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                <title>कानून - National Jagat Vision</title>
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                <description>कानून RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पीएचक्यू के आदेश को ठेंगा दिखाना पड़ा भारी, एसएसपी ने तत्कालीन सिरगिट्टी टीआई को किया सस्पेंड</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बिहार के कोर्ट से जारी गिरफ्तारी वारंट की रिपोर्ट दबाकर बैठे थे निरीक्षक।</strong></p>
<p><strong>मुख्यालय के आदेश की अनदेखी पर एसएसपी रजनेश सिंह ने चलाया चाबुक।</strong></p>
<p><strong>लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में सस्पेंड कर भेजे गए पुलिस लाइन।</strong></p>
<p>  बिलासपुर पुलिस विभाग में बड़ी  कार्रवाई हुई है। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रजनेश सिंह ने काम में लापरवाही बरतने वाले सिरगिट्टी थाना प्रभारी को सस्पेंड कर दिया है। </p>
<p>एसएसपी ने तत्कालीन सिरगिट्टी थाना प्रभारी (हाल रक्षित केंद्र) निरीक्षक अभय सिंह बैस को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पुलिस मुख्यालय (PHQ) के निर्देशों की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/phqs-order-had-to-be-defied-ssp-suspended-the-then/article-10481"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/image_search_1781859999361.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बिहार के कोर्ट से जारी गिरफ्तारी वारंट की रिपोर्ट दबाकर बैठे थे निरीक्षक।</strong></p>
<p><strong>मुख्यालय के आदेश की अनदेखी पर एसएसपी रजनेश सिंह ने चलाया चाबुक।</strong></p>
<p><strong>लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में सस्पेंड कर भेजे गए पुलिस लाइन।</strong></p>
<p> बिलासपुर पुलिस विभाग में बड़ी  कार्रवाई हुई है। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रजनेश सिंह ने काम में लापरवाही बरतने वाले सिरगिट्टी थाना प्रभारी को सस्पेंड कर दिया है। </p>
<p>एसएसपी ने तत्कालीन सिरगिट्टी थाना प्रभारी (हाल रक्षित केंद्र) निरीक्षक अभय सिंह बैस को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पुलिस मुख्यालय (PHQ) के निर्देशों की घोर अनदेखी की और तय समय पर एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट उच्च कार्यालय को नहीं भेजी।</p>
<h5><strong>बिहार कोर्ट से जुड़ा है गिरफ्तारी का मामला</strong></h5>
<p>दरअसल, इस पूरी लापरवाही की जड़ बिहार के भभुआ (कैमूर) से जुड़ी है। वहां के प्रथम व्यवहार न्यायालय ने एक प्रकरण में मोहम्मद आरिफ खान नाम के आरोपी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।</p>
<p>आरोपी मोहम्मद आरिफ खान (पिता अलीम खान) बिलासपुर के यदुनंदन नगर और वर्तमान में मैग्नेटो मॉल के पास बनर्जी गली का रहने वाला है। भभुआ कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 144(3) के तहत वारंट जारी कर बिलासपुर पुलिस को कार्रवाई के लिए भेजा था।</p>
<p><strong>पीएचक्यू के आदेश की उड़ाई धज्जियां</strong></p>
<p>इस वारंट की तामीली या अदम तामीली को लेकर रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय ने 12 जून 2026 को एक पत्र जारी किया था। पीएचक्यू ने एक तय समयावधि के भीतर इस कार्रवाई का पालन प्रतिवेदन (रिपोर्ट) मांगा था।</p>
<p>लेकिन तत्कालीन सिरगिट्टी टीआई अभय सिंह बैस ने मुख्यालय के इस स्पष्ट आदेश की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने न तो वारंट तामील कराने में मुस्तैदी दिखाई और न ही शासन को तय समय पर जवाब भेजना जरूरी समझा।</p>
<p><strong>एसएसपी ने माना 'घोर लापरवाही', भेजा लाइन</strong></p>
<p>अफसर के इस सुस्त रवैये और अनुशासनहीनता पर एसएसपी रजनेश सिंह ने बेहद कड़ा रुख अपनाया। निलंबन आदेश में स्पष्ट लिखा गया है कि पुलिस मुख्यालय के निर्देश के बाद भी रिपोर्ट न भेजना पदीय दायित्वों में 'घोर लापरवाही' को दर्शाता है।</p>
<p>इसी आधार पर एसएसपी ने बिना कोई ढील दिए निरीक्षक बैस को सस्पेंड कर दिया है। निलंबन की इस पूरी अवधि में उनका मुख्यालय रक्षित केंद्र (लाइन) रहेगा, इस तगड़ी कार्रवाई से जिले भर के थानों में हड़कंप मच गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>कानून</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:36:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आदिवासियों ने जेल से बचने के लिए बेचा अनाज, कर्ज लेकर चुकाई 15 से 25 हजार तक की घूस।</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बैगा समाज का अल्टीमेटम— भ्रष्ट अफसर निलंबित नहीं हुए तो सड़कों पर होगा उग्र आंदोलन।</strong></p>
<p>  </p>
<p>कवर्धा। कबीरधाम जिले में आबकारी विभाग की घिनौनी करतूत सामने आई है। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष संरक्षित बैगा जनजाति के लोग आबकारी अधिकारियों के खौफ से अपनी पुश्तैनी जमीनें और घर का अनाज तक बेचने को मजबूर हो गए हैं।</p>
<p>आरोप है कि आबकारी विभाग के सब-इंस्पेक्टर (SI) रायजादा और SI गीता ने क्षेत्र में अवैध वसूली का ऐसा रैकेट चलाया है, जिसने गरीबों की कमर तोड़ दी है। भोले-भाले आदिवासियों पर महुआ शराब के फर्जी और बढ़ाकर मामले दर्ज किए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/to-avoid-jail-tribals-sold-grains-took-loan-and-paid/article-10451"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_000000001e147207a12f74429adbe771.png" alt=""></a><br /><p><strong>बैगा समाज का अल्टीमेटम— भ्रष्ट अफसर निलंबित नहीं हुए तो सड़कों पर होगा उग्र आंदोलन।</strong></p>
<p> </p>
<p>कवर्धा। कबीरधाम जिले में आबकारी विभाग की घिनौनी करतूत सामने आई है। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष संरक्षित बैगा जनजाति के लोग आबकारी अधिकारियों के खौफ से अपनी पुश्तैनी जमीनें और घर का अनाज तक बेचने को मजबूर हो गए हैं।</p>
<p>आरोप है कि आबकारी विभाग के सब-इंस्पेक्टर (SI) रायजादा और SI गीता ने क्षेत्र में अवैध वसूली का ऐसा रैकेट चलाया है, जिसने गरीबों की कमर तोड़ दी है। भोले-भाले आदिवासियों पर महुआ शराब के फर्जी और बढ़ाकर मामले दर्ज किए जा रहे हैं और जेल भेजने की धमकी देकर उनसे मोटी रकम ऐंठी जा रही है।</p>
<p><strong>फर्जी केस का जाल बिछा कर लाखों की उगाही</strong></p>
<p>बैगा समाज ने मुख्य सचिव और आबकारी आयुक्त को सौंपे गए शिकायत पत्र में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पीड़ितों का कहना है कि अधिकारी 5 लीटर महुआ शराब पकड़ते हैं और कागजों में उसे 10 से 40 लीटर बताकर डराते हैं।</p>
<p>इसके बाद कोरे कागजों पर अंगूठे लगवाए जाते हैं। डरा-धमका कर 15 से 25 हजार रुपए तक की रिश्वत मांगी जाती है। पैसे न देने पर आदिवासियों पर सीधे केस बनाकर उन्हें जेल भेजा जा रहा है।</p>
<p><strong>किसी ने बेचा अनाज, तो किसी ने गिरवी रखी जमीन</strong></p>
<p>सरोदा गांव के सौखीराम बैगा और चोरभट्टी के सुखचंद बैगा की कहानी रोंगटे खड़े कर देने वाली है। इन दोनों आदिवासियों ने पुलिस के डर से अपने घर का सालभर का अनाज बेच दिया। ब्याज पर कर्ज लिया और अपनी खेती की जमीनें तक गिरवी रख दीं।</p>
<p>दोनों ने किसी तरह 25-25 हजार रुपए की रकम जुटाई और अधिकारियों के हाथ पर रख दी। लेकिन इतनी मोटी रकम लूटने के बाद भी अधिकारियों का कलेजा नहीं पसीजा और दोनों को जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया गया।</p>
<p><strong>बिना शराब पकड़े भी ऐंठ लिए 20 हजार</strong></p>
<p>आबकारी विभाग की इस ज्यादती की फेहरिस्त लंबी है। चिखली गांव के राजू साहू के घर पर छापा मारा गया, लेकिन वहां एक बूंद शराब नहीं मिली।</p>
<p>बावजूद इसके SI गीता साहू ने उसे झूठे केस में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी। डरा हुआ राजू कर्ज लेकर 20 हजार रुपए की घूस देने को मजबूर हो गया। वहीं, 10 जून 2026 को छेरकीकछार में महज 5 लीटर शराब को 10 लीटर बताकर फंसाए गए समरत बैगा खौफ के मारे आज भी घर से लापता हैं। उनका परिवार दाने-दाने को मोहताज है।</p>
<p><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-06/img-20260617-wa0095.jpg" alt="IMG-20260617-WA0095" width="4000" height="2252"></img></p>
<p><strong>निलंबन और SC/ST एक्ट की मांग</strong></p>
<p>भोरमदेव इलाके के भोपचंद और शहरु बैगा से भी भारी दबाव बनाकर 15 और 10 हजार रुपए की अवैध वसूली की गई। इस पूरे खेल ने कई आदिवासी परिवारों को कर्ज के दलदल में धकेल दिया है और वे भूमिहीन होने की कगार पर हैं।</p>
<p>अब बैगा समाज ने कार्रवाई के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। बैगा समाज ने शासन से तत्काल दोनों एसआई को निलंबित कर उनके खिलाफ SC/ST एक्ट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज करने की मांग की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>कानून</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/to-avoid-jail-tribals-sold-grains-took-loan-and-paid/article-10451</link>
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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 09:39:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीयू में वेतन घोटाला: साढ़े 18 हजार पर दस्तखत कराकर बैंक खातों में डाले सिर्फ 13 हजार, 180 से अधिक गार्डों ने खोला मोर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  <span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>केंद्रीय गुरु घासीदास विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही निजी एजेंसी पर लगे बेहद गंभीर आरोप।</strong></span></p>
<p>  </p>
<p>  <strong>श्रम आयुक्त कार्यालय पहुंची लिखित शिकायत; वेतन संहिता-2019 और न्यूनतम मजदूरी अधिनियम की धज्जियां उड़ाने का दावा।</strong></p>
<p>  </p>
<p>  </p>
<p>बिलासपुर। केंद्रीय गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (सीयू) में सुरक्षा कर्मियों के हक पर डाका डालने का मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय की सुरक्षा का पूरा जिम्मा संभाल रही प्राइवेट एजेंसी 'ईगल हंटर सॉल्यूशंस लिमिटेड' पर सुरक्षा गार्डों के वेतन भुगतान में भारी अनियमितता बरतने के गंभीर आरोप लगे हैं।</p>
<p>इस पूरे मामले की शिकायत अब क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय) कार्यालय तक पहुंच चुकी है। पीड़ित सुरक्षा गार्डों ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/salary-scam-in-cu-after-signing-18-and-a-half/article-10450"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_000000004f9c720793ec163b6d69f7da.png" alt=""></a><br /><p> <span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>केंद्रीय गुरु घासीदास विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही निजी एजेंसी पर लगे बेहद गंभीर आरोप।</strong></span></p>
<p> </p>
<p> <strong>श्रम आयुक्त कार्यालय पहुंची लिखित शिकायत; वेतन संहिता-2019 और न्यूनतम मजदूरी अधिनियम की धज्जियां उड़ाने का दावा।</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
<p>बिलासपुर। केंद्रीय गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (सीयू) में सुरक्षा कर्मियों के हक पर डाका डालने का मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय की सुरक्षा का पूरा जिम्मा संभाल रही प्राइवेट एजेंसी 'ईगल हंटर सॉल्यूशंस लिमिटेड' पर सुरक्षा गार्डों के वेतन भुगतान में भारी अनियमितता बरतने के गंभीर आरोप लगे हैं।</p>
<p>इस पूरे मामले की शिकायत अब क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय) कार्यालय तक पहुंच चुकी है। पीड़ित सुरक्षा गार्डों ने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत के बाद से ही विश्वविद्यालय परिसर से लेकर सुरक्षा कंपनी के अधिकारियों के बीच भारी हड़कंप मचा हुआ है।</p>
<h5><strong>कागजों पर खेल: दस्तखत पूरे पर खाते में 5593 रुपए कम</strong></h5>
<p> </p>
<p>पीड़ित सुरक्षा गार्डों ने बताया है कि कंपनी उन्हें केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी देने का बात कहती है। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों से हर महीने 18 हजार 593 रुपए वेतन प्राप्ति के बकायदा दस्तावेजों और रजिस्टरों पर हस्ताक्षर करवाए जाते हैं।</p>
<p>लेकिन जब वेतन बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता तो खातों में मात्र 13 हजार रुपए ही जमा किए जा रहे हैं। यानी कागजी आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच सीधे तौर पर करीब 5,593 रुपए का बड़ा अंतर है, जिसे डकारने का सीधा आरोप कंपनी पर लगा है।</p>
<p>वर्तमान में विश्वविद्यालय के भीतर इस निजी कंपनी के माध्यम से 180 से अधिक सुरक्षा गार्ड और सुरक्षा अधिकारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में तैनात कर्मियों के साथ हो रही इस सुनियोजित हेराफेरी को पीड़ितों ने सीधे तौर पर 'वेतन घोटाला बताया है। </p>
<h5><strong>श्रम कानूनों की उड़ीं धज्जियां, रिकॉर्ड्स खंगालने की मांग</strong></h5>
<p>क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय) कार्यालय में हुई शिकायत में सुरक्षा गार्डों ने श्रम कानूनों के खुले उल्लंघन की बात कही है। शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि कंपनी वेतन संहिता-2019 और न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के प्रावधानों को पूरी तरह से ठेंगा दिखा रही है।</p>
<p>पीड़ितों ने मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने श्रम आयुक्त से आग्रह किया है कि कंपनी के मुख्य वेतन रजिस्टर, दैनिक उपस्थिति पंजी, बैंक भुगतान के आधिकारिक विवरण और विश्वविद्यालय को भेजे गए बिलों का आपस में बारीकी से मिलान किया जाए। गार्डों का दावा है कि इन दस्तावेजों की सही जांच होते ही सच सामने आ जाएगा।</p>
<p> </p>
<h5><strong>सुपरवाइजर की सफाई: पीएफ और ईएसआईसी कटौती का राग</strong></h5>
<p>दूसरी तरफ, इन बेहद गंभीर और तीखे आरोपों पर ईगल हंटर सॉल्यूशंस लिमिटेड ने अपना बचाव करना शुरू कर दिया है। कंपनी के सुपरवाइजर अखिलेश सिंह ने सुरक्षा गार्डों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बताया है।</p>
<p>सुपरवाइजर अखिलेश सिंह का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन में से जो भी कटौती हो रही है, वह नियमानुसार है। उन्होंने दावा किया कि हर महीने सुरक्षा गार्डों के वेतन से लगभग 3,600 रुपए पीएफ (भविष्य निधि) और 500 रुपए ईएसआईसी (कर्मचारी राज्य बीमा) के रूप में काटे जाते हैं। इसके साथ ही कंपनी के संचालन संबंधी वैधानिक खर्च भी इस राशि में शामिल होते हैं।</p>
<h5><strong>सीयू प्रबंधन ने पल्ला झाड़ा: शिकायत आई तो देंगे शो-कॉज</strong></h5>
<p>इस बड़े विवाद के सामने आने के बाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) प्रबंधन भी हरकत में आता दिख रहा है, हालांकि उन्होंने फिलहाल इस पूरी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। सीयू के मीडिया सेल प्रभारी डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने इस संबंध में विश्वविद्यालय का पक्ष स्पष्ट किया है।</p>
<p>डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रबंधन केंद्र सरकार के तय नियमों और एग्रीमेंट के अनुसार सुरक्षा कंपनी को पूरा पेमेंट समय पर जारी करता है। अब वह कंपनी आगे अपने सुरक्षा अधिकारियों और गार्डों को कितना भुगतान कर रही है, इसकी अंदरूनी जानकारी यूनिवर्सिटी के पास नहीं रहती है।</p>
<p>मीडिया प्रभारी ने यह भी बताया कि इस विषय में पहले भी कुछ पूछताछ की गई थी। लेकिन अब चूंकि मामला दोबारा सामने आया है और श्रम आयुक्त तक शिकायत पहुंची है, इसलिए यदि विश्वविद्यालय के पास फिर से कोई औपचारिक शिकायत आती है, तो सुरक्षा एजेंसी को तुरंत शो-कॉज नोटिस जारी कर अनुबंध निरस्त करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>कानून</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 09:10:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ड्रग्स का फर्जी छापा या पुलिस की साजिश: 5 करोड़ की जब्ती मामले में MP के 90 से ज्यादा पुलिसकर्मियों पर FIR, कमलनाथ ने उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  <strong>राजस्थान के झालावाड़ में फर्जी छापे के आरोप में मध्य प्रदेश पुलिस के दो पूर्व टीआई समेत 90 से अधिक पुलिसवालों पर केस दर्ज।</strong></p>
<p>  </p>
<p>  </p>
<p><strong>पूर्व सीएम कमलनाथ बोले- एमपी नशा तस्करी का हब बन रहा और सुरक्षा एजेंसियां ही विवादों में घिरी हैं।</strong></p>
<p>  </p>
<p>उज्जैन। मध्य प्रदेश की पुलिस एक बार फिर बड़े विवाद में घिर गई है। ड्रग्स जब्ती के एक हाई-प्रोफाइल मामले में राजस्थान पुलिस ने एमपी के 90 से ज्यादा पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज की है। इनमें आगर मालवा जिले के दो पूर्व थाना प्रभारी (एसएचओ) भी मुख्य रूप से शामिल हैं।</p>
<p>यह पूरा मामला राजस्थान के झालावाड़</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/fake-drug-raid-or-police-conspiracy-kamal-nath-raised-questions/article-10449"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/1200-675-26932861-thumbnail-16x9-agar.jpg" alt=""></a><br /><p> <strong>राजस्थान के झालावाड़ में फर्जी छापे के आरोप में मध्य प्रदेश पुलिस के दो पूर्व टीआई समेत 90 से अधिक पुलिसवालों पर केस दर्ज।</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><strong>पूर्व सीएम कमलनाथ बोले- एमपी नशा तस्करी का हब बन रहा और सुरक्षा एजेंसियां ही विवादों में घिरी हैं।</strong></p>
<p> </p>
<p>उज्जैन। मध्य प्रदेश की पुलिस एक बार फिर बड़े विवाद में घिर गई है। ड्रग्स जब्ती के एक हाई-प्रोफाइल मामले में राजस्थान पुलिस ने एमपी के 90 से ज्यादा पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज की है। इनमें आगर मालवा जिले के दो पूर्व थाना प्रभारी (एसएचओ) भी मुख्य रूप से शामिल हैं।</p>
<p>यह पूरा मामला राजस्थान के झालावाड़ में हुई पुलिसिया कार्रवाई से जुड़ा है। अदालत के आदेश पर हुई इस कार्रवाई के बाद एमपी की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष ने पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली और नीयत पर सीधे सवाल दागे हैं।</p>
<p> </p>
<h5><strong>5 करोड़ की ड्रग्स का वो 'फर्जी' छापा</strong></h5>
<p> </p>
<p>इस हाई-प्रोफाइल मामला 28 जनवरी 2026 का है। आगर मालवा पुलिस ने राजस्थान के झालावाड़ जिले के घटाखेड़ी गांव में भारी पुलिस बल के साथ छापामार कार्रवाई की थी।</p>
<p> </p>
<p>उस वक्त पुलिस का दावा था कि वहां एक एमडी (MD) ड्रग्स बनाने वाली फैक्ट्री चल रही है। मौके से करीब 5 करोड़ रुपये कीमत के मादक पदार्थ, खतरनाक रसायन और उपकरण जब्त करने की बात कही गई थी।</p>
<p>इस कार्रवाई को पुलिस ने अपनी बड़ी कामयाबी बताकर खूब वाहवाही लूटी थी। पुलिस ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत दो लोगों को मौके से गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया था।</p>
<h5><strong>कोर्ट के एक आदेश ने पलट दिया पूरा खेल</strong></h5>
<p>पुलिस की इस 'सफलता' की कहानी में नया मोड़ तब आया, जब गिरफ्तार आरोपियों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अदालत में इस पूरे छापे और रिकवरी को ही फर्जी बता दिया।</p>
<p>अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया गया कि एमपी पुलिस ने बिना अधिकार क्षेत्र के कानूनी प्रक्रियाओं की सरेआम धज्जियां उड़ाई हैं। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए।</p>
<p>अदालत के सख्त रुख के बाद राजस्थान पुलिस ने आगर कोतवाली के पूर्व एसएचओ शशि उपाध्याय और रूप सिंह राजपूत समेत 90 पुलिसकर्मियों को नामजद किया है। इन सभी पर पद का दुरुपयोग करने, धमकी देने, कदाचार और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने की संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।</p>
<h5><strong>एमपी में सियासी बवाल, कमलनाथ ने घेरा</strong></h5>
<p>पड़ोसी राज्य में एमपी पुलिस पर इतनी बड़ी एफआईआर दर्ज होने से प्रदेश में सियासी तूफान खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार की कानून-व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है।</p>
<p>कमलनाथ ने कहा कि मध्य प्रदेश तेजी से ड्रग्स निर्माण और तस्करी का केंद्र बनता जा रहा है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि जो एजेंसियां इसे रोकने के लिए जिम्मेदार हैं, वे खुद ही इन गोरखधंधों और विवादों में घिर रही हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>कानून</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 08:27:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिशन लैंड घोटाला: मसीही समाज की जमीन बेचने वाले जयदीप रॉबिंसन पर FIR के आदेश, थाना प्रभारी को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>जिला न्यायालय ने सिविल लाइन पुलिस को दिए 7 दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करने के सख्त निर्देश।</strong></p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>लापरवाही पर भड़के जज: तय तारीख पर कोर्ट नहीं पहुंचने पर थाना प्रभारी को कारण बताओ नोटिस, अवमानना की चेतावनी।</strong></span></p>
<p>  </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>करोड़ों का खेल: फर्जी दस्तावेज और पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए कीमती नजूल भूमि को निजी खाते में खपाने का आरोप।</strong></span></p>
<p>  </p>
<p>बिलासपुर। मसीही समाज की बेशकीमती संपत्तियों और मिशन की जमीनों के कथित दुरुपयोग से जुड़े गंभीर मामले में जिला न्यायालय ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने सिविल लाइन थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताते हुए आरोपी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/mission-land-scam-fir-against-jaideep-robinson-who-sold-land/article-10448"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/image_search_1781750433461.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जिला न्यायालय ने सिविल लाइन पुलिस को दिए 7 दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करने के सख्त निर्देश।</strong></p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>लापरवाही पर भड़के जज: तय तारीख पर कोर्ट नहीं पहुंचने पर थाना प्रभारी को कारण बताओ नोटिस, अवमानना की चेतावनी।</strong></span></p>
<p> </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>करोड़ों का खेल: फर्जी दस्तावेज और पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए कीमती नजूल भूमि को निजी खाते में खपाने का आरोप।</strong></span></p>
<p> </p>
<p>बिलासपुर। मसीही समाज की बेशकीमती संपत्तियों और मिशन की जमीनों के कथित दुरुपयोग से जुड़े गंभीर मामले में जिला न्यायालय ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने सिविल लाइन थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताते हुए आरोपी जयदीप रॉबिंसन के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।</p>
<p> </p>
<p>अदालत ने पुलिस को इस पूरी कार्रवाई को सुनिश्चित करने के लिए केवल सात दिनों की मोहलत दी है। न्यायाधीश ने आदेश में साफ चेतावनी दी है कि यदि इस बार समय सीमा के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट पेश नहीं की गई, तो इसे सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना मानकर अग्रिम विधिक कदम उठाए जाएंगे।</p>
<p> </p>
<h5><strong>कोर्ट के आदेश को पुलिस ने किया हवा, भड़की अदालत</strong></h5>
<p> </p>
<p>पूरा विवाद उस समय और गहरा गया जब पुलिस ने अदालत के पुराने आदेश को नजरअंदाज कर दिया। जानकारी के अनुसार, करीब एक महीने पहले ही जिला न्यायालय ने सिविल लाइन थाना प्रभारी को इस पूरे प्रकरण की जांच कर 16 जून को कोर्ट के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए थे।पीड़ित पक्ष ने इस अदालती आदेश की बकायदा सर्टिफाइड कॉपी भी सिविल लाइन थाने में खुद उपलब्ध करवाई थी। इसके बावजूद, तय तारीख यानी 16 जून को सुनवाई के दौरान सिविल लाइन थाने की तरफ से न तो कोई जांच अधिकारी कोर्ट पहुंचा और न ही कोई लिखित रिपोर्ट पेश की गई।</p>
<p>पुलिस की इस घोर लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को कोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने इसे न्याय प्रक्रिया में बाधा माना और नाराजगी जताते हुए थाना प्रभारी को 'कारण बताओ नोटिस' जारी कर जवाब तलब कर लिया है।</p>
<h5><strong>फर्जी दस्तावेज और अपंजीकृत संस्था का बड़ा खेल</strong></h5>
<p>अदालत में दायर मुख्य शिकायत के मुताबिक, आरोपी जयदीप रॉबिंसन एक कथित अपंजीकृत संगठन का संचालन करता है। वह इसी गैर-कानूनी संस्था की आड़ लेकर खुद को मसीही समाज का सर्वेसर्वा और मुख्य प्रतिनिधि घोषित करता आ रहा है।</p>
<p>शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने मसीही समाज के पूर्वजों और विभिन्न धार्मिक पदाधिकारियों द्वारा संरक्षित की गई शहर की सबसे महंगी नजूल भूमि को खुर्द-बुर्द कर दिया। इस प्राइम लोकेशन की जमीनों के सौदे करने के लिए बकायदा जाली कागजात और फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई।</p>
<p>इतना ही नहीं, मिशन की इस विवादित जमीन की अवैध बिक्री से जो मोटी रकम प्राप्त हुई, उसे समाज या संस्था के खाते में जमा कराने के बजाय सीधे जयदीप रॉबिंसन ने अपने व्यक्तिगत बैंक खातों में ट्रांसफर कर लिया। शुरुआती जांच में यह पूरी तरह से धोखाधड़ी और वित्तीय गबन का मामला नजर आ रहा है।</p>
<h5><strong>रायपुर समेत कई जिलों में दर्ज हैं पुराने मुकदमे</strong></h5>
<p>मसीही समाज के स्थानीय पदाधिकारियों का कहना है कि आरोपी जयदीप रॉबिंसन लंबे समय से समाज की जमीनों और अन्य संपत्तियों में अवैध रूप से हस्तक्षेप कर रहा है। बार-बार विरोध करने के बाद भी जब उसकी संदिग्ध गतिविधियां बंद नहीं हुईं, तब समाज को विवश होकर अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।</p>
<p>इस बीच पुलिस और अदालती हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि आरोपी जयदीप रॉबिंसन का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। उसके खिलाफ पूर्व में राजधानी रायपुर समेत राज्य के कई अन्य जिलों में भी जालसाजी, धोखाधड़ी और जमीनों के अवैध सौदों से जुड़े गंभीर मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।</p>
<p>फिलहाल सिविल लाइन पुलिस को कोर्ट के कड़े अल्टीमेटम के बाद अब हर हाल में आगामी छह दिनों के भीतर केस दर्ज करना होगा। इसके साथ ही पुलिस प्रशासन आरोपी के पुराने थानों के रिकॉर्ड और अदालती दस्तावेजों को भी आधिकारिक रूप से खंगालने की कवायद में जुट गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>कानून</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 08:10:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर से दुर्ग भिलाई तक ठगी का बड़ा जाल सस्ते लग्जरी मकान का झांसा देकर बिल्डर पिता पुत्र फरार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर।सस्ते दाम में आलीशान मकान देने का झांसा देकर राजधानी में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. पुलिस ने ठगी के आरोप में बिल्डर मोहित सोलंकी और उसके पिता गुलाब सोलंकी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है. एफआईआर दर्ज होने की खबर मिलते ही दोनों आरोपी अपने घर से भाग निकले हैं. रायपुर पुलिस की अलग अलग टीमें उन्हें पकड़ने के लिए कई जगहों पर दबिश दे रही हैं. इसके बावजूद अब तक दोनों आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं और उनकी लगातार तलाश जारी है.</p>
<p>इस मामले में पुलिस की जांच के दौरान एक के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/big-web-of-fraud-from-raipur-to-durg-bhilai-builder/article-10367"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/image-56_1727448452.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर।सस्ते दाम में आलीशान मकान देने का झांसा देकर राजधानी में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. पुलिस ने ठगी के आरोप में बिल्डर मोहित सोलंकी और उसके पिता गुलाब सोलंकी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है. एफआईआर दर्ज होने की खबर मिलते ही दोनों आरोपी अपने घर से भाग निकले हैं. रायपुर पुलिस की अलग अलग टीमें उन्हें पकड़ने के लिए कई जगहों पर दबिश दे रही हैं. इसके बावजूद अब तक दोनों आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं और उनकी लगातार तलाश जारी है.</p>
<p>इस मामले में पुलिस की जांच के दौरान एक के बाद एक कई बड़े खुलासे हो रहे हैं. बिल्डर पिता पुत्र ने सिर्फ राजधानी रायपुर में ही लोगों को बेवकूफ नहीं बनाया बल्कि इनका नेटवर्क आसपास के जिलों में भी मजबूती से फैला था. ठगी की खबर जैसे ही मीडिया में आई दुर्ग भिलाई धमधा और साजा जैसे इलाकों से भी कई नए पीड़ित सामने आने लगे हैं. ये वो लोग हैं जिन्होंने सस्ते घर के लालच में इस बिल्डर कंपनी को अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई दे दी थी. अब अपने पैसे डूबते देख पीड़ित लोग एकजुट होकर थानों के चक्कर काट रहे हैं. आने वाले दिनों में इन आरोपियों के खिलाफ कई और नई एफआईआर दर्ज हो सकती हैं.</p>
<p>इन शातिर आरोपियों के ठगी करने का तरीका बहुत ही अलग था. लोगों को बाजार भाव से काफी कम कीमत पर लग्जरी मकान देने का शानदार ऑफर दिया जाता था. इतना कम दाम सुनकर आम लोग आसानी से इनके बिछाए जाल में फंस जाते थे. लोगों का पक्का भरोसा जीतने के लिए ये बिल्डर शुरुआत में बहुत तेजी से निर्माण काम करते थे. कुछ ही दिन में मकान का पक्का ढांचा खड़ा कर दिया जाता था. काम इतनी तेजी से होता देख ग्राहकों को लगता कि उनका पैसा बिल्कुल सही जगह लगा है. इसी पक्के भरोसे का फायदा उठाकर बिल्डर ग्राहकों से आगे के निर्माण काम के नाम पर मोटी रकम वसूल लेते थे. पैसा मिलते ही साइट पर काम पूरी तरह से बंद कर दिया जाता था.</p>
<p>यह पूरा फर्जीवाड़ा बहुत ही साफ सुथरे तरीके से चल रहा था. ग्राहकों को किसी भी तरह का शक न हो इसके लिए सारा लेनदेन नकद की जगह कंपनी के नाम पर चेक के जरिए होता था. लोगों को बाकायदा शपथ पत्र देकर यह भरोसा दिलाया जाता था कि सारा काम ऑनलाइन और पारदर्शी है. मामले का खुलासा होने के बाद जब रायपुर पुलिस ने मैग्नेटो मॉल स्थित बिल्डर के शानदार दफ्तर पर छापा मारा तो वहां बड़ा ताला लटका मिला. आरोपियों के घर पर भी सन्नाटा पसरा हुआ है. पुलिस अब दोनों की सरगर्मी से तलाश कर रही है और पीड़ितों से लगातार जानकारी जुटा रही है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>कानून</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/big-web-of-fraud-from-raipur-to-durg-bhilai-builder/article-10367</link>
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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 09:23:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजधानी में गैंगवार: पुरानी रंजिश और जेल कनेक्शन की भनक के बावजूद सोती रही पुलिस, सरेआम चले चाकू</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर ।राजधानी रायपुर की पॉश कालोनी सिविल लाइन इलाका एक बार फिर गैंगवार से दहल उठा है। पंडरी तालाब के पास दो गुटों के बीच बीच सड़क लाठी-डंडे और चाकू चले। इस घटना ने रायपुर पुलिस के खुफिया तंत्र और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना में सबसे बड़ा सवाल जो उभर कर सामने आ रहा है, वह यह है कि जब दोनों गुटों के बीच पुरानी रंजिश और हाल ही में जेल में हुए विवाद की जानकारी पुलिस को थी, तो इस गैंगवार को रोकने के लिए पहले से कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/police-kept-sleeping-despite-old-gang-rivalry-and-jail-connection/article-10366"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/img-20260614-wa0015.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर ।राजधानी रायपुर की पॉश कालोनी सिविल लाइन इलाका एक बार फिर गैंगवार से दहल उठा है। पंडरी तालाब के पास दो गुटों के बीच बीच सड़क लाठी-डंडे और चाकू चले। इस घटना ने रायपुर पुलिस के खुफिया तंत्र और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना में सबसे बड़ा सवाल जो उभर कर सामने आ रहा है, वह यह है कि जब दोनों गुटों के बीच पुरानी रंजिश और हाल ही में जेल में हुए विवाद की जानकारी पुलिस को थी, तो इस गैंगवार को रोकने के लिए पहले से कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया?</p>
<h5><strong>सड़क पर हुआ तांडव...</strong></h5>
<p>घटना सिविल लाइन थाना क्षेत्र की है। मोहसिन गैंग और उत्तम-पंकज गुट के बीच बीच सड़क पर खूनी संघर्ष हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों गुट पंडरी तालाब के पास आपस में भीड़ गए। देखते ही देखते झगड़ा इतना बढ़ा कि लाठी-डंडों के साथ-साथ बीच सड़क चाकू लेकर युवक बेखौफ एक दूसरे पर चाकू चलाने लगे इस गैंगवार में पंकज नाम के युवक के सिर पर चाकू लगी है जिसकी स्थिति नाजुक है। वहीं, जवाबी हमले में दूसरे पक्ष के मोहसिन को भी गंभीर चोट आई है। सरेआम हुई इस चाकूबाजी से इलाके में भारी दहशत फैल गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए।</p>
<h5><strong>जेल में लिखी गई थी गैंगवार की पटकथा!</strong></h5>
<p>सूत्रों की मानें तो इस गैंगवार की पटकथा कुछ दिन पहले ही केंद्रीय जेल की सलाखों के पीछे लिखी जा चुकी थी। हाल ही में जेल के भीतर बनिया और ईरानी गैंग के बीच एक बड़ा विवाद हुआ था। इसी विवाद की आंच जेल की चारदीवारी फांदकर शहर की सड़कों तक आ पहुंची। जेल की घटना के बाद से ही मोहसिन और उत्तम-पंकज गुट के बीच तनाव चरम पर था। दोनों पक्ष बदला लेने की फिराक में थे।</p>
<h5><strong>खुफिया तंत्र फेल, पुलिसिंग पर उठे सवाल</strong></h5>
<p>यह घटना रायपुर पुलिस की 'प्रिवेंटिव पुलिसिंग' (निवारक कार्रवाई) की कलई खोलती है। पुलिस का मुखबिर तंत्र पूरी तरह से फेल साबित हुआ।</p>
<p> जब शहर में दो गुट हथियारों के साथ आमने-सामने आने की तैयारी कर रहे थे, तब सिविल लाइन थाना पुलिस क्या कर रही थी?</p>
<p>  पुरानी रंजिश और जेल के विवाद का 'इनपुट' होने के बावजूद आदतन बदमाशों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?</p>
<p>   राजधानी के हृदय स्थल में ऐसा गैंगवार पुलिस के इकबाल पर सीधा तमाचा है।</p>
<h5><strong>घटना के बाद लकीर पीटती पुलिस</strong></h5>
<p>अब गैंगवार और खून-खराबे के बाद पुलिस हमेशा की तरह लकीर पीटती नजर आ रही है। सिविल लाइन पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को जैसे-तैसे नियंत्रित किया। घायल पंकज को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इलाके में भारी तनाव को देखते हुए अतिरिक्त बल तैनात कर गश्त बढ़ा दी गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>कानून</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/police-kept-sleeping-despite-old-gang-rivalry-and-jail-connection/article-10366</link>
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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 08:58:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>न्यूजक्लिक को बड़ी राहत दिल्ली हाई कोर्ट ने रद्द की एफआईआर  ईडी जांच पर भी रोक...</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यूज पोर्टल न्यूजक्लिक और उसके संस्थापक संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने इनके खिलाफ दर्ज आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्ल्यू की एफआईआर को रद्द कर दिया है. इसके साथ ही प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच भी खत्म कर दी गई है. विदेशी फंडिंग के मामले में यह कार्रवाई चल रही थी.</p>
<h5><strong>जांच एजेंसियों को लगी फटकार</strong></h5>
<p>जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सख्त टिप्पणी की. उन्होंने इसे स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता पर हमला बताया. कोर्ट ने कहा कि यह शक्तियों का गलत इस्तेमाल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/law/big-relief-to-newsclick-and-prabir-purkayastha-delhi-high-court/article-10303"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_000000008730720baf1d52ca08e8928c.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यूज पोर्टल न्यूजक्लिक और उसके संस्थापक संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने इनके खिलाफ दर्ज आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्ल्यू की एफआईआर को रद्द कर दिया है. इसके साथ ही प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच भी खत्म कर दी गई है. विदेशी फंडिंग के मामले में यह कार्रवाई चल रही थी.</p>
<h5><strong>जांच एजेंसियों को लगी फटकार</strong></h5>
<p>जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सख्त टिप्पणी की. उन्होंने इसे स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता पर हमला बताया. कोर्ट ने कहा कि यह शक्तियों का गलत इस्तेमाल है. जांच एजेंसियों ने बिना किसी ठोस सबूत के ही लंबी जांच की. कोर्ट का मानना था कि अगर एफआईआर के आरोपों को सही भी मान लिया जाए तो भी धोखाधड़ी का कोई आपराधिक मामला नहीं बनता है. इसलिए इस एफआईआर को जारी रखना कानून का दुरुपयोग था.</p>
<h5><strong>धोखाधड़ी का कोई शिकार ही नहीं था</strong></h5>
<p>कोर्ट ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि धोखाधड़ी के मामले में कोई ऐसा व्यक्ति या पक्ष होना चाहिए जिसके साथ धोखा हुआ हो. लेकिन इस मामले में किसी ने कोई शिकायत ही नहीं की थी. इसके अलावा कोर्ट ने एक और अहम बात कही. अप्रैल 2018 में जब कंपनी में निवेश आया था तब डिजिटल न्यूज मीडिया में विदेशी निवेश की कोई सीमा तय नहीं थी.</p>
<h5><strong>डेढ़ साल की जांच में ईडी खाली हाथ</strong></h5>
<p>ईडी ने इस मामले में करीब डेढ़ साल तक जांच की. कई बार पूछताछ भी की गई. इसके बावजूद ईडी कोर्ट में कोई ऐसा सबूत पेश नहीं कर सकी जिससे अपराध साबित हो सके. कोर्ट ने कहा कि जब मुख्य एफआईआर ही रद्द हो गई है तो ईडी का केस अपने आप ही खत्म हो जाता है.</p>
<h5><strong>कहां से शुरू हुआ था पूरा विवाद</strong></h5>
<p>अगस्त 2020 में ईओडब्ल्यू ने न्यूजक्लिक और प्रबीर पुरकायस्थ पर केस दर्ज किया था. आरोप था कि न्यूजक्लिक की मुख्य कंपनी को अमेरिका की कंपनी वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स से 9.59 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश मिला था. एजेंसियों का कहना था कि इसमें नियमों को तोड़ा गया है. यह भी आरोप था कि शेयरों की कीमत बढ़ाकर दिखाई गई और निवेश के पैसे का बड़ा हिस्सा सैलरी फीस और किराए जैसी चीजों पर खर्च किया गया. अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद यह पूरा केस खत्म हो गया है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>कानून</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/law/big-relief-to-newsclick-and-prabir-purkayastha-delhi-high-court/article-10303</link>
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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 09:02:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिलासपुर पुलिस में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी: SSP ने 18 पुलिसकर्मियों का किया तबादला, बेलगहना चौकी प्रभारी बदले; जानें किसे मिली कहां की जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बिलासपुर। जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरुस्त करने तथा पुलिसिंग में कसावट लाने के लिए बिलासपुर पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल किया गया है। डीआईजी सह वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने ट्रांसफर आदेश जारी किया है। इस प्रशासनिक सर्जरी में उपनिरीक्षक (SI), सहायक उपनिरीक्षक (ASI), प्रधान आरक्षक और आरक्षक स्तर के कुल 18 पुलिसकर्मियों को इधर से उधर किया गया है।</p>
<p><strong style="font-family:Mukta, sans;font-size:1.25rem;">बेलगहना चौकी की कमान ब्यास नारायण को</strong></p>
<p><strong style="font-family:Mukta, sans;font-size:1.25rem;">शहर</strong>  से लेकर देहात तक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के इरादे से यह रणनीतिक बदलाव किया गया है। जारी आदेश के मुताबिक, बेलगहना चौकी प्रभारी को हटा दिया गया</p>
<p><strong style="font-family:Mukta, sans;font-size:1.25rem;">बीडीएस</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/law/major-administrative-surgery-in-bilaspur-police-ssp-transferred-18-policemen/article-10279"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/screenshot_20260608_195546_samsung-notes.jpg" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर। जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरुस्त करने तथा पुलिसिंग में कसावट लाने के लिए बिलासपुर पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल किया गया है। डीआईजी सह वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने ट्रांसफर आदेश जारी किया है। इस प्रशासनिक सर्जरी में उपनिरीक्षक (SI), सहायक उपनिरीक्षक (ASI), प्रधान आरक्षक और आरक्षक स्तर के कुल 18 पुलिसकर्मियों को इधर से उधर किया गया है।</p>
<p><strong style="font-family:Mukta, sans;font-size:1.25rem;">बेलगहना चौकी की कमान ब्यास नारायण को</strong></p>
<p><strong style="font-family:Mukta, sans;font-size:1.25rem;">शहर</strong> से लेकर देहात तक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के इरादे से यह रणनीतिक बदलाव किया गया है। जारी आदेश के मुताबिक, बेलगहना चौकी प्रभारी को हटा दिया गया है। वहां पदस्थ उपनिरीक्षक हेमंत सिंह को अब शहर के महत्वपूर्ण सिविल लाइन थाने में नई पदस्थापना दी गई है। उनकी जगह सरकंडा थाने में पदस्थ तेजतर्रार उपनिरीक्षक ब्यास नारायण बनाफर को बेलगहना चौकी का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है।</p>
<p><strong style="font-family:Mukta, sans;font-size:1.25rem;">बीडीएस (BDS) को मिला नया प्रभारी</strong></p>
<p>पुलिस लाइन (रक्षित केंद्र) में मौजूद पुलिसकर्मियों को भी सक्रिय थानों में भेजा गया है। रक्षित केंद्र में पदस्थ उपनिरीक्षक गुलाल सोनवानी को चकरभाठा थाना भेजा गया है। खास बात यह है कि वे थाने के सामान्य कामकाज के अलावा बम निरोधक दस्ता (BDS) टीम के प्रभारी का महत्वपूर्ण जिम्मा भी संभालेंगे। इसके अलावा रतनपुर थाने से दो सिपाहियों का मस्तूरी और जूनापारा चौकी से एक आरक्षक का तखतपुर थाना ट्रांसफर किया गया है।</p>
<h5><strong>यातायात और थानों में सिपाहियों की अदला-बदली</strong></h5>
<p>शहर की ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए आरक्षक चालक धनेश साहू को यातायात थाना भेजा गया है, जहां वे क्रेन चालक की भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा: आरक्षक अंकेश केशकर:थाना पचपेड़ी, आरक्षक ज्ञानेश्वर यादव: पुलिस सहायता केंद्र मोपका, आरक्षक मुकेश राय: थाना तोरवा,सकरी, सिरगिट्टी और सरकंडा थानों के बीच भी आरक्षकों की अदला-बदली कर सुरक्षा व्यवस्था को चौकस करने का प्रयास किया गया है।</p>
<p>देखे लिस्ट </p>
<p><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-06/screenshot_20260608_195546_samsung-notes.jpg" alt="Screenshot_20260608_195546_Samsung Notes" width="1080" height="2340"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कानून</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/law/major-administrative-surgery-in-bilaspur-police-ssp-transferred-18-policemen/article-10279</link>
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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 20:12:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>30 साल बाद भी नहीं बच पाया रिटायर्ड अफसर! 83 की उम्र में चलेगा भ्रष्टाचार का मुकदमा, हाईकोर्ट ने कहा- अपराध गंभीर है</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>NJV डेस्क।</strong></p>
<p>रायपुर। कानून की चक्की धीमी जरूर पीसती है, लेकिन बहुत बारीक पीसती है। यह कहावत छत्तीसगढ़ के एक रिटायर्ड खाद्य अधिकारी द्वारिका दास भूतड़ा पर बिल्कुल सटीक बैठती है। 1995 में जब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था, तब शायद उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि 30 साल बाद, 83 वर्ष की उम्र में उन्हें कोर्ट के कटघरे में खड़ा होना पड़ेगा। बिलासपुर हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि उम्र या सिस्टम की देरी का बहाना भ्रष्टाचार जैसे गंभीर वित्तीय अपराधों से बचने की ढाल नहीं बन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/retired-officer-could-not-be-saved-even-after-30-years/article-10193"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/image_search_17806254827691.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>NJV डेस्क।</strong></p>
<p>रायपुर। कानून की चक्की धीमी जरूर पीसती है, लेकिन बहुत बारीक पीसती है। यह कहावत छत्तीसगढ़ के एक रिटायर्ड खाद्य अधिकारी द्वारिका दास भूतड़ा पर बिल्कुल सटीक बैठती है। 1995 में जब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था, तब शायद उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि 30 साल बाद, 83 वर्ष की उम्र में उन्हें कोर्ट के कटघरे में खड़ा होना पड़ेगा। बिलासपुर हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि उम्र या सिस्टम की देरी का बहाना भ्रष्टाचार जैसे गंभीर वित्तीय अपराधों से बचने की ढाल नहीं बन सकता।</p>
<p>इस मामले की प्रमुख बातें:</p>
<p> आय से अधिक संपत्ति मामले में रिटायर्ड खाद्य अधिकारी की याचिका हाईकोर्ट से खारिज।</p>
<p> 1995 में दर्ज हुआ था केस, 30 साल बाद 2025 में कोर्ट ने तय किए आरोप।</p>
<p> 303% ज्यादा संपत्ति का मामला, पत्नी-बच्चों के नाम पर खरीदे गए थे शेयर और डिबेंचर।</p>
<p> </p>
<p>  <strong>चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच का आदेश- बिना रुके 6 महीने के भीतर पूरा करें ट्रायल।</strong></p>
<p> मामला 1 जनवरी 1976 से लेकर 13 सितंबर 1995 के बीच का है। आरोप है कि अपने कार्यकाल के दौरान खाद्य अधिकारी भूतड़ा ने अपनी वैध आय से 303.45% अधिक संपत्ति अर्जित की। 90 के दशक में यह बेहिसाब रकम 43,38,887 रुपये आंकी गई थी, जो उस दौर के हिसाब से एक बहुत बड़ी राशि मानी जाती है। जांच एजेंसी की चार्जशीट के मुताबिक, यह काली कमाई सिर्फ अफसर ने अपने नाम पर नहीं रखी थी, बल्कि इसे सफेद करने के लिए पत्नी और बच्चों के नाम पर बेशुमार संपत्तियां, शेयर और डिबेंचर खरीदे गए थे।</p>
<p><strong style="font-family:Mukta, sans;font-size:1.25rem;">बचाव पक्ष का तर्क: 30 साल हो गए, अब मुकदमा बेकार</strong></p>
<p>जब बिलासपुर की विशेष अदालत ने 21 अप्रैल 2026 को इस मामले में आरोप तय किए, तो रिटायर्ड अफसर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका कर्ता ने दलील दी कि 1995 के मामले में राज्य सरकार ने अभियोजन (Prosecution) की मंजूरी ही 25 साल बाद 13 अक्टूबर 2020 को दी। इसके बाद चार्जशीट 17 दिसंबर 2024 को बनी और 3 मई 2025 को पेश हुई। याचिकाकर्ता का तर्क था कि जांच एजेंसी ने इस लेटलतीफी का कोई कारण नहीं बताया है। अपनी 83 वर्ष की उम्र और 30 साल की इस भारी देरी का हवाला देते हुए उन्होंने मुकदमा रद्द करने की गुहार लगाई।</p>
<h5><strong>हाईकोर्ट का सख्त रुख: उम्र नहीं, अपराध देखिए</strong></h5>
<p>चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभू दत्ता गुरु की अवकाशकालीन बेंच ने इस पूरे मामले की गंभीरता को परखा। राज्य शासन के वकील ने मजबूती से पक्ष रखते हुए बताया कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त और पुख्ता सबूत रिकॉर्ड पर मौजूद हैं और निचली अदालत उनकी डिस्चार्ज एप्लीकेशन पहले ही खारिज कर चुकी है।</p>
<p>हाईकोर्ट ने अपने फैसले में माना कि भले ही चार्जशीट पेश करने में देरी हुई है, लेकिन वित्तीय हेराफेरी के आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश में कोई भी गैर-कानूनी बात या अधिकार क्षेत्र की गलती नहीं है, इसलिए इस स्तर पर मामले को रद्द करना न्यायसंगत नहीं होगा।</p>
<p>हाईकोर्ट ने रिटायर्ड अफसर को राहत देने से साफ इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही, ट्रायल कोर्ट को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वह बिना किसी अनावश्यक रुकावट के, दोनों पक्षों को बेवजह का समय दिए बिना, अगले छह महीने के भीतर इस ट्रायल को उसके तार्किक अंजाम तक पहुंचाए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>कानून</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/retired-officer-could-not-be-saved-even-after-30-years/article-10193</link>
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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 09:27:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट की पुलिस अफसरों को सख्त चेतावनी: कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं, दोबारा न हो ऐसी लापरवाही</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने नहीं किया मेडिकल वेरिफिकेशन, शासन की ढिलाई से आरोपी को मिली अंतरिम जमानत। चीफ जस्टिस की बेंच ने जताई गहरी नाराजगी।</strong></p>
<p>बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों द्वारा कोर्ट के निर्देशों की खुली अनदेखी और लापरवाही पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की एकलपीठ ने राज्य शासन और पुलिस महकमे के रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए सख्त चेतावनी दी है। कोर्ट ने एडवोकेट जनरल को स्पष्ट शब्दों में निर्देशित किया है कि भविष्य में राज्य शासन की ओर से शपथ पत्र दाखिल करने में किसी भी प्रकार की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/law/high-courts-strict-warning-to-police-officers-disobedience-to-courts/article-10172"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/image_search_1780543247640.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने नहीं किया मेडिकल वेरिफिकेशन, शासन की ढिलाई से आरोपी को मिली अंतरिम जमानत। चीफ जस्टिस की बेंच ने जताई गहरी नाराजगी।</strong></p>
<p>बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों द्वारा कोर्ट के निर्देशों की खुली अनदेखी और लापरवाही पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की एकलपीठ ने राज्य शासन और पुलिस महकमे के रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए सख्त चेतावनी दी है। कोर्ट ने एडवोकेट जनरल को स्पष्ट शब्दों में निर्देशित किया है कि भविष्य में राज्य शासन की ओर से शपथ पत्र दाखिल करने में किसी भी प्रकार की चूक या ढिलाई दोबारा नहीं दोहराई जानी चाहिए। पुलिस की इस गंभीर लापरवाही का सीधा फायदा साइबर ठगी के एक आरोपी को मिला, जिसे शासन की ढिलाई के चलते कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई।</p>
<h5><strong>क्या है पूरा मामला?</strong></h5>
<p>यह पूरा मामला अंबिकापुर (सरगुजा) के साइबर रेंज पुलिस स्टेशन से जुड़ा हुआ है। यहां शिकायतकर्ता रवि मोहन गोस्वामी ने एक बड़े साइबर ठगी मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसी मामले में पकड़े गए आरोपी ने अदालत में अपनी जमानत के लिए याचिका लगाई थी, जिसमें उसने अपनी पत्नी के इलाज और आईवीएफ (IVF) प्रेग्नेंसी का हवाला देते हुए कोर्ट से राहत की मांग की थी।</p>
<h5><strong>पुलिस ने नहीं किया मेडिकल वेरिफिकेशन</strong></h5>
<p>इस प्रकरण की पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस महकमे को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वह आरोपी की पत्नी के इलाज और आईवीएफ प्रेग्नेंसी से जुड़े सभी मेडिकल दस्तावेजों का जमीनी स्तर पर भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) करे और इसकी विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में सौंपे।</p>
<p>लेकिन पुलिस ने कोर्ट के इन अहम निर्देशों को दरकिनार कर दिया। सुनवाई के दौरान जब राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) का शपथपत्र कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया, तो बेंच ने पाया कि उसमें मेडिकल वेरिफिकेशन को लेकर एक शब्द भी नहीं लिखा गया था।</p>
<h5><strong>शासन की ढिलाई, आरोपी को मिली राहत</strong></h5>
<p>शपथपत्र में इस महत्वपूर्ण जानकारी के न होने को हाईकोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया। कोर्ट ने इसे पुलिस अधिकारियों द्वारा न्यायिक आदेशों की स्पष्ट अवहेलना माना। राज्य शासन और पुलिस की ओर से बरती गई इसी लचर कार्यप्रणाली और ढिलाई के कारण साइबर ठगी के आरोपी को अदालत से अंतरिम जमानत का लाभ मिल गया।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने इस पूरी स्थिति पर सख्त ऐतराज जताते हुए शासन को कड़ी हिदायत दी है कि न्यायिक प्रक्रियाओं में ऐसी लापरवाही आगे से किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोर्ट के आदेशों का शत-प्रतिशत पालन हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कानून</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 08:51:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अफसरों की बेरुखी पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी कहा सिर्फ नियम दिखाकर गरीबों की अनुकंपा नियुक्ति रोकना गलत</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="markdown markdown-main-panel stronger enable-updated-hr-color" dir="ltr">
<p><strong>बिलासपुर हाईकोर्ट ने अंबिकापुर नगर निगम को दिया झटका कहा परिवार की माली हालत देखना अफसरों की जिम्मेदारी</strong></p>
<p>बिलासपुर। सरकारी दफ्तरों में अफसर अक्सर नियम कानूनों का हवाला देकर जरूरतमंदों को कैसे परेशान करते हैं इसका एक बड़ा उदाहरण अंबिकापुर में सामने आया। एक सफाई कर्मचारी की मौत के बाद उसके बेटे को अनुकंपा नियुक्ति सिर्फ इसलिए नहीं दी गई क्योंकि मृतक की पत्नी भी एक मामूली वेतन वाली कर्मचारी है। अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में अफसरों की इस अमानवीय सोच और बेरुखी पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ किया है कि अगर परिवार का कोई</p></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/law/high-courts-strict-comment-on-the-indifference-of-officers-said/article-10140"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/image_search_17764201043811.jpg" alt=""></a><br /><div class="markdown markdown-main-panel stronger enable-updated-hr-color" dir="ltr">
<p><strong>बिलासपुर हाईकोर्ट ने अंबिकापुर नगर निगम को दिया झटका कहा परिवार की माली हालत देखना अफसरों की जिम्मेदारी</strong></p>
<p>बिलासपुर। सरकारी दफ्तरों में अफसर अक्सर नियम कानूनों का हवाला देकर जरूरतमंदों को कैसे परेशान करते हैं इसका एक बड़ा उदाहरण अंबिकापुर में सामने आया। एक सफाई कर्मचारी की मौत के बाद उसके बेटे को अनुकंपा नियुक्ति सिर्फ इसलिए नहीं दी गई क्योंकि मृतक की पत्नी भी एक मामूली वेतन वाली कर्मचारी है। अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में अफसरों की इस अमानवीय सोच और बेरुखी पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ किया है कि अगर परिवार का कोई एक सदस्य छोटी मोटी नौकरी में है तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि पूरा परिवार गरीबी से बाहर आ गया है।</p>
<p><strong>क्या था पूरा मामला</strong></p>
<p>अंबिकापुर नगर निगम में काम करने वाले एक सफाई कर्मी का ड्यूटी के दौरान निधन हो गया था। अपने पीछे वह पत्नी तीन बेटे और एक बेटी का बड़ा परिवार छोड़ गया। यह पूरा परिवार मुख्य रूप से उसी की कमाई पर आश्रित था। पिता की मौत के बाद घर का खर्च चलाने के लिए बेटे ने सरकारी नियम के तहत अनुकंपा नियुक्ति मांगी। लेकिन नगर निगम के अफसरों ने संवेदनहीनता दिखाते हुए उसका आवेदन यह कहकर खारिज कर दिया कि उसकी मां पहले से ही सफाई कर्मचारी का काम करती है।</p>
<p><strong>जमीनी हकीकत से दूर अफसर</strong></p>
<p>मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि निगम के अधिकारियों ने यह जानने की बिल्कुल कोशिश नहीं की कि एक मामूली वेतन पाने वाली महिला अपने चार बच्चों का पेट कैसे पालेगी और उनकी पढ़ाई लिखाई कैसे होगी। इसके बाद पीड़ित ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डबल बेंच ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया और अफसरों के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए।</p>
<p><strong>मानवीय व्यवस्था है अनुकंपा नियुक्ति</strong></p>
<p>हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा कि किसी भी विभाग में अनुकंपा नियुक्ति देने का मुख्य उद्देश्य मृतक कर्मचारी के परिवार को अचानक आए भारी आर्थिक संकट से बचाना होता है। यह कोई तकनीकी अधिकार नहीं बल्कि एक कल्याणकारी और मानवीय व्यवस्था है। अफसरों को सिर्फ कागजी नियम देखकर अपनी आंखें बंद नहीं कर लेनी चाहिए। उन्हें यह देखना चाहिए कि घर के मुख्य कमाने वाले की मौत के बाद उस परिवार का गुजारा असल में कैसे हो रहा है।</p>
<p><strong>नियमों की गलत व्याख्या</strong></p>
<p>नगर निगम ने कोर्ट में साल 2013 की एक सरकारी नीति का हवाला दिया था। निगम का तर्क था कि अगर परिवार का कोई भी एक सदस्य सरकारी सेवा में है तो दूसरे को अनुकंपा की नौकरी नहीं मिल सकती। लेकिन हाईकोर्ट ने निगम की इस दलील को सिरे से ठुकरा दिया। अदालत ने कहा कि मां की बहुत कम तनख्वाह से इतने बड़े परिवार का भरण पोषण करना पूरी तरह से नामुमकिन है। हर मामले की स्थिति अलग होती है और उसी के अनुसार जमीनी फैसला लिया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>हजारों परिवारों के लिए जगी उम्मीद</strong></p>
<p>हाईकोर्ट का यह कड़ा फैसला प्रदेश के उन हजारों परिवारों के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर आया है जिनके अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन सिर्फ इसलिए दफ्तरों में धूल खा रहे हैं क्योंकि उनके घर का कोई सदस्य कहीं बहुत कम वेतन वाली नौकरी कर रहा है। इस सख्त टिप्पणी के साथ अदालत ने अंबिकापुर नगर निगम की अपील खारिज कर दी है और पीड़ित युवक को जल्द नौकरी देने का आदेश बरकरार रखा है।</p>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कानून</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:59:04 +0530</pubDate>
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