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                <title>अपराध - National Jagat Vision</title>
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                <description>अपराध RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>विरोधियो के दावे ध्वस्त...फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो को क्लीन चिट </title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। सीतापुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामकुमार टोप्पो को उनके जाति प्रमाण पत्र से जुड़े विवाद में बड़ी राहत मिली है। पिछले लगभग ढाई साल से चल रहे इस गंभीर मामले में रायगढ़ जिला प्रशासन की ओर से गठित जांच समिति ने अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट में विधायक रामकुमार टोप्पो को पूरी तरह से क्लीन चिट दे दी गई है। यह फैसला विधायक और उनके समर्थकों के लिए एक बड़ी सियासी जीत मानी जा रही है।</p>
<p>साल 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान रामकुमार टोप्पो के खिलाफ उनके राजनीतिक विरोधियों ने मोर्चा खोल दिया था। उनके</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/claims-of-opponents-demolished-clean-chit-given-to-sitapur-mla/article-11387"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-07/20260731_084145.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। सीतापुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामकुमार टोप्पो को उनके जाति प्रमाण पत्र से जुड़े विवाद में बड़ी राहत मिली है। पिछले लगभग ढाई साल से चल रहे इस गंभीर मामले में रायगढ़ जिला प्रशासन की ओर से गठित जांच समिति ने अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट में विधायक रामकुमार टोप्पो को पूरी तरह से क्लीन चिट दे दी गई है। यह फैसला विधायक और उनके समर्थकों के लिए एक बड़ी सियासी जीत मानी जा रही है।</p>
<p>साल 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान रामकुमार टोप्पो के खिलाफ उनके राजनीतिक विरोधियों ने मोर्चा खोल दिया था। उनके जाति प्रमाण पत्र को फर्जी बताते हुए शिकायत दर्ज कराई गई थी। मामला इतना तूल पकड़ गया कि यह हाई कोर्ट तक पहुंच गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाई कोर्ट ने रायगढ़ जिला प्रशासन को निर्देश दिए थे कि वह एक विशेष जांच समिति बनाकर इस पूरे प्रकरण की गहराई से और एक तय समय सीमा के भीतर जांच करे। न्यायालय के सख्त आदेशों के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ और सभी संबंधित पक्षों से सबूत पेश करने को कहा गया।</p>
<p>प्रशासनिक जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक शिकायत करने वाले लोगों के पास विधायक रामकुमार टोप्पो के खिलाफ कोई भी ठोस या प्रामाणिक दस्तावेज नहीं था। समिति ने अपनी लंबी जांच के दौरान दोनों पक्षों को सुना और सभी पुराने राजस्व दस्तावेजों का बारीकी से मिलान किया। जब शिकायतकर्ताओं से उनके आरोपों के समर्थन में पुख्ता सबूत मांगे गए तो वे कोई भी ऐसा कागज पेश नहीं कर पाए जिससे यह साबित हो सके कि प्रमाण पत्र जाली है। साक्ष्यों के अभाव और तथ्यों की जमीनी जांच के आधार पर समिति ने शिकायत को पूरी तरह से निराधार मानते हुए मामले को खारिज कर दिया है।</p>
<p>जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद विधायक रामकुमार टोप्पो ने अपनी खुली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस पूरी जांच प्रक्रिया के दौरान जिला प्रशासन का हर कदम पर सहयोग किया। विधायक के मुताबिक उन्हें पहले दिन से ही न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास था कि सच्चाई जरूर सामने आएगी और दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। उन्होंने इस पूरे विवाद को राजनीतिक विरोधियों की एक साजिश बताया। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान जनता को गुमराह करने और उनकी साफ सुथरी छवि को नुकसान पहुंचाने के मकसद से यह झूठी शिकायत की गई थी।</p>
<p>क्लीन चिट मिलने की खबर फैलते ही सीतापुर इलाके में विधायक के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। समर्थकों का कहना है कि यह केवल राजनीतिक रंजिश का मामला था जिसकी निष्पक्ष जांच में अब सच्चाई सामने आ गई है। प्रशासनिक नजरिए से यह मामला फिलहाल सुलझ गया है। हालांकि जानकार बताते हैं कि अगर शिकायतकर्ता इस जांच समिति की रिपोर्ट से असहमति जताते हैं तो वे आगे न्यायिक प्रक्रिया का सहारा ले सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 08:42:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग के 2500 करोड़ के टेंडर में बड़ा फर्जीवाड़ा चीफ इंजीनियर ने दिया इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग के 2549 करोड़ रुपये के एक बड़े टेंडर में भारी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। सिकासर से कोडार रिजर्वॉयर लिंक कैनाल प्रोजेक्ट का ठेका नियमों को ताक पर रखकर दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड को दे दिया गया है। दस्तावेजों से पता चलता है कि यह कंपनी टेंडर की बुनियादी शर्तें ही पूरी नहीं करती है। इस मामले में ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए विभाग के अंदर से भारी दबाव की बात सामने आई है। चर्चा है कि इसी अनुचित दबाव के चलते मुख्य अभियंता कुबेर सिंग गुरुवार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/major-fraud-in-chhattisgarh-water-resources-departments-tender-worth-rs/article-11386"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-07/20260731_075542.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग के 2549 करोड़ रुपये के एक बड़े टेंडर में भारी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। सिकासर से कोडार रिजर्वॉयर लिंक कैनाल प्रोजेक्ट का ठेका नियमों को ताक पर रखकर दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड को दे दिया गया है। दस्तावेजों से पता चलता है कि यह कंपनी टेंडर की बुनियादी शर्तें ही पूरी नहीं करती है। इस मामले में ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए विभाग के अंदर से भारी दबाव की बात सामने आई है। चर्चा है कि इसी अनुचित दबाव के चलते मुख्य अभियंता कुबेर सिंग गुरुवार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।</p>
<p>टेंडर की शर्तों के अनुसार यह निर्माण कार्य 30 महीने में पूरा करना है। इसके बाद अगले 5 साल तक इसके संचालन और रखरखाव का जिम्मा भी ठेकेदार का होगा। निविदा की कंडिका 4.1 और 3.8 ए में साफ लिखा है कि ठेकेदार के पास मुख्य ठेकेदार के रूप में काम करने का अनुभव होना चाहिए। इस टेंडर में किसी भी तरह के जॉइंट वेंचर या संयुक्त उपक्रम को हिस्सा लेने की सख्त मनाही है। नियम कहता है कि कंपनी के पास टेंडर राशि का कम से कम 50 प्रतिशत यानी 1274 करोड़ रुपये का एक समान काम पूरा करने का अनुभव होना चाहिए। अगर दो काम दिखाए जाते हैं तो दोनों 40 प्रतिशत राशि के होने चाहिए।</p>
<p>दस्तावेजों के मुताबिक दिलीप बिल्डकॉन ने मध्य प्रदेश जल निगम की गांधी सागर 2 मल्टी विलेज स्कीम का अनुभव प्रमाण पत्र लगाया है। यह प्रोजेक्ट 1400 करोड़ रुपये का था जिसमें से 1302 करोड़ रुपये का काम पूरा हुआ। लेकिन यह काम दिलीप बिल्डकॉन ने अकेले नहीं बल्कि एक जॉइंट वेंचर में किया था। इसमें दिलीप बिल्डकॉन की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत और स्काईवे इंफ्राप्रोजेक्ट्स की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत थी। 65 प्रतिशत के हिसाब से दिलीप बिल्डकॉन का अनुभव केवल 846 करोड़ रुपये बैठता है जो कि जरूरी 1274 करोड़ रुपये से काफी कम है।</p>
<p>कंपनी ने एक और काम मल्हागढ़ माइक्रो लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट का दिखाया है। इसकी कुल लागत 678 करोड़ रुपये थी। यह काम भी जॉइंट वेंचर में हुआ था लेकिन इसमें कंपनी की हिस्सेदारी का प्रतिशत तक नहीं बताया गया है। यह 678 करोड़ की राशि दोनों भागीदारों की संयुक्त लागत है। ऐसे में दिलीप बिल्डकॉन के हिस्से का अनुभव इससे भी कम होता है।</p>
<p>आरोप है कि मध्य प्रदेश जल निगम पीआईयू नीमच के महाप्रबंधक ने नियमों के खिलाफ जाकर एक ऐसा प्रमाण पत्र जारी किया जिसमें पूरे काम का श्रेय केवल दिलीप बिल्डकॉन को दे दिया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह सीधे तौर पर कूट रचना है ताकि एक अपात्र ठेकेदार को टेंडर के लिए पात्र बनाया जा सके। कार्य अनुभव का मूल्यांकन केवल 65 प्रतिशत के आधार पर होना था लेकिन गलत प्रमाण पत्र बनाकर विभाग की आंखों में धूल झोंकी गई।</p>
<p>ऑनलाइन रिकॉर्ड बताते हैं कि 27 जुलाई 2026 की रात सवा दस बजे टेंडर की दरें खोली गईं। इसमें दिलीप बिल्डकॉन ने 2524 करोड़ रुपये की बोली लगाई और वह पहले नंबर पर रही। दूसरी तरफ एनसीसी लिमिटेड ने 2600 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। टेंडर में तय अनुभव और मात्रा की शर्तों को पूरा न करने के बावजूद दिलीप बिल्डकॉन को टेंडर दे दिया गया।</p>
<p>अब इस पूरे मामले में अपात्र ठेकेदार को तुरंत टेंडर प्रक्रिया से बाहर करने की मांग उठ रही है। जल संसाधन विभाग के कुछ अधिकारियों पर अपने निजी स्वार्थ के लिए साजिश रचने का गंभीर आरोप लगा है। चीफ इंजीनियर के इस्तीफे ने इस संभावित घोटाले की गहराई को उजागर कर दिया है। सरकार और प्रशासन से इस दूषित निविदा प्रक्रिया की पारदर्शी जांच की मांग की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 07:56:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बेमेतरा में 'कलेक्टर' राज की नई मिसाल: अपर कलेक्टर बोले- मेरी मौत हुई तो जिम्मेदार मैडम होंगी; 15 दिन में थमाए 5 नोटिस, बैठक में रहकर भी मिला गैरहाजिरी का फरमान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर।  बेमेतरा का प्रशासनिक महकमा आजकल एक अलग ही तरह के अनुशासन की मिसाल पेश कर रहा है। यहां मातहत अधिकारियों को सुधारने के नाम पर जो रवैया अपनाया जा रहा है, उसके चलते जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी को न्याय के लिए राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के दरवाजे खटखटाने पड़े हैं। मामला जिले की मुखिया, यानी कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई और उनके ही अपर कलेक्टर गुड्डू लाल जगत के बीच का है। विवाद इतना गहरा गया है कि अपर कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में लिख दिया है- "अगर मेरे साथ कोई अप्रिय घटना, दुर्घटना या मेरी मौत होती है, तो</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/a-new-example-of-collector-rule-in-bemetara-additional-collector/article-11367"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-07/20260730_100521.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर।  बेमेतरा का प्रशासनिक महकमा आजकल एक अलग ही तरह के अनुशासन की मिसाल पेश कर रहा है। यहां मातहत अधिकारियों को सुधारने के नाम पर जो रवैया अपनाया जा रहा है, उसके चलते जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी को न्याय के लिए राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के दरवाजे खटखटाने पड़े हैं। मामला जिले की मुखिया, यानी कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई और उनके ही अपर कलेक्टर गुड्डू लाल जगत के बीच का है। विवाद इतना गहरा गया है कि अपर कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में लिख दिया है- "अगर मेरे साथ कोई अप्रिय घटना, दुर्घटना या मेरी मौत होती है, तो इसके लिए बेमेतरा कलेक्टर को जिम्मेदार माना जाए।"</p>
<p>बीते 18 जुलाई 2026 को आयोग को भेजे गए इस पत्र ने सिस्टम के भीतर चल रही खींचतान को उजागर कर दिया है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि मार्च 2024 से पदस्थ जिले का दूसरा सबसे बड़ा अधिकारी इस कदर मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो गया? इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री कन्या सामूहिक विवाह योजना में हुई कुछ अव्यवस्थाओं से मानी जा रही है। अपर कलेक्टर का आरोप है कि इसके बाद से उन्हें लगातार निशाना बनाया जाने लगा। प्रताड़ना का आलम यह रहा कि 31 मई से 17 जून 2026 के बीच, महज 15 दिनों के भीतर उन्हें एक के बाद एक पांच कारण बताओ नोटिस थमा दिए गए। हालांकि, अपर कलेक्टर ने हर नोटिस का समय-सीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत किया।</p>
<p>गजब की बात तो यह है कि जब वे एक नोटिस का जवाब देने के लिए पहुंचे, तो उन्हें खराब तबीयत की जानकारी देने के बावजूद कक्ष के बाहर करीब दो घंटे तक इंतजार कराया गया। इसे आप उच्चाधिकारी का रुतबा कहें या फिर जानबूझकर अपमानित करने का तरीका, लेकिन अपर कलेक्टर के लिए यह स्थिति असहनीय हो गई।</p>
<p>मानसिक उत्पीड़न का एक और नायाब तरीका टीएल बैठक में देखने को मिला। अपर कलेक्टर गुड्डू लाल जगत बैठक में मौजूद थे, फिर भी उन्हें बैठक में उपस्थित नहीं होने का कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया। इसे देखकर तो यही लगता है कि नोटिस जारी करने की इतनी जल्दी थी कि उपस्थिति रजिस्टर देखने की जरूरत ही महसूस नहीं की गई। इसी बात से उन्हें आभास हुआ कि यह सब जानबूझकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए किया जा रहा है।</p>
<p>और तो और, 22 जुलाई 2026 को कलेक्टर बेमेतरा द्वारा जारी एक आदेश में उन्हें जो सरकारी वाहन आवंटित किया गया, वह पहले से ही खटारा और लंबे समय से उपयोग योग्य नहीं है। शायद यह संदेश देने की कोशिश की गई कि जिले का दौरा इसी से करना है। इसके जवाब में अपर कलेक्टर ने भी पत्र लिखकर जता दिया है कि अगर गाड़ी ठीक नहीं कराई गई, तो जिला मुख्यालय से बाहर का कार्य करना उनके लिए संभव नहीं होगा।</p>
<p>अब यह पूरा मामला महज विभागीय कामकाज तक सीमित नहीं रह गया है। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी द्वारा मानसिक प्रताड़ना, बार-बार नोटिस जारी करने और न्याय की गुहार लगाने जैसे आरोपों ने पूरे प्रशासनिक गलियारे में चर्चा छेड़ दी है। लगातार मानसिक तनाव से गुजर रहे अधिकारी की नींद उड़ चुकी है। अब देखना यह है कि प्रशासन के इस अंदरूनी टकराव में आगे क्या कार्रवाई होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 10:11:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिजली कंपनी: 15 साल से चल रहा वेतन और पीएफ में गोलमाल, 500 प्लेसमेंट कर्मचारियों ने ठेकेदार के खिलाफ खोला मोर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर | शहर की बिजली व्यवस्था को सुचारू रखने वाले सबस्टेशनों के प्लेसमेंट कर्मचारी अब अपनी ही एजेंसी के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। रायपुर के अलग-अलग विद्युत सबस्टेशनों में 500 से अधिक प्लेसमेंट कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन कर्मचारियों ने प्लेसमेंट एजेंसी पर तय वेतन से कम राशि देने और पीएफ में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। यह स्थिति कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से लगातार बनी हुई है। अपनी मांगों और ठेकेदार की कार्यप्रणाली को लेकर कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्री, बिजली कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) और रायपुर रीजन के अधीक्षण अभियंता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/electricity-companys-15-year-old-dispute-in-salary-and-pf/article-11366"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-07/img_20260730_092854.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर | शहर की बिजली व्यवस्था को सुचारू रखने वाले सबस्टेशनों के प्लेसमेंट कर्मचारी अब अपनी ही एजेंसी के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। रायपुर के अलग-अलग विद्युत सबस्टेशनों में 500 से अधिक प्लेसमेंट कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन कर्मचारियों ने प्लेसमेंट एजेंसी पर तय वेतन से कम राशि देने और पीएफ में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। यह स्थिति कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से लगातार बनी हुई है। अपनी मांगों और ठेकेदार की कार्यप्रणाली को लेकर कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्री, बिजली कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) और रायपुर रीजन के अधीक्षण अभियंता को लिखित शिकायत भेजी है। कर्मचारियों ने प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। यदि इस अवधि में ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं होती है, तो सभी कर्मचारी काम बंद कर हड़ताल पर चले जाएंगे।</p>
<p>शिकायत के अनुसार, रायपुर में सबस्टेशनों के संचालन की जिम्मेदारी प्लेसमेंट एजेंसी यूनिक ट्रेडर्स के पास है। कर्मचारियों का आरोप है कि एजेंसी के संचालक मनोज ढोलकिया लगभग 15 वर्षों से ऑपरेटरों का आर्थिक रूप से शोषण कर रहे हैं। नियम के मुताबिक कर्मचारियों को कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार वेतन दिया जाना चाहिए, लेकिन उन्हें इससे कम राशि दी जा रही है। कर्मचारियों को आज तक वेतन पर्ची (पेमेंट स्लिप) नहीं दी गई है। वेतन पर्ची नहीं मिलने से कर्मचारियों को यह जानकारी नहीं मिल पाती कि उनके वेतन से किस मद में कितनी कटौती की जा रही है और उनका वास्तविक भुगतान कितना है।</p>
<p>ऑपरेटर विनय कुमार ने बताया कि जब कर्मचारियों ने अपना पीएफ विवरण जांचा, तो बड़ी अनियमितता सामने आई। एजेंसी की तरफ से पीएफ खातों में तीन से चार महीने तक लगातार राशि जमा की जाती है, फिर अचानक पांच-छह महीने तक कोई भी अंशदान जमा नहीं किया जाता। इसके बाद फिर एक महीने की राशि डाल दी जाती है। शिकायत यह भी है कि जो राशि खाते में जमा की जा रही है, वह निर्धारित मानक से कम है। अन्य वैधानिक कर्मचारी सुविधाएं भी पहुंच से दूर हैं।</p>
<p>टेंडर की शर्तों का भी एजेंसी पालन नहीं कर रही है। सबस्टेशन जैसे जोखिम वाले स्थानों पर काम करने वाले ऑपरेटरों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण (सेफ्टी इक्विपमेंट) देना अनिवार्य है, लेकिन एजेंसी ने उन्हें ये उपकरण भी मुहैया नहीं कराए हैं।</p>
<p><strong>ऑनलाइन शिकायतों के बाद जांच के निर्देश</strong></p>
<p>इस पूरे मामले में रायपुर सिटी सर्किल-1 के अधीक्षण अभियंता एम. विश्वकर्मा ने बताया कि ऑपरेटरों की ओर से ऑनलाइन शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए सभी संभागीय अफसरों को जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे शिकायतों की जांच करें। जांच में यदि यह प्रमाणित होता है कि कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं दिया गया या पीएफ जमा करने में अनियमितता की गई है, तो ठेकेदार से राशि की रिकवरी की जाएगी। रिकवरी की गई राशि का भुगतान संबंधित कर्मचारियों को कराया जाएगा और दोषी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार पर कार्रवाई होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 09:30:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिलासपुर सेंट्रल जेल में सनसनी, गैसीफायर प्लांट की जलती भट्ठी में कूदकर कैदी ने दी जान</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बिलासपुर : </span></strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#2b2b2b;" xml:lang="hi">बिलासपुर सेंट्रल जेल की चाकचौबंध सुरक्षा के बीच फिर एक बार कैदी की मौत की घटना ने जेल प्रशासन के दावों को पोल खोल दी हैं l </span><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली बिलासपुर सेंट्रल जेल में बुधवार को एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली घटना सामने आई। डबल मर्डर के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी ने जेल परिसर में स्थित गैसीफायर प्लांट की जलती भट्ठी में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली ।</span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और तत्काल सायरन बजाकर आपात स्थिति घोषित कर दी गई।</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/the-prisoner-committed-suicide-by-jumping-into-the-burning-furnace/article-11364"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-07/a36c4b85-b1fa-4026-b168-86d77ac3fb99.png" alt=""></a><br /><p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बिलासपुर : </span></strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#2b2b2b;" xml:lang="hi">बिलासपुर सेंट्रल जेल की चाकचौबंध सुरक्षा के बीच फिर एक बार कैदी की मौत की घटना ने जेल प्रशासन के दावों को पोल खोल दी हैं l </span><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली बिलासपुर सेंट्रल जेल में बुधवार को एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली घटना सामने आई। डबल मर्डर के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी ने जेल परिसर में स्थित गैसीफायर प्लांट की जलती भट्ठी में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली ।</span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और तत्काल सायरन बजाकर आपात स्थिति घोषित कर दी गई। पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल सूचना दी गई। </span><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जेल सूत्रों के अनुसार मृतक की पहचान <strong><span style="font-family:Mangal, serif;font-weight:normal;">बृजेश उर्फ राहुल</span></strong> के रूप में हुई है। वह डबल मर्डर के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था । </span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि बुधवार को वह अचानक जेल परिसर में स्थित गैसीफायर प्लांट तक पहुंचा और देखते ही देखते जलती हुई भट्ठी में छलांग लगा दी। जब तक जेलकर्मी उसे बचाने के लिए पहुंचते</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक उसकी मौत हो चुकी थी ।</span></span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घटना की सूचना मिलते ही <strong><span style="font-family:Mangal, serif;font-weight:normal;">कलेक्टर संजय अग्रवाल</span></strong> और <strong><span style="font-family:Mangal, serif;font-weight:normal;">एसएसपी रजनेश सिंह</span></strong> पुलिस अधिकारियों के साथ सेंट्रल जेल पहुंचे । अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जेल प्रशासन से पूरी जानकारी ली । वहीं एफएसएल और पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है ।</span></p>
<h3><strong><span><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गैसीफायर प्लांट में बनाई जाती है रसोई के लिए गैस</span></span></strong></h3>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जेल परिसर में स्थापित गैसीफायर प्लांट में लकड़ियों से गैस तैयार की जाती है</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका उपयोग जेल की रसोई में कैदियों का भोजन बनाने के लिए किया जाता है । घटना के समय प्लांट की भट्ठी चालू थी । इसी दौरान कैदी वहां पहुंचा और जलती भट्ठी में कूद गया ।</span></span></p>
<h3><strong><span><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल</span></span></strong></h3>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाई सिक्योरिटी मानी जाने वाली बिलासपुर सेंट्रल जेल में एक सजायाफ्ता कैदी का गैसीफायर प्लांट जैसे संवेदनशील क्षेत्र तक पहुंच जाना और इस तरह की घटना को अंजाम देना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है । पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना के समय वहां कौन-कौन कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात थे और सुरक्षा में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई ।</span></p>
<h3><strong><span><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पहले भी विवादों में रही है सेंट्रल जेल</span></span></strong></h3>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बिलासपुर सेंट्रल जेल पहले भी बंदियों के बीच मारपीट</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">संदिग्ध मौत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोबाइल और नशीले पदार्थों की बरामदगी सहित कई मामलों को लेकर सुर्खियों में रही है । ताजा घटना ने एक बार फिर जेल प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों को कटघरे में खड़ा कर दिया है ।</span></span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है । आत्महत्या के कारणों</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा में संभावित लापरवाही और पूरे घटनाक्रम की हर पहलू से जांच की जा रही है । मामले में जेल प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है ।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 19:47:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरदीडीह एनीकट घोटाला: जांच समिति को फाइलें ढूंढे नहीं मिल रहीं, इधर 10 साल से संविदा पर जमे अफसर को फिर चाहिए एक्सटेंशन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। कहते हैं सरकारी विभागों में फाइलें पहियों पर चलती हैं, लेकिन जब मामला करोड़ों के भ्रष्टाचार का हो और उसमें रसूखदार अफसर फंस रहे हों, तो उन फाइलों के पहियों में अचानक जंग लग जाता है। हरदीडीह एनीकट घोटाले की कहानी भी इसी जंग लगी व्यवस्था का उदाहरण बन रही है। जल संसाधन विभाग में एक तरफ तो विधानसभा की गूंज के बाद ताबड़तोड़ जांच के आदेश निकलते हैं, वहीं दूसरी तरफ जांच करने वाली समिति को रिकॉर्ड रूम का रास्ता ही नहीं दिखाया जा रहा।</p>
<p>हाल ही में विधानसभा में हरदीडीह एनीकट निर्माण में हुई भारी गड़बड़ियों का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/hardidih-anicut-scam-investigation-committee-is-not-able-to-find/article-11338"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-07/file_00000000bf4481fba8001619259616d7.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। कहते हैं सरकारी विभागों में फाइलें पहियों पर चलती हैं, लेकिन जब मामला करोड़ों के भ्रष्टाचार का हो और उसमें रसूखदार अफसर फंस रहे हों, तो उन फाइलों के पहियों में अचानक जंग लग जाता है। हरदीडीह एनीकट घोटाले की कहानी भी इसी जंग लगी व्यवस्था का उदाहरण बन रही है। जल संसाधन विभाग में एक तरफ तो विधानसभा की गूंज के बाद ताबड़तोड़ जांच के आदेश निकलते हैं, वहीं दूसरी तरफ जांच करने वाली समिति को रिकॉर्ड रूम का रास्ता ही नहीं दिखाया जा रहा।</p>
<p>हाल ही में विधानसभा में हरदीडीह एनीकट निर्माण में हुई भारी गड़बड़ियों का मुद्दा गरमाया था। इसके बाद विभाग ने 14 जुलाई 2026 को तीन सदस्यों वाली एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी। समिति को निर्देश मिला कि दो सप्ताह के भीतर अपना जांच प्रतिवेदन सौंप दें। समय बीतता गया और 27 जुलाई 2026 को गोदावरी कछार, जगदलपुर के मुख्य अभियंता कार्यालय को एक पत्र जारी करना पड़ा। इस पत्र में बताया गया कि जांच समिति द्वारा मांगे गए जरूरी अभिलेख अब तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। दस्तावेजों के अभाव में जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। पत्र में संबंधित अधिकारियों से जल्द से जल्द रिकॉर्ड देने का आग्रह किया गया है। यानी जिस समिति को करोड़ों के भ्रष्टाचार की क्षति का आकलन कर जिम्मेदारियां तय करनी थीं, उसे मूल रिकॉर्ड ही नहीं सौंपे जा रहे।</p>
<p>अब सवाल उठता है कि ये दस्तावेज छिपाकर आखिर किसे बचाने की कोशिश हो रही है? दरअसल, हरदीडीह एनीकट का निर्माण तत्कालीन मुख्य अभियंता संजय भागवत और तत्कालीन कार्यपालन अभियंता सुरेश पांडेय के कार्यकाल के दौरान हुआ था। अगर उस समय के तकनीकी अभिलेख, स्वीकृतियां, गुणवत्ता परीक्षण और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड जांच समिति की टेबल पर आ गए, तो पुराने निर्णयों की परतें खुल जाएंगी। यही कारण है कि आवश्यक दस्तावेज रोककर विधानसभा की कार्यवाही की अनदेखी की जा रही है और जांच को भटकाने का प्रयास हो रहा है।</p>
<p>इसमें एक और पेंच संविदा नियुक्ति का है। तत्कालीन मुख्य अभियंता संजय भागवत सेवानिवृत्त होने के बाद भी पिछले 10 वर्षों से संविदा पर विभाग में मुख्य अभियंता के रूप में काम कर रहे हैं। अब उन्होंने फिर से संविदा विस्तार के लिए नया आवेदन लगा दिया है। सवाल यह है कि जिस अधिकारी के ऊपर करोड़ो के भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हों, उसे विभाग 10 सालों से क्यों ढो रहा है? भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा-पत्र में संविदा नियुक्तियां खत्म करने का वादा किया था, लेकिन यहां तो स्थिति उलट है। क्या पूरे जल संसाधन विभाग में यही एक योग्य अधिकारी बचे हैं जो रिटायर होने के बाद भी कुर्सी नहीं छोड़ पा रहे? दूसरी ओर, तत्कालीन कार्यपालन अभियंता सुरेश पांडेय भी प्रमोशन पाकर आज बिलासपुर में मुख्य अभियंता के पद पर विराजमान हैं।</p>
<p>जब विभाग ने स्वयं यह समिति बनाई है, तो उसे दस्तावेज देने से कौन रोक रहा है? इसका कारण उच्च पदों पर बैठे इन अधिकारियों का रसूख बताया जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि पद के प्रभाव से अधिकारियों को डराने और प्रलोभन देने का खेल चल रहा है, ताकि पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला जाए। यदि इनके पूरे कार्यकाल की निष्पक्ष जांच हो जाए तो सुशासन के दावों की जमीन खिसक जाएगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/hardidih-anicut-scam-investigation-committee-is-not-able-to-find/article-11338</link>
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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 10:38:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायगढ़: खदान के लिए अधिग्रहित भूमि के सर्वे में खेल, 9 लाख का मुआवजा 69 लाख पहुंचा; जो मकान था ही नहीं, उसका भी बंटा पैसा</title>
                                    <description><![CDATA[<ul>
<li><strong>2017-18 के पहले सर्वे में खारिज निर्माण, 2022-23 में मान लिए गए पुराने</strong></li>
<li><strong>  एक ही मकान से कागजों में निकले तीन नाम, 2.40 करोड़ का हुआ भुगतान</strong></li>
<li><strong>जमीन पर सिर्फ मिट्टी का घर, लेकिन मूल्यांकन सूची में 69 लाख रुपए पास</strong></li>
</ul>
<p>  </p>
<p>रायपुर/रायगढ़</p>
<p>रायगढ़ जिले में एनटीपीसी की तिलईपाली कोयला खदान के लिए अधिग्रहित भूमि के सर्वे और मुआवजे में घालमेल के मामले सामने आए हैं। वर्ष 2017-18 में जो मुआवजा तय किया गया था, 2022-23 में दोबारा सर्वे होने पर वह कई गुना बढ़ गया। हमारी दस्तावेजी पड़ताल में ऐसे कई रिकॉर्ड मिले हैं, जिनसे मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/in-the-survey-of-land-acquired-for-raigarh-mine-compensation/article-11337"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-07/20260729_093445.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>2017-18 के पहले सर्वे में खारिज निर्माण, 2022-23 में मान लिए गए पुराने</strong></li>
<li><strong> एक ही मकान से कागजों में निकले तीन नाम, 2.40 करोड़ का हुआ भुगतान</strong></li>
<li><strong>जमीन पर सिर्फ मिट्टी का घर, लेकिन मूल्यांकन सूची में 69 लाख रुपए पास</strong></li>
</ul>
<p> </p>
<p>रायपुर/रायगढ़</p>
<p>रायगढ़ जिले में एनटीपीसी की तिलईपाली कोयला खदान के लिए अधिग्रहित भूमि के सर्वे और मुआवजे में घालमेल के मामले सामने आए हैं। वर्ष 2017-18 में जो मुआवजा तय किया गया था, 2022-23 में दोबारा सर्वे होने पर वह कई गुना बढ़ गया। हमारी दस्तावेजी पड़ताल में ऐसे कई रिकॉर्ड मिले हैं, जिनसे मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।</p>
<p>तिलईपाली खदान के लिए चार पंचायतों के आठ गांव- तिलईपाली, बिछिनारा, नयारामपुर, कुदुरमोहा, रायकेरा, चोटीगुड़ा, अजीतगढ़ और साल्हेपाली की भूमि अधिग्रहित की गई है। दोनों सर्वे राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ पीडब्ल्यूडी और आरईएस के इंजीनियरों की मौजूदगी में हुए थे। इसके बावजूद परिसंपत्तियों के मूल्यांकन और स्वामित्व को लेकर दस्तावेजों में भारी विरोधाभास दिखाई देता है।</p>
<p> </p>
<p><strong>जमीनी सच्चाई: मिट्टी का पुराना घर और मुआवजा 69 लाख</strong></p>
<p> </p>
<p>तिलईपाली के टीपीएच-505 (आबादी भूमि) पर अमीर राठिया काबिज हैं। पुराने सर्वे और मूल्यांकन में इनका मुआवजा लगभग 9 लाख 37 हजार रुपए निर्धारित था। नए सर्वे के बाद यह राशि बढ़कर लगभग 69 लाख रुपए हो गई। भास्कर ने जब घर पहुंचकर स्थिति देखी, तो वहां मिट्टी का पुराना मकान और खपरैल की छत मिली।</p>
<p>मुआवजा मिलने के बाद अमीर के खाते से 49 लाख 50 हजार रुपए खगेश्वर गुप्ता के दो परिजनों के खातों में स्थानांतरित किए गए। अमीर ने खगेश्वर के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई है।</p>
<p> </p>
<p><strong>पहले सर्वे में खारिज, दूसरे में पुराना मानकर बांटे 16.48 लाख</strong></p>
<p> </p>
<p>केस-1:तिलईपाली के देहरीलाल गुप्ता (मकान क्रमांक टीपीएच-573)। पहले सर्वे में तीन बरामदों को 15 जनवरी 2018 के बाद निर्मित बताकर मुआवजे से बाहर किया गया था। लेकिन 2022-23 के सर्वे में इन्हीं बरामदों को पुराने निर्माण के रूप में स्वीकार कर उनके लिए 16 लाख 48 हजार 800 रुपए अतिरिक्त जोड़ दिए गए। एक ही निर्माण पर दो अलग-अलग निष्कर्ष कैसे सामने आए, यह सवाल दस्तावेजों से उठता है।</p>
<p> </p>
<p><strong>पुराने सर्वे में उल्लेख नहीं, बाद में एक ही मकान में शामिल तीन नाम</strong></p>
<p> </p>
<p>केस-2:पुराने सर्वे और मूल्यांकन सूची में टीपीएच-587 के बाद सूची में टीपीएच-600 दर्ज है। टीपीएच-588-ए का उल्लेख सूची में नहीं मिलता। हालांकि बाद की प्रक्रिया में चुत्रीलाल गुप्ता के साथ उनकी पत्नी लीलावती (588-बी) और पुत्र राजेश गुप्ता (588-सी) के नाम पर भी मुआवजा स्वीकृत हुआ। तीनों को मिलाकर लगभग 2.40 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ। ये प्रविष्टियां बाद में किस आधार पर जोड़ी गईं, इस संबंध में राजस्व विभाग के अधिकारियों ने जानकारी होने से इनकार किया।</p>
<p> </p>
<p><strong>प्रशासन के प्रमाणित पत्रक पर भुगतान किया: एनटीपीसी</strong></p>
<p> </p>
<p>इस मामले में एनटीपीसी का कहना है कि उसने प्रशासन द्वारा प्रमाणित मुआवजा पत्रक के आधार पर ही भुगतान किया है और सर्वे प्रक्रिया में उसकी कोई भूमिका नहीं थी।</p>
<p> </p>
<p><strong>एसडीएम बोले- शिकायत पर जांच होगी</strong></p>
<p> </p>
<p>एसडीएम प्रवीण तिवारी ने कहा, "मुझे मुआवजा बढ़ाए जाने की जानकारी नहीं है। अगर ऐसी कोई शिकायत आती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। मैं दस्तावेज देखकर ही कुछ बता सकूंगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/in-the-survey-of-land-acquired-for-raigarh-mine-compensation/article-11337</link>
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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 09:35:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नगर निगम के 9 करोड़ पानी में: कागजों में 'हाईटेक' तिफरा बस स्टैंड, हकीकत में यात्रियों को मिले गड्ढे, कीचड़ और गोबर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बिलासपुर। शहर का तिफरा बस स्टैंड नगर निगम की लापरवाही और बदइंतजामी का जीता-जागता सुबूत बन गया है। करीब 9 करोड़ रुपए खर्च कर इसे हाईटेक बस स्टैंड का नाम तो दे दिया गया, लेकिन बारिश आते ही निगम के तमाम दावों की पोल खुल गई है। रोजाना यहां से सफर करने वाले 10 हजार से अधिक यात्री नगर निगम की अनदेखी के चलते गड्ढों, कीचड़ और अव्यवस्था के बीच से गुजरने को मजबूर हैं।</p>
<p>चार राज्यों (छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तरप्रदेश) की जीवनरेखा माने जाने वाले इस बस स्टैंड को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित करने का दावा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/hi-tech-tifra-bus-stand-on-paper-worth-rs-9-crore/article-11336"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-07/file_00000000f5f081fba87b0546dec89799.jpg" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर। शहर का तिफरा बस स्टैंड नगर निगम की लापरवाही और बदइंतजामी का जीता-जागता सुबूत बन गया है। करीब 9 करोड़ रुपए खर्च कर इसे हाईटेक बस स्टैंड का नाम तो दे दिया गया, लेकिन बारिश आते ही निगम के तमाम दावों की पोल खुल गई है। रोजाना यहां से सफर करने वाले 10 हजार से अधिक यात्री नगर निगम की अनदेखी के चलते गड्ढों, कीचड़ और अव्यवस्था के बीच से गुजरने को मजबूर हैं।</p>
<p>चार राज्यों (छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तरप्रदेश) की जीवनरेखा माने जाने वाले इस बस स्टैंड को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित करने का दावा निगम ने किया था। आज हालात यह हैं कि बसों के प्लेटफॉर्म के आसपास बड़े-बड़े गड्ढों में गंदा पानी भर गया है। जलभराव के कारण इन गड्ढों की गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल है और फिसलने का खतरा हर समय बना रहता है। पूरे परिसर में कचरे के ढेर और गोबर पसरा है। इन्हीं के बीच से यात्रियों को अपना भारी सामान उठाकर बसों तक पहुंचना पड़ता है। साफ-सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है, लेकिन निगम का अमला यहां से नदारद है।</p>
<p><strong>लाखों के टिकट काउंटर बने शोपीस, सिस्टम गायब</strong></p>
<p>निगम ने सुविधा के नाम पर पांच टिकट काउंटर खड़े कर दिए, जो आज केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। इनमें टिकट मिलने के बजाय लोग अपना सामान रख रहे हैं। मजबूरन यात्रियों को निजी ट्रैवल एजेंसियों के अस्थायी काउंटरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। आधुनिक बस स्टैंड की पहचान मानी जाने वाली डिजिटल सूचना प्रणाली और एलईडी डिस्प्ले का यहां कोई नामोनिशान नहीं है। हेल्प डेस्क न होने से यात्रियों को बसों के आगमन, प्रस्थान और प्लेटफॉर्म की जानकारी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। जानकारी के अभाव में कई बार यात्रियों की बसें तक छूट जाती हैं। सुरक्षा व्यवस्था भी भगवान भरोसे है, क्योंकि सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगाए गए हैं।</p>
<p><strong>फर्श पर बैठकर इंतजार करने की मजबूरी</strong></p>
<p>करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी नगर निगम यहां एक व्यवस्थित प्रतीक्षालय तक नहीं दे सका है। पर्याप्त कुर्सियां न होने की वजह से यात्रियों को घंटों फर्श पर, दीवारों के सहारे या अपने सामान पर ही बैठकर बस का इंतजार करना पड़ता है। बारिश के मौसम में मवेशियों और स्वानों ने बस स्टैंड को अपना ठिकाना बना लिया है। ऐसे में बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगों और छोटे बच्चों के लिए यहां से यात्रा करना परेशानी का सबब बन गया है। गंदगी और दुर्गंध के कारण संक्रमण का खतरा हर पल बना रहता है, फिर भी निगम के जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने बैठे हैं।</p>
<p><strong>अधिकारियों का रटा-रटाया जवाब</strong></p>
<p>इस पूरी बदहाली पर नगर निगम के अपर आयुक्त खजांची कुम्हार का रटा-रटाया जवाब है कि गड्ढों की समस्या का जायजा लिया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर सफाई और जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त कराने के निर्देश दिए जाएंगे। यात्रियों को हो रही रोजमर्रा की परेशानी को लेकर निगम के पास केवल जांच का आश्वासन है, जबकि हकीकत में व्यवस्था सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/hi-tech-tifra-bus-stand-on-paper-worth-rs-9-crore/article-11336</link>
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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 09:14:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी शराब दुकानों में एमआरपी से अधिक पर बिक्री जारी: डमी ग्राहक को 1800 की शराब 2000 में दी, एसआई निलंबित, दो अफसरों को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। ईडी और ईओडब्ल्यू की लगातार हो रही कार्रवाई के बाद भी आबकारी विभाग की सरकारी शराब दुकानों में ओवर रेटिंग का खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब सरेआम खपाई जा रही है। लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए आबकारी विभाग ने अभनपुर की देशी शराब दुकान में एक डमी ग्राहक बनाकर भेजा। यहां डमी ग्राहक को 1800 रुपए की शराब की बोतल 2000 रुपए में बेची गई।</p>
<p>ओवररेटिंग रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद विभाग ने वहां पदस्थ आबकारी उप निरीक्षक नीलम स्वर्णकार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/sales-continue-at-more-than-mrp-in-government-liquor-shops/article-11335"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-07/img_20260729_085611.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। ईडी और ईओडब्ल्यू की लगातार हो रही कार्रवाई के बाद भी आबकारी विभाग की सरकारी शराब दुकानों में ओवर रेटिंग का खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब सरेआम खपाई जा रही है। लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए आबकारी विभाग ने अभनपुर की देशी शराब दुकान में एक डमी ग्राहक बनाकर भेजा। यहां डमी ग्राहक को 1800 रुपए की शराब की बोतल 2000 रुपए में बेची गई।</p>
<p>ओवररेटिंग रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद विभाग ने वहां पदस्थ आबकारी उप निरीक्षक नीलम स्वर्णकार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस अवैध कमाई की रकम नीचे से लेकर ऊपर तक पहुंचने की शिकायतें लगातार मिलती रही हैं। इसी आधार पर रायपुर के सहायक आबकारी आयुक्त डॉ. प्रवीण वर्मा और अभनपुर मंडल प्रभारी व एडीईओ डीडी पटेल को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।</p>
<p><strong>पिछली सरकार में भी सामने आया था घोटाला</strong></p>
<p>सरकारी शराब दुकानों में ओवर रेटिंग कोई नई बात नहीं है। पिछली सरकार के कार्यकाल में भी इसी मामले में बड़ा घोटाला सामने आ चुका है। इसके बावजूद दुकानों में एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने की आदत नहीं जा रही है। विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि शराब तय कीमत से अधिक पर बेची जा रही है। इसी सूचना पर आबकारी विभाग ने कार्रवाई की रूपरेखा बनाई और अभनपुर दुकान में यह गड़बड़ी पकड़ी गई।</p>
<p><strong>ईओडब्ल्यू के रडार पर अनवर ढेबर के ठिकाने</strong></p>
<p>दूसरी ओर, आबकारी विभाग में हुए 182 करोड़ रुपए के ओवरटाइम घोटाले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू की टीम ने भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मंगलवार को टीम ने जेल में बंद शराब कारोबारी अनवर ढेबर के तीन ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। रायपुर, अभनपुर और धमतरी में तीन अलग-अलग टीमों ने पहुंचकर मकान तथा यार्ड की तलाशी ली। इस कार्रवाई के दौरान अनवर की कथित अवैध संपत्तियों के कई दस्तावेज मिले हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि अनवर ढेबर ने घोटाले की रकम को दूसरे लोगों के नाम पर निवेश किया है।</p>
<p><strong>अब तक 1200 करोड़ की संपत्तियां अटैच</strong></p>
<p>आबकारी विभाग में अलग-अलग मामलों को मिलाकर करीब 3200 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच चल रही है। इसमें 182 करोड़ रुपए का ओवरटाइम घोटाला और 300 करोड़ रुपए से अधिक का ओवररेटिंग घोटाला भी शामिल है। इन मामलों में कार्रवाई करते हुए जांच एजेंसियों ने अब तक करीब 1200 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच कर ली हैं। फिर भी, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी और अनिल के करीब 200 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश की जानकारी अब तक पूरी तरह से सामने नहीं आ सकी है। ईओडब्ल्यू की टीम लगातार छापे मारकर दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है, ताकि अवैध संपत्तियों और दूसरे लोगों के नाम पर किए गए निवेश की पूरी जानकारी निकाली जा सके। एक तरफ हजारों करोड़ की जांच चल रही है, वहीं दूसरी तरफ मैदानी स्तर पर 200 रुपए की ओवररेटिंग यह बताती है कि सिस्टम में बैठे लोगों में कार्रवाई का कोई खौफ नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/sales-continue-at-more-than-mrp-in-government-liquor-shops/article-11335</link>
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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 08:57:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CG Crime News: फर्जी नंबर प्लेट लगाकर हो रही थी करोड़ों के गांजे की तस्करी! सुकमा पुलिस ने 223 किलो गांजा के साथ 3 तस्करों को दबोचा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>सुकमा।</strong> छत्तीसगढ़ में नशे के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सुकमा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने फर्जी नंबर प्लेट लगी कार में गांजा तस्करी कर रहे तीन अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 223 किलो गांजा बरामद किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत 1.11 करोड़ से अधिक बताई जा रही है।</p>
<p><strong>फर्जी नंबर प्लेट लगाकर तस्करी की थी तैयारी</strong><br />पुलिस को सूचना मिली थी कि एक कार में बड़ी मात्रा में गांजा ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर एसपी मयंक गुर्जर के निर्देशन में विशेष टीम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/cg-crime-news-ganja-worth-crores-was-being-smuggled-by/article-11328"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-07/ganja-taskar.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सुकमा।</strong> छत्तीसगढ़ में नशे के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सुकमा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने फर्जी नंबर प्लेट लगी कार में गांजा तस्करी कर रहे तीन अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 223 किलो गांजा बरामद किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत 1.11 करोड़ से अधिक बताई जा रही है।</p>
<p><strong>फर्जी नंबर प्लेट लगाकर तस्करी की थी तैयारी</strong><br />पुलिस को सूचना मिली थी कि एक कार में बड़ी मात्रा में गांजा ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर एसपी मयंक गुर्जर के निर्देशन में विशेष टीम ने घेराबंदी कर संदिग्ध वाहन को रोका। जांच के दौरान कार पर फर्जी नंबर प्लेट लगी मिली और तलाशी लेने पर भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ।</p>
<p><strong>राजस्थान के रहने वाले हैं तीनों आरोपी</strong><br />पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी राजस्थान के निवासी हैं। पूछताछ में उनसे गांजा तस्करी के नेटवर्क, सप्लाई चेन और अन्य संभावित साथियों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है।<img src="https://lalluram.com/wp-content/uploads/2026/07/GANJA-TASKAR-1.jpg" alt="GANJA-TASKAR-1.jpg"></img></p>
<p><strong>223 किलो गांजा जब्त, कीमत 1.11 करोड़ से अधिक</strong><br />कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 223 किलोग्राम गांजा जब्त किया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 1 करोड़ 11 लाख से अधिक आंकी गई है। पुलिस ने वाहन को भी जब्त कर लिया है और आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।</p>
<p><strong>तस्करी के पूरे नेटवर्क की होगी जांच</strong><br />पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गांजे की खेप कहां से लाई गई थी और इसे किस राज्य तक पहुंचाया जाना था। साथ ही इस अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी तेज कर दी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/cg-crime-news-ganja-worth-crores-was-being-smuggled-by/article-11328</link>
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                <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 17:16:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नक्सलियों के नाम पर दहशत की साजिश! फर्जी बैनर लगाने के आरोप में BJP नेता समेत 2 गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कांकेर। </strong>छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा से जुड़े गढ़चिरौली जिले में फर्जी नक्सली बैनर-पोस्टर लगाकर दहशत फैलाने की कथित साजिश का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मामले में एक भाजपा नेता और उसके सहयोगी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का दावा है कि दोनों ने नक्सलियों के नाम पर लोगों में भय का माहौल बनाने के उद्देश्य से यह पूरी साजिश रची थी।</p>
<p><strong>सर्च ऑपरेशन में मिला संदिग्ध बैनर</strong><br />पुलिस के अनुसार, पिपली-बुर्गी क्षेत्र में नियमित सर्च ऑपरेशन के दौरान सड़क किनारे एक साइनबोर्ड के नीचे लाल रंग का संदिग्ध बैनर मिला। बैनर पर नक्सली संगठन के नाम से धमकी भरे संदेश</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/terror-conspiracy-in-the-name-of-naxalites-2-including-bjp/article-11326"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-07/image.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कांकेर। </strong>छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा से जुड़े गढ़चिरौली जिले में फर्जी नक्सली बैनर-पोस्टर लगाकर दहशत फैलाने की कथित साजिश का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मामले में एक भाजपा नेता और उसके सहयोगी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का दावा है कि दोनों ने नक्सलियों के नाम पर लोगों में भय का माहौल बनाने के उद्देश्य से यह पूरी साजिश रची थी।</p>
<p><strong>सर्च ऑपरेशन में मिला संदिग्ध बैनर</strong><br />पुलिस के अनुसार, पिपली-बुर्गी क्षेत्र में नियमित सर्च ऑपरेशन के दौरान सड़क किनारे एक साइनबोर्ड के नीचे लाल रंग का संदिग्ध बैनर मिला। बैनर पर नक्सली संगठन के नाम से धमकी भरे संदेश लिखे गए थे। प्रारंभिक जांच में मामला संदिग्ध मिलने पर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया।</p>
<p><strong>जांच में हुआ बड़ा खुलासा</strong><br />मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के निर्देश पर विशेष जांच शुरू की गई। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने गढ़चिरौली निवासी शिवा अनिल मिस्त्री और पखांजूर निवासी रंजीत (रोहित रंजीत) मलिक को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, शिवा मिस्त्री कोयलीबेड़ा जनपद पंचायत क्षेत्र क्रमांक-24 (इरपानार) से निर्वाचित सदस्य हैं और सीमा क्षेत्र में खनन एवं परिवहन से जुड़े कार्य करते हैं।</p>
<p><strong>पूछताछ में कबूल किया जुर्म</strong><br />पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने फर्जी नक्सली बैनर लगाने की बात स्वीकार कर ली। उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।</p>
<p><strong>अफवाहों से सावधान रहने की अपील</strong><br />गढ़चिरौली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध पोस्टर, बैनर या अफवाह पर बिना पुष्टि विश्वास न करें और ऐसी किसी भी गतिविधि की तत्काल सूचना पुलिस को दें। पुलिस ने चेतावनी दी है कि समाज में दहशत फैलाने या भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 16:57:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोबाइल में लिखा 'गॉड मुझे बुला रहे हैं.........', और झूल गया फांसी पर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बिलासपुर :</span></strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong> </strong>छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक होटल के कमरे में </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;">23 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षीय युवक का शव फंदे से लटके मिलने से सनसनी फैल गई । प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है । मौके से युवक के मोबाइल फोन में एक सुसाइड नोट भी मिला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उसने लिखा है कि <strong><span style="font-family:Mangal, serif;font-weight:normal;">'गॉड मुझे बुला रहे हैं</span></strong></span><strong><span style="font-family:Mangal, serif;font-weight:normal;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए मैं जा रहा हूं।'</span></span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> पुलिस मामले की जांच में जुट गई है ।</span></span></p>
<h3><strong><span><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">होटल के कमरे में मिला शव</span></span></strong></h3>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घटना तोरवा थाना क्षेत्र के जगमल चौक स्थित <strong><span style="font-family:Mangal, serif;font-weight:normal;">होटल इंटरसिटी इंटरनेशनल</span></strong> की है। मृतक की पहचान </span><strong><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;font-weight:normal;">23 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षीय</span></span></strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/it-was-written-on-the-mobile-that-god-is-calling/article-11327"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-07/hanged032609_1695463214_1695463214.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बिलासपुर :</span></strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong> </strong>छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक होटल के कमरे में </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;">23 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षीय युवक का शव फंदे से लटके मिलने से सनसनी फैल गई । प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है । मौके से युवक के मोबाइल फोन में एक सुसाइड नोट भी मिला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उसने लिखा है कि <strong><span style="font-family:Mangal, serif;font-weight:normal;">'गॉड मुझे बुला रहे हैं</span></strong></span><strong><span style="font-family:Mangal, serif;font-weight:normal;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए मैं जा रहा हूं।'</span></span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> पुलिस मामले की जांच में जुट गई है ।</span></span></p>
<h3><strong><span><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">होटल के कमरे में मिला शव</span></span></strong></h3>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घटना तोरवा थाना क्षेत्र के जगमल चौक स्थित <strong><span style="font-family:Mangal, serif;font-weight:normal;">होटल इंटरसिटी इंटरनेशनल</span></strong> की है। मृतक की पहचान </span><strong><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;font-weight:normal;">23 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षीय शिव शंकर शर्मा</span></span></strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> के रूप में हुई है</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सरकंडा क्षेत्र के कुर्मी भवन के पास का निवासी था। जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिव शंकर शनिवार को होटल के <strong><span style="font-family:Mangal, serif;font-weight:normal;">रूम नंबर </span></strong></span><strong><span style="font-family:Mangal, serif;font-weight:normal;">205</span></strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">में ठहरा था। रात में भोजन करने के बाद वह अपने कमरे में चला गया।</span></span></p>
<h3><strong><span><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कमरे से बाहर नहीं निकला तो हुआ शक</span></span></strong></h3>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रविवार सुबह होटल कर्मचारी सफाई के लिए कमरे तक पहुंचे</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। काफी देर तक दरवाजा नहीं खुलने और दोपहर तक युवक के बाहर नहीं आने पर होटल प्रबंधन को संदेह हुआ। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।</span></span></p>
<h3><strong><span><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दरवाजा तोड़ने पर सामने आया मामला</span></span></strong></h3>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूचना मिलते ही तोरवा पुलिस मौके पर पहुंची। काफी आवाज लगाने के बावजूद जब अंदर से कोई जवाब नहीं मिला तो पुलिस ने दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया। अंदर युवक का शव चुन्नी के सहारे पंखे से लटका मिला। पुलिस ने शव को नीचे उतारकर पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।</span></p>
<h3><strong><span><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मोबाइल में मिला सुसाइड नोट</span></span></strong></h3>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कमरे की तलाशी के दौरान पुलिस को मृतक के मोबाइल फोन में एक सुसाइड नोट मिला। नोट में लिखा था</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;">,<span lang="hi" xml:lang="hi"> <strong><span style="font-family:Mangal, serif;font-weight:normal;">'मेरा नाम शिवशंकर शर्मा है। मैं होटल इंटरसिटी इंटरनेशनल के रूम नंबर </span></strong></span><strong><span style="font-family:Mangal, serif;font-weight:normal;">205 <span lang="hi" xml:lang="hi">में हूं। गॉड मुझे बुला रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए मैं जा रहा हूं। आज मैं अपनी जान दे रहा हूं।'</span></span></strong></span></p>
<p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आत्महत्या के कारणों की जांच जारी</span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल आत्महत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस मृतक के परिजनों और परिचितों से पूछताछ कर रही है। साथ ही मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आत्महत्या के कारणों का खुलासा हो सकेगा l </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 16:50:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
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