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                <title>प्रशासनिक  - National Jagat Vision</title>
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                <description>प्रशासनिक  RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सुशासन शिविर: कलेक्टर पदमिनी भोई साहू ने भीखमपुरा में लगाया चौपाल, ग्रामीणों के द्वार पहुंचा पूरा प्रशासन </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>सारंगढ़-बिलाईगढ़</strong></p>
<p>सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले का प्रशासनिक अमला अब सीधे गांवों का रुख कर रहा है। इसी कड़ी में बरमकेला ब्लॉक के ग्राम पंचायत भीखमपुरा स्थित गौशाला परिसर में सुशासन तिहार शिविर का भव्य आयोजन किया गया। इस अहम शिविर की कमान खुद जिले की कलेक्टर पदमिनी भोई साहू ने संभाली। कलेक्टर की मौजूदगी में पूरा प्रशासन ग्रामीणों के द्वार पहुंचा, जिससे न केवल लोगों की समस्याएं सुनी गईं, बल्कि उन्हें विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ भी मिला।</p>
<p><strong>हितग्राहियों से सीधा संवाद, जानी जमीनी हकीकत</strong></p>
<p>कलेक्टर पदमिनी भोई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/good-governance-camp-collector-padmini-bhoi-sahu-set-up-chaupal/article-10024"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/img-20260527-wa0098.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सारंगढ़-बिलाईगढ़</strong></p>
<p>सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले का प्रशासनिक अमला अब सीधे गांवों का रुख कर रहा है। इसी कड़ी में बरमकेला ब्लॉक के ग्राम पंचायत भीखमपुरा स्थित गौशाला परिसर में सुशासन तिहार शिविर का भव्य आयोजन किया गया। इस अहम शिविर की कमान खुद जिले की कलेक्टर पदमिनी भोई साहू ने संभाली। कलेक्टर की मौजूदगी में पूरा प्रशासन ग्रामीणों के द्वार पहुंचा, जिससे न केवल लोगों की समस्याएं सुनी गईं, बल्कि उन्हें विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ भी मिला।</p>
<p><strong>हितग्राहियों से सीधा संवाद, जानी जमीनी हकीकत</strong></p>
<p>कलेक्टर पदमिनी भोई साहू ने शिविर में लगाए गए विभिन्न विभागीय स्टॉलों का सघन निरीक्षण किया। उन्होंने फाइलों से बाहर निकलकर योजनाओं की जमीनी प्रगति की बारीकी से जानकारी ली। इस दौरान कलेक्टर ने हितग्राहियों से आत्मीय संवाद कर उनका हाल जाना, जिससे ग्रामीण काफी उत्साहित नजर आए। शिविर में प्रदेश उपाध्यक्ष जगन्नाथ पणिग्राही, जिला पंचायत सीईओ इंद्रजीत बर्मन, एसडीएम वर्षा बंसल सहित अन्य अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी पूरी तरह मुस्तैद रहे।</p>
<h5><strong>मौके पर ही बांटी गई योजनाओं की सौगात</strong></h5>
<p>यह शिविर ग्रामीणों के लिए बड़ी सौगात लेकर आया। मौके पर ही राजस्व विभाग ने तत्परता दिखाते हुए 19 किसानों को बी-1 और डिजिटल किसान किताब का वितरण किया। भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के मद्देनजर प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत 4 हितग्राहियों को प्रशस्ति पत्र सौंपे गए।</p>
<p>महिला सशक्तिकरण और हरियाली को बढ़ावा देने उद्यानिकी विभाग ने 9 महिलाओं को फलदार पौधे बांटे। इसके अलावा स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 2 हितग्राहियों को मौके पर ही आयुष्मान कार्ड बनाकर दिए गए। कृषि को उन्नत बनाने के लिए 5 किसानों को नीम अर्क जैविक कीटनाशक किट और 11 श्रमिकों को श्रम कार्ड प्रदान किए गए। रोजगार को बढ़ावा देने मछली पालन विभाग ने 2 स्व-सहायता समूहों को मछली जाल तथा 4 जरूरतमंदों को राशन कार्ड बांटे।</p>
<p>भीखमपुरा गौशाला परिसर में आयोजित इस शिविर में ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी। गांव में ही एक छत के नीचे सभी विभागों को पाकर लोगों ने राहत की सांस ली। कलेक्टर की इस पहल ने स्पष्ट कर दिया है कि जिले में सरकारी योजनाएं सिर्फ फाइलों में नहीं, बल्कि सीधे जमीन पर उतर रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/good-governance-camp-collector-padmini-bhoi-sahu-set-up-chaupal/article-10024</link>
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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 19:52:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ वन विभाग के नए बॉस: 1994 बैच के IFS अरुण कुमार पांडेय बने राज्य के नए PCCF और वन बल प्रमुख, आदेश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर: छत्तीसगढ़ के वन महकमे को अपना नया मुखिया मिल गया है। विष्णुदेव साय सरकार ने प्रशासनिक कसावट लाते हुए भारतीय वन सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी अरुण कुमार पांडेय को राज्य का नया प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) एवं वन बल प्रमुख (HoFF) नियुक्त किया है। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की ओर से मंत्रालय से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस महत्वपूर्ण नियुक्ति के साथ ही वन विभाग के शीर्ष पद को लेकर चल रही सभी अटकलों पर अब विराम लग गया है।</p>
<p>  </p>
<p><strong>DPC की बैठक में लगी नाम पर मुहर</strong></p>
<p> </p>
<p>नए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/chhattisgarh-forest-departments-new-boss-1994-batch-ifs-arun-kumar/article-10013"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/img-20260527-wa0069.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर: छत्तीसगढ़ के वन महकमे को अपना नया मुखिया मिल गया है। विष्णुदेव साय सरकार ने प्रशासनिक कसावट लाते हुए भारतीय वन सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी अरुण कुमार पांडेय को राज्य का नया प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) एवं वन बल प्रमुख (HoFF) नियुक्त किया है। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की ओर से मंत्रालय से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस महत्वपूर्ण नियुक्ति के साथ ही वन विभाग के शीर्ष पद को लेकर चल रही सभी अटकलों पर अब विराम लग गया है।</p>
<p> </p>
<p><strong>DPC की बैठक में लगी नाम पर मुहर</strong></p>
<p> </p>
<p>नए वन बल प्रमुख (Head of Forest Force) के चयन के लिए हाल ही में मंत्रालय में विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में वन विभाग के कई वरिष्ठ और दिग्गज अधिकारियों के नामों पर विचार-विमर्श किया गया। सूत्रों के मुताबिक, चयन प्रक्रिया की रेस में अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी चर्चा में थे, लेकिन अरुण कुमार पांडेय के बेदाग ट्रैक रिकॉर्ड, फील्ड के लंबे अनुभव और उनकी कार्यशैली को देखते हुए सरकार ने उन पर अपना भरोसा जताया। समिति की अनुशंसा के बाद सरकार ने उनके नाम को अंतिम स्वीकृति दे दी।</p>
<p> </p>
<p><strong>अंबिकापुर के रहने वाले हैं पांडेय, फील्ड का है तगड़ा अनुभव</strong></p>
<p> </p>
<p>वरिष्ठ IFS अधिकारी अरुण कुमार पांडेय 1994 बैच के भारतीय वन सेवा के अफसर हैं। वे मूल रूप से छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के अंबिकापुर क्षेत्र से संबंध रखते हैं। स्थानीय पृष्ठभूमि से होने के कारण उन्हें छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति, वनों की प्रकृति और आदिवासी अंचलों की गहरी समझ है। उनके इस जमीनी जुड़ाव को वन विभाग के प्रशासनिक और मैदानी स्तर पर विशेष महत्व दिया जाता है।</p>
<p> </p>
<p><strong>संवेदनशील इलाकों में दे चुके हैं सेवाएं</strong></p>
<p> </p>
<p>अपने लंबे सेवाकाल के दौरान अरुण कुमार पांडेय ने राज्य के कई महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण वन क्षेत्रों में काम किया है। वे राजनांदगांव, ऊर्जा धानी कोरबा और जशपुर जैसे प्रमुख वन मंडलों में जिला वन अधिकारी (DFO) के रूप में अपनी सफल जिम्मेदारी निभा चुके हैं।</p>
<p>इसके साथ ही, वन्यजीव संरक्षण और वन प्रबंधन के क्षेत्र में भी उनका काम खासा उल्लेखनीय रहा है। पांडेय ने प्रदेश के अति-संवेदनशील इंद्रावती टाइगर रिजर्व में अहम पदों पर कार्य किया है, जहां उन्होंने वन्यजीवों की सुरक्षा और जंगल के प्रबंधन को लेकर कई सख्त और प्रभावी कदम उठाए थे।</p>
<p>विभागीय जानकारों का मानना है कि अरुण कुमार पांडेय की ताजपोशी से छत्तीसगढ़ में जंगल की सुरक्षा, वन्यजीवों के संरक्षण और वनोपज से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। फील्ड में उनकी मजबूत पकड़ का सीधा फायदा वन विभाग के जमीनी अमले को मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/chhattisgarh-forest-departments-new-boss-1994-batch-ifs-arun-kumar/article-10013</link>
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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 14:10:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>BIG BREAKING: उच्च शिक्षा विभाग में खर्चों पर कैंची! अफसरों के सामान्य दौरों पर लगी पाबंदी, अब एक ही गाड़ी में जाएंगे अधिकारी... जारी हुई सख्त गाइडलाइन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते वैश्विक संकट और आर्थिक मोर्चे पर आ रही चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने अब सरकारी खर्चों में बड़ी कटौती करने का कड़ा फैसला लिया है। वित्त विभाग के सख्त निर्देशों के बाद अब छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग (Higher Education Department) ने भी फिजूलखर्ची रोकने के लिए कमर कस ली है। विभाग की ओर से एक विस्तृत और सख्त गाइडलाइन जारी की गई है, जिससे अब दौरों के नाम पर होने वाले भारी-भरकम खर्चों पर लगाम लगेगी और सरकारी खजाने को बड़ी राहत मिलेगी।</p>
<h5><strong>दौरों पर सख्ती और व्हीकल शेयरिंग अनिवार्य</strong></h5>
<p>उच्च शिक्षा विभाग द्वारा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/big-breaking-scissors-on-expenses-in-higher-education-department-ban/article-10001"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/image_search_1779855352906.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते वैश्विक संकट और आर्थिक मोर्चे पर आ रही चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने अब सरकारी खर्चों में बड़ी कटौती करने का कड़ा फैसला लिया है। वित्त विभाग के सख्त निर्देशों के बाद अब छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग (Higher Education Department) ने भी फिजूलखर्ची रोकने के लिए कमर कस ली है। विभाग की ओर से एक विस्तृत और सख्त गाइडलाइन जारी की गई है, जिससे अब दौरों के नाम पर होने वाले भारी-भरकम खर्चों पर लगाम लगेगी और सरकारी खजाने को बड़ी राहत मिलेगी।</p>
<h5><strong>दौरों पर सख्ती और व्हीकल शेयरिंग अनिवार्य</strong></h5>
<p>उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि अब अधिकारियों के दौरे केवल अति-आवश्यक परिस्थितियों में ही मंजूर किए जाएंगे। रूटीन या सामान्य दौरों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। सबसे अहम बदलाव यह किया गया है कि यदि किसी एक ही स्थान पर एक से अधिक अधिकारियों को शासकीय कार्य से जाना है, तो वे अलग-अलग सरकारी गाड़ियों का उपयोग नहीं कर सकेंगे। उन्हें अनिवार्य रूप से एक ही गाड़ी साझा (Vehicle Sharing) करनी होगी। इसके अलावा, विभाग में यदि किसी नए सरकारी वाहन की खरीदी की आवश्यकता पड़ती है, तो अब पेट्रोल-डीजल की बजाय केवल इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की खरीदी को ही प्राथमिकता दी जाएगी।</p>
<h5><strong>वर्चुअल बैठकों और ई-ऑफिस (e-Office) पर जोर</strong></h5>
<p>यात्रा खर्च और समय दोनों को बचाने के लिए विभाग ने तकनीक का अधिकतम उपयोग करने का निर्देश दिया है। अब भौतिक बैठकों (Physical Meetings) की जगह अधिकांश बैठकें वर्चुअल (ऑनलाइन) मोड में आयोजित की जाएंगी, ताकि अधिकारियों के यात्रा भत्ते और आयोजनों के खर्च को शून्य किया जा सके। इसके साथ ही, पत्राचार और फाइलों के संचालन में कागज की बचत के लिए 'ई-ऑफिस' प्रणाली को सख्ती से लागू करने को कहा गया है।</p>
<h5><strong>बिजली की बचत और ट्रेनिंग का नया फॉर्मूला</strong></h5>
<p>कार्यालय संचालन खर्च घटाने पर विशेष जोर दिया गया है। सभी कार्यालय प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि दफ्तर का निर्धारित समय समाप्त होने के बाद एसी (AC), लाइट, कंप्यूटर और अन्य सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अनिवार्य रूप से बंद कर दिए जाएं। वहीं, महंगे और बाहरी प्रशिक्षण कार्यक्रमों (Training Programs) के स्थान पर अब अधिकारियों और कर्मचारियों के क्षमता विकास के लिए 'आई-गॉट कर्मयोगी पोर्टल' (iGOT Karmayogi Portal) का उपयोग किया जाएगा।</p>
<h5><strong>इन सभी पर लागू होगा आदेश</strong></h5>
<p>उच्च शिक्षा संचालनालय द्वारा जारी यह सख्त आदेश व्यापक स्तर पर लागू किया गया है। यह नई गाइडलाइन उच्च शिक्षा संचालनालय के अधिकारियों, प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान के अफसरों समेत प्रदेश के सभी राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों (Registrars), शासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों, छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग, तथा छत्तीसगढ़ हिन्दी ग्रंथ अकादमी और साहित्य अकादमी के संचालकों को अनिवार्य पालन के लिए भेज दी गई है।</p>
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                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 09:46:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में गुंडागर्दी दर्द से तड़पती महिला मरीज को डॉक्टर ने जड़ा थप्पड़ नसबंदी के दौरान एनेस्थिसिया में भारी लापरवाही</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में मरीजों के साथ कैसा सुलूक हो रहा है इसका एक शर्मनाक मामला अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल से सामने आया है। यहां धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों का एक क्रूर चेहरा दिखा। नसबंदी कराने आई एक महिला जब ऑपरेशन के दौरान दर्द से तड़प उठी तो इलाज करने के बजाय ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर ने उसे थप्पड़ जड़ दिया। इस घटना के बाद अस्पताल में भारी हंगामा मच गया और परिजनों ने डॉक्टर पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p><strong style="font-family:Mukta, sans;font-size:1.25rem;">बिना सुन्न किए लगा दिया चीरा दर्द से छटपटाई तो पड़ा थप्पड़</strong></p>
<p>जानकारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/hooliganism-in-ambikapur-medical-college-doctor-slaps-female-patient-suffering/article-10000"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/doctor-slaps-patient.jpeg" alt=""></a><br /><p>अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में मरीजों के साथ कैसा सुलूक हो रहा है इसका एक शर्मनाक मामला अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल से सामने आया है। यहां धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों का एक क्रूर चेहरा दिखा। नसबंदी कराने आई एक महिला जब ऑपरेशन के दौरान दर्द से तड़प उठी तो इलाज करने के बजाय ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर ने उसे थप्पड़ जड़ दिया। इस घटना के बाद अस्पताल में भारी हंगामा मच गया और परिजनों ने डॉक्टर पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p><strong style="font-family:Mukta, sans;font-size:1.25rem;">बिना सुन्न किए लगा दिया चीरा दर्द से छटपटाई तो पड़ा थप्पड़</strong></p>
<p>जानकारी के मुताबिक मंगलवार को शहर की एक महिला नसबंदी कराने मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंची थी। ड्यूटी पर मौजूद महिला डॉक्टर उसे ऑपरेशन थियेटर ले गईं। मरीज का गंभीर आरोप है कि डॉक्टर ने उसे सही तरीके से एनेस्थिसिया नहीं दिया था। जब ऑपरेशन शुरू हुआ तो महिला को भयानक दर्द का अहसास होने लगा। दर्द के मारे जब उसने छटपटाते हुए अपने पैर हिलाए तो संवेदनहीनता की हद पार करते हुए डॉक्टर ने उसे जोरदार थप्पड़ मार दिया। महिला का कहना है कि डॉक्टर बेहद गुस्से में थीं और बहुत खराब तरीके से बात करते हुए बोलीं कि यहां क्यों आ जाते हो।</p>
<h5><strong>परिजनों का फूटा गुस्सा अस्पताल में काटा बवाल</strong></h5>
<p>ऑपरेशन के बाद जब महिला बाहर आई तो उसने अपने साथ हुई इस अमानवीय घटना की पूरी जानकारी अपने पति और अन्य परिजनों को दी। यह सुनते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा शुरू कर दिया। महिला के पिता पुनील मंडल ने इस कृत्य को पूरी तरह से गलत ठहराते हुए कहा कि अगर एक डॉक्टर ही अपना धैर्य खो देगा तो गरीब मरीज न्याय और इलाज के लिए कहां जाएगा। उन्होंने ऐसी डॉक्टर को तुरंत सस्पेंड कर घर बैठाने की पुरजोर मांग की है।</p>
<h5><strong>प्रबंधन की लीपापोती सिर्फ स्पष्टीकरण का झुनझुना</strong></h5>
<p>हंगामे की खबर मिलते ही अस्पताल के सीनियर डॉक्टर मौके पर पहुंचे और मामले को शांत कराने की कोशिश की। अस्पताल के डॉक्टर जेके रेलवानी ने इस गंभीर लापरवाही पर पर्दा डालने की कोशिश करते हुए कहा कि शायद पहली बार एनेस्थिसिया का डोज कम रह गया होगा जिसके बाद दोबारा डोज देकर ऑपरेशन किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि डॉक्टरों और स्टाफ को मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार करने का निर्देश पत्र निकाला जाएगा और थप्पड़ मारने वाली डॉक्टर से सिर्फ स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 09:26:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जल संसाधन विभाग बना अवैध वसूली का एटीएम, रिटायरमेंट से पहले प्रभारी ईएनसी का रेट कार्ड लागू</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ का जल संसाधन विभाग इन दिनों निर्माण और सिंचाई के बजाय अवैध वसूली और कमीशनखोरी का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। सत्ता के गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा विभाग के प्रभारी प्रमुख  की हो रही है। जून 2026 में उनकी सेवानिवृत्ति होनी है, लेकिन उससे पहले पूरे विभाग में एक अघोषित रेट कार्ड लागू कर दिया गया है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि विभाग के कार्यपालन अभियंताओं ने भारी मानसिक तनाव और प्रताड़ना के बीच सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय का दरवाजा खटखटाया है।</p>
<p>राजधानी रायपुर के शिवनाथ भवन से लेकर मैदानी स्तर तक इंजीनियर और ठेकेदार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/water-resources-department-becomes-atm-for-illegal-recovery-rate-card/article-9994"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/file_0000000022b871fb8ad84da72b992bba.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ का जल संसाधन विभाग इन दिनों निर्माण और सिंचाई के बजाय अवैध वसूली और कमीशनखोरी का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। सत्ता के गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा विभाग के प्रभारी प्रमुख  की हो रही है। जून 2026 में उनकी सेवानिवृत्ति होनी है, लेकिन उससे पहले पूरे विभाग में एक अघोषित रेट कार्ड लागू कर दिया गया है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि विभाग के कार्यपालन अभियंताओं ने भारी मानसिक तनाव और प्रताड़ना के बीच सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय का दरवाजा खटखटाया है।</p>
<p>राजधानी रायपुर के शिवनाथ भवन से लेकर मैदानी स्तर तक इंजीनियर और ठेकेदार त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। शिकायत में स्पष्ट तौर पर बताया गया है कि बिना कमीशन दिए कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ती। चेंबर में बैठाकर बाकायदा हिसाब-किताब किया जाता है। विभागीय कार्यों के लिए जो रेट तय किए गए हैं, वे किसी भी भ्रष्ट तंत्र को शर्मसार करने वाले हैं। टेंडर पास कराने के एवज में तीन प्रतिशत, सप्लीमेंट्री प्रकरणों की स्वीकृति पर पांच प्रतिशत और भुगतान का चेक जारी करने के लिए डेढ़ प्रतिशत की सीधी मांग की जा रही है। पीस वर्क, सर्वे और अन्य कार्यों में तो यह कमीशन पंद्रह प्रतिशत तक पहुंच गया है।</p>
<p>सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रतिमाह दो लाख रुपये की एक अलग राशि सचिव के नाम पर मांगी जा रही है। ऊपर राशि पहुंचाने का डर दिखाकर अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश है कि बिना अग्रिम राशि दिए मरम्मत कार्यों का भी भुगतान नहीं होगा। फाइलें रोककर और अलॉटमेंट अटकाकर ऐसा कृत्रिम दबाव बनाया जा रहा है कि मजबूर होकर अधिकारियों को इस भ्रष्ट सिस्टम के आगे घुटने टेकने पड़ रहे हैं। तबादले और गोपनीय चरित्रावली खराब करने की धमकियों ने कार्यपालन अभियंताओं का मनोबल पूरी तरह तोड़ दिया है। यह सिर्फ भ्रष्टाचार का मामला नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित तरीके से राज्य के खजाने और विकास कार्यों को बंधक बनाने की खौफनाक दास्तान है।</p>
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                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 16:56:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुशासन तिहार के दावों की हकीकत एक साल बाद भी 5548 शिकायतें लंबित</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। राजधानी रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा 1 मई से 10 जून 2026 तक सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट दावा है कि इन शिविरों में प्राप्त होने वाले आवेदनों और शिकायतों का निराकरण महज एक महीने के भीतर कर दिया जाएगा। हालांकि जमीनी हकीकत इन सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। वास्तविक स्थिति यह है कि वर्ष 2025 के सुशासन तिहार में आम जनता द्वारा दिए गए हजारों आवेदन आज तक लंबित हैं। हितग्राही लगातार अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/reality-of-claims-of-good-governance-tihar-5548-complaints-pending/article-9977"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/20260526_092242.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। राजधानी रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा 1 मई से 10 जून 2026 तक सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट दावा है कि इन शिविरों में प्राप्त होने वाले आवेदनों और शिकायतों का निराकरण महज एक महीने के भीतर कर दिया जाएगा। हालांकि जमीनी हकीकत इन सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। वास्तविक स्थिति यह है कि वर्ष 2025 के सुशासन तिहार में आम जनता द्वारा दिए गए हजारों आवेदन आज तक लंबित हैं। हितग्राही लगातार अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उन्हें कोई ठोस समाधान नहीं मिल पा रहा है। शासन जहां त्वरित निराकरण का दम भर रहा है वहीं कई मामलों में एक साल बीत जाने के बाद भी कार्रवाई पूरी तरह से अधूरी है।</p>
<p>आंकड़ों पर गौर करें तो लंबित आवेदनों की सच्चाई प्रशासनिक कार्यप्रणाली को स्पष्ट करती है। मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में जिले भर में कुल 3 लाख 825 आवेदन प्राप्त हुए थे। रिकॉर्ड बताता है कि इनमें से 2 लाख 95 हजार 377 आवेदनों का निराकरण कर दिया गया है जबकि 5548 आवेदन अब भी फाइलों में लंबित हैं। इन लंबित मामलों में प्रधानमंत्री आवास योजना उज्ज्वला योजना पेयजल आपूर्ति राशन कार्ड सामाजिक सुरक्षा पेंशन और राहत सहायता से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण मामले शामिल हैं। आंकड़ों से यह भी स्पष्ट है कि शिकायतों की तुलना में मांग संबंधी आवेदन अधिक प्राप्त हुए थे। दर्ज की गई कुल 9398 शिकायतों में से 489 शिकायतों का निराकरण अब तक नहीं हो पाया है।</p>
<p>रायपुर नगर निगम क्षेत्र का हाल भी इससे कुछ अलग नहीं है। निगम क्षेत्र में पूर्व में कुल 24129 आवेदन प्राप्त हुए थे जिनमें 20876 मांग और 3259 शिकायतें मुख्य रूप से शामिल थीं। विभागीय सूत्रों के अनुसार सबसे अधिक शिकायतें सड़क नाली और निर्माण कार्यों से जुड़ी हुई थीं। यह बात भी सामने आई है कि कई मामलों में शिकायतों को केवल कागजों पर निपटाते हुए पोर्टल पर कार्य प्रक्रिया में है लिखकर बंद कर दिया जाता है लेकिन जमीनी स्तर पर आम लोगों को कोई वास्तविक राहत नहीं मिलती है।</p>
<p>सड़क और नाली जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें लंबे समय से पेंडिंग हैं। राजधानी के वार्ड क्रमांक 55 हनुमान नगर मोतीनगर कमल विहार सेक्टर 1 से लगे बोरियाखुर्द शासकीय स्कूल के पीछे स्थित प्लास बिल्डर वाली गली के रहवासी सड़क और नाली की भारी समस्या से जूझ रहे हैं। परेशान हितग्राहियों ने इस संबंध में 8 मई को दोबारा अपनी शिकायत दर्ज कराई है। रहवासियों का सीधा आरोप है कि पिछले कई वर्षों से लगातार शिकायत करने के बावजूद अब तक सड़क और नाली का निर्माण नहीं कराया गया है जिससे आवागमन में भारी परेशानी हो रही है। इसी तरह दलदल सिवनी क्षेत्र के रहवासियों ने पिछले वर्ष के सुशासन तिहार में सड़क और नाली निर्माण की शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन एक साल बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार न तो सड़क बनी और न ही पानी निकासी के लिए नाली की व्यवस्था की गई। हालात इतने बदतर हैं कि घरों का गंदा पानी सीधे सड़क पर बह रहा है जिससे पूरे इलाके में गंदगी और बदबू का माहौल है। बारिश के दिनों में यह पूरा क्षेत्र जलमग्न हो जाता है और लोगों का घरों से निकलना तक दूभर हो जाता है।</p>
<p>इस पूरे मामले में रायपुर कलेक्टर डॉ गौरव सिंह का कहना है कि सुशासन तिहार में प्राप्त आवेदनों का तत्काल निराकरण किया जाता है। उन्होंने बताया कि अधिकतर आवेदन विकास कार्यों की मांगों से संबंधित होते हैं। इन मांगों को सरकारी योजनाओं की स्वीकृति मिलने और आवश्यक बजट उपलब्ध होने पर चरणबद्ध तरीके से पूरा कराया जाता है। प्रशासन का अपना तर्क है लेकिन लंबे समय से लंबित समस्याओं ने आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 09:25:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>300 करोड़ के एक्सप्रेस-वे का चीरहरण एक मॉल को फायदा पहुंचाने अफसरों ने कर दिया बड़ा खेल, नियम ताक पर रखकर बना दिया VIP रास्ता...</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वीआईपी कल्चर और अफसरों की मनमानी का ऐसा दुर्लभ मामला सामने आया है, जिसने 300 करोड़ रुपए के ड्रीम प्रोजेक्ट को धुंआ- धुआं कर दिया हैं। जिस एक्सप्रेस-वे को शहर के ट्रैफिक को सिग्नल फ्री और निर्बाध बनाने के लिए डिजाइन किया गया था, वहां एक निजी मॉल और कॉलोनाइजर को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया गया। पंडरी मॉल के ठीक सामने रातों-रात नाला पाटकर एक अनधिकृत VIP रास्ता खोल दिया गया है।</p>
<p>            अब सवाल यह है कि आखिर वो कौन सा VVIP अप्रोच या बड़ा लिफाफा था,</p>
<p><strong style="font-family:Mukta, sans;font-size:1.25rem;">बिना</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/dismantling-of-expressway-worth-rs-300-crores-to-benefit-a/article-9969"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/image_search_1779698213981(1).jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वीआईपी कल्चर और अफसरों की मनमानी का ऐसा दुर्लभ मामला सामने आया है, जिसने 300 करोड़ रुपए के ड्रीम प्रोजेक्ट को धुंआ- धुआं कर दिया हैं। जिस एक्सप्रेस-वे को शहर के ट्रैफिक को सिग्नल फ्री और निर्बाध बनाने के लिए डिजाइन किया गया था, वहां एक निजी मॉल और कॉलोनाइजर को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया गया। पंडरी मॉल के ठीक सामने रातों-रात नाला पाटकर एक अनधिकृत VIP रास्ता खोल दिया गया है।</p>
<p>      अब सवाल यह है कि आखिर वो कौन सा VVIP अप्रोच या बड़ा लिफाफा था, जिसने पीडब्ल्यूडी, यातायात विभाग और नगर निगम के अफसरों की आंखों पर काला चश्मा लगा दिया।</p>
<p><strong style="font-family:Mukta, sans;font-size:1.25rem;">बिना फाइल, बिना मंजूरी... सिर्फ मौखिक आदेश' का खेल</strong></p>
<p>रायपुर रेलवे स्टेशन से शद्दाणी दरबार तक करीब 12 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण सीजीआरडीसी (CGRDC) ने 300 करोड़ रुपए की लागत से करवाया था। इसका ठेका अहमदाबाद की 'मेसर्स आयरन ट्राय एंगल लिमिटेड' को मिला था। मास्टरप्लान और अनुबंध में साफ था कि यह एक एक्सेस कंट्रोल्ड (नियंत्रित यातायात) मार्ग है, जहां बीच में कोई कट नहीं होगा। इसी वजह से सर्विस लेन के दोनों तरफ ग्रिल लगाई गई थी।</p>
<p>कोरोना काल में निगरानी घटी तो पहले ग्रिल चोरी हुए, और अब सीधे अफसरों ने ही रास्ता खोल दिया। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नियमों के मुताबिक, ऐसे मार्ग पर नया कट खोलने के लिए शासन स्तर की सक्षम मंजूरी अनिवार्य है। मगर सूत्रों की मानें तो यहां न कोई ट्रैफिक स्टडी हुई, न कोई फाइल दौड़ी, बस ऊपर के किसी मौखिक आदेश पर नाला पाटकर रास्ता दे दिया गया।</p>
<h5><strong>300 करोड़ के प्रोजेक्ट में बॉटल नेक का सुराख</strong></h5>
<p>       एक्सप्रेस-वे की मूल अवधारणा ही बिना रुके तेज यातायात है। लेकिन, सिस्टम के 'बाबू' और इंजीनियर जब मेहरबान हों, तो डिजाइन क्या चीज है? विशेषज्ञों का साफ कहना है कि तेज रफ्तार वाले एक्सप्रेस-वे पर इस तरह का कट हादसों को सीधा न्योता है। गाड़ियां जब अचानक मॉल की तरफ से सर्विस लेन होते हुए एक्सप्रेस-वे पर प्रवेश करेंगी, तो यह जगह एक खतरनाक 'बॉटल नेक' बन जाएगी। जिस सड़क को जाम से मुक्ति के लिए बनाया गया था, वह जल्द ही हादसों और ट्रैफिक जाम का नया केंद्र बन जाएगी।</p>
<p><strong style="font-family:Mukta, sans;font-size:1.25rem;">सुशासन के दावों पर बट्टा?</strong></p>
<p>इस पूरी गफलत की भनक लगते ही सियासत गरमा गई। मामले के तूल पकड़ते ही पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय रविवार शाम अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और इस अवैध रास्ते को बंद करवा दिया। उनका सीधा आरोप है कि सत्ताधारी दल के 'भ्रष्टाचार मुक्त शासन' के दावों के बीच, पीडब्ल्यूडी के अधिकारी अपने निजी और आर्थिक लाभ के लिए बड़े बिल्डरों से मिलीभगत कर रहे हैं। इस एक फैसले ने पूरे प्रोजेक्ट की दिशा ही बदल कर रख दी है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/dismantling-of-expressway-worth-rs-300-crores-to-benefit-a/article-9969</link>
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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 14:09:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NJV EXCLUSIVE: बिलासपुर में कोल माफिया के जीसीवी सिंडिकेट पर पुलिस का हथौड़ा, मिक्सिंग से लेकर मर्डर की धमकी तक... डिकोड हुआ पूरा नेक्सस</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बिलासपुर/बिल्हा। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी और उससे लगे कोयलांचल में बरसों से चल रहे कोयले के काले खेल पर अब तक की सबसे बड़ी और सटीक चोट हुई है। बिलासपुर पुलिस ने सिर्फ कोयला चोरों को नहीं पकड़ा है, बल्कि उस पूरे 'इको-सिस्टम' को डिकोड कर दिया है, जिसके तहत एसईसीएल (SECL) का हाई-ग्रेड कोयला रास्ते में ही 'कचरे' में तब्दील कर दिया जाता था।</p>
<p>हिर्री पुलिस की इस दोहरी कार्रवाई ने कोल बेल्ट में हड़कंप मचा दिया है। मिक्सिंग के मास्टरमाइंड कोल डिपो संचालक राम कुमार आर्य और शिकायतकर्ता को धमकाने वाले अश्वनी कुमार साहू की गिरफ्तारी ने यह साफ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/njv-exclusive-polices-hammer-on-gcv-syndicate-of-coal-mafia/article-9955"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/file_00000000d7c872088170d27a874f7310.png" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर/बिल्हा। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी और उससे लगे कोयलांचल में बरसों से चल रहे कोयले के काले खेल पर अब तक की सबसे बड़ी और सटीक चोट हुई है। बिलासपुर पुलिस ने सिर्फ कोयला चोरों को नहीं पकड़ा है, बल्कि उस पूरे 'इको-सिस्टम' को डिकोड कर दिया है, जिसके तहत एसईसीएल (SECL) का हाई-ग्रेड कोयला रास्ते में ही 'कचरे' में तब्दील कर दिया जाता था।</p>
<p>हिर्री पुलिस की इस दोहरी कार्रवाई ने कोल बेल्ट में हड़कंप मचा दिया है। मिक्सिंग के मास्टरमाइंड कोल डिपो संचालक राम कुमार आर्य और शिकायतकर्ता को धमकाने वाले अश्वनी कुमार साहू की गिरफ्तारी ने यह साफ कर दिया है कि बिलासपुर पुलिस अब जीरो टॉलरेंस के मोड में है।</p>
<p><strong>क्या है GCV का काला सिंडिकेट?</strong></p>
<p>इस पूरे खेल की जड़ है 'जीसीवी' (Gross Calorific Value)। दरअसल, पेंड्रा निवासी ट्रांसपोर्टर आशीष केशरी ने एसईसीएल की रामपुर खदान से जी-6 ग्रेड का बेहतरीन कोयला (5500 से 5800 GCV) ट्रेलरों में लोड कर बजरंग आयरन एंड स्टील लिमिटेड (दिघौरा) के लिए रवाना किया था।</p>
<p>सिंडिकेट का खेल यहीं से शुरू होता है। रास्ते में माफियाओं ने मिलीभगत कर ट्रेलरों से असली कोयला उतार लिया और उसमें बेहद घटिया किस्म का कोयला (4203 और 4220 GCV) मिला दिया। जब प्लांट की लैब में इस कोयले की टेस्टिंग हुई, तो गुणवत्ता औंधे मुंह गिरी हुई मिली। यह कोई छिटपुट चोरी नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये का वह संगठित अपराध है, जो जिले के कई कोल डिपो के जरिए सफेदपोशों के संरक्षण में फल-फूल रहा था।</p>
<p><strong>शिकायत हुई तो उतरा माफिया का बाहुबली</strong></p>
<p>कोल माफिया का नेक्सस कितना बेखौफ है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब शिकायतकर्ता आशीष केशरी ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया, तो सिंडिकेट ने उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली। केस वापस लेने के लिए लगातार मर्डर की धमकियां दी जाने लगीं।</p>
<p>लेकिन यहाँ माफिया से चूक हो गई। एसएसपी रजनेश सिंह और एएसपी मधुलिका सिंह के कड़े निर्देश पर हिर्री टीआई दामोदर मिश्र की टीम ने चंद घंटों के भीतर बिल्हा निवासी अश्वनी कुमार साहू को दबोच लिया। अश्वनी ट्रांसपोर्टर का भाई है और माफियाओं का मोहरा बनकर काम करता है।</p>
<p><strong>अब रडार पर कई सफेदपोश, खनिज विभाग से मांगी गई जानकारी...</strong></p>
<p>राम कुमार आर्य की गिरफ्तारी तो महज एक झांकी है। NJV सूत्रों के मुताबिक, यह सिंडिकेट बिना कागजी हेराफेरी के नहीं चल सकता। अब पुलिस ने खनिज विभाग (Mining Department) को पत्र लिखकर कोल डिपो के संचालन, स्टॉक रजिस्टर और परिवहन दस्तावेजों की कुंडली मांग ली है।</p>
<p><strong>क्या है कार्रवाई के मायने</strong></p>
<p> कार्रवाई ये बताती है कि पुलिस केवल मोहरों को नहीं, बल्कि डिपो के जरिए चल रहे असली नेक्सस को तोड़ रही है। लंबे समय से बेखौफ चल रहे अन्य डिपो संचालकों में दहशत है, क्योंकि अब जांच की आंच उन तक पहुंचना तय है।</p>
<p> क्लीन-अप ड्राइव: आने वाले दिनों में कुछ बड़े ट्रांसपोर्टर्स और पर्दे के पीछे छिपे सफेदपोश कोल कारोबारियों के नाम भी बेनकाब हो सकते हैं।</p>
<p>बिलासपुर पुलिस की इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' ने कोल माफियाओं को साफ संदेश दे दिया है— काले सोने की लूट का दौर अब और नहीं चलेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/njv-exclusive-polices-hammer-on-gcv-syndicate-of-coal-mafia/article-9955</link>
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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 08:57:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>KTU इनसाइड स्टोरी: 91 दिन से बेघर हैं कुलपति, रविवि के धूल भरे रेस्टहाउस में कट रहे दिन... और इधर बैकडोर से चहेते प्रोफेसरों की हो रही झमाझम एंट्री!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर।छत्तीसगढ़ के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (KTU) में इन दिनों गजब का प्रशासनिक 'रायता' फैला हुआ है। जो यूनिवर्सिटी पूरे प्रदेश और देश को बेबाक पत्रकारिता और प्रभावी संचार का पाठ पढ़ाती है, उसकी अपनी आंतरिक व्यवस्थाएं ब्यूरोक्रेसी की भेंट चढ़ गई हैं। हालत यह है कि विश्वविद्यालय के मुखिया यानी नए कुलपति प्रो. मनोज दयाल पिछले तीन महीनों से अपने एक अदद सरकारी आवास के लिए सरकारी सिस्टम के आगे भटक रहे हैं।</p>
<h5><strong>धूल और शोर के बीच वीसी की रातें</strong></h5>
<p>20 फरवरी 2026 को बड़ी उम्मीदों के साथ पदभार ग्रहण करने वाले कुलपति महोदय को अंदाजा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/ktu-inside-story-vice-chancellor-ravi-has-been-homeless-for/article-9936"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/image_search_1779592194096.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर।छत्तीसगढ़ के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (KTU) में इन दिनों गजब का प्रशासनिक 'रायता' फैला हुआ है। जो यूनिवर्सिटी पूरे प्रदेश और देश को बेबाक पत्रकारिता और प्रभावी संचार का पाठ पढ़ाती है, उसकी अपनी आंतरिक व्यवस्थाएं ब्यूरोक्रेसी की भेंट चढ़ गई हैं। हालत यह है कि विश्वविद्यालय के मुखिया यानी नए कुलपति प्रो. मनोज दयाल पिछले तीन महीनों से अपने एक अदद सरकारी आवास के लिए सरकारी सिस्टम के आगे भटक रहे हैं।</p>
<h5><strong>धूल और शोर के बीच वीसी की रातें</strong></h5>
<p>20 फरवरी 2026 को बड़ी उम्मीदों के साथ पदभार ग्रहण करने वाले कुलपति महोदय को अंदाजा नहीं था कि सिस्टम उनका ऐसा स्वागत करेगा। ज्वाइनिंग के महज दो दिन बाद ही कुलपति कार्यालय ने संबंधित विभाग और सचिव को आवास के लिए विधिवत पत्र लिख दिया था। लेकिन मंत्रालय की लालफीताशाही में वह फाइल कहां जाकर धूल खा रही है, यह बताने वाला कोई नहीं है। मजबूरी का आलम यह है कि वीसी साहब पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रविवि) के रेस्टहाउस में दिन गुजारने को विवश हैं। सोने पे सुहागा यह है कि इस रेस्टहाउस में इन दिनों भारी-भरकम मरम्मत और निर्माण कार्य चल रहा है। दिन भर की थकान के बाद जब कुलपति वहां पहुंचते हैं, तो उन्हें सुकून के बजाय धूल-मिट्टी और शोर-शराबे का सामना करना पड़ता है।</p>
<h5><strong>अटक गईं अहम फाइलें और बैठकें</strong></h5>
<p> </p>
<p>आवास न होने का यह मामला सिर्फ एक बंगले का नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर विश्वविद्यालय की प्रशासनिक और शैक्षणिक सेहत पर पड़ रहा है। एक वीसी का काम सिर्फ दफ्तर के आठ घंटों तक सीमित नहीं होता। शाम को या वीकेंड पर कई महत्वपूर्ण बैठकें, अतिथि शिक्षकों और बाहर से आने वाले डेलिगेशन के साथ चर्चाएं करनी होती हैं। रेस्टहाउस के एक छोटे से कमरे में यह सब कैसे संभव है? गोपनीय और अहम फाइलों का निपटारा प्रभावित हो रहा है। शिक्षा जगत में अब यह चर्चा आम हो गई है कि जब एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की फाइल इस तरह अटकी है, तो आम छात्रों और कर्मचारियों का क्या हाल होता होगा।</p>
<h5><strong>बैकडोर से चहेते प्रोफेसरों की एंट्री का खेल</strong></h5>
<p>इस पूरे वाकये में सबसे चौंकाने वाला एंगल तो कुछ और ही है। एक तरफ कुलपति महोदय अपने सरकारी आवास की फाइल आगे बढ़ाने के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विश्वविद्यालय में पर्दे के पीछे एक बड़ा खेल चल रहा है। अंदरखाने से पुख्ता खबर है कि यूनिवर्सिटी में चहेते प्रोफेसरों की बैकडोर एंट्री का रास्ता साफ किया जा रहा है। नियमों को ताक पर रखकर और उचित पारदर्शी प्रक्रिया को दरकिनार कर अपनों को उपकृत करने की इस गुपचुप तैयारी ने कैंपस का माहौल गरमा दिया है। लोगों का तंज है कि सिस्टम के पास वीसी को बंगला अलॉट करने का समय भले ही न हो, लेकिन चहेतों को पिछले दरवाजे से एंट्री दिलाने वाली फाइलों को पहिए लगे हुए हैं।कुल मिलाकर, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय का वर्तमान परिदृश्य प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था की एक कड़वी सच्चाई बयां कर रहा है। एक ओर बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसता शीर्ष नेतृत्व है, तो दूसरी ओर नियमों की धज्जियां उड़ाकर होने वाली पिछले दरवाजे की भर्तियां। अब देखना यह है कि राज्य सरकार और राजभवन इस प्रशासनिक लेटलतीफी और बैकडोर एंट्री के इस गंभीर 'कॉकटेल' पर कब संज्ञान लेते हैं।</p>
<div class="youtubeplayer-responsive-iframe-outer"><iframe class="youtubeplayer-responsive-iframe" title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/h80PFhcQXsc" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/ktu-inside-story-vice-chancellor-ravi-has-been-homeless-for/article-9936</link>
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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 08:40:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ पॉलिटिक्स: खरमास खत्म होते ही सत्ता के शीर्ष पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' की तैयारी! 'गुजरात फॉर्मूले' के खौफ के बीच डॉ. रमन सिंह की वापसी की जोरदार चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर: छत्तीसगढ़ की सियासत में इन दिनों खामोशी के पीछे एक बड़े तूफान की आहट सुनाई दे रही है। राजनीतिक गलियारों और सत्ता के गलियारों (Power Corridors) में यह चर्चा आम है कि 'खरमास' (मलमास) के खत्म होते ही प्रदेश के नेतृत्व और सत्ता के स्वरूप में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है। दिल्ली आलाकमान के पास पहुंच रही ग्राउंड रिपोर्ट्स के बाद अब संकेत मिल रहे हैं कि हाई कमान राज्य में कोई कड़ा फैसला लेने के मूड में है। चर्चा 'गुजरात फॉर्मूले' से लेकर प्रदेश के कद्दावर नेता डॉ. रमन सिंह की सक्रिय राजनीति में वापसी तक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/chhattisgarh-politics-preparation-for-surgical-strike-at-the-top-of/article-9935"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/20260524_081410.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर: छत्तीसगढ़ की सियासत में इन दिनों खामोशी के पीछे एक बड़े तूफान की आहट सुनाई दे रही है। राजनीतिक गलियारों और सत्ता के गलियारों (Power Corridors) में यह चर्चा आम है कि 'खरमास' (मलमास) के खत्म होते ही प्रदेश के नेतृत्व और सत्ता के स्वरूप में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है। दिल्ली आलाकमान के पास पहुंच रही ग्राउंड रिपोर्ट्स के बाद अब संकेत मिल रहे हैं कि हाई कमान राज्य में कोई कड़ा फैसला लेने के मूड में है। चर्चा 'गुजरात फॉर्मूले' से लेकर प्रदेश के कद्दावर नेता डॉ. रमन सिंह की सक्रिय राजनीति में वापसी तक की हो रही है।</p>
<h5><strong>क्यों महसूस की जा रही है बदलाव की दरकार?</strong></h5>
<p>दरअसल, पिछले कुछ समय से प्रदेश सरकार के कामकाज और जमीनी हकीकत को लेकर दिल्ली तक जो फीडबैक पहुंच रहा है, वह आलाकमान के लिए चिंता का विषय है। सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरी है।</p>
<p><strong>बेलगाम अफसरशाही (Bureaucracy)।</strong></p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता और प्रशासन के बीच जो समन्वय होना चाहिए, वह वर्तमान में नदारद है। मंत्रियों की पकड़ ढीली होने के कारण लालफीताशाही (Red-tapism) हावी हो गई है, जिससे जनहित के फैसले फाइलों में दम तोड़ रहे हैं। ग्राउंड लेवल पर भ्रष्टाचार की शिकायतें और जनता-सरकार के बीच टूटता संवाद, आगामी चुनावों के लिहाज से भाजपा के लिए एक बड़ा 'रेड फ्लैग' है।</p>
<h5><strong>क्या है दिल्ली की रणनीति? 'गुजरात पैटर्न' का खौफ</strong></h5>
<p>भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अपनी चौंकाने वाली रणनीतियों के लिए जाना जाता है। प्रदेश के सियासी हलकों में इस बात का खौफ है कि कहीं दिल्ली यहां भी गुजरात पैटर्न' लागू न कर दे।</p>
<h5><strong> क्या है यह पैटर्न?</strong> इस फॉर्मूले के तहत बिना किसी पूर्व सूचना के पूरी कैबिनेट या शीर्ष नेतृत्व को बदल दिया जाता है। इसका उद्देश्य सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) को काटना और संगठन में नई ऊर्जा का संचार करना होता है।</h5>
<p>हालांकि, छत्तीसगढ़ के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए यह एक बड़ा जोखिम भी साबित हो सकता है।</p>
<h5><strong>ट्रबलशूटर के रूप में डॉ. रमन सिंह की वापसी की सुगबुगाहट</strong></h5>
<p>गुजरात पैटर्न के भारी जोखिम के बीच आलाकमान के सामने एक दूसरा और बेहद सुरक्षित विकल्प पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह  के रूप में है। खबर है कि हाई कमान का एक धड़ा राज्य को प्रशासनिक अराजकता से निकालने के लिए डॉ. रमन के 15 सालों के बेदाग और ठोस अनुभव पर दांव लगाने की वकालत कर रहा है।</p>
<p><strong>डॉ. रमन सिंह ही क्यों?</strong></p>
<p> <strong>प्रशासन पर पकड़</strong>: उनके कार्यकाल में ब्यूरोक्रेसी कभी राजनीतिक नेतृत्व पर हावी नहीं हो सकी।</p>
<p><strong>संतुलन के माहिर:</strong> डॉ. रमन सिंह संगठन के तमाम गुटों को साधने और असंतोष को खत्म करने में माहिर माने जाते हैं।</p>
<p> <strong>जनता में स्वीकार्यता: </strong>चाऊर वाले बाबा' के रूप में उनकी छवि आज भी ग्रामीण छत्तीसगढ़ में बेहद मजबूत है।</p>
<h5><strong>आगे क्या हो सकता है </strong></h5>
<p>दिल्ली आलाकमान इस वक्त एक बेहद बारीक लकीर पर चल रहा है। एक ओर नए चेहरों के साथ प्रयोग (गुजरात मॉडल) का विकल्प है, तो दूसरी ओर एक आजमाए हुए अनुभवी चेहरे (डॉ. रमन सिंह) के जरिए 'कोर्स करेक्शन' करने की जरूरत।</p>
<p>खरमास के बाद का समय छत्तीसगढ़ भाजपा के लिए बेहद क्रूशियल होने वाला है। बदलाव केवल चेहरों का होगा या पूरी व्यवस्था का, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन एक बात तय है कि दिल्ली अब मूकदर्शक बनकर नुकसान सहने के मूड में नहीं है। बदलाव की इस बयार का सीधा असर 2028 के रोडमैप पर पड़ेगा।</p>
<div class="youtubeplayer-responsive-iframe-outer"><iframe class="youtubeplayer-responsive-iframe" title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/X0WGQdYFRA4" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 08:15:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीजीएमएससी के फर्नीचर टेंडर में बड़ा खेल, मनीशंकर पाण्डेय ने मुख्य सचिव से की शिकायत: कुर्सियों और मेज के लिए मांगा जा रहा मेडिकल उपकरणों का यूएसएफडीए प्रमाण पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी सीजीएमएससी में इन दिनों एक टेंडर को लेकर भारी हड़कंप मचा हुआ है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के लिए फर्नीचर खरीदी का यह मामला अब एक बड़े विभागीय घोटाले और प्रक्रियात्मक लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है। आरोप है कि अधिकारियों ने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने और अपनी घोर प्रशासनिक सुस्ती के चलते एक ऐसा टेंडर जारी किया है जिसमें कुर्सियों और मेज जैसे सामान्य फर्नीचर की सप्लाई के लिए मेडिकल उपकरणों के अंतरराष्ट्रीय मानकों की मांग की गई है। इस गंभीर विसंगति को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता और विश्लेषक मनीषंकर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/big-game-in-furniture-tender-of-cgmsc-mani-shankar-pandey/article-9916"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/screenshot_20260523_083349_samsung-notes.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी सीजीएमएससी में इन दिनों एक टेंडर को लेकर भारी हड़कंप मचा हुआ है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के लिए फर्नीचर खरीदी का यह मामला अब एक बड़े विभागीय घोटाले और प्रक्रियात्मक लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है। आरोप है कि अधिकारियों ने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने और अपनी घोर प्रशासनिक सुस्ती के चलते एक ऐसा टेंडर जारी किया है जिसमें कुर्सियों और मेज जैसे सामान्य फर्नीचर की सप्लाई के लिए मेडिकल उपकरणों के अंतरराष्ट्रीय मानकों की मांग की गई है। इस गंभीर विसंगति को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता और विश्लेषक मनीषंकर पाण्डेय ने सीधे प्रदेश के मुख्य सचिव विकास शील को एक विस्तृत और तथ्यात्मक शिकायत भेजी है जिसमें टेंडर प्रक्रिया की धज्जियां उड़ने का पूरा कच्चा चिट्ठा खोला गया है।</p>
<p>मनीशंकर पाण्डेय की शिकायत के अनुसार यह पूरा मामला निविदा क्रमांक 268 ईक्यूपी सीजीएमएससी 2026 और 2027 से जुड़ा है जो 30 अप्रैल 2026 को जारी किया गया था। इस निविदा के जरिए कबीरधाम, मनेन्द्रागढ़, जांजगीर चांपा, दंतेवाड़ा और कुंकुरी जशपुर के नव निर्मित मेडिकल कॉलेजों के लिए बड़े पैमाने पर फर्नीचर खरीदा जाना है। एक खोजी नजरिए से देखा जाए तो यह टेंडर भ्रष्टाचार और कॉपी पेस्ट कार्यप्रणाली का एक बेजोड़ नमूना लगता है। निविदा के दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से सीडीएससीओ लाइसेंस, यूएसएफडीए प्रमाणपत्र, डब्ल्यूएचओ जीएमपी प्रमाणन, मेडिकल डिवाइस रूल्स 2017, एईआरबी अनुमति और सीपीसीबी अनुमति जैसी जटिल शर्तें थोप दी गई हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि लकड़ी या लोहे की कुर्सियों, मेज और बिस्तरों के लिए रेडिएशन नियंत्रण बोर्ड या अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमाण पत्र की क्या आवश्यकता है। यह साफ दर्शाता है कि विभाग ने बिना किसी तकनीकी परीक्षण के किसी पुरानी एक्स रे या एमआरआई मशीन वाली मेडिकल उपकरण निविदा को ज्यों का त्यों कॉपी करके फर्नीचर खरीदी के लिए चस्पा कर दिया है।</p>
<p>इस टेंडर की शर्तों का गहराई से विश्लेषण करने पर कई नियमों के खुले उल्लंघन सामने आते हैं। मनीषंकर पाण्डेय ने अपने प्रतिवेदन में भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी फर्नीचर क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर 2025 का प्रमुखता से हवाला दिया है। इस आदेश के तहत वर्क चेयर के लिए आईएस 17631, जनरल पर्पज चेयर के लिए आईएस 17632, मेज के लिए आईएस 17633, स्टोरेज यूनिट के लिए आईएस 17634 और बिस्तरों के लिए आईएस 17635 जैसे भारतीय मानकों का पालन और उनका बीआईएस प्रमाणन अनिवार्य है। लेकिन सीजीएमएससी के टेंडर में गुणवत्ता नियंत्रण के इस सबसे अहम राष्ट्रीय नियम को ही दरकिनार कर दिया गया है। बीआईएस प्रमाणित उत्पादों की अनिवार्यता न होने से यह आशंका प्रबल हो गई है कि भविष्य में मेडिकल कॉलेजों को घटिया और गैर मानक फर्नीचर थमा दिया जाएगा जिससे मरीजों और छात्रों की सुरक्षा के साथ साथ सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगेगा।</p>
<p>नियमों की अनदेखी का सिलसिला यहीं नहीं रुकता। छत्तीसगढ़ स्टोर परचेज नियम के नियम 4.2 उपनियम 2 में स्थानीय एमएसएमई और स्टार्टअप्स को टर्नओवर और अनुभव में छूट देने का स्पष्ट प्रावधान है। राज्य सरकार की नीतियां स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने की बात करती हैं लेकिन इस निविदा में 20 करोड़ रुपये का भारी भरकम औसत वार्षिक टर्नओवर और वह भी विशेष रूप से मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति के अनुभव के साथ मांग लिया गया है। यह अजीबोगरीब शर्त राज्य के वास्तविक फर्नीचर निर्माताओं और छोटे उद्यमियों को प्रतिस्पर्धा से पूरी तरह बाहर करने की एक सुनियोजित साजिश प्रतीत होती है। इसके अलावा संपूर्ण बीओक्यू यानी सभी वस्तुओं की दर एक साथ अनिवार्य रूप से भरने की शर्त भी डाली गई है। इससे कोई भी श्रेणी विशेष का फर्नीचर निर्माता टेंडर में भाग नहीं ले पाएगा और इसका सीधा फायदा केवल बड़े कॉरपोरेट या सप्लायर सिंडिकेट को मिलेगा जो हर तरह का सामान आउटसोर्स करके सप्लाई करते हैं।</p>
<p>स्टोर परचेज नियमों के तहत यदि कोई सामग्री जेम पोर्टल पर उपलब्ध है तो उसकी खरीदी सामान्यतः उसी माध्यम से होनी चाहिए। ओपन टेंडर जारी करने से पहले क्या नियमानुसार जेम पोर्टल पर उपलब्धता की जांच की गई और वित्तीय सहमतियां ली गईं, यह भी जांच का एक बड़ा विषय है। तकनीकी विनिर्देश तय करने के मामले में भी नियम 4.1 का घोर उल्लंघन हुआ है क्योंकि एर्गोनॉमिक्स, लोड बेयरिंग क्षमता, कोटिंग और सामग्री की गुणवत्ता जैसे फर्नीचर विशिष्ट तकनीकी मापदंडों का टेंडर में कहीं कोई अता पता नहीं है।</p>
<p>मनीशंकर पाण्डेय ने मुख्य सचिव से मांग की है कि इस पूरे टेंडर की तत्काल तकनीकी और विधिक समीक्षा कराई जाए। उन्होंने अप्रासंगिक शर्तों को हटाकर एमएसएमई की निष्पक्ष भागीदारी सुनिश्चित करने और जरूरत पड़ने पर निविदा को निरस्त कर नए सिरे से बीआईएस मानकों के अनुरूप जारी करने का आग्रह किया है। साथ ही टेंडर बनाने वाले गैर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग उठाई गई है। अब देखना यह है कि राज्य का शीर्ष प्रशासन सीजीएमएससी की इस बड़ी प्रक्रियात्मक भूल या सुनियोजित खेल पर क्या एक्शन लेता है क्योंकि यह सीधे तौर पर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की हत्या का मामला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 08:34:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतमाला प्रोजेक्ट: अफसर-माफिया गठजोड़ का 'महाखेल', कागजों पर जमीन के टुकड़े कर डकारे करोड़ों, ठगे गए किसान पहुंचे सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना एक के बाद एक बड़े खुलासे हो रहे हैं  ये पूरी योजना सुसंगठित भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। विकास के नाम पर बिछे इस जाल में सफेदपोशों, भू-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों के सिंडिकेट ने सुनियोजित तरीके से करोड़ों रुपये की सरकारी राशि का गबन किया है। असली और पुश्तैनी किसानों को उनके हक का चार गुना मुआवजा आज तक नहीं मिला, जबकि बाहरी भू-माफियाओं ने सेटिंग के जरिए जमीनों को कागजों में छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर अपनी तिजोरियां भर लीं। राजनांदगांव के देवादा और टेडेसरा गांव के करीब 200</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/bharatmala-project-the-great-game-of-officer-mafia-nexus-farmers-defrauded/article-9897"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/file_0000000080807208b9dbbcbc5e6afa2e(1).png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना एक के बाद एक बड़े खुलासे हो रहे हैं  ये पूरी योजना सुसंगठित भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। विकास के नाम पर बिछे इस जाल में सफेदपोशों, भू-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों के सिंडिकेट ने सुनियोजित तरीके से करोड़ों रुपये की सरकारी राशि का गबन किया है। असली और पुश्तैनी किसानों को उनके हक का चार गुना मुआवजा आज तक नहीं मिला, जबकि बाहरी भू-माफियाओं ने सेटिंग के जरिए जमीनों को कागजों में छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर अपनी तिजोरियां भर लीं। राजनांदगांव के देवादा और टेडेसरा गांव के करीब 200 से अधिक किसान पिछले पांच सालों से न्याय की गुहार लगाते हुए अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंच चुके हैं।</p>
<h5><strong>वीआईपी होटलों में रची गई 'ऑपरेशन लूट' की पटकथा</strong></h5>
<p>इस घोटाले की जड़ें सिस्टम में कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लूट की पूरी साजिश शहर के एक आलीशान होटल में रची गई। सूत्रों के मुताबिक, यह होटल उसी मुख्य भू-माफिया का है, जिसके उद्घाटन में इलाके के तत्कालीन एसडीएम बकायदा चीफ गेस्ट बनकर फीता काटने पहुंचे थे। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और ईओडब्ल्यू (EOW) की जांच में यह साफ हो रहा है कि इसी होटल की बंद कमरों की मीटिंगों में पटवारियों और आला अधिकारियों ने मिलकर असली पंचनामा रिपोर्ट को गायब किया और जमीनों का फर्जी बंटवारा कर दिया।</p>
<h5><strong>व्हिसलब्लोअर की जान को खतरा, साजिशों का दौर शुरू</strong></h5>
<p>जैसे-जैसे इस महाघोटाले की आंच तेज हो रही है, घोटाले के मास्टरमाइंड बौखला गए हैं। मामले को उजागर करने वाले शिकायतकर्ता की जान अब सीधे तौर पर खतरे में है। शिकायतकर्ता ने रायपुर, दुर्ग, धमतरी और महासमुंद के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को पत्र लिखकर तत्काल सुरक्षा मुहैया कराने की गुहार लगाई है। पत्र में गंभीर आशंका जताई गई है कि माफिया उन्हें झूठे एससी-एसटी एक्ट या छेड़छाड़ के मुकदमों में फंसा सकता है। इसके अलावा, किसी करीबी के जरिए नशीली दवा पिलाकर उनकी हत्या की साजिश रचे जाने की भी खुफिया जानकारी सामने आई है।</p>
<h5><strong>छले गए असली किसान: अपनों के ही सिस्टम में बेगाने</strong></h5>
<p>एक तरफ पाटन जैसे क्षेत्रों में प्रभावितों को दोगुनी से ज्यादा राशि मिली, वहीं राजनांदगांव के किसान अपने हक के लिए तरस रहे हैं। देवादा गांव के तीन प्रमुख मामलों से इस लूट का पैटर्न समझा जा सकता है:</p>
<ul>
<li> श्याम लाल देवांगन:** इनकी 1 एकड़ 27 डिसमिल पुश्तैनी जमीन छिन गई, लेकिन प्रशासन ने मुआवजे के नाम पर महज 28 लाख रुपये थमा दिए।</li>
<li> सुरेश चतुर्वेदी: इन्हें भी समान जमीन पर सिर्फ 28-29 लाख मिले। जबकि इनके आसपास जमीन खरीदने वाले बाहरी लोगों (जो किसान थे ही नहीं) ने रातों-रात उसी जमीन के टुकड़े कर करोड़ों का मुआवजा ऐंठ लिया।</li>
<li> अवध सिन्हा: नियमतः 4 गुना राशि मिलनी थी, लेकिन 1 एकड़ 35 डिसमिल के एवज में सिर्फ 32 लाख दिए गए। पटवारी ने अफसरों के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा किया और मूल पंचनामा रिपोर्ट आज तक नहीं दिखाई गई।</li>
</ul>
<h5><strong>सिस्टम और अफसरशाही के मौन पर उठते 4 चुभते सवाल</strong></h5>
<p>इस पूरे 'लैंड स्कैम' में प्रशासनिक अमले की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं:</p>
<p> 1. जब परियोजना के तहत जमीनों की खरीद-बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध था, तो रजिस्ट्रियां कैसे और किसके आदेश पर बेरोकटोक होती रहीं?</p>
<p> 2. मुआवजे की मलाई खाने के लिए जमीनों को छोटे टुकड़ों में बांटने (लैंड पूलिंग) की वैधानिक अनुमति देने वाला अधिकारी कौन था?</p>
<p> 3. कलेक्टर और एसडीएम की बैठकों में किए गए लिखित-मौखिक वादे के बावजूद, असली किसानों को 4 गुना मुआवजा और ब्याज अब तक क्यों नहीं दिया गया?</p>
<p> 4. क्या राजनांदगांव से लेकर जिला मुख्यालय तक बैठे आला अधिकारियों ने इस खुले भ्रष्टाचार से जानबूझकर अपनी आंखें मूंद रखी थीं?</p>
<p><strong>प्रशासन का वही जवाब </strong></p>
<p>मामले को लेकर प्रशासन का फिर वही जवाब आया है की पूरा मामला हमारे संज्ञान में है और हम मामले की जांच कर रहे हैं ।  किसान और एनएचएआई (NHAI) की सुनवाई न्यायालय में चल रही है। माननीय न्यायालय के जो भी निर्देश होंगे, उनका अक्षरशः पालन किया जाएगा।</p>
<p><strong>सत्यनारायण राठौर, संभाग आयुक्त, दुर्ग</strong></p>
<p>&gt; </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 09:21:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
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