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                <title>अपराध - National Jagat Vision</title>
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                <description>अपराध RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>गैस एजेंसी में बड़ा खेल उजागर! स्टॉक में सैकड़ों सिलेंडरों की गड़बड़ी, उपभोक्ताओं से बदसलूकी के आरोप भी पाए गए सही </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बलौदाबाजार। </strong>बलौदाबाजार जिले की बम्लेश्वरी गैस एजेंसी में सामने आई अनियमितताओं ने उपभोक्ता हितों और निगरानी व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार शिकायतों के बाद जब प्रशासन हरकत में आया और संयुक्त जांच टीम ने एजेंसी का निरीक्षण किया, तब रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच चौंकाने वाली अनियमितता सामने आईं है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी के संचालन में गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि अंतिम नतीजा विस्तृत जांच और आगे की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होंगे।</p>
<p><strong>रिकॉर्ड कुछ और, हकीकत कुछ और!</strong><br />जांच</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/big-game-exposed-in-gas-agency-hundreds-of-cylinders-in/article-10432"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/gas_agency_s_negligence_exposed_1781670807.webp" alt=""></a><br /><p><strong>बलौदाबाजार। </strong>बलौदाबाजार जिले की बम्लेश्वरी गैस एजेंसी में सामने आई अनियमितताओं ने उपभोक्ता हितों और निगरानी व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार शिकायतों के बाद जब प्रशासन हरकत में आया और संयुक्त जांच टीम ने एजेंसी का निरीक्षण किया, तब रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच चौंकाने वाली अनियमितता सामने आईं है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी के संचालन में गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि अंतिम नतीजा विस्तृत जांच और आगे की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होंगे।</p>
<p><strong>रिकॉर्ड कुछ और, हकीकत कुछ और!</strong><br />जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर है। रिपोर्ट के अनुसार, 346 भरे हुए गैस सिलेंडर रिकॉर्ड के मुकाबले कम पाए गए, जबकि 296 खाली सिलेंडर निर्धारित संख्या से अधिक मिले है। इतनी बड़ी संख्या में सिलेंडरों की गड़बड़ी सामने आने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि आखिर यह अंतर कैसे पैदा हुआ और इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या निगरानी तंत्र समय रहते इन अनियमितता को पकड़ने में विफल रहा?<img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-06/gas_agency_s_negligence_exposed_1781670841.webp" alt="Gas_agency_s_negligence_exposed_1781670841" width="1200" height="675"></img></p>
<p><strong>उपभोक्ताओं की शिकायतों ने खोली एजेंसी की कार्यप्रणाली की परतें</strong><br />जांच केवल स्टॉक तक सीमित नहीं रही। उपभोक्ताओं द्वारा लंबे समय से किए जा रहे दुर्व्यवहार और अव्यवस्थित सेवा संबंधी आरोपों की भी पड़ताल की गई है। जांच टीम को कई शिकायतें प्रथम दृष्टया सही मिलीं, जिसके बाद एजेंसी की कार्यप्रणाली पर और अधिक सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि शिकायतों के बावजूद लंबे समय तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिसके कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।</p>
<p><strong>प्रशासन की कार्रवाई के बाद बढ़ी संचालक की मुश्किलें</strong><br />अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद एजेंसी संचालक के खिलाफ एलपीजी (प्रदाय एवं वितरण) विनियमन, 2000 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। साथ ही पूरी जांच रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) को भेज दी गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या उपभोक्ताओं को हुई कथित परेशानियों के लिए जवाबदेही तय की जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:39:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जंगल में मिला तेंदुए का शव, वन विभाग पर उठे सवाल! क्या वन्यजीवों की सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लोरमी। </strong>मुंगेली जिले के लोरमी वन परिक्षेत्र में एक तेंदुए का शव मिलने से वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जंगल में मृत अवस्था में मिले तेंदुए ने न केवल वन विभाग की निगरानी प्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों पर भी बहस छेड़ दी है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। प्रारंभिक स्तर पर शिकार की आशंका जताई जा रही है, हालांकि वन विभाग ने अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है और जांच पूरी होने के बाद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/dead-body-of-leopard-found-in-forest-raises-questions-on/article-10430"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/leopard_found_dead_in_lormi_forest_1781673776.webp" alt=""></a><br /><p><strong>लोरमी। </strong>मुंगेली जिले के लोरमी वन परिक्षेत्र में एक तेंदुए का शव मिलने से वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जंगल में मृत अवस्था में मिले तेंदुए ने न केवल वन विभाग की निगरानी प्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों पर भी बहस छेड़ दी है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। प्रारंभिक स्तर पर शिकार की आशंका जताई जा रही है, हालांकि वन विभाग ने अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है और जांच पूरी होने के बाद ही मौत के कारणों की पुष्टि की बात कही है।</p>
<p><strong>जंगल का राजा नहीं, अब जंगल में भी सुरक्षित नहीं?</strong><br />ग्रामीणों की सूचना पर जब वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो जंगल में तेंदुए का शव मिला है। सवाल यह है कि यदि वन क्षेत्र में नियमित निगरानी और गश्त की व्यवस्था है, तो एक संरक्षित वन्यजीव की मौत की जानकारी विभाग को ग्रामीणों से क्यों मिली? स्थानीय लोगों का कहना है कि वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता है। वहीं वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि ऐसी घटनाएं संरक्षण तंत्र की कमजोरियों की ओर संकेत करती हैं।</p>
<p><strong>शिकार की आशंका ने बढ़ाई चिंता</strong><br />हालांकि वन विभाग ने आधिकारिक तौर पर शिकार की पुष्टि नहीं की है, लेकिन प्रारंभिक जांच में इस संभावना से इनकार भी नहीं किया गया है। यदि जांच में शिकार की पुष्टि होती है, तो यह क्षेत्र में सक्रिय वन्यजीव तस्करी और अवैध शिकार गिरोहों को लेकर गंभीर चिंता का विषय होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि तेंदुआ जैसे संरक्षित वन्यजीव की मौत केवल एक घटना नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरे का संकेत हो सकती है।</p>
<p><strong>पहले भी उठते रहे हैं सवाल</strong><br />वन्यजीवों की मौत, मानव-वन्यजीव संघर्ष और अवैध शिकार को लेकर प्रदेश के विभिन्न वन क्षेत्रों में समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। इसके बावजूद ऐसी घटनाओं का सामने आना यह संकेत देता है कि जमीनी स्तर पर निगरानी और संरक्षण उपायों को और मजबूत करने की जरूरत है।</p>
<p><strong>पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें</strong><br />फिलहाल, वन विभाग ने तेंदुए के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या इसके पीछे कोई आपराधिक कारण है। लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है, यदि जंगलों में भी तेंदुए जैसे वन्यजीव सुरक्षित नहीं हैं, तो वन्यजीव संरक्षण के दावों की वास्तविक स्थिति क्या है?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:36:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> कोरिया में दिल दहला देने वाली वारदात: रेत विवाद में भाजपा नेता की जिंदा जलकर मौत, आरोपियों में भी सत्ताधारी दल से जुड़े नाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कोरिया। </strong>छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से सामने आई एक भयावह घटना ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और रेत कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोनहत क्षेत्र में भाजपा नेता भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला सिंह की जिंदा जलकर मौत के मामले ने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों तक को झकझोर कर दिया है।</p>
<p>इस घटना को लेकर सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि मृतक और आरोपी पक्ष, दोनों के सत्ताधारी दल से जुड़े होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि रेत कारोबार,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/heart-wrenching-incident-in-korea-bjp-leader-burnt-alive-in-sand/article-10428"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/fire.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोरिया। </strong>छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से सामने आई एक भयावह घटना ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और रेत कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोनहत क्षेत्र में भाजपा नेता भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला सिंह की जिंदा जलकर मौत के मामले ने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों तक को झकझोर कर दिया है।</p>
<p>इस घटना को लेकर सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि मृतक और आरोपी पक्ष, दोनों के सत्ताधारी दल से जुड़े होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि रेत कारोबार, राजनीतिक संरक्षण और क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई को लेकर भी बहस तेज हो गई है।</p>
<p><strong>रेत विवाद से शुरू हुआ खूनी अंत?</strong><br />प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मृतक भाजपा नेता भरत सिंह गहरवार और आरोपी पक्ष के बीच लंबे समय से रेत उत्खनन और उससे जुड़े कारोबार को लेकर विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि घटना से कुछ घंटे पहले भी दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई थी, जिसकी सूचना स्थानीय पुलिस तक पहुंची थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि विवाद की जानकारी पहले से थी, तो क्या समय रहते कोई प्रभावी कदम उठाया गया? क्या संभावित हिंसा को रोका जा सकता था?<img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-06/fire-01-1.jpg" alt="fire-01-1" width="1200" height="675"></img></p>
<p><strong>फॉर्च्यूनर को टक्कर, फिर आग... मौत में बदल गई दुश्मनी</strong><br />पुलिस के अनुसार, आरोप है कि फॉर्च्यूनर वाहन को पहले भारी वाहन से टक्कर मारकर क्षतिग्रस्त किया गया और बाद में उसमें आग लगा दी गई। इस घटना में भरत सिंह गहरवार की मौत हो गई, जबकि अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह हाल के वर्षों की सबसे सनसनीखेज और निर्मम घटनाओं में से एक मानी जाएगी।</p>
<p><strong>सत्ता से जुड़े नाम और बढ़े सवाल</strong><br />मामले में जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है, उनके भी राजनीतिक रूप से सक्रिय होने की चर्चा है। हालांकि पुलिस जांच अभी जारी है और दोष तय होना बाकी है, लेकिन घटना ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब किसी गंभीर आपराधिक मामले में सत्ताधारी दल से जुड़े नाम सामने आते हैं, तो स्वाभाविक रूप से प्रशासनिक निष्पक्षता और प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े होने लगते हैं।</p>
<p><strong>कांग्रेस का हमला, सरकार पर संरक्षण के आरोप</strong><br />घटना के बाद कांग्रेस ने इसे रेत कारोबार से जुड़े कथित संघर्ष का परिणाम बताते हुए सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में रेत कारोबार को लेकर हिंसक घटनाएं बढ़ रही हैं और सरकार ऐसे मामलों को रोकने में विफल साबित हो रही है।  हालांकि कांग्रेस के ये आरोप राजनीतिक बयान हैं और इनकी पुष्टि किसी जांच एजेंसी द्वारा नहीं की गई है।</p>
<p><strong>सरकार का जवाब – दोषियों पर होगी कार्रवाई</strong><br />वहीं उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कांग्रेस पर घटना का राजनीतिकरण करने का आरोप भी लगाया है।</p>
<p><strong>कानून-व्यवस्था पर फिर खड़े हुए सवाल</strong><br />इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर रेत कारोबार को लेकर विवाद इतनी हिंसक घटनाओं में क्यों बदल रहे हैं? क्या अवैध उत्खनन, आर्थिक हितों और स्थानीय प्रभाव की लड़ाई ने हालात को खतरनाक बना दिया है? फिलहाल, पुलिस जांच जारी है, कई आरोपी हिरासत में हैं और कुछ की तलाश की जा रही है। लेकिन भरत सिंह गहरवार की मौत ने यह सवाल जरूर छोड़ दिया है कि क्या रेत का कारोबार अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि खूनी संघर्ष का कारण भी बनता जा रहा है?</p>
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                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 10:52:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ आबकारी ओवर रेटिंग घोटाला: हाऊस और कमिश्नर के नाम पर दागी इंस्पेक्टरों को संरक्षण, निलंबन की फाइलें दबाए बैठे अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>  राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र 'बैगा आदिवासियों' को फर्जी मुकदमों की धमकी, कोरे कागज पर दस्तखत कराने का वीडियो वायरल।</strong></p>
<p>  </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>पिछली सरकार के शराब घोटाले का राजदार आबकारी इंस्पेक्टर वर्तमान सत्ता के शीर्ष 'हाऊस' का ले रहा नाम।</strong></span></p>
<p>  </p>
<p>रायपुर।छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री और ओवर-रेटिंग का सिंडिकेट एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। प्रदेश की विष्णु देव साय सरकार जहां एक ओर सुशासन और जीरो टॉलरेंस का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर आबकारी विभाग के भीतर बैठे कुछ रसूखदार अफसर सरकार की साख को बट्टा लगाने में जुटे हैं।</p>
<p>विभाग ने दिखावे के लिए कुछ कनिष्ठ अधिकारियों पर निलंबन की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/chhattisgarh-excise-scam-officers-sitting-on-files-for-suspension-of/article-10426"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_0000000046e87207bad26edefb94af2e.png" alt=""></a><br /><p><strong> राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र 'बैगा आदिवासियों' को फर्जी मुकदमों की धमकी, कोरे कागज पर दस्तखत कराने का वीडियो वायरल।</strong></p>
<p> </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>पिछली सरकार के शराब घोटाले का राजदार आबकारी इंस्पेक्टर वर्तमान सत्ता के शीर्ष 'हाऊस' का ले रहा नाम।</strong></span></p>
<p> </p>
<p>रायपुर।छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री और ओवर-रेटिंग का सिंडिकेट एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। प्रदेश की विष्णु देव साय सरकार जहां एक ओर सुशासन और जीरो टॉलरेंस का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर आबकारी विभाग के भीतर बैठे कुछ रसूखदार अफसर सरकार की साख को बट्टा लगाने में जुटे हैं।</p>
<p>विभाग ने दिखावे के लिए कुछ कनिष्ठ अधिकारियों पर निलंबन की गाज तो गिरा दी है, लेकिन जिनकी जड़ें सत्ता के गलियारों तक फैली हैं, उन्हें खुलेआम बचाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, दो दागी आबकारी इंस्पेक्टरों के निलंबन की दो अलग-अलग फाइलें आबकारी कमिश्नर के दफ्तर में कई दिनों से धूल फांक रही हैं, लेकिन रसूख के दबाव में कमिश्नर साहब कोई एक्शन नहीं ले पा रहे हैं।</p>
<p> </p>
<h5><strong>संरक्षित बैगा आदिवासियों को धमकी, वीडियो वायरल</strong></h5>
<p> </p>
<p>यह पूरा मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है। इन दागी आबकारी इंस्पेक्टरों पर आरोप है कि ये राष्ट्रपति द्वारा गोद ली गई संरक्षित बैगा जनजाति के भोले-भाले आदिवासियों को सरेआम डरा-धमका रहे हैं।</p>
<p>आदिवासियों को आबकारी के झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं और उनसे कोरे कागजों पर जबरन हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं। इस पूरी गुंडागर्दी के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जिसके बाद भी विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है।</p>
<h5><strong>हाऊस और मंत्री कनेक्शन का खुला दावा</strong></h5>
<p>आखिर इन अफसरों को किसका संरक्षण प्राप्त है, यह एक बड़ा सवाल है। इसका जवाब खुद इन दागी अफसरों के बयानों और हरकतों में साफ छिपा नजर आता है।</p>
<p>विभाग के सूत्रों का कहना है कि ये इंस्पेक्टर बंद कमरों में खुलेआम दावा कर रहे हैं कि उनका संबंध सीधे कमिश्नर से लेकर 'हाऊस' तक है। उनका कहना है कि कोई भी रसूखदार उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।</p>
<h5><strong>बिना ट्रेनिंग सीधे मलाईदार पोस्टिंग</strong></h5>
<p>इस अफसर के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकारी नौकरी ज्वाइन करने के बाद इसने आज तक अनिवार्य फील्ड ट्रेनिंग ही नहीं की। पिछली सरकार के दौरान मात्र छह महीने के भीतर इसे सुकमा से सीधे बिलासपुर की 'वेलकम डिस्टलरी' का मलाईदार प्रभार मिल गया था।</p>
<p>उस वक्त शराब घोटाले में आरोपी कवासी लखमा आबकारी मंत्री थे। बताया जाता है कि तत्कालीन मंत्री ने सीधे आबकारी सचिव को फोन घुमाया और इस अफसर की मनचाही पोस्टिंग हो गई।</p>
<p> </p>
<h5><strong>सत्ता बदली पर नहीं बदला रुतबा</strong></h5>
<p> </p>
<p>राज्य में सत्ता बदल गई, लेकिन इस दागी अफसर का रुतबा कम नहीं हुआ। अब विभाग के गलियारों में यह अफवाह उड़ाई जा रही है कि वर्तमान गृहमंत्री, हाऊस के करीबियों और कमिश्नर से इसके सीधे और मधुर संबंध हैं।</p>
<p>इस तरह की धौंस और अफवाहों से नई सरकार की साफ-सुथरी छवि पर सीधा दाग लग रहा है। यह इंस्पेक्टर पिछली सरकार में हुए करोड़ों रुपये के शराब घोटाले का मुख्य राजदार भी माना जा रहा है, जो अब उसी काली कमाई के दम पर खुद को बचाने का खेल खेल रहा है।</p>
<p> </p>
<h5><strong>उड़नदस्ते की छापेमारी में खुली थी पोल</strong></h5>
<p> </p>
<p>हाल ही में आबकारी विभाग के उड़नदस्ता दल ने प्रदेश भर में बड़े पैमाने पर छापामार कार्रवाई की थी। इस दौरान रायपुर, धमतरी, खैरागढ़, गंडई, हिरमी और कुरूद में शराब प्रेमियों से एमआरपी से 60 रुपये तक ज्यादा की अवैध वसूली पकड़ी गई थी।</p>
<p>इस बड़ी अनियमितता के बाद विभाग ने चार उप निरीक्षकों कौशल किशोर सोनी, प्रभाकर सिरमौर, मनराखन नेताम और पुरुषोत्तम सिन्हा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही निरूपमा लोन्हारे, मुकेश अग्रवाल, राजेश कुमार शर्मा और जेबा खान समेत आठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।</p>
<p> </p>
<h5><strong>क्या दागियों की संपत्ति की जांच करेगी सरकार?</strong></h5>
<p> </p>
<p>कार्रवाई के दौरान आबकारी आयुक्त पीएस एल्मा ने सख्त लहजे में कहा था कि उपभोक्ताओं से ज्यादा वसूली एक गंभीर भ्रष्टाचार है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन जब बात इन दो रसूखदार इंस्पेक्टरों की आती है, तो आबकारी कमिश्नर के सारे नियम-कानून और दावे धरे के धरे रह जाते हैं।ठोस साक्ष्य और वायरल वीडियो सामने होने के बाद भी फाइलों को दबाकर बैठना सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:58:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करोड़ों का फर्जीवाड़ा: 6.93 करोड़ की बोगस बिलिंग मामले में स्टील कारोबारी गिरफ्तार, 5 महीने से था फरार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। रायपुर में फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। वस्तु व सेवा कर आसूचना महानिदेशालय (DGGI) की रायपुर जोनल यूनिट ने 6.93 करोड़ रुपए के घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने ओम किरण इस्पात उद्योग के पार्टनर हरीश वाधवानी को गिरफ्तार कर लिया है।</p>
<p>आरोपी कारोबारी लंबे समय से जांच एजेंसियों को चकमा दे रहा था। पिछले करीब पांच महीने से फरार हरीश ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन, वहां से भी राहत न मिलने के बाद आखिरकार वह जांच एजेंसी के हत्थे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/steel-businessman-arrested-in-bogus-billing-case-of-crores-of/article-10424"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_0000000014c4720bb6b9563af51e392f.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। रायपुर में फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। वस्तु व सेवा कर आसूचना महानिदेशालय (DGGI) की रायपुर जोनल यूनिट ने 6.93 करोड़ रुपए के घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने ओम किरण इस्पात उद्योग के पार्टनर हरीश वाधवानी को गिरफ्तार कर लिया है।</p>
<p>आरोपी कारोबारी लंबे समय से जांच एजेंसियों को चकमा दे रहा था। पिछले करीब पांच महीने से फरार हरीश ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन, वहां से भी राहत न मिलने के बाद आखिरकार वह जांच एजेंसी के हत्थे चढ़ गया।</p>
<p> </p>
<h5><strong>फर्जी कंपनियों का बिछाया था जाल</strong></h5>
<p> </p>
<p>DGGI की जांच में सामने आया है कि हरीश वाधवानी की फर्म ने बिना कोई वास्तविक व्यापार किए सिर्फ कागजों पर फर्जी बिल तैयार किए। इन बोगस बिलों के आधार पर करीब 6.93 करोड़ रुपए का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हासिल कर लिया गया।</p>
<p>अधिकारियों के मुताबिक, ओम किरण इस्पात उद्योग काफी समय से उनके रडार पर था। यह फर्म फर्जी, अस्तित्वहीन और पूरी तरह से बंद हो चुकी कंपनियों के एक बड़े नेटवर्क के जरिए अवैध तरीके से टैक्स का फायदा उठा रही थी।</p>
<p> </p>
<p>दस्तावेजों की जांच में खुली पोल</p>
<p> </p>
<p>घोटाले की परतें तब खुलीं जब जांच टीम ने फर्म के जीएसटी रिटर्न और GSTR-2A जैसे अहम दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की। इस दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।</p>
<p>अधिकारियों ने पाया कि भारी मात्रा में आईटीसी ऐसे जीएसटी नंबरों से लिया गया था, जिन्हें विभाग ने पहले ही निलंबित या रद्द कर दिया था। सबूत पुख्ता होने के बाद से ही आरोपी की तलाश तेज कर दी गई थी।</p>
<h5><strong>कोर्ट दर कोर्ट भटका, फिर भी नहीं मिली राहत</strong></h5>
<p> </p>
<p>खुद पर शिकंजा कसता देख आरोपी हरीश वाधवानी अंडरग्राउंड हो गया था। गिरफ्तारी की तलवार लटकती देख उसने निचली अदालतों से लेकर हाईकोर्ट तक अग्रिम जमानत के लिए याचिकाएं लगाईं।</p>
<p>उसे किसी भी अदालत से राहत नहीं मिली। जब सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने भी उसकी अंतिम याचिका खारिज कर दी, तो DGGI की टीम ने घेराबंदी कर उसे धर दबोचा।</p>
<h5><strong>क्या होता है फर्जी ITC का खेल?</strong></h5>
<p> </p>
<p>इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) असल में वह व्यवस्था है, जिसमें कारोबारी अपनी खरीद पर चुकाए गए टैक्स को बिक्री पर लगने वाले टैक्स के साथ एडजस्ट करता है। इसका सीधा मकसद एक ही सामान पर बार-बार टैक्स लगने से रोकना है।</p>
<p>फर्जी आईटीसी के खेल में जालसाज बिना कोई माल खरीदे-बेचे सिर्फ फर्जी बिलों का पुलिंदा तैयार करते हैं। इसके जरिए कागजों पर व्यापार दिखाकर सरकार से टैक्स क्रेडिट क्लेम कर लिया जाता है और सरकारी खजाने को करो</p>
<p>ड़ों का चूना लगाया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:01:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बीएसपी स्क्रैप चोरी कांड का मास्टरमाइंड UP के देवरिया से गिरफ्तार:  90 लाख से अधिक का माल बरामद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भिलाई/दुर्ग | भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) से 250 टन लोहा चोरी होने के बहुचर्चित मामले में दुर्ग पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने इस पूरे संगठित स्क्रैप चोरी गिरोह के कथित मास्टरमाइंड संजय सिंह को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से धर दबोचा है।</p>
<p>मंगलवार को गिरफ्तार आरोपी को स्थानीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे सात दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस लंबी पूछताछ के दौरान करोड़ों रुपये के इस अवैध स्क्रैप नेटवर्क से जुड़े कई और चौकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।</p>
<h5><strong>कड़ी</strong></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/mastermind-of-bsp-scrap-theft-case-arrested-from-deoria-up/article-10423"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_000000008d80720ba346c6527cc46447.png" alt=""></a><br /><p>भिलाई/दुर्ग | भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) से 250 टन लोहा चोरी होने के बहुचर्चित मामले में दुर्ग पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने इस पूरे संगठित स्क्रैप चोरी गिरोह के कथित मास्टरमाइंड संजय सिंह को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से धर दबोचा है।</p>
<p>मंगलवार को गिरफ्तार आरोपी को स्थानीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे सात दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस लंबी पूछताछ के दौरान करोड़ों रुपये के इस अवैध स्क्रैप नेटवर्क से जुड़े कई और चौकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।</p>
<h5><strong>कड़ी से कड़ी जोड़कर सरगना तक पहुंची पुलिस</strong></h5>
<p>अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पुरानी भिलाई थाने में दर्ज इस प्रकरण में संजय सिंह लंबे समय से फरार चल रहा था। पुलिस की एक विशेष टीम लगातार उसके ठिकानों पर नजर रख रही थी, जिसके बाद उसे यूपी में ट्रेस कर गिरफ्तार किया गया।</p>
<p>इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मामले के एक अन्य अहम आरोपी पिंटू उर्फ उपेंद्र ओझा को भी गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। पुलिस अब इन दोनों आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर उनके पूरे सिंडिकेट, रुपयों के लेन-देन और नेटवर्क में शामिल अन्य मददगारों की भूमिका को खंगालने की तैयारी कर रही है।</p>
<p>पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मुख्य आरोपी संजय सिंह (48 वर्ष) खुर्सीपार, भिलाई का मूल निवासी है, जबकि पकड़ा गया दूसरा आरोपी पिंटू उर्फ उपेंद्र ओझा (48 वर्ष) सेक्टर-05 भिलाई में रहता है। इस पूरे सिंडिकेट में संजय सिंह का बेटा अभय सिंह भी बराबर का साझीदार है, जो अभी फरार है और पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।</p>
<h5><strong>बाप-बेटे पर घोषित था 10-10 हजार का इनाम</strong></h5>
<p>शुरुआती जांच के बाद से ही दुर्ग पुलिस ने संजय सिंह और उसके बेटे अभय सिंह को इस पूरे स्क्रैप चोरी सिंडिकेट का मुख्य संचालक माना था। कानूनी शिकंजे से बचने के लिए दोनों लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे, जिसके कारण पुलिस प्रशासन ने उन पर 10-10 हजार रुपये का नकद इनाम भी घोषित किया था।</p>
<p>इस बड़े मामले की शुरुआत इसी साल 26 मई को हुई थी, जब भिलाई-3 थाना क्षेत्र के अकलोरडीह स्थित एके ट्रेडर्स स्क्रैप यार्ड में पुलिस ने अचानक दबिश दी थी। उस छापेमारी के दौरान यार्ड परिसर और वहां खड़े हाइवा वाहनों से लगभग 250 टन भारी लौह सामग्री जब्त की गई थी, जिसकी बाजार में अनुमानित कीमत 90 लाख रुपये से भी ज्यादा आंकी गई है।</p>
<h5><strong>फ्लाई एश की आड़ में छिपाई जाती थी लोहे की प्लेटें</strong></h5>
<p>पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी बेहद शातिराना तरीके से प्लांट से लोहा पार कर रहे थे। वे फ्लाई एश के वैध परिवहन की आड़ लेकर गाड़ियों में नीचे लोहे की भारी प्लेटें, बीम और अन्य कीमती स्क्रैप लोड करते थे और ऊपर से उसे फ्लाई एश से पूरी तरह ढक देते थे।</p>
<p>यार्ड से पकड़े गए हाइवा चालकों ने पूछताछ में कबूल किया था कि वे इसी चालाकी का इस्तेमाल कर अब तक 30 से 40 बार बीएसपी प्लांट के भीतर से स्क्रैप सुरक्षित बाहर निकाल चुके हैं। इस बयान के बाद से ही पुलिस गिरोह के मुख्य सरगना संजय सिंह की तलाश में जुट गई थी।</p>
<h5><strong>10 बैंक खाते सीज, वित्तीय साम्राज्य पर नजर</strong></h5>
<p>कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने आरोपी संजय सिंह के घर की तलाशी ली थी, जहां से 10 अलग-अलग राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों की पासबुक और चेकबुक बरामद हुई थीं। पुलिस ने तत्काल कदम उठाते हुए इन सभी बैंक खातों को पूरी तरह सीज करवा दिया है।</p>
<p>अब पुलिस की वित्तीय जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी के लोहे को बेचकर कमाए गए करोड़ों रुपये किन-किन खातों में भेजे गए। इस मामले में पुलिस मीथेन ठाकुर, चिंतानंद साहू, गीतेश वर्मा, निर्मल सिंह और घनश्याम गुप्ता समेत कई आरोपियों को पहले ही जेल भेज चुकी है।</p>
<h5><strong>बीएसपी के अंदरूनी अधिकारियों पर भी गहराया शक</strong></h5>
<p>जांच के दायरे में अब भिलाई स्टील प्लांट के अंदरूनी तंत्र से जुड़े लोग भी आ गए हैं। पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि बीएसपी जैसे अति-सुरक्षित परिसर से, जहां अत्याधुनिक ट्रैकिंग और सुरक्षा व्यवस्था लागू है, वहां से सैकड़ों टन लोहा बिना किसी आंतरिक मदद के बाहर नहीं भेजा जा सकता।</p>
<p>यही वजह है कि अब प्लांट के कुछ चुनिंदा कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों और तकनीकी विभाग के अधिकारियों की भूमिका की भी बारिकी से जांच की जा रही है। पुलिस को पूरी उम्मीद है कि संजय सिंह की सात दिनों की रिमांड अवधि के दौरान इस सिंडिकेट से जुड़े बीएसपी के कई बड़े चेहरों के नाम उजागर हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/mastermind-of-bsp-scrap-theft-case-arrested-from-deoria-up/article-10423</link>
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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 08:39:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंबिकापुर में ईडी की कार्रवाई देर शाम तक जारी पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता के प्रतिष्ठान पर दिनभर खंगाले गए दस्तावेज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अंबिकापुर में सरगुजा कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता के व्यावसायिक प्रतिष्ठान मानसून एग्रो एजेंसी पर प्रवर्तन निदेशालय की छापामार कार्रवाई मंगलवार देर शाम तक लगातार जारी रही। अलसुबह से शुरू हुई इस सघन जांच प्रक्रिया ने पूरे दिन शहर के राजनीतिक और व्यावसायिक हलकों में भारी बेचैनी बनाए रखी। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने प्रतिष्ठान के भीतर मौजूद एक-एक दस्तावेज की बारीकी से पड़ताल की और शाम ढलने के बाद भी टीम के कई सदस्य वहां डटे हुए हैं। प्रतिष्ठान के बाहर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों का कड़ा पहरा शाम तक उसी मुस्तैदी के साथ कायम रहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/eds-action-in-ambikapur-continued-till-late-evening-documents-were/article-10422"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/mansoon-agro.jpeg" alt=""></a><br /><p>अंबिकापुर में सरगुजा कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता के व्यावसायिक प्रतिष्ठान मानसून एग्रो एजेंसी पर प्रवर्तन निदेशालय की छापामार कार्रवाई मंगलवार देर शाम तक लगातार जारी रही। अलसुबह से शुरू हुई इस सघन जांच प्रक्रिया ने पूरे दिन शहर के राजनीतिक और व्यावसायिक हलकों में भारी बेचैनी बनाए रखी। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने प्रतिष्ठान के भीतर मौजूद एक-एक दस्तावेज की बारीकी से पड़ताल की और शाम ढलने के बाद भी टीम के कई सदस्य वहां डटे हुए हैं। प्रतिष्ठान के बाहर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों का कड़ा पहरा शाम तक उसी मुस्तैदी के साथ कायम रहा जिससे अंदर चल रही जांच की गंभीरता का साफ अंदाजा लगाया जा सकता है।</p><p>दिनभर चली इस मैराथन कार्रवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने मुख्य रूप से वित्तीय लेन-देन से जुड़े पुराने और नए सभी रिकॉर्ड खंगाले। विभागीय सूत्रों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जांच टीम ने कंप्यूटर की हार्ड ड्राइव लैपटॉप कच्चे-पक्के एकाउंट्स के रजिस्टर और कई अहम बैंक पासबुक सहित डिजिटल व कागजी सबूतों को अपनी जांच के दायरे में लिया है। इसके अलावा प्रतिष्ठान के कर्मचारियों और राकेश गुप्ता के परिजनों से भी दिनभर पूछताछ का दौर चलता रहा ताकि व्यापारिक आय और निवेश के विभिन्न स्रोतों का सटीक मिलान किया जा सके। बहुचर्चित डीएमएफ घोटाले से जुड़े संभावित तारों को लेकर अधिकारियों ने वित्तीय अनियमितताओं और आय-व्यय के संदिग्ध आंकड़ों पर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा।</p><p>इस लंबी और थका देने वाली कार्रवाई ने पूरे प्रदेश के कांग्रेसी खेमे में एक बार फिर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। चूंकि यह पूरा मामला पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन फंड के दुरुपयोग और कथित घोटाले से जुड़ा बताया जा रहा है इसलिए इस छापे को जांच की दिशा में एक अहम कड़ी माना जा रहा है। देर शाम तक किसी भी प्रकार की आधिकारिक जब्ती या गिरफ्तारी की पुष्टि जांच एजेंसी की तरफ से नहीं की गई है लेकिन यह प्रबल संभावना जताई जा रही है कि टीम जब अपनी कार्रवाई खत्म करेगी तो अपने साथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त करके ले जाएगी जिनका बाद में विभागीय मुख्यालय में विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा।</p><p>फिलहाल पूरे अंबिकापुर शहर की नजरें रिंग रोड गंगापुर स्थित मानसून एग्रो एजेंसी पर टिकी हुई हैं और हर कोई इस बात का इंतजार कर रहा है कि ईडी की टीम के बाहर निकलने पर क्या नए तथ्य सामने आते हैं। स्थानीय पुलिस भी बाहरी सुरक्षा व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है। जांच पूरी होने और अधिकारियों की आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह पूरी तरह से स्पष्ट हो सकेगा कि इस मैराथन छापे में जांच एजेंसी के हाथ कौन से पुख्ता सबूत लगे हैं और इस बड़े घोटाले में आगे की कानूनी कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 20:15:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिंद एनर्जी का काला' खेल: अनपढ़ आदिवासी चपरासी के नाम पर करोड़ों की बेनामी संपत्ति, पुलिस बनी कठपुतली अब राष्ट्रपति भवन की एंट्री से मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कोरबा/रायपुर।कॉरपोरेट की चालाकी और खाकी की शर्मनाक मिलीभगत का  सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। कोरबा की नामी कंपनी 'हिंद एनर्जी एंड कोल बेनिफिकेशन (इंडिया) लिमिटेड ने अपने ही एक अशिक्षित  चपरासी को कागजों में डायरेक्टर बनाकर करोड़ों की बेनामी संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग का खेल खेला। जब पाप का घड़ा भरा तो पीड़ित ने मामले की जानकारी सार्वजनिक की,  जिसके बाद पुलिस विभाग के अधिकारी भी मामले में शामिल हो गए और  कंपनी के बाउंसर की तरह काम करने लगे। लेकिन 2 साल तक फाइलें दबाए बैठे सिस्टम को अब पसीना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/black-game-of-hind-energy-benami-property-worth-crores-in/article-10419"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_00000000e96071f5a45dc17a43306ba0.png" alt=""></a><br /><p>कोरबा/रायपुर।कॉरपोरेट की चालाकी और खाकी की शर्मनाक मिलीभगत का  सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। कोरबा की नामी कंपनी 'हिंद एनर्जी एंड कोल बेनिफिकेशन (इंडिया) लिमिटेड ने अपने ही एक अशिक्षित  चपरासी को कागजों में डायरेक्टर बनाकर करोड़ों की बेनामी संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग का खेल खेला। जब पाप का घड़ा भरा तो पीड़ित ने मामले की जानकारी सार्वजनिक की,  जिसके बाद पुलिस विभाग के अधिकारी भी मामले में शामिल हो गए और  कंपनी के बाउंसर की तरह काम करने लगे। लेकिन 2 साल तक फाइलें दबाए बैठे सिस्टम को अब पसीना आ रहा है, क्योंकि मामले में सीधे राष्ट्रपति भवन की एंट्री हो गई है।</p><h5><strong>चपरासी को बनाया अरबपति डायरेक्टर</strong></h5><p>62 वर्षीय आदिवासी कांति कुमार प्रधान 2006 से हिंद एनर्जी में बतौर चपरासी कार्यरत थे। आरोप है कि कंपनी के डायरेक्टर - संजय अग्रवाल, पवन कुमार अग्रवाल, सतीश कुमार अग्रवाल, राजीव अग्रवाल समेत 12 निदेशकों—ने इस अनपढ़ बुजुर्ग की मजबूरी का सीधा फायदा उठाया। बिना उसे बताए, धोखे से कागजों पर उसे कंपनी का निदेशक बना दिया गया। इसके बाद उसके नाम का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपयों की बेनामी संपत्तियां खरीदी गईं। </p><h5><strong>पुलिस ने दिखाई दादागिरी, ROC ने मूंदी आंखें</strong></h5><p>वर्ष 2020 में जब यह पूरा फर्जीवाड़ा आयकर विभाग की नजर में आया, तब  प्रधान को अपने नाम पर चल रहे इस फर्जीवाड़े का पता चला। उसने पुलिस की शरण ली, लेकिन यहां सिस्टम' पहले ही रसूखदारों के आगे नतमस्तक था। आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी हरीशचंद्र टंडेकर और ASI मनोज मिश्रा ने एसपी के आदेश होने का झूठा खौफ दिखाकर बिना वारंट उस बुजुर्ग को जबरन उठाने और जान से मारने की कोशिश की। परिजनों के कड़े विरोध के चलते किसी तरह उसकी जान बची।<br />दूसरी ओर, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) छत्तीसगढ़ की भूमिका इस मामले में सबसे ज्यादा संदिग्ध है। पीड़ित ने 2 साल पहले मनी लॉन्ड्रिंग, बेनामी लेन-देन और फर्जी नियुक्ति के सारे पुख्ता सबूत ROC को सौंपे। कई बार ई-मेल और रजिस्टर्ड डाक भेजे, लेकिन अफसरों ने कंपनी के पहुंच के सामने के आगे अपनी आंखें मूंद लीं। और कोई भी नोटिस जारी नहीं हुआ।</p><h5><strong>राष्ट्रपति के दखल से बड़ी हलचल, मुख्य सचिव को कार्यवाई के  निर्देश</strong></h5><p>सिस्टम से हारकर इस बुजुर्ग ने 22 मई 2026 को सीधे राष्ट्रपति, मानवाधिकार आयोग (NHRC), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जिसके बाद 27 मई को ही राष्ट्रपति सचिवालय ने  <br />सख्ती बरतते हुए मामला सीधे छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को  कार्यवाही' के लिए अग्रेषित कर दिया है। साथ ही सख्त निर्देश दिए हैं कि की गई कार्रवाई की सूचना सीधे प्रार्थी को दी जाए।</p><h5><strong>प्रार्थी ने की CBI जांच की मांग</strong></h5><p>मामले में प्रार्थी कांति कुमार प्रधान ने <br /> पूरे मामले की जांच CBI या SFIO से करवाने की मांग की है अपने ज्ञापन पत्र में उसने <br />  धोखाधड़ी करने वाले 12 निदेशकों और मामले में दोषी तत्कालीन पुलिसकर्मियों को तुरंत गिरफ्तार करने और <br /> CRPF से सुरक्षा  और कंपनी के बैंक खाते सीज करने की मांग की है l साथ ही <br />  2 साल तक फाइल दबाकर बैठने वाले ROC छत्तीसगढ़ पर विभागीय करने आग्रह किया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 14:55:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भिलाई स्टील प्लांट में स्क्रैप माफिया का खुला खेल 120 ट्रक ब्लैकलिस्ट फिर भी पार हो रहा लोहा पीएम तक पहुंची शिकायत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>भिलाई/दुर्ग। </strong>भिलाई स्टील प्लांट में स्क्रैप और लोहे की चोरी का बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। प्रबंधन की तमाम सख्ती और हाईटेक निगरानी के बाद भी माफिया बेखौफ हैं। प्लांट के अंदर से हर दिन अवैध तरीके से कीमती लोहा और स्क्रैप बाहर निकाला जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सुरक्षा के लिए लगाए गए जीपीएस सिस्टम को भी चोरी के लिए बड़ी आसानी से चकमा दिया जा रहा है।</p>
<p>क्राइम के तरीके की बात करें तो माफिया बहुत शातिर ढंग से काम कर रहे हैं। प्लांट के अंदर ठेका एजेंसियों के ट्रकों से पहले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/scrap-mafias-game-is-open-in-bhilai-steel-plant-120/article-10413"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/img-20260616-wa0029(1).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>भिलाई/दुर्ग। </strong>भिलाई स्टील प्लांट में स्क्रैप और लोहे की चोरी का बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। प्रबंधन की तमाम सख्ती और हाईटेक निगरानी के बाद भी माफिया बेखौफ हैं। प्लांट के अंदर से हर दिन अवैध तरीके से कीमती लोहा और स्क्रैप बाहर निकाला जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सुरक्षा के लिए लगाए गए जीपीएस सिस्टम को भी चोरी के लिए बड़ी आसानी से चकमा दिया जा रहा है।</p>
<p>क्राइम के तरीके की बात करें तो माफिया बहुत शातिर ढंग से काम कर रहे हैं। प्लांट के अंदर ठेका एजेंसियों के ट्रकों से पहले जीपीएस डिवाइस निकाल लिया जाता है। इसके बाद रात के अंधेरे में ट्रकों में कीमती लोहा भरा जाता है। चोरी का माल लोड होने के बाद सुबह वही जीपीएस वापस ट्रकों में लगा दिया जाता है ताकि सुरक्षा एजेंसियों को लगे कि गाड़ी अपनी तय जगह पर ही खड़ी थी।</p>
<p>लगातार हो रही इस चोरी पर पर्दा डालने की कोशिशें अब नाकाम हो चुकी हैं। बीएसपी प्रबंधन ने कागजी कार्रवाई करते हुए अब तक करीब 120 ट्रकों को ब्लैकलिस्ट किया है। इन गाड़ियों की जब जांच हुई तो पता चला कि इनमें कांटा घर में वजन की हेराफेरी की जाती थी। कई ट्रकों में तो चोरी का लोहा छिपाने के लिए खास तरह के गुप्त केबिन तक बनाए गए थे। इतनी बड़ी संख्या में ट्रकों पर बैन लगने के बाद भी अवैध निकासी का खेल पूरी तरह से बंद नहीं हो पाया है।<br />ठेका एजेंसियों के वाहनों पर लागू जीपीएस निगरानी सिस्टम अब पूरी तरह सवालों के घेरे में है। सिस्टम की नाकामी और प्लांट को हो रहे भारी आर्थिक नुकसान की गूंज अब सीधे दिल्ली तक पहुंच गई है। बीते 27 जनवरी 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस पूरे भ्रष्टाचार की विस्तृत शिकायत भेजी गई है। इस शिकायत में एलडी स्लैग की टेंडर प्रक्रिया और ट्रकों के जरिए हो रही अवैध निकासी की उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।</p>
<p>यह पहला मौका नहीं है जब मामले की शिकायत दिल्ली तक गई है। इससे पहले 14 नवंबर 2024 को भी एक जनप्रतिनिधि ने केंद्रीय इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी को पूरे मामले की जानकारी दी थी। मंत्री को भेजी गई शिकायत में बीएसपी में चल रहे भ्रष्टाचार और स्क्रैप चोरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। शिकायत में साफ तौर पर बताया गया था कि एलडी स्लैग के टेंडर और निकासी में बड़ी धांधली हो रही है जिससे सरकारी खजाने और संयंत्र को सीधा आर्थिक नुकसान हो रहा है।</p>
<p>जमीनी हकीकत यह है कि बीएसपी प्रबंधन के दावों और कागजी कार्रवाई के बीच स्क्रैप माफिया का नेटवर्क आज भी मजबूत है। गाड़ियों में फर्जीवाड़ा कर लोहा लगातार प्लांट से बाहर भेजा जा रहा है। अब हर किसी की नजर इस बात पर है कि पीएमओ और केंद्रीय इस्पात मंत्रालय के दखल के बाद इस बड़े गोलमाल में शामिल लोगों पर कब और क्या ठोस कार्रवाई होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/scrap-mafias-game-is-open-in-bhilai-steel-plant-120/article-10413</link>
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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 10:15:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सक्ती में कमीशन का खेल जनपद सीईओ बाबू और चपरासी एक लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में सरकारी योजनाओं का पैसा निकालने के लिए कमीशनखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। एंटी करप्शन ब्यूरो बिलासपुर की टीम ने भ्रष्ट सिस्टम पर करारी चोट करते हुए सक्ती जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी निखिल कश्यप सहायक ग्रेड 3 अविनाश ठाकुर और चपरासी लच्छन भानु को गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपियों को एक लाख रुपये की घूस लेते हुए दफ्तर में ही रंगे हाथ पकड़ा गया है। यह पूरा मामला गांव के विकास के लिए आए फंड में बंदरबांट से जुड़ा है।</p>
<p>आमतौर पर बड़े अधिकारी सीधे पैसे नहीं लेते। इस मामले में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/commission-game-in-sakti-district-ceo-babu-and-peon-arrested/article-10412"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_00000000869c7208a6a5e487c34e3101.png" alt=""></a><br /><p>सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में सरकारी योजनाओं का पैसा निकालने के लिए कमीशनखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। एंटी करप्शन ब्यूरो बिलासपुर की टीम ने भ्रष्ट सिस्टम पर करारी चोट करते हुए सक्ती जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी निखिल कश्यप सहायक ग्रेड 3 अविनाश ठाकुर और चपरासी लच्छन भानु को गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपियों को एक लाख रुपये की घूस लेते हुए दफ्तर में ही रंगे हाथ पकड़ा गया है। यह पूरा मामला गांव के विकास के लिए आए फंड में बंदरबांट से जुड़ा है।</p>
<p>आमतौर पर बड़े अधिकारी सीधे पैसे नहीं लेते। इस मामले में भी भ्रष्टाचार की पूरी चेन बनी हुई थी जिसमें साहब से लेकर चपरासी तक शामिल थे। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत आए फंड को रिलीज करने के लिए सरपंच से दो लाख रुपये मांगे गए थे।</p>
<p>लिमतरा गांव के रहने वाले अरुण कुमार भारद्वाज ने एसीबी से मामले की शिकायत की थी। अरुण की मां लिमतरा ग्राम पंचायत की सरपंच हैं। उनके गांव में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत निर्मला घाट और नाली निर्माण सहित कई अन्य काम होने थे। इसके लिए शासन से 20 लाख रुपये की मंजूरी मिली थी।</p>
<p>पंचायत को इसमें से आठ लाख रुपये का चेक पहले ही मिल गया था जिससे काम शुरू हुआ। लेकिन बाकी बचे 12 लाख रुपये का चेक अटका हुआ था। अरुण कुमार अपनी मां के प्रतिनिधि के रूप में चेक के लिए जनपद पंचायत दफ्तर का चक्कर काट रहे थे। जब उन्होंने बचे हुए पैसे का चेक जारी करने को कहा तो सीईओ निखिल कश्यप और बाबू अविनाश ठाकुर ने इसके एवज में दो लाख रुपये रिश्वत की मांग रख दी। बिना कमीशन दिए सरकारी फाइल आगे नहीं बढ़ रही थी।</p>
<p>अरुण कुमार घूस नहीं देना चाहते थे। उन्होंने बिलासपुर जाकर एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारियों को इस वसूली की जानकारी दी। एसीबी ने शिकायत को गंभीरता से लिया और जांच शुरू की। शुरुआती जांच में ही यह साफ हो गया कि अधिकारी घूस मांग रहे हैं। यह भी सामने आया कि बाबू अविनाश ठाकुर ने अपने चपरासी लच्छन भानु के जरिए एक लाख रुपये पहले ही वसूल लिए थे। अब दूसरे एक लाख रुपये के लिए दबाव बनाया जा रहा था।</p>
<p>मामला सही पाए जाने पर एसीबी की टीम ने 15 जून को जाल बिछाया। अरुण कुमार एक लाख रुपये लेकर सक्ती जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचे। दफ्तर में पैसे लेने का तरीका भी बिल्कुल सेट था। सीईओ निखिल ने सीधे पैसे नहीं छुए बल्कि बाबू अविनाश को इशारा किया। अविनाश ने भी चालाकी दिखाते हुए चपरासी लच्छन को पैसे लेने का निर्देश दिया।</p>
<p>जैसे ही चपरासी ने अरुण कुमार से एक लाख रुपये पकड़े मौके पर सादी वर्दी में तैनात एसीबी की टीम ने तीनों को धर दबोचा। टीम ने घूस की पूरी रकम मौके से ही जब्त कर ली। सक्ती जिले के प्रशासनिक हलके में इस बड़ी कार्रवाई से भारी हड़कंप मच गया है।</p>
<p>एसीबी ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। अब ब्यूरो इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि क्या अन्य ग्राम पंचायतों के सरपंचों को भी विकास कार्यों के लिए इसी तरह ब्लैकमेल कर कमीशन वसूला जा रहा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 09:22:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>200 रुपये की कुर्सी 2000 में खरीदी दुर्ग शिक्षा विभाग में जेम पोर्टल के नाम पर 3 लाख फर्जीवाड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। दुर्ग जिले के शिक्षा विभाग में सरकारी पैसे के इस्तेमाल को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। सरकारी सिस्टम में बचत और पारदर्शिता के नाम पर कैसे खेल होता है इसका यह ताजा उदाहरण है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने एक ऐसा टेंडर पास किया है जिसने पूरी सरकारी खरीदी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय बाजार में जो साधारण प्लास्टिक कुर्सी मात्र 200 से 500 रुपये के बीच आसानी से मिल जाती है उसे शिक्षा विभाग ने 2000 रुपये प्रति नग के हिसाब से खरीदा है। कुल 160 कुर्सियों के लिए 3 लाख 20 हजार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/chair-worth-rs-200-purchased-in-2000-rs-3-lakh/article-10411"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/image_search_1781581182710.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। दुर्ग जिले के शिक्षा विभाग में सरकारी पैसे के इस्तेमाल को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। सरकारी सिस्टम में बचत और पारदर्शिता के नाम पर कैसे खेल होता है इसका यह ताजा उदाहरण है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने एक ऐसा टेंडर पास किया है जिसने पूरी सरकारी खरीदी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय बाजार में जो साधारण प्लास्टिक कुर्सी मात्र 200 से 500 रुपये के बीच आसानी से मिल जाती है उसे शिक्षा विभाग ने 2000 रुपये प्रति नग के हिसाब से खरीदा है। कुल 160 कुर्सियों के लिए 3 लाख 20 हजार रुपये का अनुबंध किया गया है।</p>
<h5><strong>बिना ब्रांड की कुर्सियों पर लुटाया सरकारी खजाना</strong></h5>
<p>यह पूरी खरीदी 30 दिसंबर 2024 को जेम पोर्टल के माध्यम से की गई है। सरकारी दस्तावेजों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि खरीदी गई इन कुर्सियों का कोई ब्रांड ही नहीं है। दस्तावेजों में साफ तौर पर इसे अनब्रांडेड रिवॉल्विंग काउंटर चेयर बताया गया है। इन कुर्सियों में प्लास्टिक मोल्डेड सीट हाइड्रोलिक एडजस्टमेंट और एबीएस बेस जैसी बेहद सामान्य खूबियां लिखी गई हैं। ऐसी खूबियों वाली कुर्सियां दुर्ग और बालोद के किसी भी स्थानीय फर्नीचर बाजार या ऑनलाइन ई कॉमर्स साइट पर काफी सस्ते दाम पर मिल जाती हैं। बिना किसी नामी कंपनी के प्रोडक्ट पर इतना ज्यादा पैसा खर्च करना सीधे तौर पर संदेह पैदा करता है।</p>
<h5><strong>बाजार भाव की अनदेखी और जेम पोर्टल पर सवाल</strong></h5>
<p>इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप की स्थिति है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब बाजार में समान श्रेणी की कुर्सियां बेहद कम कीमत पर उपलब्ध हैं तो सरकारी खजाने से इतनी बड़ी रकम क्यों लुटाई जा रही है। सरकारी खरीदी का एक सीधा प्रशासनिक नियम है कि किसी भी सामान को खरीदने से पहले बाजार मूल्य का तुलनात्मक अध्ययन किया जाना चाहिए। लेकिन इस खरीदी को देखकर साफ लगता है कि जिम्मेदार अफसरों ने बाजार भाव की पूरी तरह से अनदेखी की है।</p>
<p>केंद्र और राज्य सरकार जेम पोर्टल का इस्तेमाल इसलिए करवाती हैं ताकि सरकारी खरीदी में बिचौलियों का खेल खत्म हो और सरकार को सस्ता सामान मिले। लेकिन यहां जेम पोर्टल के नाम पर ही महंगा सौदा कर लिया गया। क्या पोर्टल पर इससे सस्ते और अच्छे विकल्प मौजूद नहीं थे यह एक बड़ा जांच का विषय है।</p>
<h5> <strong>उपयोगिता पर भी उठ रहे गंभीर सवाल</strong></h5>
<p>इसके अलावा विभाग ने अब तक यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि इतनी बड़ी संख्या में 160 कुर्सियां किस कार्यालय या संस्थान के लिए खरीदी गई हैं। क्या वाक़ई इतनी कुर्सियों की तत्काल आवश्यकता थी यह भी जांच के दायरे में आता है। प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि इस पूरे अनुबंध की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।</p>
<p>जिला प्रशासन के आला अधिकारियों को इस खरीदी की फाइल रोककर बाजार दर से इसका मिलान करवाना चाहिए। इससे यह साफ हो सकेगा कि यह खरीदी नियमों के तहत हुई है या इसके पीछे कोई बड़ा कमीशन का खेल चल रहा है। अगर मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो विभाग में चल रहे कई और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल यह मामला पूरे प्रशासनिक हलके में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 09:16:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भरोसे की कीमत 2 करोड़? शक्कर कारोबारियों का आरोप- यूनियन के नाम पर बनाया नेटवर्क, उधार में माल लेकर नहीं किया भुगतान, पिता-पुत्र पर FIR</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ के व्यापारिक जगत में उस वक़्त हड़कंप मच गया, जब शक्कर कारोबार से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले का खुलासा हुआ। रायपुर और सरगुजा संभाग के कई व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि भरोसे और व्यापारिक संबंधों की आड़ में उनसे बड़ी मात्रा में शक्कर उधार ली गई, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। शिकायत के बाद पुलिस ने रायगढ़ के एक कारोबारी और उसके बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।</p>
<p>व्यापारियों का आरोप है कि यह केवल सामान्य लेन-देन का विवाद नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से विश्वास हासिल कर करोड़ों रुपये</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/price-of-trust-is-rs-2-crore-allegation-of-sugar/article-10406"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/multi_crore_fraud_in_the_sugar_trade_1781517712.webp" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ के व्यापारिक जगत में उस वक़्त हड़कंप मच गया, जब शक्कर कारोबार से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले का खुलासा हुआ। रायपुर और सरगुजा संभाग के कई व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि भरोसे और व्यापारिक संबंधों की आड़ में उनसे बड़ी मात्रा में शक्कर उधार ली गई, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। शिकायत के बाद पुलिस ने रायगढ़ के एक कारोबारी और उसके बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।</p>
<p>व्यापारियों का आरोप है कि यह केवल सामान्य लेन-देन का विवाद नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से विश्वास हासिल कर करोड़ों रुपये का माल उठाने का मामला है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस कथित धोखाधड़ी से 8 से अधिक कारोबारी प्रभावित हुए हैं और कुल बकाया राशि दो करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है।</p>
<p>यूनियन के नाम पर भरोसा, फिर करोड़ों का बकाया?<br />शिकायत में दावा किया गया है कि आरोपियों ने व्यापारियों के बीच अपनी साख मजबूत करने और नेटवर्क तैयार करने के लिए 'छत्तीसगढ़-ओडिशा-मध्यप्रदेश शुगर व्यापारी यूनियन' के नाम से एक मंच बनाया था। इसी माध्यम से विभिन्न जिलों और राज्यों के कारोबारियों से संपर्क बढ़ाया गया और व्यापारिक रिश्ते स्थापित किए गए।</p>
<p>व्यापारियों का आरोप है कि लंबे समय तक विश्वास का माहौल बनाने के बाद बड़ी मात्रा में शक्कर उधार में ली गई, लेकिन तय समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया गया। इससे कई व्यापारियों की पूंजी फंस गई और उनके कारोबार पर आर्थिक दबाव बढ़ गया।</p>
<p>होटल बैठक के बाद बढ़ा कारोबार, फिर शुरू हुआ विवाद<br />जानकारी के अनुसार रायपुर के रामसागरपारा स्थित एक होटल में व्यापारियों की बैठक भी आयोजित की गई थी, जहां भविष्य के व्यापार और सप्लाई नेटवर्क को लेकर चर्चा हुई थी। आरोप है कि इसी दौरान व्यापारियों का भरोसा जीतकर बड़े स्तर पर लेन-देन शुरू किया गया। जब भुगतान की बारी आई तो कथित रूप से रकम अटकने लगी और धीरे-धीरे करोड़ों रुपये का बकाया खड़ा हो गया। इसके बाद प्रभावित व्यापारियों ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।</p>
<p>व्यापारिक सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल<br />इस पूरे मामले ने व्यापारिक लेन-देन की सुरक्षा और भरोसे के आधार पर होने वाले करोड़ों रुपये के कारोबार पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापारिक संगठनों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इतनी बड़ी राशि का माल बिना पर्याप्त सुरक्षा या गारंटी के कैसे सप्लाई किया गया है?</p>
<p>पुलिस जांच में जुटी<br />खमतराई थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और आर्थिक लेन-देन, दस्तावेजों तथा भुगतान रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कथित मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं। फिलहाल, मामले की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन इस करोड़ों के विवाद ने व्यापारियों के बीच एक डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:09:00 +0530</pubDate>
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