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                <title>कानून - National Jagat Vision</title>
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                <description>कानून RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बिलासपुर हाईकोर्ट से भूपेश बघेल को झटका, दुर्ग चुनाव मामले में अर्जी खारिज; अब दर्ज होंगे साक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। दुर्ग लोकसभा चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में चल रहे मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी वह अर्जी खारिज कर दी है जिसमें उन्होंने भाजपा सांसद विजय बघेल की चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खत्म करने की मांग की थी। अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही और साक्ष्य दर्ज करने का रास्ता खुल गया है।</p>
<p>यह पूरा मामला 2024 के दुर्ग लोकसभा चुनाव का है। भाजपा सांसद विजय बघेल ने भूपेश बघेल के निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी है। इसी याचिका को शुरुआत में ही निपटाने के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/law/shock-to-bhupesh-baghel-from-bilaspur-high-court-petition-rejected/article-12561"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/img_20260918_091639.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। दुर्ग लोकसभा चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में चल रहे मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी वह अर्जी खारिज कर दी है जिसमें उन्होंने भाजपा सांसद विजय बघेल की चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खत्म करने की मांग की थी। अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही और साक्ष्य दर्ज करने का रास्ता खुल गया है।</p>
<p>यह पूरा मामला 2024 के दुर्ग लोकसभा चुनाव का है। भाजपा सांसद विजय बघेल ने भूपेश बघेल के निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी है। इसी याचिका को शुरुआत में ही निपटाने के लिए भूपेश बघेल के वकीलों ने सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के आदेश 7 नियम 11 के तहत कोर्ट में आवेदन लगाया था। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद इस आवेदन को नामंजूर कर दिया है।</p>
<p><strong>अदालत में क्या हुआ?</strong></p>
<p>सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। भूपेश बघेल का पक्ष चाहता था कि याचिका को प्रारंभिक आपत्ति के आधार पर ही खारिज कर दिया जाए। उधर, विजय बघेल की तरफ से इसका कड़ा जवाब पेश किया गया।</p>
<p>बीते 10 सितंबर को विजय बघेल और उनके गवाह सौरभ दुबे अपने साक्ष्य दर्ज कराने बिलासपुर हाईकोर्ट पहुंचे थे। लेकिन भूपेश बघेल की तरफ से नियम 11 का अड़ंगा लगा दिए जाने के कारण गवाही की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों की पूरी बहस सुनने के बाद आदेश के लिए 17 सितंबर की तारीख तय कर दी थी।</p>
<p><strong>क्या है नियम 11 का पेंच</strong></p>
<p>आदेश 7 नियम 11 के तहत बचाव पक्ष अदालत से यह मांग करता है कि यदि किसी याचिका में कानूनी कार्रवाई का कोई ठोस आधार नहीं है, तो उसे बिना लंबे ट्रायल के शुरुआती स्तर पर ही खारिज कर दिया जाए। भूपेश बघेल की ओर से इसी का हवाला देकर याचिका खत्म करने की मांग की गई थी। इसमें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 86(1) का भी जिक्र था। लेकिन कोर्ट ने इसे नहीं माना।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है मामला</strong></p>
<p>यह विवाद इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक भी पहुंच चुका है। अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल की एसएलपी (SLP) पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की कार्यवाही में दखल देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद ही हाईकोर्ट में साक्ष्य दर्ज कराने की प्रक्रिया का रास्ता साफ हुआ था।</p>
<p>हाईकोर्ट से भूपेश बघेल की शुरुआती आपत्ति खारिज होने के बाद, विजय बघेल की चुनाव याचिका अभी कायम है। अब अदालत में साक्ष्य और गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। हालांकि, कोर्ट के इस आदेश का यह अर्थ नहीं है कि विजय बघेल के लगाए गए आरोप सही साबित हो गए हैं। दावों की असलियत पर आगे की गवाही और सबूतों के आधार पर ही अदालत अपना फैसला सुनाएगी। फिलहाल, ट्रायल आगे बढ़ाने को कोर्ट की हरी झंडी मिल गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कानून</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 09:17:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ के जजों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़कर 62 वर्ष हुई: सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पर राज्य शासन का फैसला, राजपत्र में अधिसूचना जारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर. छत्तीसगढ़ के जिला न्यायपालिका में सेवाएं दे रहे न्यायिक अधिकारियों की अधिवार्षिकी (सेवानिवृत्ति) आयु सीमा में दो साल की वृद्धि कर दी गई है। अब प्रदेश के न्यायिक अधिकारी 60 वर्ष के बजाय 62 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त होंगे। नवा रायपुर अटल नगर स्थित विधि और विधायी कार्य विभाग के कार्यालय से इस बाबत विधिवत आदेश जारी कर दिया गया है। शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 को जारी असाधारण राजपत्र (क्रमांक 520) में इसे प्राधिकार से प्रकाशित कर दिया गया है।</p>
<p>यह निर्णय माननीय सर्वोच्च न्यायालय के उन अंतरिम आदेशों के पूर्ण अनुपालन में लिया गया है, जो 'ऑल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/law/retirement-age-of-chhattisgarh-judges-increased-from-60-to-62/article-12498"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/image_search_1789477930717.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर. छत्तीसगढ़ के जिला न्यायपालिका में सेवाएं दे रहे न्यायिक अधिकारियों की अधिवार्षिकी (सेवानिवृत्ति) आयु सीमा में दो साल की वृद्धि कर दी गई है। अब प्रदेश के न्यायिक अधिकारी 60 वर्ष के बजाय 62 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त होंगे। नवा रायपुर अटल नगर स्थित विधि और विधायी कार्य विभाग के कार्यालय से इस बाबत विधिवत आदेश जारी कर दिया गया है। शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 को जारी असाधारण राजपत्र (क्रमांक 520) में इसे प्राधिकार से प्रकाशित कर दिया गया है।</p>
<p>यह निर्णय माननीय सर्वोच्च न्यायालय के उन अंतरिम आदेशों के पूर्ण अनुपालन में लिया गया है, जो 'ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन व अन्य बनाम भारत संघ व अन्य' प्रकरण में दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट में दायर रिट याचिका (सिविल) क्रमांक 1022/1989 के तहत शीर्ष अदालत ने 22 जुलाई 2026 तथा 5 अगस्त 2026 को विस्तृत आदेश पारित किए थे। इन आदेशों में निर्देशित किया गया था कि न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने के विषय पर राज्य सरकार तथा संबंधित उच्च न्यायालय को संयुक्त रूप से निर्णय लेना है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट के इन्हीं निर्देशों को दृष्टिगत रखते हुए, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (बिलासपुर) ने अपनी प्रशासनिक कार्यवाही पूर्ण की। बिलासपुर हाई कोर्ट ने अपने ज्ञापन (क्रमांक 517/ II-2-24/ 2023 (Part-III)/ Confdl./ 2026) दिनांक 12 अगस्त 2026 के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने का अपना निर्णय राज्य शासन को प्रेषित किया था।</p>
<p>हाई कोर्ट से ज्ञापन प्राप्त होने के उपरांत, राज्य शासन के विधि विभाग ने इस विषय पर अपनी अंतिम स्वीकृति प्रदान कर दी। विधि और विधायी कार्य विभाग, मंत्रालय (महानदी भवन) के प्रमुख सचिव मनीष कुमार ठाकुर के हस्ताक्षर से छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार यह अधिसूचना निर्गत की गई है।</p>
<p>सर्वोच्च न्यायालय की लंबी सुनवाई वाले इस प्रकरण में पारित निर्देशों और उच्च न्यायालय बिलासपुर के परिपालन के आधार पर, राज्य सरकार ने अधिवार्षिकी आयु बढ़ाने का यह आदेश अंतिम रूप से लागू कर दिया है। शासकीय मुद्रणालय, रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित इस राजपत्रित अधिसूचना के साथ ही आयु सीमा में वृद्धि का यह नियम प्रभावशील हो गया है। जिला न्यायालयों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों को अब अपनी सेवाएं देने के लिए दो वर्ष की अतिरिक्त अवधि प्राप्त हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कानून</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 18:42:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट: सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश पर केंद्र की मुहर,  मिले 3 नए जज; जानें जजों का प्रोफाइल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबे समय से चल रही जजों की कमी अब कुछ कम होने वाली है। मंगलवार को केंद्र सरकार ने तीन ज्यूडिशियल अफसरों को हाईकोर्ट के जज के रूप में नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 18 अगस्त 2026 को जिन नामों का प्रस्ताव दिया था, उन पर सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी है। इन नए जजों में संतोष शर्मा, सुषमा सावंत और सुधीर कुमार का नाम शामिल है।</p>
<p>भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय (नियुक्ति प्रभाग) ने 8 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति की ओर से इस संबंध में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/law/chhattisgarh-high-court-gets-centres-approval-on-the-recommendation-of/article-12342"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/image_search_1788877554721.png" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबे समय से चल रही जजों की कमी अब कुछ कम होने वाली है। मंगलवार को केंद्र सरकार ने तीन ज्यूडिशियल अफसरों को हाईकोर्ट के जज के रूप में नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 18 अगस्त 2026 को जिन नामों का प्रस्ताव दिया था, उन पर सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी है। इन नए जजों में संतोष शर्मा, सुषमा सावंत और सुधीर कुमार का नाम शामिल है।</p>
<p>भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय (नियुक्ति प्रभाग) ने 8 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति की ओर से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना निकाल दी है। जिस दिन ये तीनों अपना कार्यभार ग्रहण करेंगे, उसी तारीख से यह नियुक्ति लागू मानी जाएगी।</p>
<p><strong>जजों का आंकड़ा पहुंचा 14 तक</strong></p>
<p>छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जजों के कुल 22 पद स्वीकृत हैं। अब तक केवल 11 जजों के सहारे ही मुकदमों की सुनवाई चल रही थी। इन तीन नई नियुक्तियों के बाद काम का बोझ थोड़ा घटेगा और जजों की संख्या बढ़कर 14 हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बेंच कोटे से इन तीनों ज्यूडिशियल अधिकारियों को जज बनाने की सिफारिश भेजी थी।</p>
<h5><strong>नए जजों का ग्राउंड प्रोफाइल:</strong></h5>
<p><strong>सुषमा सावंत</strong></p>
<p>न्यायिक सेवा में काफी अनुभवी सुषमा सावंत ने बिलासपुर, महासमुंद और राजनांदगांव में जिला एवं सत्र न्यायाधीश का पद संभाला है। वे बिलासपुर फैमिली कोर्ट की प्रधान न्यायाधीश और राज्य न्यायिक अकादमी की निदेशक भी रही हैं। राज्य सरकार के विधि और विधायी कार्य विभाग में अतिरिक्त सचिव का काम देखने के बाद वर्तमान में वे इसी विभाग में प्रधान सचिव के पद पर अपनी सेवाएं दे रही हैं।</p>
<p><strong>सुधीर कुमार</strong></p>
<p>बीए और एलएलबी की पढ़ाई करने वाले सुधीर कुमार ने रायपुर के फैमिली कोर्ट और विशेष न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश की जिम्मेदारी निभाई है। विजिलेंस, अनुशासन और न्यायिक प्रशासन के कामकाज में उनकी अच्छी पकड़ है। सुधीर कुमार ने कोरबा, बिलासपुर, जशपुर, महासमुंद, दंतेवाड़ा, धमतरी और दुर्ग जिलों में काम किया है। उन्होंने लोक सेवा आयोग और हाईकोर्ट प्रशासन को कानूनी सलाह देने के साथ-साथ न्यायिक अकादमी में ट्रेनिंग से जुड़े काम भी किए हैं।</p>
<p><strong>संतोष शर्मा</strong></p>
<p>मूल रूप से मध्य प्रदेश के सीहोर के रहने वाले संतोष शर्मा ने 19 मार्च 2009 को सीधे उच्च न्यायिक सेवा जॉइन की थी। वे इस वक्त कोरबा में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर काम कर रहे हैं। बीएससी, एमएससी (जूलॉजी), एलएलबी और समाजशास्त्र में एमए करने वाले शर्मा के पास 16 साल से अधिक का न्यायिक अनुभव है। उन्होंने जगदलपुर, अंबिकापुर, दंतेवाड़ा, बलौदाबाजार, रायपुर और सूरजपुर में अलग-अलग पदों पर काम किया है। अंबिकापुर में वे SC/ST एक्ट के विशेष न्यायाधीश रहे। इसके अलावा बिलासपुर हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार (विजिलेंस) और रजिस्ट्रार (S&amp;A) का कामकाज भी संभाल चुके हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कानून</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/law/chhattisgarh-high-court-gets-centres-approval-on-the-recommendation-of/article-12342</link>
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                <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 19:56:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिना बीमा वाली पुलिस की गाड़ी ने ली थी दो युवकों की जान: 43 लाख का मुआवजा नहीं चुकाने पर अब DGP और कोरबा SP कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने के आदेश </title>
                                    <description><![CDATA[<p>कोरबा। कानून की रक्षा करने वाले पुलिस विभाग की भारी लापरवाही पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण कोरबा ने 43 लाख 14 हजार 200 रुपये की मुआवजा राशि न चुकाने पर छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) और कोरबा पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी कर दिया है। यह कार्रवाई वीवीआईपी व्यवस्था में तैनात पुलिस विभाग की बिना बीमा वाली मिनी बस से हुई सड़क दुर्घटना में मारे गए दो युवकों के प्रकरण में की गई है।</p>
<p>हादसा साल 2023 का है। 27 सितंबर 2023 की शाम करीब साढ़े छह बजे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/an-uninsured-police-vehicle-had-taken-the-lives-of-two/article-12278"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/image_search_1788692619823.webp" alt=""></a><br /><p>कोरबा। कानून की रक्षा करने वाले पुलिस विभाग की भारी लापरवाही पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण कोरबा ने 43 लाख 14 हजार 200 रुपये की मुआवजा राशि न चुकाने पर छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) और कोरबा पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी कर दिया है। यह कार्रवाई वीवीआईपी व्यवस्था में तैनात पुलिस विभाग की बिना बीमा वाली मिनी बस से हुई सड़क दुर्घटना में मारे गए दो युवकों के प्रकरण में की गई है।</p>
<p>हादसा साल 2023 का है। 27 सितंबर 2023 की शाम करीब साढ़े छह बजे रायगढ़ जिले के खरसिया थाना क्षेत्र के पिपरिया-परपोड़ी मुख्य मार्ग पर यह दर्दनाक घटना हुई थी। हादसे के वक्त बैजनाथ कंवर बाइक चला रहा था, जबकि रवि यादव उसके पीछे बैठा हुआ था। इसी दौरान वीवीआईपी प्रबंधन ड्यूटी में लगी पुलिस विभाग की तेज रफ्तार मिनी बस ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम हेडसपुर निवासी बैजनाथ कंवर की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, गंभीर रूप से घायल रवि यादव ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।</p>
<p>हादसे के बाद दोनों परिवारों पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया। बैजनाथ कंवर की पत्नी सुजाता कंवर, माता-पिता और दो नाबालिग बच्चों ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण कोरबा में दावा प्रस्तुत किया। वहीं, रवि यादव के परिवार की ओर से उनकी पत्नी जुगमणी और दो नाबालिग बच्चों ने भी आर्थिक सहायता के लिए न्यायालय में अलग प्रकरण दाखिल किया। प्रथम अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण की पीठासीन अधिकारी गरिमा शर्मा ने 14 जनवरी 2026 को सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुनाया।</p>
<p>सुनवाई में अदालत ने दुर्घटना के लिए मिनी बस चालक की लापरवाही को पूरी तरह जिम्मेदार माना। न्यायालय के सामने यह तथ्य आया कि दुर्घटनाग्रस्त वाहन छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक के नाम पर पंजीकृत था। हैरानी की बात यह थी कि जिस समय यह हादसा हुआ, उस वक्त मिनी बस की बीमा अवधि समाप्त हो चुकी थी। इसी कारण पुलिस महानिदेशक और कोरबा पुलिस अधीक्षक को मामले में पक्षकार बनाया गया।</p>
<p>अधिकरण ने बैजनाथ कंवर के आश्रितों को 26 लाख 9 हजार 200 रुपये और रवि यादव के परिवार को 17 लाख 5 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। दोनों मामलों में कुल राशि 43 लाख 14 हजार 200 रुपये तय की गई। साथ ही इस राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के भी निर्देश दिए गए। न्यायालय ने आदेश दिया था कि यह पूरी राशि 30 दिनों के भीतर पीड़ित परिवारों को दे दी जाए।</p>
<p>आदेश जारी होने के बाद पांच महीने से अधिक का समय बीत गया, लेकिन पुलिस विभाग ने मृतकों के परिजनों को मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं किया। मुआवजा राशि नहीं मिलने पर पीड़ित पक्ष के वकीलों ने वसूली की कानूनी प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद अदालत ने सख्ती दिखाते हुए DGP और SP कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी कर दिया। न्यायालय की इस सख्त कानूनी कार्रवाई से पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत मिली है, वहीं अब पुलिस विभाग के सामने यह राशि जमा करने की चुनौती खड़ी हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>कानून</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 16:34:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>झीरम घाटी नरसंहार: 13 वर्ष लंबे संघर्ष के बाद NIA कोर्ट का फैसला, बचे हुए सभी 10 आरोपित दोषी करार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर/जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के इतिहास को रक्तरंजित करने वाले झीरम घाटी हमले के मामले में शनिवार को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। करीब 13 वर्ष पुरानी इस हिंसक घटना के मामले में अदालत ने बचे हुए सभी 10 आरोपितों को दोषी ठहराया है। माओवादियों द्वारा किए गए उस क्रूर नरसंहार के बाद से ही पीड़ित परिवार न्याय की लंबी राह देख रहे थे। 5 सितंबर को न्यायालय से आए इस निर्णय को उन परिवारों के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है, जिन्होंने उस दिन अपनों को खोया था।</p>
<p><strong>25 मई 2013: जब</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/jheeram-valley-massacre-after-13-years-long-struggle-nia-courts/article-12250"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/img_20260905_144250.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर/जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के इतिहास को रक्तरंजित करने वाले झीरम घाटी हमले के मामले में शनिवार को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। करीब 13 वर्ष पुरानी इस हिंसक घटना के मामले में अदालत ने बचे हुए सभी 10 आरोपितों को दोषी ठहराया है। माओवादियों द्वारा किए गए उस क्रूर नरसंहार के बाद से ही पीड़ित परिवार न्याय की लंबी राह देख रहे थे। 5 सितंबर को न्यायालय से आए इस निर्णय को उन परिवारों के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है, जिन्होंने उस दिन अपनों को खोया था।</p>
<p><strong>25 मई 2013: जब सुकमा से लौट रही थी परिवर्तन यात्रा</strong></p>
<p>यह घटना 25 मई 2013 की है। सुकमा से कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा लौट रही थी। उसी दौरान दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में नक्सलियों ने इस यात्रा के काफिले पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी। यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि माओवादियों ने इसे पूरी तरह से सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया था। चारों तरफ से घेरकर की गई इस गोलीबारी में 32 लोगों की मौत हुई थी। उस दिन पूरी घाटी गोलियों की आवाज से गूंज उठी थी। इसके अलावा कई अन्य लोग भी उस भयानक गोलाबारी में गंभीर रूप से घायल हुए थे।</p>
<p><strong>दिग्गज नेताओं ने गंवाई थी जान</strong></p>
<p>इस हमले में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया था। जान गंवाने वालों में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल शामिल थे। उनके साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा को भी इस गोलीबारी में अपनी जान गंवानी पड़ी थी। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास में इसे सबसे बड़े हमलों में गिना जाता है, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था।</p>
<p><strong>11 आरोपितों पर शुरू हुई थी कानूनी कार्रवाई</strong></p>
<p>अभियोजन पक्ष ने शुरुआती दौर में कुल 11 आरोपितों के खिलाफ अदालत में कार्रवाई शुरू की थी। मामले की जांच का जिम्मा NIA के पास था। जांच एजेंसी ने सुबूत जुटाने के बाद अपना आरोपपत्र विशेष न्यायालय में दाखिल किया। ट्रायल चलने के दौरान ही मुख्य आरोपित की मौत हो गई। इसके बाद शेष बचे 10 आरोपितों पर कानूनी प्रक्रिया बिना रुके लगातार जारी रही।</p>
<p><strong>कार्यालय से न्यायालय तक चला लंबा संघर्ष</strong></p>
<p>अदालत में लगातार सुनवाई चलती रही। गवाहों के बयान दर्ज हुए। जांच एजेंसी के कार्यालय से लेकर न्यायालय के गलियारों तक 13 वर्ष लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी गई। अंततः शनिवार 5 सितंबर को NIA की विशेष अदालत ने अपना अंतिम निर्णय सुनाते हुए इन शेष सभी 10 आरोपितों को अपराध का दोषी माना। जिन परिवारों ने 2013 में अपने परिजनों को खोया था, उनके लिए अदालत का यह फैसला लंबी प्रतीक्षा का परिणाम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>कानून</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 14:43:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निलंबित आईपीएस रतनलाल डांगी मामला हाईकोर्ट सख्त: महिला उत्पीड़न पर पुलिस विभाग से शपथ पत्र के साथ सात दिन में मांगा जवाब  </title>
                                    <description><![CDATA[<p>बिलासपुर। निलंबित आईपीएस रतनलाल डांगी द्वारा पुलिस सब-इंसपेक्टर की पत्नी से अश्लील हरकतें और यौन उत्पीड़न के मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की बेंच ने पुलिस विभाग की लचर कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए 7 दिन के भीतर शपथपत्र के साथ जवाब पेश करने का आदेश दिया है। 2 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई में पुलिस विभाग की तरफ से कोई जवाब नहीं आया था। कोर्ट ने सख्त हिदायत दी है कि अगर तय समय में जवाब नहीं मिला, तो 29 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में ऑफिसर-इन-चार्ज (डीजीपी) स्वयं उपस्थित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/suspended-ips-ratanlal-dangi-case-high-court-strict-seeks-reply/article-12217"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/image_search_1788488299202.jpg" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर। निलंबित आईपीएस रतनलाल डांगी द्वारा पुलिस सब-इंसपेक्टर की पत्नी से अश्लील हरकतें और यौन उत्पीड़न के मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की बेंच ने पुलिस विभाग की लचर कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए 7 दिन के भीतर शपथपत्र के साथ जवाब पेश करने का आदेश दिया है। 2 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई में पुलिस विभाग की तरफ से कोई जवाब नहीं आया था। कोर्ट ने सख्त हिदायत दी है कि अगर तय समय में जवाब नहीं मिला, तो 29 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में ऑफिसर-इन-चार्ज (डीजीपी) स्वयं उपस्थित हों। </p>
<p> </p>
<p> बिलासपुर निवासी पीड़िता पेशे से योगा टीचर है और उसके पति पुलिस विभाग में सब-इंसपेक्टर हैं। याचिका के मुताबिक, साल 2017 में डांगी बस्तर में डीआईजी थे, तब उन्होंने फेसबुक के जरिए पीड़िता से जान पहचान बढ़ाई । बाद में चंदखुरी पदस्थापना के दौरान (2022-2023) आईजीपी रहते हुए डांगी ने योगा सीखने के बहाने वीडियो कॉल करना शुरू किया। महिला का आरोप है कि आईजीपी डांगी सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक पीड़िता पर व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर रहने का दबाव बनाते थे। कॉल के दौरान वे पूरे कपड़े उतारकर नग्न हो जाते और अश्लील मैसेज भेजते थे। पीड़िता ने जब इसका विरोध किया, तो आईपीएस डांगी ने धमकी दी कि वह उसके पति पर झूठा आपराधिक प्रकरण दर्ज कराकर जेल भेज देगा और उसका ट्रांसफर घोर नक्सल प्रभावित जिले में कराकर परिवार बर्बाद कर देगा।</p>
<p> </p>
<p>वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की धमकियों से घबराकर पीड़िता प्रताड़ना सहती रही। आखिरकार 15 अक्टूबर 2025 को पीड़िता ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रायपुर के समक्ष लिखित शिकायत की। जांच के लिए जो समिति बनाई गई, उस पर भी विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस महानिदेशक ने आईजीपी डांगी से निचले पद की अधिकारी डीआईजीपी मिलना कुर्रे और समान रैंक के आईजीपी आनंद छाबड़ा को जांच सौंप दी। हाईकोर्ट में अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू ने तर्क दिया कि दोनों अधिकारी अपनी जांच में डांगी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। जांच अधिकारी आनंद छाबड़ा खुद महादेव सट्टा एप मामले में आपराधिक प्रकरण में पार्टी हैं। ऐसे में दागी अधिकारी को इतनी संवेदनशील जांच सौंपना नैसर्गिक न्याय का घोर उल्लंघन है। महिला ने 20 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार और राज्य के गृह सचिव को भी पत्र भेजा गया, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।</p>
<p> </p>
<p>महिला ने आईपीएस डांगी की करोड़ों की अवैध संपत्ति का भी शिकायत की है, जिसकी जांच पुलिस समिति ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दी। शिकायत के अनुसार खुद को राजस्थान के मजदूर परिवार का सदस्य बताने वाले डांगी और उनके परिवार के नाम पर अथाह संपत्ति है। इनमें रायपुर के धरमपुरा में 15-20 करोड़ का तीन मंजिला मकान, पत्नी मंजू डांगी के नाम पर राजस्थान के चौसेली और परबतसर में जमीन-मकान, तीनों बेटों के नाम पर छत्तीसगढ़ में अस्पताल के लिए करोड़ों की जमीन शामिल है। इसके अलावा कोरबा में आदिवासी महिला के नाम पर 23 एकड़ जमीन, बिलासपुर में बिल्डर के साथ पार्टनरशिप, माता भवरी देवी के नाम पर राजस्थान में फार्म हाउस, कोविड काल में बुक डिपो मालिकों को 2 करोड़ रुपये ब्याज पर देने और पत्नी के पास करोड़ों के सोने-हीरे के जेवर होने के आरोप हैं। बेटे की शादी में भी करोड़ों रुपये खर्च किए गए।</p>
<p>हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका (डब्ल्यू.पी.सी. 41/2026) में मांग की गई है कि वर्तमान जांच समिति के दोनों सदस्यों को तत्काल हटाया जाए। इसकी जगह वरिष्ठ आईएएस और महिला आईएएस अधिकारी की नई समिति गठित कर नए सिरे से विभागीय जांच हो। बैंक खातों, एफडी और लॉकर की जांच कर आरोपी आईपीएस रतनलाल डांगी को सेवा से बर्खास्त किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को तय की</p>
<p>गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>कानून</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/suspended-ips-ratanlal-dangi-case-high-court-strict-seeks-reply/article-12217</link>
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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 07:48:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जल संसाधन विभाग में बड़ा खेल: बेरोजगारों का हक छीना, हाईकोर्ट की रोक के बाद भी दागी अफसर को मलाईदार पोस्टिंग</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग के अफसर न ही सरकार के निर्देश मानते है न हाईकोर्ट का आदेश मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की साफ-सुथरी और आदिवासी हितैषी छवि को खराब करने का कोई मौका यहां विभागीय अधिकारी नहीं छोड़ रहे हैं। ताजा मामला ई-श्रेणी पंजीयन में बड़ा गोलमाल करने और दागी अफसरों को नियम-कायदे ताक पर रखकर संरक्षण देने का है।</p>
<p>तात्कालिक भूपेश सरकार ने अक्टूबर 2020 में बेरोजगार स्नातक युवाओं को रोजगार देने के लिए 'ई-श्रेणी' बनाई थी। नियम था कि इन बेरोजगारों को उनके ही निवास ब्लॉक की सीमा के भीतर नए निर्माण कार्यों का ठेका दिया जाएगा।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/big-game-in-water-resources-department-snatching-the-rights-of/article-12164"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/img_20260902_094309.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग के अफसर न ही सरकार के निर्देश मानते है न हाईकोर्ट का आदेश मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की साफ-सुथरी और आदिवासी हितैषी छवि को खराब करने का कोई मौका यहां विभागीय अधिकारी नहीं छोड़ रहे हैं। ताजा मामला ई-श्रेणी पंजीयन में बड़ा गोलमाल करने और दागी अफसरों को नियम-कायदे ताक पर रखकर संरक्षण देने का है।</p>
<p>तात्कालिक भूपेश सरकार ने अक्टूबर 2020 में बेरोजगार स्नातक युवाओं को रोजगार देने के लिए 'ई-श्रेणी' बनाई थी। नियम था कि इन बेरोजगारों को उनके ही निवास ब्लॉक की सीमा के भीतर नए निर्माण कार्यों का ठेका दिया जाएगा। लेकिन जल मौसम प्रौद्योगिकी संभाग क्रमांक-4 के कार्यपालन अभियंता जयंत बिसेन और अधीक्षण अभियंता आई.ए. सिद्धीकी ने मिलकर इस योजना की धज्जियां उड़ा दीं।</p>
<p>यहां ई-श्रेणी में पंजीकृत ठेकेदार रूपेंद्र कुमार साहू को उसके निवास ब्लॉक से बाहर जाकर काम दे दिया गया। नियमानुसार ई-श्रेणी में सिर्फ नए निर्माण कार्य होंगे, लेकिन इन अफसरों ने बिलासपुर उप-संभाग-14 के तहत 20 मई 2026 को 2.20 लाख रुपए का विशुद्ध मेंटेनेंस (अनुरक्षण) का काम रूपेंद्र को दे दिया। यह कार्य लेखा शीर्ष 2701 के तहत दर्ज है। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस संभाग में ई-श्रेणी के नाम पर ऐसे लगभग 20 काम गुपचुप तरीके से अपने चहेते ठेकेदारों को बांटे गए हैं और इनका रिकॉर्ड भी दबा दिया गया । 2015 के विभागीय परिपत्र के मुताबिक अनुरक्षण (पीस वर्क) का काम ई-श्रेणी के ठेकेदारों को दिया ही नहीं जा सकता।</p>
<h5><strong>विधानसभा में दी गलत जानकारी हाईकोर्ट की भी अवमानना</strong></h5>
<p>अधीक्षण अभियंता सिद्धीकी वही अफसर हैं, जिन पर ठेकेदारों को समय से पहले एडिशनल परफॉर्मेंस सिक्योरिटी (APS) की राशि लौटाने का मामला दर्ज है। दिसंबर 2025 में विधानसभा में सरकार ने लिखित जवाब दिया था कि समय पूर्व एपीएस लौटाने के कारण सिद्धीकी पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन कार्रवाई की जगह उन्हें प्रमोशन दे दिया गया। विधायक विद्यावती सिदार के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर विभाग ने गुमराह करते हुए लिख दिया कि सिद्धीकी के खिलाफ कोई विभागीय जांच लंबित नहीं है।</p>
<p>इतना ही नहीं बिलासपुर हाईकोर्ट ने कार्यपालन अभियंता से अधीक्षण अभियंता पद पर हुए प्रमोशन के बाद इनकी पोस्टिंग पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद प्रमुख अभियंता (ईएनसी) जितेंद्र नेताम ने अपने हस्ताक्षर से सिद्धीकी को जल संसाधन मुख्यालय (शिवनाथ भवन) में कार्यकारी मुख्य अभियंता (प्रबोधन) की कुर्सी सौंप दी।</p>
<h5><strong>सचिव के दोहरे मापदंड , ठेकेदारों से भी गठजोड़</strong></h5>
<p>इस पूरे खेल में विभागीय सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो के भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं। एपीएस घोटाले में एक तरफ विजय जामनिक जैसे अधिकारी पर एफआईआर और निलंबन होता है, वहीं सिद्धीकी जैसे समान अपराध वाले अफसरों को बचाया जा रहा है। एपीएस की रकम सीधे ठेकेदारों के खाते में गई, आर्थिक लाभ ठेकेदारों को हुआ, फिर भी उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं होना सचिव और ठेकेदारों की मिलीभगत का प्रमाण है।</p>
<p>ठेकेदारों को मिल रहे इसी वीआईपी संरक्षण के कारण फील्ड में घटिया काम हो रहे हैं और आए दिन बांध व नहरें टूटने की खबरें आती हैं। विभाग मनमर्जी करते हुए राज्यपाल के नाम से जारी टेंडर की शर्तें इस पूरे मामले में अब माहौल तेजी से बदल रहा है। मांग उठ रही है कि बिसेन और सिद्धीकी को तत्काल सस्पेंड कर एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही ई-श्रेणी में बांटे गए सभी 20 कार्यों का स्पेशल ऑडिट हो और ईओडब्ल्यू (EOW) या एसीबी (ACB) से मामले की जांच कराई जाए, ताकि असली बेरोजगारों का हक मारने वालों पर नकेल कसी जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>कानून</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 09:43:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ के एडवोकेट जनरल विवेक शर्मा बने सीनियर एडवोकेट, हाईकोर्ट की फुल कोर्ट ने दी मंजूरी: देखें सूची</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के एडवोकेट जनरल विवेक शर्मा को सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित कर दिया है। हाईकोर्ट की फुल कोर्ट की बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा के बाद इसे अपनी तरफ से मंजूरी दे दी गई। कोर्ट से हरी झंडी मिलने के तुरंत बाद रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव ने अपने हस्ताक्षर से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी है। जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, विवेक शर्मा का सीनियर एडवोकेट के रूप में यह पदनाम तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा।</p>
<p>हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा जारी इस आदेश के बाद विवेक शर्मा अब आधिकारिक रूप</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/law/chhattisgarhs-advocate-general-vivek-sharma-becomes-senior-advocate-high-courts/article-12163"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-08/img_20260829_085247.jpg" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के एडवोकेट जनरल विवेक शर्मा को सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित कर दिया है। हाईकोर्ट की फुल कोर्ट की बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा के बाद इसे अपनी तरफ से मंजूरी दे दी गई। कोर्ट से हरी झंडी मिलने के तुरंत बाद रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव ने अपने हस्ताक्षर से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी है। जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, विवेक शर्मा का सीनियर एडवोकेट के रूप में यह पदनाम तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा।</p>
<p>हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा जारी इस आदेश के बाद विवेक शर्मा अब आधिकारिक रूप से सीनियर एडवोकेट की श्रेणी में आ गए हैं। रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव की तरफ से जारी किए गए पत्र में उन आदेशों का जिक्र है, जिनके आधार पर यह फैसला लिया गया है। फुल कोर्ट ने बिना किसी विलंब के इस विषय पर अपनी सहमति जताई, जिसके बाद यह अधिसूचना जारी कर दी गई है।</p>
<p><strong>देखें आदेश </strong></p>
<div class="embed-responsive" style="width:100%;border:1px solid #C0C0C0;height:600px;"><iframe class="embed-responsive-item" style="border:0;" src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-09/2026__22442_1_2026_09_01.pdf" allowfullscreen=""></iframe></div>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट के 13 मई 2025 के फैसले का हवाला</strong></p>
<p>इस पूरी प्रक्रिया और अधिसूचना में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का प्रमुखता से उल्लेख किया गया है, जिसके आधार पर यह नामकरण हुआ। अधिसूचना में विस्तार से बताया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने 13 मई 2025 को अपना आदेश सुनाया था। यह आदेश आपराधिक अपील संख्या 865 of 2025, जितेंदर कल्ला बनाम राज्य (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार) के मामले में पारित किया गया था।</p>
<p>इसी आपराधिक अपील में दिए गए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की फुल कोर्ट ने एडवोकेट जनरल विवेक शर्मा को सीनियर एडवोकेट नामित करने का अंतिम निर्णय लिया।</p>
<p><strong>तत्काल प्रभाव से लागू हुआ आदेश</strong></p>
<p>जितेंदर कल्ला बनाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार मामले के आदेश को ही इस मनोनयन का आधार बनाया गया है। आदेश का परिपालन करते हुए हाईकोर्ट ने तत्काल प्रभाव से यह अधिसूचना लागू कर दी है। रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव द्वारा जारी की गई यह अधिसूचना जारी होने की तिथि से ही प्रभावशील हो गई है। फुल कोर्ट के निर्णय के बाद प्रशासनिक स्तर पर कागजी कार्यवाही पूरी की गई और सर्वोच्च न्यायालय की क्रिमिनल अपील 865 of 2025 के फैसले को आधार मानकर इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। जिसके तहत छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने यह फैसला लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कानून</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/law/chhattisgarhs-advocate-general-vivek-sharma-becomes-senior-advocate-high-courts/article-12163</link>
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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 06:58:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्रांट आवंटन में 50% कमीशनखोरी की चर्चा: 3 निजी कॉलेजों पर मेहरबान विभाग, दुर्गा-सीएमडी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान जनभागीदारी के भरोसे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में अनुदान प्राप्त और गैर-अनुदान प्राप्त निजी कॉलेजों के बीच शासकीय ग्रांट के आवंटन में भारी प्रशासनिक विसंगतियां और नीतियां भेदभाव का कारण बन गई हैं। पूरे प्रदेश में पूर्व से संचालित हो रहे 25 से 50 अशासकीय कॉलेजों को ग्रांट नहीं दिया जा रहा है। वहीं, राज्य सरकार केवल तीन कॉलेजों— गुरुकुल महाविद्यालय रायपुर, अग्रसेन कॉलेज कोरबा और पी. जी. डागा कॉलेज रायपुर पर मेहरबान है। इन तीनों संस्थानों को तीन-तीन साल का रेगुलर ग्रांट दिया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस आबंटन में 50% की हिस्सेदारी का बंटवारा किया जा रहा है। पारदर्शी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/law/discussion-of-50-commissions-in-grant-allocation-departments-are-kind/article-12162"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/image_search_1788311523056.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में अनुदान प्राप्त और गैर-अनुदान प्राप्त निजी कॉलेजों के बीच शासकीय ग्रांट के आवंटन में भारी प्रशासनिक विसंगतियां और नीतियां भेदभाव का कारण बन गई हैं। पूरे प्रदेश में पूर्व से संचालित हो रहे 25 से 50 अशासकीय कॉलेजों को ग्रांट नहीं दिया जा रहा है। वहीं, राज्य सरकार केवल तीन कॉलेजों— गुरुकुल महाविद्यालय रायपुर, अग्रसेन कॉलेज कोरबा और पी. जी. डागा कॉलेज रायपुर पर मेहरबान है। इन तीनों संस्थानों को तीन-तीन साल का रेगुलर ग्रांट दिया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस आबंटन में 50% की हिस्सेदारी का बंटवारा किया जा रहा है। पारदर्शी नीति के अभाव में हो रही इस बंदरबांट से उच्च शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं।</p>
<p><strong>चुनिंदा कॉलेजों को ग्रांट मिलने का तकनीकी कारण</strong></p>
<p>शासन स्तर पर विशिष्ट कॉलेजों को वित्तीय ग्रांट देने के पीछे कुछ विशेष नियम या कोर्ट के आदेश बताए जाते हैं। विभागीय प्रक्रिया में यूजीसी की धारा 2(f) और 12(B) के तहत मान्यता का हवाला देकर इन संस्थानों को केंद्रीय या राज्यीय योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता के पात्र बता दिया जाता है। साथ ही, अल्पसंख्यक या महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के नाम पर विशिष्ट सामाजिक ट्रस्टों द्वारा संचालित संस्थानों के लिए विशेष बजटीय प्रावधान कर ब्लॉक ग्रांट को मंजूरी दी जाती है। जब नियमों की आड़ में कुछ संस्थानों को प्राथमिकता दी जाती है, तो वहां 50% कमीशनखोरी वाली शिकायतें आती हैं।</p>
<p><strong>दुर्गा और सीएमडी जैसे पुराने कॉलेजों की अनदेखी</strong></p>
<p>जहां चुनिंदा संस्थानों को रेगुलर ग्रांट मिल रहा है, वहीं मध्य प्रदेश के समय के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित अशासकीय सहायता प्राप्त (Aided) कॉलेज अनदेखी का शिकार हैं। रायपुर के दुर्गा कॉलेज और बिलासपुर के सीएमडी कॉलेज के साथ हो रहे प्रशासनिक भेदभाव का मुख्य कारण पदों को खत्म करने की नीति (Zero Post Policy) है। स्वीकृत सेटअप के तहत जब भी यहां कोई वरिष्ठ प्रोफेसर सेवानिवृत्त होता है, तो राज्य सरकार वित्तीय बोझ कम करने के बहाने उस अनुदानित पद को भरने के बजाय हमेशा के लिए फ्रीज या समाप्त कर देती है।</p>
<p>विभाग की मंशा अब इन पुराने संस्थानों को पूरी तरह से स्ववित्तीय (Self-Finance) मोड में धकेलने की है, ताकि वेतन और रखरखाव के लिए ग्रांट न देना पड़े। इसी वजह से इन ऐतिहासिक कॉलेजों में नियमित शिक्षकों की भारी कमी हो गई है और ये पूरी तरह से अतिथि शिक्षकों या जनभागीदारी के भरोसे चल रहे हैं।</p>
<p><strong>अन्य 25 से 50 अशासकीय कॉलेजों के आबंटन में रोड़े</strong></p>
<p>प्रदेश में चल रहे बाकी पुराने अशासकीय कॉलेजों को अनुदान सूची से बाहर रखा गया है। इसका सबसे बड़ा कारण नया अनुदान नियम बंद होना है। राज्य सरकार ने पिछले कुछ दशकों से नए निजी कॉलेजों को 'शत-प्रतिशत अनुदान' की सूची में शामिल करना लगभग बंद कर दिया है। उच्च शिक्षा विभाग का मुख्य ध्यान नए सरकारी कॉलेज खोलने पर केंद्रित रहता है।</p>
<p>बजटीय कटौती का सारा असर निजी या अशासकीय सोसायटियों द्वारा संचालित कॉलेजों के आबंटन पर पड़ा है, जिसे न्यूनतम कर दिया गया है। बिना समान नीति लागू किए ग्रांट का यह मनमाना बंटवारा पूरी उच्च शिक्षा व्यवस्था की विसंगतियों को उजागर कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कानून</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/law/discussion-of-50-commissions-in-grant-allocation-departments-are-kind/article-12162</link>
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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 06:42:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भिलाई में तड़के ईडी की बड़ी रेड: पूर्व सीएम भूपेश बघेल के पीए के घर पहुंची टीम, दस्तावेजों की हो रही जांच</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भिलाई। छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तड़के फिर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। भिलाई में आज सुबह करीब 6 बजे ईडी की टीम ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पीए केके चंद्राकर के घर पर दबिश दी है। अलसुबह अचानक हुई इस रेड से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और हलचल बढ़ गई।</p>
<p>मौके से मिल रही जानकारी के अनुसार, ईडी के अधिकारी घर के भीतर रखे तमाम दस्तावेजों और अन्य जरूरी सामानों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। भिलाई स्थित आवास के बाहर रायपुर पासिंग की दो से तीन गाड़ियां खड़ी हैं। बताया जा रहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/eds-big-raid-in-bhilai-early-in-the-morning-team/article-12139"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/img_20260901_090515.png" alt=""></a><br /><p>भिलाई। छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तड़के फिर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। भिलाई में आज सुबह करीब 6 बजे ईडी की टीम ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पीए केके चंद्राकर के घर पर दबिश दी है। अलसुबह अचानक हुई इस रेड से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और हलचल बढ़ गई।</p>
<p>मौके से मिल रही जानकारी के अनुसार, ईडी के अधिकारी घर के भीतर रखे तमाम दस्तावेजों और अन्य जरूरी सामानों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। भिलाई स्थित आवास के बाहर रायपुर पासिंग की दो से तीन गाड़ियां खड़ी हैं। बताया जा रहा है कि इन्हीं गाड़ियों में सवार होकर प्रवर्तन निदेशालय के पांच से 6 अधिकारी सुबह-सुबह यहां पहुंचे।</p>
<p>अधिकारियों ने पहुंचते ही पूरे घर को अपने रडार पर ले लिया। सुरक्षा के मद्देनजर घर के बाहर चारों तरफ सुरक्षाकर्मियों के जवानों को मुस्तैदी से तैनात कर दिया गया है। मुख्य दरवाजे को बंद कर दिया गया है और भीतर किसी के भी जाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल के पीए के घर अचानक ईडी की टीम के पहुंचने से आस-पास के इलाके में भी गहमागहमी बनी हुई है।</p>
<p>फिलहाल, टीम घर के अंदर मौजूद फाइलों और कागजातों को खंगाल रही है। यह कार्रवाई किस मामले को लेकर की जा रही है, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर अभी तक कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। जांच एजेंसी घर के कोने-कोने की जांच कर रही है। प्रवर्तन निदेशालय की जांच पूरी होने के बाद ही कार्रवाई से जुड़ी आधिकारिक और विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। अभी टीम की जांच लगातार जारी है और घर के बाहर जवानों का पहरा लगा हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>कानून</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/eds-big-raid-in-bhilai-early-in-the-morning-team/article-12139</link>
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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 09:05:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>75 लाख के बांड ने रोकी रेलवे की नौकरी, डॉक्टर ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">बिलासपुर</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;"> : </span></strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">भारतीय रेलवे में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">) <span lang="hi" xml:lang="hi">के जरिए ग्रुप-ए अधिकारी के पद पर चयनित छत्तीसगढ़ की मेडिकल हेल्थ ऑफिसर डॉ. अधिश्री वाजपेयी की नियुक्ति अब </span>75 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख रुपये के बांड की शर्त के चलते अटक गई है। राज्य सरकार ने उन्हें रेलवे की नौकरी जॉइन करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">देने से इनकार कर दिया है। इस फैसले को डॉ. वाजपेयी ने बिलासपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी है। </span></span><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">याचिका की सुनवाई जस्टिस ए के प्रसाद की सिंगल बेंच में हुई। मामले में कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/law/75-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%96-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A4%B5%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A5%8C%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%80--%E0%A4%A1%E0%A5%89%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%9F%E0%A4%96%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%88%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BE/article-12105"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-08/bilaspur-high-court1584422692_160556707422.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">बिलासपुर</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;"> : </span></strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">भारतीय रेलवे में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">) <span lang="hi" xml:lang="hi">के जरिए ग्रुप-ए अधिकारी के पद पर चयनित छत्तीसगढ़ की मेडिकल हेल्थ ऑफिसर डॉ. अधिश्री वाजपेयी की नियुक्ति अब </span>75 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख रुपये के बांड की शर्त के चलते अटक गई है। राज्य सरकार ने उन्हें रेलवे की नौकरी जॉइन करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">देने से इनकार कर दिया है। इस फैसले को डॉ. वाजपेयी ने बिलासपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी है। </span></span><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">याचिका की सुनवाई जस्टिस ए के प्रसाद की सिंगल बेंच में हुई। मामले में कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए सितंबर के अंतिम सप्ताह की तारीख तय की है।</span></p>
<p><strong><span lang="ar-sa" style="font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="ar-sa">पीजी पूरी करने के बाद राज्य सेवा में की जॉइनिंग</span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">याचिका के अनुसार</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉ. अधिश्री वाजपेयी वर्तमान में राज्य सरकार के अधीन मेडिकल हेल्थ ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी सेवा के दौरान राज्य सरकार के साथ एक बांड निष्पादित किया था। पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी। इसमें उनका चयन भारतीय रेलवे में असिस्टेंट डिविजनल मेडिकल ऑफिसर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रुप-ए के पद पर हुआ। उन्हें </span>30 <span lang="hi" xml:lang="hi">जनवरी </span>2024 <span lang="hi" xml:lang="hi">को नियुक्ति भी मिल गई थी। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नियुक्ति के समय वह पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही थीं। ऐसे में संबंधित अधिकारियों ने उन्हें पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए निर्धारित अवधि तक छूट दी थी। पीजी की पढ़ाई पूरी होने और छूट की अवधि समाप्त होने के बाद उन्होंने राज्य सरकार की सेवा जॉइन कर ली।</span></span></p>
<p><strong><span lang="ar-sa" style="font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="ar-sa">रेलवे में जॉइनिंग के लिए मांगी एनओसी</span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">याचिका में कहा गया है कि रेलवे की नियुक्ति पर जॉइन करने के लिए डॉ. वाजपेयी ने राज्य सरकार से एनओसी मांगी थी। लेकिन उनका आवेदन </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">16 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को खारिज कर दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य सरकार के साथ किए गए बांड में </span>75 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख रुपये की राशि की शर्त है। उन्हें आशंका है कि यदि वह राज्य सरकार से एनओसी लिए बिना रेलवे की नियुक्ति जॉइन करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाती हैं तो बांड की शर्तों के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।</span></span></p>
<p><strong><span lang="ar-sa" style="font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="ar-sa">एनओसी पर पुनर्विचार की मांग</span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">डॉ. वाजपेयी ने हाईकोर्ट से राज्य सरकार को उनके एनओसी आवेदन पर दोबारा विचार करने का निर्देश देने की मांग की है। साथ ही </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">75 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख रुपये की बांड राशि की शर्त से छूट देने के उनके अनुरोध पर भी विचार करने की मांग की गई है।</span></span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">फिलहाल हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई सितंबर के अंतिम सप्ताह में होगी। अब सरकार के जवाब के बाद यह स्पष्ट होगा कि डॉ. वाजपेयी को रेलवे की ग्रुप-ए सेवा में शामिल होने के लिए एनओसी और बांड के मामले में क्या राहत मिलती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कानून</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>हाईकोर्ट</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 14:15:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूकर फार्म की दीवार में लाखों का घोटाला: 9 इंजीनियरों पर FIR, अफसरों को बचाने पुलिस पेश नहीं कर रही चालान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अंबिकापुर। आरईएस (ग्रामीण यांत्रिकी सेवा) संभाग अंबिकापुर में सरकारी खजाने में सेंधमारी की कहानी अब पुलिसिया लेटलतीफी के इर्द-गिर्द घूम रही है। कोर्ट के सख्ती के बाद इस मामले में एफआईआर तो दर्ज हो चुकी, मगर इसके बाद पुलिस की कार्यवाही अचानक धीमी पड़ चुकी है। गोधनपुर निवासी रोहित सिंह का आरोप है कि पुलिस विभाग 9 इंजीनियरों और विभागीय अफसरों को बचाने में लगा है। इसी वजह से जानबूझकर न्यायालय में चालान (चार्जशीट) पेश करने की फाइल आगे नहीं बढ़ाई जा रही।</p>
<p><strong>यह पूरा मामला </strong></p>
<p>घटना वर्ष 2022-23 की है। सकालो स्थित पशुपालन विभाग के सूकर फार्म के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/scam-worth-lakhs-in-pig-farm-wall-fir-against-9/article-12101"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-08/screenshot_20260830_090940.jpg" alt=""></a><br /><p>अंबिकापुर। आरईएस (ग्रामीण यांत्रिकी सेवा) संभाग अंबिकापुर में सरकारी खजाने में सेंधमारी की कहानी अब पुलिसिया लेटलतीफी के इर्द-गिर्द घूम रही है। कोर्ट के सख्ती के बाद इस मामले में एफआईआर तो दर्ज हो चुकी, मगर इसके बाद पुलिस की कार्यवाही अचानक धीमी पड़ चुकी है। गोधनपुर निवासी रोहित सिंह का आरोप है कि पुलिस विभाग 9 इंजीनियरों और विभागीय अफसरों को बचाने में लगा है। इसी वजह से जानबूझकर न्यायालय में चालान (चार्जशीट) पेश करने की फाइल आगे नहीं बढ़ाई जा रही।</p>
<p><strong>यह पूरा मामला </strong></p>
<p>घटना वर्ष 2022-23 की है। सकालो स्थित पशुपालन विभाग के सूकर फार्म के लिए 450 मीटर लंबी बाउंड्रीवॉल का निर्माण होना था। इसके लिए 16.75 लाख रुपए की लागत तय की गई थी। इस निर्माण का जिम्मा मेसर्स आशीर्वाद कंस्ट्रक्शन के ठेकेदार दीपांशु राज को 30.35 प्रतिशत कम दर पर सौंपा गया। कम दर पर ठेका लेने के बाद मुनाफे का जो खेल शुरू हुआ, उसमें ठेकेदार से लेकर सरकारी अधिकारी तक शामिल हो गए।</p>
<p>विभागीय जांच में जो खुलासे हुए, वह निर्माण कार्यों में होने वाली लूट-खसोट का जीता-जागता नमूना है। अफसरों और ठेकेदार की आपसी मिलीभगत से निर्माण स्थल पर 12 एमएम मोटी छड़ की जगह 10 एमएम की कमजोर छड़ लगा दी गई। कागजों में 131 कॉलम खड़े कर दिए गए, मगर मौके पर गिनती की गई तो महज 50 कॉलम ही मिले। बाकी के कॉलम सिर्फ फाइलों में ही तन गए। फर्जी भुगतान की जल्दबाजी ऐसी थी कि कॉइल तार के नाम पर 60 हजार का खर्च बिना किसी प्राक्कलन के 7.17 लाख रुपए बताकर पास कर दिया गया।</p>
<p>शिकायतकर्ता रोहित सिंह का आरोप है कि भ्रष्टाचार के पक्के सबूत और न्यायालय के निर्देश के बावजूद पुलिस मामले में चार्जशीट दायर करने से कतरा रही है। उनका कहना है कि पुलिस का यह ढुलमुल रवैया सिर्फ इसलिए है ताकि आरोपी अधिकारियों को किसी भी तरह से अभयदान दिया जा सके। जब निर्माण कार्य में हुई गड़बड़ी विभागीय जांच में पूरी तरह प्रमाणित हो चुकी है, तो फिर न्यायालय में चालान पेश करने में देरी का कारण समझ से परे है। </p>
<p><strong>इन पर दर्ज हुई FIR</strong></p>
<p>गांधीनगर पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर निम्न लोगों के खिलाफ IPC की धारा 420, 409, 467, 468, 471, 120B के तहत मामला दर्ज किया है।</p>
<p> </p>
<ul>
<li>दीपांशु राज – प्रोप्राइटर, मेसर्स आशीर्वाद कंस्ट्रक्शन</li>
<li>उपेंद्र सिंह सेंगर - तत्कालीन सहायक अभियंता</li>
<li>विवेक प्रताप सिंह राठौर - उप अभियंता, RES अंबिकापुर</li>
<li>आर.पी. कुटार – EE, RES अंबिकापुर</li>
<li>डी.के. मिंज – SDO, RES उप संभाग लखनपुर</li>
<li>शैलेंद्र भारती - SDO, उप संभाग उदयपुर</li>
<li>अविनाश राज सिन्हा - सब इंजीनियर, जनपद पंचायत लखनपुर</li>
<li>जी.एम. सिंह – SE, RES सरगुजा मंडल</li>
<li>मानस गुप्ता - SDO, RES सरगुजा मंडल</li>
<li>फरहत खान - सब इंजीनियर, RES सरगुजा मंडल</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>कानून</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/scam-worth-lakhs-in-pig-farm-wall-fir-against-9/article-12101</link>
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                <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 09:10:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
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