ओर से कहा गया है कि अवैध फ्लैक्स और पोस्टर के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। निगम का कहना है कि संबंधित लोगों तक पहुंचकर कार्रवाई की जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। निगम की ओर से फ्लैक्स और पोस्टर प्रिंटर्स की बैठक आयोजित करने की भी बात कही गई है। इसके साथ ही फ्लैक्स पर संबंधित प्रिंटर और अन्य जरूरी जानकारी अंकित करने को अनिवार्य किए जाने की दिशा में कदम उठाने की बात कही गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह पता लगाना हो सकता है कि नियमों का उल्लंघन करने वाला फ्लैक्स किसने छापा और किसके लिए तैयार किया गया। इससे केवल लगाने वाले व्यक्ति ही नहीं, बल्कि प्रचार सामग्री तैयार करने वाली एजेंसी तक जिम्मेदारी तय करने में मदद मिल सकती है।</p>
<p><strong>सिर्फ फ्लैक्स हटाना काफी या जिम्मेदारी तय करना जरूरी?</strong><br />शहर में अवैध पोस्टर-बैनर हटाने की कार्रवाई कई बार अभियान तक सीमित रह जाती है। कुछ दिन बाद उसी स्थान पर दोबारा नए फ्लैक्स दिखाई देने लगते हैं। ऐसे में सवाल केवल फ्लैक्स हटाने का नहीं, बल्कि दोबारा फ्लैक्स लगाने की प्रवृत्ति रोकने का भी है। इसके लिए अनुमति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, प्रतिबंधित स्थानों की नियमित निगरानी, उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना, बार-बार नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई और फ्लैक्स प्रिंटर की पहचान जैसी व्यवस्थाएं प्रभावी हो सकती हैं। किसी राजनीतिक, व्यावसायिक या सामाजिक संगठन को प्रचार करना है तो उसके लिए निर्धारित स्थान और वैध अनुमति की व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे सार्वजनिक स्थानों पर मनमाने ढंग से फ्लैक्स लगाने की समस्या कम की जा सकती है।</p>
<p><strong>हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी?</strong><br />फ्लैक्स और बैनर को लेकर सबसे गंभीर सवाल सड़क सुरक्षा का है। यदि कोई बड़ा बैनर तेज हवा में गिरता है, बिजली के तारों से टकराता है या किसी वाहन चालक की विजिबिलिटी प्रभावित होने के कारण दुर्घटना होती है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी? किसी दुर्घटना के बाद जिम्मेदारी तय करने के बजाय बेहतर है कि संभावित खतरे को पहले ही हटाया जाए। खासकर अस्पतालों, प्रमुख चौराहों, व्यस्त बाजारों, ओवरब्रिज और ट्रैफिक वाले मार्गों पर ऐसे फ्लैक्स की नियमित निगरानी जरूरी है।</p>
<p><strong>कागज से जमीन तक कब पहुंचेगा 'नो फ्लैक्स जोन'?</strong><br />रायपुर में नो फ्लैक्स जोन की व्यवस्था का उद्देश्य शहर को अनधिकृत विज्ञापन सामग्री से मुक्त रखना और प्रमुख मार्गों की दृश्यता एवं यातायात सुरक्षा बनाए रखना है। लेकिन यदि प्रतिबंधित मार्गों पर ही लगातार फ्लैक्स और बैनर नजर आते रहें तो नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है।</p>
<p>अब जरूरत केवल नए फ्लैक्स हटाने की नहीं, बल्कि यह पता लगाने की है कि वे वहां तक कैसे पहुंचे? किसने लगाए, किसकी अनुमति थी, किसने निगरानी की और नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई हुई, इन सवालों के जवाब सामने आने चाहिए। नो फ्लैक्स जोन सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड या आदेश की फाइल में नहीं, बल्कि रायपुर की सड़कों पर भी दिखाई देना चाहिए। यही व्यवस्था शहर की सुंदरता के साथ-साथ नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 17:10:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लंबे इंतजार के बाद मिली खुशखबरी! कांस्टेबल भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की SLP की खारिज, 400 से अधिक अभ्यर्थियों की ज्वाइनिंग का रास्ता खुला</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ में कांस्टेबल भर्ती से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर Special Leave Petition (SLP) खारिज कर दी है। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद संबंधित भर्ती प्रक्रिया में वेटिंग लिस्ट में शामिल पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर बनी कानूनी अड़चन दूर होने की उम्मीद है।</p>
<p>मामले में सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संबंधित विभाग को पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति और ज्वाइनिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/good-news-received-after-a-long-wait-supreme-court-rejected/article-12492"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-08/12_08_2026-supreme_court_naidunia__2026812_183146.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ में कांस्टेबल भर्ती से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर Special Leave Petition (SLP) खारिज कर दी है। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद संबंधित भर्ती प्रक्रिया में वेटिंग लिस्ट में शामिल पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर बनी कानूनी अड़चन दूर होने की उम्मीद है।</p>
<p>मामले में सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संबंधित विभाग को पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति और ज्वाइनिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी। इससे 400 से अधिक अभ्यर्थियों को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण और नियुक्ति का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह फैसला राहत लेकर आया है।</p>
<p><strong>राज्य सरकार ने दाखिल की थी सुप्रीम कोर्ट में SLP</strong><br />कांस्टेबल भर्ती को लेकर विवाद पहले न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा था। पूर्व में जारी आदेश के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में Special Leave Petition (SLP) दाखिल की गई थी। राज्य सरकार की ओर से शीर्ष अदालत में अपने पक्ष में दलीलें रखी गईं। मामले पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की SLP को खारिज कर दिया। इसके साथ ही पूर्व में जारी न्यायिक आदेश के अनुसार आगे की प्रक्रिया में मौजूद बाधा कम हुई है। अब संबंधित विभाग को अदालत के आदेश और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप आगे की कार्रवाई करनी होगी।</p>
<p><strong>तीन महीने के भीतर ज्वाइनिंग का निर्देश</strong><br />इस मामले में सुनवाई जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ के समक्ष हुई। अदालत के आदेश में संबंधित अभ्यर्थियों की ज्वाइनिंग की प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया है। इस समय-सीमा के बाद अब भर्ती विभाग के सामने अभ्यर्थियों की पात्रता, दस्तावेजों और अन्य आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा कर नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। हालांकि ज्वाइनिंग की अंतिम प्रक्रिया संबंधित विभाग की ओर से जारी होने वाले आधिकारिक आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर करेगी।</p>
<p><strong>वेटिंग लिस्ट में शामिल अभ्यर्थियों को राहत</strong><br />कांस्टेबल भर्ती की प्रक्रिया के अलग-अलग चरण पूरे होने के बावजूद कुछ अभ्यर्थियों की नियुक्ति वेटिंग लिस्ट और उससे जुड़े कानूनी विवाद के कारण अटकी हुई थी। इन उम्मीदवारों की ओर से नियुक्ति को लेकर लंबे समय से न्यायिक राहत की मांग की जा रही थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के कारण अभ्यर्थियों को अंतिम स्थिति का इंतजार करना पड़ रहा था। अब शीर्ष अदालत द्वारा SLP खारिज किए जाने के बाद संबंधित उम्मीदवारों को नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है।</p>
<p><strong>400 से ज्यादा उम्मीदवारों को मिल सकता है लाभ</strong><br />इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन 400 से अधिक अभ्यर्थियों पर पड़ने की संभावना है, जो वेटिंग लिस्ट में शामिल हैं और नियुक्ति की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि कितने अभ्यर्थियों को वास्तविक रूप से नियुक्ति मिलेगी, यह उनकी पात्रता और भर्ती नियमों के अनुरूप विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नियुक्ति प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण राहत के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन प्रत्येक अभ्यर्थी की अंतिम ज्वाइनिंग संबंधित रिकॉर्ड और निर्धारित भर्ती शर्तों के आधार पर होगी।</p>
<p><strong>लंबे इंतजार के बाद अभ्यर्थियों में राहत</strong><br />कांस्टेबल भर्ती से जुड़े उम्मीदवारों के लिए यह मामला केवल नौकरी का नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहे इंतजार और अनिश्चितता का भी विषय रहा है। भर्ती प्रक्रिया में चयन के बाद नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थियों को कानूनी विवाद के चलते आगे की प्रक्रिया का इंतजार करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित अभ्यर्थियों के बीच राहत का माहौल है। उम्मीदवारों को अब उम्मीद है कि विभाग अदालत द्वारा तय समय-सीमा के भीतर नियुक्ति संबंधी कार्रवाई पूरी करेगा।</p>
<p><strong>अब आगे क्या होगा?</strong><br />सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब अगला महत्वपूर्ण चरण राज्य सरकार और संबंधित भर्ती विभाग की प्रशासनिक कार्रवाई का होगा। विभाग को पात्र अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड की जांच, आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया और नियुक्ति आदेश से जुड़े जरूरी कदम पूरे करने होंगे। अदालत ने तीन महीने की समय-सीमा तय की है, ऐसे में अभ्यर्थियों की नजर अब विभाग की अगली कार्रवाई पर रहेगी। नियुक्ति आदेश जारी होने और ज्वाइनिंग की वास्तविक तारीख विभागीय आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।</p>
<p><strong>अभ्यर्थियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?</strong><br />इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे भर्ती प्रक्रिया में लंबे समय से चली आ रही कानूनी अनिश्चितता को खत्म करने की दिशा में रास्ता खुला है। SLP खारिज होने के बाद अब पहले से जारी न्यायिक निर्देशों के अनुरूप नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की स्थिति बनी है।</p>
<p>कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ कांस्टेबल भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उन अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत है, जो चयन प्रक्रिया के बाद भी ज्वाइनिंग का इंतजार कर रहे थे। अब सबकी नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग अदालत के निर्देश के मुताबिक तीन महीने की निर्धारित अवधि में नियुक्ति प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 17:00:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बच्चा SNCU में, मां अस्पताल से लापता… रातभर खोजते रहे परिजन, जेंजरा में पेड़ पर मिला नवप्रसूता का शव, जांच में जुटी पुलिस</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कोरबा।</strong> छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के जेंजरा क्षेत्र से एक नवप्रसूता महिला की मौत का मामला सामने आया है। प्रसव के कुछ दिन बाद महिला अचानक अस्पताल से बाहर निकल गई थी। इसके बाद परिजन रातभर उसकी तलाश करते रहे, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। बुधवार दोपहर जेंजरा मेन रोड के पास एक पेड़ पर महिला का शव फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई।</p>
<p>मृतका की पहचान छुरीकला निवासी कांता केंवट, पति अजय केंवट के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक कांता को प्रसव के लिए 10 सितंबर को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/child-in-sncu-mother-missing-from-hospital%E2%80%A6-family-kept-searching/article-12491"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/katghora_police_station_1789469869.webp" alt=""></a><br /><p><strong>कोरबा।</strong> छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के जेंजरा क्षेत्र से एक नवप्रसूता महिला की मौत का मामला सामने आया है। प्रसव के कुछ दिन बाद महिला अचानक अस्पताल से बाहर निकल गई थी। इसके बाद परिजन रातभर उसकी तलाश करते रहे, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। बुधवार दोपहर जेंजरा मेन रोड के पास एक पेड़ पर महिला का शव फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई।</p>
<p>मृतका की पहचान छुरीकला निवासी कांता केंवट, पति अजय केंवट के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक कांता को प्रसव के लिए 10 सितंबर को जेंजरा स्थित जीवांश अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रसव के बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल के SNCU/ICU में रखा गया था। इसी दौरान महिला के अचानक अस्पताल से बाहर चले जाने की बात सामने आई।</p>
<p><strong>10 सितंबर को प्रसव के लिए अस्पताल में हुई थी भर्ती</strong><br />जानकारी के अनुसार कांता केंवट को 10 सितंबर को प्रसव के लिए जीवांश अस्पताल, जेंजरा में भर्ती कराया गया था। प्रसव के बाद नवजात की तबीयत खराब होने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद बच्चे को विशेष निगरानी और उपचार के लिए SNCU/ICU में रखा गया था। बच्चे के अस्पताल में भर्ती होने के कारण महिला और उसके परिजन अस्पताल में ही मौजूद थे। इसी दौरान बीती रात किसी बात को लेकर महिला के नाराज होने और अस्पताल से बाहर निकल जाने की बात बताई जा रही है। हालांकि महिला किस बात से नाराज थी और अस्पताल से निकलने से पहले उसके साथ क्या हुआ था, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है।</p>
<p><strong>अचानक अस्पताल से बाहर निकल गई महिला</strong><br />परिजनों के अनुसार कांता किसी बात को लेकर नाराज होकर अचानक अस्पताल से बाहर चली गई। जब काफी देर तक वह वापस नहीं लौटी तो परिजनों को चिंता हुई। इसके बाद परिवार के लोगों ने आसपास के इलाकों में उसकी तलाश शुरू की। रात का समय होने के बावजूद परिजन महिला को खोजने के लिए अलग-अलग जगहों पर गए। आसपास के क्षेत्र और संभावित रास्तों पर भी तलाश की गई, लेकिन पूरी रात खोजबीन के बाद भी कांता का कोई सुराग नहीं मिला।</p>
<p><strong>मेन रोड के पास पेड़ पर मिला शव</strong><br />जेंजरा मेन रोड के पास ग्रामीणों की नजर एक पेड़ पर पड़ी, जहां महिला का शव फंदे से लटका हुआ दिखाई दिया। शव की जानकारी मिलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना क्षेत्र के सरपंच को दी। सरपंच के माध्यम से मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना मिलने के बाद कटघोरा पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया।</p>
<p><strong>पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा</strong><br />पुलिस ने शव को नीचे उतरवाकर आवश्यक कार्रवाई पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अब महिला के अस्पताल से निकलने से लेकर शव मिलने तक की पूरी घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच के दौरान पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि महिला अस्पताल से किस समय निकली थी, वह किस दिशा में गई और अस्पताल से निकलने के बाद किन परिस्थितियों में मेन रोड तक पहुंची। आसपास लगे CCTV कैमरों और प्रत्यक्षदर्शियों से भी जानकारी जुटाई जा सकती है।</p>
<p><strong>बच्चे का अस्पताल में चल रहा था इलाज</strong><br />इस घटना का एक अहम पहलू यह भी है कि महिला के प्रसव के बाद उसके नवजात बच्चे की तबीयत खराब बताई गई थी और उसे SNCU/ICU में रखा गया था। ऐसे में पुलिस महिला के अस्पताल में रहने के दौरान की परिस्थितियों और उसके परिवार के साथ हुई बातचीत की भी जानकारी जुटा रही है। हालांकि महिला के अस्पताल से बाहर निकलने के पीछे वास्तविक वजह क्या थी, इस संबंध में फिलहाल पुलिस की ओर से कोई अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है। परिजनों द्वारा बताई जा रही परिस्थितियों की भी जांच की जा रही है।</p>
<p><strong>मौत की असली वजह जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होगी स्पष्ट</strong><br />महिला की मौत की परिस्थितियों को लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। शव मिलने की परिस्थितियां सामने आने के बाद प्रथम दृष्टया मामला फंदे से मौत का दिखाई दे रहा है, लेकिन मौत का अंतिम कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस महिला के मोबाइल फोन, अस्पताल से निकलने के समय, परिजनों के बयान, घटनास्थल और आसपास उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की जांच कर सकती है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई। फिलहाल, जेंजरा क्षेत्र में हुई इस घटना से परिवार और स्थानीय लोगों में शोक का माहौल है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 16:53:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PM Awas Yojana: भूपेश बघेल और विजय शर्मा आमने-सामने, आवास के आंकड़ों पर छिड़ी तीखी बहस, जानें किसने क्या कहा.. </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर।</strong> छत्तीसगढ़ में गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर सियासी घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। राजधानी रायपुर के प्रेस क्लब में आज पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वर्तमान पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा आमने-सामने आए। दोनों नेताओं के बीच पीएम आवास योजना के तहत स्वीकृति, निर्माण, पोर्टल और सरकारों के कार्यकाल में हुए काम के आंकड़ों को लेकर तीखी बहस हुई। चर्चा के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के दावों और आंकड़ों पर सवाल उठाए।</p>
<p>बहस के दौरान भूपेश बघेल ने अपने कार्यकाल में आवास निर्माण को लेकर कहा कि अगर उनकी सरकार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/pm-awas-yojana-bhupesh-baghel-and-vijay-sharma-face-to/article-12487"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/heated_exchange_between_bhupesh_baghel_and_vijay_sharma_at_the_pm_s_residence_1789461825.webp" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर।</strong> छत्तीसगढ़ में गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर सियासी घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। राजधानी रायपुर के प्रेस क्लब में आज पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वर्तमान पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा आमने-सामने आए। दोनों नेताओं के बीच पीएम आवास योजना के तहत स्वीकृति, निर्माण, पोर्टल और सरकारों के कार्यकाल में हुए काम के आंकड़ों को लेकर तीखी बहस हुई। चर्चा के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के दावों और आंकड़ों पर सवाल उठाए।</p>
<p>बहस के दौरान भूपेश बघेल ने अपने कार्यकाल में आवास निर्माण को लेकर कहा कि अगर उनकी सरकार के समय पर्याप्त आवास नहीं बने, तो जनता ने चुनाव में उन्हें इसकी सजा दी। वहीं विजय शर्मा ने मौजूदा सरकार के कार्यकाल में हुए आवास निर्माण के आंकड़े गिनाते हुए पिछली सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने बघेल के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री को स्वीकृति, स्वीकार्यता और वास्तविक निर्माण के बीच का अंतर समझना चाहिए। जवाब में बघेल ने वर्तमान सरकार पर आंकड़ों को लेकर भ्रम पैदा करने और जनता के सामने गलत तस्वीर पेश करने का आरोप लगाया।</p>
<p><strong>विजय शर्मा ने गिनाए PM आवास के आंकड़े</strong><br />पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने चर्चा के दौरान साय सरकार के कार्यकाल में प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति का आंकड़ा सामने रखा। उन्होंने दावा किया कि राज्य में अब तक 11 लाख 75 हजार पीएम आवासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। मंत्री के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पूरे देश में सबसे ज्यादा पीएम आवास छत्तीसगढ़ में बनाए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि आवास निर्माण के लिए सरकार की ओर से करीब 16 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके अलावा राज्य में 3 लाख 65 हजार नए आवासों के निर्माण की स्वीकृति मिलने की बात भी उन्होंने कही।</p>
<p>विजय शर्मा ने इन आंकड़ों को सरकार की उपलब्धि बताते हुए कहा कि गरीब परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने की दिशा में मौजूदा सरकार तेजी से काम कर रही है। उनके मुताबिक केवल स्वीकृति देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वास्तविक निर्माण पूरा होना योजना की सफलता का अहम पैमाना है।</p>
<p><strong>पिछली कांग्रेस सरकार पर विजय शर्मा का हमला</strong><br />बहस के दौरान विजय शर्मा ने वर्ष 2020-21 का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय पीएम आवास के निर्माण और स्वीकृति को लेकर कोरोना महामारी का हवाला दिया जाता रहा है। शर्मा का तर्क था कि महामारी के दौरान भी देश के कई अन्य राज्यों में आवास योजना के तहत स्वीकृति और काम हुआ था।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान गरीब परिवारों को पीएम आवास का लाभ पर्याप्त रूप से नहीं मिल पाया। शर्मा ने कहा कि आवास जैसे बुनियादी मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय यह देखना जरूरी है कि पात्र हितग्राहियों तक योजना का लाभ वास्तव में पहुंचा या नहीं। उन्होंने इसी संदर्भ में पिछली सरकार की नीतियों और उस समय की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की।</p>
<p><strong>पोर्टल बंद होने के मुद्दे पर भी भिड़े दोनों नेता</strong><br />बहस का एक बड़ा मुद्दा PM Awas Portal भी रहा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पीएम आवास का पोर्टल बंद कर दिया गया था। उनका कहना था कि पोर्टल बंद होने की वजह से राज्य में योजना की प्रक्रिया प्रभावित हुई और पात्र परिवारों के लिए आवास स्वीकृति एवं निर्माण का काम आगे नहीं बढ़ पाया।</p>
<p>इसके जवाब में विजय शर्मा ने पोर्टल बंद होने के दावे को गलत बताया। उन्होंने कहा कि पीएम आवास से संबंधित प्रक्रिया को दूसरी आवास योजनाओं के साथ मिलाकर नहीं देखा जाना चाहिए। शर्मा ने विशेष रूप से स्वीकृति, स्वीकार्यता और निर्माण के आंकड़ों का अंतर समझाने की कोशिश की।</p>
<p>मंत्री के मुताबिक अलग-अलग चरणों के आंकड़ों को जोड़कर एक ही संख्या के रूप में पेश करने से जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने बघेल के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीएम आवास योजना में किसी मकान की स्वीकृति और उसके वास्तविक निर्माण को एक ही चीज नहीं माना जा सकता।</p>
<p><strong>'मुख्यमंत्री न्याय आवास योजना' को लेकर भी आया विवाद</strong><br />विजय शर्मा ने चर्चा के दौरान कांग्रेस सरकार के समय संचालित मुख्यमंत्री न्याय आवास योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय राज्य सरकार की अपनी आवास योजना के पोर्टल पर राशि और प्रक्रिया चल रही थी, जबकि प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रक्रिया अलग थी।</p>
<p>यही अंतर बहस का एक महत्वपूर्ण बिंदु बन गया। शर्मा का कहना था कि दोनों योजनाओं के आंकड़ों को आपस में मिलाकर देखने के बजाय प्रत्येक योजना के तहत स्वीकृत और निर्मित मकानों की अलग-अलग स्थिति सामने रखी जानी चाहिए। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री पर आंकड़ों को अपने पक्ष में प्रस्तुत करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता को वास्तविक संख्या बताई जानी चाहिए।</p>
<p><strong>भूपेश बघेल ने सरकार के आंकड़ों पर उठाए सवाल</strong><br />दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने साय सरकार की ओर से बताए जा रहे पीएम आवास के आंकड़ों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बड़ी संख्या में आवास स्वीकृत किए जाने और बनाए जाने के अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि कितने मकान स्वीकृत हुए, कितने हितग्राहियों ने स्वीकृति स्वीकार की और कितने मकानों का वास्तविक निर्माण पूरा हुआ।</p>
<p>बघेल ने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए फिर कहा कि उस समय केंद्र सरकार की ओर से पीएम आवास का पोर्टल बंद किए जाने के कारण योजना प्रभावित हुई थी। उनके मुताबिक राज्य सरकार पात्र लोगों के लिए आवास बनाना चाहती थी, लेकिन केंद्र स्तर पर पोर्टल से जुड़ी समस्या के चलते प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।</p>
<p><strong>46 लाख, 18 लाख और 10 लाख के आंकड़ों पर बघेल का सवाल</strong><br />भूपेश बघेल ने पीएम आवास योजना को लेकर अलग-अलग स्तरों से सामने आने वाले आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि एक तरफ 46 लाख मकान बनाए जाने का दावा सामने आता है, वहीं राज्य सरकार की ओर से 18 लाख आवास स्वीकृत किए जाने की बात कही जाती है।</p>
<p>बघेल ने केंद्रीय स्तर से सामने आए करीब 10 लाख मकानों की स्वीकृति के आंकड़े का भी उल्लेख किया और सवाल उठाया कि आखिर वास्तविक संख्या क्या है ? उन्होंने इसी अंतर को लेकर सरकार पर तंज कसते हुए कहा—'चीत भी मेरा, पट भी मेरा।' उनका कहना था कि जनता के सामने आंकड़ों की पूरी तस्वीर रखी जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अलग-अलग संख्या किस चरण या किस योजना से संबंधित है।</p>
<p><strong>'झूठ परोसना बंद कीजिए'- बघेल</strong><br />बहस के दौरान दोनों नेताओं के बीच जुबानी टकराव भी देखने को मिला। भूपेश बघेल ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि 'झूठ परोसना बंद कीजिए।' उन्होंने फिर दोहराया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में केंद्र की ओर से पोर्टल बंद होने की वजह से पीएम आवास योजना प्रभावित हुई थी। बघेल ने कहा कि मौजूदा सरकार को केवल अपने कार्यकाल के आंकड़े बताने के बजाय यह भी बताना चाहिए कि पूर्व सरकार के समय आवास योजना की प्रक्रिया किन परिस्थितियों में प्रभावित हुई थी।</p>
<p><strong>विजय शर्मा का पलटवार- 'झूठ मत बोलिए'</strong><br />भूपेश बघेल के आरोपों पर विजय शर्मा भी आक्रामक नजर आए। उन्होंने कहा कि बघेल जी सब कुछ समझ रहे हैं, लेकिन जनता को समझाने की कोशिश कुछ और तरीके से की जा रही है। बहस के दौरान शर्मा ने कई बार बघेल के दावों पर आपत्ति जताते हुए 'झूठ मत बोलिए' जैसी टिप्पणी की।</p>
<p>शर्मा का कहना था कि आवास योजना से जुड़े आंकड़ों को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय रिकॉर्ड और प्रक्रिया के आधार पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वीकृति और निर्माण के बीच के चरणों को समझे बिना केवल कुल संख्या बताना सही तस्वीर पेश नहीं करता।</p>
<p><strong>'आवास नहीं बनाए तो जनता ने सजा दी'- बघेल</strong><br />इस पूरी बहस के बीच भूपेश बघेल का एक बयान खास तौर पर चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि अगर उनकी सरकार के कार्यकाल में पर्याप्त आवास नहीं बने, तो जनता ने चुनाव में उन्हें इसकी सजा दे दी। बघेल का यह बयान इस लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया कि उन्होंने पीएम आवास को लेकर अपनी सरकार के प्रदर्शन और चुनावी परिणाम के बीच संबंध को स्वीकार किया। हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल में आवास योजना के प्रभावित होने के पीछे केंद्र सरकार के पोर्टल से जुड़ी समस्या प्रमुख कारण थी।</p>
<p><strong>असली विवाद आंकड़ों का नहीं, 'कितने मकान बने' का है</strong><br />दोनों नेताओं की बहस को अगर सरल भाषा में समझें तो विवाद केवल यह नहीं है कि किस सरकार ने कितने मकानों की घोषणा की। असली सवाल यह है कि कितने मकान स्वीकृत हुए, कितने हितग्राहियों ने स्वीकृति स्वीकार की, कितने मकानों का निर्माण शुरू हुआ और कितने मकान वास्तव में बनकर तैयार हुए।</p>
<p><iframe style="border:none;" src="https://www.facebook.com/plugins/video.php?height=314&amp;href=https%3A%2F%2Fwww.facebook.com%2Fvijayratancg%2Fvideos%2F1624216679198785%2F&amp;show_text=false&amp;width=560&amp;t=0" width="560" height="314" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></p>
<p>प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं में इन सभी चरणों की संख्या अलग हो सकती है। इसलिए किसी भी सरकार के प्रदर्शन का आकलन करते समय केवल स्वीकृत आवासों की संख्या या केवल निर्माण पूर्ण होने की संख्या को देखने के बजाय पूरी प्रक्रिया को समझना जरूरी है। यही अंतर आज रायपुर प्रेस क्लब में हुई बहस का सबसे अहम हिस्सा रहा।</p>
<p><strong>गरीबों के आवास पर सियासत जारी</strong><br />पीएम आवास योजना छत्तीसगढ़ की राजनीति में लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए पक्का मकान सीधे तौर पर जीवन की बुनियादी जरूरत से जुड़ा विषय है। ऐसे में योजना की प्रगति के आंकड़े राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।</p>
<p>एक ओर साय सरकार अपने कार्यकाल में तेजी से हुए आवास निर्माण को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है। दूसरी ओर कांग्रेस पूर्ववर्ती कार्यकाल में केंद्र से जुड़ी प्रक्रियात्मक बाधाओं और पोर्टल बंद होने को योजना की धीमी प्रगति का कारण बता रही है।</p>
<p>रायपुर प्रेस क्लब में हुई यह बहस इसी राजनीतिक टकराव का नया अध्याय रही, जिसमें दोनों पक्षों ने अपने-अपने आंकड़ों और तर्कों के आधार पर एक-दूसरे को घेरने की कोशिश की। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में सरकार और विपक्ष इन आंकड़ों को किस तरह जनता के सामने रखते हैं और पात्र हितग्राहियों तक आवास योजना का लाभ पहुंचाने के मुद्दे पर सियासत किस दिशा में आगे बढ़ती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 16:29:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Promotion से ज्यादा Peace जरूरी! Gen Z क्यों ठुकरा रहा Manager बनने का मौका? ‘Conscious Unbossing’ के पीछे छिपी है नई Career Thinking </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>नौकरी में प्रमोशन को लंबे समय से करियर की सफलता का सबसे बड़ा संकेत माना जाता रहा है। बेहतर पद, ज्यादा सैलरी, बड़ी टीम और निर्णय लेने की ताकत, ये सभी चीजें किसी कर्मचारी के प्रोफेशनल ग्रोथ की पहचान मानी जाती थीं। लेकिन अब वर्कप्लेस की नई पीढ़ी यानी Gen Z इस पारंपरिक करियर सीढ़ी को अपनी शर्तों पर देख रही है।</p>
<p>Gen Z काम से भागना नहीं चाहती। वह मेहनत करना चाहती है, अपनी स्किल्स विकसित करना चाहती है और अपने काम का उचित क्रेडिट भी चाहती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इसके लिए उसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/peace-is-more-important-than-promotion-why-is-gen-z/article-12489"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/266379ac-f09d-4035-b473-da4925ed1f3c.png" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>नौकरी में प्रमोशन को लंबे समय से करियर की सफलता का सबसे बड़ा संकेत माना जाता रहा है। बेहतर पद, ज्यादा सैलरी, बड़ी टीम और निर्णय लेने की ताकत, ये सभी चीजें किसी कर्मचारी के प्रोफेशनल ग्रोथ की पहचान मानी जाती थीं। लेकिन अब वर्कप्लेस की नई पीढ़ी यानी Gen Z इस पारंपरिक करियर सीढ़ी को अपनी शर्तों पर देख रही है।</p>
<p>Gen Z काम से भागना नहीं चाहती। वह मेहनत करना चाहती है, अपनी स्किल्स विकसित करना चाहती है और अपने काम का उचित क्रेडिट भी चाहती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इसके लिए उसे लगातार बढ़ती जिम्मेदारियां, लंबे काम के घंटे, टीम मैनेजमेंट और हर समय उपलब्ध रहने का दबाव भी स्वीकार करना जरूरी है? कई युवा कर्मचारियों का जवाब है, जरूरी नहीं। यही सोच अब प्रमोशन को लेकर एक नए वर्कप्लेस ट्रेंड को जन्म दे रही है, जिसे 'Conscious Unbossing' कहा जा रहा है। इसका सीधा मतलब है कि कर्मचारी जानबूझकर मैनेजर या बॉस बनने की दिशा में आगे बढ़ने से इनकार कर रहा है, भले ही उसके सामने प्रमोशन का मौका क्यों न हो ?</p>
<p><strong>प्रमोशन मिला, लेकिन कर्मचारी ने कर दिया 'No'</strong><br />पारंपरिक कॉर्पोरेट संस्कृति में अगर किसी कर्मचारी को मैनेजर बनने का मौका मिलता था तो इसे उपलब्धि माना जाता था। लेकिन Gen Z के एक हिस्से के लिए अब सवाल अलग है, 'क्या मुझे सच में मैनेजर बनना है?' कई युवा कर्मचारी मानते हैं कि प्रमोशन के साथ केवल पद नहीं बढ़ता, बल्कि जिम्मेदारियां भी कई गुना बढ़ सकती हैं। टीम के प्रदर्शन की जवाबदेही, कर्मचारियों के बीच विवाद सुलझाना, लगातार मीटिंग्स, डेडलाइन, क्लाइंट का दबाव और वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्टिंग, इन सबका बोझ भी नए पद के साथ आ सकता है। ऐसे में कुछ कर्मचारी यह हिसाब लगाने लगे हैं कि प्रमोशन के साथ मिलने वाली अतिरिक्त सैलरी वास्तव में बढ़े हुए तनाव और जिम्मेदारियों की भरपाई करती है या नहीं। अगर जवाब 'नहीं' है, तो वे प्रमोशन लेने के बजाय अपनी मौजूदा भूमिका में रहकर बेहतर प्रदर्शन करना पसंद कर रहे हैं।</p>
<p><strong>चीन से सामने आया नया वर्कप्लेस ट्रेंड</strong><br />इस बदलती सोच का एक उदाहरण चीन के वर्कप्लेस से सामने आया है, जहां कुछ युवा कर्मचारी मैनेजमेंट पदों पर जाने से बच रहे हैं। सोशल मीडिया पर बॉस को प्रमोशन के लिए मना करने वाली स्क्रिप्ट और सलाह तक शेयर की जा रही हैं। इन कर्मचारियों की सोच का आधार यह है कि करियर में आगे बढ़ने का एक ही रास्ता मैनेजर बनना नहीं है। वे अपनी विशेषज्ञता वाले क्षेत्र में बेहतर बनना, नई स्किल्स सीखना, अपनी आय बढ़ाना और काम के बाहर अपनी जिंदगी के लिए पर्याप्त समय बचाना चाहते हैं। यानी करियर का मतलब अब हर कर्मचारी के लिए 'Junior से Senior और फिर Manager' वाली सीधी सीढ़ी नहीं रह गया है।</p>
<p><strong>Robert Walters की रिसर्च ने भी दिखाई तस्वीर</strong><br />2025 में Robert Walters की ओर से जारी रिसर्च में Gen Z के मैनेजमेंट को लेकर बदलते नजरिए की तस्वीर सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, 54% Gen Z professionals ने कहा कि वे अपने करियर में मैनेजर नहीं बनना चाहते। वहीं, 71% लोगों ने दूसरों को मैनेज करने के बजाय अपने करियर और स्किल्स पर फोकस करने की प्राथमिकता जताई। रिसर्च में 65% Gen Z respondents ने middle management को ज्यादा तनाव और कम फायदे वाला रोल बताया। दूसरी ओर, 89% employers अब भी मानते हैं कि किसी संगठन के लिए middle managers की भूमिका महत्वपूर्ण है। यहीं से कंपनियों और कर्मचारियों के बीच एक नया gap दिखाई देता है। कंपनियों को ऐसे लोगों की जरूरत है जो टीम संभालें, फैसले लें और जूनियर कर्मचारियों को लीड करें। लेकिन कर्मचारियों का एक हिस्सा पूछ रहा है, 'अगर इस जिम्मेदारी के बदले मेरी जिंदगी ज्यादा तनावपूर्ण होनी है, तो मैं यह भूमिका क्यों लूं?'</p>
<p><strong>Gen Z को काम से नहीं, 'Always Available' रहने से दिक्कत?</strong><br />Gen Z को लेकर अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि यह पीढ़ी मेहनत नहीं करना चाहती। लेकिन इस ट्रेंड को केवल 'कामचोरी' के नजरिए से देखना शायद सही तस्वीर नहीं देता। असल बदलाव यह है कि Gen Z काम और निजी जिंदगी के बीच स्पष्ट सीमा चाहती है। इस पीढ़ी का एक वर्ग यह मानता है कि नौकरी जरूरी है, लेकिन नौकरी के लिए अपनी पूरी जिंदगी को नौकरी के हवाले कर देना जरूरी नहीं। ऑफिस का काम ऑफिस तक सीमित रहे और निजी समय निजी रहे, यह अपेक्षा अब ज्यादा मजबूत हो रही है। इसलिए समस्या केवल ज्यादा काम की नहीं है। समस्या उस संस्कृति से भी है जिसमें कर्मचारी से उम्मीद की जाती है कि वह छुट्टी, वीकेंड या ऑफिस टाइम के बाद भी फोन, मैसेज और ईमेल का जवाब देता रहे।</p>
<p><strong>'बड़ा पद' अब सफलता का एकमात्र पैमाना नहीं</strong><br />पुरानी वर्क कल्चर में करियर की सफलता का फॉर्मूला अपेक्षाकृत सीधा था- पदोन्नति + ज्यादा सैलरी + बड़ी टीम = सफलता। Gen Z इस फॉर्मूले में कई नए सवाल जोड़ रही है।</p>
<ul>
<li>क्या नौकरी मुझे पर्याप्त पैसा दे रही है?</li>
<li>क्या मेरे पास अपनी जिंदगी के लिए समय है?</li>
<li>क्या मैं नई स्किल सीख पा रहा हूं?</li>
<li>क्या मेरे काम की वैल्यू और पहचान मिल रही है?</li>
<li>क्या मुझे हर समय तनाव में रहना पड़ेगा?</li>
<li>और सबसे महत्वपूर्ण—क्या इस प्रमोशन के बाद मेरी जिंदगी बेहतर होगी या सिर्फ मेरा designation?</li>
</ul>
<p>यही सवाल Conscious Unbossing को समझने की कुंजी है।</p>
<p><strong>पैसे से ज्यादा Work-Life Balance?</strong><br />इसका मतलब यह नहीं है कि Gen Z के लिए पैसा महत्वपूर्ण नहीं है। बेहतर सैलरी आज भी करियर के सबसे बड़े कारणों में से एक है। लेकिन केवल सैलरी के बदले अत्यधिक तनाव स्वीकार करने की इच्छा कम होती दिखाई दे रही है। एक युवा कर्मचारी के लिए 20 फीसदी ज्यादा सैलरी का मतलब तभी आकर्षक हो सकता है, जब उसके बदले उसे 50 फीसदी ज्यादा तनाव, लगातार मीटिंग्स और काम के बाद भी उपलब्ध रहने की स्थिति न झेलनी पड़े। यही कारण है कि कई युवा कर्मचारी flexibility, autonomy, learning opportunities और work-life balance को भी compensation package का हिस्सा मानकर देखने लगे हैं।</p>
<p><strong>'Individual Contributor' बनना भी Career Growth है</strong><br />कॉर्पोरेट दुनिया में करियर ग्रोथ को अक्सर management track से जोड़ा जाता है। लेकिन अब एक दूसरा रास्ता भी ज्यादा चर्चा में है, Individual Contributor (IC) career path. इस मॉडल में कर्मचारी किसी टीम का मैनेजर बने बिना अपने technical या professional expertise में आगे बढ़ सकता है। उदाहरण के लिए कोई software engineer senior या principal engineer बन सकता है, कोई designer design specialist बन सकता है और कोई finance professional अपने domain का expert बन सकता है।इस तरह कर्मचारी को seniority और बेहतर compensation मिल सकती है, लेकिन जरूरी नहीं कि उसे बड़ी टीम के लोगों को manage करना पड़े। Gen Z के लिए यह मॉडल इसलिए आकर्षक हो सकता है क्योंकि इसमें career growth और people management को अलग-अलग चीजों के रूप में देखा जा सकता है।</p>
<p><strong>'No' कहना भी एक Career Decision है</strong><br />किसी प्रमोशन को मना करना हमेशा महत्वाकांक्षा की कमी नहीं होती। कई बार यह व्यक्ति की प्राथमिकताओं और करियर प्लान का हिस्सा हो सकता है। कोई कर्मचारी अभी management responsibility लेने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन कुछ साल बाद लेना चाहता है। कोई अपने technical skills को मजबूत करना चाहता है। कोई family या personal priorities के कारण कम दबाव वाली भूमिका चाहता है। इसलिए Gen Z के लिए 'No' कहना हमेशा 'मैं आगे नहीं बढ़ना चाहता' नहीं है। कई बार इसका मतलब होता है, 'मैं आपके बताए रास्ते पर आगे नहीं बढ़ना चाहता, लेकिन अपने रास्ते पर जरूर बढ़ना चाहता हूं।'</p>
<p><strong>कंपनियों के लिए भी बड़ा सवाल</strong><br />यह ट्रेंड केवल कर्मचारियों की पसंद का मुद्दा नहीं है। कंपनियों के लिए भी यह एक चुनौती है। अगर ज्यादा कर्मचारी management roles से बचने लगते हैं तो कंपनियों को future managers तैयार करने में मुश्किल हो सकती है। दूसरी ओर, अगर कर्मचारियों को बिना उनकी इच्छा के management track पर धकेला जाता है तो वे burnout, dissatisfaction या नौकरी छोड़ने की तरफ जा सकते हैं। इसलिए कंपनियों को career growth की परिभाषा को बदलने की जरूरत पड़ सकती है। हर अच्छे कर्मचारी को manager बनाना जरूरी नहीं। कई बार किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी ताकत लोगों को manage करना नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र में असाधारण expertise हासिल करना हो सकती है।</p>
<p><strong>आखिर Gen Z क्या चाहती है?</strong><br />सीधी भाषा में समझें तो Gen Z का संदेश कुछ ऐसा है- 'मैं काम करूंगा, लेकिन अपनी जिंदगी की कीमत पर नहीं।' 'मैं आगे बढ़ूंगा, लेकिन जरूरी नहीं कि बॉस बनकर।' 'मुझे ज्यादा कमाना है, लेकिन ज्यादा तनाव लेकर नहीं।' और शायद सबसे महत्वपूर्ण 'Promote me because I am good at my work, not because I want to manage everyone.' यही बदलती सोच आने वाले वर्षों में कंपनियों के career structures को भी प्रभावित कर सकती है। भविष्य का सफल कर्मचारी केवल वह नहीं होगा जो सबसे ऊंचे पद पर पहुंच जाए, बल्कि वह भी हो सकता है जो अपने लिए सही भूमिका, सही जिम्मेदारी और सही जीवन-संतुलन चुन सके।</p>
<p>Conscious Unbossing को केवल 'Gen Z प्रमोशन से डरती है' कहकर समझना अधूरा होगा। यह असल में करियर सफलता की बदलती परिभाषा की कहानी है। जहां पिछली पीढ़ियों के लिए 'बॉस बनना' उपलब्धि का प्रतीक था, वहीं आज का युवा पूछ रहा है, 'क्या यह भूमिका मेरे करियर और मेरी जिंदगी दोनों के लिए सही है?' शायद आने वाले समय में ऑफिस में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होगा कि 'आपको अगला प्रमोशन कब चाहिए?' बल्कि यह होगा 'आप अपने करियर में किस तरह की ग्रोथ चाहते हैं?'</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 16:03:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PM Surya Ghar Yojana: सोलर सिस्टम में गड़बड़ी का आरोप, पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव ने उठाए सवाल; उच्चस्तरीय जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कोंडागांव।</strong> प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत कोंडागांव जिले में किए जा रहे सोलर सिस्टम इंस्टॉलेशन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। केशकाल विधानसभा के पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव ने केशकाल, फरसगांव और माकड़ी विकासखंडों में योजना के तहत हो रहे कार्यों में कथित अनियमितताओं और तकनीकी सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।</p>
<p>पूर्व विधायक का कहना है कि योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित कर बिजली की जरूरतों को पूरा करना और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/pm-surya-ghar-yojana-allegations-of-irregularities-in-solar-system/article-12488"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/former_mla_krishna_kumar_dhruv_demanded_an_inquiry._1789457504.webp" alt=""></a><br /><p><strong>कोंडागांव।</strong> प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत कोंडागांव जिले में किए जा रहे सोलर सिस्टम इंस्टॉलेशन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। केशकाल विधानसभा के पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव ने केशकाल, फरसगांव और माकड़ी विकासखंडों में योजना के तहत हो रहे कार्यों में कथित अनियमितताओं और तकनीकी सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।</p>
<p>पूर्व विधायक का कहना है कि योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित कर बिजली की जरूरतों को पूरा करना और उपभोक्ताओं पर बिजली खर्च का बोझ कम करना है। ऐसे में योजना के नाम पर यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी या गलत तरीके से सिस्टम लगाए जाने की शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो इससे योजना की पारदर्शिता और लाभार्थियों की सुरक्षा दोनों पर सवाल खड़े हो सकते हैं।</p>
<p><strong>बैटरी सिस्टम को लेकर पूर्व विधायक ने उठाए सवाल</strong><br />कृष्ण कुमार ध्रुव ने योजना के तहत लगाए जा रहे सोलर सिस्टम में बैटरी बैंक के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाया है। उनका दावा है कि योजना में मिलने वाली केंद्रीय सब्सिडी का प्रावधान मुख्य रूप से ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सोलर सिस्टम के लिए है और बैटरी आधारित व्यवस्था को उसी तरह सब्सिडी का लाभ नहीं मिलता।</p>
<p>पूर्व विधायक का आरोप है कि इसके बावजूद कुछ स्थानों पर वेंडरों द्वारा ग्रामीणों के घरों में बैटरी बैंक लगाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ मामलों में ग्रामीणों को योजना की वास्तविक शर्तों की पूरी जानकारी दिए बिना अतिरिक्त उपकरणों के संबंध में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बैटरी लगाने की वास्तविक स्थिति, संबंधित सिस्टम की तकनीकी संरचना और भुगतान या सब्सिडी से उसका संबंध जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।</p>
<p><strong>'ग्रामीणों को योजना के नाम पर गुमराह किया जा रहा'</strong><br />पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में वेंडरों की ओर से पहले घरों में बैटरी या अन्य उपकरण पहुंचाए जाने और बाद में कागजी प्रक्रिया पूरी करने की बात सामने आई है। उनका कहना है कि ग्रामीण उपभोक्ताओं को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि उन्हें योजना के तहत कौन-सा सिस्टम मिल रहा है, उसमें कौन-कौन से उपकरण शामिल हैं और किस उपकरण पर सरकारी सहायता उपलब्ध है ? उन्होंने संबंधित अधिकारियों से यह भी जांचने की मांग की है कि लाभार्थियों से किसी अतिरिक्त उपकरण या सेवा के नाम पर पैसा तो नहीं लिया गया।</p>
<p><strong>विद्युत विभाग की निगरानी पर भी सवाल</strong><br />कृष्ण कुमार ध्रुव ने योजना के क्रियान्वयन की निगरानी कर रहे स्थानीय तंत्र पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में घरों में सोलर सिस्टम लगाए जा रहे हैं, इसलिए प्रत्येक इंस्टॉलेशन की तकनीकी गुणवत्ता और सुरक्षा की निगरानी जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि नियमों के विपरीत सिस्टम लगाए गए हैं तो यह केवल वेंडर की जिम्मेदारी का विषय नहीं हो सकता। विभागीय स्तर पर निरीक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया की भी जांच होनी चाहिए। हालांकि, विद्युत विभाग के अधिकारियों या कर्मचारियों की किसी तरह की मिलीभगत का आरोप केवल पूर्व विधायक द्वारा लगाया गया है। इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।</p>
<p><strong>बैटरियों की सुरक्षा को लेकर चिंता</strong><br />पूर्व विधायक ने बैटरी लगाने के तरीके को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि यदि किसी स्थान पर बैटरी सिस्टम स्थापित किया जा रहा है तो वहां पर्याप्त वेंटिलेशन, उचित वायरिंग, सुरक्षा उपकरण और निर्माता द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन होना जरूरी है। उन्होंने आशंका जताई कि बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बैटरी लगाने से शॉर्ट सर्किट, ओवरहीटिंग या अन्य तकनीकी दुर्घटनाओं का खतरा पैदा हो सकता है। विशेषज्ञ स्तर की तकनीकी जांच से ही यह निर्धारित किया जा सकता है कि लगाए गए सिस्टम में सुरक्षा मानकों का पालन हुआ है या नहीं। इसलिए उन्होंने मौके पर जाकर निरीक्षण कराने की मांग की है।</p>
<p><strong>तीन विकासखंडों में जांच की मांग</strong><br />पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव ने विशेष रूप से केशकाल, फरसगांव और माकड़ी विकासखंडों में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत लगाए गए सोलर सिस्टम की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल कार्यालय में उपलब्ध दस्तावेजों की जांच पर्याप्त नहीं होगी। अधिकारियों को लाभार्थियों के घरों तक पहुंचकर यह देखना चाहिए कि मौके पर वास्तव में किस प्रकार का सोलर सिस्टम लगाया गया है और रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी से उसका मिलान होता है या नहीं ?</p>
<p><strong>इन बिंदुओं पर हो जांच</strong><br />पूर्व विधायक ने उच्चस्तरीय जांच के दौरान कई बिंदुओं को शामिल करने की मांग की है। इनमें प्रमुख रूप से </p>
<ul>
<li>लाभार्थियों के घरों में लगाए गए सोलर सिस्टम की तकनीकी जांच।</li>
<li>बैटरी बैंक लगाए जाने की वास्तविक स्थिति।</li>
<li>वेंडरों द्वारा किए गए इंस्टॉलेशन की जांच।</li>
<li>लाभार्थियों से लिए गए भुगतान और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन।</li>
<li>सब्सिडी के लिए जमा किए गए दस्तावेजों की जांच।</li>
<li>सिस्टम की क्षमता और स्वीकृत क्षमता का मिलान।</li>
<li>वायरिंग और अन्य विद्युत उपकरणों की सुरक्षा जांच।</li>
<li>बैटरी लगाने की स्थिति में वेंटिलेशन और सुरक्षा मानकों की जांच।</li>
<li>वेंडरों और विभागीय सत्यापन प्रक्रिया की जांच।</li>
</ul>
<p><strong>दोष मिलने पर कार्रवाई की मांग</strong><br />कृष्ण कुमार ध्रुव ने कहा कि जांच का उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि योजना के क्रियान्वयन में वास्तविक स्थिति सामने लाना होना चाहिए। यदि जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन, गलत दस्तावेज, लाभार्थियों से अनुचित वसूली या तकनीकी मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना सीधे आम उपभोक्ताओं और ग्रामीण परिवारों से जुड़ी है। ऐसे में योजना में पारदर्शिता, तकनीकी गुणवत्ता और लाभार्थियों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए।</p>
<p><strong>जांच के बाद ही साफ होगी वास्तविक तस्वीर</strong><br />फिलहाल, कोंडागांव जिले में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत लगाए गए सिस्टम को लेकर पूर्व विधायक ने आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित विभाग की विस्तृत प्रतिक्रिया भी सामने आना बाकी है। अब यदि विद्युत विभाग की ओर से मौके पर तकनीकी और दस्तावेजी जांच कराई जाती है, तो इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम हुआ है या कहीं नियमों से हटकर गतिविधियां हुई हैं। जांच रिपोर्ट के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी तय हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 14:31:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Blood For Mobile EMI: मोबाइल की EMI नहीं चुकाई तो युवक को बनाया बंधक! खून बेचने के लिए ब्लड बैंक ले जाने का आरोप, पुलिस पर भी उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ। </strong>उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से मोबाइल की EMI वसूली को लेकर कथित प्रताड़ना का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। निगोहां थाना क्षेत्र के राजारामखेड़ा गांव के रहने वाले नेवल के परिवार ने आरोप लगाया है कि मोबाइल की किश्त का भुगतान न होने पर कुछ लोगों ने युवक को जबरन अपने साथ ले जाकर बंधक बना लिया। परिवार का दावा है कि उसे ब्लड बैंक ले जाकर जबरन एक यूनिट खून निकलवाया गया और इसके बाद कई दिनों तक एक मकान में कैद रखकर उससे मजदूरी कराई गई।</p>
<p>मामला तब और गंभीर हो गया जब परिजनों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/blood-for-mobile-emi-young-man-held-hostage-for-not/article-12486"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/lucknow_mobile_emi_forced_blood_extraction_news_1789455668.webp" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ। </strong>उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से मोबाइल की EMI वसूली को लेकर कथित प्रताड़ना का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। निगोहां थाना क्षेत्र के राजारामखेड़ा गांव के रहने वाले नेवल के परिवार ने आरोप लगाया है कि मोबाइल की किश्त का भुगतान न होने पर कुछ लोगों ने युवक को जबरन अपने साथ ले जाकर बंधक बना लिया। परिवार का दावा है कि उसे ब्लड बैंक ले जाकर जबरन एक यूनिट खून निकलवाया गया और इसके बाद कई दिनों तक एक मकान में कैद रखकर उससे मजदूरी कराई गई।</p>
<p>मामला तब और गंभीर हो गया जब परिजनों ने आरोप लगाया कि युवक को छोड़ने के बदले उनसे मोबाइल की किश्त के नाम पर पैसे मांगे गए और भुगतान नहीं करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। परिवार के मुताबिक, स्थानीय थाने में शिकायत के बावजूद तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पीड़ित की बुजुर्ग मां डीसीपी दक्षिणी के पास पहुंचीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीसीपी ने मुकदमा दर्ज करने, आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिस की भूमिका की जांच के निर्देश दिए हैं।</p>
<p><strong>₹21,500 के मोबाइल से शुरू हुआ विवाद</strong><br />परिवार के मुताबिक, करीब एक साल पहले नेवल ने निगोहां कस्बे की एक मोबाइल दुकान से लगभग 21,500 कीमत का Samsung मोबाइल फोन फाइनेंस पर खरीदा था। बताया गया कि फोन के लिए जीरो डाउन पेमेंट की व्यवस्था थी और हर महीने 2,799 की 12 किश्तें चुकानी थीं। परिजनों का कहना है कि शुरुआत में ही एक किश्त बकाया हो गई थी। इसके बाद दुकान से जुड़े लोग उनके घर पहुंचे और कथित तौर पर मोबाइल फोन अपने साथ ले गए। परिवार का दावा है कि फोन वापस ले लिए जाने के बावजूद कुछ समय बाद फिर से बकाया रकम को लेकर दबाव बनाया जाने लगा। यहीं से शुरू हुआ किश्त का विवाद बाद में कथित तौर पर युवक को बंधक बनाए जाने तक पहुंच गया।</p>
<p><strong>8 सितंबर को युवक को घर से ले जाने का आरोप</strong><br />पीड़ित के भाई राजकुमार और मां जदूराई के अनुसार, 8 सितंबर को दो लोग स्कूटी से उनके गांव पहुंचे। परिवार का आरोप है कि दोनों ने नेवल को अपने साथ चलने के लिए कहा और उसे जबरन अपने साथ ले गए। परिजनों को शुरुआत में यह स्पष्ट नहीं था कि युवक को कहां ले जाया गया है। परिवार के मुताबिक, बाद में उन्हें पता चला कि नेवल को एक ब्लड बैंक ले जाया गया था।</p>
<p><strong>'EMI के बदले खून' निकलवाने का आरोप</strong><br />परिवार का सबसे गंभीर आरोप यह है कि नेवल को ब्लड बैंक ले जाकर उसका एक यूनिट खून निकलवाया गया। परिजनों का दावा है कि यह सब उसकी इच्छा के खिलाफ किया गया और इसे मोबाइल की किश्त के विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला केवल EMI वसूली या मोबाइल फाइनेंस विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें जबरन ले जाने, अवैध तरीके से रोकने, धमकी देने और अन्य गंभीर अपराधों के पहलुओं की जांच की जरूरत होगी। हालांकि, युवक से रक्त किस परिस्थिति में लिया गया, ब्लड बैंक में उसकी सहमति किस तरह दर्ज हुई और रक्त लेने की पूरी प्रक्रिया क्या थी, इन सवालों का जवाब पुलिस की जांच और संबंधित संस्थान के रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगा।</p>
<p><strong>ब्लड बैंक के बाद मकान में बंधक बनाने का दावा</strong><br />परिजनों के अनुसार, ब्लड बैंक ले जाने के बाद नेवल को सदर इलाके के एक मकान में रखा गया। परिवार का आरोप है कि युवक को कई दिनों तक वहां से बाहर नहीं निकलने दिया गया और उससे जबरन मजदूरी भी कराई गई। इस दौरान परिवार उसकी स्थिति को लेकर परेशान रहा। आरोप है कि युवक से संपर्क सीमित रखा गया और परिजनों को भी उसकी सही स्थिति की जानकारी नहीं मिल पा रही थी। मामले का यह पहलू पुलिस जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यदि युवक को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी स्थान पर रखा गया था तो पुलिस को उसके बयान, उस मकान की पहचान, वहां मौजूद लोगों और CCTV या अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच करनी होगी।</p>
<p><strong>भाई को फोन कर मांगे 2,799, जान से मारने की धमकी का आरोप</strong><br />पीड़ित के भाई राजकुमार का आरोप है कि इस दौरान आरोपियों की ओर से उन्हें फोन किया गया। कथित तौर पर मोबाइल की किश्त के नाम पर 2,799 की मांग की गई। परिवार का आरोप है कि पैसे नहीं देने पर नेवल को जान से मारने की धमकी दी गई। उन्हें कथित तौर पर धमकाया गया कि अगर रकम नहीं दी गई तो युवक की हत्या कर उसे गोमती नदी में फेंक दिया जाएगा। इन धमकियों की सत्यता और फोन कॉल की वास्तविकता की जांच पुलिस के लिए अहम होगी। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन, ऑडियो रिकॉर्डिंग या अन्य डिजिटल साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।</p>
<p><strong>पांच दिन बाद रैपिडो कैब से थाने भेजने का आरोप</strong><br />पीड़ित परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। परिवार का दावा है कि उन्होंने निगोहां थाने में शिकायत की थी, लेकिन शुरुआती स्तर पर उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। परिजनों के मुताबिक, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद करीब पांचवें दिन नेवल को Rapido कैब के जरिए थाने भेजा गया। परिवार का आरोप है कि कैब का किराया भी उनसे ही भरवाया गया। जब बदहवास हालत में नेवल थाने पहुंचा तो परिजनों ने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। परिवार का दावा है कि उन्हें कार्रवाई का भरोसा देने के बजाय पुलिसकर्मियों ने कथित रूप से उन्हें ही फंसाने की धमकी दी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की भूमिका की जांच के आदेश दिए जाने के बाद अब यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर क्या कार्रवाई की गई थी और उसमें किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं।</p>
<p><strong>बुजुर्ग मां पहुंचीं DCP के पास</strong><br />स्थानीय थाने से अपेक्षित मदद नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए पीड़ित की बुजुर्ग मां जदूराई ने उच्च पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई। वह DCP दक्षिणी मोहम्मद मुश्ताक के पास पहुंचीं और पूरे मामले की जानकारी दी। DCP ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस को आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, उनकी गिरफ्तारी के प्रयास करने और स्थानीय पुलिस की भूमिका की जांच करने को कहा गया है। अब मामले की जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि युवक को किन लोगों ने अपने साथ लिया, उसे कहां-कहां ले जाया गया, रक्त कहां और किन परिस्थितियों में लिया गया तथा उसे कथित तौर पर कितने समय तक बंधक बनाकर रखा गया।</p>
<p><strong>पुलिस जांच में इन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी</strong><br />इस पूरे मामले में कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा</p>
<ul>
<li>नेवल को घर से कौन-कौन लोग लेकर गए?</li>
<li>क्या उसे उसकी इच्छा के खिलाफ कहीं ले जाया गया?</li>
<li>ब्लड बैंक में रक्त लेने की प्रक्रिया कैसे हुई?</li>
<li>क्या उसके पास रक्तदान की सहमति से संबंधित कोई रिकॉर्ड था?</li>
<li>उसे जिस मकान में रखने का आरोप है, वह किसका था?</li>
<li>वहां कितने समय तक युवक को रखा गया?</li>
<li>क्या उससे जबरन मजदूरी कराई गई?</li>
<li>₹2,799 मांगने वाले फोन कॉल किस नंबर से किए गए?</li>
<li>स्थानीय थाने में शिकायत मिलने के बाद क्या कार्रवाई की गई?</li>
<li>क्या पुलिसकर्मियों की ओर से किसी तरह की लापरवाही हुई?</li>
</ul>
<p>इन सभी बिंदुओं की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में घटनाक्रम क्या था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे?</p>
<p><strong>EMI वसूली के नाम पर ऐसी कार्रवाई पर बड़ा सवाल</strong><br />मोबाइल या किसी अन्य सामान की EMI का भुगतान न होना एक वित्तीय विवाद हो सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति को कथित तौर पर जबरन ले जाना, बंधक बनाना, धमकी देना या उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक प्रक्रिया कराना बेहद गंभीर आरोप हैं। ऐसे मामलों में वसूली की वैध प्रक्रिया और कथित दबाव या हिंसा के बीच अंतर करना जरूरी है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। आरोपी पक्ष का बयान और ब्लड बैंक सहित अन्य संबंधित संस्थानों के रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, परिवार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में आरोप साबित होना बाकी है। पुलिस जांच के निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>अपराध</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 14:11:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Hasdeo Arandh News: तारा कोल ब्लॉक की नीलामी से फिर गरमाया हसदेव का मुद्दा, जंगल, आदिवासी अधिकार और सरकार की नीति पर उठे बड़े सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर।</strong> छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में तारा कोयला ब्लॉक की नीलामी के बाद एक बार फिर जंगल और खनन का मुद्दा गरमा गया है। तारा कोल ब्लॉक को CG Syngas and Chemicals Limited ने हासिल किया है, जिसका संबंध अडानी समूह की कॉरपोरेट संरचना से बताया जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद पर्यावरण कार्यकर्ताओं और हसदेव क्षेत्र में लंबे समय से आंदोलन कर रहे आदिवासी समुदायों की चिंताएं फिर सामने आई हैं। उनका कहना है कि तारा क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है और यहां खनन बढ़ने से जंगल, वन्यजीवों तथा स्थानीय समुदायों पर गंभीर असर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/hasdeo-arandh-news-hasdeos-issue-heated-up-again-with-the/article-12485"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/coal_reuters.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर।</strong> छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में तारा कोयला ब्लॉक की नीलामी के बाद एक बार फिर जंगल और खनन का मुद्दा गरमा गया है। तारा कोल ब्लॉक को CG Syngas and Chemicals Limited ने हासिल किया है, जिसका संबंध अडानी समूह की कॉरपोरेट संरचना से बताया जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद पर्यावरण कार्यकर्ताओं और हसदेव क्षेत्र में लंबे समय से आंदोलन कर रहे आदिवासी समुदायों की चिंताएं फिर सामने आई हैं। उनका कहना है कि तारा क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है और यहां खनन बढ़ने से जंगल, वन्यजीवों तथा स्थानीय समुदायों पर गंभीर असर पड़ सकता है।</p>
<p>तारा की नीलामी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि हसदेव अरण्य में नए कोयला ब्लॉकों के विस्तार को लेकर छत्तीसगढ़ में पहले भी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध होता रहा है। 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन से जुड़े मुद्दे पर सर्वसम्मति से एक शासकीय संकल्प पारित किया था। इसके बाद तारा समेत कुछ कोयला ब्लॉकों की नीलामी को लेकर भी राज्य सरकार की आपत्ति सामने आई थी। अब तारा ब्लॉक की नीलामी के बाद सवाल उठ रहा है कि राज्य की मौजूदा नीति में आखिर क्या बदलाव आया और हसदेव को लेकर सरकार का वर्तमान रुख क्या है?<img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-09/images6.jpg" alt="images" width="739" height="415"/></p>
<p><strong>तारा कोल ब्लॉक क्यों है इतना महत्वपूर्ण?</strong><br />हसदेव अरण्य छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्से में फैला एक महत्वपूर्ण वन क्षेत्र है। यह इलाका केवल खनिज संपदा के कारण महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यहां मौजूद घने जंगल, जल स्रोत, वन्यजीव और आदिवासी आबादी इसे पर्यावरणीय और सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील बनाते हैं।</p>
<p>तारा कोल ब्लॉक भी इसी व्यापक वन क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े समूहों का दावा है कि इस क्षेत्र में खनन गतिविधियों के विस्तार से बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। पेड़ों की कटाई के साथ-साथ सड़क, खनन ढांचे और परिवहन व्यवस्था के विस्तार से जंगल के अलग-अलग हिस्सों के बीच संपर्क प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।</p>
<p>हालांकि, किसी परियोजना के वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव और पेड़ों की कटाई की अंतिम संख्या संबंधित पर्यावरणीय मंजूरियों, परियोजना दस्तावेजों और स्वीकृत खनन योजना पर निर्भर करेगी। इसलिए अलग-अलग पक्षों की ओर से बताए जा रहे आंकड़ों को अंतिम सरकारी आंकड़ा मानने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों से मिलान करना जरूरी है।<img src="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgg9YSX5uZL2wV1shHW-pz_6VKfwInIQdTwe4DozXlxK9Qtc8wn-EBoOJCOQCfDc9kfSNuohWNCfbxUHPsqAh1qgyOUu_aVGBjGUxj0ELrJv1hA4bsD09k4XGdXbKI-Wb9MXMY-r6X8qaMqwKcvzIzZrGFLcGavBrN_-gVfvg_18YK6Pkl8ptw75IurWw/s649/coal%20mine.jpeg" alt="Why India Should Rethink Over Coal Mining in Hasdeo Arand Forest"/></p>
<p><strong>हसदेव में पहले से मौजूद हैं कई खनन परियोजनाएं</strong><br />हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन का विवाद नया नहीं है। परसा ईस्ट एंड केते बासन (PEKB) और अन्य कोयला ब्लॉकों को लेकर लंबे समय से विवाद और आंदोलन होते रहे हैं। खनन परियोजनाओं के संचालन और विस्तार को लेकर स्थानीय ग्रामीणों तथा पर्यावरण कार्यकर्ताओं की ओर से विरोध किया जाता रहा है। आलोचकों का कहना है कि हसदेव में एक के बाद एक खनन परियोजनाओं के विस्तार से जंगल पर सामूहिक प्रभाव को अलग-अलग परियोजनाओं के स्तर पर देखने के बजाय पूरे लैंडस्केप के स्तर पर देखने की जरूरत है। उनके मुताबिक, एक परियोजना का असर केवल उसके लीज क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सड़क, बिजली, पानी, परिवहन और खनन से जुड़ी अन्य गतिविधियां आसपास के क्षेत्र को भी प्रभावित कर सकती हैं।</p>
<p><strong>सबसे बड़ा सवाल- 2022 के विधानसभा संकल्प का क्या हुआ?</strong><br />तारा कोल ब्लॉक को लेकर राजनीतिक बहस का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 2022 में पारित विधानसभा संकल्प है। उस समय सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने हसदेव अरण्य में खनन विस्तार के विरोध में अपनी सहमति जताई थी। अब तारा की नीलामी के बाद सरकार से यह सवाल पूछा जा रहा है कि उस संकल्प का मौजूदा स्थिति में क्या महत्व रह गया है। यदि सरकार की नीति में बदलाव हुआ है तो इसकी वजह क्या है? क्या परिस्थितियों में ऐसा कोई बदलाव आया है जिसके आधार पर अब तारा जैसे ब्लॉक में व्यावसायिक खनन का रास्ता खुला है? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा का संकल्प उस समय हसदेव को लेकर राज्य की सामूहिक राजनीतिक चिंता को दर्शाता था। ऐसे में सरकार की ओर से इस मुद्दे पर स्पष्ट स्थिति सामने रखना जरूरी हो जाता है।</p>
<p><strong>2023 में नीलामी रोकने की कोशिश का भी जिक्र</strong><br />हसदेव के आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, तारा समेत कुछ कोयला ब्लॉकों की नीलामी का विरोध पहले भी किया गया था। उनका दावा है कि वर्ष 2023 में ग्राम सभाओं और तत्कालीन राज्य सरकार की आपत्तियों के बाद केंद्र स्तर पर कुछ ब्लॉकों को नीलामी प्रक्रिया से हटाया गया था। आंदोलनकारियों का कहना है कि उस समय हसदेव के पर्यावरणीय महत्व और प्रस्तावित हाथी रिजर्व से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आपत्ति दर्ज कराई गई थी। अब जब तारा ब्लॉक की नीलामी दोबारा हुई है, तो वे जानना चाहते हैं कि उस समय की आपत्तियों और राज्य सरकार की वर्तमान स्थिति के बीच क्या बदलाव आया। इस पूरे मामले में राज्य सरकार की ओर से विस्तृत और स्पष्ट जवाब इसलिए महत्वपूर्ण है, ताकि यह सामने आ सके कि नीलामी की मौजूदा प्रक्रिया में राज्य की आपत्ति की स्थिति क्या रही और किन परिस्थितियों में ब्लॉक को फिर नीलामी के लिए उपलब्ध कराया गया।<img src="https://sc0.blr1.cdn.digitaloceanspaces.com/article/174285-cbjuioxdge-1652366530.jpg" alt="Threatened by coal mining, Hasdeo Arand forest is receiving a groundswell  of support on the internet"/></p>
<p><strong>Commercial Mining ने बढ़ाई चिंता</strong><br />तारा कोल ब्लॉक को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहलू इसका Commercial Coal Mining के लिए दिया जाना है। पारंपरिक कैप्टिव कोयला खदानों में उत्पादित कोयला किसी निर्धारित अंतिम उपयोग, जैसे बिजली उत्पादन या अन्य औद्योगिक जरूरतों से जुड़ा हो सकता है। इसके विपरीत कमर्शियल माइनिंग व्यवस्था में निर्धारित नियमों के तहत कोयला निकालकर बाजार में बिक्री की जा सकती है।</p>
<p>इसी वजह से हसदेव के आलोचक इसे केवल एक बिजली परियोजना के लिए कोयला उपलब्ध कराने की योजना से अलग मान रहे हैं। उनका तर्क है कि व्यावसायिक खनन में कोयले के अंतिम उपयोग की बाध्यता अलग प्रकृति की होती है और इससे खनन विस्तार का आर्थिक प्रोत्साहन बढ़ सकता है। हालांकि, तारा ब्लॉक से होने वाले वास्तविक उत्पादन, निवेश, रोजगार और राजस्व से जुड़े आंकड़े परियोजना के आगे के चरणों और संबंधित सरकारी स्वीकृतियों के बाद ही स्पष्ट रूप से सामने आएंगे।</p>
<p><strong>हाथियों के आवास को लेकर चिंता</strong><br />हसदेव क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी लंबे समय से पर्यावरणीय बहस का प्रमुख विषय रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि खनन, सड़क निर्माण और अन्य बुनियादी ढांचे के कारण हाथियों के प्राकृतिक आवास और उनके आवागमन के रास्ते प्रभावित हो सकते हैं।</p>
<p>इसका सीधा संबंध Human-Elephant Conflict से भी जोड़ा जाता है। यदि हाथियों के पारंपरिक रास्ते और भोजन-पानी के प्राकृतिक स्रोत बाधित होते हैं, तो उनके मानव बस्तियों की ओर आने की संभावना बढ़ सकती है। इससे ग्रामीणों और वन्यजीवों दोनों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।<img src="https://encrypted-tbn0.gstatic.com/images?q=tbn:ANd9GcTKakALl_oi6eoGR6CX_XIyWeEucdn_OmvzWofaDMoQcaXsHO9QJ4zsTiJD&amp;s=10" alt="LMRSU sounds alarm over escalating human-elephant conflict in Lotha region  - Nagaland TribuneNagaland Tribune"/></p>
<p>हसदेव के मामले में यह चिंता इसलिए गंभीर है क्योंकि क्षेत्र में पहले भी हाथियों की आवाजाही और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं सामने आती रही हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नए खनन प्रोजेक्ट का मूल्यांकन केवल पेड़ों की संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि पूरे वन्यजीव आवास और उसके पारिस्थितिक तंत्र पर पड़ने वाले प्रभाव के आधार पर किया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>जंगल के साथ जुड़ी है हजारों लोगों की जिंदगी</strong><br />हसदेव अरण्य का मुद्दा सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं है। इस क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी और स्थानीय ग्रामीण समुदायों की आजीविका, संस्कृति और दैनिक जरूरतें जंगल से गहराई से जुड़ी हुई हैं। वन उपज, खेती, जल स्रोत और जंगल पर निर्भर अन्य गतिविधियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में खनन परियोजना आने पर जमीन के उपयोग में बदलाव, विस्थापन, आजीविका और सामुदायिक संसाधनों पर प्रभाव जैसे सवाल भी उठते हैं। यही कारण है कि स्थानीय समुदायों की ओर से लंबे समय से ग्राम सभा, वन अधिकार और पुनर्वास जैसे मुद्दों को उठाया जाता रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि किसी भी परियोजना में स्थानीय लोगों की भागीदारी और कानूनी अधिकारों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित होना चाहिए।</p>
<p><strong>300 किलोमीटर पैदल चलकर रायपुर पहुंचे थे ग्रामीण</strong><br />हसदेव आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अक्टूबर 2021 में क्षेत्र के ग्रामीणों ने लगभग 300 किलोमीटर की पदयात्रा कर रायपुर पहुंचकर अपनी मांगें सरकार के सामने रखी थीं। यह आंदोलन अचानक पैदा हुआ विरोध नहीं था, बल्कि कई वर्षों से चल रहे संघर्ष का हिस्सा था। ग्रामीणों की मुख्य चिंता जंगल और जमीन के साथ-साथ अपनी पारंपरिक आजीविका और अधिकारों को लेकर रही है। समय-समय पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे को उठाया है।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2021/10/24/sslh-adsv_1635064538.jpg" alt="Dhamtari reached a distance of 150 km, when his health deteriorated, 300  villagers returned home, two and a half thousand continued the journey"/></p>
<p><strong>सरकार के सामने अब कई सवाल</strong><br />तारा ब्लॉक की नीलामी के बाद राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल हसदेव को लेकर अपनी वर्तमान नीति स्पष्ट करने का है। सरकार यदि खनन को विकास और ऊर्जा जरूरतों के लिए आवश्यक मानती है, तो उसे यह बताना होगा कि पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को कम करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। दूसरी ओर, यदि सरकार हसदेव के जंगल और स्थानीय समुदायों की चिंताओं को गंभीरता से लेती है, तो उसे यह भी स्पष्ट करना होगा कि नई खनन परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय सुरक्षा और स्थानीय सहमति के मानकों को किस तरह लागू किया जाएगा। तारा की नीलामी के बाद बहस अब केवल एक कोयला ब्लॉक तक सीमित नहीं रह गई है। यह सवाल बन गया है कि छत्तीसगढ़ में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा और हसदेव जैसे संवेदनशील वन क्षेत्र का भविष्य कौन तय करेगा।</p>
<p><strong>नीलामी के बाद आगे की प्रक्रिया क्या होगी?</strong><br />कोयला ब्लॉक की नीलामी पूरी होना अपने आप में खनन शुरू होने के बराबर नहीं है। किसी भी बड़े खनन प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित कानूनों और नियमों के तहत विभिन्न स्वीकृतियों और प्रक्रियाओं का पालन करना होता है। इसमें पर्यावरणीय मंजूरी, वन संबंधी अनुमति और परियोजना से जुड़े अन्य वैधानिक प्रावधान शामिल हो सकते हैं। इसलिए आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तारा कोल ब्लॉक के लिए कौन-कौन सी मंजूरियां ली जाती हैं, पर्यावरणीय आकलन में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और स्थानीय समुदायों की आपत्तियों तथा अधिकारों का किस तरह समाधान किया जाता है।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2020/07/05/coal-mining_1593950441.jpg" alt="Coal block auction 1140 companies involved in technical session"/></p>
<p>हसदेव अरण्य की कहानी को सिर्फ 'कोयला बनाम जंगल' की बहस में समेटना आसान है, लेकिन असली सवाल इससे कहीं बड़ा है। एक तरफ देश की ऊर्जा और औद्योगिक जरूरतें हैं, तो दूसरी तरफ जंगल, वन्यजीव, जल स्रोत और उन पर निर्भर स्थानीय समुदाय। तारा कोल ब्लॉक की नीलामी ने इसी पुराने सवाल को फिर सामने ला दिया है, क्या विकास की कीमत पर्यावरण और स्थानीय लोगों के अधिकारों से चुकाई जाएगी, या सरकार ऐसा रास्ता तलाशेगी जिसमें आर्थिक जरूरतों और हसदेव के संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जा सके? आने वाले समय में परियोजना से जुड़ी मंजूरियां और सरकार का आधिकारिक रुख इस बहस की दिशा तय करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 13:35:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Gurugram Hit and Run Case: सड़क पर महिला बाइकर को टक्कर… फिर कार लेकर फरार! CCTV वायरल होते ही पुलिस ने राजस्थान से आरोपी को दबोचा, 307 में केस</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>गुरुग्राम।</strong> गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर महिला बाइकर को कार से टक्कर मारने के कथित हिट-एंड-रन मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मामले के आरोपी कल्याण बैंसला को राजस्थान के दौसा से गिरफ्तार किया है। पुलिस टीम आरोपी को गुरुग्राम लेकर लौट रही है। इस मामले में सामने आए CCTV फुटेज और पीड़ित पक्ष की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच तेज की थी। अब आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा 307 (IPC) के तहत कार्रवाई की गई है।</p>
<p>पुलिस के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की तलाश के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/gurugram-hit-and-run-case-woman-biker-hit-on-the/article-12484"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/image-(1)1.png" alt=""></a><br /><p><strong>गुरुग्राम।</strong> गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर महिला बाइकर को कार से टक्कर मारने के कथित हिट-एंड-रन मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मामले के आरोपी कल्याण बैंसला को राजस्थान के दौसा से गिरफ्तार किया है। पुलिस टीम आरोपी को गुरुग्राम लेकर लौट रही है। इस मामले में सामने आए CCTV फुटेज और पीड़ित पक्ष की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच तेज की थी। अब आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा 307 (IPC) के तहत कार्रवाई की गई है।</p>
<p>पुलिस के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की तलाश के लिए टीम राजस्थान भेजी गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने घटनाक्रम से जुड़े CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को भी खंगाला। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कार और महिला बाइक सवार के बीच हुई टक्कर का घटनाक्रम सामने आने के बाद मामले को लेकर लोगों में भी काफी चर्चा हुई थी।</p>
<p><strong>देर रात थाने पहुंचे परिजन, की सख्त कार्रवाई की मांग</strong><br />घटना के बाद सोमवार देर रात पीड़िता सिया उर्फ शिवानी चौहान के पिता रोशन चौहान, उनके भाई और अन्य परिजन सेक्टर-56 पुलिस स्टेशन पहुंचे। परिजनों ने पुलिस को लिखित शिकायत देकर आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। परिवार का कहना है कि घटना को महज सड़क दुर्घटना मानकर छोड़ना उचित नहीं है। उनका आरोप है कि जिस तरह कार ने महिला बाइक सवार को टक्कर मारी, उससे उसकी जान को गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। परिजनों ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।</p>
<p><strong>CCTV फुटेज सामने आने के बाद जांच में आया नया मोड़</strong><br />मामले में CCTV फुटेज सामने आने के बाद पुलिस की जांच को महत्वपूर्ण सुराग मिला। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वीडियो में कार चालक और महिला बाइकर के बीच हुई टक्कर का घटनाक्रम दिखाई देता है। पुलिस ने इसी फुटेज और शिकायत के आधार पर मामले की धाराओं की समीक्षा की। DCP East संदीप मलिक के अनुसार, उपलब्ध वीडियो को देखने के बाद प्रथम दृष्टया यह मामला सामान्य सड़क दुर्घटना से अलग प्रतीत हुआ। पुलिस का कहना है कि घटना के तरीके को देखते हुए हत्या के प्रयास की धारा जोड़ने का निर्णय लिया गया।</p>
<p><strong>'बेटी काफी दूर तक घिसटती चली गई'</strong><br />पीड़िता के पिता रोशन चौहान ने पुलिस से मुलाकात के बाद अपनी बेटी के साथ हुई घटना को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि CCTV फुटेज में उनकी बेटी कार की टक्कर के बाद काफी दूर तक घिसटती हुई दिखाई देती है। परिवार के मुताबिक, घटना के बाद सिया काफी घबरा गई थीं और इसी वजह से उन्होंने तत्काल घरवालों को पूरी जानकारी नहीं दी। बाद में जब परिवार को घटना का पता चला तो उन्होंने पुलिस से संपर्क किया। पीड़िता के पिता का कहना है कि उनकी बेटी को गंभीर नुकसान नहीं हुआ, यह राहत की बात है, लेकिन घटना की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। परिवार ने कहा है कि वह न्याय के लिए हर संभव कानूनी रास्ता अपनाएगा।</p>
<p><strong>पहले से दर्ज थी FIR, अब हत्या के प्रयास की धारा जोड़ी गई</strong><br />पुलिस ने बताया कि घटना को लेकर पहले से एक सुओ मोटू FIR दर्ज की गई थी। थाने पहुंचने पर पीड़िता के परिवार को FIR की कॉपी भी उपलब्ध कराई गई। बाद में सामने आए घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले में IPC की धारा 307 जोड़ी गई। पुलिस अब मामले में आरोपी से पूछताछ करेगी और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच करेगी। इसके साथ ही पीड़िता का बयान भी दर्ज किया जाएगा, जिससे घटना की पूरी परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सके।</p>
<p><strong>पीड़िता के वकील ने भी की कड़ी कार्रवाई की मांग</strong><br />पीड़िता की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने भी पुलिस से मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि CCTV फुटेज में सामने आए घटनाक्रम की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को सभी तथ्यों की गहराई से जांच करनी चाहिए। अब पुलिस की जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि टक्कर किन परिस्थितियों में हुई, आरोपी का उस समय क्या इरादा था और घटना के बाद वह मौके से क्यों चला गया। इन सवालों के जवाब आरोपी से पूछताछ और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद सामने आ सकते हैं।</p>
<p><strong>आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब आगे क्या?</strong><br />कल्याण बैंसला की गिरफ्तारी के बाद अब मामले की जांच अगले चरण में पहुंच गई है। पुलिस आरोपी को गुरुग्राम लाकर पूछताछ करेगी। इसके बाद उपलब्ध साक्ष्यों, CCTV फुटेज, पीड़िता के बयान और अन्य तथ्यों के आधार पर पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी। फिलहाल, इस मामले में पुलिस की जांच जारी है और अदालत में आरोप साबित होना बाकी है। इसलिए आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम परिणाम तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 12:26:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अकेले अफगानिस्तान घूमना पड़ा भारी! बामियान में भारतीय महिला व्लॉगर को रोका, ‘गिरफ्तारी’ की बात से डरीं; सोशल मीडिया पर मांगी मदद</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>अफगानिस्तान की यात्रा कर रहीं केरल की ट्रैवल व्लॉगर अरुणिमा ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए एक ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों का ध्यान खींचा। अरुणिमा का दावा है कि अफगानिस्तान के बामियान प्रांत में स्थानीय अधिकारियों ने उन्हें रोककर पूछताछ की और कहा कि एक महिला अकेले यात्रा नहीं कर सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए उन्हें गिरफ्तारी की चेतावनी भी दी गई। इस घटनाक्रम के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर SOS संदेश जारी कर मदद मांगी और भारतीय दूतावास से संपर्क कराने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/international/had-to-travel-alone-in-afghanistan-indian-female-vlogger-stopped/article-12483"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/image4.png" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>अफगानिस्तान की यात्रा कर रहीं केरल की ट्रैवल व्लॉगर अरुणिमा ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए एक ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों का ध्यान खींचा। अरुणिमा का दावा है कि अफगानिस्तान के बामियान प्रांत में स्थानीय अधिकारियों ने उन्हें रोककर पूछताछ की और कहा कि एक महिला अकेले यात्रा नहीं कर सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए उन्हें गिरफ्तारी की चेतावनी भी दी गई। इस घटनाक्रम के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर SOS संदेश जारी कर मदद मांगी और भारतीय दूतावास से संपर्क कराने की अपील की।</p>
<p>हालांकि बाद में अरुणिमा ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों के साथ बातचीत और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मामला सुलझ गया तथा उन्हें आगे की यात्रा की अनुमति मिल गई। उनके दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इस घटना ने अफगानिस्तान में महिलाओं की स्वतंत्र आवाजाही और यात्रा संबंधी नियमों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।</p>
<p><strong>बामियान पहुंचते ही अधिकारियों ने रोका</strong><br />'Backpacker Arunima' नाम से सोशल मीडिया पर सक्रिय अरुणिमा के अनुसार, वह शाम के समय बामियान पहुंची थीं। यहां पहुंचने के तुरंत बाद स्थानीय अधिकारियों ने उनसे पासपोर्ट, वीजा, यात्रा परमिट और यात्रा के उद्देश्य से जुड़े कई सवाल पूछे। शुरुआत में यह सामान्य सुरक्षा जांच जैसी लगी, लेकिन बातचीत आगे बढ़ने पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई।</p>
<p>अरुणिमा का कहना है कि अधिकारियों ने उन्हें बताया कि अफगानिस्तान में किसी महिला का अकेले यात्रा करना नियमों के खिलाफ माना जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों ने कहा कि वह निर्धारित नियमों का पालन नहीं कर रही हैं और इसके कारण उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। यह सुनकर वह घबरा गईं और उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी।</p>
<p><strong>पहले भी सामने आ चुकी थीं ऐसी मुश्किलें</strong><br />अरुणिमा के मुताबिक, बामियान में हुई यह घटना उनके लिए पहली नहीं थी। उन्होंने बताया कि इससे पहले जलालाबाद में भी उन्हें यात्रा परमिट लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ा था। उनका आरोप है कि अकेले यात्रा कर रही महिला होने के कारण उन्हें आवश्यक अनुमति देने में अनिच्छा दिखाई गई।उनका कहना है कि अफगानिस्तान में यात्रा के दौरान उन्हें कई बार यह महसूस हुआ कि महिला यात्रियों के लिए नियम और व्यवहार पुरुष यात्रियों की तुलना में अलग हैं। यही वजह थी कि बामियान में स्थिति गंभीर होते ही उन्होंने उन लोगों से संपर्क किया, जिन्होंने पहले उनकी यात्रा में सहायता की थी।</p>
<p><strong>मदद के लिए किया संपर्क, फिर शुरू हुई बातचीत</strong><br />स्थिति को संभालने के लिए अरुणिमा ने एक स्थानीय संपर्क व्यक्ति से मदद मांगी। उनके अनुसार, उस व्यक्ति ने अधिकारियों से बातचीत की और उनकी यात्रा के उद्देश्य तथा दस्तावेजों को लेकर स्पष्टीकरण दिया। इसके बाद मामला धीरे-धीरे शांत हुआ। व्लॉगर का कहना है कि अधिकारियों ने उन्हें सलाह दी कि आगे की यात्रा के लिए आवश्यक परमिट साथ रखें और संभव हो तो किसी स्थानीय गाइड के साथ सफर करें। लंबी बातचीत और दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति दे दी गई।</p>
<p><strong>500 किलोमीटर के सफर को लेकर बढ़ी चिंता</strong><br />अरुणिमा ने बताया कि बामियान के बाद उनका अगला पड़ाव उज्बेकिस्तान सीमा की दिशा में था, जिसके लिए उन्हें लगभग 500 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना था। इस मार्ग में कई सुरक्षा चौकियां और चेकपॉइंट पड़ते हैं। उनका कहना है कि बामियान में हुई घटना के बाद उन्हें डर था कि आगे भी इसी तरह की पूछताछ या रोक-टोक का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह थी कि उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपनी स्थिति सार्वजनिक करने का फैसला किया, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत सहायता मिल सके।</p>
<p><strong>सोशल मीडिया पर मांगी मदद</strong><br />घटना के दौरान अरुणिमा ने सोशल मीडिया पर एक SOS पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि वह बामियान में परेशानी में हैं और भारतीय दूतावास से संपर्क स्थापित करने में मदद चाहती हैं। उन्होंने एक कथित आधिकारिक संदेश का अनुवाद भी साझा किया, जिसमें उनके खिलाफ कार्रवाई किए जाने की बात कही गई थी। यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और कई लोगों ने उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने उनसे संपर्क किया और हालात की जानकारी मांगी।</p>
<p><strong>बाद में बदली तस्वीर, आगे बढ़ने की मिली अनुमति</strong><br />कुछ समय बाद अरुणिमा ने एक नया अपडेट जारी किया, जिसमें उन्होंने बताया कि स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हो गई है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के साथ बातचीत सफल रही और उन्हें अपनी यात्रा जारी रखने की अनुमति मिल गई। इस अपडेट के बाद उनके समर्थकों ने राहत की सांस ली। हालांकि शुरुआती दावों और बाद की स्थिति के बीच अंतर को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा भी शुरू हो गई।</p>
<p><strong>'सिर्फ महिला होने की वजह से परेशानी'</strong><br />अरुणिमा ने अपने अनुभव को महिलाओं की स्वतंत्र यात्रा से जोड़ते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि यह समस्या मुख्य रूप से उनके महिला होने की वजह से पैदा हुई। उन्होंने दावा किया कि उनके कई पुरुष मित्र अकेले अफगानिस्तान की यात्रा कर चुके हैं और उन्हें ऐसी परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ा।</p>
<p>उन्होंने यह भी बताया कि जिन महिला यात्रियों को वह जानती हैं, वे आमतौर पर किसी गाइड, स्थानीय समूह या पुरुष साथी के साथ यात्रा करती थीं। इसलिए उनके लिए हालात अपेक्षाकृत आसान रहे। अरुणिमा के अनुसार, उन्होंने भी स्थानीय सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा के दौरान अधिकतर समय पर्दे और स्थानीय रीति-रिवाजों का पालन करने की कोशिश की।</p>
<p><strong>गिरफ्तारी का दावा और वास्तविक स्थिति</strong><br />पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वास्तव में अरुणिमा को गिरफ्तार किया गया था या केवल पूछताछ और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत रोका गया था। अब तक उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से उनके सोशल मीडिया पोस्ट और व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित है। किसी स्वतंत्र स्रोत या आधिकारिक बयान से गिरफ्तारी के दावे की पुष्टि नहीं हुई है।</p>
<p>हालांकि इतना जरूर स्पष्ट है कि बामियान में उन्हें रोका गया, दस्तावेजों की जांच हुई, यात्रा परमिट और अकेले यात्रा को लेकर सवाल उठाए गए तथा कुछ समय तक उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। बाद में बातचीत के जरिए स्थिति सामान्य हुई और उन्हें अपनी यात्रा जारी रखने की अनुमति मिल गई।</p>
<p><strong>महिलाओं की यात्रा स्वतंत्रता पर फिर छिड़ी बहस</strong><br />अरुणिमा की यह घटना केवल एक यात्री के अनुभव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन चुनौतियों को भी सामने लाती है जिनका सामना कई महिलाएं दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अकेले यात्रा करते समय करती हैं। अफगानिस्तान जैसे देशों में सुरक्षा, स्थानीय नियमों और सामाजिक प्रतिबंधों के कारण महिला यात्रियों के लिए परिस्थितियां और अधिक जटिल हो सकती हैं। फिलहाल, अरुणिमा अपनी यात्रा जारी रखे हुए हैं, लेकिन उनका अनुभव सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है और महिलाओं की स्वतंत्र यात्रा को लेकर एक बार फिर बहस को जन्म दे रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 11:50:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>UPI Payment Charges: 2,000 तक UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई चार्ज, सरकार ने बैंकों को दिया बड़ा निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> UPI से रोजाना पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के लिए राहत की खबर है। सरकार ने साफ कर दिया है कि 2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर ग्राहकों से किसी भी तरह का शुल्क नहीं वसूल सकते। यह नियम सीधे तौर पर उन डिजिटल भुगतानों पर लागू होगा, जो UPI या RuPay से संचालित डेबिट कार्ड के जरिए किए जाते हैं।</p>
<p><strong>UPI पेमेंट पर सीधे या छिपे तौर पर भी नहीं लगेगा चार्ज</strong><br />वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम के तहत नियमों को स्पष्ट किया गया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/upi-payment-charges-no-charges-will-be-levied-on-upi/article-12482"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/upi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> UPI से रोजाना पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के लिए राहत की खबर है। सरकार ने साफ कर दिया है कि 2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर ग्राहकों से किसी भी तरह का शुल्क नहीं वसूल सकते। यह नियम सीधे तौर पर उन डिजिटल भुगतानों पर लागू होगा, जो UPI या RuPay से संचालित डेबिट कार्ड के जरिए किए जाते हैं।</p>
<p><strong>UPI पेमेंट पर सीधे या छिपे तौर पर भी नहीं लगेगा चार्ज</strong><br />वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम के तहत नियमों को स्पष्ट किया गया है। इसके मुताबिक बैंक और पेमेंट सिस्टम से जुड़े संस्थान 2,000 तक के निर्धारित डिजिटल लेनदेन के लिए ग्राहक से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं ले सकते। यानी सामान्य UPI पेमेंट करते समय यूजर पर किसी तरह का अतिरिक्त चार्ज डालने की अनुमति नहीं होगी।</p>
<p><strong>2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर क्या होगा?</strong><br />सरकार के इस स्पष्टीकरण का मतलब यह नहीं है कि हर तरह के डिजिटल पेमेंट पर MDR यानी Merchant Discount Rate हमेशा शून्य रहेगा। निर्धारित सीमा से ऊपर आने वाले कुछ चुनिंदा लेनदेन में MDR का प्रावधान हो सकता है। हालांकि, ये शुल्क पारंपरिक डेबिट या क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर लगने वाले MDR की तुलना में कम रखे जाने की बात कही गई है।</p>
<p><strong>UPI चार्ज को लेकर क्यों उठ रहे थे सवाल?</strong><br />पिछले कुछ समय से UPI के जरिए होने वाले भुगतान पर संभावित शुल्क को लेकर चर्चा तेज थी। डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल लगातार बढ़ने के बीच यह सवाल भी उठ रहा था कि भविष्य में UPI यूजर्स से ट्रांजैक्शन फीस ली जाएगी या नहीं। सरकार पहले ही उपभोक्ताओं से UPI भुगतान पर शुल्क नहीं लेने की बात स्पष्ट कर चुकी थी। अब नए नियमों के जरिए इस व्यवस्था को लेकर स्थिति और साफ की गई है।</p>
<p><strong>आम यूजर्स के लिए क्या बदलेगा?</strong><br />अगर आप दुकान, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या किसी व्यक्ति को 2,000 तक का भुगतान UPI के जरिए करते हैं, तो इस भुगतान के लिए बैंक की ओर से आपसे अलग से ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लिया जा सकता। सरकार का यह कदम डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने और UPI के इस्तेमाल को आसान बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 11:38:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Jagdalpur Rain News: मूसलाधार बारिश में डूबा जगदलपुर, कई वार्डों में घरों तक पहुंचा पानी; ड्रेनेज सिस्टम पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>जगदलपुर।</strong> बस्तर में मानसून के तेवर एक बार फिर तीखे नजर आए। सोमवार देर रात जगदलपुर में करीब डेढ़ घंटे तक हुई तेज बारिश ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। लगातार बरसते पानी के चलते शहर के कई हिस्सों में सड़कें जलमग्न हो गईं, जबकि निचले इलाकों के कई वार्डों में बारिश का पानी घरों तक पहुंच गया। रात में अचानक बढ़े जलस्तर के कारण लोगों को घरेलू सामान बचाने और घरों से पानी निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।</p>
<p><strong>सड़क पर पानी, नाले हुए ओवरफ्लो</strong><br />भारी बारिश के बाद जगदलपुर के कई प्रमुख मार्गों और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/jagdalpur-heavy-rain-waterlogging-bastar-chhattisgarh/article-12481"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/waterlogged_roads_of_jagdalpur_after_rains_1789450726.webp" alt=""></a><br /><p><strong>जगदलपुर।</strong> बस्तर में मानसून के तेवर एक बार फिर तीखे नजर आए। सोमवार देर रात जगदलपुर में करीब डेढ़ घंटे तक हुई तेज बारिश ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। लगातार बरसते पानी के चलते शहर के कई हिस्सों में सड़कें जलमग्न हो गईं, जबकि निचले इलाकों के कई वार्डों में बारिश का पानी घरों तक पहुंच गया। रात में अचानक बढ़े जलस्तर के कारण लोगों को घरेलू सामान बचाने और घरों से पानी निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।</p>
<p><strong>सड़क पर पानी, नाले हुए ओवरफ्लो</strong><br />भारी बारिश के बाद जगदलपुर के कई प्रमुख मार्गों और अंदरूनी सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई। कुछ इलाकों में हालात ऐसे रहे कि सड़क और नाले के बीच का फर्क तक दिखाई नहीं दे रहा था। इससे दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के साथ पैदल राहगीरों को भी परेशानी उठानी पड़ी। स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़े नालों में पानी की निकासी सुचारु नहीं होने के कारण बारिश का पानी तेजी से रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ा।</p>
<p><strong>निगम के दावों पर बारिश ने उठाए सवाल</strong><br />मानसून से पहले नगर निगम की ओर से नालियों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई तथा जलभराव से निपटने की तैयारियों के दावे किए गए थे। लेकिन पहली ही तेज बारिश में कई इलाकों में पानी भरने से इन दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई जगह नालियों की सफाई और पानी की निकासी पर्याप्त नहीं होने के कारण बारिश का पानी सड़कों से होते हुए घरों तक पहुंच गया। लोगों ने जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने और बड़े नालों की नियमित सफाई की मांग की है।</p>
<p><strong>बस्तर में भारी बारिश का अलर्ट, लोगों से सतर्क रहने की अपील</strong><br />मौसम विभाग की ओर से बस्तर क्षेत्र में भारी बारिश की चेतावनी के बीच जगदलपुर में यह स्थिति सामने आई है। लगातार बारिश की संभावना को देखते हुए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रशासन और नगर निगम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती शहर के जलभराव वाले इलाकों में पानी की निकासी को बेहतर करना और आगामी बारिश के दौरान लोगों को राहत पहुंचाना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/jagdalpur-heavy-rain-waterlogging-bastar-chhattisgarh/article-12481</link>
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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 11:19:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Samsung Galaxy S26 FE: भारत में जल्द होगी बिक्री, 120Hz AMOLED डिस्प्ले और 50MP कैमरा से लैस, जानें फीचर्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Samsung Galaxy S26 FE:</strong> Samsung ने Galaxy S26 FE को अपने नए Fan Edition स्मार्टफोन के तौर पर पेश कर दिया है। फोन में 6.7 इंच का Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले, 120Hz रिफ्रेश रेट, Exynos 2500 प्रोसेसर और ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप जैसे फीचर्स दिए गए हैं। कंपनी के मुताबिक फोन में 4,900mAh बैटरी और 45W वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट भी मिलता है।</p>
<p>Galaxy S26 FE तीन कलर ऑप्शन Blueberry, Graphite और Pistachio में उपलब्ध होगा। भारत में इसकी कीमत को लेकर हाल ही में लीक सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 8GB+128GB मॉडल की कीमत ₹69,999 और 8GB+256GB वेरिएंट की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/tech/samsung-galaxy-s26-fe-will-be-sold-in-india-soon/article-12472"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/samsung-galaxy-s26-fe.webp" alt=""></a><br /><p><strong>Samsung Galaxy S26 FE:</strong> Samsung ने Galaxy S26 FE को अपने नए Fan Edition स्मार्टफोन के तौर पर पेश कर दिया है। फोन में 6.7 इंच का Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले, 120Hz रिफ्रेश रेट, Exynos 2500 प्रोसेसर और ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप जैसे फीचर्स दिए गए हैं। कंपनी के मुताबिक फोन में 4,900mAh बैटरी और 45W वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट भी मिलता है।</p>
<p>Galaxy S26 FE तीन कलर ऑप्शन Blueberry, Graphite और Pistachio में उपलब्ध होगा। भारत में इसकी कीमत को लेकर हाल ही में लीक सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 8GB+128GB मॉडल की कीमत ₹69,999 और 8GB+256GB वेरिएंट की कीमत ₹79,999 हो सकती है। हालांकि, इस कीमत की Samsung की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।</p>
<p><strong>Samsung Galaxy S26 FE की भारत में संभावित कीमत</strong><br />भारत में Galaxy S26 FE के दो स्टोरेज वेरिएंट आने की जानकारी सामने आई है। लीक के अनुसार:</p>
<ul>
<li>8GB RAM + 128GB: ₹69,999</li>
<li>8GB RAM + 256GB: ₹79,999</li>
</ul>
<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में फोन की बिक्री 18 सितंबर 2026 से शुरू हो सकती है। इसलिए खरीदारी से पहले Samsung की आधिकारिक कीमत और लॉन्च ऑफर्स की पुष्टि करना बेहतर होगा।</p>
<p><strong>6.7 इंच का 120Hz Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले</strong><br />Galaxy S26 FE में 6.7 इंच का FHD+ Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले दिया गया है। स्क्रीन 120Hz रिफ्रेश रेट और 1,900 निट्स तक की ब्राइटनेस सपोर्ट करती है। बड़े डिस्प्ले के साथ हाई रिफ्रेश रेट स्क्रॉलिंग, वीडियो देखने और गेमिंग के दौरान स्मूद विजुअल अनुभव देने में मदद कर सकता है।</p>
<p><strong>Exynos 2500 प्रोसेसर से लैस है फोन</strong><br />परफॉर्मेंस के लिए Galaxy S26 FE में 3nm Exynos 2500 प्रोसेसर दिया गया है। Samsung की आधिकारिक स्पेसिफिकेशन लिस्ट में 8GB RAM के साथ 128GB, 256GB और कुछ बाजारों में 512GB स्टोरेज विकल्प बताए गए हैं। हालांकि, अलग-अलग देशों में उपलब्ध वेरिएंट अलग हो सकते हैं। सॉफ्टवेयर की बात करें तो फोन Android 17 पर आधारित One UI 9 के साथ आता है। Samsung ने डिवाइस के लिए लंबे समय तक सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट उपलब्ध कराने का वादा किया है।</p>
<p><strong>50MP ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप</strong><br />फोटोग्राफी के लिए फोन के रियर पैनल पर तीन कैमरे मिलते हैं। इसमें:</p>
<ul>
<li>50MP मेन कैमरा — OIS के साथ</li>
<li>12MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा — 123° फील्ड ऑफ व्यू</li>
<li>8MP टेलीफोटो कैमरा — OIS और 3x ऑप्टिकल जूम के साथ</li>
</ul>
<p>सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 12MP फ्रंट कैमरा दिया गया है। Samsung के मुताबिक फोन 8K वीडियो रिकॉर्डिंग को भी सपोर्ट करता है।</p>
<p><strong>4,900mAh बैटरी और 45W फास्ट चार्जिंग</strong><br />Samsung Galaxy S26 FE में 4,900mAh बैटरी दी गई है। यह 45W वायर्ड चार्जिंग के साथ 15W वायरलेस चार्जिंग को भी सपोर्ट करती है। इसके अलावा Wireless PowerShare का फीचर भी मिलता है। Samsung के मुताबिक 45W एडॉप्टर की मदद से फोन करीब 30 मिनट में 69 प्रतिशत तक चार्ज हो सकता है। हालांकि, 45W चार्जर अलग से बेचा जा सकता है।</p>
<p><strong>IP68 रेटिंग और 193 ग्राम वजन</strong><br />फोन का वजन करीब 193 ग्राम है और इसकी मोटाई 7.4mm बताई गई है। डिवाइस को धूल और पानी से सुरक्षा के लिए IP68 रेटिंग भी मिली है। कनेक्टिविटी के लिए 5G, LTE, Wi-Fi 6E, Wi-Fi Direct और Bluetooth 5.4 जैसे विकल्प मौजूद हैं।</p>
<p><strong>Galaxy S26 FE में मिलेंगे AI फीचर्स</strong><br />Galaxy S26 FE में Samsung के AI फीचर्स को भी शामिल किया गया है। कंपनी ने फोन को फोटो और वीडियो से जुड़े क्रिएटिव कामों के साथ-साथ रोजमर्रा के स्मार्टफोन एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए तैयार किया है। Samsung Galaxy S26 FE बड़े 120Hz AMOLED डिस्प्ले, Exynos 2500 चिपसेट, 50MP OIS कैमरा, 3x टेलीफोटो जूम, 4,900mAh बैटरी और 45W चार्जिंग जैसे फीचर्स के साथ आता है। भारत में इसकी कीमत को लेकर ₹69,999 से शुरुआत और 256GB मॉडल के लिए ₹79,999 की रिपोर्ट सामने आई है, लेकिन आधिकारिक भारतीय कीमत और उपलब्ध ऑफर्स की पुष्टि Samsung की ओर से होने के बाद ही अंतिम मानी जानी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/tech/samsung-galaxy-s26-fe-will-be-sold-in-india-soon/article-12472</link>
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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 10:52:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोटापा है फिर भी शरीर में पोषण की कमी? जानिए पेट भर खाने के बावजूद Vitamin और Protein क्यों हो सकते हैं कम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कई लोगों को लगता है कि अगर शरीर का वजन ज्यादा है और दिन में भरपेट भोजन मिल रहा है, तो शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं हो सकती। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। शरीर का वजन ज्यादा होना और शरीर को पर्याप्त पोषण मिलना दो अलग-अलग बातें हैं। कोई व्यक्ति ओवरवेट या मोटापे का शिकार होने के बावजूद विटामिन, मिनरल्स, प्रोटीन या अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी से जूझ सकता है। खासकर शहरी जीवनशैली में ज्यादा कैलोरी लेकिन कम पोषण वाला भोजन इस समस्या को बढ़ा सकता है। पैकेज्ड फूड, फास्ट फूड, मीठे पेय और अत्यधिक प्रोसेस्ड</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/health/even-if-you-are-obese-there-is-lack-of-nutrition/article-12473"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/obesity-nutrient-deficiency-why-vitamin-deficiency-occurs-despite-eating-enough.webp" alt=""></a><br /><p>कई लोगों को लगता है कि अगर शरीर का वजन ज्यादा है और दिन में भरपेट भोजन मिल रहा है, तो शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं हो सकती। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। शरीर का वजन ज्यादा होना और शरीर को पर्याप्त पोषण मिलना दो अलग-अलग बातें हैं। कोई व्यक्ति ओवरवेट या मोटापे का शिकार होने के बावजूद विटामिन, मिनरल्स, प्रोटीन या अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी से जूझ सकता है। खासकर शहरी जीवनशैली में ज्यादा कैलोरी लेकिन कम पोषण वाला भोजन इस समस्या को बढ़ा सकता है। पैकेज्ड फूड, फास्ट फूड, मीठे पेय और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ पेट तो भर सकते हैं, लेकिन इनमें शरीर की जरूरत के मुताबिक प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स पर्याप्त मात्रा में हों, यह जरूरी नहीं है।</p>
<p><strong>वजन ज्यादा होने के बावजूद पोषण की कमी कैसे?</strong><br />शरीर को सिर्फ कैलोरी की जरूरत नहीं होती। उसे प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और अन्य जरूरी पोषक तत्व भी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति की डाइट में कैलोरी तो बहुत ज्यादा है, लेकिन पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ कम हैं, तो वजन बढ़ने के बावजूद पोषण संबंधी कमी हो सकती है। उदाहरण के लिए, ज्यादा तला-भुना खाना, मीठे खाद्य पदार्थ या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वजन बढ़ा सकते हैं, लेकिन इनसे शरीर को जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पर्याप्त मात्रा में मिलें, यह जरूरी नहीं है।</p>
<p><strong>सिर्फ BMI से पूरी सेहत का पता नहीं चलता</strong><br />शरीर के वजन और लंबाई के आधार पर निकाला जाने वाला BMI स्वास्थ्य का एक सामान्य संकेतक है, लेकिन इससे शरीर में मौजूद फैट का वितरण या मांसपेशियों और चर्बी का अनुपात पूरी तरह पता नहीं चलता। खास तौर पर विसरल फैट, यानी पेट के अंदरूनी हिस्से में अंगों के आसपास जमा चर्बी, स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय हो सकती है। किसी व्यक्ति का BMI सामान्य होने के बावजूद शरीर में फैट का वितरण अस्वस्थ हो सकता है। इसलिए केवल वजन मशीन पर दिखाई देने वाली संख्या को देखकर पूरी मेटाबॉलिक हेल्थ का अनुमान लगाना सही नहीं है।</p>
<p><strong>ज्यादा कैलोरी, लेकिन पोषण कम क्यों?</strong><br />शहरी जीवनशैली में खान-पान का पैटर्न तेजी से बदला है। काम की व्यस्तता के कारण कई लोग घर के संतुलित भोजन की जगह बाहर का खाना, इंस्टेंट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और मीठे पेय ज्यादा लेने लगते हैं। ऐसी डाइट में कैलोरी अधिक हो सकती है, जबकि प्रोटीन, फाइबर और कुछ विटामिन-मिनरल्स की मात्रा अपेक्षाकृत कम हो सकती है। यही वजह है कि वजन बढ़ने के साथ-साथ कुछ पोषक तत्वों की कमी भी बनी रह सकती है।</p>
<p><strong>Vitamin D की कमी भी हो सकती है</strong><br />विटामिन D शरीर में हड्डियों, मांसपेशियों और कई अन्य शारीरिक प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है। जिन लोगों का अधिकांश समय घर या ऑफिस के अंदर बीतता है, उनमें पर्याप्त धूप न मिलने के कारण विटामिन D का स्तर कम हो सकता है। मोटापे और विटामिन D के कम स्तर के बीच संबंध पर भी शोध हुआ है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर अधिक वजन वाले व्यक्ति में विटामिन D की कमी होगी। इसकी वास्तविक स्थिति जांच के जरिए ही पता चल सकती है।</p>
<p><strong>वजन घटाने के चक्कर में पोषण से समझौता न करें</strong><br />वजन कम करने का मतलब सिर्फ भोजन की मात्रा को बहुत कम कर देना नहीं है। कई लोग तेजी से वजन घटाने के लिए खाना छोड़ देते हैं या कार्बोहाइड्रेट समेत कई खाद्य समूह पूरी तरह बंद कर देते हैं। इससे कुल कैलोरी तो कम हो सकती है, लेकिन जरूरी पोषक तत्वों की कमी का खतरा भी बढ़ सकता है। वजन नियंत्रित करते समय डाइट में दालें, अंडे, दूध या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत, सब्जियां, फल, साबुत अनाज, नट्स और बीज जैसे विविध खाद्य पदार्थ शामिल करना बेहतर होता है। व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और जरूरत के अनुसार डाइट अलग हो सकती है।</p>
<p><strong>मोटापे के साथ इन समस्याओं का भी बढ़ सकता है जोखिम</strong><br />अधिक वजन और खासकर पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी का संबंध कुछ मेटाबॉलिक समस्याओं के बढ़े हुए जोखिम से हो सकता है। इनमें इंसुलिन रेजिस्टेंस, प्री-डायबिटीज, टाइप-2 डायबिटीज, फैटी लिवर और असामान्य कोलेस्ट्रॉल जैसी स्थितियां शामिल हैं। इसीलिए सिर्फ वजन कम करने पर ध्यान देने के बजाय कमर का घेरा, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, लिपिड प्रोफाइल और संपूर्ण डाइट जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।</p>
<p><strong>कौन सी जांच करानी चाहिए?</strong><br />हर व्यक्ति को बिना वजह पोषक तत्वों की जांच कराने की जरूरत नहीं होती। अगर लगातार थकान, कमजोरी, बाल झड़ना, मांसपेशियों में कमजोरी या अन्य लक्षण बने हुए हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। चिकित्सक जरूरत के अनुसार ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल, लिवर फंक्शन या किसी विशेष विटामिन और मिनरल की जांच की सलाह दे सकते हैं। रिपोर्ट के आधार पर ही सप्लीमेंट या उपचार लेना चाहिए।</p>
<p>पेट भर खाना और शरीर को पर्याप्त पोषण मिलना एक ही बात नहीं है। वजन ज्यादा होने के बावजूद किसी व्यक्ति में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, खासकर तब जब डाइट में कैलोरी अधिक लेकिन पोषण देने वाले खाद्य पदार्थ कम हों। इसलिए स्वस्थ रहने के लिए केवल वजन या BMI पर ध्यान देने के बजाय संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच को भी महत्व देना चाहिए।</p>
<p><strong>डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी व्यक्ति में विटामिन, मिनरल या अन्य पोषक तत्वों की कमी की पुष्टि केवल लक्षणों से नहीं की जा सकती। सप्लीमेंट या डाइट में बड़े बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन की सलाह लें।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हेल्थ</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/health/even-if-you-are-obese-there-is-lack-of-nutrition/article-12473</link>
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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 10:36:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रभार की खेती' से हांफ रहा उद्यानिकी विभाग: 11 जिलों में रेगुलर साहब नदारद, 300 किमी के फेरे में निकल रहा अफसरों का दम; 2 साल से अटकी है प्रमोशन फाइल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ के उद्यानिकी महकमे का मैदानी कामकाज इन दिनों पूरी तरह बैसाखियों के सहारे घिसट रहा है। सूबे के 33 में से 11 जिले ऐसे  हैं, जिन्हें कोई परमानेंट जिला अधिकारी ही नसीब नहीं हुआ। जिसका नतीजा यह है कि पड़ोस या फिर सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे अफसरों के माथे दो-तीन जिलों का भारी-भरकम बोझ लादकर महकमे की जुगाड़ वाली गाड़ी धकेली जा रही है।</p>
<p>साहब लोगों की मूल पोस्टिंग वाले जिले और प्रभार वाले जिले के बीच 200 से लेकर 300 किलोमीटर तक का लंबा-चौड़ा फासला है। अफसरों की आधी से ज्यादा ड्यूटी अब ऑफिस की कुर्सियों पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/horticulture-department-is-gasping-due-to-charge-cultivation-regular-sir/article-12480"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/image_search_1789447034448.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ के उद्यानिकी महकमे का मैदानी कामकाज इन दिनों पूरी तरह बैसाखियों के सहारे घिसट रहा है। सूबे के 33 में से 11 जिले ऐसे  हैं, जिन्हें कोई परमानेंट जिला अधिकारी ही नसीब नहीं हुआ। जिसका नतीजा यह है कि पड़ोस या फिर सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे अफसरों के माथे दो-तीन जिलों का भारी-भरकम बोझ लादकर महकमे की जुगाड़ वाली गाड़ी धकेली जा रही है।</p>
<p>साहब लोगों की मूल पोस्टिंग वाले जिले और प्रभार वाले जिले के बीच 200 से लेकर 300 किलोमीटर तक का लंबा-चौड़ा फासला है। अफसरों की आधी से ज्यादा ड्यूटी अब ऑफिस की कुर्सियों पर नहीं, बल्कि सड़क के हिचकोलों में बीत रही है। लगातार पेंडुलम की तरह झूलने से मैदानी मुआयने, योजनाओं की मॉनिटरिंग और आम जनसुनवाई का बुरी तरह भट्ठा बैठ गया है। इस पूरी फजीहत की चाबी पिछले दो साल से मंत्रालय की फाइलों में धूल खा रही है। महकमे के करीब सात अधिकारियों की विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) पेंडिंग पड़ी है। अगर यह प्रमोशन वाली फाइल टेबल से खिसक जाए, तो रातों-रात कम से कम सात जिलों की यह 'प्रभार वाली आफत' हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।</p>
<h5><strong>सड़क नापने में ही स्वाहा हो रहा पूरा दिन</strong></h5>
<p>कबीरधाम से कोरिया की दूरी 287 किलोमीटर है। कबीरधाम में विजय त्रिपाठी तैनात हैं, लेकिन उन्हें कोरिया के साथ-साथ मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर का भी बोझा थमा दिया गया है। आने-जाने में ही 14 घंटे झोंकने पड़ जाते हैं। अब आप खुद सोचिए, मीटिंग या फील्ड मुआयने के नाम पर अफसर का पूरा दिन महज सफर की थकान में ही निकल जाता है।<br />कांकेर से दंतेवाड़ा का दर्द भी जुदा नहीं है। कांकेर में पोस्टेड मीना मंडावी के कंधों पर दंतेवाड़ा की अतिरिक्त जिम्मेदारी डाल दी गई है। 215 किलोमीटर की दूरी नापने में 9 घंटे खप जाते हैं। बस्तर संभाग का रोना भी कम नहीं है। जगदलपुर वाले अधिकारी नारायणपुर और कोंडागांव का चक्कर काट रहे हैं, तो सुकमा में बैठे साहब बीजापुर की खाक छान रहे हैं।</p>
<h5><strong>11 जिले पूरी तरह प्रभार की बैसाखी पर</strong></h5>
<p>हालात यह है कि सहायक संचालक (एडी) और उप संचालक (डीडी) लेवल के कुल 22 नियमित अधिकारी ही अपनी-अपनी कुर्सियों पर मौजूद हैं। बाकी बचे 11 जिले- कोंडागांव, सुकमा, धमतरी, महासमुंद, राजनांदगांव, बेमेतरा, गरियाबंद, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कोरिया, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और रायगढ़ पूरी तरह खाली पड़े हैं। प्राइवेट गाड़ियों और खटारा बसों में धक्के खाने की इस मजबूरी का खमियाजा अफसरों के मूल जिलों को भी भुगतना पड़ रहा है। वहां भी कामकाज भगवान भरोसे ही चल रहा है।</p>
<h5><strong>किसानों की चप्पलें घिस रहीं, खेत-बीज का काम ठप</strong></h5>
<p>अफसरों के गायब रहने की सबसे तगड़ी मार किसानों पर पड़ रही है। खेत, बीज, पौधे और सब्सिडी के लिए किसान कार्यालय के चक्कर काट-काटकर परेशान हैं। ड्रिप-स्प्रिंकलर और शेडनेट जैसी योजनाओं में वेरिफिकेशन नहीं होने से किसानों की सब्सिडी अटक गई है। प्रभार वाले झमेले के कारण किसानों को जो फील्ड में मार्गदर्शन मिलना चाहिए, वह कोरा सपना हो गया है। विभागीय नर्सरियों और निर्माण कार्यों की रफ्तार भी कछुए जैसी हो गई है। समान तारीख पर अलग-अलग जिलों में मीटिंग होने पर अधिकारी किसी चुनिंदा जगह ही हाजिरी लगा पाते हैं, जिससे जनप्रतिनिधियों का पारा भी सातवें आसमान पर चढ़ा रहता है।</p>
<p>उद्यानिकी विभाग के संचालक लोकेश चंद्राकर का  कहना है कि सूबे के प्रदेश के 22 जिलों में नियमित अधिकारी हैं, बाकी जगहों पर एडिशनल प्रभार के जरिए कामकाज निबटाया जा रहा है। सात-आठ अफसरों की डीपीसी फिलहाल रुकी हुई है, जिसके पूरे होते ही खाली जिलों में परमानेंट पोस्टिंग कर दी जाएगी। किसानों और योजनाओं के काम में कोई रुकावट न आए, इसके लिए प्रमोशन प्रक्रिया पूरी होने से पहले योग्य अधिकारियों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी चल रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 10:07:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मनेन्द्रगढ़ में कैम्पा के 5.34 करोड़ कागजों में ही स्वाहा, RTI ने खोली घोटाले की पोल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मनेन्द्रगढ़ । : छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ वनमंडल में एक ऐसा घोटाला सामने आया है, जो बताता है कि सरकारी खजाने में सेंधमारी कैसे की जाती है। मामला है कैम्पा मद के करोड़ों रुपयों का। बिना एक ईंट खिसकाए, बिना कोई गड्ढा खोदे, कागजों पर 5.34 करोड़ रुपये की बंदरबांट का आरोप लगा है। गजब तो ये है कि एक तरफ करोड़ों का नकद भुगतान दिखाया गया, वहीं सूचना के अधिकार (RTI) में खुद वन विभाग कह रहा है- "हुजूर, हमने तो कोई काम ही नहीं कराया!"</p>
<p>  </p>
<p>अंबिकापुर के एसएन दुबे ने इस पूरे गोलमाल की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री विष्णु देव</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/in-manendragarh-swaha-rti-exposed-the-scam-in-534-crore/article-12479"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/image_search_1789444743943.jpg" alt=""></a><br /><p>मनेन्द्रगढ़ । : छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ वनमंडल में एक ऐसा घोटाला सामने आया है, जो बताता है कि सरकारी खजाने में सेंधमारी कैसे की जाती है। मामला है कैम्पा मद के करोड़ों रुपयों का। बिना एक ईंट खिसकाए, बिना कोई गड्ढा खोदे, कागजों पर 5.34 करोड़ रुपये की बंदरबांट का आरोप लगा है। गजब तो ये है कि एक तरफ करोड़ों का नकद भुगतान दिखाया गया, वहीं सूचना के अधिकार (RTI) में खुद वन विभाग कह रहा है- "हुजूर, हमने तो कोई काम ही नहीं कराया!"</p>
<p> </p>
<p>अंबिकापुर के एसएन दुबे ने इस पूरे गोलमाल की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से कर दी है। उन्होंने अफसरों पर साठगांठ कर सरकारी रकम डकारने का आरोप लगाया है और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के साथ-साथ पैसों की वसूली की मांग की है।</p>
<p><strong>क्या है पूरा खेल</strong></p>
<p>शिकायत के मुताबिक, मनेन्द्रगढ़ वनमंडल में दिसंबर 2021 में डब्ल्यू.बी.एम. (वाटर बाउंड मैकाडम) और दूसरे निर्माण कार्यों के नाम पर यह खेल खेला गया। आरोप की सुई परिक्षेत्राधिकारी (केल्हारी) एस.एस. कंवर, उप वनमंडलाधिकारी (केल्हारी) विवेकानंद झा, मनेन्द्रगढ़ के तत्कालीन वनमंडलाधिकारी और सरगुजा वन वृत्त के मुख्य वन संरक्षक अनुराग श्रीवास्तव की तरफ घूम रही है। बताया जा रहा है कि डिहुली से कैलाशपुर पार्ट-2 और बंजरावावा से हनुमानघाट पार्ट-2 में निर्माण कार्य सिर्फ फाइलों में हुए। जमीन पर झाड़ी तक नहीं काटी गई।</p>
<p><strong>स्थानीय मजदूरों का हक मारा, 'बाहरी' मजदूरों ने नाम पर फर्जीवाड़ा</strong></p>
<p>हैरानी की बात यह है कि इस 'कागजी काम' में स्थानीय मजदूरों को रोजगार देने के बजाय 'कैंपिंग श्रमिकों' (बाहरी मजदूरों) के नाम पर फर्जी मास्टर रोल (हाजिरी रजिस्टर) बना डाले गए। आरोप है कि छत्तीसगढ़ के वित्तीय नियम 82 की धज्जियां उड़ाते हुए अनपेड प्रमाणकों को कैंपा के मासिक लेखे में खपा कर करीब 2.60 करोड़ रुपये पार कर दिए गए।</p>
<p><strong>नकद भुगतान पर बड़ा झोल</strong></p>
<p>सबसे बड़ा झोल नकद भुगतान को लेकर है। नियमों के मुताबिक, आप किसी को 500 रुपये तक ही नकद दे सकते हैं। लेकिन साहबों ने 500 रुपये प्रति मजदूर के हिसाब से 2 करोड़ 22 लाख 83 हजार 225 रुपये का नकद भुगतान दिखा दिया। इतनी बड़ी रकम नकद बांटना, वो भी बिना बैंक खातों के... सीधा गबन की चुगली कर रहा है। शिकायत में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2021 से फरवरी 2022 के बीच कैंपा और अन्य मजदूरों के नाम पर 5.34 करोड़ का फर्जी नकद भुगतान हुआ। इसमें दिसंबर 2021 में 2.60 करोड़ और फरवरी 2022 में 2.55 करोड़ का भुगतान शामिल है।</p>
<p><strong>RTI ने उधेड़ दी बखिया</strong></p>
<p>इस पूरे खेल की पोल विभाग के ही एक लेटर ने खोल दी है। दुबे ने जब RTI लगाकर जानकारी मांगी, तो मनेन्द्रगढ़ वनमंडलाधिकारी के ऑफिस से 12 फरवरी 2025 (लेटर नंबर 297) को जो जवाब आया, वो चौंकाने वाला था। इसमें साफ लिखा है कि "जून 2020 से अक्टूबर 2023 तक कैम्पा मद से लेन्टाना उन्मूलन और नरवा विकास कार्य के तहत कोई काम नहीं हुआ है।"</p>
<p>एक तरफ RTI कह रही है कि काम नहीं हुआ, दूसरी तरफ 15 नवंबर 2022 का दस्तावेज चीख-चीख कर कह रहा है कि करोड़ों का नकद भुगतान हुआ है। यह विरोधाभास बता रहा है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। शिकायतकर्ता ने अगस्त 2026 में मुख्यमंत्री को यह शिकायत देकर पूरे गड़बड़झाले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/in-manendragarh-swaha-rti-exposed-the-scam-in-534-crore/article-12479</link>
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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 09:29:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Guru-Chandra Navpancham Yog 2026: 16 सितंबर को गुरु-चंद्रमा बनाएंगे नवपंचम योग, इन 4 राशियों के लिए शुभ संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Moon and Jupiter Conjunction 2026:</strong> वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति, राशि परिवर्तन और उनके बीच बनने वाले संबंधों को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि जब दो ग्रह एक-दूसरे के साथ विशेष कोणीय संबंध बनाते हैं, तो उससे बनने वाला योग कुछ राशियों के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है।</p>
<p>सितंबर 2026 के मध्य में गुरु और चंद्रमा की स्थिति से ऐसा ही एक ज्योतिषीय संयोग बनने की बात कही जा रही है। 16 सितंबर को गुरु-चंद्रमा के बीच नवपंचम योग बनने की मान्यता है। ज्योतिषीय दृष्टि से इसे शुभ योगों में गिना जाता है और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/ritual-culture/guru-chandra-navpancham-yog-2026-guru-chandra-will-create-navpancham-yog-on/article-12474"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/navpancham-yoga.webp" alt=""></a><br /><p><strong>Moon and Jupiter Conjunction 2026:</strong> वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति, राशि परिवर्तन और उनके बीच बनने वाले संबंधों को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि जब दो ग्रह एक-दूसरे के साथ विशेष कोणीय संबंध बनाते हैं, तो उससे बनने वाला योग कुछ राशियों के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है।</p>
<p>सितंबर 2026 के मध्य में गुरु और चंद्रमा की स्थिति से ऐसा ही एक ज्योतिषीय संयोग बनने की बात कही जा रही है। 16 सितंबर को गुरु-चंद्रमा के बीच नवपंचम योग बनने की मान्यता है। ज्योतिषीय दृष्टि से इसे शुभ योगों में गिना जाता है और माना जाता है कि इसका प्रभाव कुछ राशियों के करियर, धन और भाग्य से जुड़े मामलों पर देखने को मिल सकता है।</p>
<p><strong>क्या होता है नवपंचम योग?</strong><br />वैदिक ज्योतिष में नवपंचम योग का संबंध दो ग्रहों की ऐसी स्थिति से माना जाता है, जिसमें उनके बीच पांचवें और नौवें भाव जैसा संबंध बनता है। इसे ज्योतिष में 5-9 संबंध भी कहा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पंचम भाव बुद्धि, शिक्षा, संतान, रचनात्मकता और प्रेम से जुड़ा माना जाता है, जबकि नवम भाव भाग्य, धर्म, उच्च शिक्षा और जीवन में मिलने वाले अवसरों का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए इन दोनों भावों से संबंधित ग्रहों का शुभ संबंध सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जाता है।</p>
<p><strong>गुरु-चंद्रमा का संबंध क्यों माना जाता है खास?</strong><br />ज्योतिष में गुरु को ज्ञान, विस्तार, शिक्षा, समृद्धि और शुभता से जोड़कर देखा जाता है। वहीं चंद्रमा मन, भावनाओं, मानसिक स्थिति और संवेदनशीलता का प्रतिनिधित्व करता है। जब इन दोनों ग्रहों के बीच शुभ संबंध बनने की बात कही जाती है, तो ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार व्यक्ति की सोच, निर्णय क्षमता, ज्ञान और भाग्य से जुड़े क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p><strong>धन और करियर में मिल सकते हैं नए अवसर</strong><br />नवपंचम योग को लेकर मान्यता है कि इसके प्रभाव से कुछ लोगों के लिए आर्थिक और पेशेवर जीवन में नए रास्ते खुल सकते हैं। नौकरी में बदलाव, नई जिम्मेदारी, व्यापार में अवसर या किसी पुराने काम के पूरा होने जैसी स्थितियां बन सकती हैं। हालांकि, ज्योतिषीय योग को निश्चित आर्थिक लाभ की गारंटी नहीं माना जा सकता। वास्तविक परिणाम व्यक्ति की पूरी जन्मकुंडली और अन्य ग्रह स्थितियों पर भी निर्भर माने जाते हैं।</p>
<p><strong>इन 4 राशियों के लिए शुभ माना जा रहा है नवपंचम योग</strong></p>
<p><strong>मेष राशि</strong><br />मेष राशि के जातकों के लिए यह योग भाग्य से जुड़े मामलों में सकारात्मक संकेत देने वाला माना जा रहा है। लंबे समय से अटके कामों में गति आने की उम्मीद की जा सकती है। नौकरी या व्यवसाय में नए अवसर मिलने के साथ किसी महत्वपूर्ण योजना पर आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है।</p>
<p><strong>मिथुन राशि</strong><br />मिथुन राशि वालों के लिए गुरु-चंद्रमा का यह संबंध निर्णय क्षमता और कामकाज से जुड़े मामलों में अनुकूल माना जा रहा है। करियर में नई जिम्मेदारी या बेहतर अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक मामलों में भी सुधार की संभावना बताई जा रही है, हालांकि खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी रहेगा।</p>
<p><strong>तुला राशि</strong><br />तुला राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और प्रतिष्ठा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। कार्यक्षेत्र में पहचान बढ़ने या कोई नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना मानी जा रही है। अचानक मिलने वाला कोई अवसर भविष्य में लाभ का कारण बन सकता है।</p>
<p><strong>धनु राशि</strong><br />धनु राशि के स्वामी स्वयं गुरु माने जाते हैं, इसलिए इस राशि के लिए गुरु से जुड़े ज्योतिषीय संयोग को विशेष महत्व दिया जाता है। नवपंचम योग के दौरान उच्च शिक्षा, करियर या किसी नए प्रोजेक्ट से जुड़े अवसर मिलने की संभावना बताई जा रही है। आर्थिक मामलों में भी सकारात्मक बदलाव की उम्मीद की जा सकती है।</p>
<p><strong>क्या सभी लोगों पर एक जैसा होगा असर?</strong><br />ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार किसी भी ग्रह योग का प्रभाव सभी जातकों पर समान नहीं होता। जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति, दशा-अंतर्दशा और संबंधित भावों को देखकर ही किसी व्यक्ति के लिए विस्तृत फलादेश किया जाता है। इसलिए केवल अपनी राशि देखकर किसी बड़े आर्थिक, करियर या वैवाहिक फैसले पर पहुंचना उचित नहीं माना जाना चाहिए।</p>
<p>16 सितंबर 2026 को गुरु और चंद्रमा से बनने वाले नवपंचम योग को ज्योतिषीय परंपराओं में शुभ माना जा रहा है। मेष, मिथुन, तुला और धनु राशि के जातकों के लिए इसे विशेष रूप से अनुकूल बताया जा रहा है। इन राशियों के लिए करियर, धन, शिक्षा और नए अवसरों से जुड़े सकारात्मक संकेत मिलने की मान्यता है।</p>
<p><strong>डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी वैदिक ज्योतिष की मान्यताओं और सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। ग्रहों की स्थिति का वास्तविक प्रभाव वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है और अलग-अलग ज्योतिषीय परंपराओं में व्याख्या भिन्न हो सकती है। किसी महत्वपूर्ण जीवन या आर्थिक निर्णय के लिए केवल इस फलादेश पर निर्भर न रहें। नेशनल जगत विजन इन मान्यताओं की पुष्टि नहीं करता है।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म कला संस्कृति</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/ritual-culture/guru-chandra-navpancham-yog-2026-guru-chandra-will-create-navpancham-yog-on/article-12474</link>
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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 09:12:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर में राशन वाले डकार गए पौने तीन करोड़ की बोरियां: 10 लाख बारदाने बांटे, 5 लाख का कोई अता-पता नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। जिले में सरकारी खजाने में सेंधमारी का बड़ा अजब खेल सामने आया है। राशन दुकानों में गरीबों का चावल तो बंट गया, लेकिन जिन बोरियों में वह चावल आया था, उन्हें ही राशन वाले डकार गए। पूरा मामला 2 करोड़ 75 लाख रुपए के बारदानों (बोरियों) के गोलमाल का है।</p>
<p>नागरिक आपूर्ति निगम के ऑफिस से अप्रैल से अगस्त महीने के बीच जिले की 720 पीडीएस (राशन) दुकानों को करीब 10 लाख नग बारदाने भेजे गए थे। कायदा यह है कि राशन बांटने के बाद खाली बोरी वापस करनी होती है। लेकिन जब हिसाब-किताब की बारी आई, तो बाबू</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/ration-sellers-belched-in-raipur-sacks-worth-rs-3-crores/article-12478"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/20260915_090615.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। जिले में सरकारी खजाने में सेंधमारी का बड़ा अजब खेल सामने आया है। राशन दुकानों में गरीबों का चावल तो बंट गया, लेकिन जिन बोरियों में वह चावल आया था, उन्हें ही राशन वाले डकार गए। पूरा मामला 2 करोड़ 75 लाख रुपए के बारदानों (बोरियों) के गोलमाल का है।</p>
<p>नागरिक आपूर्ति निगम के ऑफिस से अप्रैल से अगस्त महीने के बीच जिले की 720 पीडीएस (राशन) दुकानों को करीब 10 लाख नग बारदाने भेजे गए थे। कायदा यह है कि राशन बांटने के बाद खाली बोरी वापस करनी होती है। लेकिन जब हिसाब-किताब की बारी आई, तो बाबू लोगों के पसीने छूट गए। 10 लाख में से सिर्फ 5 लाख बोरियां ही विभाग को लौटाई गईं। बाकी 5 लाख बारदानों को मानो जमीन खा गई या आसमान निगल गया।</p>
<p><strong>251 दुकानदारों ने दिखाई ढिठाई, कुछ नहीं लौटाया</strong></p>
<p>सबसे ज्यादा ताज्जुब तो इस बात का है कि जिले के 251 दुकानदारों ने पूरी ढिठाई दिखाते हुए बोरी का एक टुकड़ा तक वापस नहीं किया। इनकी वापसी का आंकड़ा शून्य है। मतलब करीब 35 प्रतिशत दुकानों ने सारा का सारा बारदाना ही हजम कर लिया। बाकी बचे 469 दुकानदारों ने जैसे-तैसे 5 लाख नग लौटाए हैं।</p>
<p><strong>खजाने पर ऐसे पड़ रही तगड़ी चपत</strong></p>
<p>अब समझिए कि इस गोलमाल से सरकारी खजाने पर कैसे चोट पड़ती है। पीडीएस से वापस आने वाले इन्हीं पुराने बारदानों से धान खरीदी का बड़ा काम निपटाया जाता है। जब राशन वाले पुरानी बोरी लौटाते हैं, तो उन्हें इसके एवज में 25 रुपए प्रति बोरी दिए जाते हैं। पर जब ये बोरियां गायब कर दी जाती हैं, तो सरकार को मजबूरी में नई बोरी खरीदनी पड़ती है। बाजार में नई बोरी का भाव 50 से 55 रुपए प्रति नग बैठता है। इस गणित से देखें, तो जो 5 लाख बोरियां गायब हैं, उनकी कुल कीमत 2 करोड़ 75 लाख रुपए तक पहुंच जाती है।</p>
<p><strong>नोटिस का भी नहीं दे रहे जवाब</strong></p>
<p>बड़ा मुद्दा यह है कि आखिर इतनी भारी तादाद में बारदाने गए कहां? क्या इन्हें दुकानों के गोदामों में सड़ा दिया गया? या फिर औने-पौने दाम पर बाजार में खपा कर अपनी जेबें गरम कर ली गई हैं?</p>
<p>लापरवाही की इंतहा देखिए कि जब विभाग ने इन राशन वालों से जवाब-तलब किया और नोटिस थमाया, तो उन्होंने जवाब देने की जहमत तक नहीं उठाई।</p>
<p>नागरिक आपूर्ति निगम के डीएमओ जशवीर सिंह बघेल का कहना है कि जिन दुकानों से बारदाना वापस नहीं आया है, वहां नोटिस भेजा गया है। तय समय पर बारदाने नहीं लौटाए गए, तो नियमों के तहत कड़ा एक्शन लिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 09:06:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अरपा-भैंसाझार बैराज घोटाला: ईपीसी का ठेका तोड़ा, अलग टेंडर निकाला और पहली ही बारिश में बह गए करोड़ों, अब रिटेनिंग वॉल में फिर वही खेल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बिलासपुर जिले में जल संसाधन विभाग की बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में शुमार अरपा-भैंसाझार बैराज प्रोजेक्ट फिर कटघरे में है। यह प्रोजेक्ट ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मोड पर जल संसाधन संभाग कोटा के तहत चल रहा है। इसका मकसद बैराज के साथ मुख्य नहर, माइनर, पुल-पुलिया का पूरा काम करके तीन विकासखंडों के 102 गांवों की करीब 25,000 हेक्टेयर जमीन को पानी देना था। शुरुआत में इसकी लागत 606 करोड़ रुपये थी। 25 नवंबर 2024 को राज्य सरकार ने इसे बढ़ाकर 1,141.90 करोड़ रुपये कर दिया। अब तक निर्माण एजेंसी को 317.59 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/arpa-bhainsajhar-barrage-scam-epc-contract-broken-separate-tender-floated-and/article-12477"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/20260915_083555.jpg" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर जिले में जल संसाधन विभाग की बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में शुमार अरपा-भैंसाझार बैराज प्रोजेक्ट फिर कटघरे में है। यह प्रोजेक्ट ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मोड पर जल संसाधन संभाग कोटा के तहत चल रहा है। इसका मकसद बैराज के साथ मुख्य नहर, माइनर, पुल-पुलिया का पूरा काम करके तीन विकासखंडों के 102 गांवों की करीब 25,000 हेक्टेयर जमीन को पानी देना था। शुरुआत में इसकी लागत 606 करोड़ रुपये थी। 25 नवंबर 2024 को राज्य सरकार ने इसे बढ़ाकर 1,141.90 करोड़ रुपये कर दिया। अब तक निर्माण एजेंसी को 317.59 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। मूल अनुबंध (क्रमांक डी.एल.07/13.09.2013) राधेश्याम अग्रवाल/सुनील अग्रवाल के नाम पर है, जिन्हें बैराज और उससे लगे सारे सुरक्षा काम निपटाने थे।</p>
<h5><strong>ठेके की शर्तों से खिलवाड़ और नया टेंडर</strong></h5>
<p>हमारे पास मौजूद सरकारी दस्तावेज गवाही दे रहे हैं कि अफसरों ने मूल शर्त को किनारे कर दिया। बैराज की सुरक्षा का काम — डाउन-स्ट्रीम बैंक/फ्लड प्रोटेक्शन — मूल ठेके से बाहर खींच लिया गया। इसके लिए पूरी तरह अलग अनुबंध (क्रमांक 10/डी.एल./2020-21) बनाकर नई निविदा बुलाई गई और काम दूसरी एजेंसी को थमा दिया गया। विभागीय सूत्रों की मानें तो यह कारनामा तत्कालीन कार्यपालन अभियंता आई.ए. सिद्दीकी ने तत्कालीन मुख्य अभियंता अजय सोमवार की मिलीभगत से किया। जबकि कायदे से यह काम उसी मूल ईपीसी ठेकेदार को करना था। प्रशासकीय मंजूरी के टुकड़े करके अलग से तकनीकी स्वीकृति लेते हुए करोड़ों की नई निविदा किस बिना पर बुलाई गई, यह बड़ा मुद्दा बन गया है।</p>
<h5><strong>पहली बारिश में खुल गई पोल</strong></h5>
<p>हसदेव कछार जल संसाधन विभाग बिलासपुर के मुख्य अभियंता जे.के. नेताम ने 22 अप्रैल 2026 को चेकिंग रिपोर्ट बनाई। इस रिपोर्ट में स्पष्ट दर्ज है कि नए ठेके के तहत बैराज के नीचे नदी के दोनों किनारों पर 500 मीटर लंबाई में जो बैंक प्रोटेक्शन बना था, वह जुलाई 2025 की बाढ़ में 112 मीटर लंबा और 15 मीटर चौड़ा हिस्सा पानी में बह गया। मुआयने में पता चला कि यह टूटा हुआ हिस्सा स्कावरिंग गेट के वाटर-वे (जल प्रवाह क्षेत्र) में बना था। पानी के तेज बहाव ने इसे उखाड़ फेंका। पीसीसी ब्लॉक के नीचे फिल्टर डाला ही नहीं गया था, जिससे मिट्टी बही और ब्लॉक धंस गए। रिपोर्ट में लिखा है कि मरम्मत कराने पर भी यह फिर टूटेगा—यानी पूरी की पूरी डिजाइन ही खोट वाली थी।</p>
<p>इसी निरीक्षण रिपोर्ट में यह भी है कि मूल अनुबंध के तहत बना होइस्ट ब्रिज और गेट कई जगह से जंग खा रहे हैं। बायें किनारे पर स्टोन पिचिंग और बोल्डर टो का काम आज तक अधूरा पड़ा है। यह विभागीय निगरानी की सुस्ती की पोल खोलने के लिए काफी है।</p>
<h5><strong>ठेकेदार ने खुद मानी डिजाइन की गलती</strong></h5>
<p>निर्माण एजेंसी मेसर्स द्वारका इंफ्रास्ट्रक्चर ने कोटा के कार्यपालन अभियंता को 19 जनवरी 2026 को पत्र लिखा। ठेकेदार ने खुद मान लिया है कि स्कावरिंग गेट के ढलान को ठीक गेट के सामने रखना, स्लूस के डाउन-स्ट्रीम स्लोप की गलत डिजाइन और पानी के तेज वेग से निपटने का इंतजाम न होना—ये सब तकनीकी खामियां हैं। इसके लिए ठेकेदार ने अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ लिया है। उसका कहना है कि पीसीसी ब्लॉक की जगह मजबूत प्रोटेक्शन वॉल बननी चाहिए थी। कुल मिलाकर, गलत डिजाइन पास की गई और नतीजा यह हुआ कि करोड़ों की सरकारी रकम पहली ही बरसात में खाक हो गई।</p>
<h5><strong>फिर वही पैंतरा: रिटेनिंग वॉल के नाम पर नई तैयारी</strong></h5>
<p>इस बड़े नुकसान के बाद भी किसी पर गाज नहीं गिरी। उल्टे तत्कालीन मुख्य अभियंता और अब प्रमुख अभियंता जितेंद्र नेताम ने मौका मुआयना करके फरमान सुना दिया कि टूटे हुए बैंक प्रोटेक्शन की जगह अब स्कावरिंग गेट के बाहर रिटेनिंग वॉल बनाई जाए। इसका नया एस्टिमेट तुरंत ऑफिस में पेश करने को कहा गया है। यह फ्लड प्रोटेक्शन या रिटेनिंग वॉल बैराज का ही हिस्सा है, जिसे मूल एजेंसी को करना था। इसे दोबारा अलग टेंडर निकालकर किसी और को सौंपने की पूरी पटकथा तैयार है। अगर ऐसा हुआ तो सरकारी खजाने की बर्बादी का दूसरा राउंड शुरू होगा और पुराने सबूत भी मिट्टी में मिल जाएंगे।</p>
<p><strong>किसकी क्या जवाबदेही</strong></p>
<p>कागजों और हालात के मुताबिक तीन स्तर पर अफसरों की भूमिका संदिग्ध है:</p>
<ul>
<li> तत्कालीन कार्यपालन अभियंता आई.ए. सिद्दीकी: आरोप है कि इन्होंने मूल ईपीसी मंजूरी तोड़कर बैराज सुरक्षा का काम दूसरे ठेकेदार को दिया।</li>
<li> तत्कालीन मुख्य अभियंता अजय सोमवार: जिन्होंने सिद्दीकी का साथ देते हुए इस अलग काम को तकनीकी मंजूरी दी।</li>
<li> वर्तमान प्रमुख अभियंता जितेंद्र नेताम: जो गलत डिजाइन पकड़ने के बाद भी किसी को जिम्मेदार ठहराए बिना, दोबारा नया एस्टिमेट बनवाकर अलग एजेंसी से काम कराने की फिराक में हैं।</li>
<li>  इनके अलावा वे सभी इंजीनियर भी घेरे में हैं जिन्होंने इस खोट वाली डिजाइन का प्रस्ताव रखा और उसे पास किया।</li>
</ul>
<h5><strong>शिकायतकर्ता की मांग....</strong></h5>
<ul>
<li> <strong>आई.ए. सिद्दीकी को तुरंत सस्पेंड कर पूरे मामले की स्वतंत्र जांच हो।</strong></li>
<li><strong>गलत डिजाइन पास करने वाले अजय सोमवार समेत सभी अफसरों पर विभागीय कार्रवाई हो और डूबे हुए पैसों की वसूली की जाए</strong></li>
<li><strong>बैराज सुरक्षा का बचा हुआ कोई भी काम चाहे फ्लड प्रोटेक्शन हो या रिटेनिंग वॉल—बिना नया टेंडर निकाले मूल एजेंसी से ही कराया जाए </strong></li>
<li><strong> प्रमुख अभियंता जितेंद्र नेताम के रोल की भी निष्पक्ष जांच हो, ताकि पुरानी गड़बड़ियां न दोहराई जाएं।</strong></li>
<li><strong>जल संसाधन विभाग के सचिव स्तर पर पूरे मामले को परखा </strong><strong>जाए ताकि पब्लिक के पैसे की लूट पर लगाम लगे।</strong></li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/arpa-bhainsajhar-barrage-scam-epc-contract-broken-separate-tender-floated-and/article-12477</link>
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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 08:37:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग का अजब खेल: हाईकोर्ट के स्टे को ठेंगा, जूनियर को 'मलाईदार' कुर्सी, और सीनियर गड्ढे में </title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर । सरकार के सुशासन वाले दावों के बीच जल संसाधन विभाग से ऐसा मामला सामने आया है, जो प्रशासनिक नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। यह विभाग स्वयं मुख्यमंत्री के पास है। फिर भी, बिलासपुर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बावजूद प्रमोशन और पोस्टिंग की फाइलें धड़ल्ले से दौड़ रही हैं। हालात ये हैं कि जूनियर अधिकारी प्रमोशन पाकर मलाईदार पदों पर बैठ गए हैं और अनुभवी सीनियर अपनी पुरानी कुर्सी पर ही अटके पड़े हैं।</p><h5><strong>हाईकोर्ट का आदेश दरकिनार</strong></h5><p>25 फरवरी 2026 को कार्यपालन अभियंता (सिविल) से अधीक्षण अभियंता (सिविल) के लिए प्रमोशन लिस्ट जारी हुई थी। लिस्ट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/chhattisgarh-water-resources-departments-strange-game-defying-the-stay-of/article-12476"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/20260914_193122.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर । सरकार के सुशासन वाले दावों के बीच जल संसाधन विभाग से ऐसा मामला सामने आया है, जो प्रशासनिक नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। यह विभाग स्वयं मुख्यमंत्री के पास है। फिर भी, बिलासपुर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बावजूद प्रमोशन और पोस्टिंग की फाइलें धड़ल्ले से दौड़ रही हैं। हालात ये हैं कि जूनियर अधिकारी प्रमोशन पाकर मलाईदार पदों पर बैठ गए हैं और अनुभवी सीनियर अपनी पुरानी कुर्सी पर ही अटके पड़े हैं।</p><h5><strong>हाईकोर्ट का आदेश दरकिनार</strong></h5><p>25 फरवरी 2026 को कार्यपालन अभियंता (सिविल) से अधीक्षण अभियंता (सिविल) के लिए प्रमोशन लिस्ट जारी हुई थी। लिस्ट को लेकर विवाद हुआ और मामला बिलासपुर हाईकोर्ट पहुंच गया।</p><ul><li> धर्मेंद्र मेश्राम और अन्य ने रिट याचिका (WPS 2653/2026) लगाई।</li><li>  24 मार्च 2026 को हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक कोई नई पोस्टिंग न दी जाए।</li><li> अभय आकोलेकर मामले (WPS 5742/2025) में भी 4 जुलाई 2025 को 'यथास्थिति' (Status Quo) का आदेश हो चुका था।</li><li>बावजूद इसके, विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय से लगातार पोस्टिंग के आदेश निकल रहे हैं।<br /></li></ul><h5><strong>बर्मन बनाम सिद्दीकी: काबिलियत पर भारी 'कृपा'</strong></h5><p>इस पूरे खेल को समझने के लिए दो अधिकारियों का उदाहरण काफी है। कार्यपालन अभियंता एस.के. बर्मन (गरियाबंद) और आई.ए. सिद्दीकी (रायपुर)। दोनों की तकदीर विभाग ने कैसे लिखी, इसे </p><p><strong>विजुअल टाइम लाइन से समझते हैं....</strong></p><p> <strong>एस.के. बर्मन EE बने (सीनियर)  वर्ष 2021</strong></p><p>   एस.के. बर्मन ने कार्यपालन अभियंता (EE) का पद संभाला। नियमानुसार अगली पोस्ट (SE) के लिए 5 साल की उलटी गिनती शुरू।</p><p><strong>आई.ए. सिद्दीकी EE बने (जूनियर)   28 जून 2023</strong></p><p>   आई.ए. सिद्दीकी कार्यपालन अभियंता बने। अनुभव और कैडर दोनों में बर्मन से पीछे।</p><p> <strong>कैबिनेट की 'विशेष मेहरबानी'  27 जनवरी 2026</strong></p><p>   नियमों में अचानक बदलाव। 2023 बैच (जिसमें सिद्दीकी आते हैं) को प्रमोशन के लिए सीधे 2 साल की विशेष छूट थमा दी गई।</p><p> <strong>अनुभव का असली गणित  फरवरी 2026</strong></p><p>   एस.के. बर्मन: 5 साल से ज्यादा की सेवा पूरी। बिना किसी छूट के प्रमोशन के असली हकदार। आई.ए. सिद्दीकी: सेवा में मुश्किल से 2 साल 8 महीने। बिना विशेष छूट के प्रमोशन की रेस से ही बाहर।</p><p> <strong>नतीजा: एक को धक्का, दूसरे को 'सुपर जंप'</strong></p><h5>   <strong>वर्तमान स्थिति</strong></h5><p>   एस.के. बर्मन: हाईकोर्ट के स्टे का हवाला देकर गरियाबंद में उसी पुरानी कुर्सी (EE) पर बैठाए रखे गए।  आई.ए. सिद्दीकी: स्टे को दरकिनार कर रायपुर में अधीक्षण अभियंता (SE) बनाए गए, और अब सीधे चीफ इंजीनियर (मुख्य अभियंता) का पावरफुल प्रभार भी सौंप दिया गया। 13 अगस्त 2026 को प्रमुख अभियंता कार्यालय (शिवनाथ भवन, नवा रायपुर) से आदेश (क्रमांक 3317020/छ.ग./2023) जारी हुआ। इसमें जूनियर होते हुए भी आई.ए. सिद्दीकी को मुख्य अभियंता (प्रबोधन) का भारी-भरकम अतिरिक्त प्रभार थमा दिया गया।</p><h5> <strong>प्रमुख अभियंता बोले- 'सब सचिव के कहने पर'</strong></h5><p>कोर्ट के स्टे के बाद भी पोस्टिंग क्यों हो रही है? जब इस बारे में प्रमुख अभियंता (इंजीनियर-इन-चीफ) जितेंद्र नेताम से पूछा गया, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था। उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा- "मैं ये सारे आदेश सचिव महोदय के निर्देश पर जारी कर रहा हूं।"</p><h5> <strong>अगर आदेश सचिव के निर्देश पर हैं, तो जिम्मेदारी किसकी?</strong></h5><ul><li> जिस आदेश पर प्रमुख अभियंता के हस्ताक्षर हैं, क्या उसकी जवाबदेही वो नहीं लेंगे?</li><li> सचिव की तरफ से इस पूरी गड़बड़ी पर अभी तक कोई बयान क्यों नहीं आया?</li></ul><p><strong>मुख्यमंत्री कार्यालय तक जाती है भूमिका...</strong></p><p>अगस्त 2025 में हुए फेरबदल के बाद से जल संसाधन विभाग खुद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय संभाल रहे हैं। जब विभाग की कमान राज्य के मुखिया के हाथों में हो और वहीं अदालती आदेशों को ताक पर रखकर चहेतों को मनचाही पोस्टिंग दी जा रही हो, तो प्रशासनिक पकड़ पर प्रश्नचिह्न लगना लाजिमी है।</p><h5><strong>कुछ सुलगते सवाल.....</strong></h5><ul><li> डब्ल्यूपीएस 2653/2026 में हाईकोर्ट की रोक के बाद पोस्टिंग आदेश का आधार क्या है?</li><li> सीनियर एस.के. बर्मन को पुराने पद पर क्यों रोक दिया गया, जबकि जूनियर को प्रमोशन देकर आगे बढ़ाया जा रहा है?</li><li>क्या मुख्यमंत्री कार्यालय इस दोहरे मापदंड की कोई स्वतंत्र जांच कराएगा?</li></ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 19:31:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bengal Politics: दुर्गा पूजा से पहले बंगाल में बड़ा ‘खेला’? TMC के 17 बागी सांसदों के BJP में जाने का दावा, पार्टी ने कहा- फैसला इतना आसान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कोलकाता। </strong>पश्चिम बंगाल की सियासत में दुर्गा पूजा से पहले एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कूचबिहार के सांसद जगदीशचंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनसीपीआई का हिस्सा बने 20 सांसदों में से 17 जल्द भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकते हैं। बसुनिया के मुताबिक, इन सांसदों के भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया पूजा से पहले पूरी की जा सकती है।</p>
<p>हालांकि, इस दावे ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। खुद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने संकेत दिया है कि किसी सांसद के पार्टी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/politics/bengal-politics-big-game-in-bengal-before-durga-puja-claim/article-12471"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/tmc-bagi-1789382230322_v.webp" alt=""></a><br /><p><strong>कोलकाता। </strong>पश्चिम बंगाल की सियासत में दुर्गा पूजा से पहले एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कूचबिहार के सांसद जगदीशचंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनसीपीआई का हिस्सा बने 20 सांसदों में से 17 जल्द भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकते हैं। बसुनिया के मुताबिक, इन सांसदों के भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया पूजा से पहले पूरी की जा सकती है।</p>
<p>हालांकि, इस दावे ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। खुद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने संकेत दिया है कि किसी सांसद के पार्टी में आने की इच्छा जताना और भाजपा की ओर से उसे स्वीकार करना दो अलग बातें हैं। यानी फिलहाल 17 सांसदों के BJP में शामिल होने की बात को आधिकारिक फैसला नहीं माना जा सकता।</p>
<p><strong>तीन मुस्लिम सांसद BJP से दूरी बनाए रखेंगे?</strong><br />बसुनिया के मुताबिक, 20 सांसदों के समूह में शामिल मुर्शिदाबाद के तीन मुस्लिम सांसद अबू ताहेर खान, खलिलुर रहमान और यूसुफ पठान भाजपा में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने दावा किया कि ये तीनों सांसद अलग रहते हुए भी NDA को समर्थन दे सकते हैं और उन्हें केंद्र की ओर से विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी मिल सकती है।</p>
<p>लेकिन अबू ताहेर खान ने इस दावे को सीधे खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि तीनों सांसद न तो भाजपा में शामिल होंगे और न ही NDA का हिस्सा बनेंगे। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक भविष्य के बारे में घोषणा करने का अधिकार किसी दूसरे नेता को नहीं है।</p>
<p>अबू ताहेर के मुताबिक, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की ओर से विकास कार्यों से जुड़ी सरकारी बैठक के लिए बुलाया जाता है तो वे उसमें शामिल हो सकते हैं, लेकिन भाजपा या NDA की राजनीतिक बैठकों से दूरी बनाए रखेंगे।</p>
<p><strong>BJP ने भी साफ नहीं की तस्वीर</strong><br />जगदीश बसुनिया के बयान के बाद भाजपा के भीतर से भी सावधानी भरा रुख सामने आया है। प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि किसी नेता या सांसद की भाजपा में शामिल होने की इच्छा मात्र से यह तय नहीं हो जाता कि पार्टी उसे सदस्यता देगी।</p>
<p>ऐसे में 17 सांसदों के भाजपा में जाने का दावा फिलहाल राजनीतिक बयान और संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। अंतिम स्थिति सांसदों के आधिकारिक फैसले और भाजपा नेतृत्व की स्वीकृति के बाद ही स्पष्ट होगी।</p>
<p><strong>20 सांसदों का राजनीतिक मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में</strong><br />दरअसल, यह पूरा विवाद उन 20 सांसदों से जुड़ा है, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के सांसद के तौर पर मान्यता देने की मांग की थी। इनमें जगदीश बसुनिया, सुदीप बनर्जी और काकोली घोष दस्तीदार समेत कई सांसद शामिल हैं।</p>
<p>हालांकि, लोकसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में ये सांसद अभी भी तृणमूल कांग्रेस के सदस्य के रूप में दर्ज हैं। इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।</p>
<p><strong>22 सितंबर तक सांसदों को देना है जवाब</strong><br />मामले में 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने एनसीपीआई का दावा करने वाले सभी 20 सांसदों को नोटिस जारी किया था। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष के सचिवालय ने भी 26 अगस्त को सांसदों को नोटिस भेजकर उनका पक्ष पूछा।</p>
<p>सांसदों ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। यह मांग स्वीकार कर ली गई और अब उन्हें 22 सितंबर तक अपना जवाब दाखिल करना है। इसलिए आने वाले दिनों में इन सांसदों का राजनीतिक भविष्य और उनकी लोकसभा सदस्यता दोनों ही महत्वपूर्ण मुद्दे बने रहेंगे।</p>
<p><strong>दो-तिहाई सांसदों के समर्थन का तर्क</strong><br />जगदीश बसुनिया का कहना है कि अगर 20 सदस्यीय समूह में से 17 सांसद भाजपा में शामिल होते हैं, तो यह संख्या दो-तिहाई से अधिक होगी। उनका तर्क है कि ऐसी स्थिति में दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने का प्रावधान लागू हो सकता है।</p>
<p>20 सांसदों के मामले में दो-तिहाई का आंकड़ा 14 सांसद बनता है। हालांकि, इस पूरे मामले में कानून की व्याख्या, सांसदों की वर्तमान संवैधानिक स्थिति और उनके समूह की वैधानिक मान्यता जैसे सवाल भी महत्वपूर्ण होंगे। अंतिम स्थिति संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।</p>
<p><strong>दुर्गा पूजा से पहले क्या बदलेगा बंगाल का सियासी समीकरण?</strong><br />यदि 17 सांसद वास्तव में भाजपा में शामिल होते हैं, तो इसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बड़ा हो सकता है। दूसरी ओर, यदि तीन मुस्लिम सांसद अपने मौजूदा रुख पर कायम रहते हैं तो पूरे घटनाक्रम की राजनीतिक तस्वीर और भी अलग होगी।</p>
<p>फिलहाल, एक तरफ भाजपा में शामिल होने का दावा है, दूसरी तरफ संबंधित सांसदों का खंडन और भाजपा नेतृत्व की सावधानी। ऐसे में दुर्गा पूजा से पहले बंगाल की राजनीति में कोई बड़ा फेरबदल होता है या यह सिर्फ सियासी बयानबाजी तक सीमित रहता है, इस पर अब सबकी नजर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 17:08:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Disha Salian Case: 6 साल बाद फिर खुला दिशा सालियान मौत का मामला, CBI ने दर्ज की FIR; आदित्य ठाकरे और रिया चक्रवर्ती समेत कई नाम चर्चा में</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले ने करीब छह साल बाद एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को FIR दर्ज कर मामले की नए सिरे से जांच शुरू कर दी है। दिशा की मौत जून 2020 में मुंबई में हुई थी। वह कुछ समय तक अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर भी रही थीं।</p>
<p>CBI की कार्रवाई से पहले दिशा के पिता सतीश सालियान ने जांच एजेंसी के सामने अपना बयान दर्ज कराया था। उनके बयान में कई लोगों के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/disha-salian-case-reopened-after-6-years-disha-salian-death/article-12470"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/disha-salian-death-1789372530169_v-(1).webp" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले ने करीब छह साल बाद एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को FIR दर्ज कर मामले की नए सिरे से जांच शुरू कर दी है। दिशा की मौत जून 2020 में मुंबई में हुई थी। वह कुछ समय तक अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर भी रही थीं।</p>
<p>CBI की कार्रवाई से पहले दिशा के पिता सतीश सालियान ने जांच एजेंसी के सामने अपना बयान दर्ज कराया था। उनके बयान में कई लोगों के नाम और मामले से जुड़े गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इनमें शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे, अभिनेता रिया चक्रवर्ती, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली समेत कई अन्य नाम शामिल हैं। हालांकि, इन नामों का FIR में उल्लेख होना अपने आप में किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध साबित नहीं करता।</p>
<p><strong>पिता के बयान में कई लोगों के नाम</strong><br />दिशा के पिता ने CBI के समक्ष दिए बयान में कथित आपराधिक साजिश, घटना को अलग रूप देने और सबूतों से कथित छेड़छाड़ जैसे आरोपों की जांच की मांग की है। बयान में राजनीतिक नेताओं, फिल्म जगत से जुड़े लोगों और कुछ पुलिस अधिकारियों समेत कई लोगों की भूमिका की जांच करने की बात कही गई है। रिपोर्टों के अनुसार, बयान में आदित्य ठाकरे और रिया चक्रवर्ती के अलावा डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, शोविक चक्रवर्ती तथा कुछ पुलिस अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। अब CBI इन दावों और उपलब्ध साक्ष्यों की स्वतंत्र रूप से जांच करेगी।<img src="https://www.jagranimages.com/images/2026/09/14/template/image/WhatsApp-Image-2026-09-14-at-15.55.51-1789382340355.webp" alt="WhatsApp Image 2026-09-14 at 15.55.51"/></p>
<p><strong>बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद बदली जांच की दिशा</strong><br />इस मामले में बड़ा कानूनी मोड़ 2 सितंबर 2026 को आया था, जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान की मौत की जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया। अदालत ने CBI को FIR दर्ज करने और दिशा के पिता का बयान रिकॉर्ड करने को कहा था। साथ ही जांच के लिए वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि FIR दर्ज करने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को दोषी या आरोपी मान लिया गया है। जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री और उचित आधार सामने आने के बाद ही किसी व्यक्ति की भूमिका तय की जाएगी।</p>
<p><strong>मुंबई पुलिस से CBI ने मांगे पुराने रिकॉर्ड</strong><br />CBI ने जांच संभालने के बाद मामले से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड मुंबई की मालवणी पुलिस से भी मांगे हैं। इनमें पहले की जांच से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं। इससे एजेंसी अब पुराने साक्ष्यों, घटनाक्रम और जांच के दौरान सामने आई जानकारियों की दोबारा समीक्षा करेगी। मुंबई पुलिस की पिछली जांच में दिशा की मौत को आत्महत्या माना गया था और किसी साजिश का सबूत नहीं मिलने की बात कही गई थी। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद CBI इस पूरे मामले की नए सिरे से जांच कर रही है।</p>
<p><strong>सुशांत सिंह राजपूत की मौत से भी जुड़ा रहा मामला</strong><br />दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई में हुई थी। इसके कुछ ही दिन बाद, 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की भी मौत हो गई थी। दिशा के सुशांत के साथ पेशेवर संबंध होने के कारण दोनों घटनाओं को लेकर लंबे समय से तरह-तरह के दावे और सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, दोनों मामलों के बीच किसी आपराधिक संबंध की पुष्टि जांच से ही हो सकती है। अब CBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि पुराने रिकॉर्ड, तकनीकी साक्ष्यों और नए बयानों की जांच कर दिशा की मौत से जुड़े वास्तविक घटनाक्रम को स्पष्ट किया जाए। जांच आगे बढ़ने के साथ ही यह भी सामने आएगा कि पिता द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी तथ्यात्मक पुष्टि होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/state/disha-salian-case-reopened-after-6-years-disha-salian-death/article-12470</link>
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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 17:01:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CG News: लव अफेयर के बीच खूनी वारदात! रायपुर में महिला पर पेट्रोल डालकर आग लगाने का आरोप, हालत गंभीर, आरोपी बॉयफ्रेंड फरार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर। </strong>राजधानी रायपुर में देर रात एक महिला को कथित तौर पर पेट्रोल डालकर आग लगाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। माना थाना क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने महिला को बचाया और गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया। महिला का इलाज मेकाहारा अस्पताल में जारी है और उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।</p>
<p><strong>सड़क पर हुई वारदात, लोगों ने पहुंचकर बचाई जान</strong><br />पुलिस के अनुसार, पीड़िता की पहचान राजकुमारी साहू के रूप में हुई है, जो आरंग की रहने वाली है। आरोप है कि रविवार देर रात</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/cg-news-bloody-incident-between-love-affair-in-raipur-accused/article-12469"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/image-(2).png" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर। </strong>राजधानी रायपुर में देर रात एक महिला को कथित तौर पर पेट्रोल डालकर आग लगाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। माना थाना क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने महिला को बचाया और गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया। महिला का इलाज मेकाहारा अस्पताल में जारी है और उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।</p>
<p><strong>सड़क पर हुई वारदात, लोगों ने पहुंचकर बचाई जान</strong><br />पुलिस के अनुसार, पीड़िता की पहचान राजकुमारी साहू के रूप में हुई है, जो आरंग की रहने वाली है। आरोप है कि रविवार देर रात वह वीरू धीवर के साथ थी। इसी दौरान दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ और आरोपी ने कथित तौर पर महिला पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। आग की चपेट में आने के बाद महिला ने मदद के लिए आवाज लगाई। उसकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और आग बुझाकर उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया। घटना में महिला के शरीर के कई हिस्से झुलस गए हैं।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/14/dbgifmagic_1789369815.gif" alt="रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में महिला को भर्ती कराया गया है। - Dainik Bhaskar"/></p>
<p><strong>आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला</strong><br />घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और प्रारंभिक जांच शुरू की। पीड़िता के बयान तथा अब तक सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी वीरू धीवर के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। वारदात के बाद से आरोपी फरार बताया जा रहा है। पुलिस की अलग-अलग टीमें उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी की तलाश लगातार जारी है और जल्द गिरफ्तारी की कोशिश की जा रही है।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/14/gifs10_1789367902.gif" alt="स्थानीय लोगों की मदद से महिला को अस्पताल पहुंचाया गया।"/></p>
<p><strong>CCTV फुटेज से सुराग जुटा रही पुलिस</strong><br />मामले की जांच के दौरान पुलिस घटनास्थल और आसपास लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाल रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना के दौरान वहां कौन-कौन मौजूद था और वारदात के बाद आरोपी किस रास्ते से फरार हुआ। इसके अलावा पुलिस दोनों के बीच विवाद की वजह और घटना से पहले की परिस्थितियों की भी पड़ताल कर रही है। वारदात के पीछे की सटीक वजह स्पष्ट नहीं हुई है।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/14/gifs8_1789367874.gif" alt="बॉयफ्रेंड ने सड़क पर गर्लफ्रेंड पर पेट्रोल उड़ेलकर उसे जिंदा जलाने की कोशिश की।"/></p>
<p><strong>पुराने विवाद और केस से भी जुड़ रही कड़ियां</strong><br />एएसपी अभिषेक झा के मुताबिक, वीरू धीवर और राजकुमारी साहू के बीच लंबे समय से संबंध होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, 2021 से पहले से दोनों के बीच अफेयर था। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, इसी वर्ष आरंग थाने में एक अलग मामला दर्ज हुआ था, जिसमें आरोपी पर राजकुमारी की सास पर फावड़े से हमला करने का आरोप लगा था। उस मामले में हत्या के प्रयास की धारा के तहत कार्रवाई की गई थी। पुलिस का कहना है कि उस घटना के बाद पति-पत्नी अलग-अलग रहने लगे थे, लेकिन राजकुमारी और वीरू के बीच संपर्क बना रहा। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि घटना वाले दिन दोनों साथ थे।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/14/gifs9_1789367893.gif" alt="मौके पर पहुंचे लोगों ने किसी तरह आग बुझाई।"/></p>
<p><strong>महिला की हालत गंभीर, जांच जारी</strong><br />फिलहाल, राजकुमारी का अस्पताल में उपचार चल रहा है। पुलिस इस पूरे मामले में पीड़िता के बयान, CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद घटना की पूरी परिस्थितियों और विवाद की वास्तविक वजह सामने आने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/cg-news-bloody-incident-between-love-affair-in-raipur-accused/article-12469</link>
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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 16:49:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CG News: रायपुर में 5 दिन बंद रहेंगी मांस-मटन की दुकानें, होटल भी निगम की निगरानी में; नियम तोड़ा तो जब्ती के साथ कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर।</strong> राजधानी में आने वाले धार्मिक पर्वों को देखते हुए नगर पालिक निगम ने मांस-मटन की बिक्री को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। निगम क्षेत्र में पांच अलग-अलग दिनों पर पशुवध गृह और मांस-मटन की सभी दुकानें बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि प्रतिबंधित दिनों में बिक्री करते पाए जाने पर संबंधित दुकानदार या प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>सितंबर में इन 5 तारीखों पर बंद रहेंगी दुकानें</strong><br />नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार धार्मिक पर्वों के मद्देनजर निम्न तारीखों पर निगम क्षेत्र में पशुवध गृह और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/cg-news-meat-mutton-shops-will-remain-closed-for-5-days/article-12468"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/mans.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर।</strong> राजधानी में आने वाले धार्मिक पर्वों को देखते हुए नगर पालिक निगम ने मांस-मटन की बिक्री को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। निगम क्षेत्र में पांच अलग-अलग दिनों पर पशुवध गृह और मांस-मटन की सभी दुकानें बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि प्रतिबंधित दिनों में बिक्री करते पाए जाने पर संबंधित दुकानदार या प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>सितंबर में इन 5 तारीखों पर बंद रहेंगी दुकानें</strong><br />नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार धार्मिक पर्वों के मद्देनजर निम्न तारीखों पर निगम क्षेत्र में पशुवध गृह और मांस-मटन विक्रय केंद्र बंद रहेंगे</p>
<ul>
<li>14 सितंबर 2026 — श्री गणेश चतुर्थी</li>
<li>15 सितंबर 2026 — पर्युषण पर्व का अंतिम दिवस</li>
<li>22 सितंबर 2026 — डोल ग्यारस</li>
<li>25 सितंबर 2026 — अनंत चतुर्दशी</li>
<li>26 सितंबर 2026 — पर्युषण पर्व: संवत्सरी एवं उत्तम क्षमा</li>
</ul>
<p>इन तारीखों पर निगम क्षेत्र में संबंधित दुकानों के संचालन पर पूरी तरह रोक रहेगी।</p>
<p><strong>जोन स्तर पर होगी निगरानी</strong><br />आदेश को जमीन पर लागू कराने की जिम्मेदारी निगम के जोन स्वास्थ्य अधिकारियों और जोन स्वच्छता निरीक्षकों को सौंपी गई है। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में मांस-मटन दुकानों की निगरानी करने और निर्धारित दिनों में प्रतिबंध का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। निगम की टीम यह भी देखेगी कि प्रतिबंध के बावजूद कहीं चोरी-छिपे बिक्री तो नहीं की जा रही है।</p>
<p><strong>होटल और दूसरे प्रतिष्ठान भी रडार पर</strong><br />प्रतिबंध सिर्फ खुले तौर पर संचालित मांस-मटन दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा। महापौर मीनल चौबे के निर्देश पर निगम की टीम होटल और अन्य ऐसे प्रतिष्ठानों पर भी नजर रखेगी जहां मांस-मटन की बिक्री या आपूर्ति की संभावना हो सकती है।</p>
<p>यदि निर्धारित प्रतिबंधित दिनों में किसी होटल, दुकान या अन्य स्थान पर मांस-मटन की बिक्री होती मिली, तो निगम की टीम मौके पर सामग्री जब्त करने के साथ संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करेगी।</p>
<p><strong>त्योहारों के दौरान निगम ने बढ़ाई सख्ती</strong><br />निगम प्रशासन का कहना है कि धार्मिक पर्वों के दौरान जारी किए गए इस आदेश का उद्देश्य निर्धारित तिथियों पर नगर निगम क्षेत्र में पशुवध और मांस-मटन की बिक्री पर रोक को प्रभावी तरीके से लागू करना है। अब संबंधित जोन अधिकारियों की निगरानी में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पांचों प्रतिबंधित दिनों में आदेश का उल्लंघन न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/cg-news-meat-mutton-shops-will-remain-closed-for-5-days/article-12468</link>
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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 16:20:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CG News: चीन की धरती पर भारत का तिरंगा, कवर्धा की गीता यादव बनीं एशिया कप चैंपियन; जूनियर महिला हॉकी में भारत की हैट्रिक</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कवर्धा। </strong>छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले की बेटी गीता यादव ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी के मंच पर प्रदेश का नाम रोशन किया है। बोड़ला की रहने वाली गीता भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम का हिस्सा रहीं, जिसने मेजबान चीन को उसके ही घर में 1-0 से शिकस्त देकर विमेंस जूनियर एशिया कप 2026 की ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इस जीत के साथ भारत ने जूनियर एशिया कप में लगातार तीसरी बार चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।</p>
<p><strong>चीन के खिलाफ फाइनल में भारत का शानदार डिफेंस</strong><br />हुलुनबुइर के मोकी ट्रेनिंग बेस में खेले गए खिताबी मुकाबले में भारत और चीन के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/sports/cg-news-indias-tricolor-on-chinese-soil-kawardhas-geeta-yadav/article-12467"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/junior_asia_cup_champion_geeta_yadav_1789372426.webp" alt=""></a><br /><p><strong>कवर्धा। </strong>छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले की बेटी गीता यादव ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी के मंच पर प्रदेश का नाम रोशन किया है। बोड़ला की रहने वाली गीता भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम का हिस्सा रहीं, जिसने मेजबान चीन को उसके ही घर में 1-0 से शिकस्त देकर विमेंस जूनियर एशिया कप 2026 की ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इस जीत के साथ भारत ने जूनियर एशिया कप में लगातार तीसरी बार चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।</p>
<p><strong>चीन के खिलाफ फाइनल में भारत का शानदार डिफेंस</strong><br />हुलुनबुइर के मोकी ट्रेनिंग बेस में खेले गए खिताबी मुकाबले में भारत और चीन के बीच शुरुआत से ही कड़ी टक्कर देखने को मिली। दोनों टीमों ने आक्रमण की कोशिश की, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण के साथ डिफेंस को भी मजबूत बनाए रखा।</p>
<p>मैच के 17वें मिनट में सानिका चंद्रकांती माने ने शानदार फील्ड गोल दागकर भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई। इसके बाद चीन ने बराबरी की पूरी कोशिश की, लेकिन भारतीय डिफेंस ने हर हमले को नाकाम करते हुए बढ़त कायम रखी। अंतिम सीटी बजते ही भारतीय खिलाड़ियों ने जीत का जश्न मनाया और एशिया कप एक बार फिर भारत के नाम हो गया।</p>
<p><strong>गीता ने पूरे टूर्नामेंट में छोड़ी अपनी छाप</strong><br />इस खिताबी सफर में कबीरधाम की गीता यादव का प्रदर्शन भी चर्चा में रहा। बोड़ला के वार्ड नंबर-14 से आने वाली गीता ने पूरे टूर्नामेंट में टीम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रदर्शन को पिछले मुकाबले में भी पहचान मिली थी, जब उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। फाइनल मुकाबले में भी गीता ने टीम के खेल में अहम योगदान दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही गीता ने भारतीय जूनियर टीम में अपनी जगह को और मजबूत किया है।</p>
<p><strong>बिना कोई मैच गंवाए भारत ने जीती ट्रॉफी</strong><br />भारतीय टीम का अभियान फाइनल तक शानदार रहा। ग्रुप स्टेज में टीम ने तीन मुकाबलों में जीत हासिल की, जबकि एक मैच ड्रॉ रहा। इसके बाद टीम ने नॉकआउट चरण में भी अपना दबदबा बनाए रखा और फाइनल में चीन को हराकर पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहते हुए खिताब पर कब्जा किया। भारत इससे पहले 2023 और 2024 में भी जूनियर एशिया कप का चैंपियन रह चुका है। लगातार तीसरी ट्रॉफी जीतकर भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम ने खिताबों की हैट्रिक पूरी कर दी।</p>
<p><strong>बोड़ला से अंतरराष्ट्रीय हॉकी तक गीता का सफर</strong><br />गीता यादव की उपलब्धि सिर्फ एक खिलाड़ी की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि कबीरधाम के लिए भी गर्व का मौका है। बोड़ला की एक बेटी ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी के मैदान पर देश की जीत में योगदान देकर पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।</p>
<p>गीता की इस सफलता के बाद स्थानीय खेल प्रेमियों और उनके क्षेत्र में खुशी का माहौल है। उनकी उपलब्धि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकती है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद खेल के मैदान में बड़ा मुकाम हासिल करने का सपना देखते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>खेलकूद</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 15:58:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CG News: IPS के बेटे से भिड़ना पड़ा भारी! 2 आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने हथकड़ी लगाकर निकाला जुलूस</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अंबिकापुर।</strong> शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में IPS अधिकारी के बेटे के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को कोतवाली थाने से मुख्य मार्ग होते हुए कोर्ट तक पैदल ले जाकर जुलूस निकाला। कोर्ट में पेशी के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया है। वहीं, मामले में शामिल बताए जा रहे अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/13/dbgifmagic-4_1789322843.gif" alt="पुलिस अधिकारियों ने अभियान चलाकर कार्रवाई की है।" /></p>
<p><strong>नाम लेकर बुलाने पर शुरू हुआ विवाद</strong><br />पुलिस के मुताबिक घटना 7 सितंबर की रात</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/had-to-fight-heavily-with-son-of-cg-news-ips/article-12466"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/image-(1).png" alt=""></a><br /><p><strong>अंबिकापुर।</strong> शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में IPS अधिकारी के बेटे के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को कोतवाली थाने से मुख्य मार्ग होते हुए कोर्ट तक पैदल ले जाकर जुलूस निकाला। कोर्ट में पेशी के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया है। वहीं, मामले में शामिल बताए जा रहे अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/13/dbgifmagic-4_1789322843.gif" alt="पुलिस अधिकारियों ने अभियान चलाकर कार्रवाई की है।"/></p>
<p><strong>नाम लेकर बुलाने पर शुरू हुआ विवाद</strong><br />पुलिस के मुताबिक घटना 7 सितंबर की रात करीब 10 बजे की है। IPS अधिकारी रवि कुर्रे के बेटे लेखांश कुर्रे अपने दोस्तों विशाल सोनी और रोमी खान के साथ बौरीपारा तालाब के पास रिंग रोड पर रुके थे। बताया गया कि वे अपने दोस्त प्रिंस गुप्ता के आने का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान वहां मौजूद कुछ युवकों से उनका विवाद हो गया। शिकायत के अनुसार, बातचीत के दौरान लेखांश ने गोलू गणेश का नाम लेकर उसे संबोधित किया। आरोप है कि इसी बात पर गोलू ने आपत्ति जताई और विवाद बढ़ गया। इसके बाद कथित तौर पर गाली-गलौज और मारपीट शुरू हो गई।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/13/dbgifmagic-2_1789322758.gif" alt="dbgifmagic-2_1789322758.gif"/></p>
<p><strong>‘पिता पुलिस अधिकारी है तो क्या कर लेगा’ कहने का आरोप</strong><br />शिकायत में लेखांश ने आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान आरोपियों ने उसके पिता के पुलिस अधिकारी होने का जिक्र करते हुए उसे धमकाया। आरोप है कि इसी दौरान यह भी कहा गया कि पिता पुलिस में होने से उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मारपीट में लेखांश के कान, कंधे, सिर और गले में चोट लगने की बात सामने आई है। घटना के बाद उसने कोतवाली थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 296, 351(1), 115(2) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/13/dbgifmagic-3_1789322786.gif" alt="पुलिस अधिकारियों ने अभियान चलाकर कार्रवाई की है।"/></p>
<p><strong>दो गिरफ्तार, अन्य आरोपियों की तलाश जारी</strong><br />पुलिस ने मामले में गोलू गणेश और आशुतोष गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, घटना में शामिल बताए जा रहे अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को हथकड़ी लगाकर कोतवाली थाने से शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए न्यायालय तक ले जाया। पुलिस की इस कार्रवाई का उद्देश्य कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त संदेश देना भी माना जा रहा है।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/13/image-3_1789322855.jpg" alt="पुलिस अधिकारियों ने अभियान चलाकर कार्रवाई की है।"/></p>
<p><strong>गोलू गणेश पर पहले से भी मामला दर्ज</strong><br />पुलिस के अनुसार, आरोपी गोलू गणेश का नाम इससे पहले सौरभ मिश्रा के घर के सामने वाहनों में तोड़फोड़ और घर में घुसकर मारपीट से जुड़े मामले में भी सामने आया था। उस मामले में वह फरार बताया जा रहा था। अब IPS के बेटे से मारपीट के मामले में गिरफ्तारी के बाद पुलिस दोनों मामलों में उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई कर रही है। फिलहाल, पुलिस फरार आरोपियों की तलाश के साथ पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 14:05:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>RTO चालान के नाम पर भेजी APK, व्हाट्सएप हैक कर परिचितों से ऐंठे हजारों रुपये</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isselectedend"><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi"><strong>बिलासपुर :</strong> साइबर ठगों ने लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए नया तरीका अपनाया है। अब फर्जी आरटीओ चालान के नाम पर मोबाइल और वाट्सएप हैक किए जा रहे हैं। इसके बाद हैकर्स पीड़ित की कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौजूद लोगों को इमरजेंसी का मैसेज भेजकर पैसे की मांग कर रहे हैं। हाल ही में सामने आए एक मामले में ठेकेदार का वाट्सएप हैक करने के बाद उसके परिचितों से हजारों रुपए की ठगी कर ली गई।</span></p>
<p class="isselectedend"><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">मित्र के चालान की बात सुनकर खोली फाइल</span></strong></p>
<p class="isselectedend"><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ दिन पहले एक बिजली विभाग के लाइनमैन का मोबाइल</span></span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/hacked-whatsapp-sent-apk-in-the-name-of-rto-challan/article-12465"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/fcd98e10-8b93-4c3b-8787-1d82674e41ef.png" alt=""></a><br /><p class="isselectedend"><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi"><strong>बिलासपुर :</strong> साइबर ठगों ने लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए नया तरीका अपनाया है। अब फर्जी आरटीओ चालान के नाम पर मोबाइल और वाट्सएप हैक किए जा रहे हैं। इसके बाद हैकर्स पीड़ित की कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौजूद लोगों को इमरजेंसी का मैसेज भेजकर पैसे की मांग कर रहे हैं। हाल ही में सामने आए एक मामले में ठेकेदार का वाट्सएप हैक करने के बाद उसके परिचितों से हजारों रुपए की ठगी कर ली गई।</span></p>
<p class="isselectedend"><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">मित्र के चालान की बात सुनकर खोली फाइल</span></strong></p>
<p class="isselectedend"><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ दिन पहले एक बिजली विभाग के लाइनमैन का मोबाइल साइबर ठगों ने हैक कर लिया था। इसके बाद उसके वाट्सएप से जुड़े सभी परिचितों को आरटीओ चालान के नाम पर एक फर्जी एपीके फाइल भेजी गई। यही फाइल बिजली ठेकेदार अनिल भोजवानी के मोबाइल पर भी पहुंची। उन्होंने कुछ दिनों तक फाइल को नहीं खोला। बताया गया कि एक दिन अनिल के एक मित्र ने आरटीओ चालान आने की बात कही। इसके बाद उन्होंने अपने मोबाइल पर आई फाइल को चेक करने की कोशिश की। फाइल खोलने के प्रयास के साथ ही उनके मोबाइल पर लगातार </span>OTP <span lang="hi" xml:lang="hi">आने लगे। उन्होंने </span>OTP <span lang="hi" xml:lang="hi">की प्रक्रिया को कैंसिल कर दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। कुछ ही देर में उनका वाट्सएप हैक हो गया।</span></span></p>
<p class="isselectedend"><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;font-weight:normal;"><strong>‘2000 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए अर्जेंट डाल दो</span>’</strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong> का भेजा मेसेज</strong></span></span></p>
<p class="isselectedend"><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">वाट्सएप का एक्सेस मिलते ही साइबर ठगों ने उनकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौजूद परिचितों और दोस्तों को मैसेज भेजना शुरू कर दिया। मैसेज में लिखा गया कि </span><strong><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;font-weight:normal;">‘2000 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपए अर्जेंट डाल दो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रात </span>8 <span lang="hi" xml:lang="hi">बजे तक लौटा दूंगा।</span>’</span></strong><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">परिचितों को लगा कि अनिल को वास्तव में पैसों की जरूरत है। कई लोगों ने बिना फोन पर बात किए ही पैसे भेज दिए। किसी ने </span>2 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार रुपए भेजे तो किसी ने </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार रुपए। एक परिचित ने तो </span>12 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार रुपए तक भेज दिए। एक व्यक्ति ने ठेकेदार के मोबाइल नंबर पर सीधे </span>2 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार रुपए भेजे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उनके खाते में पहुंच गया। वहीं अन्य लोगों से साइबर ठगों ने स्कैनर के जरिए रकम मंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सीधे उनके खाते में चली गई।</span></span></p>
<p class="isselectedend"><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">साइबर सेल पहुंचने के बाद खुला पूरा मामला</span></strong></p>
<p class="isselectedend"><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">ठगी का पता चलने के बाद पीड़ित ने साइबर सेल से संपर्क किया। साइबर सेल की टीम ने मोबाइल में मौजूद संदिग्ध ऐप्स को हटवाया और सुरक्षा के लिए मोबाइल को पूरी तरह फॉर्मेट कराने की सलाह दी।</span></p>
<p class="isselectedend"><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">अब शादी के डिजिटल कार्ड के नाम पर भी एपीके</span></strong></p>
<p class="isselectedend"><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">साइबर ठग अब आरटीओ चालान के अलावा शादी के डिजिटल कार्ड के नाम पर भी एपीके फाइल भेज रहे हैं। मैसेज में शादी का निमंत्रण बताते हुए एक फाइल या लिंक भेजा जाता है। जैसे ही कोई व्यक्ति उसे डाउनलोड या इंस्टॉल करता है</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोबाइल में मौजूद जानकारी और वाट्सएप तक अनधिकृत पहुंच का खतरा बढ़ जाता है। इसके बाद ठग उसी मोबाइल से जुड़े संपर्कों को मैसेज भेजकर ठगी का प्रयास करते हैं।</span></span></p>
<p class="isselectedend"><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">साइबर विशेषज्ञों के अनुसार</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनजान नंबर से आने वाली एपीके फाइल को किसी भी स्थिति में डाउनलोड या इंस्टॉल नहीं करना चाहिए। आरटीओ चालान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली बिल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शादी का कार्ड या किसी अन्य जरूरी दस्तावेज के नाम पर भेजी गई संदिग्ध फाइल को खोलने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है।</span></span><br /><br /><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;"> </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 13:39:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[स्वाति मिश्रा ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Indore News: कहीं क्रिकेट खेलते गणेश, कहीं लैपटॉप चलाते बप्पा! इंदौर के इस घर में सजे हैं 5000 से ज्यादा अनोखे गणपति</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>इंदौर। </strong>आमतौर पर किसी घर में भगवान गणेश की एक-दो प्रतिमाएं नजर आती हैं, लेकिन इंदौर में एक ऐसा घर है जहां प्रवेश करते ही हर तरफ गणपति के अलग-अलग रूप दिखाई देते हैं। बंगाली चौराहे के पास रहने वाले CA राजकुमार शाह ने करीब दो दशक में गणेश प्रतिमाओं का ऐसा अनोखा संसार तैयार किया है, जिसमें 5 हजार से ज्यादा प्रतिमाएं शामिल हैं। घर के दरवाजे से लेकर कमरों और हॉल तक बप्पा के इतने रूप नजर आते हैं कि हर प्रतिमा अपने आप में एक अलग कहानी सुनाती है।</p>
<p><strong>बप्पा के ऐसे रूप, जिन्हें देखकर ठहर जाएंगी</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/indore-news-ganesh-playing-cricket-somewhere-bappa-using-laptop-more/article-12464"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/image3.png" alt=""></a><br /><p><strong>इंदौर। </strong>आमतौर पर किसी घर में भगवान गणेश की एक-दो प्रतिमाएं नजर आती हैं, लेकिन इंदौर में एक ऐसा घर है जहां प्रवेश करते ही हर तरफ गणपति के अलग-अलग रूप दिखाई देते हैं। बंगाली चौराहे के पास रहने वाले CA राजकुमार शाह ने करीब दो दशक में गणेश प्रतिमाओं का ऐसा अनोखा संसार तैयार किया है, जिसमें 5 हजार से ज्यादा प्रतिमाएं शामिल हैं। घर के दरवाजे से लेकर कमरों और हॉल तक बप्पा के इतने रूप नजर आते हैं कि हर प्रतिमा अपने आप में एक अलग कहानी सुनाती है।</p>
<p><strong>बप्पा के ऐसे रूप, जिन्हें देखकर ठहर जाएंगी नजरें</strong><br />इस अनोखे कलेक्शन की खासियत सिर्फ इसकी संख्या नहीं, बल्कि गणपति के रूपों में दिखाई देने वाली कल्पनाशीलता है। कहीं गणेशजी किताब हाथ में लिए नजर आते हैं तो कहीं वकील की पोशाक में। कुछ प्रतिमाओं में वे क्रिकेट खेलते दिखाई देते हैं, तो किसी में लैपटॉप पर काम करते हुए। कहीं बप्पा नृत्य कर रहे हैं, कहीं शतरंज की बिसात के सामने बैठे हैं और कई प्रतिमाओं में उन्हें अलग-अलग वाद्य यंत्र बजाते हुए दिखाया गया है। आकार, रंग, मुद्रा और चेहरे के भाव में इतनी विविधता है कि एक जैसी दो प्रतिमाएं ढूंढना भी मुश्किल हो जाता है। यही विविधता राजकुमार के संग्रह को सामान्य धार्मिक संग्रह से अलग बनाती है।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/14/cover_10_1789369415686.gif" alt="इंदौर में राजकुमार शाह के घर मौजूद गणेश प्रतिमाओं का कलेक्शन। - Dainik Bhaskar"/></p>
<p><strong>ग्रीटिंग कार्ड से शुरू हुआ शौक, फिर बना हजारों प्रतिमाओं का संसार</strong><br />राजकुमार शाह का यह जुनून अचानक शुरू नहीं हुआ था। शुरुआत गणेशजी की तस्वीरों वाले ग्रीटिंग कार्ड जमा करने से हुई। धीरे-धीरे यह रुचि प्रतिमाओं तक पहुंची और 2003 के आसपास उन्होंने अलग-अलग जगहों से गणेश प्रतिमाएं जुटाना शुरू किया। इसके बाद यात्राओं, मेलों, बाजारों और अलग-अलग शहरों से गुजरते हुए जब भी उन्हें गणपति का कोई अनोखा रूप दिखाई देता, उसे अपने संग्रह में शामिल करने की कोशिश करते। देखते ही देखते वर्षों का यह शौक 5 हजार से अधिक प्रतिमाओं के विशाल संग्रह में बदल गया।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/14/inner_14_1789369476503.gif" alt="दो दशक में तैयार हुआ 5 हजार से ज्यादा गणेश प्रतिमाओं का कलेक्शन।"/></p>
<p><strong>सब्जी और नारियल से लेकर सोने तक के गणपति</strong><br />राजकुमार के संग्रह में गणेश प्रतिमाओं की दुनिया भी उतनी ही रंग-बिरंगी है जितनी उनकी संख्या। मिट्टी, लकड़ी, सिरेमिक और विभिन्न धातुओं से बनी प्रतिमाओं के साथ यहां सब्जियों और नारियल से तैयार किए गए गणपति भी देखने को मिलते हैं। कलेक्शन में पीपल के पत्ते पर बनाए गए सोने के गणेश और अमेरिकन डायमंड से सजी कलाकृतियां भी मौजूद हैं। कुछ प्रतिमाएं पूरी तरह पारंपरिक शैली में हैं, जबकि कुछ आधुनिक कल्पना का खूबसूरत उदाहरण हैं। इन्हीं में कहीं बप्पा क्रिकेट खेलते हैं तो कहीं आधुनिक तकनीक के साथ नजर आते हैं।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/14/inner_18_1789369433303.gif" alt="5 हजार से ज्यादा प्रतिमाओं में गणेशजी के अलग-अलग रूप।"/></p>
<p><strong>महाराष्ट्र से लेकर इंडोनेशिया और थाईलैंड तक की झलक</strong><br />राजकुमार की यात्राएं भी उनके इस संग्रह को लगातार नया रूप देती रही हैं। देश के अलग-अलग राज्यों से जुटाई गई प्रतिमाओं के साथ उनके पास इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से लाई गई गणेश प्रतिमाएं भी हैं। महाराष्ट्र की प्रतिमाओं का संग्रह विशेष रूप से बड़ा है। इसके अलावा अलग-अलग कलाकारों द्वारा हाथ से तैयार की गई कई अनूठी कलाकृतियां भी इस घर का हिस्सा हैं। अलग-अलग देशों और संस्कृतियों में भगवान गणेश को किस तरह चित्रित किया गया है, इसकी झलक भी इस संग्रह में दिखाई देती है।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/14/inner_15_1789369466703.gif" alt="किताब, लैपटॉप और वाद्य यंत्रों वाले गणेश के अलग-अलग रूप।"/></p>
<p><strong>रोज 3-4 घंटे सिर्फ बप्पा की देखभाल में</strong><br />इतनी बड़ी संख्या में प्रतिमाओं को संभालना अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी है। राजकुमार की पत्नी सीमा शाह के मुताबिक, संग्रह की प्रतिमाओं की नियमित सफाई की जाती है और इसमें रोज करीब 3 से 4 घंटे लग जाते हैं। हालांकि, परिवार के लिए यह कोई बोझ नहीं बल्कि बप्पा के प्रति जुड़ाव और श्रद्धा का हिस्सा है।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/14/inner_17_1789369442087.gif" alt="राजकुमार शाह के घर में सहेजी गईं गणेश प्रतिमाएं।"/></p>
<p><strong>अब दोस्तों के लिए भी तय है ‘गणपति वाला गिफ्ट’</strong><br />राजकुमार के इस अनोखे शौक से उनके दोस्त और रिश्तेदार भी अच्छी तरह परिचित हैं। यही वजह है कि जन्मदिन या किसी खास अवसर पर उन्हें सामान्य उपहारों के बजाय अक्सर गणेश प्रतिमा ही मिलती है। विदेश से लौटने वाले परिचित भी उनके लिए कोई अनोखी गणेश प्रतिमा लेकर आते हैं। राजकुमार बताते हैं कि कई बार हर बुधवार उनके संग्रह में एक नई प्रतिमा जुड़ जाती है। कोरोना काल में संग्रह बढ़ने की रफ्तार कुछ कम जरूर हुई, लेकिन नए और अनोखे गणपति तलाशने का सिलसिला बंद नहीं हुआ।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/14/inner_16__1_1789369457540.gif" alt="अलग-अलग जगहों और कलाकारों से जुटाई गई गणेश प्रतिमाएं।"/></p>
<p><strong>हर मूर्ति सिर्फ प्रतिमा नहीं, एक याद है</strong><br />राजकुमार शाह के लिए इन हजारों प्रतिमाओं की असली कीमत उनकी संख्या में नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी यादों में है। कोई प्रतिमा किसी यात्रा की निशानी है, किसी के पीछे किसी कलाकार की कहानी है तो किसी के साथ कोई निजी स्मृति जुड़ी हुई है। शायद यही वजह है कि 2003 में शुरू हुआ यह सफर आज भी थमा नहीं है। 5 हजार से ज्यादा गणपति घर में होने के बावजूद राजकुमार की नजर आज भी अगले अनोखे बप्पा की तलाश में रहती है। उनके लिए यह सिर्फ कलेक्शन नहीं, बल्कि भगवान गणेश के अलग-अलग रूपों, कला और यादों को संजोकर रखने की एक लंबी यात्रा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 13:38:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
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                <title>बीमार छात्रा से कुर्सी साफ कराने पर हेडमास्टर पर गिरी गाज, जरी हुआ नोटिस, तीन दिन में मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">बिलासपुर : </span></strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">मस्तूरी विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला बेलटुकरी में बीमार छात्रा से कुर्सी साफ कराने का मामला अब शिक्षा विभाग की जांच के घेरे में आ गया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल की प्रधानपाठक भारती खांडे को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">बुखार से पीड़ित छात्रा से उल्टी साफ़ कराने का <span style="font-family:Mangal, serif;">आरोप</span></span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">बताया गया है कि स्कूल में एक छात्रा पहले से बुखार से पीड़ित थी। इसी दौरान</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/headmaster-slammed-for-cleaning-chair-from-sick-student-notice-issued/article-12462"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/deo--ofc-ka-noties.png" alt=""></a><br /><p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">बिलासपुर : </span></strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">मस्तूरी विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला बेलटुकरी में बीमार छात्रा से कुर्सी साफ कराने का मामला अब शिक्षा विभाग की जांच के घेरे में आ गया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल की प्रधानपाठक भारती खांडे को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">बुखार से पीड़ित छात्रा से उल्टी साफ़ कराने का <span style="font-family:Mangal, serif;">आरोप</span></span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">बताया गया है कि स्कूल में एक छात्रा पहले से बुखार से पीड़ित थी। इसी दौरान उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसे उल्टी हो गई। आरोप है कि छात्रा को तत्काल चिकित्सकीय सहायता दिलाने के बजाय उल्टी से गंदी हो गई कुर्सी उसी से साफ कराई गई। इसी दौरान किसी छात्र ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।</span></span></p>
<p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">वीडियो पहुंचा कलेक्टर तक, तत्काल नोटिस जारी</span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया। सोशल मीडिया के माध्यम से घटना की जानकारी कलेक्टर संजय अग्रवाल तक पहुंची। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद डीईओ कार्यालय से प्रधानपाठक को नोटिस जारी किया गया। नोटिस में वायरल वीडियो और प्रारंभिक जानकारी के आधार पर शाला संचालन तथा प्रशासनिक नियंत्रण में घोर लापरवाही प्रतीत होने का उल्लेख किया गया है। इसे अपने पद की जिम्मेदारियों और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों के प्रतिकूल बताया गया है।</span></p>
<p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">तीन दिन में देना होगा जवाब</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;font-weight:normal;"><strong>, </strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>नहीं तो एकतरफा कार्रवाई तय</strong></span></span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">डीईओ ने प्रधानपाठक को नोटिस प्राप्त होने के तीन दिवस के भीतर अपना स्पष्ट</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लिखित एवं शपथपत्र सत्यापित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनके खिलाफ नियमानुसार एकतरफा कठोर प्रशासनिक एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी गई है। घटना के बाद शिक्षा विभाग की कार्रवाई से साफ है कि स्कूल में बच्चों के साथ व्यवहार और शाला संचालन में लापरवाही को लेकर विभाग गंभीर है। अब प्रधानपाठक के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/headmaster-slammed-for-cleaning-chair-from-sick-student-notice-issued/article-12462</link>
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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 13:21:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[स्वाति मिश्रा ]]></dc:creator>
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