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                <title>अपराध - National Jagat Vision</title>
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                <description>अपराध RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अंबिकापुर पटाखा गोदाम अग्निकांड आईजी की फटकार के बाद जागी पुलिस मुकेश अग्रवाल पर गैर जमानती धाराएं दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सरगुजा। अंबिकापुर के राममंदिर रोड स्थित मुकेश प्लास्टिक एवं पटाखा होलसेल दुकान में लगी भीषण आग के मामले में अब पुलिस ने अपना रुख सख्त कर लिया है। सरगुजा आईजी के कड़े दखल के बाद आखिरकार पुलिस की नींद टूटी और आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में गैर जमानती और विस्फोटक अधिनियम की धाराएं जोड़ दी गई हैं। पहले स्थानीय पुलिस ने इस गंभीर मामले में भी मामूली धाराएं लगाकर आरोपियों को बचाने की कोशिश की थी जिस पर आईजी ने गहरी नाराजगी जताई है।</p>
<p>बीते 23 अप्रैल को राममंदिर गली में स्थित इस तीन मंजिला दुकान में भयानक आग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/ambikapur-firecracker-godown-fire-incident-police-awakened-after-igs-rebuke/article-9534"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/image_search_1777694953230.jpg" alt=""></a><br /><p>सरगुजा। अंबिकापुर के राममंदिर रोड स्थित मुकेश प्लास्टिक एवं पटाखा होलसेल दुकान में लगी भीषण आग के मामले में अब पुलिस ने अपना रुख सख्त कर लिया है। सरगुजा आईजी के कड़े दखल के बाद आखिरकार पुलिस की नींद टूटी और आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में गैर जमानती और विस्फोटक अधिनियम की धाराएं जोड़ दी गई हैं। पहले स्थानीय पुलिस ने इस गंभीर मामले में भी मामूली धाराएं लगाकर आरोपियों को बचाने की कोशिश की थी जिस पर आईजी ने गहरी नाराजगी जताई है।</p>
<p>बीते 23 अप्रैल को राममंदिर गली में स्थित इस तीन मंजिला दुकान में भयानक आग लग गई थी। गोदाम में भारी मात्रा में पटाखे रखे हुए थे जिनमें आग लगने के बाद एक के बाद एक कई जोरदार धमाके हुए। धमाकों और आग की लपटों ने इतना विकराल रूप ले लिया कि तीन मंजिला इमारत पूरी तरह से जलकर खाक हो गई और उसका एक बड़ा हिस्सा ढह गया। इस खौफनाक हादसे की चपेट में आकर आसपास के आठ अन्य मकान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था और लोगों की जान पर बन आई थी।</p>
<p>इतने बड़े हादसे के बाद भी कोतवाली पुलिस ने शुरुआती दौर में बेहद हल्की धाराओं में अपराध दर्ज किया था। ऐसा लग रहा था जैसे मामले को रफा दफा करने की तैयारी चल रही हो। जब यह बात सरगुजा आईजी दीपक कुमार झा तक पहुंची तो उन्होंने पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सीधे एसपी के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया कि आखिर इतनी बड़ी घटना में उचित धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं। आईजी के सख्त निर्देश के बाद पुलिस ने आनन फानन में बीएनएस की धारा 324 और 326 छ के साथ विस्फोटक अधिनियम की धारा 9 ख प्रकरण में जोड़ दी है।</p>
<p>इस बीच फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी यानी एफएसएल की टीम ने भी घटनास्थल की प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है। टीम को मौके से भारी मात्रा में जले हुए पटाखों के अवशेष मिले हैं जिससे यह साफ हो गया है कि वहां अवैध रूप से विस्फोटकों का जखीरा मौजूद था। अब मुकेश पटाखा एजेंसी के संचालक मुकेश अग्रवाल और उनके रिश्तेदार प्रवीण अग्रवाल की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं क्योंकि नई धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर दस साल तक की जेल हो सकती है।</p>
<p>दूसरी तरफ नगर निगम भी अब हरकत में आया है। निगम आयुक्त डीएन कश्यप ने आग से जर्जर हो चुकी इस तीन मंजिला इमारत को बेहद खतरनाक घोषित कर दिया है। उन्होंने भवन संचालक को चौबीस घंटे के भीतर इमारत को सुरक्षित तरीके से गिराने का नोटिस थमाया था लेकिन हैरानी की बात है कि अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। इधर फॉरेंसिक अधिकारी कुलदीप कुजूर का कहना है कि उनकी टीम एक बार फिर मौके का बारीकी से मुआयना करेगी ताकि आग लगने के असल कारणों और वहां रखे पटाखों की सही मात्रा का सटीक पता लगाया जा सके। फिलहाल केमिकल एनालिसिस की रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है जिसके बाद पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 09:39:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिलासपुर का श्रीराम केयर अस्पताल या खौफ का केंद्र पथरी का इलाज कराने गए जवान की मौत से फिर ताजा हुए पुराने दाग</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बिलासपुर। शहर का श्रीराम केयर अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में है और वजह वही पुरानी है मरीजों की जान के साथ खिलवाड़। कल सरकंडा थाने में पदस्थ कांस्टेबल सत्यकुमार पाटले की संदिग्ध मौत के बाद अस्पताल परिसर में जो हंगामा शुरू हुआ था उसकी गूंज आज भी शांत नहीं हुई है। पथरी जैसी बीमारी का इलाज कराने गए एक जवान को अस्पताल से जिंदा वापस लौटना नसीब नहीं हुआ। अस्पताल प्रबंधन का रटा रटाया दावा है कि मौत हार्ट अटैक से हुई लेकिन परिजनों का सीधा आरोप है कि डॉक्टरों की घोर लापरवाही ने उनकी जान ले ली। यह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/bilaspurs-shri-ram-care-hospital-or-the-center-of-fear/article-9533"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/image_search_1777693967285.png" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर। शहर का श्रीराम केयर अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में है और वजह वही पुरानी है मरीजों की जान के साथ खिलवाड़। कल सरकंडा थाने में पदस्थ कांस्टेबल सत्यकुमार पाटले की संदिग्ध मौत के बाद अस्पताल परिसर में जो हंगामा शुरू हुआ था उसकी गूंज आज भी शांत नहीं हुई है। पथरी जैसी बीमारी का इलाज कराने गए एक जवान को अस्पताल से जिंदा वापस लौटना नसीब नहीं हुआ। अस्पताल प्रबंधन का रटा रटाया दावा है कि मौत हार्ट अटैक से हुई लेकिन परिजनों का सीधा आरोप है कि डॉक्टरों की घोर लापरवाही ने उनकी जान ले ली। यह कोई पहला मौका नहीं है जब इस अस्पताल की दीवारों के पीछे से लापरवाही और सनसनीखेज कारनामों की बदबू बाहर आई है।</p>
<h5><strong>जादुई चिकित्सा जहां इलाज से ज्यादा खतरे हैं</strong></h5>
<p>परिजनों के मुताबिक सत्यकुमार पाटले के ऑपरेशन के बाद हालत में सुधार हो रहा था और डॉक्टरों ने भी जल्द छुट्टी देने का भरोसा दिया था। फिर अचानक ऐसा क्या चमत्कार हुआ कि मरीज को जान गंवानी पड़ी। परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि चार घंटे तक इलाज में देरी की गई और मरीज को तड़पता छोड़ दिया गया। अस्पताल प्रबंधन की इस जादुई चिकित्सा प्रणाली पर व्यंग्य ही किया जा सकता है कि जहां डॉक्टर मरीज को ठीक करने का दावा करते हैं वहां मरीज सीधे मौत की नींद सो जाता है। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है लेकिन इस अस्पताल का इतिहास खंगालने पर जो पन्ने खुलते हैं वे किसी भी मरीज को डराने के लिए काफी हैं।</p>
<h5><strong>जब जिंदगी बचाने वाले आईसीयू में हुआ था गैंगरेप</strong></h5>
<p>आपको याद होगा कि यह वही श्रीराम केयर अस्पताल है जिसने इंसानियत और चिकित्सा पेशे को शर्मसार कर दिया था। इसी अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रही एक इंजीनियरिंग छात्रा के साथ दो वार्ड बॉय ने दरिंदगी की थी। दवा के रिएक्शन के कारण छात्रा यहां भर्ती हुई थी और रात के अंधेरे में उसके साथ गैंगरेप किया गया। जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने सीएमएचओ के निर्देश पर अस्पताल में दबिश दी और दस्तावेज जब्त किए तो एक और बड़ा खेल सामने आया। पता चला कि अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे का फुटेज भी धुंधला है। यह कितना सुविधाजनक इत्तेफाक है कि जब अस्पताल में कोई बड़ा अपराध होता है तो कैमरे भी अपनी आंखें मूंद लेते हैं। इस मामले में नर्सिंग होम एक्ट के तहत अस्पताल संचालक की घोर लापरवाही उजागर हुई थी और तहसीलदार के सामने शिनाख्त के बाद दोनों आरोपियों को जेल की हवा खानी पड़ी थी।</p>
<h5><strong>नियम कानूनों को ठेंगा दिखाना तो पुरानी आदत है</strong></h5>
<p>इस अस्पताल के लिए स्वास्थ्य विभाग के नियम कायदे शायद कागज के टुकड़े मात्र हैं। पूर्व में कोरोना काल जैसी गंभीर स्थिति के दौरान एंटीजेन रिपोर्ट जमा नहीं करने के मामले में भी स्वास्थ्य विभाग इस अस्पताल को नोटिस थमा चुका है। हर बार कोई न कोई बड़ी चूक होती है नोटिस जारी होता है कुछ दिन जांच पड़ताल का नाटक चलता है और फिर अस्पताल का मुनाफा कमाने वाला कारोबार अपनी रफ्तार से चलने लगता है।</p>
<p>अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या खाकी वर्दी पहनने वाले एक कांस्टेबल की मौत के बाद भी प्रशासन केवल कागजी खानापूर्ति करेगा। श्रीराम केयर अस्पताल में इलाज के नाम पर जो लापरवाही का खुला खेल चल रहा है उस पर प्रशासन का डंडा कब चलेगा यह पूरे बिलासपुर की जनता पूछ रही है। क्या स्वास्थ्य विभाग किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या इस बार जिम्मेदारों पर कोई ठोस और कड़ी कार्रवाई होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>हेल्थ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 09:24:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजधानी की बहुमंजिला इमारतों में मौत का फंदा बनीं लिफ्ट: ACS ऋचा शर्मा के बाद IAS अफसर की पत्नी और कांग्रेस प्रवक्ता फंसे, मैनेजमेंट मस्त-सिस्टम पस्त</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर. राजधानी की पॉश और बहुमंजिला कमर्शियल इमारतें इन दिनों जानलेवा साबित हो रही हैं। इन इमारतों में लगी करोड़ों की लिफ्ट अब 'सुविधा' कम और 'खौफ का डिब्बा' ज्यादा बन गई हैं। वीआईपी रोड स्थित करेंसी टॉवर में सीनियर आईएएस (ACS) ऋचा शर्मा के 20 मिनट तक लिफ्ट में कैद रहने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि गुरुवार को फाफाडीह के पिथालिया कॉम्प्लेक्स में भी ऐसा ही वाकया दोहराया गया। यहां वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सिद्धार्थ कोमल परदेशी की पत्नी गार्गी परदेशी करीब 15-20 मिनट तक लिफ्ट में फंसी रहीं। एक के बाद एक वीआईपी और आम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/lifts-have-become-a-trap-of-death-in-the-multi-storey/article-9532"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/file_00000000926871f8ad2ddf41b3a45fa8.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर. राजधानी की पॉश और बहुमंजिला कमर्शियल इमारतें इन दिनों जानलेवा साबित हो रही हैं। इन इमारतों में लगी करोड़ों की लिफ्ट अब 'सुविधा' कम और 'खौफ का डिब्बा' ज्यादा बन गई हैं। वीआईपी रोड स्थित करेंसी टॉवर में सीनियर आईएएस (ACS) ऋचा शर्मा के 20 मिनट तक लिफ्ट में कैद रहने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि गुरुवार को फाफाडीह के पिथालिया कॉम्प्लेक्स में भी ऐसा ही वाकया दोहराया गया। यहां वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सिद्धार्थ कोमल परदेशी की पत्नी गार्गी परदेशी करीब 15-20 मिनट तक लिफ्ट में फंसी रहीं। एक के बाद एक वीआईपी और आम लोगों की जान पर बन आने के बावजूद प्रशासनिक अमला और बिल्डिंग मैनेजमेंट गहरी नींद में सोया हुआ है।</p>
<p> </p>
<h5><strong>कल पिथालिया कॉम्प्लेक्स में क्या हुआ?</strong></h5>
<p> </p>
<p>गुरुवार सुबह फाफाडीह स्थित पिथालिया कॉम्प्लेक्स में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब आईएएस सिद्धार्थ कोमल परदेशी की पत्नी गार्गी परदेशी अपने निजी काम से वहां पहुंचीं। लिफ्ट में सवार होते ही तकनीकी खराबी आई और वह बीच में ही अटक गई। अचानक दरवाजे लॉक होने और लिफ्ट रुकने से वे घबरा गईं। लगभग 15 से 20 मिनट तक वह अंदर फंसी रहीं। गनीमत रही कि उन्होंने शोर मचाया और मोबाइल नेटवर्क के जरिए सूचना दी जा सकी। जिसके बाद गार्ड्स और टेक्नीशियन ने कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।</p>
<h5><strong>करेंसी टॉवर बना हादसों का हॉटस्पॉट</strong></h5>
<p> </p>
<p>पिथालिया कॉम्प्लेक्स से पहले वीआईपी चौक का चर्चित करेंसी टॉवर लिफ्ट हादसों का मुख्य केंद्र बन चुका है। एक हफ्ते के भीतर यहां दो बड़े मामले सामने आए:</p>
<p> </p>
<p><strong>घटना 1 (ACS की बिगड़ी तबीयत)</strong> राज्य की असिस्टेंट चीफ सेक्रेटरी (ACS) ऋचा शर्मा करेंसी टॉवर की 7वीं मंजिल पर स्थित जिम जाने के लिए सुबह 6:30 बजे लिफ्ट में सवार हुईं और 20 मिनट तक फंसी रहीं। घुटन, अंधेरे और खराब वेंटिलेशन के कारण उनकी तबीयत तक बिगड़ गई। न इमरजेंसी अलार्म बजा और न ही अंदर मोबाइल नेटवर्क मिला।</p>
<p> </p>
<p> <strong>घटना 2 (कांग्रेस प्रवक्ता फंसे)</strong> एसीएस के मामले से मैनेजमेंट ने कोई सबक नहीं लिया। बुधवार को इसी टॉवर में प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नितिन भंसाली भी शिकार हो गए। वे सुबह 8:30 बजे जिम से बेसमेंट की ओर जा रहे थे, तभी लिफ्ट का सपोर्ट सिस्टम फेल हो गया। दरवाजा पीट-पीटकर उन्होंने गार्ड्स को बुलाया, तब जाकर उनकी जान बची।</p>
<p> </p>
<h5><strong>आम आदमी की जान से खिलवाड़</strong></h5>
<p>अगर इन घटनाओं की कड़ियां जोड़कर देखें, तो यह महज तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि एक बड़े नेक्सस और घोर लापरवाही का नतीजा है:</p>
<p> <strong>1. मेंटेनेंस के नाम पर जीरो</strong>: करेंसी टॉवर जैसे बड़े कॉम्प्लेक्स (जहां 850 दुकानें हैं) में 4 में से 2 लिफ्ट कबाड़ हो चुकी हैं। जो चल रही हैं, वे भी आए दिन अटकती हैं। नामचीन कंपनियों (जैसे जॉनसन) की लिफ्ट होने के बावजूद मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है।</p>
<p> </p>
<p> <strong>2. इमरजेंसी सिस्टम फेल</strong>: नियमों के मुताबिक लिफ्ट में सीसीटीवी, पावर बैकअप, वर्किंग अलार्म, ऑपरेटर और वेंटिलेशन जरूरी है, लेकिन मौके पर सब नदारद है। सुरक्षा गार्ड्स को रेस्क्यू की कोई ट्रेनिंग नहीं है।</p>
<p> </p>
<p><strong>जिम्मेदार कौन?</strong> मुख्य विद्युत निरीक्षालय (नवा रायपुर), जो इन लिफ्टों की फिटनेस और इंस्टॉलेशन का सर्टिफिकेट बांटता है, वह जमीनी जांच करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। नगर निगम और फायर एंड इमरजेंसी विभाग भी आंखें मूंदे बैठे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/lifts-have-become-a-trap-of-death-in-the-multi-storey/article-9532</link>
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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 20:33:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिंचाई विभाग में बड़ा खेल: 54 हजार की रिश्वत में जेल की हवा खा चुके मक्सी कुजूर को ENC बनाने ताबूत में विभाग ने ठोकी एक और कील </title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर: छत्तीसगढ़ के जल संसाधन (सिंचाई) विभाग में इन दिनों मलाईदार पोस्टिंग और पर्दे के पीछे का एक बड़ा खेल चल रहा है। 30 अप्रैल 2026 को जारी एक नए विभागीय आदेश ने मंत्रालय से लेकर विभाग के गलियारों तक नई चर्चा छेड़ दी है। माना जा रहा है कि इस आदेश के जरिए विवादित छवि वाले चीफ इंजीनियर (CE) मक्सी कुजूर को विभाग का बॉस यानी प्रमुख अभियंता (ENC) बनाने के ताबूत में एक और कील ठोंक दी गई है।</p>
<p>  </p>
<h5><strong>क्या है नया आदेश?</strong></h5>
<p>  </p>
<p>प्रमुख अभियंता कार्यालय द्वारा जारी आदेश (क्रमांक 3317003/छ.ग./2023/3708) के मुताबिक, महानदी गोदावरी कछार के मुख्य</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/big-game-in-irrigation-department-the-department-put-another-nail/article-9528"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/20260501_112229.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर: छत्तीसगढ़ के जल संसाधन (सिंचाई) विभाग में इन दिनों मलाईदार पोस्टिंग और पर्दे के पीछे का एक बड़ा खेल चल रहा है। 30 अप्रैल 2026 को जारी एक नए विभागीय आदेश ने मंत्रालय से लेकर विभाग के गलियारों तक नई चर्चा छेड़ दी है। माना जा रहा है कि इस आदेश के जरिए विवादित छवि वाले चीफ इंजीनियर (CE) मक्सी कुजूर को विभाग का बॉस यानी प्रमुख अभियंता (ENC) बनाने के ताबूत में एक और कील ठोंक दी गई है।</p>
<p> </p>
<h5><strong>क्या है नया आदेश?</strong></h5>
<p> </p>
<p>प्रमुख अभियंता कार्यालय द्वारा जारी आदेश (क्रमांक 3317003/छ.ग./2023/3708) के मुताबिक, महानदी गोदावरी कछार के मुख्य अभियंता सतीश कुमार टीकम 30 अप्रैल 2026 को रिटायर हो गए हैं। उनके रिटायरमेंट के बाद इस अहम पद का अतिरिक्त प्रभार महानदी परियोजना के मौजूदा मुख्य अभियंता श्री मक्सी कुजूर को सौंप दिया गया है। कागजों में भले ही इसे आंतरिक और वैकल्पिक व्यवस्था बताकर आगामी आदेश तक के लिए जारी किया गया हो, लेकिन विभागीय सूत्रों की मानें तो यह मक्सी कुजूर को ENC की कुर्सी तक पहुंचाने की एक सोची समझी बिसात है।</p>
<p> </p>
<h5><strong>ACB का ट्रैप, 54 हजार की रिश्वत और 18 महीने का सस्पेंशन</strong></h5>
<p> </p>
<p>मक्सी कुजूर को सिंचाई विभाग की कमान सौंपे जाने की सुगबुगाहट इसलिए भी हैरान करने वाली है क्योंकि उनका पुराना ट्रैक रिकॉर्ड भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरा रहा है। यह वही मक्सी कुजूर हैं, जिन्हें दिसंबर 2014 में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने भिलाई में 54,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।</p>
<p>उस समय वे राजनांदगांव के छुईखदान में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) थे और आरोप था कि उन्होंने ठेकेदार के रनिंग बिल पास करने के एवज में 4.75% कमीशन मांगा था। इस क्लासिक ट्रैप केस के बाद कुजूर 18 महीने तक निलंबित रहे और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। 26 जून 2018 को स्पेशल कोर्ट (ACB) ने उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी मानते हुए 5 साल सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। हालांकि, 9 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अगस्त 2023 में हाई कोर्ट ने अभियोजन पक्ष द्वारा रिश्वत की स्पष्ट मांग साबित न कर पाने और कुछ तकनीकी खामियों के चलते उन्हें बरी कर दिया था।</p>
<p> </p>
<h5><strong>रमन सरकार में जेल, विष्णुदेव सरकार में ENC की दावेदारी?</strong></h5>
<p> </p>
<p> </p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि पूर्ववर्ती डॉ. रमन सिंह की भाजपा सरकार के कार्यकाल में जिस अधिकारी पर भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज हुआ और जिसे जेल की हवा खानी पड़ी, आज उसी भाजपा की विष्णुदेव साय सरकार में उसे ENC बनाने की क्या जरूरत आन पड़ी है? सुशासन और जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली सरकार में एक ऐसे अफसर की ताजपोशी की तैयारी कई सवाल खड़े कर रही है।</p>
<p>सत्ता के करीबी और सचिव के OSD मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि मक्सी कुजूर की इस रॉकेट स्पीड वापसी के पीछे विभाग के कुछ कद्दावर चेहरों का हाथ है। सूत्रों के मुताबिक, मक्सी विभाग के एक पूर्व रसूखदार ENC के बेहद करीबी माने जाते हैं। इसके अलावा, उनकी मौजूदा प्रशासनिक पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे वर्तमान में सिंचाई विभाग के सचिव राजेश टोप्पो के OSD (विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी) के रूप में भी पदस्थ हैं।</p>
<p>जाहिर है, सचिव के OSD होने और पूर्व अधिकारियों का वरदहस्त होने के कारण मक्सी कुजूर के लिए रास्ते से सारे कांटे हटाए जा रहे हैं। सतीश कुमार टीकम के रिटायरमेंट के बहाने उन्हें महानदी गोदावरी कछार जैसी अहम जिम्मेदारी देना इसी प्री प्लान्ड स्क्रिप्ट का हिस्सा माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 11:23:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NJV EXCLUSIVE | छत्‍तीसगढ़ में ईडी की सबसे बड़ी स्ट्राइक 17 किलो सोने की चमक के बीच याद आया पुराना दर्द भारतमाला घोटाले में सस्पेंड पटवारी की वो सुसाइड फाइल फिर चर्चा में</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्‍तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही की नींद पूरी तरह से उड़ा दी है। भारतमाला सड़क परियोजना और आबकारी घोटाले की यह आंच केवल सत्ता के गलियारों और अरबपतियों की तिजोरियों तक ही सीमित नहीं है बल्कि अब इसके पुराने और खौफनाक पन्ने भी फिर से पलटे जा रहे हैं। एक तरफ जहां प्रदेश के छह प्रमुख शहरों रायपुर बिलासपुर कोरबा दुर्ग भिलाई और अंबिकापुर में चल रही छापेमारी में 17 किलो सोना और 3 करोड़ रुपये के बेशकीमती हीरे बरामद हुए हैं वहीं इस बड़ी कार्रवाई ने बिलासपुर में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/njv-exclusive-eds-biggest-strike-in-chhattisgarh-17-kg-gold/article-9527"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/20260501_094833.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्‍तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही की नींद पूरी तरह से उड़ा दी है। भारतमाला सड़क परियोजना और आबकारी घोटाले की यह आंच केवल सत्ता के गलियारों और अरबपतियों की तिजोरियों तक ही सीमित नहीं है बल्कि अब इसके पुराने और खौफनाक पन्ने भी फिर से पलटे जा रहे हैं। एक तरफ जहां प्रदेश के छह प्रमुख शहरों रायपुर बिलासपुर कोरबा दुर्ग भिलाई और अंबिकापुर में चल रही छापेमारी में 17 किलो सोना और 3 करोड़ रुपये के बेशकीमती हीरे बरामद हुए हैं वहीं इस बड़ी कार्रवाई ने बिलासपुर में भारतमाला घोटाले के भारी दबाव में कुछ समय पहले हुई एक पटवारी की सुसाइड की दर्दनाक यादें भी ताजा कर दी हैं।</p>
<p> </p>
<h5><strong>बिलासपुर में खौफनाक मौत का वो पुराना सच</strong></h5>
<p><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-05/image_search_1777608479812.jpg" alt="image_search_1777608479812" width="1920" height="1080"></img></p>
<p>ईडी की इस धमक के बीच बिलासपुर के सकरी थाना क्षेत्र स्थित ग्राम जोकी की वो पुरानी और दर्दनाक घटना फिर से चर्चा का विषय बन गई है। याद दिला दें कि भारतमाला प्रोजेक्ट में करोड़ों के मुआवजा वितरण में हुई भारी धांधली के आरोप में निलंबित चल रहे पटवारी सुरेश कुमार मिश्रा ने अपनी बहन के फार्म हाउस में फांसी लगाकर जान दे दी थी। इस मामले का सबसे दुखद पहलू यह था कि मृतक पटवारी के रिटायरमेंट में महज 3 दिन ही बचे थे। उस वक्त पुलिस को घटनास्थल से अहम सुसाइड नोट भी मिले थे जिसमें मृतक ने साफ तौर पर खुद को बेकसूर बताते हुए एक वरिष्ठ राजस्व अधिकारी एक स्थानीय कोटवार और एक अन्य रसूखदार व्यक्ति पर झूठे केस में फंसाने का बेहद गंभीर आरोप लगाया था। आज जब ईडी बड़े अफसरों पर शिकंजा कस रही है तो यह पुरानी घटना चीख चीख कर साबित करती है कि बड़े अधिकारियों ने खुद को बचाने के लिए निचले स्तर के कर्मचारियों को मोहरा बनाया था।</p>
<p> </p>
<h5><strong>एक ही शहर में कुबेर का खजाना और पुराना मातम</strong></h5>
<p><strong><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-05/image_search_1777608702803.jpg" alt="image_search_1777608702803" width="1089" height="1536"></img></strong></p>
<p> </p>
<p>बिलासपुर शहर आज व्यवस्था की एक अलग ही तस्वीर का गवाह बन रहा है। राजस्व विभाग का वह छोटा कर्मचारी न्याय की गुहार लगाते हुए पहले फांसी के फंदे पर झूल गया था और आज उसी शहर में आबकारी घोटाले के मुख्य आरोपी विकास अग्रवाल उर्फ सिब्बू के भाई विवेक अग्रवाल के ठिकानों पर कुबेर का भारी खजाना मिला है। सराफा कारोबारी विवेक के घर से ईडी की टीम को 17 किलो शुद्ध सोना 3 करोड़ के हीरों के भव्य हार और भारी मात्रा में नगद रकम मिली है। विकास अग्रवाल जो शराब कारोबारी अनवर ढेबर का सबसे खास माना जाता है पिछले चार साल से फरार है और वह दुबई में बैठकर अपना काला कारोबार चला रहा है।</p>
<p> </p>
<h5><strong>भाजपा और कांग्रेस के रसूखदारों पर कसी नकेल</strong></h5>
<p> </p>
<p>दुर्ग के महेश कॉलोनी निवासी अमर इंफ्रा ग्रुप के डायरेक्टर चतुर्भुज राठी और भिलाई निवासी कारोबारी गोविंद मंडल के ठिकानों पर भी ईडी ने सघन छानबीन की है। राठी दोनों ही सरकारों के कार्यकाल में बड़े रसूखदार ठेकेदार रहे हैं। उनके ठिकानों से जब्त तमाम हार्ड डिस्क और बेनामी संपत्तियों के कच्चे चिट्ठों की आज सघन डिकोडिंग चल रही है। अंबिकापुर और रायपुर में भी कांग्रेस नेताओं और एक नामी चार्टर्ड अकाउंटेंट के घरों से करोड़ों के संदिग्ध लेनदेन के पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं।</p>
<p> </p>
<h5><strong>12 जिलों के पूर्व कलेक्टर्स की उड़ी नींदें</strong></h5>
<p> </p>
<p>भारतमाला मुआवजा घोटाले की परतें खुलने और पुरानी सुसाइड के तार जुड़ने के बाद अब उन 12 जिलों के तत्कालीन कलेक्टर्स और वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों की नींदें पूरी तरह उड़ चुकी हैं जो उस समय तैनात थे। रायपुर धमतरी कांकेर कोंडागांव बस्तर बिलासपुर जांजगीर चांपा रायगढ़ जशपुर सरगुजा दुर्ग और राजनांदगांव के वे सभी बड़े अफसर अब जांच की जद में हैं। अब यह पूरा मामला केवल वित्तीय भ्रष्टाचार की जांच का नहीं रह गया है। भारतमाला घोटाले में ईडी की एंट्री ने उस पुरानी खौफनाक आत्महत्या की फाइल की धूल भी झाड़ दी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/njv-exclusive-eds-biggest-strike-in-chhattisgarh-17-kg-gold/article-9527</link>
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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 09:49:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NJV EXCLUSIVE | बस्तर में कोसारटेड़ा घोटाला': 42 लाख के मेडिकल घोटाले वाले दागी इंजीनियर ने डैम पर शुरू किया 'प्राइवेट टोल नाका', 4 करोड़ के रिसॉर्ट का भी खेला!</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जगदलपुर। छत्‍तीसगढ़ का बस्तर अपनी बेमिसाल प्राकृतिक सुंदरता के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है। लेकिन, जल संसाधन विभाग के कुछ दागी अफसरों ने अब इस प्राकृतिक धरोहर को अपनी अवैध कमाई का एटीएम और निजी जागीर बना लिया है। यह ताजा और बेहद चौंकाने वाला मामला बस्तर ब्लॉक के ग्राम सालेमेटा स्थित कोसारटेड़ा जलाशय का है।</p>
<p>यहां टीडीपीपी (TDPP) संभाग जल संसाधन विभाग, जगदलपुर द्वारा पर्यटकों से सरेआम अवैध 'टोल टैक्स' वसूला जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस कार्यपालन अभियंता (EE) की सर्विस बुक 42 लाख के फर्जी मेडिकल बिल घोटाले में EOW और ACB</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/njv-exclusive-kosartera-scam-in-bastar-the-tainted-engineer-involved/article-9526"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/20260501_091137.jpg" alt=""></a><br /><p>जगदलपुर। छत्‍तीसगढ़ का बस्तर अपनी बेमिसाल प्राकृतिक सुंदरता के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है। लेकिन, जल संसाधन विभाग के कुछ दागी अफसरों ने अब इस प्राकृतिक धरोहर को अपनी अवैध कमाई का एटीएम और निजी जागीर बना लिया है। यह ताजा और बेहद चौंकाने वाला मामला बस्तर ब्लॉक के ग्राम सालेमेटा स्थित कोसारटेड़ा जलाशय का है।</p>
<p>यहां टीडीपीपी (TDPP) संभाग जल संसाधन विभाग, जगदलपुर द्वारा पर्यटकों से सरेआम अवैध 'टोल टैक्स' वसूला जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस कार्यपालन अभियंता (EE) की सर्विस बुक 42 लाख के फर्जी मेडिकल बिल घोटाले में EOW और ACB जैसी एजेंसियां जब्त कर चुकी हैं, उसे बस्तर में इतनी बड़ी 'समांतर सरकार' चलाने की हिम्मत आखिर कहां से मिल रही है?</p>
<p><span style="font-family:Mukta, sans;font-size:1.25rem;">पर्यटन के नाम पर सुविधा जीरो, फिर भी वसूली चालू</span></p>
<p> </p>
<p>इन दिनों बस्तर में मौसम और वादियों का लुत्फ उठाने पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। स्थानीय लोग भी सप्ताहांत में कोसारटेड़ा जलाशय के दीदार के लिए सपरिवार पहुंच रहे हैं। लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें सुकून की जगह विभाग की 'अवैध वसूली' का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>जलाशय पर पर्यटन सुविधा के नाम पर एक तिनका तक नहीं है। न तो नौकायन (Boating) की कोई व्यवस्था शुरू की गई है और न ही बच्चों के खेलने या समय बिताने के लिए कोई अन्य साधन मौजूद है। लोग बस दूर से पानी देखकर मायूस लौट रहे हैं। इसके बावजूद, गेट पर बेखौफ होकर एंट्री के नाम पर शुल्क (टैक्स) वसूला जा रहा है। लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब तक सुविधाओं का विस्तार नहीं हो जाता, तब तक यह वसूली क्यों की जा रही है?</p>
<p> </p>
<h5>हरा-भरा पार्क उजाड़कर 4 करोड़ का 'अवैध' रिसॉर्ट निर्माण</h5>
<p> </p>
<p>भ्रष्टाचार और मनमानी का यह खेल सिर्फ गेट पर पर्ची काटने तक सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, कोसारटेड़ा जलाशय के पास पहले से मौजूद एक सुंदर पार्क था, जहां लोग परिवार के साथ बैठकर मनोरंजन करते थे। उस पार्क को रातों-रात पूरी तरह उजाड़ दिया गया। अब उसी जगह पर लगभग 3.5 से 4 करोड़ रुपये खर्च कर एक नया पार्क और एक शानदार 'रिसॉर्ट' का निर्माण किया जा रहा है।</p>
<p>सबसे बड़ा रहस्य यह है कि सौंदर्यीकरण और रिसॉर्ट निर्माण के इस करोड़ों के प्रोजेक्ट की क्या कोई प्रशासकीय स्वीकृति ली गई है? यह राशि किस मद से खर्च की जा रही है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।</p>
<p> </p>
<h5>दागी अफसर का 'सिंडिकेट' और सिस्टम पर उठे सवाल</h5>
<p> </p>
<p>यह पूरा गोरखधंधा टीडीपीपी संभाग, जल संसाधन विभाग जगदलपुर के संरक्षण में चल रहा है। इस संभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) का ट्रैक रिकॉर्ड ही अपने आप में एक बड़ा घोटाला है। हाल ही में इनके 42 लाख से अधिक के फर्जी मेडिकल बिलों का भंडाफोड़ हुआ था, जिसके बाद राज्य की शीर्ष जांच एजेंसियों ने छापे मारकर इनकी सर्विस बुक तक अपने कब्जे में ले ली है। ऐसे गंभीर वित्तीय भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अधिकारी के राज में अब 4 करोड़ का बिना स्वीकृति वाला निर्माण और अवैध टोल वसूली कई बड़े सवाल खड़े करती है।</p>
<p> </p>
<h5><strong>सुशासन पर NJV के सीधे प्रश्न...</strong></h5>
<p> </p>
<p>वसूली का आदेश किसका? क्या राज्य शासन ने कोसारटेड़ा में ऐसा कोई शुल्क वसूलने का निर्णय लिया है? यदि कोई ऐसा 'टोल टैक्स' लगाया गया है, तो बाकायदा उसका राजपत्र (Gazette) में प्रकाशन क्यों नहीं हुआ?</p>
<p> </p>
<p>पैसा किस खाते में जा रहा है? पर्यटकों से जो लाखों रुपये वसूले जा रहे हैं, वह सरकारी खजाने में जमा हो रहा है या किसी अफसर की निजी तिजोरी में?करोड़ों की स्वीकृति किसने दी?</p>
<p> 4 करोड़ के इस रिसॉर्ट और पार्क निर्माण की योजना की स्वीकृति किसने दी? प्रमुख अभियंता ने? मुख्य अभियंता ने? अधीक्षण अभियंता ने? या फिर खुद उसी दागी ईई ने अपनी मर्जी से यह खेल रच दिया?</p>
<p> </p>
<h5><strong>माननीय मुख्यमंत्री जी, संज्ञान लें!</strong></h5>
<p> </p>
<p>यह मामला केवल एक अवैध वसूली का नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार की छवि, नियम-कानून और वित्तीय अनुशासन को दी जा रही खुली चुनौती है। चूंकि जल संसाधन विभाग स्वयं माननीय मुख्यमंत्री जी के अधीन आता है, इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि वे स्वयं इस कोसारटेड़ा सिंडिकेट' का संज्ञान लें। इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, अवैध वसूली तत्काल रोकी जानी चाहिए और बिना स्वीकृति के बहाए जा रहे 4 करोड़ रुपयों के टेंडर की फाइलें तलब की जानी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 09:13:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जगदलपुर के कॉलेज में अटेंडेंस के नाम पर अवैध ‘उगाही’: 25-30 हजार तक वसूली के आरोप, शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>जगदलपुर।</strong> जगदलपुर के धरमपुरा स्थित वेदमाता गायत्री शिक्षा महाविद्यालय में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीएड और डीएड के छात्रों ने आरोप लगाया है कि कॉलेज प्रबंधन द्वारा अटेंडेंस “एडजस्टमेंट” के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। परीक्षा में बैठने के लिए अनिवार्य उपस्थिति पूरी कराने के बदले छात्रों से हजारों रुपए की मांग की जा रही है, जिससे शिक्षण संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।</p>
<p>छात्रों के मुताबिक, जिनकी उपस्थिति निर्धारित सीमा से कम होती है, उन्हें कॉलेज बुलाकर 15 हजार से लेकर 25-30 हजार रुपए तक की रकम देने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/allegations-of-illegal-extortion-of-rs-25-30-thousand-in-the/article-9522"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/image-46-10.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जगदलपुर।</strong> जगदलपुर के धरमपुरा स्थित वेदमाता गायत्री शिक्षा महाविद्यालय में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीएड और डीएड के छात्रों ने आरोप लगाया है कि कॉलेज प्रबंधन द्वारा अटेंडेंस “एडजस्टमेंट” के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। परीक्षा में बैठने के लिए अनिवार्य उपस्थिति पूरी कराने के बदले छात्रों से हजारों रुपए की मांग की जा रही है, जिससे शिक्षण संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।</p>
<p>छात्रों के मुताबिक, जिनकी उपस्थिति निर्धारित सीमा से कम होती है, उन्हें कॉलेज बुलाकर 15 हजार से लेकर 25-30 हजार रुपए तक की रकम देने के लिए कहा जाता है। कई छात्रों ने दावा किया कि पैसे नहीं देने पर परीक्षा से वंचित करने की चेतावनी दी जाती है। हैरानी की बात यह है कि कथित तौर पर ली जा रही इस राशि की कोई आधिकारिक रसीद नहीं दी जाती, जिससे पूरे मामले में पारदर्शिता की कमी और संदेह और गहरा हो जाता है।</p>
<p>मामले की पड़ताल में सामने आया कि कुछ छात्रों से बंद कमरे में रकम ली गई, जहां कॉलेज के जिम्मेदार स्टाफ की मौजूदगी बताई गई है। एक छात्र ने दावा किया कि उसने अटेंडेंस पूरी कराने के लिए 35 हजार रुपए तक चुकाए। इस तरह की शिकायतें संकेत देती हैं कि यह कोई एकल घटना नहीं बल्कि एक व्यवस्थित प्रक्रिया के रूप में संचालित हो सकता है, जिसमें छात्रों की मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है।</p>
<p>हालांकि, कॉलेज प्रबंधन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इसे निराधार बताया है। वहीं, शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मामले की जांच कराने की बात कही है। विशेषज्ञों के अनुसार, National Council for Teacher Education के नियमों के तहत बीएड-डीएड कोर्स में निर्धारित उपस्थिति अनिवार्य है, लेकिन इसके नाम पर किसी भी प्रकार की अवैध वसूली पूरी तरह गैरकानूनी है। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 16:57:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ED रेड अपडेट : दुर्ग-बिलासपुर में कारोबारियों पर दबिश, 12 जिले के कलेक्टर घेरे में</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  रायपुर:छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार तड़के एक बार फिर बड़ी और ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। इस बार ईडी के निशाने पर राज्य के रसूखदार बिल्डर, सर्राफा कारोबारी और दिग्गज राजनेता हैं। केंद्रीय एजेंसी की अलग-अलग टीमों ने दुर्ग, भिलाई और न्यायधानी बिलासपुर में एक साथ दबिश दी है। यह पूरी कार्रवाई मुख्य रूप से चर्चित 'भारतमाला प्रोजेक्ट' के मुआवजा घोटाले और बहुचर्चित शराब घोटाले के सिंडिकेट से जुड़ी हुई बताई जा रही है। इस घोटाले की आंच अब निचले स्तर के राजस्व कर्मचारियों से होते हुए राज्य के शीर्ष नौकरशाहों तक पहुंच गई है। इस पूरे महाघोटाले</p>
<p><strong>दुर्ग</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/eds-big-raid-raid-on-businessmen-in-durg-bilaspur-collector-of/article-9518"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/20260430_154140.jpg" alt=""></a><br /><p> रायपुर:छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार तड़के एक बार फिर बड़ी और ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। इस बार ईडी के निशाने पर राज्य के रसूखदार बिल्डर, सर्राफा कारोबारी और दिग्गज राजनेता हैं। केंद्रीय एजेंसी की अलग-अलग टीमों ने दुर्ग, भिलाई और न्यायधानी बिलासपुर में एक साथ दबिश दी है। यह पूरी कार्रवाई मुख्य रूप से चर्चित 'भारतमाला प्रोजेक्ट' के मुआवजा घोटाले और बहुचर्चित शराब घोटाले के सिंडिकेट से जुड़ी हुई बताई जा रही है। इस घोटाले की आंच अब निचले स्तर के राजस्व कर्मचारियों से होते हुए राज्य के शीर्ष नौकरशाहों तक पहुंच गई है। इस पूरे महाघोटाले में प्रदेश के 12 जिलों के तत्कालीन कलेक्टर ईडी की रडार पर आ गए हैं।</p>
<p><strong>दुर्ग में भाजपा नेता और बिल्डर के ठिकानों पर सघन जांच</strong></p>
<p>दुर्ग जिले में ईडी की टीम ने 'अमर इंफ्रा' के संचालक और जाने-माने बिल्डर चतुर्भुज राठी के ठिकानों पर धावा बोला है। राठी की पहचान एक भाजपा नेता और पूर्व में टिकट के प्रबल दावेदार के रूप में भी रही है। सुबह से ही उनके निवास और मुख्य कार्यालय दोनों जगहों पर सघन जांच चल रही है। ईडी के अधिकारी उनकी आधा दर्जन से अधिक फर्मों के वित्तीय दस्तावेजों, बेनामी संपत्तियों, निवेश के रिकॉर्ड और बैंक खातों को खंगाल रहे हैं। इसके साथ ही, भिलाई-3 के एफ ब्लॉक विट्ठल पुरम में रहने वाले गोविंद मंडल के घर और फैक्ट्री पर भी ईडी ने डेरा डाल रखा है।</p>
<p><strong>बिलासपुर में शराब सिंडिकेट के करीबियों पर कसा शिकंजा</strong></p>
<p>दूसरी तरफ, बिलासपुर में भी तड़के से ही हड़कंप की स्थिति है। यहां शहर के बड़े सर्राफा कारोबारी विवेक अग्रवाल के सदर बाजार स्थित 'श्री राम ज्वेलर्स' और उनके निवास पर ईडी के 10 से ज्यादा अधिकारी दस्तावेजों की पड़ताल कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई शराब घोटाले के फरार आरोपी विकास अग्रवाल के सिंडिकेट से जुड़े वित्तीय लेनदेन की पड़ताल के लिए की गई है। विकास अग्रवाल को मास्टरमाइंड अनवर ढेबर का बेहद करीबी माना जाता है और वह विवेक अग्रवाल का भाई है। ईडी यहां से हवाला और ज्वेलरी के जरिए हुए अवैध निवेश के सुराग तलाश रही है।</p>
<p><strong>भारतमाला प्रोजेक्ट: ऐसे रची गई मुआवजे की सुनियोजित लूट</strong></p>
<p>इन छापों की एक सबसे बड़ी और अहम कड़ी 'भारतमाला प्रोजेक्ट' में हुए करोड़ों के मुआवजा घोटाले से जुड़ रही है। शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जिस रूट से यह नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट गुजर रहा था, वहां की गोपनीय जानकारी पहले ही लीक कर दी गई थी। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष (कांग्रेस-भाजपा) के दिग्गज नेताओं ने अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए अपने करीबियों और रिश्तेदारों के नाम पर कौड़ियों के दाम में जमीनें खरीद लीं। बाद में जब अधिग्रहण हुआ, तो राजस्व अधिकारियों से साठगांठ कर करोड़ों रुपए का भारी-भरकम मुआवजा डकार लिया गया।</p>
<p><strong>आईएएस अफसरों पर लटकी तलवार, 12 तत्कालीन कलेक्टर रडार पर</strong></p>
<p>इस मामले का सबसे बड़ा पहलू नौकरशाही का नेक्सस है। राज्य के 12 जिलों के तत्कालीन कलेक्टर अब पूरी तरह से जांच के घेरे में आ गए हैं। ईडी इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि मुआवजा बांटने के इस खेल में इन बड़े आईएएस अधिकारियों (IAS) की क्या भूमिका रही। सूत्रों की मानें तो 12 में से 6 कलेक्टरों की सीधे तौर पर संलिप्तता की आशंका है, जिन पर स्वीकृति के एवज में मोटा कमीशन लेने का गंभीर आरोप है। इनमें रायपुर, कोरबा, धमतरी, बिलासपुर और दुर्ग के तत्कालीन कलेक्टरों के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं।</p>
<p><strong>EOW की जांच पूरी, अब ED खंगाल रही कड़िया</strong></p>
<p>इससे पहले, राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू समेत पटवारी, राजस्व निरीक्षक (आरआई) और प्रॉपर्टी डीलरों को मिलाकर कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। ईओडब्ल्यू जल्द ही अपना अंतिम चालान पेश करने वाली है। रायपुर के बाद इस गड़बड़ी का सबसे बड़ा केंद्र कोरबा रहा है, जहां पदस्थ रहे दो महिला और एक पुरुष कलेक्टर की भूमिका संदिग्ध है। ईओडब्ल्यू की इसी एफआईआर को आधार बनाकर ईडी मनी लॉन्ड्रिंग की समानांतर जांच कर रही है। करीब दो दर्जन प्रॉपर्टी डीलर और बिचौलिए भी ईडी के राडार पर हैं। आने वाले दिनों में नौकरशाही और राजनीति के कई और बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 15:43:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर में चिट्टा तस्करी पर बड़ा प्रहार: 3.60 लाख की हेरोइन जब्त, थार और मोबाइल बरामद, पूछताछ के बाद 2 और आरोपी गिरफ्तार   </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर: </strong>रायपुर में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने चिट्टा (हेरोइन) तस्करी के मामले में एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया, जिसके पास से लाखों रुपए की ड्रग्स, एक लग्जरी वाहन और मोबाइल फोन जब्त किए गए। यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल की।</p>
<p>तलाशी के दौरान करीब 18.38 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया, जिसकी बाजार कीमत लगभग 3.60 लाख रुपए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/big-attack-on-chitta-smuggling-in-raipur-heroin-worth-rs/article-9516"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/image-2026-04-30t125300010_1777533800.webp" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर: </strong>रायपुर में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने चिट्टा (हेरोइन) तस्करी के मामले में एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया, जिसके पास से लाखों रुपए की ड्रग्स, एक लग्जरी वाहन और मोबाइल फोन जब्त किए गए। यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल की।</p>
<p>तलाशी के दौरान करीब 18.38 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया, जिसकी बाजार कीमत लगभग 3.60 लाख रुपए आंकी गई है। इसके अलावा आरोपियों के पास से एक थार वाहन और चार मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। पुलिस अब जब्त मोबाइल डिवाइस की जांच कर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी हुई है, ताकि पूरे सप्लाई चैन का खुलासा किया जा सके।<img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-04/knbper_1777533669.webp" alt="knbper_1777533669" width="512" height="384"></img></p>
<p>प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से शहर में नशीले पदार्थों की आपूर्ति कर रहा था और खासतौर पर युवाओं को अपना निशाना बनाता था। पुलिस ने मुख्य आरोपी से पूछताछ के बाद दो अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया है, जिनसे आगे की पूछताछ जारी है। अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क शहर में संगठित तरीके से सक्रिय था।<img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-04/comp-717558678331756237196-3_1764955044.webp" alt="comp-717558678331756237196-3_1764955044" width="500" height="375"></img></p>
<p>पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान कर ली गई है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी भी की जाएगी। लगातार की जा रही ऐसी कार्रवाइयों से शहर में नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/big-attack-on-chitta-smuggling-in-raipur-heroin-worth-rs/article-9516</link>
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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 15:35:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डोंगरगढ़ में अवैध शराब सिंडिकेट का भंडाफोड़: MP की व्हिस्की की री-पैकिंग से चल रहा था खेल, भारी मात्रा में स्टॉक जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>डोंगरगढ़। </strong>डोंगरगढ़ में आबकारी विभाग ने अवैध शराब के संगठित नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। ग्राम कातलवाही में की गई इस छापेमारी के दौरान मध्य प्रदेश में निर्मित विदेशी शराब की बड़ी खेप के साथ री-पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जब्त की गई। देर शाम शुरू हुई यह कार्रवाई रात तक चली, जिसमें अधिकारियों ने गुप्त सूचना के आधार पर एक संदिग्ध ठिकाने को निशाना बनाया। प्रारंभिक जांच में यह साफ हुआ है कि यहां अवैध भंडारण के साथ-साथ शराब की सप्लाई का व्यवस्थित नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।<img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-04/whatsapp-image-2026-04-30-at-11.26.35-am1-edited.jpeg" alt="WhatsApp-Image-2026-04-30-at-11.26.35-AM1-edited" width="1200" height="720" /></p>
<p>तलाशी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/illegal-liquor-syndicate-busted-in-dongargarh-the-game-was-being/article-9515"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/whatsapp-image-2026-04-30-at-11.26.35-am3-edited.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>डोंगरगढ़। </strong>डोंगरगढ़ में आबकारी विभाग ने अवैध शराब के संगठित नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। ग्राम कातलवाही में की गई इस छापेमारी के दौरान मध्य प्रदेश में निर्मित विदेशी शराब की बड़ी खेप के साथ री-पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जब्त की गई। देर शाम शुरू हुई यह कार्रवाई रात तक चली, जिसमें अधिकारियों ने गुप्त सूचना के आधार पर एक संदिग्ध ठिकाने को निशाना बनाया। प्रारंभिक जांच में यह साफ हुआ है कि यहां अवैध भंडारण के साथ-साथ शराब की सप्लाई का व्यवस्थित नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।<img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-04/whatsapp-image-2026-04-30-at-11.26.35-am1-edited.jpeg" alt="WhatsApp-Image-2026-04-30-at-11.26.35-AM1-edited" width="1280" height="720"></img></p>
<p>तलाशी के दौरान करीब 243 बल्क लीटर अवैध व्हिस्की बरामद की गई, जिसमें सैकड़ों बोतलें और पाव शामिल हैं। इसके अलावा मौके से बड़ी मात्रा में खाली बोतलें, ढक्कन और विभिन्न राज्यों के लेबल भी मिले, जो इस पूरे रैकेट के सुनियोजित होने की ओर इशारा करते हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि यहां दूसरे राज्यों से लाई गई शराब को स्थानीय ब्रांडिंग के साथ दोबारा पैक कर बाजार में खपाया जा रहा था, जिससे न सिर्फ राजस्व का नुकसान हो रहा था बल्कि उपभोक्ताओं की सेहत पर भी खतरा मंडरा रहा था।<img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-04/whatsapp-image-2026-04-30-at-11.26.35-am1-edited.jpeg" alt="WhatsApp-Image-2026-04-30-at-11.26.35-AM1-edited" width="1280" height="720"></img></p>
<p>कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपी चंद्रकांत सेन उर्फ सोनू फरार हो गया, जिसकी तलाश तेज कर दी गई है। आबकारी विभाग ने संबंधित धाराओं के तहत गैर-जमानती मामला दर्ज कर जांच को आगे बढ़ाया है। अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही पूरे गिरोह का खुलासा किया जाएगा। लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए विभाग ने क्षेत्र में निगरानी और सख्ती बढ़ाने के संकेत दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/illegal-liquor-syndicate-busted-in-dongargarh-the-game-was-being/article-9515</link>
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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 13:48:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CG Liquor Scam: 2000 करोड़ के शराब घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, रायपुर के इस मशहूर ज्वेलर्स के यहां पड़ा छापा... दुबई में बैठे सुब्बू तक पहुंची आंच</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बिलासपुर/रायपुर छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2000 करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाले (CG Liquor Scam) में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर अपनी दबिश तेज कर दी है। मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) मामले की गहरी परतें उधेड़ते हुए ईडी की टीम ने रायपुर के मध्य नगरी चौक स्थित मशहूर श्री राम ज्वेलर्स (Shree Ram Jewellers) के संचालक विवेक अग्रवाल के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। सुरक्षा बलों की मौजूदगी में हुई इस हाई-प्रोफाइल रेड से राजधानी के कारोबारी जगत में हड़कंप मच गया है। ईडी की टीम ज्वेलरी शॉप और उनके निवास पर वित्तीय दस्तावेजों, कच्चे-पक्के बिलों और करोड़ों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/cg-liquor-scam-eds-big-action-in-2000-crore-liquor/article-9512"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/file_000000008d3871fabcad72a6eec0911c.png" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर/रायपुर छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2000 करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाले (CG Liquor Scam) में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर अपनी दबिश तेज कर दी है। मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) मामले की गहरी परतें उधेड़ते हुए ईडी की टीम ने रायपुर के मध्य नगरी चौक स्थित मशहूर श्री राम ज्वेलर्स (Shree Ram Jewellers) के संचालक विवेक अग्रवाल के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। सुरक्षा बलों की मौजूदगी में हुई इस हाई-प्रोफाइल रेड से राजधानी के कारोबारी जगत में हड़कंप मच गया है। ईडी की टीम ज्वेलरी शॉप और उनके निवास पर वित्तीय दस्तावेजों, कच्चे-पक्के बिलों और करोड़ों के लेन-देन के रिकॉर्ड को बारीकी से खंगाल रही है।</p>
<p><img style="float:left;" src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-04/92fce1e7-3bed-4876-81c9-58483c4cd1fc.jpg" alt="92fce1e7-3bed-4876-81c9-58483c4cd1fc" width="264" height="352"></img></p>
<p> </p>
<h5><strong>     दुबई कनेक्शन: राडार पर मास्टरमाइंड सुब्बू</strong></h5>
<p> </p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, ईडी की इस बड़ी कार्रवाई के केंद्र में असल में विवेक अग्रवाल के भाई विकास अग्रवाल उर्फ 'सुब्बू' हैं। विकास अग्रवाल को 2000 करोड़ के इस शराब घोटाले का एक बेहद अहम और मास्टरमाइंड संदिग्ध माना जा रहा है। जांच एजेंसियों की भनक लगते ही विकास अग्रवाल उर्फ सुब्बू देश छोड़कर फरार हो गया था। बताया जा रहा है कि वह वर्तमान में दुबई (Dubai) में बैठकर अपनी तमाम अवैध गतिविधियों का संचालन कर रहा है और फिलहाल जांच एजेंसियों की पहुंच से दूर है। शराब सिंडिकेट के इस बड़े नेटवर्क में सुब्बू का नाम पहले भी कई बार प्रमुखता से सामने आ चुका है, और ईडी लगातार उसके खिलाफ अपना शिकंजा कस रही है।</p>
<p> </p>
<h5><strong>  ज्वेलरी कारोबार के रास्ते काले धन की 'लॉन्ड्रिंग'?</strong></h5>
<p>   प्रवर्तन निदेशालय की जांच अब मुख्य रूप से इस दिशा में केंद्रित है कि क्या 2019 से 2022 के बीच शराब सिंडिकेट से कमाई गई अरबों रुपए की काली कमाई को सफेद करने के लिए श्री राम ज्वेलर्स या उनके अन्य कारोबारी प्रतिष्ठानों का इस्तेमाल किया गया है? जांच अधिकारियों को गहरा शक है कि सिंडिकेट के इस अवैध पैसे को सोने-चांदी की बड़े पैमाने पर खरीद-बिक्री, प्रॉपर्टी डीलिंग और अन्य निवेशों के जरिए खपाया गया है। रेड के दौरान बैंक खातों के ट्रांजैक्शन, डमी कंपनियों के दस्तावेज और बेनामी निवेश से जुड़े कई अहम सुराग ईडी की टीम जुटा रही है।</p>
<p> </p>
<h5><strong>पहले भी कुर्क हो चुकी है करोड़ों की संपत्ति</strong></h5>
<p> </p>
<p>गौरतलब है कि ईडी ने छत्तीसगढ़ में 2019 से 2022 तक चले इस शराब सिंडिकेट के कई बड़े राज पहले ही पर्दाफाश किए हैं। जांच में यह साफ हो चुका है कि इस नेटवर्क में प्रदेश के कई प्रभावशाली नौकरशाहों और रसूखदार लोगों की सीधी भूमिका रही है। विकास अग्रवाल की संलिप्तता पाए जाने के बाद जांच एजेंसी पूर्व में ही उसकी कई संपत्तियों को अटैच (कुर्क) कर चुकी है। लेकिन दुबई में बैठे सुब्बू के आर्थिक साम्राज्य की कमर तोड़ने के लिए अब उसके करीबियों के कारोबार पर ईडी का डंडा चला है।</p>
<p> </p>
<h5><strong>कई और बड़े चेहरों से उठ सकता है नकाब</strong></h5>
<p> </p>
<p>ईडी की इस ताजा कार्रवाई से साफ हो गया है कि शराब घोटाले की फाइल अभी बंद नहीं हुई है। सूत्रों का दावा है कि श्री राम ज्वेलर्स में मिल रहे दस्तावेजों की सघन जांच के बाद इस सिंडिकेट से जुड़े कई और 'सफेदपोश' लोगों के नाम बेनकाब हो सकते हैं। राज्य में आर्थिक अपराधों के खिलाफ जांच एजेंसियों का यह सख्त कदम आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी कार्रवाइयों का संकेत दे रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/cg-liquor-scam-eds-big-action-in-2000-crore-liquor/article-9512</link>
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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 12:41:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Digital Arrest Scam: ‘टेरर फंडिंग’ के नाम पर रिटायर्ड प्रोफेसर से 1.04 करोड़ की ठगी, साइबर ठगों का खेल उजागर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बिलासपुर। </strong>छत्तीसगढ़ के Bilaspur में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर रिटायर्ड महिला प्रोफेसर से 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर पीड़िता को टेरर फंडिंग में फंसाने की धमकी दी और मानसिक दबाव बनाकर भारी रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा ली।</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, ठगों ने व्हाट्सएप और वीडियो कॉल के जरिए खुद को “संजय पीएसआई” बताकर संपर्क किया। इसके बाद उन्होंने कथित जांच और गिरफ्तारी का डर दिखाते हुए पीड़िता से बैंक डिटेल्स हासिल कीं। करीब</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/digital-arrest-scam-cheating-of-rs-104-crore-from-retired/article-9508"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2025-09/cyber-attack.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बिलासपुर। </strong>छत्तीसगढ़ के Bilaspur में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर रिटायर्ड महिला प्रोफेसर से 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर पीड़िता को टेरर फंडिंग में फंसाने की धमकी दी और मानसिक दबाव बनाकर भारी रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा ली।</p>
<p>जानकारी के मुताबिक, ठगों ने व्हाट्सएप और वीडियो कॉल के जरिए खुद को “संजय पीएसआई” बताकर संपर्क किया। इसके बाद उन्होंने कथित जांच और गिरफ्तारी का डर दिखाते हुए पीड़िता से बैंक डिटेल्स हासिल कीं। करीब दो घंटे से ज्यादा चली इस कॉल के दौरान उन्हें लगातार धमकाया गया कि अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें और उनके परिवार को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।</p>
<p>डर और दबाव के माहौल में पीड़िता ने पहले 20 लाख से अधिक की रकम ट्रांसफर की, जिसके बाद अलग-अलग किश्तों में कुल 1.04 करोड़ रुपये ठगों के खातों में जमा करा दिए। इतना ही नहीं, आरोपियों ने अतिरिक्त 50 लाख रुपये की मांग भी रखी। जब पीड़िता ने अपने बेटे से बड़ी रकम की मांग की, तब इस पूरे साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ।</p>
<p>मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसे नए तरीके से ठगी के मामलों में तेजी आई है, जहां अपराधी कानून का भय दिखाकर लोगों को निशाना बनाते हैं। ऐसे मामलों में सतर्क रहना, अज्ञात कॉल या वीडियो कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देना बेहद जरूरी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 11:21:52 +0530</pubDate>
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