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                <title>बिलासपुर - National Jagat Vision</title>
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                <description>बिलासपुर RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बिलासपुर SSP रजनेश सिंह का एक्शन: बीट सिस्टम होगा और मजबूत, चप्पे-चप्पे पर रहेगी नजर; उत्कृष्ट कार्य करने वाले 18 पुलिसकर्मी होंगे पुरस्कृत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बिलासपुर, 17 अप्रैल 2026। जिले में अपराधों पर नकेल कसने और आम जनता के बीच पुलिस की विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए बिलासपुर पुलिस फुल एक्शन मोड में है। डीआईजी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रजनेश सिंह (IPS) ने जिले की 'बीट प्रणाली' (Beat System) को और अधिक धारदार व प्रभावी बनाने के लिए शुक्रवार को एक अहम बैठक ली। बैठक में एसएसपी ने दो टूक निर्देश दिए हैं कि शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर पुलिस की पैनी नजर होनी चाहिए। साथ ही, मैदानी स्तर पर उत्कृष्ट काम करने वाले जवानों का उत्साह बढ़ाते हुए एसएसपी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/bilaspur-ssp-rajnesh-singh-will-have-action-beat-system-and/article-9253"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/img-20260417-wa0056.jpg" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर, 17 अप्रैल 2026। जिले में अपराधों पर नकेल कसने और आम जनता के बीच पुलिस की विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए बिलासपुर पुलिस फुल एक्शन मोड में है। डीआईजी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रजनेश सिंह (IPS) ने जिले की 'बीट प्रणाली' (Beat System) को और अधिक धारदार व प्रभावी बनाने के लिए शुक्रवार को एक अहम बैठक ली। बैठक में एसएसपी ने दो टूक निर्देश दिए हैं कि शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर पुलिस की पैनी नजर होनी चाहिए। साथ ही, मैदानी स्तर पर उत्कृष्ट काम करने वाले जवानों का उत्साह बढ़ाते हुए एसएसपी ने उन्हें नकद इनाम से पुरस्कृत करने का भी ऐलान किया।</p>
<p>इस महत्वपूर्ण बैठक में जिले के सभी राजपत्रित अधिकारी, थाना एवं चौकी प्रभारी, बीट प्रभारी और बीट स्टाफ सहित 60 से अधिक पुलिसकर्मी मौजूद रहे।</p>
<h4><strong>बीट प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश— इलाके की हर हलचल का रखें इनपुट</strong></h4>
<p>एसएसपी रजनेश सिंह ने बैठक में बीट प्रणाली के उद्देश्य और उसके महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि एक मजबूत बीट सिस्टम ही अपराध नियंत्रण की सबसे अहम कड़ी है। उन्होंने बीट अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने क्षेत्र में होने वाली प्रत्येक गतिविधि— चाहे वह आपराधिक हो, सामाजिक, साम्प्रदायिक, राजनीतिक या फिर छात्र व श्रमिकों से जुड़ी हो— उसकी सतत निगरानी रखें। इसके अलावा, क्षेत्र में बाहर से आने वाले नए आगंतुकों और किरायेदारों पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<h4><strong>एसएसपी के कड़े निर्देश: इन बिंदुओं पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस</strong></h4>
<p>बैठक के दौरान बीट ड्यूटी को लेकर एसएसपी ने एक विस्तृत कार्ययोजना साझा की और निम्नलिखित बिंदुओं पर त्वरित व सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए:</p>
<p> <strong>कम्युनिटी पुलिसिंग</strong>: ग्रामों और मोहल्लों में समय-समय पर शिविर लगाकर नागरिकों की समस्याओं का समाधान किया जाए।</p>
<p> <strong>जागरूकता अभियान</strong>: आम जनता को साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud) और नशे के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए लगातार जागरूक किया जाए।</p>
<p> <strong>वारंटियों पर एक्शन:</strong> लंबित समंस और वारंट की तामीली में तेजी लाई जाए। स्थाई वारंटियों की तलाश कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाए।</p>
<p> <strong>अवैध कारोबार पर नकेल: </strong>क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की सूचना मिलने पर बिना किसी देरी के त्वरित और सख्त कार्रवाई की जाए।</p>
<p> <strong>गुंडे-बदमाशों की चेकिंग</strong>: इलाके के गुंडे-बदमाशों और निगरानीशुदा अपराधियों की नियमित रूप से चेकिंग कर उन पर दबाव बनाए रखा जाए।</p>
<p> <strong>चोरों की पतासाजी</strong>: चोरी की वारदातों पर अंकुश लगाने और आरोपियों की धरपकड़ के लिए मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया जाए। पुलिस रेगुलेशन के अनुसार ही व्यवस्थित कार्यप्रणाली अपनाई जाए।</p>
<h4><strong>शानदार काम करने वाले 18 पुलिसकर्मी होंगे पुरस्कृत</strong></h4>
<p>बैठक में केवल निर्देश ही नहीं दिए गए, बल्कि बीट अधिकारियों के कामकाज की गहन समीक्षा भी की गई। इस दौरान मैदानी स्तर पर शानदार कार्य करने वाले 17 आरक्षक और 1 प्रधान आरक्षक के प्रयासों की एसएसपी ने जमकर सराहना की।</p>
<p>उत्कृष्ट कार्य के लिए जिन पुलिसकर्मियों को नकद पुरस्कार देने की घोषणा की गई है, उनमें आरक्षक दुर्गेश प्रजापति, सोनू पाल, विवेक राय, संजू जांगड़े, नितेश सिंह, सत्य कुमार पाटले, मनीष वाल्मीकि, शिव कुर्रे, पवन बंजारे, सज्जू अली, राहुल जगत, रंजीत खरे, देवेंद्र शर्मा, बोधुराम कुम्हार, विकास यादव, मिथलेश साहू, विनोद शास्त्री और प्रधान आरक्षक  नवीन कुमार शामिल हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 19:58:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पैसे लिए पट्टा देने के, अब बना रहे कमर्शियल कॉम्प्लेक्स: बिलासपुर नगर निगम की 'बुलडोजर नीति' पर हाई कोर्ट का ब्रेक, लिंगियाडीह के निवासियों को बड़ी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बिलासपुर। पीढ़ी-दर-पीढ़ी जिस जमीन पर आशियाना बनाकर लोग रहते आए, सरकार ने उन्हें पट्टा देने का सपना दिखाया। बाकायदा राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत प्रीमियम की रकम भी सरकारी खजाने में जमा करवा ली गई। लेकिन अचानक नियम बदलने का हवाला देकर नगर निगम वहां बुलडोजर चलाने और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने पहुंच गया। बिलासपुर नगर निगम की इस कथित मनमानी पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कड़ी रोक लगा दी है।</p>
<p>शुक्रवार को जस्टिस एनके चंद्रवंशी की सिंगल बेंच ने लिंगियाडीह बस्ती के 36 याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके घरों को तोड़ने पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/law/high-courts-break-on-the-bulldozer-policy-of-bilaspur-municipal/article-9248"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/image_search_17764201043811.jpg" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर। पीढ़ी-दर-पीढ़ी जिस जमीन पर आशियाना बनाकर लोग रहते आए, सरकार ने उन्हें पट्टा देने का सपना दिखाया। बाकायदा राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत प्रीमियम की रकम भी सरकारी खजाने में जमा करवा ली गई। लेकिन अचानक नियम बदलने का हवाला देकर नगर निगम वहां बुलडोजर चलाने और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने पहुंच गया। बिलासपुर नगर निगम की इस कथित मनमानी पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कड़ी रोक लगा दी है।</p>
<p>शुक्रवार को जस्टिस एनके चंद्रवंशी की सिंगल बेंच ने लिंगियाडीह बस्ती के 36 याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके घरों को तोड़ने पर अंतरिम रोक (Interim Stay) लगा दी है।</p>
<h4><strong>क्या है पूरा विवाद? वादे से कैसे मुकरी सरकार</strong></h4>
<p>याचिकाकर्ताओं की व्यथा यह है कि वे लिंगियाडीह में कई दशकों से बसे हुए हैं। वर्ष 2019-20 में हुए सरकारी सर्वे में इन्हें राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत पट्टे के लिए पात्र माना गया था। शासन के वादे पर भरोसा करते हुए इन निवासियों ने 2022 में पट्टे के लिए तय प्रीमियम की राशि भी जमा कर दी।</p>
<p>लेकिन 2024 में नगर निगम ने अपना रंग बदल लिया। शासन ने उस जमीन पर पट्टा देने से इनकार कर दिया और निगम ने वहां की रिहायशी जमीन को खाली कराकर एक बड़ा व्यवसायिक परिसर (Commercial Complex) और गार्डन बनाने का प्रोजेक्ट तैयार कर लिया।</p>
<p>सुनवाई के दौरान जस्टिस एनके चंद्रवंशी ने सरकार और निगम की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल दागा- जब पूर्व में योजना के तहत निवासियों से जरूरी शुल्क वसूल लिया गया था, तो उन्हें पट्टा क्यों नहीं दिया गया?</p>
<p> <strong>बदले नियमों का हवाला: </strong>राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास और नगर निगम के अधिवक्ता रणवीर सिंह मरहास ने सफाई देते हुए कहा कि वर्ष 2023 में शासकीय जमीन पर पट्टा देने के नियमों में बदलाव हो चुका है। पुरानी योजना अब रद्द कर दी गई है।</p>
<p> <strong>फ्लैट का ऑफर: </strong>वकीलों ने तर्क दिया कि इन कब्जाधारियों को बेघर नहीं किया जा रहा है, बल्कि खमतराई इलाके में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फ्लैट देने का प्रस्ताव है। साथ ही आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता उस जमीन पर बाजार और दुकानें लगा रहे हैं।</p>
<p><strong>याचिकाकर्ताओं का पलटवार: मास्टर प्लान का खुला उल्लंघन</strong></p>
<p>याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव, अनिमेष वर्मा और आशीष बैक ने निगम की मंशा की पोल खोलते हुए कई अहम कानूनी बिंदु रखे:</p>
<p> <strong>अधिकार छिन नहीं सकते:</strong> जब 2022 में ही प्रीमियम लिया जा चुका था, तो 2023 के नए नियम पुराने अधिकारों को खत्म नहीं कर सकते। स्थापित कानून के तहत सरकार और नगर निगम अपने वादे से मुकर नहीं सकते।</p>
<p> <strong>मास्टर प्लान के विरुद्ध:</strong> सबसे बड़ा तकनीकी पेंच यह है कि मास्टर प्लान में वह पूरा क्षेत्र 'रिहायशी क्षेत्र' (Residential Area) घोषित है। वहां रिहायशी बस्ती उजाड़कर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाना गैरकानूनी है।</p>
<p> <strong>सुविधाजनक बेदखली</strong>: योजना के तहत कुल 503 लोग चयनित हुए थे, जिनमें से सिर्फ 113 को निशाना बनाकर बेदखल किया जा रहा है ताकि निगम अपना कमर्शियल प्रोजेक्ट खड़ा कर सके।</p>
<h4><strong>ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद होगा फैसला</strong></h4>
<p>हाई कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद यह माना कि मामला विस्तृत सुनवाई के योग्य है। अदालत ने राज्य सरकार और नगर निगम दोनों को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक किसी भी याचिकाकर्ता के मकान या कब्जे पर निगम का बुलडोजर नहीं चलेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कानून</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:04:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bilaspur High Court: यह बेंच हंटिंग का स्पष्ट मामला है, कतई बर्दाश्त नहीं... मस्तूरी गोलीकांड के आरोपियों की चालाकी पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की तल्ख टिप्पणी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बिलासपुर (NJV NEWS) न्याय के मंदिर में अपनी सुविधा के अनुसार जज चुनने या किसी विशेष बेंच की सुनवाई से बचने की कोशिश को कानूनी भाषा में 'बेंच हंटिंग' (Bench Hunting) या 'फोरम शॉपिंग' कहा जाता है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने इस तरह की चालाकी पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने बहुचर्चित 'मस्तूरी गोलीकांड' (Masturi Shootout) के मामले में एक सह-आरोपी की याचिका और उसके पीछे की मंशा को लेकर बेहद कड़ी टिप्पणी की है।</p>
<p>चीफ जस्टिस ने मामले में महाधिवक्ता कार्यालय के एक पूर्व विधि अधिकारी (अधिवक्ता) के कृत्य पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/bilaspur-high-court-this-is-a-clear-case-of-bench/article-9245"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/image_search_1776420104381.jpg" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर (NJV NEWS) न्याय के मंदिर में अपनी सुविधा के अनुसार जज चुनने या किसी विशेष बेंच की सुनवाई से बचने की कोशिश को कानूनी भाषा में 'बेंच हंटिंग' (Bench Hunting) या 'फोरम शॉपिंग' कहा जाता है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने इस तरह की चालाकी पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने बहुचर्चित 'मस्तूरी गोलीकांड' (Masturi Shootout) के मामले में एक सह-आरोपी की याचिका और उसके पीछे की मंशा को लेकर बेहद कड़ी टिप्पणी की है।</p>
<p>चीफ जस्टिस ने मामले में महाधिवक्ता कार्यालय के एक पूर्व विधि अधिकारी (अधिवक्ता) के कृत्य पर भी सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि तथ्यों को देखने से यह स्पष्ट होता है कि यह 'बेंच हंटिंग' का मामला है और न्यायपालिका इस तरह के निंदनीय कृत्य को न तो प्रोत्साहित कर सकती है और न ही इसकी सराहना की जा सकती है।</p>
<p> </p>
<h4><strong>हाईलाइट्स</strong></h4>
<p> </p>
<p><strong>बेंच हंटिंग का खुलासा:मस्तूरी गोलीकांड के आरोपियों ने जमानत पाने के लिए अपनाई गलत रणनीति।</strong></p>
<p> <strong>क्या थी चालाकी: जिस बेंच ने पहले एक आरोपी की याचिका खारिज की, उस बेंच से बचने के लिए जानबूझकर ऐसे वकील को खड़ा किया गया, जिनकी पैरवी से उक्त जज सुनवाई नहीं करते।</strong></p>
<p> </p>
<p><strong>चीफ जस्टिस की सख्ती: कोर्ट ने पूछा- 'जब मामला उसी बेंच में जाना था, तो वकील ने अपवाद जानते हुए भी केस क्यों लिया?' वकील नहीं दे सके उचित जवाब।</strong></p>
<p> </p>
<p><strong>निंदनीय आचरण: हाई कोर्ट ने सह-आरोपी के कृत्य को घोर निंदनीय करार देते हुए कहा- इसे किसी भी हालत में क्षमा नहीं किया जा सकता।</strong></p>
<p> </p>
<h4><strong>क्या है पूरा मामला? जानिए विस्तार से</strong></h4>
<p>मस्तूरी गोलीकांड के इस मामले की शुरुआत एक नाबालिग सह-आरोपी की याचिका से होती है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस किशोर आरोपी को 29 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। उस पर पुलिस थाना मस्तूरी, जिला बिलासपुर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109, 61(2), 3(5) और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 व 27 के तहत मामला दर्ज है। गिरफ्तारी के बाद से उसे बिलासपुर के बाल संप्रेक्षण गृह (अवलोकन गृह) में रखा गया था।</p>
<p>अपनी रिहाई के लिए इस किशोर ने किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 102 के तहत छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका (Criminal Revision Petition) दायर की थी। इससे पहले, 09 दिसंबर 2025 को प्रधान न्यायाधीश, किशोर न्याय बोर्ड, बिलासपुर ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसे बाद में 31 दिसंबर 2025 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (FTC), बाल न्यायालय, बिलासपुर ने भी बरकरार रखा था।</p>
<p> </p>
<h4><strong>समन्वय पीठ (Coordinate Bench) में चला मामला</strong></h4>
<p> </p>
<p>हाई कोर्ट में जब इस नाबालिग की पुनरीक्षण याचिका एक समन्वय पीठ (Coordinate Bench) के समक्ष आई, तो सुनवाई के बाद पीठ ने 03 फरवरी 2026 को इसे खारिज कर दिया।</p>
<p>चूंकि एक ही अपराध (मस्तूरी गोलीकांड) से जुड़े अन्य आरोपी भी जेल में थे, इसलिए उनकी जमानत याचिकाएं भी हाई कोर्ट पहुंचने लगीं:</p>
<p><strong> 1. अकबर खान की याचिका:</strong></p>
<p> सह-आरोपी अकबर खान ने BNSS, 2023 की धारा 483 के तहत जमानत याचिका दायर की। यह मामला 13 फरवरी 2026 को उसी पीठ के समक्ष आया। पीठ ने केस डायरी मंगवाई और अगली सुनवाई 23 फरवरी 2026 तय की।</p>
<p> </p>
<p> <strong>2. मोहम्मद मतीन की याचिका:2</strong>3 फरवरी 2026 को एक अन्य सह-आरोपी मोहम्मद मतीन की जमानत याचिका भी उसी बेंच के समक्ष सूचीबद्ध हुई। बेंच ने दोनों मामलों को एक साथ जोड़कर 03 मार्च 2026 को और फिर 17 मार्च 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।</p>
<p> </p>
<p><strong>यहीं से शुरू हुआ 'बेंच हंटिंग' का खेल</strong></p>
<p>जब सभी आरोपियों के मामले एक ही बेंच सुन रही थी, तो इसी बीच 12 मार्च 2026 को एक और सह-आरोपी मोहम्मद मुस्तकीन उर्फ नफीस की जमानत याचिका भी उसी पीठ के समक्ष आई। पीठ ने राज्य सरकार और आपत्तिकर्ता की दलीलें सुनीं और स्पष्ट किया कि नियमतः इस मामले को भी उसी बेंच के पास भेजा जाना चाहिए जिसने 03 फरवरी 2026 को पहला आदेश दिया था।</p>
<p> </p>
<p><strong>बेंच बदलने की साजिश:</strong></p>
<p>17 मार्च 2026 को एक ऐसा घटनाक्रम हुआ जिसने कोर्ट को हैरान कर दिया। जब अकबर खान और मोहम्मद मतीन की याचिकाओं के साथ-साथ एक नए सह-आरोपी देवेश सुमन उर्फ निक्कू की जमानत याचिका उसी समन्वय पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुई, तो पीठ को इन तीनों याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) करना पड़ा।</p>
<p>इसका कारण था देवेश सुमन उर्फ निक्कू का वकील। देवेश ने अपनी पैरवी के लिए अधिवक्ता रणबीर सिंह मरहास और उनके सहयोगियों का वकालतनामा दाखिल किया था। कानूनी प्रक्रिया के तहत, अधिवक्ता रणबीर सिंह मरहास इस विशेष पीठ के लिए 'अपवाद' (Exception) हैं, जिसका सीधा अर्थ है कि जिस मामले में वे वकील होंगे, वह बेंच उस मामले की सुनवाई नहीं कर सकती।</p>
<p> </p>
<h5><strong>चीफ जस्टिस के सामने खुली पोल </strong></h5>
<p> </p>
<p>12 मार्च के आदेश के बाद, जब 23 मार्च 2026 को रजिस्ट्रार (न्यायिक) ने उचित पीठ तय करने के लिए यह पूरा मामला प्रशासनिक पक्ष के रूप में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के समक्ष रखा, तो 'बेंच हंटिंग' की कलई खुल गई।</p>
<p>चीफ जस्टिस की अदालत में जब इन चारों मामलों को एक साथ रखा गया, तो यह स्पष्ट सवाल उठा कि जिस जज ने 3 फरवरी को मुख्य आदेश पारित किया था, उनके सामने से केस हटाने के लिए जानबूझकर यह स्थिति क्यों पैदा की गई?</p>
<p> </p>
<p><strong>हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी:</strong></p>
<p>चीफ जस्टिस ने अपने फैसले में स्पष्ट किया:उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि यह बेंच हंटिंग का स्पष्ट मामला है, जिसे इस न्यायालय द्वारा प्रोत्साहित या सराहा नहीं जा सकता है। इस संबंध में वकील रणबीर सिंह मरहास द्वारा पूछे गए स्पष्ट प्रश्न का वे उचित उत्तर नहीं दे सके। इसलिए, सह-आरोपी देवेश सुमन उर्फ निक्कू का आचरण अत्यंत निंदनीय है, जिसने उक्त मामले को उस बेंच से अलग करने के लिए यह तरकीब अपनाई, जिसने पहले किशोर की याचिका खारिज कर दी थी।कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसे कृत्य के लिए आरोपी कड़ी निंदा का पात्र है और उसे किसी भी हालत में क्षमा नहीं किया जा सकता।</p>
<p><strong>वकीलों को दिया यह विकल्प:</strong></p>
<p>न्यायालय ने प्रक्रिया को वापस पटरी पर लाने के लिए फैसला सुनाया कि अधिवक्ता रणबीर सिंह मरहास और अन्य वकील (जिनके कारण संबंधित पीठ मामले की सुनवाई नहीं कर पा रही है), यदि चाहें तो इस मामले से अपना वकालतनामा वापस ले सकते हैं। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर ये वकील अपना नाम वापस लेते हैं, तो सभी जमानत याचिकाएं वापस उसी पुरानी समन्वय पीठ के समक्ष ही सूचीबद्ध की जाएंगी, जो पहले से इस गोलीकांड की सुनवाई कर रही थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>कानून</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/bilaspur-high-court-this-is-a-clear-case-of-bench/article-9245</link>
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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:32:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NJV EXCLUSIVE: कुंभकर्णी नींद में आबकारी विभाग या कोचियों से है सेटिंग? बिलासपुर में आंगन में चल रही थी कच्ची शराब की 'फैक्ट्री', पुलिस ने किया भंडाफोड़</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बिलासपुर । न्यायधानी बिलासपुर में अवैध शराब का कारोबार किस कदर बेलगाम हो चुका है, इसकी ताजा बानगी चकरभाठा और तारबाहर थाना क्षेत्रों में देखने को मिली है। हैरान करने वाली बात यह है कि अवैध शराब पर लगाम कसने के लिए जिस आबकारी विभाग को भारी-भरकम फौज और संसाधन दिए गए हैं, वह गहरी नींद में सोया हुआ है। या यूं कहें कि आबकारी अमले की कोचियों और शराब माफियाओं के साथ गहरी 'सेटिंग' है। शहर के बीचों-बीच आंगन में कच्ची शराब की बाकायदा फैक्ट्री चल रही थी और आबकारी विभाग को भनक तक नहीं थी। आखिरकार, मुखबिर की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/njv-crime-exclusive-in-bilaspur-fearless-smugglers-made-the-courtyard/article-9234"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/img-20260417-wa0023.jpg" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर । न्यायधानी बिलासपुर में अवैध शराब का कारोबार किस कदर बेलगाम हो चुका है, इसकी ताजा बानगी चकरभाठा और तारबाहर थाना क्षेत्रों में देखने को मिली है। हैरान करने वाली बात यह है कि अवैध शराब पर लगाम कसने के लिए जिस आबकारी विभाग को भारी-भरकम फौज और संसाधन दिए गए हैं, वह गहरी नींद में सोया हुआ है। या यूं कहें कि आबकारी अमले की कोचियों और शराब माफियाओं के साथ गहरी 'सेटिंग' है। शहर के बीचों-बीच आंगन में कच्ची शराब की बाकायदा फैक्ट्री चल रही थी और आबकारी विभाग को भनक तक नहीं थी। आखिरकार, मुखबिर की सूचना पर पुलिस को वह काम करना पड़ा, जो मूल रूप से आबकारी विभाग का है।</p>
<p> </p>
<h4><strong>आबकारी को सिर्फ 'बार' और 'सिम्बा बियर' से मतलब?</strong></h4>
<p><br />बिलासपुर में यह चर्चा आम है कि आबकारी विभाग का पूरा फोकस सिर्फ बड़े बार कारोबारियों पर मेहरबानी दिखाने और 'सिम्बा बियर' जैसी प्रीमियम शराब की बिक्री की मॉनिटरिंग तक सिमट कर रह गया है। गली-मोहल्लों में पनप रहे शराब के अवैध अड्डों और कोचियों से शायद आबकारी अमले का 'मंथली फिक्स' है, तभी तो शहर के भीतर धड़ल्ले से शराब उतारी जा रही है और विभाग आंखें मूंदे बैठा है। पुलिस की इस कार्रवाई ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली की पूरी तरह से पोल खोलकर रख दी है।</p>
<h4><br /><strong>चकरभाठा में आंगन में चल रही थी 'फैक्ट्री'</strong></h4>
<p><br />सबसे बड़ी और चौंकाने वाली कार्रवाई चकरभाठा थाना क्षेत्र में हुई। पुलिस को पुख्ता सूचना मिली थी कि वर्मा मोहल्ले में बड़े पैमाने पर हाथ भट्टी से महुआ शराब बनाई जा रही है। जब पुलिस की टीम ने दबिश दी, तो वहां का नजारा देखकर खुद खाकी भी हैरान रह गई। आरोपी इतने बेखौफ थे कि उन्होंने अपने घर के खुले आंगन में ही कमर्शियल चूल्हा और गैस सिलेंडर लगाकर शराब उतारने की मिनी फैक्ट्री खोल रखी थी।<br />पुलिस ने मौके से तीन आरोपियों- रवि वर्मा, बंटी वर्मा और रानी वर्मा को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से 15-15 लीटर वाले 28 प्लास्टिक के डिब्बों में भरकर रखी गई कुल 425 लीटर कच्ची शराब जब्त की गई है। इसके साथ ही 4 एल्यूमीनियम डेचकी, 2 बड़े चूल्हे और 2 गैस सिलेंडर भी बरामद किए गए हैं। सोचिए, इतने बड़े पैमाने पर शराब बन रही थी, महक पूरे मोहल्ले में फैल रही होगी, लेकिन आबकारी विभाग के उड़नदस्ते को इसकी कोई खबर नहीं थी!</p>
<p> </p>
<h4><strong>तारबाहर: स्कूटी से हो रही थी होम डिलीवरी</strong></h4>
<p><br />शराब सिंडिकेट का नेटवर्क सिर्फ बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी बेखौफ सप्लाई भी जारी है। तारबाहर थाना पुलिस ने सीएमडी चौक के पास चर्च के सामने घेराबंदी कर एक महिला तस्कर को गिरफ्तार किया। आरोपी महिला पूनम सिंह परस्ते अपनी स्कूटी (CG 10 BY 4473) में एक थैले के अंदर 50 नग देशी प्लेन मदिरा छिपाकर सप्लाई करने जा रही थी। पुलिस ने शराब और स्कूटी दोनों को जब्त कर लिया है।</p>
<h4><strong>उठ रहे हैं गंभीर सवाल</strong></h4>
<p><br />बिलासपुर पुलिस ने दो थानों में कार्रवाई करते हुए कुल 434 लीटर शराब के साथ 4 आरोपियों (जिनमें 1 महिला भी शामिल है) को सलाखों के पीछे भेज दिया है। लेकिन इस पूरी घटना ने आबकारी विभाग की कार्यशैली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।<br />क्या आबकारी विभाग का काम सिर्फ राजस्व के नाम पर बड़े ठेकों और बार से वसूली करना रह गया है? जब गली-कूचों में कच्ची शराब की भट्ठियां सुलग रही हैं और महिला तस्कर स्कूटी से डिलीवरी कर रही हैं, तो आबकारी के इंस्पेक्टर और उड़नदस्ता दल किस वीआईपी ड्यूटी या 'कलेक्शन' में व्यस्त हैं? </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म कला संस्कृति</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 09:25:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिलासपुर में खाकी से पंगा: मस्तूरी गोलीकांड के फरार आरोपी को पकड़ने गई पुलिस से झूमाझपटी; बेटे-भतीजे ने घंटों नहीं खोला दरवाजा, अब खायेंगे जेल की हवा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>NJV डेस्क / बिलासपुर.</p>
<p>मस्तूरी गोलीकांड के फरार आरोपी की तलाश में बिलासपुर के लालखदान इलाके में दबिश देने गई पुलिस टीम के साथ बदसलूकी और झूमाझपटी का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस की कार्रवाई में बाधा डालने और वर्दीधारियों से उलझने के आरोप में फरार आरोपी नागेंद्र राय के बेटे और भतीजे को पुलिस ने गिरफ्तार कर सीधा जेल भेज दिया है। </p>
<h5><strong>क्या है पूरा मामला?</strong></h5>
<p>जानकारी के मुताबिक, मस्तूरी इलाके में हुए चर्चित गोलीकांड के फरार आरोपी नागेंद्र राय की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। इसी कड़ी में तोरवा पुलिस की टीम आरोपी की तलाश</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/masturi-in-bilaspur-who-went-to-catch-the-absconding-accused/article-9232"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/img-20260417-wa0027.jpg" alt=""></a><br /><p>NJV डेस्क / बिलासपुर.</p>
<p>मस्तूरी गोलीकांड के फरार आरोपी की तलाश में बिलासपुर के लालखदान इलाके में दबिश देने गई पुलिस टीम के साथ बदसलूकी और झूमाझपटी का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस की कार्रवाई में बाधा डालने और वर्दीधारियों से उलझने के आरोप में फरार आरोपी नागेंद्र राय के बेटे और भतीजे को पुलिस ने गिरफ्तार कर सीधा जेल भेज दिया है। </p>
<h5><strong>क्या है पूरा मामला?</strong></h5>
<p>जानकारी के मुताबिक, मस्तूरी इलाके में हुए चर्चित गोलीकांड के फरार आरोपी नागेंद्र राय की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। इसी कड़ी में तोरवा पुलिस की टीम आरोपी की तलाश में लालखदान स्थित उसके निवास पर पहुंची थी। पुलिस टीम ने जब घर का दरवाजा खुलवाकर तलाशी लेनी चाही, तो अंदर मौजूद परिजनों ने पुलिस का सहयोग करने से साफ इंकार कर दिया।</p>
<p>परिजनों ने पुलिस को चकमा देने के लिए घंटों तक घर का दरवाजा ही नहीं खोला।</p>
<h5><strong>दरवाजा खुलते ही पुलिस पर भड़के बेटे-भतीजे</strong></h5>
<p>काफी देर बाद जब घर का दरवाजा खुला, तो अंदर मौजूद आरोपी का बेटा **उदयाचल राय (33 वर्ष)** और भतीजा **सुब्रत राय (27 वर्ष)** उल्टे पुलिस बल पर ही भड़क गए। घर की तलाशी के दौरान दोनों युवकों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ जमकर गाली-गलौज और झूमाझपटी शुरू कर दी। आरोपियों ने पुलिस टीम को उनका शासकीय काम करने से बलपूर्वक रोकने की कोशिश की।</p>
<h5><strong>तोरवा पुलिस का एक्शन: दोनों भेजे गए जेल</strong></h5>
<p>खाकी से इस तरह पंगा लेना और कानून को हाथ में लेना दोनों युवकों को भारी पड़ गया। पुलिस टीम से बदसलूकी के बाद तोरवा पुलिस ने तत्काल एक्शन लेते हुए उदयाचल और सुब्रत को हिरासत में ले लिया।</p>
<p> <strong>धाराएं</strong>: दोनों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने (Obstructing official duty) का मामला दर्ज किया गया है।</p>
<p>बुधवार को पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से कोर्ट के आदेश पर उन्हें रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।</p>
<p>फिलहाल पुलिस मुख्य आरोपी नागेंद्र राय की गिरफ्तारी के लिए अपने सूचना तंत्र को और सक्रिय कर चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 08:43:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिलासपुर शिक्षा विभाग में 29 लाख का गबन: एक क्लर्क गिरफ्तार, लेकिन तत्कालीन BEO और वर्तमान DEO पर मेहरबानी क्यों? पढ़ें इनसाइड स्टोरी.....</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बिलासपुर NJV डेस्क।छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के शिक्षा विभाग में हुए 29.62 लाख रुपये के बहुचर्चित गबन मामले में आखिरकार पुलिसिया कार्रवाई का डंडा चला है। कोटा थाना पुलिस ने मामले में त्वरित एक्शन लेते हुए एक आरोपी को धर दबोचा है। यह पूरा खेल सरकारी खजाने में सेंधमारी और वित्तीय अनियमितताओं का है। इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश कांग्रेस द्वारा मुख्य सचिव, कलेक्टर और एसपी से की गई उच्च स्तरीय शिकायत के बाद हुआ है। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद भी 'बड़ी मछलियों' को बचाने के आरोप लग रहे हैं और महकमे के बड़े अधिकारियों की भूमिका सवालों के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/a-clerk-arrested-for-embezzlement-of-rs-29-lakh-in/article-9231"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/file_000000009204720895195633a2df288f.png" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर NJV डेस्क।छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के शिक्षा विभाग में हुए 29.62 लाख रुपये के बहुचर्चित गबन मामले में आखिरकार पुलिसिया कार्रवाई का डंडा चला है। कोटा थाना पुलिस ने मामले में त्वरित एक्शन लेते हुए एक आरोपी को धर दबोचा है। यह पूरा खेल सरकारी खजाने में सेंधमारी और वित्तीय अनियमितताओं का है। इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश कांग्रेस द्वारा मुख्य सचिव, कलेक्टर और एसपी से की गई उच्च स्तरीय शिकायत के बाद हुआ है। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद भी 'बड़ी मछलियों' को बचाने के आरोप लग रहे हैं और महकमे के बड़े अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है।</p>
<p><strong style="font-family:Mukta, sans;font-size:1.25rem;">क्या है पूरा मामला और पुलिस का एक्शन?</strong></p>
<p>कोटा विकासखंड में शासकीय राशि के गबन को लेकर प्रार्थी नरेंद्र प्रसाद मिश्रा की रिपोर्ट पर कोटा थाने में अपराध क्रमांक 171/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सख्त धाराओं— 316(5), 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 3(5) के तहत मामला पंजीबद्ध किया है। जांच में सामने आया कि सितंबर 2024 से नवंबर 2025 के बीच सरकारी कर्मचारियों ने वेतन और अन्य भत्तों के दस्तावेजों में कूट रचना कर 29 लाख 62 हजार 222 रुपये डकार लिए।</p>
<p>इस मामले में पुलिस ने आरोपी देवेंद्र कुमार पालके (38 वर्ष, निवासी धरमपुरा, करगी रोड कोटा) को गिरफ्तार कर ज्यूडिशियल रिमांड पर भेज दिया है। वहीं, मामले का दूसरा अहम किरदार नवल सिंह पैकरा (लेखपाल/सहायक ग्रेड-02) फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जिसकी सरगर्मी से तलाश की जा रही है।</p>
<p> </p>
<h5><strong>असली 'मगरमच्छ' पर मेहरबानी क्यों? DEO पर उठे सवाल</strong></h5>
<p> </p>
<p>गिरफ्तारी तो हो गई, लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होते हैं। शिकायत में सबसे गंभीर आरोप तत्कालीन कोटा BEO (विकासखंड शिक्षा अधिकारी) और वर्तमान बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय टांडे पर लगाए गए हैं। गबन का यह पूरा खेल उसी दौर में खेला गया जब विजय टांडे कोटा में पदस्थ थे।</p>
<p>सवाल यह उठ रहा है कि जिसके कार्यकाल में 30 लाख रुपये के करीब सरकारी खजाने से पार हो गए, उस अधिकारी पर गाज गिरने की बजाय उसे प्रमोशन देकर पूरे जिले की शिक्षा व्यवस्था का मुखिया (DEO) कैसे बना दिया गया? टांडे पर कार्रवाई न होना, इस पूरे मामले की पुलिसिया जांच और प्रशासनिक निष्पक्षता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहा है।</p>
<p> </p>
<h5><strong>फर्जी अनुकंपा नियुक्ति: पुख्ता सबूत हैं, पर साहब मौन हैं</strong></h5>
<p> </p>
<p>गबन के अलावा, शिक्षा विभाग में तीन फर्जी अनुकंपा नियुक्तियों का जिन्न भी बाहर आ चुका है। इस गड़बड़झाले में भी DEO विजय टांडे और उनके करीबी बाबू सुनील यादव की भूमिका सीधे तौर पर सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि फर्जी नियुक्तियों के पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं, इसके बावजूद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। आशंका जताई जा रही है कि रसूखदारों को बचाने के लिए जांच का दायरा केवल छोटे कर्मचारियों (क्लर्क और एकाउंटेंट) तक सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
<p> </p>
<h5><strong>सत्ताधीशों का संरक्षण, हमारी लड़ाई जारी रहेगी</strong></h5>
<p> </p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का कहना है कि सिस्टम में बैठे भ्रष्टाचारियों को खुला राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। "DEO विजय टांडे पर दर्जनों गंभीर आरोप हैं, कई मामलों में उनके द्वारा की गई गड़बड़ियों की पुष्टि भी हो चुकी है, फिर भी उन पर मेहरबानी समझ से परे है। पुलिस की यह कार्रवाई तो महज़ एक शुरुआत है। जब तक इस महाघोटाले के असली 'सरगनाओं' और जिम्मेदार उच्च अधिकारियों पर निष्पक्ष, पारदर्शी और कठोर कार्रवाई नहीं होती, तब तक हमारी यह लड़ाई लगातार जारी रहेगी।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/a-clerk-arrested-for-embezzlement-of-rs-29-lakh-in/article-9231</link>
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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 07:16:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CG में नकली सिगरेट के बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश: बिलासपुर और रायगढ़ में ITC और पुलिस की संयुक्त रेड, 'गोल्ड फ्लैक' के नाम पर चल रहा था लाखों का अवैध खेल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में ब्रांडेड सिगरेट के नाम पर चल रहे एक बड़े और संगठित काले कारोबार का भंडाफोड़ हुआ है। जानी-मानी एफएमसीजी कंपनी आईटीसी (ITC) की विजिलेंस टीम और स्थानीय पुलिस ने बिलासपुर और रायगढ़ जिलों में संयुक्त रूप से एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए भारी मात्रा में नकली सिगरेट का जखीरा बरामद किया है। 'गोल्ड फ्लैक' (Gold Flake) जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड के नाम पर उपभोक्ताओं की सेहत और कंपनी की साख के साथ खिलवाड़ करने वाले इस सिंडिकेट के तार प्रदेश के कई अन्य जिलों से भी जुड़े होने की प्रबल आशंका है। इस सर्जिकल स्ट्राइक से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/big-syndicate-of-fake-cigarettes-busted-in-cg-in-bilaspur/article-9221"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/img-20260416-wa0041.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में ब्रांडेड सिगरेट के नाम पर चल रहे एक बड़े और संगठित काले कारोबार का भंडाफोड़ हुआ है। जानी-मानी एफएमसीजी कंपनी आईटीसी (ITC) की विजिलेंस टीम और स्थानीय पुलिस ने बिलासपुर और रायगढ़ जिलों में संयुक्त रूप से एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए भारी मात्रा में नकली सिगरेट का जखीरा बरामद किया है। 'गोल्ड फ्लैक' (Gold Flake) जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड के नाम पर उपभोक्ताओं की सेहत और कंपनी की साख के साथ खिलवाड़ करने वाले इस सिंडिकेट के तार प्रदेश के कई अन्य जिलों से भी जुड़े होने की प्रबल आशंका है। इस सर्जिकल स्ट्राइक से अवैध कारोबारियों और तस्करों में भारी हड़कंप मच गया है।</p>
<p> </p>
<p><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-04/img-20260416-wa0041.jpg" alt="IMG-20260416-WA0041" width="1600" height="1600"></img></p>
<h5><strong>बिलासपुर: निगम कॉलोनी के किराए के मकान में चल रहा था 'काला खेल</strong></h5>
<p><br />बिलासपुर जिले के पॉश इलाके सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत महाराणा प्रताप चौक स्थित नगर निगम कॉलोनी में यह अवैध कारोबार धड़ल्ले से संचालित हो रहा था। आईटीसी कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि राजा साहू को लगातार गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं कि शहर में भारी मात्रा में ट्रेडमार्क का उल्लंघन करते हुए नकली सिगरेट मार्केट में खपाई जा रही है। </p>
<p>इस पुख्ता इनपुट के आधार पर सिविल लाइन पुलिस और आईटीसी की विशेष टीम ने निगम कॉलोनी के एक किराए के मकान में अचानक दबिश दी। पुलिस ने जब वहां रखा माल देखा, तो उनके होश उड़ गए। वहां से 4 लाख 76 हजार रुपये की कीमत का नकली सिगरेट का बड़ा स्टॉक—जिसमें कई कार्टन और आउटर बॉक्स शामिल थे—जब्त किया गया। मौके से एक आरोपी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है, जिससे इस नेटवर्क के सरगनाओं को लेकर कड़ी पूछताछ की जा रही है।</p>
<h5><br /><strong>पैकेजिंग ऐसी कि असली-नकली का फर्क भूल जाएं ग्राहक</strong></h5>
<p>टीम ने मौके से जब्त ‘Gold Flake Premium’ और ‘Gold Flake Honey Dew’ ब्रांड के नाम पर बेचे जा रहे पैकेटों की बारीकी से जांच की। प्रथम दृष्टया ही यह स्पष्ट हो गया कि पैकेट पर छपा लोगो गलत है, फॉन्ट और रंगों की गुणवत्ता असली उत्पाद से बिल्कुल अलग और बेहद निम्न स्तर की है। ब्रांडिंग में की गई इस भारी गड़बड़ी ने यह पुख्ता कर दिया कि सारा माल 100% नकली है।</p>
<h5><strong>रायगढ़ में भी खुला राज: 'महादेव पान मसाला' पर दबिश</strong></h5>
<p>बिलासपुर की कार्रवाई की आंच अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि रायगढ़ जिले से भी ऐसा ही एक बड़ा मामला सामने आ गया। यहां के चक्रधर नगर क्षेत्र स्थित 'महादेव पान मसाला' नामक दुकान में आईटीसी के अधिकृत प्रतिनिधि सदानंद मिश्रा ने खुद पहुंचकर सिगरेट के नमूने खरीदे। जांच में यहां भी 'Gold Flake' के नाम पर नकली सिगरेट बेचे जाने की पुष्टि हुई। </p>
<p>हद तो तब हो गई जब दुकान में उपभोक्ताओं को भ्रमित करने के लिए असली ब्रांड से मिलते-जुलते नामों वाले ‘Gold Vimal’ और ‘White Flash’ जैसे नामों से भी सिगरेट खपाते हुए पाई गई। पुलिस ने तत्काल प्रभाव से दुकान संचालक लक्ष्मण दास जयसिंह और संबंधित कथित निर्माता कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।</p>
<h5><strong>करोड़ों का सिंडिकेट और सख्त कानूनी फंदा</strong></h5>
<p><br />इन दोनों बड़ी कार्रवाइयों से यह बात तो शीशे की तरह साफ हो गई है कि प्रदेश में एक बेहद संगठित गिरोह सक्रिय है, जो नकली सिगरेट के निर्माण, भंडारण और सप्लाई चेन को कंट्रोल कर रहा है। यह पूरा मामला करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी और अवैध कमाई से जुड़ा है, जो न केवल सरकारी खजाने को चूना लगा रहा है, बल्कि पहले से ही हानिकारक उत्पाद में घटिया सामग्री मिलाकर लोगों की जान से भी खेल रहा है।</p>
<p>पुलिस ने इन दोनों मामलों में बेहद सख्ती दिखाते हुए कॉपीराइट एक्ट 1957 की धारा 63, 64और ट्रेडमार्क एक्ट 1999 की धारा 104 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS)<br /> की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है।</p>
<p>पुलिस की जांच अब केवल इन खुदरा विक्रेताओं या गोदाम संचालकों तक सीमित नहीं रहने वाली है। असली निशाना इस नकली सिगरेट की 'सप्लाई चेन', 'मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स' और 'डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क' को पूरी तरह से ध्वस्त करना है। आने वाले दिनों में इस पूरे मामले में कई और बड़े सफेदपोश चेहरों के बेनकाब होने की संभावना है। फिलहाल पुलिस की तफ्तीश तेजी से आगे बढ़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 13:43:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डॉल्फिन स्कूल पार्ट 2 बनने की राह पर नारायणा ई-टेक्नो स्कूल: बिना लोकल गारंटर राज्य से पलायन की बड़ी साजिश!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बिलासपुर । छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर सहित प्रदेश के कई अन्य शहरों में संचालित 'नारायणा ई-टेक्नो स्कूल' (Narayana e-Techno School) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक खुलासा सामने आया है। हाल ही में सीबीएसई की फर्जी मान्यता का झांसा देकर बच्चों को राज्य बोर्ड (CG Board) की परीक्षा दिलाने के विवाद में घिरे इस स्कूल पर अब एक और बड़े घोटाले के बादल मंडरा रहे हैं। अभिभावकों और शिक्षा जगत में अब यह सुगबुगाहट तेज हो गई है कि क्या नारायणा स्कूल भी बहुचर्चित डॉल्फिन स्कूल पार्ट 2 बनने की राह पर है? बिना किसी ठोस स्थानीय आधार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/narayana-e-techno-school-on-the-way-to-become-dolphin-school/article-9198"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/image_search_1776244463591.jpg" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर । छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर सहित प्रदेश के कई अन्य शहरों में संचालित 'नारायणा ई-टेक्नो स्कूल' (Narayana e-Techno School) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक खुलासा सामने आया है। हाल ही में सीबीएसई की फर्जी मान्यता का झांसा देकर बच्चों को राज्य बोर्ड (CG Board) की परीक्षा दिलाने के विवाद में घिरे इस स्कूल पर अब एक और बड़े घोटाले के बादल मंडरा रहे हैं। अभिभावकों और शिक्षा जगत में अब यह सुगबुगाहट तेज हो गई है कि क्या नारायणा स्कूल भी बहुचर्चित डॉल्फिन स्कूल पार्ट 2 बनने की राह पर है? बिना किसी ठोस स्थानीय आधार और लोकल गारंटर के, स्कूल की यह कार्यप्रणाली किसी बड़े वित्तीय फ्रॉड और अचानक राज्य से पलायन की गहरी साजिश की ओर इशारा कर रही है।</p>
<p> </p>
<h5><strong>महज लीज के भवन पर करोड़ों का कारोबार</strong></h5>
<p> </p>
<p>NJV की पड़ताल और ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, इस बड़े ब्रांड वाले स्कूल का न तो अपना कोई स्थायी भवन है और न ही शहर में कोई ठोस संपत्ति या इंफ्रास्ट्रक्चर। स्कूल का पूरा संचालन महज एक लीज (किराए) के भवन से किया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि यदि कल को कोई बड़ा विवाद होता है या स्कूल प्रबंधन रातों-रात ताला लगाकर गायब हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? छत्तीसगढ़ के लोग डॉल्फिन स्कूल प्रकरण को अभी भूले नहीं हैं, जहां अभिभावकों की गाढ़ी कमाई और बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया था और प्रबंधन रातों-रात सब कुछ समेट कर रफूचक्कर हो गया था।</p>
<p> </p>
<h5><strong>स्थानीय बैंक खाता गायब, सीधे नेल्लोर और मुंबई पहुंच रही रकम</strong></h5>
<p> </p>
<p>इस पूरे मामले में सबसे बड़ी खतरे की घंटी स्कूल के वित्तीय लेनदेन और फीस ढांचे को लेकर बज रही है। यह बेहद हैरान करने वाला तथ्य है कि बिलासपुर जैसे शहर में हजारों छात्रों से करोड़ों रुपये की मोटी फीस वसूलने वाले इस स्कूल का स्थानीय स्तर पर कोई स्वतंत्र या मुख्य बैंक खाता (Independent Local Bank Account) संचालित नहीं है। अभिभावकों द्वारा अपनी खून-पसीने की कमाई से जमा की गई फीस का एक-एक रुपया स्थानीय स्तर पर रुकने के बजाय सीधे नेल्लोर (आंध्र प्रदेश) या मुंबई स्थित केंद्रीय बैंक खातों में ट्रांसफर हो रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि स्कूल का सारा पैसा सुरक्षित तरीके से प्रदेश के बाहर भेजा जा रहा है।</p>
<h5><strong>लोकल गारंटर का अभाव: भाग गए तो कौन करेगा भरपाई?</strong></h5>
<p>नियमों और व्यावसायिक नैतिकता के तहत बाहरी शिक्षण संस्थाओं को राज्य में काम करने के लिए एक जवाबदेह स्थानीय प्रतिनिधि, ट्रस्टी या मजबूत गारंटर की आवश्यकता होती है। लेकिन नारायणा स्कूल के मामले में स्थानीय स्तर पर किसी भी जिम्मेदार प्रतिनिधि या 'लोकल गारंटर' का अभाव है। यदि भविष्य में कोई विपरीत परिस्थिति बनती है और स्कूल प्रबंधन राज्य छोड़कर भागने का फैसला करता है, तो अभिभावकों के करोड़ों रुपयों के भारी नुकसान की भरपाई करने वाला यहां कोई नहीं होगा। स्थानीय प्रशासन के पास भी ऐसी कोई कानूनी सिक्योरिटी (Security Deposit) नहीं है, जिससे पैरेंट्स का पैसा सुरक्षित वापस कराया जा सके।</p>
<p> </p>
<h5><strong>शिक्षा विभाग और प्रशासन की चुप्पी पर उठते सवाल</strong></h5>
<p>हाल ही में जब बिलासपुर में स्कूल की मान्यता का फर्जीवाड़ा सामने आया था, तब आक्रोशित परिजनों ने कलेक्टर बंगले तक पहुंचकर भारी हंगामा किया था। लेकिन प्रशासन ने केवल जांच टीम बनाने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। अब पलायन और वित्तीय अनियमितता की इस बड़ी आशंका ने अभिभावकों की नींद उड़ा दी है। शिक्षा विभाग की नाक के नीचे चल रहे इस खतरनाक खेल पर अधिकारियों की खामोशी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।समय रहते यदि जिला प्रशासन, राज्य सरकार और शिक्षा महकमा नहीं जागा, तो बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के हजारों अभिभावकों का पैसा और मासूम बच्चों का भविष्य पूरी तरह से अंधकार में डूब जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 14:44:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अपनों की ही बगावत से घिरीं मेयर पूजा विधानी, सत्ता के अहंकार में बोलीं- 'आपको मेयर निधि का हिसाब मांगने का अधिकार नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p>NJV डेस्क, बिलासपुर। बिलासपुर नगर निगम की सामान्य सभा शहर के विकास पर चर्चा का मंच बनने के बजाय मेयर पूजा विधानी की चौतरफा फजीहत का गवाह बन गई। शहर को मूलभूत सुविधाएं देने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो चुकीं मेयर साहिबा अब सत्ता के अहंकार में इस कदर डूब चुकी हैं कि उन्हें जनप्रतिनिधियों के सवाल भी चुभने लगे हैं। सदन में हालत यह थी कि कांग्रेस तो दूर, खुद उनकी अपनी ही पार्टी (भाजपा) के पार्षदों ने मेयर के खिलाफ ऐसा मोर्चा खोला कि वे पूरे समय बगलें झांकती नजर आईं।</p>
<p>  </p>
<p>सफाई, पेयजल और अतिक्रमण के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/mayor-pooja-vidhani-surrounded-by-the-rebellion-of-her-own/article-9166"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/image_search_1776137768760.jpg" alt=""></a><br /><p>NJV डेस्क, बिलासपुर। बिलासपुर नगर निगम की सामान्य सभा शहर के विकास पर चर्चा का मंच बनने के बजाय मेयर पूजा विधानी की चौतरफा फजीहत का गवाह बन गई। शहर को मूलभूत सुविधाएं देने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो चुकीं मेयर साहिबा अब सत्ता के अहंकार में इस कदर डूब चुकी हैं कि उन्हें जनप्रतिनिधियों के सवाल भी चुभने लगे हैं। सदन में हालत यह थी कि कांग्रेस तो दूर, खुद उनकी अपनी ही पार्टी (भाजपा) के पार्षदों ने मेयर के खिलाफ ऐसा मोर्चा खोला कि वे पूरे समय बगलें झांकती नजर आईं।</p>
<p> </p>
<p>सफाई, पेयजल और अतिक्रमण के मुद्दों पर घिरीं मेयर के पास किसी भी सवाल का ठोस जवाब नहीं था। उनकी प्रशासनिक पकड़ और नेतृत्व क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सदन के सभापति विनोद सोनी को भरे मंच से यह स्वीकार करना पड़ा कि "अधिकारी उनकी भी नहीं सुनते।" जब निगम में अफसरों पर ही बेलगाम हो चुके हैं, तो समझा जा सकता है कि मेयर शहर को किस गर्त में धकेल रही हैं।</p>
<p> </p>
<h5><strong>तानाशाही और पारदर्शिता का अभाव: आपको हिसाब मांगने का अधिकार नहीं</strong></h5>
<p> </p>
<p>मेयर की कार्यप्रणाली में तानाशाही किस कदर हावी है, यह प्रश्नकाल के दौरान खुलकर सामने आ गया। जब कांग्रेस पार्षद इब्राहिम खान ने मेयर निधि के खर्च का हिसाब मांगा, तो बजाय पारदर्शिता दिखाने के मेयर पूजा विधानी ने बेहद अहंकार भरे लहजे में कह दिया कि "यह आपके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।" एक चुने हुए जनप्रतिनिधि को जनता के पैसे का हिसाब पूछने का अधिकार नहीं है, यह बयान मेयर की अलोकतांत्रिक सोच को दर्शाता है। आरोप यह भी लगे कि मेयर निधि का पैसा सिर्फ चहेते भाजपा वार्डों में खपाया जा रहा है। जब छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो मेयर हिसाब देने से क्यों कतरा रही हैं?</p>
<p> </p>
<h5><strong>जनता पी रही गंदा पानी, मेयर का बेतुका तर्क- 'पानी मटमैला है, बदबूदार नहीं'</strong></h5>
<p> </p>
<p> </p>
<p>अमृत मिशन योजना बिलासपुर में भ्रष्टाचार और बदइंतजामी की भेंट चढ़ चुकी है। सड़कें खुदी पड़ी हैं, पाइपलाइनें टूट रही हैं और जनता के घरों में नालियों का गंदा पानी पहुंच रहा है। कांग्रेस पार्षद दिलीप पाटिल और भाजपा पार्षद आंचल दुबे ने जब लीकेज और गंदे पानी पर अपनी ही शहर सरकार को घेरा, तो मेयर का जवाब उनकी संवेदनहीनता की पराकाष्ठा था। उन्होंने कहा, "पानी मटमैला है, बदबूदार नहीं।" क्या शहर की प्रथम नागरिक बिलासपुर की जनता को मटमैला पानी पीने के लिए मजबूर कर रही हैं? क्लोरीन न डालने के आरोपों पर भी मेयर के पास कोई जवाब नहीं था। इब्राहिम खान ने पेयजल सुधार के लिए दिए गए 10 लाख रुपयों के गायब होने का भी मुद्दा उठाया, जिसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।</p>
<p><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-04/image_search_1776137780003.jpg" alt="image_search_1776137780003" width="1024" height="589"></img></p>
<p> </p>
<h5><strong>अपनों का तंज- बरसात से पहले नाव दे दीजिए</strong></h5>
<p> </p>
<p>मेयर की सबसे ज्यादा किरकिरी उनकी अपनी ही पार्टी के पार्षदों ने की। वार्ड 52 में जलभराव की बदतर स्थिति पर भाजपा पार्षद जय वाधवानी ने निगम की कार्यप्रणाली पर गहरा तंज कसते हुए कहा कि "बरसात से पहले नाव की व्यवस्था कर दीजिए, ताकि लोग आ-जा सकें।" यह बयान बताने के लिए काफी है कि मेयर ने शहर के ड्रेनेज सिस्टम का क्या हाल कर दिया है।</p>
<p> </p>
<h5><strong>तानाशाही के खिलाफ 'मास्क' प्रोटेस्ट</strong></h5>
<p> </p>
<p>मेयर अपने ही पार्षदों की आवाज दबाने का काम कर रही हैं। भाजपा पार्षद रंगा नादम का सदन में मास्क पहनकर आना इसी तानाशाही के खिलाफ एक मौन विरोध था। दो दिन पहले ही मेयर के साथ उनकी बहस हुई थी। नादम का यह मास्क पहनना इस बात का प्रतीक बन गया कि मेयर के राज में सच बोलने वालों का मुंह बंद कर दिया जाता है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<h5><strong>अफसरों को खुली चुनौती इधर महिला पार्षद का अपमान</strong></h5>
<p> </p>
<p>शहर में गंदगी और प्रदूषण का आलम यह है कि भाजपा पार्षद रमेश पटेल को अफसरों को खुली चुनौती देनी पड़ी। उन्होंने साफ कहा कि अफसर एसी कमरे छोड़कर आधे घंटे छपरभाठा में बिता लें, तो अगले दिन सीधे अपोलो अस्पताल में भर्ती नजर आएंगे।</p>
<p>मेयर के राज में निगम की महिला पार्षदों का भी सम्मान सुरक्षित नहीं है। जब पार्षद रीता शंकर कश्यप ने सफाई कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उठाया, तो अपनी नाकामी छिपाने के लिए एमआईसी मेंबर श्याम साहू ने उन पर व्यक्तिगत और अमर्यादित टिप्पणी कर दी कि "वार्ड में आपके पति नजर आते हैं, आप नहीं।" इस पर कश्यप को याद दिलाना पड़ा कि वे महिला हैं, कमजोर नहीं।</p>
<p> </p>
<h5><strong>गरीबों पर ही चलता है अतिक्रमण का डंडा</strong></h5>
<p> </p>
<p>शहर में धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर मेयर का दोहरा रवैया भी बेनकाब हुआ। जब कांग्रेस पार्षद शहजादी कुरैशी ने रसूखदारों के बड़े अवैध निर्माणों को छोड़कर सिर्फ गरीबों के ठेले-गुमटियों पर कार्रवाई करने का आरोप लगाया, तो मेयर खीझ गईं। गायत्री लक्ष्मीनाथ साहू ने भी अवैध प्लाटिंग में</p>
<p>निगम की मिलीभगत की पोल खोल दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/mayor-pooja-vidhani-surrounded-by-the-rebellion-of-her-own/article-9166</link>
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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 09:07:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NJV Exclusive: बिलासपुर में कोल माफियाओं का सिंडिकेट, ACB के 'हवलदार' की धौंस पर खनिज विभाग ने नियमों को ताक पर रख दिया अवैध एक्सटेंशन</title>
                                    <description><![CDATA[<h4>    <span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>Highlights....</strong></span></h4>
<p>  </p>
<p><strong>बिलासपुरके 5 बड़े कोल डिपो का लाइसेंस फरवरी 2026 में हो चुका है समाप्त।</strong></p>
<p><strong>  उच्च स्तरीय अनुमति के बजाय स्थानीय खनिज विभाग ने ही दे दिया 5 माह का गैरकानूनी एक्सटेंशन।</strong></p>
<p>  <strong>MT वर्कशॉप से ACB में पहुंचे एक हवलदार के दबाव में खेला जा रहा है पूरा खेल।</strong></p>
<p>  <strong>छत्तीसगढ़ के 'एयर डिस्टेंस' नियमों की खुलेआम उड़ रही धज्जियां, कोयला चोरी का खेल जारी।</strong></p>
<p>  </p>
<p>बिलासपुर (NJV): न्यायधानी बिलासपुर में कोल माफियाओं और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के कई कोल डिपो बिना वैध लाइसेंस और पर्यावरणीय नियमों को ताक पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/njv-exclusive-coal-mafia-syndicate-in-bilaspur-on-bullying-of/article-9165"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/20260414_084457.jpg" alt=""></a><br /><h4>  <span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>Highlights....</strong></span></h4>
<p> </p>
<p><strong>बिलासपुरके 5 बड़े कोल डिपो का लाइसेंस फरवरी 2026 में हो चुका है समाप्त।</strong></p>
<p><strong> उच्च स्तरीय अनुमति के बजाय स्थानीय खनिज विभाग ने ही दे दिया 5 माह का गैरकानूनी एक्सटेंशन।</strong></p>
<p> <strong>MT वर्कशॉप से ACB में पहुंचे एक हवलदार के दबाव में खेला जा रहा है पूरा खेल।</strong></p>
<p> <strong>छत्तीसगढ़ के 'एयर डिस्टेंस' नियमों की खुलेआम उड़ रही धज्जियां, कोयला चोरी का खेल जारी।</strong></p>
<p> </p>
<p>बिलासपुर (NJV): न्यायधानी बिलासपुर में कोल माफियाओं और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के कई कोल डिपो बिना वैध लाइसेंस और पर्यावरणीय नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन कोल डिपो का लाइसेंस फरवरी 2026 में ही समाप्त हो चुका है, उन्हें बंद कराने के बजाय खनिज विभाग (Mining Department) ने मेहरबानी दिखाते हुए 5 महीने का अवैध एक्सटेंशन दे दिया है। आरोप है कि यह पूरा खेल एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में पदस्थ एक हवलदार के भारी दबाव में खेला जा रहा है, और क्षेत्र में कोयला चोरी व अवैध परिवहन का काला कारोबार बेरोकटोक जारी है।</p>
<p> </p>
<h5><strong>इन 5 कोल डिपो पर मेहरबान है खनिज विभाग</strong></h5>
<p>जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले के पांच प्रमुख कोल डिपो का लाइसेंस फरवरी 2026 में ही खत्म हो चुका है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:</p>
<p> <span style="color:rgb(53,152,219);"><strong>1. कश्यप कोल डिपो, बेलतरा</strong></span></p>
<p><span style="color:rgb(53,152,219);"><strong> 2. मां तारा कोल डिपो, रतनपुर</strong></span></p>
<p><span style="color:rgb(53,152,219);"><strong> 3. मौर्य कोल डिपो, मोहतराई</strong></span></p>
<p><span style="color:rgb(53,152,219);"><strong> 4. जगदंबे कोल डिपो, पेंड्रवा</strong></span></p>
<p><span style="color:rgb(53,152,219);"><strong> 5. मंगलम इंटरप्राइजेज, गतौरी</strong></span></p>
<p>नियमानुसार, लाइसेंस अवधि समाप्ति के बाद इन डिपो का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद होना चाहिए था। यदि एक्सटेंशन या नवीनीकरण दिया भी जाना था, तो यह प्रक्रिया शासन या उच्च विभागीय स्तर पर होनी चाहिए थी। लेकिन स्थानीय खनिज विभाग के अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर, नियमों को दरकिनार करते हुए इन डिपो को 5 महीने का अवैध एक्सटेंशन थमा दिया।</p>
<p><strong style="font-family:Mukta, sans;font-size:1.25rem;">ACB के हवलदार का रसूख और खौफ</strong></p>
<p>इस पूरे गोरखधंदे में एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला एंगल सामने आया है। बताया जा रहा है कि खनिज विभाग के अधिकारियों पर यह अवैध एक्सटेंशन देने के लिए भारी दबाव बनाया गया था। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व में MT (मोटर ट्रांसपोर्ट) वर्कशॉप में कार्यरत एक हवलदार, जो अब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में सेवाएं दे रहा है, वह कोल माफियाओं के लिए मुख्य ढाल बन गया है।</p>
<p>इस हवलदार ने ACB के नाम और रसूख का खौफ दिखाकर खनिज विभाग के अधिकारियों पर दबाव बनाया। बताया जाता है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने वाली एजेंसी के इसी कर्मी की धौंस और मिलीभगत के चलते, बिना किसी नियम-कायदे को देखे एक बड़े कोल माफिया को एक्सटेंशन दे दिया गया।</p>
<p> </p>
<h5><strong>हवा में उड़ रहे छत्तीसगढ़ के 'एयर डिस्टेंस' नियम</strong></h5>
<p>इन डिपो के संचालन में सबसे बड़ी अनदेखी छत्तीसगढ़ शासन के 'एयर डिस्टेंस' (Air Distance Rule) नियमों की हो रही है।</p>
<p><strong style="font-family:Mukta, sans;font-size:1.25rem;">क्या है एयर डिस्टेंस नियम?</strong></p>
<p>छत्तीसगढ़ खनिज (भंडारण) और पर्यावरण विभाग के नियमों के अनुसार, किसी भी कोल डिपो, क्रशर या खनिज भंडारण केंद्र की स्थापना के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग, घनी आबादी वाले क्षेत्रों (बस्तियों), स्कूल, अस्पताल और जल स्रोतों से एक निश्चित हवाई दूरी (Air Distance) बनाए रखना अनिवार्य है। आमतौर पर यह दूरी न्यूनतम 100 से 500 मीटर (श्रेणी के अनुसार) तय की गई है ताकि कोयले की डस्ट से होने वाले प्रदूषण और हादसों को रोका जा सके।</p>
<p>लेकिन बेलतरा, रतनपुर, मोहतराई और गतौरी क्षेत्र में संचालित ये डिपो एयर डिस्टेंस नियमों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। ये डिपो न सिर्फ आबादी और सड़कों के बेहद करीब हैं, बल्कि उड़ती कोल डस्ट से स्थानीय लोगों का जीना मुहाल हो गया है। खनिज विभाग की आंखों के सामने यह सब हो रहा है, लेकिन अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं।</p>
<p><strong style="font-family:Mukta, sans;font-size:1.25rem;">सिंडिकेट चला रहा कोयला चोरी का खेल</strong></p>
<p>इस अवैध एक्सटेंशन की आड़ में इन क्षेत्रों में कोयला चोरी और हेराफेरी का सिंडिकेट एक बार फिर सक्रिय हो गया है। बिना वैध रॉयल्टी और नियमों के डंप किए जा रहे कोयले को बेखौफ खपाया जा रहा है। ACB जैसी संस्था से जुड़े एक कर्मचारी का नाम इस पूरे स्कैंडल में सामने आने से यह मामला और भी संगीन हो जाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/njv-exclusive-coal-mafia-syndicate-in-bilaspur-on-bullying-of/article-9165</link>
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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 08:45:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिलासपुर: जब स्कूली बच्चों ने संभाला शहर का ट्रैफिक कंट्रोल! हाईटेक पुलिसिंग देख रह गए दंग, SSP ने बनाया 'ब्रांड एंबेसडर'</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बिलासपुर। पुलिस और पब्लिक के बीच की झिझक मिटाने और युवाओं को कानून के प्रति जागरूक करने के लिए बिलासपुर पुलिस ने एक बेहद अनूठी और अभिनव पहल की है। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के जयंती वर्ष के मौके पर शहर के स्कूली छात्र-छात्राओं ने क्लासरूम से बाहर निकलकर 'स्मार्ट पुलिसिंग' का लाइव अनुभव किया।</p>
<p>खास बात यह रही कि बच्चों ने केवल पुलिस की कार्यप्रणाली को दूर से देखा ही नहीं, बल्कि खुद इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर (ITMS) में बैठकर माइक संभाला और ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों को सीधे हिदायत दी। एसएसपी रजनेश सिंह की इस पहल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/bilaspur-when-school-children-took-over-the-traffic-control-of/article-9163"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/img-20260413-wa0087.jpg" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर। पुलिस और पब्लिक के बीच की झिझक मिटाने और युवाओं को कानून के प्रति जागरूक करने के लिए बिलासपुर पुलिस ने एक बेहद अनूठी और अभिनव पहल की है। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के जयंती वर्ष के मौके पर शहर के स्कूली छात्र-छात्राओं ने क्लासरूम से बाहर निकलकर 'स्मार्ट पुलिसिंग' का लाइव अनुभव किया।</p>
<p>खास बात यह रही कि बच्चों ने केवल पुलिस की कार्यप्रणाली को दूर से देखा ही नहीं, बल्कि खुद इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर (ITMS) में बैठकर माइक संभाला और ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों को सीधे हिदायत दी। एसएसपी रजनेश सिंह की इस पहल का मुख्य मकसद इन छात्रों को बिलासपुर पुलिस का 'ब्रांड एंबेसडर' बनाना है, ताकि समाज में अपराधों की रोकथाम और यातायात नियमों के प्रति एक मजबूत संदेश जा सके।</p>
<h5><strong>स्क्रीन पर देखा पूरा शहर, माइक से दी चेतावनी</strong></h5>
<p>ITMS (स्मार्ट सिटी कंट्रोल रूम) का नजारा सोमवार को तब बदल गया जब स्कूली बच्चों की टोलियां वहां पहुंचीं। एसएसपी रजनेश सिंह की मौजूदगी में बच्चों ने देखा कि कैसे कैमरों की मदद से पूरे शहर की ऑनलाइन निगरानी होती है। जब चौराहों पर किसी वाहन चालक को बेतरतीब या नो-पार्किंग में गाड़ी खड़ी करते देखा गया, तो बच्चों ने खुद आगे आकर कंट्रोल रूम के अनाउंसमेंट सिस्टम (PA) से उन्हें फटकार लगाई और गाड़ी सही जगह खड़ी करने की हिदायत दी। हाई-स्पीड कैमरे, नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) और फेस रिकॉग्निशन जैसे हाईटेक फीचर्स देखकर बच्चे रोमांचित हो उठे। उन्हें डायल 112 की त्वरित कार्यप्रणाली का डेमो भी दिखाया गया कि कैसे कॉल आते ही पुलिस चंद मिनटों में मौके पर पहुंचती है।</p>
<h5><strong>सड़क पर समझी ट्रैफिक इंजीनियरिंग की बारीकियां</strong></h5>
<p>इससे पहले, शहर के हृदय स्थल शहीद विनोद चौबे चौक पर बच्चों के लिए एक विशेष फील्ड वर्कशॉप आयोजित की गई। यहां उन्हें ट्रैफिक पुलिस के आधुनिक गैजेट्स से रूबरू कराया गया। ब्रीथ एनालाइजर, POS मशीन, नेक्स्ट जेन एम-परिवहन पोर्टल, स्पीड रडार गन, इंटरसेप्टर व्हीकल, व्हील लॉक और मूवेबल सिग्नल तकनीक को बच्चों ने करीब से देखा। ई-चालान कैसे कटता है और नियम तोड़ने पर कौन सी धाराएं लगती हैं, इसकी पूरी लाइव प्रक्रिया उन्हें समझाई गई।</p>
<h5><strong>साइबर फ्रॉड से लेकर थाने के रोजनामचे तक का सफर</strong></h5>
<p>हाईटेक ट्रैफिक मैनेजमेंट के बाद बच्चों का दल साइबर थाना पहुंचा। यहां बच्चों को 'डिजिटल अरेस्ट', फेक आईडी, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के तरीके बताए गए। ठगी होने पर 'डायल 1930' का महत्व और पैसे होल्ड कराने की प्रक्रिया समझाई गई।</p>
<p>इसके बाद छात्रों ने तारबहार थाने का रुख किया। CCTNS एंट्री, एफआईआर (FIR), रोजनामचा लेखन, मालखाना, मर्ग कायम करना और क्रिमिनल रिकॉर्ड मेंटेनेंस जैसे रोजमर्रा के पुलिसिंग कार्यों को उन्होंने करीब से देखा। इस दौरान बच्चों ने अपनी जिज्ञासाएं शांत करने के लिए एसएसपी महोदय से कई रोचक सवाल भी किए, जिनका उन्होंने विस्तार से जवाब दिया।</p>
<h5><strong>अब ये बच्चे हैं 'ब्रांड एंबेसडर'</strong></h5>
<p>इस पूरे एजुकेशनल टूर का विजन युवाओं में देशभक्ति की भावना जगाना और उन्हें भारतीय न्याय संहिता व कानून के प्रति सजग बनाना है। पुलिस इन छात्रों को एक ऐसे 'ब्रांड एंबेसडर' के रूप में तैयार कर रही है, जो अपने घरों, मोहल्लों और दोस्तों के बीच जाकर एक बेहतर और सुरक्षित समाज के निर्माण में पुलिस के सहयोगी बनेंगे।</p>
<p>इस खास अवसर पर एएसपी (ग्रामीण) मधुलिका सिंह, एएसपी (यातायात) राम गोपाल करियारे, एएसपी (शहर) पंकज पटेल, सीएसपी कोतवाली निमितेश सिंह, टीआई अनंत सहित सेंट जोसेफ, ड्रीमलैंड और बिरला स्कूल के शिक्षक, छात्र-छात्राएं व सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/bilaspur-when-school-children-took-over-the-traffic-control-of/article-9163</link>
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 18:50:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में 'अफ्रीकी स्वाइन फीवर' का खौफ: दुर्ग में 300 से ज्यादा सूअरों की मौत से मचा हड़कंप, 21 गांव और 5 वार्ड सील; प्रशासन का कड़ा पहरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर/दुर्ग: छत्तीसगढ़ में पहली बार 'अफ्रीकी स्वाइन फीवर' (African Swine Fever - ASF) ने इतनी भयानक दस्तक दी है कि राज्य भर के पशुपालकों और प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं। प्रदेश की स्टील सिटी दुर्ग-भिलाई के धमधा ब्लॉक में इस जानलेवा वायरस ने भारी कहर बरपाया है। यहां संक्रमण की चपेट में आने से 300 से अधिक सूअरों की दर्दनाक मौत हो गई है। हालात की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग जिला प्रशासन तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया है। संक्रमण को रोकने के लिए प्रशासन ने मुड़पार से लगे 21 गांवों और 5 वार्डों को 'इन्फेक्टेड' और 'सर्विलांस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/fear-of-african-swine-fever-in-chhattisgarh-death-of-more/article-9162"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/1200-675-26465025-thumbnail-16x9-swine-fever.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर/दुर्ग: छत्तीसगढ़ में पहली बार 'अफ्रीकी स्वाइन फीवर' (African Swine Fever - ASF) ने इतनी भयानक दस्तक दी है कि राज्य भर के पशुपालकों और प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं। प्रदेश की स्टील सिटी दुर्ग-भिलाई के धमधा ब्लॉक में इस जानलेवा वायरस ने भारी कहर बरपाया है। यहां संक्रमण की चपेट में आने से 300 से अधिक सूअरों की दर्दनाक मौत हो गई है। हालात की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग जिला प्रशासन तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया है। संक्रमण को रोकने के लिए प्रशासन ने मुड़पार से लगे 21 गांवों और 5 वार्डों को 'इन्फेक्टेड' और 'सर्विलांस जोन' घोषित कर दिया है।</p>
<h5><strong>कलेक्टर का सख्त एक्शन: 6 महीने तक रहेगा प्रतिबंध</strong></h5>
<p>दुर्ग जिले के कलेक्टर अभिजीत सिंह ने इस महामारी को फैलने से रोकने के लिए युद्ध स्तर पर कदम उठाए हैं। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, प्रभावित फार्म से 1 किलोमीटर के दायरे को 'इन्फेक्टेड जोन' (Infected Zone) और 1 से 10 किलोमीटर तक के विस्तृत क्षेत्र को 'सर्विलांस जोन' (Surveillance Zone) में रखा गया है। प्रशासन की ओर से सख्त हिदायत दी गई है कि यह पाबंदी आगामी 6 महीने या अगले दिशा-निर्देश आने तक पूरी कड़ाई के साथ लागू रहेगी।</p>
<h5><strong>इन 21 गांवों और 5 वार्डों में प्रशासन की पैनी नजर</strong></h5>
<p>संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए सर्विलांस जोन का दायरा काफी बड़ा रखा गया है। इसके तहत धमधा और भिलाई के कई ग्रामीण और शहरी इलाकों को शामिल किया गया है:</p>
<p> प्रमुख गांव:** नारधा, मोहंदी, ओखरा, चेटूवा, खेरधी, ढौर, रिगंनी और मुरमुदा।</p>
<p> अन्य प्रभावित क्षेत्र: कंडरका, सेमरिया, नंदौरी, हिंगनाडीह, गोढी, ढाबा, अछोटी, दादर, बोरसी, लिमतरा, मुर्रा और खेदामारा।</p>
<p> प्रमुख वार्ड:  जामूल और सूरडूंग।</p>
<p>इन सभी जगहों पर पशुपालन विभाग और स्वास्थ्य अमले की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और स्थिति की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है।</p>
<h5><strong>मांस की बिक्री, बाजार और डिलीवरी पर पूर्ण रोक</strong></h5>
<p>अफ्रीकी स्वाइन फीवर बेहद संक्रामक है, इसे देखते हुए इन्फेक्टेड और सर्विलांस जोन में सूअरों और उनसे जुड़े किसी भी उत्पाद की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इन क्षेत्रों में सूअर बाजार, मांस की दुकानें और डोर-टू-डोर डिलीवरी सेवाओं को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया गया है।</p>
<h5><strong>अफवाह फैलाई तो होगी जेल, कड़े कानूनों के तहत FIR</strong></h5>
<p>इस संवेदनशील मौके पर भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ भी प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से अफवाह फैलाता है, तो उसके खिलाफ **भारतीय न्याय संहिता (BNS)** और **पशु रोग नियंत्रण अधिनियम 2009** के कड़े प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उल्लंघनकर्ताओं को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।</p>
<h5><strong>संक्रमण को रोकने के लिए दिया गया जहरीला इंजेक्शन</strong></h5>
<p>राज्य में अफ्रीकी स्वाइन फीवर का यह पहला ऐसा मामला है, जहां इतनी बड़ी संख्या में सूअर संक्रमित पाए गए हैं। पशुपालन विभाग के मुताबिक, बीमारी की गंभीरता इतनी ज्यादा थी कि कई सूअरों ने तड़प कर दम तोड़ दिया। वहीं, वायरस को बाकी स्वस्थ पशुओं तक पहुंचने से रोकने के लिए कड़े कदम उठाने पड़े। विभाग को मजबूरी में अन्य संक्रमित सूअरों को नियंत्रित करने के लिए उन्हें जहरीला इंजेक्शन देकर मारना (Culling) पड़ा।</p>
<h5><strong>वैज्ञानिकों की टीम करेगी ग्राउंड जीरो पर जांच</strong></h5>
<p>आखिर यह घातक वायरस छत्तीसगढ़ के इस फार्म तक कैसे पहुंचा? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए अब वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम विस्तृत जांच और सर्वे करेगी। ग्राउंड जीरो पर संक्रमण के स्रोत (Source of Infection) का पता लगाने के लिए सैंपलिंग का काम तेज कर दिया गया है। इस घटना के बाद से प्रदेश के अन्य जिलों में भी पशुपालन विभाग को अलर्ट रहने के निर्देश दे दिए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 18:31:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
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