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                <title>National Jagat Vision</title>
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                <description>RSS Feed of National Jagat Vision</description>
                
                            <item>
                <title>गैस एजेंसी में बड़ा खेल उजागर! स्टॉक में सैकड़ों सिलेंडरों की गड़बड़ी, उपभोक्ताओं से बदसलूकी के आरोप भी पाए गए सही </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बलौदाबाजार। </strong>बलौदाबाजार जिले की बम्लेश्वरी गैस एजेंसी में सामने आई अनियमितताओं ने उपभोक्ता हितों और निगरानी व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार शिकायतों के बाद जब प्रशासन हरकत में आया और संयुक्त जांच टीम ने एजेंसी का निरीक्षण किया, तब रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच चौंकाने वाली अनियमितता सामने आईं है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी के संचालन में गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि अंतिम नतीजा विस्तृत जांच और आगे की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होंगे।</p>
<p><strong>रिकॉर्ड कुछ और, हकीकत कुछ और!</strong><br />जांच</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/big-game-exposed-in-gas-agency-hundreds-of-cylinders-in/article-10432"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/gas_agency_s_negligence_exposed_1781670807.webp" alt=""></a><br /><p><strong>बलौदाबाजार। </strong>बलौदाबाजार जिले की बम्लेश्वरी गैस एजेंसी में सामने आई अनियमितताओं ने उपभोक्ता हितों और निगरानी व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार शिकायतों के बाद जब प्रशासन हरकत में आया और संयुक्त जांच टीम ने एजेंसी का निरीक्षण किया, तब रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच चौंकाने वाली अनियमितता सामने आईं है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी के संचालन में गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि अंतिम नतीजा विस्तृत जांच और आगे की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होंगे।</p>
<p><strong>रिकॉर्ड कुछ और, हकीकत कुछ और!</strong><br />जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर है। रिपोर्ट के अनुसार, 346 भरे हुए गैस सिलेंडर रिकॉर्ड के मुकाबले कम पाए गए, जबकि 296 खाली सिलेंडर निर्धारित संख्या से अधिक मिले है। इतनी बड़ी संख्या में सिलेंडरों की गड़बड़ी सामने आने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि आखिर यह अंतर कैसे पैदा हुआ और इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या निगरानी तंत्र समय रहते इन अनियमितता को पकड़ने में विफल रहा?<img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-06/gas_agency_s_negligence_exposed_1781670841.webp" alt="Gas_agency_s_negligence_exposed_1781670841" width="1200" height="675"/></p>
<p><strong>उपभोक्ताओं की शिकायतों ने खोली एजेंसी की कार्यप्रणाली की परतें</strong><br />जांच केवल स्टॉक तक सीमित नहीं रही। उपभोक्ताओं द्वारा लंबे समय से किए जा रहे दुर्व्यवहार और अव्यवस्थित सेवा संबंधी आरोपों की भी पड़ताल की गई है। जांच टीम को कई शिकायतें प्रथम दृष्टया सही मिलीं, जिसके बाद एजेंसी की कार्यप्रणाली पर और अधिक सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि शिकायतों के बावजूद लंबे समय तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिसके कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।</p>
<p><strong>प्रशासन की कार्रवाई के बाद बढ़ी संचालक की मुश्किलें</strong><br />अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद एजेंसी संचालक के खिलाफ एलपीजी (प्रदाय एवं वितरण) विनियमन, 2000 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। साथ ही पूरी जांच रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) को भेज दी गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या उपभोक्ताओं को हुई कथित परेशानियों के लिए जवाबदेही तय की जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:39:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>  री-एग्जाम से पहले Telegram पर लगाया गया अस्थायी बैन बना कानूनी विवाद, सवाल- पेपर लीक रोकने में नाकामी का बोझ अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर?  </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली पर उठे सवाल अब एक नए कानूनी मोड़ पर पहुंच गए हैं। केंद्र सरकार द्वारा Telegram पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर कंपनी ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले ने एक नई बहस छेड़ दी है कि परीक्षा सुरक्षा में आई खामियों का समाधान प्लेटफॉर्म बंद करना है या व्यवस्था को मजबूत करना। दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका के बाद अब यह मामला केवल परीक्षा सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और सरकारी हस्तक्षेप</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/temporary-ban-imposed-before-re-exam-becomes-legal-dispute-question/article-10431"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/telegram_delhi_high_court_petition_1781676159.webp" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली पर उठे सवाल अब एक नए कानूनी मोड़ पर पहुंच गए हैं। केंद्र सरकार द्वारा Telegram पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर कंपनी ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले ने एक नई बहस छेड़ दी है कि परीक्षा सुरक्षा में आई खामियों का समाधान प्लेटफॉर्म बंद करना है या व्यवस्था को मजबूत करना। दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका के बाद अब यह मामला केवल परीक्षा सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और सरकारी हस्तक्षेप जैसे मुद्दों से भी जुड़ गया है।</p>
<p><strong>पेपर लीक ने खड़े किए बड़े सवाल</strong><br />NEET-UG परीक्षा को लेकर देशभर में विवाद तब शुरू हुआ जब प्रश्न-पत्र लीक होने के आरोप सामने आए। जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रश्न-पत्रों के कथित प्रसार में सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद सरकार ने री-एग्जाम के दौरान किसी भी संभावित गड़बड़ी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने शुरू किए। इसी क्रम में Telegram पर अस्थायी रोक लगाने का निर्णय लिया गया। हालांकि आलोचकों का सवाल है कि यदि परीक्षा प्रणाली सुरक्षित और निगरानी मजबूत होती, तो क्या ऐसी नौबत आती?</p>
<p><strong>Telegram का तर्क – पूरा प्लेटफॉर्म क्यों बंद?</strong><br />कंपनी ने अदालत में दलील दी है कि किसी कथित दुरुपयोग के आधार पर पूरे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करना उचित नहीं है। कंपनी का कहना है कि यदि कुछ लोगों ने नियमों का उल्लंघन किया है, तो कार्रवाई उनके खिलाफ होनी चाहिए, न कि करोड़ों उपयोगकर्ताओं पर प्रभाव डालने वाले फैसले लिए जाएं। हालांकि अदालत में दोनों पक्षों की दलीलों के बाद ही इस मामले की वास्तविक कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।</p>
<p><strong>सरकार का पक्ष – परीक्षा की शुचिता सर्वोपरि</strong><br />सरकारी एजेंसियों का मानना है कि री-एग्जाम के दौरान किसी भी प्रकार की सूचना लीक, प्रश्न-पत्र प्रसार या नकल गिरोह की गतिविधियों को रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी कारण एहतियात के तौर पर कुछ कड़े कदम उठाए गए। लेकिन इस फैसले ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या परीक्षा माफियाओं पर कार्रवाई के बजाय तकनीकी प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाना स्थायी समाधान हो सकता है?</p>
<p><strong>क्या व्यवस्था पर भरोसे का संकट गहरा रहा है?</strong><br />शिक्षा विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि लगातार पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और फिर री-एग्जाम की स्थिति ने छात्रों और अभिभावकों के बीच भरोसे का संकट पैदा किया है। अब जब परीक्षा सुरक्षा के नाम पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक अदालत पहुंच रहे हैं, तो यह संकेत है कि मामला केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहा।</p>
<p><strong>हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें</strong><br />अब सभी की नजर दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई पर है। अदालत को यह तय करना होगा कि परीक्षा सुरक्षा और डिजिटल अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। फिलहाल, इतना तय है कि NEET पेपर लीक विवाद ने देश की परीक्षा प्रणाली, सरकारी निर्णयों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भूमिका को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में कोर्ट का रुख इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:11:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जंगल में मिला तेंदुए का शव, वन विभाग पर उठे सवाल! क्या वन्यजीवों की सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लोरमी। </strong>मुंगेली जिले के लोरमी वन परिक्षेत्र में एक तेंदुए का शव मिलने से वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जंगल में मृत अवस्था में मिले तेंदुए ने न केवल वन विभाग की निगरानी प्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों पर भी बहस छेड़ दी है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। प्रारंभिक स्तर पर शिकार की आशंका जताई जा रही है, हालांकि वन विभाग ने अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है और जांच पूरी होने के बाद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/dead-body-of-leopard-found-in-forest-raises-questions-on/article-10430"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/leopard_found_dead_in_lormi_forest_1781673776.webp" alt=""></a><br /><p><strong>लोरमी। </strong>मुंगेली जिले के लोरमी वन परिक्षेत्र में एक तेंदुए का शव मिलने से वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जंगल में मृत अवस्था में मिले तेंदुए ने न केवल वन विभाग की निगरानी प्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों पर भी बहस छेड़ दी है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। प्रारंभिक स्तर पर शिकार की आशंका जताई जा रही है, हालांकि वन विभाग ने अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है और जांच पूरी होने के बाद ही मौत के कारणों की पुष्टि की बात कही है।</p>
<p><strong>जंगल का राजा नहीं, अब जंगल में भी सुरक्षित नहीं?</strong><br />ग्रामीणों की सूचना पर जब वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो जंगल में तेंदुए का शव मिला है। सवाल यह है कि यदि वन क्षेत्र में नियमित निगरानी और गश्त की व्यवस्था है, तो एक संरक्षित वन्यजीव की मौत की जानकारी विभाग को ग्रामीणों से क्यों मिली? स्थानीय लोगों का कहना है कि वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता है। वहीं वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि ऐसी घटनाएं संरक्षण तंत्र की कमजोरियों की ओर संकेत करती हैं।</p>
<p><strong>शिकार की आशंका ने बढ़ाई चिंता</strong><br />हालांकि वन विभाग ने आधिकारिक तौर पर शिकार की पुष्टि नहीं की है, लेकिन प्रारंभिक जांच में इस संभावना से इनकार भी नहीं किया गया है। यदि जांच में शिकार की पुष्टि होती है, तो यह क्षेत्र में सक्रिय वन्यजीव तस्करी और अवैध शिकार गिरोहों को लेकर गंभीर चिंता का विषय होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि तेंदुआ जैसे संरक्षित वन्यजीव की मौत केवल एक घटना नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरे का संकेत हो सकती है।</p>
<p><strong>पहले भी उठते रहे हैं सवाल</strong><br />वन्यजीवों की मौत, मानव-वन्यजीव संघर्ष और अवैध शिकार को लेकर प्रदेश के विभिन्न वन क्षेत्रों में समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। इसके बावजूद ऐसी घटनाओं का सामने आना यह संकेत देता है कि जमीनी स्तर पर निगरानी और संरक्षण उपायों को और मजबूत करने की जरूरत है।</p>
<p><strong>पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें</strong><br />फिलहाल, वन विभाग ने तेंदुए के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या इसके पीछे कोई आपराधिक कारण है। लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है, यदि जंगलों में भी तेंदुए जैसे वन्यजीव सुरक्षित नहीं हैं, तो वन्यजीव संरक्षण के दावों की वास्तविक स्थिति क्या है?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:36:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>G7 मंच से भारत की आवाज बुलंद! पीएम मोदी ने ट्रंप की मौजूदगी में उठाया भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong>: फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 समिट में भारत की आवाज़ एक बार फिर वैश्विक मंच पर मजबूती से सुनाई दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके असर का मुद्दा उठाते हुए भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। खास बात यह रही कि जब पीएम मोदी यह मुद्दा उठा रहे थे, उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया के कई बड़े नेता मौजूद थे।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि समुद्री व्यापार वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है और इसे सुरक्षित रखना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/international/indias-voice-raised-from-g7-forum-pm-modi-raised-the/article-10429"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/whatsa_2026_06_17_091420.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली</strong>: फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 समिट में भारत की आवाज़ एक बार फिर वैश्विक मंच पर मजबूती से सुनाई दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके असर का मुद्दा उठाते हुए भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। खास बात यह रही कि जब पीएम मोदी यह मुद्दा उठा रहे थे, उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया के कई बड़े नेता मौजूद थे।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि समुद्री व्यापार वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है और इसे सुरक्षित रखना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि संघर्षों की कीमत निर्दोष नागरिक और नाविक चुका रहे हैं। ऐसे में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।<img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-06/pm_modi_at_g7_summit_1781667371.webp" alt="PM_Modi_at_G7_Summit_1781667371" width="1200" height="675"/></p>
<p>G7 के हाई लेवल वर्किंग सेशन में पीएम मोदी ने ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज भी बुलंद की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब विकासशील देश केवल सहायता नहीं, बल्कि सम्मानजनक और समान साझेदारी चाहते हैं। उन्होंने दुनिया को यह संदेश दिया कि दाता और लाभार्थी की सोच से आगे बढ़कर साझेदारी और विश्वास के नए युग की शुरुआत करनी होगी।</p>
<p>अपने संबोधन में पीएम मोदी ने 'ट्रस्ट डेफिसिट' यानी वैश्विक स्तर पर बढ़ती विश्वास की कमी को सबसे बड़ी चुनौती बताया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के पास संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन भरोसे की कमी लगातार गहराती जा रही है। यही वजह है कि संवाद, कूटनीति और सहयोग ही भविष्य के संघर्षों का स्थायी समाधान बन सकते हैं।</p>
<p>समिट के दौरान पीएम मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित कई देशों के नेताओं से मुलाकात भी हुई। इन बैठकों को वैश्विक रणनीतिक साझेदारी और भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका के नजरिए से अहम माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:23:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> कोरिया में दिल दहला देने वाली वारदात: रेत विवाद में भाजपा नेता की जिंदा जलकर मौत, आरोपियों में भी सत्ताधारी दल से जुड़े नाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कोरिया। </strong>छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से सामने आई एक भयावह घटना ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और रेत कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोनहत क्षेत्र में भाजपा नेता भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला सिंह की जिंदा जलकर मौत के मामले ने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों तक को झकझोर कर दिया है।</p>
<p>इस घटना को लेकर सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि मृतक और आरोपी पक्ष, दोनों के सत्ताधारी दल से जुड़े होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि रेत कारोबार,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/heart-wrenching-incident-in-korea-bjp-leader-burnt-alive-in-sand/article-10428"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/fire.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोरिया। </strong>छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से सामने आई एक भयावह घटना ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और रेत कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोनहत क्षेत्र में भाजपा नेता भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला सिंह की जिंदा जलकर मौत के मामले ने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों तक को झकझोर कर दिया है।</p>
<p>इस घटना को लेकर सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि मृतक और आरोपी पक्ष, दोनों के सत्ताधारी दल से जुड़े होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि रेत कारोबार, राजनीतिक संरक्षण और क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई को लेकर भी बहस तेज हो गई है।</p>
<p><strong>रेत विवाद से शुरू हुआ खूनी अंत?</strong><br />प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मृतक भाजपा नेता भरत सिंह गहरवार और आरोपी पक्ष के बीच लंबे समय से रेत उत्खनन और उससे जुड़े कारोबार को लेकर विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि घटना से कुछ घंटे पहले भी दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई थी, जिसकी सूचना स्थानीय पुलिस तक पहुंची थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि विवाद की जानकारी पहले से थी, तो क्या समय रहते कोई प्रभावी कदम उठाया गया? क्या संभावित हिंसा को रोका जा सकता था?<img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-06/fire-01-1.jpg" alt="fire-01-1" width="1200" height="675"/></p>
<p><strong>फॉर्च्यूनर को टक्कर, फिर आग... मौत में बदल गई दुश्मनी</strong><br />पुलिस के अनुसार, आरोप है कि फॉर्च्यूनर वाहन को पहले भारी वाहन से टक्कर मारकर क्षतिग्रस्त किया गया और बाद में उसमें आग लगा दी गई। इस घटना में भरत सिंह गहरवार की मौत हो गई, जबकि अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह हाल के वर्षों की सबसे सनसनीखेज और निर्मम घटनाओं में से एक मानी जाएगी।</p>
<p><strong>सत्ता से जुड़े नाम और बढ़े सवाल</strong><br />मामले में जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है, उनके भी राजनीतिक रूप से सक्रिय होने की चर्चा है। हालांकि पुलिस जांच अभी जारी है और दोष तय होना बाकी है, लेकिन घटना ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब किसी गंभीर आपराधिक मामले में सत्ताधारी दल से जुड़े नाम सामने आते हैं, तो स्वाभाविक रूप से प्रशासनिक निष्पक्षता और प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े होने लगते हैं।</p>
<p><strong>कांग्रेस का हमला, सरकार पर संरक्षण के आरोप</strong><br />घटना के बाद कांग्रेस ने इसे रेत कारोबार से जुड़े कथित संघर्ष का परिणाम बताते हुए सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में रेत कारोबार को लेकर हिंसक घटनाएं बढ़ रही हैं और सरकार ऐसे मामलों को रोकने में विफल साबित हो रही है।  हालांकि कांग्रेस के ये आरोप राजनीतिक बयान हैं और इनकी पुष्टि किसी जांच एजेंसी द्वारा नहीं की गई है।</p>
<p><strong>सरकार का जवाब – दोषियों पर होगी कार्रवाई</strong><br />वहीं उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कांग्रेस पर घटना का राजनीतिकरण करने का आरोप भी लगाया है।</p>
<p><strong>कानून-व्यवस्था पर फिर खड़े हुए सवाल</strong><br />इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर रेत कारोबार को लेकर विवाद इतनी हिंसक घटनाओं में क्यों बदल रहे हैं? क्या अवैध उत्खनन, आर्थिक हितों और स्थानीय प्रभाव की लड़ाई ने हालात को खतरनाक बना दिया है? फिलहाल, पुलिस जांच जारी है, कई आरोपी हिरासत में हैं और कुछ की तलाश की जा रही है। लेकिन भरत सिंह गहरवार की मौत ने यह सवाल जरूर छोड़ दिया है कि क्या रेत का कारोबार अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि खूनी संघर्ष का कारण भी बनता जा रहा है?</p>
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                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 10:52:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से बड़ा झटका! आचार संहिता उल्लंघन मामले में राहत नहीं, अब आरोपों पर होगी सीधी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बिलासपुर। </strong>छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को चुनावी विवाद से जुड़े मामले में हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर खारिज कराने की कोशिश सफल नहीं हो सकी। हाईकोर्ट ने याचिका निरस्त करने की मांग ठुकराते हुए मामले की मेरिट पर सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है। अब अदालत में उन आरोपों पर विस्तार से सुनवाई होगी, जिनमें विधानसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता और चुनावी नियमों के उल्लंघन का दावा किया गया है।</p>
<p><strong>चुनाव जीत के पीछे नियम उल्लंघन का आरोप</strong><br />दुर्ग सांसद और पाटन विधानसभा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/big-blow-to-bhupesh-baghel-from-the-high-court-no/article-10427"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-02/bhupesh-baghel-ex-cm-chhattisgarh.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बिलासपुर। </strong>छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को चुनावी विवाद से जुड़े मामले में हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर खारिज कराने की कोशिश सफल नहीं हो सकी। हाईकोर्ट ने याचिका निरस्त करने की मांग ठुकराते हुए मामले की मेरिट पर सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है। अब अदालत में उन आरोपों पर विस्तार से सुनवाई होगी, जिनमें विधानसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता और चुनावी नियमों के उल्लंघन का दावा किया गया है।</p>
<p><strong>चुनाव जीत के पीछे नियम उल्लंघन का आरोप</strong><br />दुर्ग सांसद और पाटन विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी रहे विजय बघेल द्वारा दायर चुनाव याचिका में आरोप लगाया गया है कि 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचार बंद होने की अवधि में भी भूपेश बघेल ने चुनावी गतिविधियों में हिस्सा लिया था। याचिका के अनुसार, मतदान से ठीक पहले समर्थकों के साथ रैली और रोड शो आयोजित किए गए, चुनावी नारे लगाए गए और मतदाताओं से समर्थन मांगा गया था। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 का उल्लंघन है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है और अदालत में सुनवाई के बाद ही सच सामने आएगा।</p>
<p><strong>राहत की कोशिश पर कोर्ट ने लगाई रोक</strong><br />सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल की ओर से अदालत में यह तर्क रखा गया कि चुनाव याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और आरोपों के समर्थन में पर्याप्त प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। इसी आधार पर याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज करने की मांग की गई थी। लेकिन हाईकोर्ट ने माना कि मामले में सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं और याचिका को सीधे खारिज नहीं किया जा सकता है। अदालत के इस फैसले के बाद अब पूरा मामला मेरिट के आधार पर आगे बढ़ेगा।</p>
<p><strong>बढ़ सकती हैं राजनीतिक मुश्किलें</strong><br />हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष इसे पूर्व मुख्यमंत्री के लिए बड़ा कानूनी और राजनीतिक झटका बता रहा है, जबकि कांग्रेस का पक्ष है कि अंतिम फैसला आने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। फिलहाल, अदालत ने केवल यह माना है कि याचिका में उठाए गए मुद्दे सुनवाई योग्य हैं। आरोप साबित हुए हैं या नहीं, इस पर कोई फैसला नहीं दिया गया है। लेकिन इतना तय है कि अब भूपेश बघेल को अदालत में इन आरोपों का विस्तार से सामना करना पड़ेगा।</p>
<p><strong>23 जून पर टिकी निगाहें</strong><br />मामले की अगली सुनवाई 23 जून को निर्धारित की गई है। इस सुनवाई में अदालत चुनाव याचिका में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध तथ्यों पर आगे विचार करेगी। राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से यह मामला आने वाले दिनों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/big-blow-to-bhupesh-baghel-from-the-high-court-no/article-10427</link>
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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 10:29:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ आबकारी ओवर रेटिंग घोटाला: हाऊस और कमिश्नर के नाम पर दागी इंस्पेक्टरों को संरक्षण, निलंबन की फाइलें दबाए बैठे अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>  राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र 'बैगा आदिवासियों' को फर्जी मुकदमों की धमकी, कोरे कागज पर दस्तखत कराने का वीडियो वायरल।</strong></p>
<p>  </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>पिछली सरकार के शराब घोटाले का राजदार आबकारी इंस्पेक्टर वर्तमान सत्ता के शीर्ष 'हाऊस' का ले रहा नाम।</strong></span></p>
<p>  </p>
<p>रायपुर।छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री और ओवर-रेटिंग का सिंडिकेट एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। प्रदेश की विष्णु देव साय सरकार जहां एक ओर सुशासन और जीरो टॉलरेंस का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर आबकारी विभाग के भीतर बैठे कुछ रसूखदार अफसर सरकार की साख को बट्टा लगाने में जुटे हैं।</p>
<p>विभाग ने दिखावे के लिए कुछ कनिष्ठ अधिकारियों पर निलंबन की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/chhattisgarh-excise-scam-officers-sitting-on-files-for-suspension-of/article-10426"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_0000000046e87207bad26edefb94af2e.png" alt=""></a><br /><p><strong> राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र 'बैगा आदिवासियों' को फर्जी मुकदमों की धमकी, कोरे कागज पर दस्तखत कराने का वीडियो वायरल।</strong></p>
<p> </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>पिछली सरकार के शराब घोटाले का राजदार आबकारी इंस्पेक्टर वर्तमान सत्ता के शीर्ष 'हाऊस' का ले रहा नाम।</strong></span></p>
<p> </p>
<p>रायपुर।छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री और ओवर-रेटिंग का सिंडिकेट एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। प्रदेश की विष्णु देव साय सरकार जहां एक ओर सुशासन और जीरो टॉलरेंस का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर आबकारी विभाग के भीतर बैठे कुछ रसूखदार अफसर सरकार की साख को बट्टा लगाने में जुटे हैं।</p>
<p>विभाग ने दिखावे के लिए कुछ कनिष्ठ अधिकारियों पर निलंबन की गाज तो गिरा दी है, लेकिन जिनकी जड़ें सत्ता के गलियारों तक फैली हैं, उन्हें खुलेआम बचाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, दो दागी आबकारी इंस्पेक्टरों के निलंबन की दो अलग-अलग फाइलें आबकारी कमिश्नर के दफ्तर में कई दिनों से धूल फांक रही हैं, लेकिन रसूख के दबाव में कमिश्नर साहब कोई एक्शन नहीं ले पा रहे हैं।</p>
<p> </p>
<h5><strong>संरक्षित बैगा आदिवासियों को धमकी, वीडियो वायरल</strong></h5>
<p> </p>
<p>यह पूरा मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है। इन दागी आबकारी इंस्पेक्टरों पर आरोप है कि ये राष्ट्रपति द्वारा गोद ली गई संरक्षित बैगा जनजाति के भोले-भाले आदिवासियों को सरेआम डरा-धमका रहे हैं।</p>
<p>आदिवासियों को आबकारी के झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं और उनसे कोरे कागजों पर जबरन हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं। इस पूरी गुंडागर्दी के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जिसके बाद भी विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है।</p>
<h5><strong>हाऊस और मंत्री कनेक्शन का खुला दावा</strong></h5>
<p>आखिर इन अफसरों को किसका संरक्षण प्राप्त है, यह एक बड़ा सवाल है। इसका जवाब खुद इन दागी अफसरों के बयानों और हरकतों में साफ छिपा नजर आता है।</p>
<p>विभाग के सूत्रों का कहना है कि ये इंस्पेक्टर बंद कमरों में खुलेआम दावा कर रहे हैं कि उनका संबंध सीधे कमिश्नर से लेकर 'हाऊस' तक है। उनका कहना है कि कोई भी रसूखदार उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।</p>
<h5><strong>बिना ट्रेनिंग सीधे मलाईदार पोस्टिंग</strong></h5>
<p>इस अफसर के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकारी नौकरी ज्वाइन करने के बाद इसने आज तक अनिवार्य फील्ड ट्रेनिंग ही नहीं की। पिछली सरकार के दौरान मात्र छह महीने के भीतर इसे सुकमा से सीधे बिलासपुर की 'वेलकम डिस्टलरी' का मलाईदार प्रभार मिल गया था।</p>
<p>उस वक्त शराब घोटाले में आरोपी कवासी लखमा आबकारी मंत्री थे। बताया जाता है कि तत्कालीन मंत्री ने सीधे आबकारी सचिव को फोन घुमाया और इस अफसर की मनचाही पोस्टिंग हो गई।</p>
<p> </p>
<h5><strong>सत्ता बदली पर नहीं बदला रुतबा</strong></h5>
<p> </p>
<p>राज्य में सत्ता बदल गई, लेकिन इस दागी अफसर का रुतबा कम नहीं हुआ। अब विभाग के गलियारों में यह अफवाह उड़ाई जा रही है कि वर्तमान गृहमंत्री, हाऊस के करीबियों और कमिश्नर से इसके सीधे और मधुर संबंध हैं।</p>
<p>इस तरह की धौंस और अफवाहों से नई सरकार की साफ-सुथरी छवि पर सीधा दाग लग रहा है। यह इंस्पेक्टर पिछली सरकार में हुए करोड़ों रुपये के शराब घोटाले का मुख्य राजदार भी माना जा रहा है, जो अब उसी काली कमाई के दम पर खुद को बचाने का खेल खेल रहा है।</p>
<p> </p>
<h5><strong>उड़नदस्ते की छापेमारी में खुली थी पोल</strong></h5>
<p> </p>
<p>हाल ही में आबकारी विभाग के उड़नदस्ता दल ने प्रदेश भर में बड़े पैमाने पर छापामार कार्रवाई की थी। इस दौरान रायपुर, धमतरी, खैरागढ़, गंडई, हिरमी और कुरूद में शराब प्रेमियों से एमआरपी से 60 रुपये तक ज्यादा की अवैध वसूली पकड़ी गई थी।</p>
<p>इस बड़ी अनियमितता के बाद विभाग ने चार उप निरीक्षकों कौशल किशोर सोनी, प्रभाकर सिरमौर, मनराखन नेताम और पुरुषोत्तम सिन्हा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही निरूपमा लोन्हारे, मुकेश अग्रवाल, राजेश कुमार शर्मा और जेबा खान समेत आठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।</p>
<p> </p>
<h5><strong>क्या दागियों की संपत्ति की जांच करेगी सरकार?</strong></h5>
<p> </p>
<p>कार्रवाई के दौरान आबकारी आयुक्त पीएस एल्मा ने सख्त लहजे में कहा था कि उपभोक्ताओं से ज्यादा वसूली एक गंभीर भ्रष्टाचार है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन जब बात इन दो रसूखदार इंस्पेक्टरों की आती है, तो आबकारी कमिश्नर के सारे नियम-कानून और दावे धरे के धरे रह जाते हैं।ठोस साक्ष्य और वायरल वीडियो सामने होने के बाद भी फाइलों को दबाकर बैठना सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/chhattisgarh-excise-scam-officers-sitting-on-files-for-suspension-of/article-10426</link>
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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:58:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बड़ी नियुक्ति: बस्तर के नक्सल विरोधी अभियानों के चेहरा IPS सुंदरराज पी बने NIA के नए IG</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के पद पर नियुक्त किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर उनकी नियुक्ति को मंजूरी प्रदान कर दी है।</p>
<p>जारी आदेश के अनुसार वर्ष 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी की यह नियुक्ति प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) के आधार पर की गई है। मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाए, ताकि वे केंद्र में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल सकें।</p>
<p><strong>बस्तर में नक्सल</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/big-appointment-ips-sunderraj-p-becomes-the-face-of-anti-naxal/article-10425"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_000000000270720b8ebf653c41fedc24.png" alt=""></a><br /><p> नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के पद पर नियुक्त किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर उनकी नियुक्ति को मंजूरी प्रदान कर दी है।</p>
<p>जारी आदेश के अनुसार वर्ष 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी की यह नियुक्ति प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) के आधार पर की गई है। मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाए, ताकि वे केंद्र में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल सकें।</p>
<p><strong>बस्तर में नक्सल उन्मूलन के रहे प्रमुख रणनीतिकार</strong></p>
<p>सुंदरराज पी लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के सबसे संवेदनशील बस्तर रेंज के आईजी के रूप में कार्यरत रहे हैं। उन्हें राज्य में नक्सल विरोधी अभियानों के सबसे प्रभावशाली और अनुभवी अधिकारियों में गिना जाता है।</p>
<p>उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने बस्तर के दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार कड़े अभियान चलाकर माओवादी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया। उनके कार्यकाल के दौरान क्षेत्र की सुरक्षा रणनीति में कई महत्वपूर्ण व्यावहारिक बदलाव देखने को मिले।</p>
<p><strong>सशस्त्र कार्रवाई के साथ खुफिया तंत्र को किया मजबूत</strong></p>
<p>उन्होंने केवल सशस्त्र सैन्य कार्रवाई पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया, बल्कि जमीनी स्तर पर खुफिया तंत्र को मजबूत करने पर भी विशेष बल दिया। इसके साथ ही स्थानीय आदिवासी युवाओं को सुरक्षा व्यवस्था से सक्रिय रूप से जोड़ने का काम किया गया।</p>
<p>उनके दिशा-निर्देश पर संवेदनशील क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित करने और अंदरूनी विकास कार्यों को गति देने पर भी जोर दिया गया। बस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में सड़क और बुनियादी ढांचे के विस्तार में भी उनकी भूमिका अग्रिम रही।</p>
<p><strong>अबूझमाड़ में कैंप और रिकॉर्ड आत्मसमर्पण</strong></p>
<p>उनकी बनाई रणनीति के चलते सुरक्षा बलों की पहुंच उन सुदूर इलाकों तक बढ़ी जहां पहले पहुंचना अत्यंत कठिन माना जाता था। सूत्रों के अनुसार, उनके कार्यकाल में रिकॉर्ड संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा को चुना।</p>
<p>अबूझमाड़ जैसे सबसे दुर्गम और कोर नक्सली क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित कर सुरक्षा बलों की स्थायी उपस्थिति सुनिश्चित करने में उनका बड़ा योगदान रहा। इससे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती मिली।</p>
<p><strong>देशव्यापी सुरक्षा जांच में निभाएंगे अहम भूमिका</strong></p>
<p>केंद्र सरकार द्वारा उन्हें NIA जैसी देश की शीर्ष जांच एजेंसी में इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपना उनके लंबे अनुभव और उत्कृष्ट कार्यकुशलता का सीधा प्रमाण है।</p>
<p>नई भूमिका में वे देशभर में होने वाली आतंकवादी और आंतरिक सुरक्षा संबंधी गंभीर जांचों में मुख्य भूमिका निभाएंगे। इस हाई-प्रोफाइल नियुक्ति के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस और सुरक्षा महकमे में नए प्रशासनिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:27:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करोड़ों का फर्जीवाड़ा: 6.93 करोड़ की बोगस बिलिंग मामले में स्टील कारोबारी गिरफ्तार, 5 महीने से था फरार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। रायपुर में फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। वस्तु व सेवा कर आसूचना महानिदेशालय (DGGI) की रायपुर जोनल यूनिट ने 6.93 करोड़ रुपए के घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने ओम किरण इस्पात उद्योग के पार्टनर हरीश वाधवानी को गिरफ्तार कर लिया है।</p>
<p>आरोपी कारोबारी लंबे समय से जांच एजेंसियों को चकमा दे रहा था। पिछले करीब पांच महीने से फरार हरीश ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन, वहां से भी राहत न मिलने के बाद आखिरकार वह जांच एजेंसी के हत्थे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/steel-businessman-arrested-in-bogus-billing-case-of-crores-of/article-10424"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_0000000014c4720bb6b9563af51e392f.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। रायपुर में फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। वस्तु व सेवा कर आसूचना महानिदेशालय (DGGI) की रायपुर जोनल यूनिट ने 6.93 करोड़ रुपए के घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने ओम किरण इस्पात उद्योग के पार्टनर हरीश वाधवानी को गिरफ्तार कर लिया है।</p>
<p>आरोपी कारोबारी लंबे समय से जांच एजेंसियों को चकमा दे रहा था। पिछले करीब पांच महीने से फरार हरीश ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन, वहां से भी राहत न मिलने के बाद आखिरकार वह जांच एजेंसी के हत्थे चढ़ गया।</p>
<p> </p>
<h5><strong>फर्जी कंपनियों का बिछाया था जाल</strong></h5>
<p> </p>
<p>DGGI की जांच में सामने आया है कि हरीश वाधवानी की फर्म ने बिना कोई वास्तविक व्यापार किए सिर्फ कागजों पर फर्जी बिल तैयार किए। इन बोगस बिलों के आधार पर करीब 6.93 करोड़ रुपए का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हासिल कर लिया गया।</p>
<p>अधिकारियों के मुताबिक, ओम किरण इस्पात उद्योग काफी समय से उनके रडार पर था। यह फर्म फर्जी, अस्तित्वहीन और पूरी तरह से बंद हो चुकी कंपनियों के एक बड़े नेटवर्क के जरिए अवैध तरीके से टैक्स का फायदा उठा रही थी।</p>
<p> </p>
<p>दस्तावेजों की जांच में खुली पोल</p>
<p> </p>
<p>घोटाले की परतें तब खुलीं जब जांच टीम ने फर्म के जीएसटी रिटर्न और GSTR-2A जैसे अहम दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की। इस दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।</p>
<p>अधिकारियों ने पाया कि भारी मात्रा में आईटीसी ऐसे जीएसटी नंबरों से लिया गया था, जिन्हें विभाग ने पहले ही निलंबित या रद्द कर दिया था। सबूत पुख्ता होने के बाद से ही आरोपी की तलाश तेज कर दी गई थी।</p>
<h5><strong>कोर्ट दर कोर्ट भटका, फिर भी नहीं मिली राहत</strong></h5>
<p> </p>
<p>खुद पर शिकंजा कसता देख आरोपी हरीश वाधवानी अंडरग्राउंड हो गया था। गिरफ्तारी की तलवार लटकती देख उसने निचली अदालतों से लेकर हाईकोर्ट तक अग्रिम जमानत के लिए याचिकाएं लगाईं।</p>
<p>उसे किसी भी अदालत से राहत नहीं मिली। जब सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने भी उसकी अंतिम याचिका खारिज कर दी, तो DGGI की टीम ने घेराबंदी कर उसे धर दबोचा।</p>
<h5><strong>क्या होता है फर्जी ITC का खेल?</strong></h5>
<p> </p>
<p>इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) असल में वह व्यवस्था है, जिसमें कारोबारी अपनी खरीद पर चुकाए गए टैक्स को बिक्री पर लगने वाले टैक्स के साथ एडजस्ट करता है। इसका सीधा मकसद एक ही सामान पर बार-बार टैक्स लगने से रोकना है।</p>
<p>फर्जी आईटीसी के खेल में जालसाज बिना कोई माल खरीदे-बेचे सिर्फ फर्जी बिलों का पुलिंदा तैयार करते हैं। इसके जरिए कागजों पर व्यापार दिखाकर सरकार से टैक्स क्रेडिट क्लेम कर लिया जाता है और सरकारी खजाने को करो</p>
<p>ड़ों का चूना लगाया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/steel-businessman-arrested-in-bogus-billing-case-of-crores-of/article-10424</link>
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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:01:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बीएसपी स्क्रैप चोरी कांड का मास्टरमाइंड UP के देवरिया से गिरफ्तार:  90 लाख से अधिक का माल बरामद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भिलाई/दुर्ग | भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) से 250 टन लोहा चोरी होने के बहुचर्चित मामले में दुर्ग पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने इस पूरे संगठित स्क्रैप चोरी गिरोह के कथित मास्टरमाइंड संजय सिंह को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से धर दबोचा है।</p>
<p>मंगलवार को गिरफ्तार आरोपी को स्थानीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे सात दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस लंबी पूछताछ के दौरान करोड़ों रुपये के इस अवैध स्क्रैप नेटवर्क से जुड़े कई और चौकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।</p>
<h5><strong>कड़ी</strong></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/mastermind-of-bsp-scrap-theft-case-arrested-from-deoria-up/article-10423"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_000000008d80720ba346c6527cc46447.png" alt=""></a><br /><p>भिलाई/दुर्ग | भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) से 250 टन लोहा चोरी होने के बहुचर्चित मामले में दुर्ग पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने इस पूरे संगठित स्क्रैप चोरी गिरोह के कथित मास्टरमाइंड संजय सिंह को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से धर दबोचा है।</p>
<p>मंगलवार को गिरफ्तार आरोपी को स्थानीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे सात दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस लंबी पूछताछ के दौरान करोड़ों रुपये के इस अवैध स्क्रैप नेटवर्क से जुड़े कई और चौकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।</p>
<h5><strong>कड़ी से कड़ी जोड़कर सरगना तक पहुंची पुलिस</strong></h5>
<p>अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पुरानी भिलाई थाने में दर्ज इस प्रकरण में संजय सिंह लंबे समय से फरार चल रहा था। पुलिस की एक विशेष टीम लगातार उसके ठिकानों पर नजर रख रही थी, जिसके बाद उसे यूपी में ट्रेस कर गिरफ्तार किया गया।</p>
<p>इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मामले के एक अन्य अहम आरोपी पिंटू उर्फ उपेंद्र ओझा को भी गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। पुलिस अब इन दोनों आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर उनके पूरे सिंडिकेट, रुपयों के लेन-देन और नेटवर्क में शामिल अन्य मददगारों की भूमिका को खंगालने की तैयारी कर रही है।</p>
<p>पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मुख्य आरोपी संजय सिंह (48 वर्ष) खुर्सीपार, भिलाई का मूल निवासी है, जबकि पकड़ा गया दूसरा आरोपी पिंटू उर्फ उपेंद्र ओझा (48 वर्ष) सेक्टर-05 भिलाई में रहता है। इस पूरे सिंडिकेट में संजय सिंह का बेटा अभय सिंह भी बराबर का साझीदार है, जो अभी फरार है और पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।</p>
<h5><strong>बाप-बेटे पर घोषित था 10-10 हजार का इनाम</strong></h5>
<p>शुरुआती जांच के बाद से ही दुर्ग पुलिस ने संजय सिंह और उसके बेटे अभय सिंह को इस पूरे स्क्रैप चोरी सिंडिकेट का मुख्य संचालक माना था। कानूनी शिकंजे से बचने के लिए दोनों लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे, जिसके कारण पुलिस प्रशासन ने उन पर 10-10 हजार रुपये का नकद इनाम भी घोषित किया था।</p>
<p>इस बड़े मामले की शुरुआत इसी साल 26 मई को हुई थी, जब भिलाई-3 थाना क्षेत्र के अकलोरडीह स्थित एके ट्रेडर्स स्क्रैप यार्ड में पुलिस ने अचानक दबिश दी थी। उस छापेमारी के दौरान यार्ड परिसर और वहां खड़े हाइवा वाहनों से लगभग 250 टन भारी लौह सामग्री जब्त की गई थी, जिसकी बाजार में अनुमानित कीमत 90 लाख रुपये से भी ज्यादा आंकी गई है।</p>
<h5><strong>फ्लाई एश की आड़ में छिपाई जाती थी लोहे की प्लेटें</strong></h5>
<p>पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी बेहद शातिराना तरीके से प्लांट से लोहा पार कर रहे थे। वे फ्लाई एश के वैध परिवहन की आड़ लेकर गाड़ियों में नीचे लोहे की भारी प्लेटें, बीम और अन्य कीमती स्क्रैप लोड करते थे और ऊपर से उसे फ्लाई एश से पूरी तरह ढक देते थे।</p>
<p>यार्ड से पकड़े गए हाइवा चालकों ने पूछताछ में कबूल किया था कि वे इसी चालाकी का इस्तेमाल कर अब तक 30 से 40 बार बीएसपी प्लांट के भीतर से स्क्रैप सुरक्षित बाहर निकाल चुके हैं। इस बयान के बाद से ही पुलिस गिरोह के मुख्य सरगना संजय सिंह की तलाश में जुट गई थी।</p>
<h5><strong>10 बैंक खाते सीज, वित्तीय साम्राज्य पर नजर</strong></h5>
<p>कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने आरोपी संजय सिंह के घर की तलाशी ली थी, जहां से 10 अलग-अलग राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों की पासबुक और चेकबुक बरामद हुई थीं। पुलिस ने तत्काल कदम उठाते हुए इन सभी बैंक खातों को पूरी तरह सीज करवा दिया है।</p>
<p>अब पुलिस की वित्तीय जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी के लोहे को बेचकर कमाए गए करोड़ों रुपये किन-किन खातों में भेजे गए। इस मामले में पुलिस मीथेन ठाकुर, चिंतानंद साहू, गीतेश वर्मा, निर्मल सिंह और घनश्याम गुप्ता समेत कई आरोपियों को पहले ही जेल भेज चुकी है।</p>
<h5><strong>बीएसपी के अंदरूनी अधिकारियों पर भी गहराया शक</strong></h5>
<p>जांच के दायरे में अब भिलाई स्टील प्लांट के अंदरूनी तंत्र से जुड़े लोग भी आ गए हैं। पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि बीएसपी जैसे अति-सुरक्षित परिसर से, जहां अत्याधुनिक ट्रैकिंग और सुरक्षा व्यवस्था लागू है, वहां से सैकड़ों टन लोहा बिना किसी आंतरिक मदद के बाहर नहीं भेजा जा सकता।</p>
<p>यही वजह है कि अब प्लांट के कुछ चुनिंदा कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों और तकनीकी विभाग के अधिकारियों की भूमिका की भी बारिकी से जांच की जा रही है। पुलिस को पूरी उम्मीद है कि संजय सिंह की सात दिनों की रिमांड अवधि के दौरान इस सिंडिकेट से जुड़े बीएसपी के कई बड़े चेहरों के नाम उजागर हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/mastermind-of-bsp-scrap-theft-case-arrested-from-deoria-up/article-10423</link>
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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 08:39:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंबिकापुर में ईडी की कार्रवाई देर शाम तक जारी पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता के प्रतिष्ठान पर दिनभर खंगाले गए दस्तावेज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अंबिकापुर में सरगुजा कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता के व्यावसायिक प्रतिष्ठान मानसून एग्रो एजेंसी पर प्रवर्तन निदेशालय की छापामार कार्रवाई मंगलवार देर शाम तक लगातार जारी रही। अलसुबह से शुरू हुई इस सघन जांच प्रक्रिया ने पूरे दिन शहर के राजनीतिक और व्यावसायिक हलकों में भारी बेचैनी बनाए रखी। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने प्रतिष्ठान के भीतर मौजूद एक-एक दस्तावेज की बारीकी से पड़ताल की और शाम ढलने के बाद भी टीम के कई सदस्य वहां डटे हुए हैं। प्रतिष्ठान के बाहर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों का कड़ा पहरा शाम तक उसी मुस्तैदी के साथ कायम रहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/eds-action-in-ambikapur-continued-till-late-evening-documents-were/article-10422"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/mansoon-agro.jpeg" alt=""></a><br /><p>अंबिकापुर में सरगुजा कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता के व्यावसायिक प्रतिष्ठान मानसून एग्रो एजेंसी पर प्रवर्तन निदेशालय की छापामार कार्रवाई मंगलवार देर शाम तक लगातार जारी रही। अलसुबह से शुरू हुई इस सघन जांच प्रक्रिया ने पूरे दिन शहर के राजनीतिक और व्यावसायिक हलकों में भारी बेचैनी बनाए रखी। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने प्रतिष्ठान के भीतर मौजूद एक-एक दस्तावेज की बारीकी से पड़ताल की और शाम ढलने के बाद भी टीम के कई सदस्य वहां डटे हुए हैं। प्रतिष्ठान के बाहर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों का कड़ा पहरा शाम तक उसी मुस्तैदी के साथ कायम रहा जिससे अंदर चल रही जांच की गंभीरता का साफ अंदाजा लगाया जा सकता है।</p><p>दिनभर चली इस मैराथन कार्रवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने मुख्य रूप से वित्तीय लेन-देन से जुड़े पुराने और नए सभी रिकॉर्ड खंगाले। विभागीय सूत्रों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जांच टीम ने कंप्यूटर की हार्ड ड्राइव लैपटॉप कच्चे-पक्के एकाउंट्स के रजिस्टर और कई अहम बैंक पासबुक सहित डिजिटल व कागजी सबूतों को अपनी जांच के दायरे में लिया है। इसके अलावा प्रतिष्ठान के कर्मचारियों और राकेश गुप्ता के परिजनों से भी दिनभर पूछताछ का दौर चलता रहा ताकि व्यापारिक आय और निवेश के विभिन्न स्रोतों का सटीक मिलान किया जा सके। बहुचर्चित डीएमएफ घोटाले से जुड़े संभावित तारों को लेकर अधिकारियों ने वित्तीय अनियमितताओं और आय-व्यय के संदिग्ध आंकड़ों पर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा।</p><p>इस लंबी और थका देने वाली कार्रवाई ने पूरे प्रदेश के कांग्रेसी खेमे में एक बार फिर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। चूंकि यह पूरा मामला पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन फंड के दुरुपयोग और कथित घोटाले से जुड़ा बताया जा रहा है इसलिए इस छापे को जांच की दिशा में एक अहम कड़ी माना जा रहा है। देर शाम तक किसी भी प्रकार की आधिकारिक जब्ती या गिरफ्तारी की पुष्टि जांच एजेंसी की तरफ से नहीं की गई है लेकिन यह प्रबल संभावना जताई जा रही है कि टीम जब अपनी कार्रवाई खत्म करेगी तो अपने साथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त करके ले जाएगी जिनका बाद में विभागीय मुख्यालय में विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा।</p><p>फिलहाल पूरे अंबिकापुर शहर की नजरें रिंग रोड गंगापुर स्थित मानसून एग्रो एजेंसी पर टिकी हुई हैं और हर कोई इस बात का इंतजार कर रहा है कि ईडी की टीम के बाहर निकलने पर क्या नए तथ्य सामने आते हैं। स्थानीय पुलिस भी बाहरी सुरक्षा व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है। जांच पूरी होने और अधिकारियों की आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह पूरी तरह से स्पष्ट हो सकेगा कि इस मैराथन छापे में जांच एजेंसी के हाथ कौन से पुख्ता सबूत लगे हैं और इस बड़े घोटाले में आगे की कानूनी कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 20:15:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तबादला ब्रेकिंग...जनपद सीईओ सहित इन अफसरों के हुए तबादले, देखिये तबादला आदेश, किसे कहां भेजा गया…</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर 16 जून 2026। राज्य सरकार ने बड़ी संख्या में जनपद सीईओ के तबादले किये हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की तरफ से जारी आदेश में जनपद सीईओ के अलावे सहायक परियोजना अधिकारी के भी तबादले किये हैं। देखिये आदेश…</p>
<p><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-06/img-20260616-wa0047.jpg" alt="IMG-20260616-WA0047" width="626" height="860" /></p>
<p><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-06/image-6.webp" alt="image-6" width="622" height="888" /></p>
<p>  </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/transfer-breaking-see-the-transfers-of-these-officers-including-the/article-10421"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/image-51.webp" alt=""></a><br /><p>रायपुर 16 जून 2026। राज्य सरकार ने बड़ी संख्या में जनपद सीईओ के तबादले किये हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की तरफ से जारी आदेश में जनपद सीईओ के अलावे सहायक परियोजना अधिकारी के भी तबादले किये हैं। देखिये आदेश…</p>
<p><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-06/img-20260616-wa0047.jpg" alt="IMG-20260616-WA0047" width="626" height="860"/></p>
<p><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-06/image-6.webp" alt="image-6" width="622" height="888"/></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:24:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिंद एनर्जी का काला' खेल: अनपढ़ आदिवासी चपरासी के नाम पर करोड़ों की बेनामी संपत्ति, पुलिस बनी कठपुतली अब राष्ट्रपति भवन की एंट्री से मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कोरबा/रायपुर।कॉरपोरेट की चालाकी और खाकी की शर्मनाक मिलीभगत का  सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। कोरबा की नामी कंपनी 'हिंद एनर्जी एंड कोल बेनिफिकेशन (इंडिया) लिमिटेड ने अपने ही एक अशिक्षित  चपरासी को कागजों में डायरेक्टर बनाकर करोड़ों की बेनामी संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग का खेल खेला। जब पाप का घड़ा भरा तो पीड़ित ने मामले की जानकारी सार्वजनिक की,  जिसके बाद पुलिस विभाग के अधिकारी भी मामले में शामिल हो गए और  कंपनी के बाउंसर की तरह काम करने लगे। लेकिन 2 साल तक फाइलें दबाए बैठे सिस्टम को अब पसीना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/black-game-of-hind-energy-benami-property-worth-crores-in/article-10419"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_00000000e96071f5a45dc17a43306ba0.png" alt=""></a><br /><p>कोरबा/रायपुर।कॉरपोरेट की चालाकी और खाकी की शर्मनाक मिलीभगत का  सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। कोरबा की नामी कंपनी 'हिंद एनर्जी एंड कोल बेनिफिकेशन (इंडिया) लिमिटेड ने अपने ही एक अशिक्षित  चपरासी को कागजों में डायरेक्टर बनाकर करोड़ों की बेनामी संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग का खेल खेला। जब पाप का घड़ा भरा तो पीड़ित ने मामले की जानकारी सार्वजनिक की,  जिसके बाद पुलिस विभाग के अधिकारी भी मामले में शामिल हो गए और  कंपनी के बाउंसर की तरह काम करने लगे। लेकिन 2 साल तक फाइलें दबाए बैठे सिस्टम को अब पसीना आ रहा है, क्योंकि मामले में सीधे राष्ट्रपति भवन की एंट्री हो गई है।</p><h5><strong>चपरासी को बनाया अरबपति डायरेक्टर</strong></h5><p>62 वर्षीय आदिवासी कांति कुमार प्रधान 2006 से हिंद एनर्जी में बतौर चपरासी कार्यरत थे। आरोप है कि कंपनी के डायरेक्टर - संजय अग्रवाल, पवन कुमार अग्रवाल, सतीश कुमार अग्रवाल, राजीव अग्रवाल समेत 12 निदेशकों—ने इस अनपढ़ बुजुर्ग की मजबूरी का सीधा फायदा उठाया। बिना उसे बताए, धोखे से कागजों पर उसे कंपनी का निदेशक बना दिया गया। इसके बाद उसके नाम का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपयों की बेनामी संपत्तियां खरीदी गईं। </p><h5><strong>पुलिस ने दिखाई दादागिरी, ROC ने मूंदी आंखें</strong></h5><p>वर्ष 2020 में जब यह पूरा फर्जीवाड़ा आयकर विभाग की नजर में आया, तब  प्रधान को अपने नाम पर चल रहे इस फर्जीवाड़े का पता चला। उसने पुलिस की शरण ली, लेकिन यहां सिस्टम' पहले ही रसूखदारों के आगे नतमस्तक था। आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी हरीशचंद्र टंडेकर और ASI मनोज मिश्रा ने एसपी के आदेश होने का झूठा खौफ दिखाकर बिना वारंट उस बुजुर्ग को जबरन उठाने और जान से मारने की कोशिश की। परिजनों के कड़े विरोध के चलते किसी तरह उसकी जान बची।<br />दूसरी ओर, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) छत्तीसगढ़ की भूमिका इस मामले में सबसे ज्यादा संदिग्ध है। पीड़ित ने 2 साल पहले मनी लॉन्ड्रिंग, बेनामी लेन-देन और फर्जी नियुक्ति के सारे पुख्ता सबूत ROC को सौंपे। कई बार ई-मेल और रजिस्टर्ड डाक भेजे, लेकिन अफसरों ने कंपनी के पहुंच के सामने के आगे अपनी आंखें मूंद लीं। और कोई भी नोटिस जारी नहीं हुआ।</p><h5><strong>राष्ट्रपति के दखल से बड़ी हलचल, मुख्य सचिव को कार्यवाई के  निर्देश</strong></h5><p>सिस्टम से हारकर इस बुजुर्ग ने 22 मई 2026 को सीधे राष्ट्रपति, मानवाधिकार आयोग (NHRC), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जिसके बाद 27 मई को ही राष्ट्रपति सचिवालय ने  <br />सख्ती बरतते हुए मामला सीधे छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को  कार्यवाही' के लिए अग्रेषित कर दिया है। साथ ही सख्त निर्देश दिए हैं कि की गई कार्रवाई की सूचना सीधे प्रार्थी को दी जाए।</p><h5><strong>प्रार्थी ने की CBI जांच की मांग</strong></h5><p>मामले में प्रार्थी कांति कुमार प्रधान ने <br /> पूरे मामले की जांच CBI या SFIO से करवाने की मांग की है अपने ज्ञापन पत्र में उसने <br />  धोखाधड़ी करने वाले 12 निदेशकों और मामले में दोषी तत्कालीन पुलिसकर्मियों को तुरंत गिरफ्तार करने और <br /> CRPF से सुरक्षा  और कंपनी के बैंक खाते सीज करने की मांग की है l साथ ही <br />  2 साल तक फाइल दबाकर बैठने वाले ROC छत्तीसगढ़ पर विभागीय करने आग्रह किया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/black-game-of-hind-energy-benami-property-worth-crores-in/article-10419</link>
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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 14:55:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> फोन टैपिंग पर घिर सकती है जांच एजेंसी? हाईकोर्ट में उठा बड़ा कानूनी सवाल, CBI से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बिलासपुर।</strong> फोन टैपिंग और उससे जुटाए गए साक्ष्यों की वैधता को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस छिड़ गई है। 'रविशंकर महाराज बनाम CBI' मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने फोन इंटरसेप्शन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवालों पर दोनों पक्षों से शपथ पत्र के साथ जवाब तलब किया है।</p>
<p>मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क रखा गया कि फोन टैपिंग के लिए जारी आदेश की वैधानिक समीक्षा समय सीमा के भीतर नहीं हुई तो उसके आधार पर जुटाए गए साक्ष्यों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/investigation-agency-may-be-in-trouble-due-to-phone-tapping/article-10417"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/image-2026-06-16t000037.018.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बिलासपुर।</strong> फोन टैपिंग और उससे जुटाए गए साक्ष्यों की वैधता को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस छिड़ गई है। 'रविशंकर महाराज बनाम CBI' मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने फोन इंटरसेप्शन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवालों पर दोनों पक्षों से शपथ पत्र के साथ जवाब तलब किया है।</p>
<p>मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क रखा गया कि फोन टैपिंग के लिए जारी आदेश की वैधानिक समीक्षा समय सीमा के भीतर नहीं हुई तो उसके आधार पर जुटाए गए साक्ष्यों की कानूनी वैधता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।</p>
<p><strong>क्या नियमों का पालन नहीं हुआ?</strong><br />याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से दलील दी गई कि दूरसंचार नियम, 2024 के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किसी भी फोन इंटरसेप्शन आदेश को निर्धारित समय सीमा के भीतर रिव्यू कमेटी के समक्ष रखा जाना आवश्यक है। दावा किया गया कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो आदेश स्वतः अप्रभावी माना जा सकता है। याचिका में उठाए गए इस मुद्दे ने जांच प्रक्रिया को लेकर नई बहस खड़ी कर दी है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि प्रक्रिया में किसी स्तर पर नियमों का पालन नहीं हुआ हो तो क्या उस आधार पर एकत्र किए गए साक्ष्य अदालत में टिक पाएंगे?</p>
<p><strong>कोर्ट ने मांगा स्पष्ट शपथ पत्र</strong><br />सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि मुख्य याचिका में फोन इंटरसेप्शन आदेश को सीधे तौर पर चुनौती नहीं दी गई थी। बाद में दाखिल आवेदन के जरिए अतिरिक्त आधार जोड़े गए थे। इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह अपनी सभी दलीलों को स्पष्ट रूप से दर्ज करते हुए नया शपथ पत्र दाखिल करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि मौखिक बहस में उठाए गए सभी कानूनी बिंदुओं को लिखित रूप में रिकॉर्ड पर लाया जाए, ताकि मामले की विस्तृत सुनवाई की जा सके।</p>
<p><strong>CBI से भी मांगा गया जवाब</strong><br />मामले में CBI की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इसी FIR से जुड़े अन्य मामलों पर भी हाईकोर्ट में सुनवाई लंबित है। इसके बाद कोर्ट ने जांच एजेंसी को निर्देश दिया कि वह संबंधित सक्षम प्राधिकारी और केंद्र सरकार से आवश्यक निर्देश प्राप्त कर 24 जून तक विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करे।</p>
<p><strong>जांच एजेंसियों की प्रक्रिया पर फिर बहस</strong><br />इस मामले ने एक बार फिर जांच एजेंसियों द्वारा अपनाई जाने वाली तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाओं पर चर्चा तेज कर दी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत के सामने नियमों के पालन से जुड़ी कोई कमी साबित होती है तो इसका असर केवल इस मामले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में फोन इंटरसेप्शन से जुड़े मामलों की जांच और साक्ष्यों की स्वीकार्यता पर भी प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p>हालांकि मामले में अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है और कोर्ट ने किसी भी पक्ष के दावों पर अभी कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। फिलहाल, सभी निगाहें 24 जून की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब CBI और याचिकाकर्ता दोनों के विस्तृत जवाब अदालत के सामने होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/investigation-agency-may-be-in-trouble-due-to-phone-tapping/article-10417</link>
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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:39:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सायरन के बीच गूंजी किलकारी! डायल-112 में जन्मी नई जिंदगी, पुलिस टीम बनी खुशियों की गवाह</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>पेंड्रा।</strong> गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले से मानवीय संवेदनशीलता और त्वरित सेवा की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। जहां आमतौर पर डायल-112 को अपराध और आपातकालीन घटनाओं से जोड़ा जाता है, वहीं इस बार डायल-112 एक परिवार के लिए खुशियों की सौगात बन गई। अस्पताल पहुंचने से पहले ही प्रसूता ने डायल-112 वाहन में स्वस्थ बालक को जन्म दिया और देखते ही देखते वाहन में नवजात की पहली किलकारी गूंज उठी।</p>
<p>जानकारी के अनुसार ग्राम गांगपुर निवासी मानसिंह ने प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला के लिए डायल-112 पर मदद की गुहार लगाई। सूचना मिलते ही फाल्कन-2 टीम तत्काल मौके पर पहुंची</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/a-new-life-was-born-in-dial-112-amidst-the-sirens/article-10416"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/safe_delivery_in_dial_112_vehicle_1781584630.webp" alt=""></a><br /><p><strong>पेंड्रा।</strong> गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले से मानवीय संवेदनशीलता और त्वरित सेवा की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। जहां आमतौर पर डायल-112 को अपराध और आपातकालीन घटनाओं से जोड़ा जाता है, वहीं इस बार डायल-112 एक परिवार के लिए खुशियों की सौगात बन गई। अस्पताल पहुंचने से पहले ही प्रसूता ने डायल-112 वाहन में स्वस्थ बालक को जन्म दिया और देखते ही देखते वाहन में नवजात की पहली किलकारी गूंज उठी।</p>
<p>जानकारी के अनुसार ग्राम गांगपुर निवासी मानसिंह ने प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला के लिए डायल-112 पर मदद की गुहार लगाई। सूचना मिलते ही फाल्कन-2 टीम तत्काल मौके पर पहुंची और प्रसूता सरस्वती मरपच्ची को परिजनों और मितानिन के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौरेला के लिए रवाना किया गया।</p>
<p>लेकिन रास्ते में ग्राम गिरवर के पास स्थिति अचानक बदल गई। महिला की प्रसव पीड़ा तेजी से बढ़ गई और तत्काल प्रसव की नौबत आ गई। ऐसे में डायल-112 टीम ने बिना समय गंवाए वाहन को सुरक्षित स्थान पर रोका। महिला की गरिमा और गोपनीयता का पूरा ध्यान रखते हुए वाहन में पर्दे की व्यवस्था की गई और परिजनों तथा मितानिन के सहयोग से सुरक्षित प्रसव कराया गया।</p>
<p>कुछ ही देर में खुशियों का वह पल आया, जब महिला ने एक स्वस्थ बालक को जन्म दिया। नवजात की किलकारी सुनते ही पूरे माहौल में राहत और खुशी की लहर दौड़ गई। इसके बाद डायल-112 टीम ने जच्चा और बच्चा दोनों को सुरक्षित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने दोनों को स्वस्थ बताया। यह घटना केवल एक सुरक्षित प्रसव की कहानी नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि आपातकालीन सेवाएं सिर्फ संकट में मदद नहीं करतीं, बल्कि कई बार नई जिंदगी की शुरुआत की गवाह भी बनती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:02:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हवाई यात्रियों पर महंगाई की नई मार! लगेज चार्ज में भारी बढ़ोतरी, अतिरिक्त सामान ले जाना अब पड़ेगा और महंगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर।</strong> हवाई यात्रा को सुविधाजनक और तेज़ विकल्प माना जाता है, लेकिन अब यात्रियों को टिकट के अलावा बढ़ते अतिरिक्त शुल्कों का भी सामना करना पड़ रहा है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में लगेज चार्ज में हुई ताजा बढ़ोतरी ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर उन लोगों के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है, जो पारिवारिक, व्यावसायिक या लंबी दूरी की यात्राओं के दौरान अतिरिक्त सामान लेकर सफर करते हैं।</p>
<p>जानकारी के अनुसार, देश की प्रमुख विमानन कंपनियों में शामिल इंडिगो ने अतिरिक्त लगेज शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि की है। घरेलू उड़ानों में जहां कई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/inflations-new-hit-on-air-passengers-huge-increase-in-luggage/article-10415"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/flight.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर।</strong> हवाई यात्रा को सुविधाजनक और तेज़ विकल्प माना जाता है, लेकिन अब यात्रियों को टिकट के अलावा बढ़ते अतिरिक्त शुल्कों का भी सामना करना पड़ रहा है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में लगेज चार्ज में हुई ताजा बढ़ोतरी ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर उन लोगों के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है, जो पारिवारिक, व्यावसायिक या लंबी दूरी की यात्राओं के दौरान अतिरिक्त सामान लेकर सफर करते हैं।</p>
<p>जानकारी के अनुसार, देश की प्रमुख विमानन कंपनियों में शामिल इंडिगो ने अतिरिक्त लगेज शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि की है। घरेलू उड़ानों में जहां कई श्रेणियों में शुल्क लगभग 59 प्रतिशत तक बढ़ गया है, वहीं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कुछ मामलों में पहले की तुलना में तीन गुना से अधिक शुल्क तय किए जाने की बात सामने आई है।</p>
<p><strong>टिकट के बाद अब लगेज भी बना जेब पर बोझ</strong><br />यात्रियों को आमतौर पर 15 किलो तक सामान निःशुल्क ले जाने की अनुमति होती है। इसके बाद अतिरिक्त वजन पर शुल्क देना पड़ता है। लेकिन नए शुल्क लागू होने के बाद अतिरिक्त तीन किलो सामान ले जाने पर जहां पहले 975 रुपए देने पड़ते थे, वहीं अब इसके लिए 1650 रुपए तक चुकाने होंगे। यदि आपका सामान तय सीमा से थोड़ा भी अधिक होता है, तो मामूली अतिरिक्त शुल्क की बजाय आपको काफी भारी रकम (per kg रेट के हिसाब से) चुकानी पड़ सकती है। इसका सबसे असर उन परिवारों पर पड़ेगा जो बच्चों और बुजुर्गों के साथ सफर करते हैं, क्योंकि उनके पास स्वाभाविक रूप से सामान ज्यादा होता है।</p>
<p><strong>बढ़ती एयरफेयर के बीच नया आर्थिक दबाव</strong><br />हवाई किराए में समय-समय पर बदलाव होना सामान्य माना जाता है, लेकिन यात्रियों का कहना है कि टिकट के अलावा सीट चयन, भोजन, सुविधा शुल्क और अब बढ़े हुए लगेज चार्ज जैसे खर्च यात्रा को लगातार महंगा बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलाइन कंपनियां राजस्व बढ़ाने के लिए सहायक शुल्कों (Ancillary Charges) पर अधिक निर्भर होती जा रही हैं। इसका सीधा असर आम यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है।</p>
<p><strong>अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को भी झटका</strong><br />अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में भी अतिरिक्त सामान ले जाना पहले की तुलना में कहीं अधिक महंगा हो गया है। पहले जहां अतिरिक्त लगेज पर प्रति किलो लगभग 100 रुपए शुल्क लिया जाता था, बाद में इसे बढ़ाकर 200 रुपए किया गया और अब कई श्रेणियों में यह 625 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। यात्रा विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश यात्रा करने वाले छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और लंबे समय के लिए बाहर जाने वाले यात्रियों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है, क्योंकि ऐसे यात्रियों के पास सामान्यतः अधिक सामान होता है।</p>
<p><strong>रायपुर के यात्रियों पर भी असर</strong><br />हालांकि रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से सीधे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन नहीं होता, लेकिन यहां से रोजाना 30 से अधिक घरेलू उड़ानें संचालित होती हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में यात्रियों को बढ़े हुए लगेज शुल्क का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल, बढ़े हुए लगेज शुल्क ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में हवाई सफर करने वालों को सिर्फ टिकट ही नहीं, बल्कि अपने सामान के वजन का भी पहले से ज्यादा हिसाब रखना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 10:45:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शराब ओवर रेटिंग घोटाला निलंबन की फाइल धूल फांक रही गृहमंत्री का नाम लेकर बच रहे दागी आबकारी इंस्पेक्टर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री और ओवर रेटिंग का मामला अब सत्ता की छत्रछाया और और अफसरों की दबंगई का उदाहरण बन गया है। सरकार जहां सुशासन और जीरो टॉलरेंस का दावा कर रही है वही आबकारी विभाग की कार्यशैली गंभीर सवालो को जन्म दे रही हैं। विभाग ने अपना चेहरा चमकाने के लिए कुछ अफसरों पर कार्रवाई जरूर की है। लेकिन जिन आधिकारियों को सत्ताधारी दल के नेताओं और टॉप लेबल अफसरों के आशीर्वाद प्राप्त है उनपर कार्यवाही करने में विभाग के हाथ पैर कांप रहे हैं।</p>
<h5><strong>निलंबन की फाइल पुटअप मगर......</strong></h5>
<p>आबकारी अधिकारियों के निलंबन की फाइल पुट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/liquor-over-rating-scam-suspension-file-gathering-dust-tainted-excise/article-10414"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_0000000069d87207ae26b4fe12ec3c55.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री और ओवर रेटिंग का मामला अब सत्ता की छत्रछाया और और अफसरों की दबंगई का उदाहरण बन गया है। सरकार जहां सुशासन और जीरो टॉलरेंस का दावा कर रही है वही आबकारी विभाग की कार्यशैली गंभीर सवालो को जन्म दे रही हैं। विभाग ने अपना चेहरा चमकाने के लिए कुछ अफसरों पर कार्रवाई जरूर की है। लेकिन जिन आधिकारियों को सत्ताधारी दल के नेताओं और टॉप लेबल अफसरों के आशीर्वाद प्राप्त है उनपर कार्यवाही करने में विभाग के हाथ पैर कांप रहे हैं।</p>
<h5><strong>निलंबन की फाइल पुटअप मगर......</strong></h5>
<p>आबकारी अधिकारियों के निलंबन की फाइल पुट अप हुए कई दिन बीत चुके हैं। फिर भी दागी इंस्पेक्टरों पर कोई एक्शन नहीं हुआ है।</p>
<p>पूरा मामला बेहद गंभीर है। राष्ट्रपति द्वारा गोद ली गई संरक्षित बैगा जनजाति के लोगों को ये आबकारी इंस्पेक्टर सरेआम धमका रहे हैं। आदिवासियों को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं। कोरे कागज पर उनके हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं। इस पूरी गुंडागर्दी के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। सारे सबूत सामने हैं। इसके बावजूद इन दो आबकारी इंस्पेक्टरों को बचाने के लिए विभाग ने पूरी ताकत लगा दी है।</p>
<p>आखिर इन अफसरों को किसका संरक्षण प्राप्त है यह बड़ा सवाल है। इसका जवाब खुद इन अफसरों के बयानों में छिपा है। सूत्रों के मुताबिक ये इंस्पेक्टर खुलेआम दावा कर रहे हैं कि उनके संबंध कमिश्नर से लेकर सीधे गृहमंत्री तक हैं। उनका कहना है कि कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इस अफसर की पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसने नौकरी ज्वाइन करने के बाद कभी ट्रेनिंग ही नहीं की।</p>
<p>पिछली सरकार के दौरान मात्र छह महीने में इसे सीधे डिस्टलरी में पोस्टिंग मिल गई थी। उस वक्त शराब घोटाले के आरोपी कवासी लखमा आबकारी मंत्री थे। बताया जाता है कि मंत्री ने सीधे आबकारी सचिव को फोन किया और इस अफसर को बिलासपुर डिस्टलरी का प्रभार मिल गया। सत्ता बदली लेकिन इस अफसर का रुतबा कम नहीं हुआ। अब यह अफवाह उड़ाई जा रही है कि गृहमंत्री के करीबियों से इसके सीधे संबंध हैं। इस तरह की बातों से नई सरकार की साफ सुथरी छवि पर सीधा दाग लग रहा है।</p>
<p>हाल ही में आबकारी विभाग के उड़नदस्ता दल ने प्रदेश भर में छापामार कार्रवाई की थी। रायपुर धमतरी खैरागढ़ गंडई हिरमी और कुरूद में एमआरपी से साठ रुपये तक ज्यादा वसूली पकड़ी गई थी। विभाग ने चार उप निरीक्षकों कौशल किशोर सोनी प्रभाकर सिरमौर मनराखन नेताम और पुरुषोत्तम सिन्हा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही निरूपमा लोन्हारे मुकेश अग्रवाल राजेश कुमार शर्मा और जेबा खान समेत आठ अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया था।</p>
<p>आबकारी आयुक्त पीएस एल्मा ने सख्त लहजे में कहा था कि उपभोक्ताओं से ज्यादा वसूली बड़ी अनियमितता है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन जब बात रसूखदार इंस्पेक्टरों की आती है तो आबकारी विभाग के सारे नियम कानून और सख्ती धरी की धरी रह जाती है। वायरल वीडियो और ठोस साक्ष्य होने के बाद भी विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। इससे साफ है कि सिस्टम में ऊपर से लेकर नीचे तक इन दागी अफसरों को बचाने का खुला खेल चल रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/liquor-over-rating-scam-suspension-file-gathering-dust-tainted-excise/article-10414</link>
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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 10:25:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Vivo Smartphones Price Hike: Vivo V70 Elite से Y400 तक महंगे हुए 4 फोन, जानें नई कीमतें</title>
                                    <description><![CDATA[<p>स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों को अब थोड़ा ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। साल 2026 में कई मोबाइल कंपनियों द्वारा कीमतों में बढ़ोतरी किए जाने के बीच अब Vivo ने भी अपने कुछ लोकप्रिय स्मार्टफोन्स की कीमत बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Vivo V70 Elite, Vivo V70, Vivo Y400 और Vivo Y21 की कीमतों में 1,000 रुपये से लेकर 4,000 रुपये तक का इजाफा किया गया है। माना जा रहा है कि ग्लोबल स्तर पर मेमोरी कंपोनेंट्स की कमी और उत्पादन लागत बढ़ने के कारण कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में संशोधन कर रही हैं।</p>
<p>टिप्स्टर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/tech/vivo-smartphones-price-hike-4-phones-become-expensive-from-vivo/article-10408"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/vivo-v70-price-in-india-hike.webp" alt=""></a><br /><p>स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों को अब थोड़ा ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। साल 2026 में कई मोबाइल कंपनियों द्वारा कीमतों में बढ़ोतरी किए जाने के बीच अब Vivo ने भी अपने कुछ लोकप्रिय स्मार्टफोन्स की कीमत बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Vivo V70 Elite, Vivo V70, Vivo Y400 और Vivo Y21 की कीमतों में 1,000 रुपये से लेकर 4,000 रुपये तक का इजाफा किया गया है। माना जा रहा है कि ग्लोबल स्तर पर मेमोरी कंपोनेंट्स की कमी और उत्पादन लागत बढ़ने के कारण कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में संशोधन कर रही हैं।</p>
<p>टिप्स्टर संजू चौधरी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, Vivo V70 Elite के 8GB RAM + 256GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 54,999 रुपये से बढ़कर 58,999 रुपये हो गई है, जबकि 12GB RAM + 256GB मॉडल अब 59,999 रुपये की जगह 63,999 रुपये में मिलेगा। वहीं Vivo V70 के 8GB + 256GB वेरिएंट की कीमत 49,999 रुपये से बढ़कर 53,999 रुपये हो गई है और 12GB + 256GB मॉडल अब 56,999 रुपये में उपलब्ध होगा। बजट सेगमेंट के Vivo Y21 के 6GB RAM + 128GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 20,999 रुपये से बढ़कर 21,999 रुपये हो गई है।</p>
<p>इसके अलावा Vivo Y400 के दोनों वेरिएंट्स भी महंगे हो गए हैं। 8GB RAM + 128GB स्टोरेज मॉडल अब 28,999 रुपये की जगह 31,999 रुपये में मिलेगा, जबकि 8GB RAM + 256GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 31,999 रुपये से बढ़कर 34,999 रुपये हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नई कीमतें Vivo की आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट कर दी गई हैं, हालांकि कंपनी की ओर से अब तक कीमत बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में जो ग्राहक इन स्मार्टफोन्स को खरीदने की सोच रहे हैं, उनके लिए जल्द फैसला लेना फायदे का सौदा हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/tech/vivo-smartphones-price-hike-4-phones-become-expensive-from-vivo/article-10408</link>
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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 10:22:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Vitamin B Complex Explained: सिर्फ B12 नहीं, जानिए Vitamin B के 8 प्रकार और शरीर में उनकी अहम भूमिका</title>
                                    <description><![CDATA[<p>विटामिन बी कॉम्प्लेक्स कोई एक विटामिन नहीं, बल्कि आठ जरूरी विटामिनों का समूह है, जो शरीर के विभिन्न कार्यों को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आमतौर पर लोग केवल विटामिन B12 की चर्चा करते हैं, लेकिन B1 से लेकर B12 तक हर विटामिन का अपना अलग महत्व है। विटामिन B1 (थायमिन) भोजन को ऊर्जा में बदलने और नर्वस सिस्टम को स्वस्थ रखने में मदद करता है। </p>
<p>विटामिन B2 (राइबोफ्लेविन) शरीर में प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट्स के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है, आंखों और त्वचा की सेहत का भी ख्याल रखता है। विटामिन B3 (नियासिन) पाचन तंत्र,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/health/vitamin-b-complex-explained-not-just-b12-know-8-types/article-10407"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/understanding-the-different-types-of-vitamin-b-and-their-functions.webp" alt=""></a><br /><p>विटामिन बी कॉम्प्लेक्स कोई एक विटामिन नहीं, बल्कि आठ जरूरी विटामिनों का समूह है, जो शरीर के विभिन्न कार्यों को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आमतौर पर लोग केवल विटामिन B12 की चर्चा करते हैं, लेकिन B1 से लेकर B12 तक हर विटामिन का अपना अलग महत्व है। विटामिन B1 (थायमिन) भोजन को ऊर्जा में बदलने और नर्वस सिस्टम को स्वस्थ रखने में मदद करता है। </p>
<p>विटामिन B2 (राइबोफ्लेविन) शरीर में प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट्स के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है, आंखों और त्वचा की सेहत का भी ख्याल रखता है। विटामिन B3 (नियासिन) पाचन तंत्र, त्वचा और मस्तिष्क के लिए फायदेमंद माना जाता है तथा कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में मदद करता है। विटामिन B5 (पैंटोथेनिक एसिड) हार्मोन उत्पादन, त्वचा और बालों की सेहत के लिए जरूरी होता है।</p>
<p>वहीं विटामिन B6 (पायरिडोक्सिन) लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, प्रोटीन के अवशोषण और मस्तिष्क के विकास में अहम भूमिका निभाता है। विटामिन B7 (बायोटिन) बालों, त्वचा और नाखूनों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जाना जाता है और डीएनए गतिविधियों को नियंत्रित करने में भी सहायक होता है। विटामिन B9 (फोलेट या फोलिक एसिड) गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के विकास, डीएनए निर्माण और रेड ब्लड सेल्स के उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। </p>
<p>वहीं विटामिन B12 (कोबालामिन) नर्वस सिस्टम, मस्तिष्क और रक्त निर्माण के लिए आवश्यक होता है। इसकी कमी से एनीमिया, कमजोरी और तंत्रिका संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, संतुलित आहार के जरिए अधिकांश बी-विटामिन प्राप्त किए जा सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में सप्लीमेंट्स या फोर्टिफाइड फूड्स की जरूरत पड़ सकती है।</p>
<p><strong>Disclaimer: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। किसी भी प्रकार की विटामिन कमी, सप्लीमेंट या उपचार शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हेल्थ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 10:22:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भिलाई स्टील प्लांट में स्क्रैप माफिया का खुला खेल 120 ट्रक ब्लैकलिस्ट फिर भी पार हो रहा लोहा पीएम तक पहुंची शिकायत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>भिलाई/दुर्ग। </strong>भिलाई स्टील प्लांट में स्क्रैप और लोहे की चोरी का बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। प्रबंधन की तमाम सख्ती और हाईटेक निगरानी के बाद भी माफिया बेखौफ हैं। प्लांट के अंदर से हर दिन अवैध तरीके से कीमती लोहा और स्क्रैप बाहर निकाला जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सुरक्षा के लिए लगाए गए जीपीएस सिस्टम को भी चोरी के लिए बड़ी आसानी से चकमा दिया जा रहा है।</p>
<p>क्राइम के तरीके की बात करें तो माफिया बहुत शातिर ढंग से काम कर रहे हैं। प्लांट के अंदर ठेका एजेंसियों के ट्रकों से पहले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/scrap-mafias-game-is-open-in-bhilai-steel-plant-120/article-10413"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/img-20260616-wa0029(1).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>भिलाई/दुर्ग। </strong>भिलाई स्टील प्लांट में स्क्रैप और लोहे की चोरी का बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। प्रबंधन की तमाम सख्ती और हाईटेक निगरानी के बाद भी माफिया बेखौफ हैं। प्लांट के अंदर से हर दिन अवैध तरीके से कीमती लोहा और स्क्रैप बाहर निकाला जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सुरक्षा के लिए लगाए गए जीपीएस सिस्टम को भी चोरी के लिए बड़ी आसानी से चकमा दिया जा रहा है।</p>
<p>क्राइम के तरीके की बात करें तो माफिया बहुत शातिर ढंग से काम कर रहे हैं। प्लांट के अंदर ठेका एजेंसियों के ट्रकों से पहले जीपीएस डिवाइस निकाल लिया जाता है। इसके बाद रात के अंधेरे में ट्रकों में कीमती लोहा भरा जाता है। चोरी का माल लोड होने के बाद सुबह वही जीपीएस वापस ट्रकों में लगा दिया जाता है ताकि सुरक्षा एजेंसियों को लगे कि गाड़ी अपनी तय जगह पर ही खड़ी थी।</p>
<p>लगातार हो रही इस चोरी पर पर्दा डालने की कोशिशें अब नाकाम हो चुकी हैं। बीएसपी प्रबंधन ने कागजी कार्रवाई करते हुए अब तक करीब 120 ट्रकों को ब्लैकलिस्ट किया है। इन गाड़ियों की जब जांच हुई तो पता चला कि इनमें कांटा घर में वजन की हेराफेरी की जाती थी। कई ट्रकों में तो चोरी का लोहा छिपाने के लिए खास तरह के गुप्त केबिन तक बनाए गए थे। इतनी बड़ी संख्या में ट्रकों पर बैन लगने के बाद भी अवैध निकासी का खेल पूरी तरह से बंद नहीं हो पाया है।<br />ठेका एजेंसियों के वाहनों पर लागू जीपीएस निगरानी सिस्टम अब पूरी तरह सवालों के घेरे में है। सिस्टम की नाकामी और प्लांट को हो रहे भारी आर्थिक नुकसान की गूंज अब सीधे दिल्ली तक पहुंच गई है। बीते 27 जनवरी 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस पूरे भ्रष्टाचार की विस्तृत शिकायत भेजी गई है। इस शिकायत में एलडी स्लैग की टेंडर प्रक्रिया और ट्रकों के जरिए हो रही अवैध निकासी की उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।</p>
<p>यह पहला मौका नहीं है जब मामले की शिकायत दिल्ली तक गई है। इससे पहले 14 नवंबर 2024 को भी एक जनप्रतिनिधि ने केंद्रीय इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी को पूरे मामले की जानकारी दी थी। मंत्री को भेजी गई शिकायत में बीएसपी में चल रहे भ्रष्टाचार और स्क्रैप चोरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। शिकायत में साफ तौर पर बताया गया था कि एलडी स्लैग के टेंडर और निकासी में बड़ी धांधली हो रही है जिससे सरकारी खजाने और संयंत्र को सीधा आर्थिक नुकसान हो रहा है।</p>
<p>जमीनी हकीकत यह है कि बीएसपी प्रबंधन के दावों और कागजी कार्रवाई के बीच स्क्रैप माफिया का नेटवर्क आज भी मजबूत है। गाड़ियों में फर्जीवाड़ा कर लोहा लगातार प्लांट से बाहर भेजा जा रहा है। अब हर किसी की नजर इस बात पर है कि पीएमओ और केंद्रीय इस्पात मंत्रालय के दखल के बाद इस बड़े गोलमाल में शामिल लोगों पर कब और क्या ठोस कार्रवाई होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/scrap-mafias-game-is-open-in-bhilai-steel-plant-120/article-10413</link>
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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 10:15:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सक्ती में कमीशन का खेल जनपद सीईओ बाबू और चपरासी एक लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में सरकारी योजनाओं का पैसा निकालने के लिए कमीशनखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। एंटी करप्शन ब्यूरो बिलासपुर की टीम ने भ्रष्ट सिस्टम पर करारी चोट करते हुए सक्ती जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी निखिल कश्यप सहायक ग्रेड 3 अविनाश ठाकुर और चपरासी लच्छन भानु को गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपियों को एक लाख रुपये की घूस लेते हुए दफ्तर में ही रंगे हाथ पकड़ा गया है। यह पूरा मामला गांव के विकास के लिए आए फंड में बंदरबांट से जुड़ा है।</p>
<p>आमतौर पर बड़े अधिकारी सीधे पैसे नहीं लेते। इस मामले में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/commission-game-in-sakti-district-ceo-babu-and-peon-arrested/article-10412"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_00000000869c7208a6a5e487c34e3101.png" alt=""></a><br /><p>सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में सरकारी योजनाओं का पैसा निकालने के लिए कमीशनखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। एंटी करप्शन ब्यूरो बिलासपुर की टीम ने भ्रष्ट सिस्टम पर करारी चोट करते हुए सक्ती जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी निखिल कश्यप सहायक ग्रेड 3 अविनाश ठाकुर और चपरासी लच्छन भानु को गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपियों को एक लाख रुपये की घूस लेते हुए दफ्तर में ही रंगे हाथ पकड़ा गया है। यह पूरा मामला गांव के विकास के लिए आए फंड में बंदरबांट से जुड़ा है।</p>
<p>आमतौर पर बड़े अधिकारी सीधे पैसे नहीं लेते। इस मामले में भी भ्रष्टाचार की पूरी चेन बनी हुई थी जिसमें साहब से लेकर चपरासी तक शामिल थे। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत आए फंड को रिलीज करने के लिए सरपंच से दो लाख रुपये मांगे गए थे।</p>
<p>लिमतरा गांव के रहने वाले अरुण कुमार भारद्वाज ने एसीबी से मामले की शिकायत की थी। अरुण की मां लिमतरा ग्राम पंचायत की सरपंच हैं। उनके गांव में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत निर्मला घाट और नाली निर्माण सहित कई अन्य काम होने थे। इसके लिए शासन से 20 लाख रुपये की मंजूरी मिली थी।</p>
<p>पंचायत को इसमें से आठ लाख रुपये का चेक पहले ही मिल गया था जिससे काम शुरू हुआ। लेकिन बाकी बचे 12 लाख रुपये का चेक अटका हुआ था। अरुण कुमार अपनी मां के प्रतिनिधि के रूप में चेक के लिए जनपद पंचायत दफ्तर का चक्कर काट रहे थे। जब उन्होंने बचे हुए पैसे का चेक जारी करने को कहा तो सीईओ निखिल कश्यप और बाबू अविनाश ठाकुर ने इसके एवज में दो लाख रुपये रिश्वत की मांग रख दी। बिना कमीशन दिए सरकारी फाइल आगे नहीं बढ़ रही थी।</p>
<p>अरुण कुमार घूस नहीं देना चाहते थे। उन्होंने बिलासपुर जाकर एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारियों को इस वसूली की जानकारी दी। एसीबी ने शिकायत को गंभीरता से लिया और जांच शुरू की। शुरुआती जांच में ही यह साफ हो गया कि अधिकारी घूस मांग रहे हैं। यह भी सामने आया कि बाबू अविनाश ठाकुर ने अपने चपरासी लच्छन भानु के जरिए एक लाख रुपये पहले ही वसूल लिए थे। अब दूसरे एक लाख रुपये के लिए दबाव बनाया जा रहा था।</p>
<p>मामला सही पाए जाने पर एसीबी की टीम ने 15 जून को जाल बिछाया। अरुण कुमार एक लाख रुपये लेकर सक्ती जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचे। दफ्तर में पैसे लेने का तरीका भी बिल्कुल सेट था। सीईओ निखिल ने सीधे पैसे नहीं छुए बल्कि बाबू अविनाश को इशारा किया। अविनाश ने भी चालाकी दिखाते हुए चपरासी लच्छन को पैसे लेने का निर्देश दिया।</p>
<p>जैसे ही चपरासी ने अरुण कुमार से एक लाख रुपये पकड़े मौके पर सादी वर्दी में तैनात एसीबी की टीम ने तीनों को धर दबोचा। टीम ने घूस की पूरी रकम मौके से ही जब्त कर ली। सक्ती जिले के प्रशासनिक हलके में इस बड़ी कार्रवाई से भारी हड़कंप मच गया है।</p>
<p>एसीबी ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। अब ब्यूरो इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि क्या अन्य ग्राम पंचायतों के सरपंचों को भी विकास कार्यों के लिए इसी तरह ब्लैकमेल कर कमीशन वसूला जा रहा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/commission-game-in-sakti-district-ceo-babu-and-peon-arrested/article-10412</link>
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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 09:22:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>200 रुपये की कुर्सी 2000 में खरीदी दुर्ग शिक्षा विभाग में जेम पोर्टल के नाम पर 3 लाख फर्जीवाड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। दुर्ग जिले के शिक्षा विभाग में सरकारी पैसे के इस्तेमाल को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। सरकारी सिस्टम में बचत और पारदर्शिता के नाम पर कैसे खेल होता है इसका यह ताजा उदाहरण है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने एक ऐसा टेंडर पास किया है जिसने पूरी सरकारी खरीदी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय बाजार में जो साधारण प्लास्टिक कुर्सी मात्र 200 से 500 रुपये के बीच आसानी से मिल जाती है उसे शिक्षा विभाग ने 2000 रुपये प्रति नग के हिसाब से खरीदा है। कुल 160 कुर्सियों के लिए 3 लाख 20 हजार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/chair-worth-rs-200-purchased-in-2000-rs-3-lakh/article-10411"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/image_search_1781581182710.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। दुर्ग जिले के शिक्षा विभाग में सरकारी पैसे के इस्तेमाल को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। सरकारी सिस्टम में बचत और पारदर्शिता के नाम पर कैसे खेल होता है इसका यह ताजा उदाहरण है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने एक ऐसा टेंडर पास किया है जिसने पूरी सरकारी खरीदी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय बाजार में जो साधारण प्लास्टिक कुर्सी मात्र 200 से 500 रुपये के बीच आसानी से मिल जाती है उसे शिक्षा विभाग ने 2000 रुपये प्रति नग के हिसाब से खरीदा है। कुल 160 कुर्सियों के लिए 3 लाख 20 हजार रुपये का अनुबंध किया गया है।</p>
<h5><strong>बिना ब्रांड की कुर्सियों पर लुटाया सरकारी खजाना</strong></h5>
<p>यह पूरी खरीदी 30 दिसंबर 2024 को जेम पोर्टल के माध्यम से की गई है। सरकारी दस्तावेजों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि खरीदी गई इन कुर्सियों का कोई ब्रांड ही नहीं है। दस्तावेजों में साफ तौर पर इसे अनब्रांडेड रिवॉल्विंग काउंटर चेयर बताया गया है। इन कुर्सियों में प्लास्टिक मोल्डेड सीट हाइड्रोलिक एडजस्टमेंट और एबीएस बेस जैसी बेहद सामान्य खूबियां लिखी गई हैं। ऐसी खूबियों वाली कुर्सियां दुर्ग और बालोद के किसी भी स्थानीय फर्नीचर बाजार या ऑनलाइन ई कॉमर्स साइट पर काफी सस्ते दाम पर मिल जाती हैं। बिना किसी नामी कंपनी के प्रोडक्ट पर इतना ज्यादा पैसा खर्च करना सीधे तौर पर संदेह पैदा करता है।</p>
<h5><strong>बाजार भाव की अनदेखी और जेम पोर्टल पर सवाल</strong></h5>
<p>इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप की स्थिति है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब बाजार में समान श्रेणी की कुर्सियां बेहद कम कीमत पर उपलब्ध हैं तो सरकारी खजाने से इतनी बड़ी रकम क्यों लुटाई जा रही है। सरकारी खरीदी का एक सीधा प्रशासनिक नियम है कि किसी भी सामान को खरीदने से पहले बाजार मूल्य का तुलनात्मक अध्ययन किया जाना चाहिए। लेकिन इस खरीदी को देखकर साफ लगता है कि जिम्मेदार अफसरों ने बाजार भाव की पूरी तरह से अनदेखी की है।</p>
<p>केंद्र और राज्य सरकार जेम पोर्टल का इस्तेमाल इसलिए करवाती हैं ताकि सरकारी खरीदी में बिचौलियों का खेल खत्म हो और सरकार को सस्ता सामान मिले। लेकिन यहां जेम पोर्टल के नाम पर ही महंगा सौदा कर लिया गया। क्या पोर्टल पर इससे सस्ते और अच्छे विकल्प मौजूद नहीं थे यह एक बड़ा जांच का विषय है।</p>
<h5> <strong>उपयोगिता पर भी उठ रहे गंभीर सवाल</strong></h5>
<p>इसके अलावा विभाग ने अब तक यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि इतनी बड़ी संख्या में 160 कुर्सियां किस कार्यालय या संस्थान के लिए खरीदी गई हैं। क्या वाक़ई इतनी कुर्सियों की तत्काल आवश्यकता थी यह भी जांच के दायरे में आता है। प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि इस पूरे अनुबंध की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।</p>
<p>जिला प्रशासन के आला अधिकारियों को इस खरीदी की फाइल रोककर बाजार दर से इसका मिलान करवाना चाहिए। इससे यह साफ हो सकेगा कि यह खरीदी नियमों के तहत हुई है या इसके पीछे कोई बड़ा कमीशन का खेल चल रहा है। अगर मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो विभाग में चल रहे कई और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल यह मामला पूरे प्रशासनिक हलके में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/chair-worth-rs-200-purchased-in-2000-rs-3-lakh/article-10411</link>
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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 09:16:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट का सख्त आदेश 15 दिनों में पूरा हो सीमांकन बिलासपुर प्रेस क्लब की जमीन का रास्ता भी साफ</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बिलासपुर। </strong>राजस्व अधिकारियों की लेटलतीफी और काम अटकाने की आदत पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने तहसीलदार बिलासपुर को कड़ा निर्देश दिया है कि लंबित सीमांकन आवेदनों का निपटारा हर हाल में 15 दिनों के भीतर किया जाए।</p>
<p>हाईकोर्ट के इस अहम फैसले के बाद बिलासपुर प्रेस क्लब की जमीन के सीमांकन का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद अब सीमांकन के मामलों में किसी भी तरह की बेबुनियाद आपत्ति या विभागीय बहानेबाजी काम नहीं आएगी।</p>
<p>राजस्व विभाग के दफ्तरों में सीमांकन के नाम पर होने वाली देरी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/strict-order-of-high-court-should-be-completed-in-15/article-10410"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/img-20260616-wa0013.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बिलासपुर। </strong>राजस्व अधिकारियों की लेटलतीफी और काम अटकाने की आदत पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने तहसीलदार बिलासपुर को कड़ा निर्देश दिया है कि लंबित सीमांकन आवेदनों का निपटारा हर हाल में 15 दिनों के भीतर किया जाए।</p>
<p>हाईकोर्ट के इस अहम फैसले के बाद बिलासपुर प्रेस क्लब की जमीन के सीमांकन का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद अब सीमांकन के मामलों में किसी भी तरह की बेबुनियाद आपत्ति या विभागीय बहानेबाजी काम नहीं आएगी।</p>
<p>राजस्व विभाग के दफ्तरों में सीमांकन के नाम पर होने वाली देरी आम जनता के लिए बड़ी परेशानी का सबब है। इसी लालफीताशाही से तंग आकर मंगला इलाके की रहने वाली सरोज वाजपेयी ने न्याय के लिए सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपनी निजी जमीन खसरा नंबर 968 रकबा 0.0310 हेक्टेयर पर निर्माण कार्य के लिए सीमांकन कराने 27 फरवरी 2026 को बिलासपुर के अतिरिक्त तहसीलदार के पास आवेदन लगाया था। आवेदन देने के करीब तीन महीने बीत जाने के बाद भी राजस्व अधिकारियों ने फाइल आगे नहीं बढ़ाई और कोई जमीनी कार्रवाई नहीं की।</p>
<p>याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में मजबूती से तर्क रखा कि अब जल्द ही बारिश का मौसम शुरू होने वाला है। अगर समय रहते सीमांकन का काम पूरा नहीं हुआ तो जमीन पर निर्माण कार्य पूरी तरह से बाधित हो जाएगा। इससे याचिकाकर्ता को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। कोर्ट को यह भी बताया गया कि राजस्व नियमों के तहत सीमांकन आवेदन पर तय समय में कार्रवाई करना अधिकारियों की कानूनी जिम्मेदारी है जिससे वे बच नहीं सकते।</p>
<p>मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन का रुख भी सकारात्मक रहा। सरकार की तरफ से पैनल अधिवक्ता अमित नायक ने कोर्ट में कहा कि लंबित आवेदन पर अगर अदालत कोई समय सीमा तय करती है तो शासन को इसमें कोई ऐतराज नहीं है।</p>
<p>हालात की गंभीरता और बारिश से होने वाले नुकसान को देखते हुए हाईकोर्ट ने तहसीलदार को सख्त निर्देश जारी किए। कोर्ट ने साफ कहा कि सभी प्रभावित जमीन मालिकों को तुरंत नोटिस जारी किया जाए और अदालत के आदेश की प्रमाणित कॉपी मिलने के ठीक 15 दिनों के भीतर सीमांकन की पूरी प्रक्रिया नियम के अनुसार खत्म की जाए।</p>
<p>हाईकोर्ट का यह फैसला बिलासपुर में रुके हुए कई अन्य सीमांकन मामलों के लिए एक बड़ी नजीर बन गया है। इस आदेश का सबसे बड़ा और सीधा असर बिलासपुर प्रेस क्लब की बहुप्रतीक्षित जमीन के सीमांकन पर पड़ेगा। अब तक जो मामले बेवजह की आपत्तियों और विभागीय सुस्ती के कारण अटके हुए थे वे अब तेजी से सुलझेंगे।</p>
<p>कोर्ट के इस स्पष्ट निर्देश के बाद राजस्व अमले को तय समय में काम करना ही होगा और कोई भी व्यक्ति या संस्था आपत्ति लगाकर प्रेस क्लब के सीमांकन की राह में रोड़ा नहीं बन सकेगी। प्रशासन को अब हर हाल में समय पर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/strict-order-of-high-court-should-be-completed-in-15/article-10410</link>
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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 09:00:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आबकारी मंत्री देवांगन के शराब के पैसे से चल रही महतारी वंदन योजना वाले बयान पर बवाल,कांग्रेस बोली महिलाओं का घर उजाड़कर कैसा लाभ दे रही सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब की कमाई को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन के एक बयान ने कांग्रेस को बैठे बिठाए बड़ा मुद्दा दे दिया है। मंत्री ने कहा था कि महतारी वंदन सहित सरकार की कई बड़ी योजनाएं शराब से मिलने वाले राजस्व से ही चल रही हैं। इस बयान पर कांग्रेस ने राज्य की भाजपा सरकार की जमकर घेराबंदी की है। कांग्रेस का कहना है कि अगर वाकई योजनाएं शराब के पैसे से चल रही हैं तो यह सरकार की सबसे बड़ी आर्थिक और प्रशासनिक नाकामी है।</p>
<p>कांग्रेस ने तंज कसते</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/congress-created-ruckus-on-excise-minister-devangans-statement-that-mahtari/article-10409"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_000000002ac871fa9cf055d800a47c8e.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब की कमाई को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन के एक बयान ने कांग्रेस को बैठे बिठाए बड़ा मुद्दा दे दिया है। मंत्री ने कहा था कि महतारी वंदन सहित सरकार की कई बड़ी योजनाएं शराब से मिलने वाले राजस्व से ही चल रही हैं। इस बयान पर कांग्रेस ने राज्य की भाजपा सरकार की जमकर घेराबंदी की है। कांग्रेस का कहना है कि अगर वाकई योजनाएं शराब के पैसे से चल रही हैं तो यह सरकार की सबसे बड़ी आर्थिक और प्रशासनिक नाकामी है।</p>
<p>कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष में रहते हुए जो भाजपा शराबबंदी के नाम पर बड़े बड़े वादे करती थी सत्ता में आते ही उसका सारा खजाना शराब की बोतलों पर टिक गया है। शायद इसी को सियासत का असली रूप कहते हैं जहां कुर्सी मिलते ही उसूल बदल जाते हैं। कांग्रेस नेताओं ने साफ कहा कि प्रदेश की महिलाओं को ऐसा कोई भी आर्थिक लाभ मंजूर नहीं होगा जिसकी कीमत उनके ही परिवार को शराबखोरी और बर्बादी के रूप में चुकानी पड़े। सरकार राजस्व जुटाने के बहाने प्रदेश में शराब की खपत बढ़ाने का काम कर रही है।</p>
<h5><strong>ओवररेटिंग और सिंडिकेट का आरोप</strong></h5>
<p>प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में शराब की बिक्री के नाम पर एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है। सरकारी संरक्षण में शराब की ओवररेटिंग धड़ल्ले से चल रही है। ग्राहकों से हर बोतल पर 60 से 80 रुपये तक ज्यादा वसूले जा रहे हैं। खुद शराब दुकानों के कर्मचारी बताते हैं कि यह अतिरिक्त वसूली का पैसा ऊपर तक जाता है। जब इस मामले ने तूल पकड़ा तो सरकार ने सिर्फ दिखावे के लिए कुछ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया। कांग्रेस का सीधा सवाल है कि जब अधिकारी सिर्फ ऊपर के निर्देशों का पालन कर रहे थे तो उन्हें बलि का बकरा क्यों बनाया गया। असली जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी।</p>
<h5><strong>नकली शराब और घोटालों की झड़ी</strong></h5>
<p>कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में शराब घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि इस नेटवर्क के जरिए हजारों करोड़ रुपये लूटे जा रहे हैं। रायगढ़ में नकली शराब की बॉटलिंग रायपुर के तेलीबांधा में नकली होलोग्राम वाली शराब और राजनांदगांव में अवैध शराब का कारोबार इसके पुख्ता सबूत हैं। बलरामपुर की सरकारी दुकान में बीयर की बोतल में गंदा पानी मिलने और जगदलपुर में अवैध शराब पकड़े जाने की घटनाओं ने पूरी सरकारी व्यवस्था की पोल खोल दी है।</p>
<h5><strong>ईडी और सीबीआई जांच की मांग</strong></h5>
<p>सरकारी शराब दुकानों में नकली और मिलावटी शराब बेचकर जो काली कमाई हो रही है उसका कोई हिसाब नहीं है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। पार्टी ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों से भी जांच कराई जानी चाहिए। अगर सरकार पारदर्शी है तो उसे जांच से डरना नहीं चाहिए। कांग्रेस ने पूछा है कि इस नकली शराब के खेल का असली सरगना कौन है और इस काली कमाई में किन किन लोगों की हिस्सेदारी है सरकार को इसका सार्वजनिक जवाब देना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 19:50:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भरोसे की कीमत 2 करोड़? शक्कर कारोबारियों का आरोप- यूनियन के नाम पर बनाया नेटवर्क, उधार में माल लेकर नहीं किया भुगतान, पिता-पुत्र पर FIR</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ के व्यापारिक जगत में उस वक़्त हड़कंप मच गया, जब शक्कर कारोबार से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले का खुलासा हुआ। रायपुर और सरगुजा संभाग के कई व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि भरोसे और व्यापारिक संबंधों की आड़ में उनसे बड़ी मात्रा में शक्कर उधार ली गई, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। शिकायत के बाद पुलिस ने रायगढ़ के एक कारोबारी और उसके बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।</p>
<p>व्यापारियों का आरोप है कि यह केवल सामान्य लेन-देन का विवाद नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से विश्वास हासिल कर करोड़ों रुपये</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/price-of-trust-is-rs-2-crore-allegation-of-sugar/article-10406"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/multi_crore_fraud_in_the_sugar_trade_1781517712.webp" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ के व्यापारिक जगत में उस वक़्त हड़कंप मच गया, जब शक्कर कारोबार से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले का खुलासा हुआ। रायपुर और सरगुजा संभाग के कई व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि भरोसे और व्यापारिक संबंधों की आड़ में उनसे बड़ी मात्रा में शक्कर उधार ली गई, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। शिकायत के बाद पुलिस ने रायगढ़ के एक कारोबारी और उसके बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।</p>
<p>व्यापारियों का आरोप है कि यह केवल सामान्य लेन-देन का विवाद नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से विश्वास हासिल कर करोड़ों रुपये का माल उठाने का मामला है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस कथित धोखाधड़ी से 8 से अधिक कारोबारी प्रभावित हुए हैं और कुल बकाया राशि दो करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है।</p>
<p>यूनियन के नाम पर भरोसा, फिर करोड़ों का बकाया?<br />शिकायत में दावा किया गया है कि आरोपियों ने व्यापारियों के बीच अपनी साख मजबूत करने और नेटवर्क तैयार करने के लिए 'छत्तीसगढ़-ओडिशा-मध्यप्रदेश शुगर व्यापारी यूनियन' के नाम से एक मंच बनाया था। इसी माध्यम से विभिन्न जिलों और राज्यों के कारोबारियों से संपर्क बढ़ाया गया और व्यापारिक रिश्ते स्थापित किए गए।</p>
<p>व्यापारियों का आरोप है कि लंबे समय तक विश्वास का माहौल बनाने के बाद बड़ी मात्रा में शक्कर उधार में ली गई, लेकिन तय समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया गया। इससे कई व्यापारियों की पूंजी फंस गई और उनके कारोबार पर आर्थिक दबाव बढ़ गया।</p>
<p>होटल बैठक के बाद बढ़ा कारोबार, फिर शुरू हुआ विवाद<br />जानकारी के अनुसार रायपुर के रामसागरपारा स्थित एक होटल में व्यापारियों की बैठक भी आयोजित की गई थी, जहां भविष्य के व्यापार और सप्लाई नेटवर्क को लेकर चर्चा हुई थी। आरोप है कि इसी दौरान व्यापारियों का भरोसा जीतकर बड़े स्तर पर लेन-देन शुरू किया गया। जब भुगतान की बारी आई तो कथित रूप से रकम अटकने लगी और धीरे-धीरे करोड़ों रुपये का बकाया खड़ा हो गया। इसके बाद प्रभावित व्यापारियों ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।</p>
<p>व्यापारिक सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल<br />इस पूरे मामले ने व्यापारिक लेन-देन की सुरक्षा और भरोसे के आधार पर होने वाले करोड़ों रुपये के कारोबार पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापारिक संगठनों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इतनी बड़ी राशि का माल बिना पर्याप्त सुरक्षा या गारंटी के कैसे सप्लाई किया गया है?</p>
<p>पुलिस जांच में जुटी<br />खमतराई थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और आर्थिक लेन-देन, दस्तावेजों तथा भुगतान रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कथित मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं। फिलहाल, मामले की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन इस करोड़ों के विवाद ने व्यापारियों के बीच एक डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/price-of-trust-is-rs-2-crore-allegation-of-sugar/article-10406</link>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:09:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वायुसेना के विमान से पहुंचे NEET-UG के प्रश्नपत्र, 21 जून की परीक्षा से पहले सुरक्षा का अभेद्य कवच</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>जगदलपुर। </strong>देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों की नजर जिस परीक्षा पर टिकी है, उसे लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। NEET-UG 2026 री-एग्जाम के प्रश्नपत्र आज वायुसेना के विशेष विमान से जगदलपुर पहुंचाए गए है। विमान से उतारी गई सीलबंद पेटियों को सुरक्षा घेरे में सीधे स्ट्रांग रूम तक पहुंचाया गया, जहां उन्हें कड़ी निगरानी में सुरक्षित रखा गया है।</p>
<p>प्रश्नपत्रों की आवाजाही के दौरान सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए गए कि हर कदम पर निगरानी और गोपनीयता सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन की प्राथमिकता साफ है, किसी भी तरह की चूक की कोई गुंजाइश नहीं है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/neet-ug-question-papers-arrived-by-air-force-aircraft-an-impenetrable/article-10405"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/image-191.webp" alt=""></a><br /><p><strong>जगदलपुर। </strong>देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों की नजर जिस परीक्षा पर टिकी है, उसे लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। NEET-UG 2026 री-एग्जाम के प्रश्नपत्र आज वायुसेना के विशेष विमान से जगदलपुर पहुंचाए गए है। विमान से उतारी गई सीलबंद पेटियों को सुरक्षा घेरे में सीधे स्ट्रांग रूम तक पहुंचाया गया, जहां उन्हें कड़ी निगरानी में सुरक्षित रखा गया है।</p>
<p>प्रश्नपत्रों की आवाजाही के दौरान सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए गए कि हर कदम पर निगरानी और गोपनीयता सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन की प्राथमिकता साफ है, किसी भी तरह की चूक की कोई गुंजाइश नहीं है। पिछले वर्षों में सामने आए पेपर लीक विवादों ने परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया गया है।<img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-06/image-192.webp" alt="image-192" width="1125" height="632"/></p>
<p>इधर, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने NEET-UG 2026 री-एग्जाम के एडमिट कार्ड भी जारी कर दिए हैं। 21 जून को आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए अभ्यर्थी अपने आवेदन नंबर और पासवर्ड की मदद से एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। परीक्षा से पहले उम्मीदवारों को अपने बैंक खाते की जानकारी भी सत्यापित करने की सलाह दी गई है।</p>
<p>अब सबकी नजर 21 जून पर है, जब लाखों छात्र अपने मेडिकल सपनों को साकार करने के लिए परीक्षा केंद्रों में बैठेंगे। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच यह परीक्षा पारदर्शिता और विश्वसनीयता की बड़ी परीक्षा भी मानी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 16:45:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का बजा बिगुल! 13 जुलाई से शुरू होगी सियासी जंग, सरकार को घेरने की तैयारी में विपक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर गर्मी बढ़ने वाली है। विधानसभा के मानसून सत्र की अधिसूचना जारी कर दी गई है और इसके साथ ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच होने वाली सियासी टक्कर की उलटी गिनती भी शुरू हो गई है। 13 जुलाई से शुरू होने वाला मानसून सत्र 17 जुलाई तक चलेगा, जिसमें कुल पांच बैठकें आयोजित की जाएंगी। इस दौरान वित्तीय कार्यों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण शासकीय विषयों पर चर्चा और निर्णय लिए जाएंगे।</p>
<p>मानसून सत्र को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ सरकार अपनी उपलब्धियों और योजनाओं का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/the-bugle-for-the-monsoon-session-of-chhattisgarh-assembly-will/article-10404"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/cg-assembly.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर गर्मी बढ़ने वाली है। विधानसभा के मानसून सत्र की अधिसूचना जारी कर दी गई है और इसके साथ ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच होने वाली सियासी टक्कर की उलटी गिनती भी शुरू हो गई है। 13 जुलाई से शुरू होने वाला मानसून सत्र 17 जुलाई तक चलेगा, जिसमें कुल पांच बैठकें आयोजित की जाएंगी। इस दौरान वित्तीय कार्यों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण शासकीय विषयों पर चर्चा और निर्णय लिए जाएंगे।</p>
<p>मानसून सत्र को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ सरकार अपनी उपलब्धियों और योजनाओं का ब्यौरा पेश करने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों, कानून-व्यवस्था, किसानों, युवाओं और विकास कार्यों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। ऐसे में सदन के भीतर तीखी बहस, सवाल-जवाब और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिल सकते हैं।<img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-06/assembly.jpg" alt="assembly" width="539" height="494"/><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-06/assembly-01.jpg" alt="assembly-01" width="450" height="550"/></p>
<p>सिर्फ पांच दिनों का यह सत्र भले ही छोटा हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने बड़े माने जा रहे हैं। आगामी महीनों की राजनीतिक दिशा तय करने वाले कई मुद्दे सदन में गूंज सकते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि मानसून सत्र में कौन से बड़े फैसले, घोषणाएं और राजनीतिक टकराव देखने को मिलते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/the-bugle-for-the-monsoon-session-of-chhattisgarh-assembly-will/article-10404</link>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 16:07:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नितिन नबीन के दौरे से बढ़ी सियासी बेचैनी! क्या छत्तीसगढ़ बीजेपी में होने वाला है बड़ा बदलाव?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर। </strong>भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का 20 जून को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ दौरा राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है। संगठन इसे सामान्य दौरे के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियों और लंबे समय से लंबित राजनीतिक फैसलों को देखते हुए इसे सत्ता और संगठन दोनों के लिए अहम माना जा रहा है।</p>
<p>राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन का यह पहला छत्तीसगढ़ दौरा होगा। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह दौरा केवल संगठनात्मक बैठकों तक सीमित रहेगा या फिर प्रदेश सरकार और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/political-uneasiness-increased-due-to-nitin-nabins-visit-is-there/article-10403"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/नितिन-नबीन.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर। </strong>भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का 20 जून को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ दौरा राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है। संगठन इसे सामान्य दौरे के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियों और लंबे समय से लंबित राजनीतिक फैसलों को देखते हुए इसे सत्ता और संगठन दोनों के लिए अहम माना जा रहा है।</p>
<p>राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन का यह पहला छत्तीसगढ़ दौरा होगा। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह दौरा केवल संगठनात्मक बैठकों तक सीमित रहेगा या फिर प्रदेश सरकार और संगठन में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान, असंतोष और प्रदर्शन को लेकर भी समीक्षा होगी।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार नितिन नबीन के दौरे की सूचना मिलते ही प्रदेश भाजपा में हलचल तेज हो गई है। पार्टी पदाधिकारियों और मंत्रियों के बीच बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पिछले डेढ़ साल से मंत्रिमंडल विस्तार और संभावित फेरबदल को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच यह दौरा कई नेताओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।</p>
<p>प्रदेश में लगातार उठ रहे स्थानीय मुद्दों, प्रशासनिक चुनौतियों और संगठन की सक्रियता को लेकर भी केंद्रीय नेतृत्व फीडबैक लेने के मूड में दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि नितिन नबीन के कार्यक्रम को लेकर सत्ता और संगठन दोनों स्तर पर विशेष सतर्कता देखी जा रही है।</p>
<p>राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन विभिन्न राज्यों का दौरा कर संगठन की वास्तविक स्थिति का आकलन कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ उनके लिए नया प्रदेश नहीं है। लंबे समय तक प्रदेश प्रभारी रहने के कारण वे यहां के नेताओं, संगठनात्मक समीकरणों और सत्ता की कार्यशैली से अच्छी तरह परिचित हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि वे केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि संगठन और सरकार के कामकाज पर विस्तृत फीडबैक भी लेंगे।</p>
<p>बीजेपी के भीतर यह भी चर्चा है कि केंद्रीय संगठन के पुनर्गठन और नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन से पहले राज्यों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जा रहा है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के नेताओं की भूमिका, प्रभाव और भविष्य की जिम्मेदारियों को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।</p>
<p>हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक किसी बड़े फैसले या बदलाव को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन नितिन नबीन के प्रस्तावित दौरे ने सत्ता और संगठन दोनों में बेचैनी बढ़ा दी है। अब सभी की नजर 20 और 21 जून के कार्यक्रमों पर टिकी है, क्योंकि यह दौरा केवल राजनीतिक औपचारिकता नहीं बल्कि भाजपा की भविष्य की रणनीति और प्रदेश नेतृत्व के लिए एक अहम परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/political-uneasiness-increased-due-to-nitin-nabins-visit-is-there/article-10403</link>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 15:22:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गरीबों की सेहत से खिलवाड़? सरकारी अस्पतालों में ‘खराब दवाओं’ की सप्लाई का आरोप, कांग्रेस ने राज्यपाल से की जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों को अमानक, नकली और निम्न स्तरीय दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे मरीजों की सेहत खतरे में पड़ रही है। इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है।</p>
<p>ज्ञापन में कांग्रेस ने दावा किया है कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) द्वारा सप्लाई की गई कई दवाओं को बाद में जांच रिपोर्ट के आधार पर अमानक घोषित कर वापस मंगाया जाता है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/congress-demands-investigation-from-governor-alleges-supply-of-bad-medicines/article-10402"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/image-94-2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों को अमानक, नकली और निम्न स्तरीय दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे मरीजों की सेहत खतरे में पड़ रही है। इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है।</p>
<p>ज्ञापन में कांग्रेस ने दावा किया है कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) द्वारा सप्लाई की गई कई दवाओं को बाद में जांच रिपोर्ट के आधार पर अमानक घोषित कर वापस मंगाया जाता है। कांग्रेस का आरोप है कि जब तक ऐसी दवाओं पर रोक लगती है, तब तक हजारों मरीज उनका सेवन कर चुके होते हैं। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी और खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p>कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा भी समय-समय पर दवाओं की गुणवत्ता को लेकर आशंकाएं जताई जाती रही हैं। इसके बावजूद संबंधित शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।</p>
<p>कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि कई अस्पतालों में दवाओं के भंडारण के लिए जरूरी मानकों का पालन नहीं किया जाता, जिससे दवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है। विपक्ष का कहना है कि यदि दवाओं की खरीद, जांच और भंडारण प्रक्रिया में लापरवाही हुई है तो इसका सीधा असर गरीब मरीजों के स्वास्थ्य पर पड़ता है।</p>
<p>ज्ञापन में राज्यपाल से मांग की गई है कि पिछले दो वर्षों में हुई दवा खरीदी और सप्लाई की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भेजी गई दवाओं की गुणवत्ता की समीक्षा के लिए एक विशेष जांच दल गठित किया जाए।</p>
<p>कांग्रेस का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा यह मामला सीधे जनता की जिंदगी और सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए दोषियों की जवाबदेही तय करते हुए सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग इन आरोपों पर क्या रुख अपनाते हैं और जांच की मांग पर क्या फैसला लिया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/congress-demands-investigation-from-governor-alleges-supply-of-bad-medicines/article-10402</link>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 15:09:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CM Helpline 1076: 5 दिन में 15 हजार शिकायतें, क्या बुनियादी सुविधाओं पर फेल हो रहा सिस्टम?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ में सुशासन और विकास के दावों के बीच मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के आंकड़ों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए हेल्पलाइन शुरू की थी, लेकिन शुरुआत के महज पांच दिनों में ही 15,434 शिकायतें और आवेदन दर्ज होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग अब भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।</p>
<p>9 जून से 13 जून तक दर्ज हुई शिकायतों का विश्लेषण बताता है कि लोगों की सबसे बड़ी परेशानियां जमीन, जल निकासी, पेयजल, बिजली</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/cm-helpline-1076-15-thousand-complaints-in-5-days-is/article-10401"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/cm-helpline-1076-shubharambh-1024x679.webp" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ में सुशासन और विकास के दावों के बीच मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के आंकड़ों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए हेल्पलाइन शुरू की थी, लेकिन शुरुआत के महज पांच दिनों में ही 15,434 शिकायतें और आवेदन दर्ज होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग अब भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।</p>
<p>9 जून से 13 जून तक दर्ज हुई शिकायतों का विश्लेषण बताता है कि लोगों की सबसे बड़ी परेशानियां जमीन, जल निकासी, पेयजल, बिजली और राशन जैसी मूलभूत जरूरतों से जुड़ी हुई हैं। सवाल यह है कि अगर सरकारी योजनाएं और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम कर रही हैं तो इतनी बड़ी संख्या में लोग शिकायत दर्ज कराने के लिए मजबूर क्यों हैं?</p>
<p><strong>राजस्व और शहरी प्रशासन सबसे ज्यादा कटघरे में</strong><br />आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक 2,470 शिकायतें राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग से संबंधित हैं। इनमें जमीन नामांतरण, सीमांकन और लंबे समय से लंबित राजस्व मामलों को लेकर लोगों की नाराजगी सामने आई है। वहीं शहरी प्रशासन विभाग के खिलाफ 2,058 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जो शहरों में साफ-सफाई, खराब सड़कों, बंद नालियों और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी समस्याओं की ओर इशारा करती हैं।</p>
<p><strong>बिजली-पानी और ग्रामीण सुविधाओं पर भी सवाल</strong><br />ऊर्जा विभाग के खिलाफ 1,921 शिकायतें दर्ज होना यह दर्शाता है कि बिजली आपूर्ति, मीटर और बिलिंग से जुड़ी समस्याएं अब भी लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ी 1,509 शिकायतें ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और पेयजल व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर करती हैं। इसके अलावा खाद्य विभाग के खिलाफ 1,235 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें राशन वितरण और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं।</p>
<p><strong>क्या शिकायतों का आंकड़ा सरकारी दावों पर सवाल है?</strong><br />मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर इतने कम समय में शिकायतों की बाढ़ आने को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्ष इसे सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर का प्रमाण बता रहा है। विपक्ष का कहना है कि यदि प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावी होती तो लोगों को अपनी मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए हेल्पलाइन का सहारा नहीं लेना पड़ता। हालांकि सरकार का दावा है कि बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज होना जनता के भरोसे का संकेत है और लोग उम्मीद के साथ अपनी समस्याएं सरकार तक पहुंचा रहे हैं। डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा है कि सरकार हर शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई करेगी।</p>
<p><strong>सबसे बड़ा सवाल</strong><br />फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या CM हेल्पलाइन केवल शिकायतें दर्ज करने का माध्यम बनकर रह जाएगी या फिर इन 15 हजार से अधिक शिकायतों का समयबद्ध और प्रभावी समाधान भी देखने को मिलेगा। क्योंकि आंकड़े साफ बताते हैं कि छत्तीसगढ़ की बड़ी आबादी आज भी उन बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है, जिन्हें किसी भी सुशासन की पहली पहचान माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/cm-helpline-1076-15-thousand-complaints-in-5-days-is/article-10401</link>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 15:02:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
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