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                <title>ब्यूरोक्रेट्स - National Jagat Vision</title>
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                <description>ब्यूरोक्रेट्स RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>शतरंज की बिसात में जल संसाधन का गड़बड़झाला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>शतरंज का खेल बड़ा ही निराला होता है। बिसात पर जब राजा घिरने लगता है, तो उसे बचाने के लिए प्यादों, वजीरों और घोड़ों की बेहिचक क़ुर्बानी दे दी जाती है। सत्ता और सिस्टम की गलियों में भी इन दिनों बिल्कुल ऐसा ही खेल खेला जा रहा है। लेकिन यहाँ माजरा थोड़ा और अलग है—यहाँ नियम से खेल नहीं खेला जा रहा, बल्कि अपने मनमाफ़िक खेल खेलने के लिए नियम ही बदल दिए जा रहे हैं!</p>
<p><strong>ठेकों का दुर्लभ खेल</strong></p>
<p>कायदे से सरकारी निविदाओं की शर्तें सभी के लिए एक समान होनी चाहिए। यह भी जगजाहिर है कि ये निविदाएं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/bureaucrats/water-resources-mess-in-chessboard/article-11896"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-08/img_20260821_094726.png" alt=""></a><br /><p>शतरंज का खेल बड़ा ही निराला होता है। बिसात पर जब राजा घिरने लगता है, तो उसे बचाने के लिए प्यादों, वजीरों और घोड़ों की बेहिचक क़ुर्बानी दे दी जाती है। सत्ता और सिस्टम की गलियों में भी इन दिनों बिल्कुल ऐसा ही खेल खेला जा रहा है। लेकिन यहाँ माजरा थोड़ा और अलग है—यहाँ नियम से खेल नहीं खेला जा रहा, बल्कि अपने मनमाफ़िक खेल खेलने के लिए नियम ही बदल दिए जा रहे हैं!</p>
<p><strong>ठेकों का दुर्लभ खेल</strong></p>
<p>कायदे से सरकारी निविदाओं की शर्तें सभी के लिए एक समान होनी चाहिए। यह भी जगजाहिर है कि ये निविदाएं महामहिम राज्यपाल के नाम और उनकी आज्ञा से जारी होती हैं। ऐसे में, अगर टेंडर की शर्तों में रत्ती भर भी संशोधन या बदलाव करना हो, तो उसके लिए राज्यपाल महोदय से अनुमति लेना अनिवार्य है। लेकिन 'सिस्टम' के सूरमाओं ने इस नियम को भी ताक पर रख दिया है।</p>
<p><strong>जल संसाधन विभाग: चार टेंडरो में चार सौ सवाल</strong></p>
<p>मंत्रालय के गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि जल संसाधन विभाग में शासन स्तर की चार बड़ी निविदाएं सवालों के घेरे में आ गई हैं। अंदरूनी खबर है कि इन निविदाओं की शर्तों में भारी अंतर और विसंगतियां हैं। मजेदार बात यह है कि कुछ शर्तों को सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति मिल गई, जबकि कुछ बिना किसी अनुमति के ही पास कर दी गईं। साफ है कि स्पष्ट नियम और नीति के अभाव में सब कुछ 'गड़बड़झाला' है। यह महज एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित 'घालमेल' की ओर इशारा करता है।</p>
<p><strong>मोहरों की बलि: पहले कुबेर, अब शिवाराम</strong></p>
<p>जब इस गड़बड़झाले की आंच तेज हुई और जवाबदेही तय होने की नौबत आई, तो राजा को बचाने के लिए मोहरों को आगे कर दिया गया। विभागीय सूत्रों की मानें तो पहले कुबेर सिंह गुरूवर पर भारी दबाव बनाया गया। बात जब वहां से भी नहीं बनी और किसी एक को सूली पर चढ़ाना लाजमी हो गया, तो शिवाराम सिंधारे की क़ुर्बानी दे दी गई। एक झटके में उन्हें बलि का बकरा बनाकर 'शहीद' कर दिया गया, ताकि असली खिलाड़ी पर्दे के पीछे सुरक्षित रहें।</p>
<p><strong>क्या राजा को मिलेगी मात?</strong></p>
<p>लेकिन सियासत और ब्यूरोक्रेसी की इस बिसात पर कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। दांव उलटा पड़ रहा है और 'चेक' अब सीधे राजा को मिल रहा है। सिस्टम की सांसें अटकी हुई हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि खुद को बचाने की इस जद्दोजहद में अगला 'शहीद' कौन होता है? या फिर इस बार खुद 'राजा' की मात पक्की है?</p>
<p>वक़्त का इंतजार कीजिए, बिसात बिछी है और मुहरे अभी भी चल रहे हैं!</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ब्यूरोक्रेट्स</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/bureaucrats/water-resources-mess-in-chessboard/article-11896</link>
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                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 09:47:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बेमेतरा में प्रमोशन का बड़ा खेल पुरानी एसीआर की ग्रेडिंग बदलकर अफसर को मिला उच्च पद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। राज्य के सरकारी विभागों में प्रमोशन को लेकर एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। मामला बेमेतरा जिले में पदस्थ कार्यपालन अभियंता सी एस शिवहरे से संबंधित है। आरोप है कि अगले पद पर प्रमोशन पाने के लिए उनकी पुरानी वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (एसीआर ) में नियमों को ताक पर रखकर बदलाव किया गया है। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप की स्थिति है। पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर सरकारी सिस्टम में इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हो गई।</p>
<p><strong>डीपीसी और आदेश में गड़बड़ी....</strong></p>
<p>पदोन्नति के लिए विभागीय समिति की बैठक 17 अप्रैल को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/big-game-of-promotion-in-bemetara-officer-got-higher-post/article-11852"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-08/image_search_1787022459982.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। राज्य के सरकारी विभागों में प्रमोशन को लेकर एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। मामला बेमेतरा जिले में पदस्थ कार्यपालन अभियंता सी एस शिवहरे से संबंधित है। आरोप है कि अगले पद पर प्रमोशन पाने के लिए उनकी पुरानी वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (एसीआर ) में नियमों को ताक पर रखकर बदलाव किया गया है। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप की स्थिति है। पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर सरकारी सिस्टम में इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हो गई।</p>
<p><strong>डीपीसी और आदेश में गड़बड़ी....</strong></p>
<p>पदोन्नति के लिए विभागीय समिति की बैठक 17 अप्रैल को रखी गई थी। इसके बाद शासन स्तर पर नवा रायपुर अटल नगर से 4 मई को पदोन्नति का आदेश जारी हुआ। इस आदेश का क्रमांक ईएसटीबी 102 1 1 2026 डब्ल्यूआरडी है। आदेश पुनरीक्षित डीपीसी के आधार पर निकाला गया था। लेकिन अब दस्तावेजों के मिलान से यह बात सामने आयी है कि यह डीपीसी पूरी तरह से नियम विरुद्ध है। इस कारण से इसे अमान्य घोषित करने की मांग की जा रही है।</p>
<p><strong>तीन साल में बदल गई पुरानी ग्रेडिंग</strong></p>
<p>गड़बड़ी का खुलासा अफसर की पुरानी और नई डीपीसी के दस्तावेजों की जांच से हुआ। साल 2023 में जब सी एस शिवहरे को सहायक अभियंता से कार्यपालन अभियंता के पद पर प्रमोट किया गया था तब उनके दस्तावेजों की जांच हुई थी। उस वक्त के ग्रेडिंग चार्ट में मार्च 2021 और मार्च 2022 की एसीआर का मूल्यांकन क और क श्रेणी में किया गया था। लेकिन तीन साल बाद स्थिति बिल्कुल बदल गई।</p>
<p>साल 2026 में जब कार्यपालन अभियंता से अधीक्षण अभियंता के पद के लिए दोबारा डीपीसी बैठी तो उन्हीं पुराने सालों की एसीआर अपग्रेड हो गई। नई डीपीसी के ग्रेडिंग चार्ट में मार्च 2021 और मार्च 2022 की एसीआर का मूल्यांकन क प्लस और क प्लस दर्ज किया गया। अब यक्ष प्रश्न है यह है कि जो एसीआर एक बार लिखी जा चुकी है और जिसके आधार पर पहले प्रमोशन मिल चुका है उसकी ग्रेडिंग सालों बाद अपने आप कैसे बढ़ गई।</p>
<p><strong>पदोन्नति निरस्त करने और जांच की मांग</strong></p>
<p>यह मामला सीधे तौर पर सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का मामला है। पुरानी एसीआर में मनमाना बदलाव कर प्रमोशन लेना नियमों के सख्त खिलाफ है। इस तरह के फर्जीवाड़े से व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्न उठते है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>ब्यूरोक्रेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 20:03:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंबिकापुर सीएसपी और 2 पुलिस अफसरों पर 1 करोड़ घूस लेने का आरोप, दिल्ली की विशेष अदालत ने जारी किया नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में पदस्थ नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) राहुल बंसल और पुलिस महकमे के दो अन्य अधिकारियों के खिलाफ एक करोड़ रुपए से अधिक की रिश्वत लेने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि इस रकम का लेनदेन हवाला नेटवर्क के जरिए किया गया। इस मामले में दिल्ली के राउज एवेन्यू विशेष सीबीआई अदालत ने सख्त रुख किया है। शिकायत पर प्रथम दृष्टया संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), सीबीआई निदेशक और संबंधित आरोपी पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। </p>
<p>अदालत ने डीजीपी से इस पूरे प्रकरण</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/delhis-special-court-issues-notice-on-ambikapur-csp-and-2/article-11539"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-08/image_search_1786082279912.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में पदस्थ नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) राहुल बंसल और पुलिस महकमे के दो अन्य अधिकारियों के खिलाफ एक करोड़ रुपए से अधिक की रिश्वत लेने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि इस रकम का लेनदेन हवाला नेटवर्क के जरिए किया गया। इस मामले में दिल्ली के राउज एवेन्यू विशेष सीबीआई अदालत ने सख्त रुख किया है। शिकायत पर प्रथम दृष्टया संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), सीबीआई निदेशक और संबंधित आरोपी पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। </p>
<p>अदालत ने डीजीपी से इस पूरे प्रकरण सहित तथ्यात्मक जानकारी मांगी है। वहीं, सीबीआई को निर्देश दिया है कि शिकायत प्राप्त होने के बाद से अब तक उनके स्तर पर क्या कार्रवाई की गई है।</p>
<p><strong>1 जुलाई को दाखिल की गई शिकायत</strong></p>
<p>यह मामला विशेष सीबीआई अदालत (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के जज सुधांशु कौशिक की न्यायालय में है। बीते 1 जुलाई 2026 को आकाश कुमार नाम के व्यक्ति की ओर से (बीएनएनएस) 2023 की धारा 175(3) के अंतर्गत नई शिकायत दर्ज कराई गई। अदालत ने इसे प्राप्त करने के बाद जांच के लिए पंजीकृत करने के निर्देश दे दिए हैं। अदालत कक्ष में सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता मनमीत सिंह उपस्थित रहे।</p>
<p> </p>
<p><strong>साइबर थाने के दो एसआई भी साजिश में शामिल</strong></p>
<p> </p>
<p>अदालत में की गई शिकायत और प्रस्तुत शपथ-पत्र में आरोप है कि भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी राहुल बंसल ने साजिश रची। इस साजिश में सरगुजा के साइबर थाने में पदस्थ दो उप निरीक्षक (एसआई) भी उनके साथ शामिल थे। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इन तीनों ने मिलकर हवाला का उपयोग करते हुए एक करोड़ रुपए से अधिक की रिश्वत मांगी और उस रकम को स्वीकार भी किया।</p>
<p><strong>भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर की मांग</strong></p>
<p>शिकायतकर्ता ने अदालत से मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट) की धारा 7 और 7ए के तहत एफआईआर दर्ज की जाए। इसके अतिरिक्त, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 308 और 351 के अंतर्गत भी मुकदमा दर्ज करने का आग्रह किया गया है।</p>
<p><strong>8 जून को सीबीआई को दी गई थी जानकारी</strong></p>
<p>सुनवाई के वक्त शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 8 जून 2026 को ही सीबीआई निदेशक को लिखित शिकायत भेज दी गई थी। इसमें पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई का अनुरोध था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस और जांच एजेंसियों की निष्क्रियता के कारण कोई कदम नहीं उठाया गया। इस पुरानी शिकायत की प्रति भी अदालत में पेश की गई है।</p>
<p><strong>स्थानीय पुलिस के आला अधिकारियों ने किया किनारा</strong></p>
<p>रिश्वत और हवाला के इस प्रकरण पर स्थानीय पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों ने फिलहाल कुछ भी कहने से बच रहे है। सरगुजा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राजेश अग्रवाल से जब उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि यह प्रकरण रेंज थाने के अधीन आता है। ऐसे में इस बारे में आईजी सर ही कुछ बता पाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>ब्यूरोक्रेट्स</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/delhis-special-court-issues-notice-on-ambikapur-csp-and-2/article-11539</link>
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                <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 11:28:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ईडी दफ्तर पहुंचे पूर्व IAS अफसर, निजी गाड़ियों से हुई एंट्री; दस्तावेजों से हो रहा बयानों का मिलान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। रायपुर स्थित ईडी के जोनल ऑफिस में राज्य के कई पूर्व आईएएस और वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर लंबी पूछताछ की गई है। जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई इस कार्रवाई ने प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में सरगर्मी बढ़ा दी है।</p>
<p>पिछली सरकार में अहम पदों पर रहे ये अधिकारी बिना किसी सुरक्षा या पुलिस एस्कॉर्ट के अपनी निजी गाड़ियों से ईडी दफ्तर पहुंचे। हमेशा तामझाम और काफिले में चलने वाले इन अफसरों की इस खामोश एंट्री की चर्चा मंत्रालय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/chhattisgarh-liquor-scam-former-ias-officer-reached-ed-office-entered/article-11477"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-08/file_00000000803482119c59094d4edf9cc0.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। रायपुर स्थित ईडी के जोनल ऑफिस में राज्य के कई पूर्व आईएएस और वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर लंबी पूछताछ की गई है। जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई इस कार्रवाई ने प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में सरगर्मी बढ़ा दी है।</p>
<p>पिछली सरकार में अहम पदों पर रहे ये अधिकारी बिना किसी सुरक्षा या पुलिस एस्कॉर्ट के अपनी निजी गाड़ियों से ईडी दफ्तर पहुंचे। हमेशा तामझाम और काफिले में चलने वाले इन अफसरों की इस खामोश एंट्री की चर्चा मंत्रालय से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हो रही है।</p>
<p><strong>चुनावी वादों  के बाद कार्रवाई का दबाव</strong></p>
<p>प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही शराब घोटाले में बड़ी कार्रवाई की उम्मीद की जा रही थी। पिछला विधानसभा चुनाव मुख्य रूप से भ्रष्टाचार के खिलाफ ही लड़ा गया था। नई सरकार पर चुनाव के दौरान किए गए वादों के अनुरूप सख्त कदम उठाने का दबाव है। ईडी की सक्रियता को जांच के निर्णायक मोड़ की तरफ बढ़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p><strong>इन बिंदुओं पर जांच एजेंसी का फोकस</strong></p>
<p>ईडी की टीम का पूरा फोकस तत्कालीन आबकारी नीति की खामियों, शराब के टेंडर, डिस्टिलरीज से लेकर दुकानों तक वितरण प्रणाली और अवैध वित्तीय लेन-देन के नेटवर्क पर है। जांच दल अब तक मिले दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और कई प्रमुख गवाहों के दर्ज बयानों का क्रॉस-वेरिफिकेशन कर रहा है।</p>
<p>पूछताछ के दौरान अफसरों को आमने-सामने बिठाकर उनके जवाबों का मिलान कागजी सबूतों की कसौटी पर किया जा रहा है। लाइसेंस आवंटन प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं और बेहिसाबी पैसों के लेनदेन पर सीधे सवाल किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>दो स्तर पर चल रही घोटाले की जांच</strong></p>
<p>के तहत अपनी कार्रवाई कर रही है। राज्य की जांच एजेंसियां भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) भी दर्ज एफआईआर के आधार पर मामले की जांच कर रही हैं।</p>
<p> </p>
<h6>आने वाले समय में राष्ट्रीय जगत विजन इन नामों की बहुत जल्द खुलासा करेगी.....</h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                            <category>ब्यूरोक्रेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 18:01:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डू व्हाटएवर यू वॉन्ट: IAS अमित कटारिया के 4 शब्दों से बढ़ी तकरार, सांसद बृजमोहन अग्रवाल के नोटिस पर DOPT का एक्शन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों 2004 बैच के आईएएस अधिकारी अमित कटारिया का नाम लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। मामला रायपुर लोकसभा सीट से सांसद बृजमोहन अग्रवाल और नौकरशाही के बीच टकराव का है। जानकारी निकलकर आ रही है कि सांसद ने आईएएस अफसर के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को सौंप दिया है। इस शिकायत पर एक्शन लेते हुए संसद ने डीओपीटी (DOPT) के जरिए आईएएस अधिकारी से जानकारी तलब कर ली है। अपुष्ट सूत्रों का कहना है कि अधिकारी ने उचित माध्यम से अपना पक्ष दिल्ली भेज भी दिया है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/do-whatever-you-want-ias-4-words-of-amit-kataria/article-11452"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-08/file_0000000071cc8208b4adecef5e8001221.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों 2004 बैच के आईएएस अधिकारी अमित कटारिया का नाम लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। मामला रायपुर लोकसभा सीट से सांसद बृजमोहन अग्रवाल और नौकरशाही के बीच टकराव का है। जानकारी निकलकर आ रही है कि सांसद ने आईएएस अफसर के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को सौंप दिया है। इस शिकायत पर एक्शन लेते हुए संसद ने डीओपीटी (DOPT) के जरिए आईएएस अधिकारी से जानकारी तलब कर ली है। अपुष्ट सूत्रों का कहना है कि अधिकारी ने उचित माध्यम से अपना पक्ष दिल्ली भेज भी दिया है।</p>
<p><strong>चार शब्दों ने बिगाड़ा पूरा माहौल</strong></p>
<p>मंत्रालय के सूत्रों की मानें तो यह पूरा विवाद एक टेलीफोनिक बातचीत और उसमें इस्तेमाल किए गए चार अंग्रेजी शब्दों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। बताया जा रहा है कि मई के आखिरी दिनों में शाम के वक्त कटारिया और सांसद के बीच फोन पर बातचीत हो रही थी। इसी दौरान कथित रूप से आईएएस अफसर ने कह दिया- "डू व्हाटएवर यू वॉन्ट।" हिंदी में इसका मतलब होता है कि "जो करना है कर लीजिए" या "जो करना है कर लो।" इस एक वाक्य ने आग में घी का काम किया और बात काफी आगे बढ़ गई।</p>
<p><strong>सीएसआर फंड पर अटकी थी फाइल</strong></p>
<p>इस तल्खी की असली वजह सीएसआर फंड बताई जा रही है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल की कोशिशों से यह फंड लाया गया था और वे चाहते थे कि इस राशि का इस्तेमाल उनके संसदीय क्षेत्र के सीएससी और पीएससी के विकास कार्यों में हो। लेकिन अलग-अलग कारणों का हवाला देकर यह काम लगातार टलता रहा। सांसद कार्यालय ने इस विषय और अन्य विभागीय कामों को लेकर कई बार पत्र भेजे। संदेश भी भिजवाए गए, लेकिन दूसरी तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया।</p>
<p><strong>ऐसे शुरू हुई दोनों के बीच नोकझोंक</strong></p>
<p>मई के अंतिम पखवाड़े में जब सीएसआर फंड का मामला फिर से सामने आया, तो सांसद ने सीएम सचिवालय के एक प्रभावशाली अधिकारी को फोन घुमाया। उन्होंने स्वास्थ्य सचिव की कार्यप्रणाली और रवैये पर अपनी गहरी नाराजगी जताई। सूत्रों के मुताबिक, इस शिकायत के कुछ ही देर बाद अमित कटारिया ने सांसद के नंबर पर कॉल किया, लेकिन उस वक्त सांसद एक बैठक में व्यस्त थे। जब बैठक खत्म होने के बाद बृजमोहन अग्रवाल ने अफसर को कॉल बैक किया, तो फोन पर ही माहौल गर्म हो गया।</p>
<p>कहा जा रहा है कि अफसर ने कथित तौर पर अनादर और अशिष्टता के साथ बात की। इसी बहस के बीच वह अंग्रेजी का वाक्य बोला गया। इस बर्ताव के अगले ही दिन सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के नाम विशेषाधिकार हनन की सूचना के साथ अपना नोटिस भेज दिया।</p>
<p><strong>आईएएस कटारिया का पक्ष नदारद</strong></p>
<p>पूरे प्रकरण पर आईएएस अमित कटारिया की प्रतिक्रिया जानने की लगातार कोशिश की गई। उन्हें फोन भी लगाया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इसके बाद व्हाट्सएप पर पूरा विषय लिखकर उनसे उनका पक्ष मांगा गया, वहां से भी फिलहाल कोई जवाब नहीं आया है। अगर उनका पक्ष या कोई आधिकारिक बयान आता है, तो उसे भी यहां प्रकाशित किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                            <category>ब्यूरोक्रेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 20:22:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर ठगों की बड़ी हिमाकत: मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह की फर्जी फेसबुक आईडी बनाई, 2 घंटे में 58 लोगों को जोड़कर मांगने लगे पैसे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में साइबर अपराधियों का दुस्साहस अब एक नए स्तर पर पहुंच गया है। आम नागरिकों को निशाना बनाने वाले ये जालसाज अब राज्य के बड़े अफसरों को भी अपने झांसे में लेने की कोशिश कर रहे हैं। ताजा मामला सत्ता के शीर्ष दफ्तरों तक जा पहुंचा है, जहां साइबर ठगों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रमुख सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुबोध सिंह के नाम पर ही फर्जी फेसबुक आईडी तैयार कर ली। ठगों ने न केवल उनकी तस्वीर का इस्तेमाल किया, बल्कि उनके करीबियों को मैसेज भेजकर पैसों की मांग भी शुरू कर दी।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/big-audacity-of-cyber-thugs-created-fake-facebook-id-of/article-11312"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-07/image_search_1785214009529.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में साइबर अपराधियों का दुस्साहस अब एक नए स्तर पर पहुंच गया है। आम नागरिकों को निशाना बनाने वाले ये जालसाज अब राज्य के बड़े अफसरों को भी अपने झांसे में लेने की कोशिश कर रहे हैं। ताजा मामला सत्ता के शीर्ष दफ्तरों तक जा पहुंचा है, जहां साइबर ठगों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रमुख सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुबोध सिंह के नाम पर ही फर्जी फेसबुक आईडी तैयार कर ली। ठगों ने न केवल उनकी तस्वीर का इस्तेमाल किया, बल्कि उनके करीबियों को मैसेज भेजकर पैसों की मांग भी शुरू कर दी।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक, इन शातिर ठगों ने सोमवार को फेसबुक पर सुबोध सिंह के नाम से प्रोफाइल बनाई थी। इनकी तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज दो घंटे के भीतर इस फेक प्रोफाइल से 58 लोगों को फ्रेंड लिस्ट में शामिल कर लिया गया। इसके बाद आरोपी ने जान-पहचान वाले लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी और अलग-अलग बहाने बताकर उनसे ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने को कहा।</p>
<p><strong>शिकायत के बाद हरकत में आई पुलिस</strong></p>
<p>इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब आईडी के जरिए लोगों से पैसे मांगने की बात खुद सुबोध सिंह तक पहुंची। उन्होंने बिना कोई देरी किए मामले को पूरी गंभीरता से लिया और पुलिस अधिकारियों को इसकी सूचना दी। साइबर अपराध की प्रकृति को देखते हुए तुरंत पुलिस में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। जिसके बाद पुलिस महकमे में तेजी आई और आनन-फानन में जांच शुरू कर दी गई।</p>
<p><strong>लगातार बन रहे फर्जी अकाउंट</strong></p>
<p>प्रदेश में यह कोई पहला वाकया नहीं है, जब किसी बड़े अधिकारी या जनप्रतिनिधि की फर्जी आईडी बनाकर ठगी का प्रयास हुआ हो। बीते कुछ समय में कई प्रशासनिक अफसरों, राजनेताओं और जानी-मानी हस्तियों की फेक सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर लोगों को ठगने की शिकायतें आ चुकी हैं। साइबर मामलों के जानकारों का मानना है कि जालसाज जानबूझकर रसूखदार लोगों की तस्वीर लगाते हैं, ताकि सामने वाला व्यक्ति प्रभाव में आकर बिना सोचे-समझे पैसे भेज दे।</p>
<p><strong>तकनीकी सुराग तलाश रही साइबर सेल</strong></p>
<p>फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर फर्जी फेसबुक अकाउंट की बारीकी से जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल की टीम अकाउंट बनाने वाले व्यक्ति की पहचान करने, उसका आईपी एड्रेस और लोकेशन खंगालने में जुटी है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि तकनीकी विवरण के आधार पर जल्द ही आरोपी को ट्रेस कर लिया जाएगा और उसकी गिरफ्तारी होगी।</p>
<p><strong>सतर्क रहने की हिदायत</strong></p>
<p>प्रशासन ने लोगों को आगाह किया है कि सोशल मीडिया पर आने वाली किसी भी संदिग्ध फ्रेंड रिक्वेस्ट को स्वीकार करने से पहले सावधानी बरतें। अगर कोई परिचित अचानक मैसेज कर पैसे मांगता है, तो उस पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। पैसे भेजने से पहले संबंधित व्यक्ति को फोन कर सच्चाई की तस्दीक जरूर कर लें, ताकि ऐसी किसी भी ठगी से बचा जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                            <category>ब्यूरोक्रेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 10:17:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीजीपीएससी भर्ती घोटाला: रिश्तेदारों को अफसर बनाने के बाद ईडी की गिरफ्त में टामन सिंह, जांच में करोड़ों की संपत्ति का खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की भर्तियों में हुई गड़बड़ियों की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हाथ बड़े सुराग लगे है। पूर्व अध्यक्ष और सेवानिवृत्त आईएएस टामन सिंह सोनवानी को ईडी ने न्यायालय से मंजूरी मिलने के बाद अपनी हिरासत में ले लिया है। इस पूरे प्रकरण में जो नया एंगल सामने आया है, वह उनके द्वारा पद का दुरुपयोग कर अपने ही परिवार के सदस्यों को ऊंचे पदों पर बैठाने और बड़े पैमाने पर संपत्तियां जुटाने से संबंधित है।</p>
<p>दस्तावेजों और सीबीआई की प्रारंभिक जांच से यह बात सामने आई है कि टामन सिंह ने अपने रिश्तेदारों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/cgpsc-recruitment-scam-taman-singh-in-eds-custody-after-making/article-11311"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-07/20260728_093820.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की भर्तियों में हुई गड़बड़ियों की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हाथ बड़े सुराग लगे है। पूर्व अध्यक्ष और सेवानिवृत्त आईएएस टामन सिंह सोनवानी को ईडी ने न्यायालय से मंजूरी मिलने के बाद अपनी हिरासत में ले लिया है। इस पूरे प्रकरण में जो नया एंगल सामने आया है, वह उनके द्वारा पद का दुरुपयोग कर अपने ही परिवार के सदस्यों को ऊंचे पदों पर बैठाने और बड़े पैमाने पर संपत्तियां जुटाने से संबंधित है।</p>
<p>दस्तावेजों और सीबीआई की प्रारंभिक जांच से यह बात सामने आई है कि टामन सिंह ने अपने रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे पदों पर नियुक्त करवाया। उनके घर से ही भतीजा नीतेश सोनवानी और उसकी पत्नी निशा कोसले डिप्टी कलेक्टर बने। इसी तरह दूसरे भतीजे साहिल सोनवानी को डीएसपी, भाई की बहू दीपा आडिल को जिला आबकारी अधिकारी और बहन की बेटी सुनीता को श्रम अधिकारी के पद पर चयन मिला। अन्य करीबियों और परिचितों के बच्चों को भी नौकरियां दी गईं।</p>
<p>इन नियुक्तियों के एवज में हुए लेन-देन का मनी ट्रेल अब जांच एजेंसियों के हाथ लगा है। जानकारी के अनुसार, टामन सिंह की पत्नी डॉ. पद्मिनी सिंह सोनवानी के एनजीओ 'ग्रामीण विकास समिति, सरबदा' के खाते में 45 लाख रुपए जमा किए गए थे। यह रकम श्री बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के अकाउंट से ट्रांसफर हुई थी। इस कंपनी में श्रवण कुमार गोयल की भूमिका थी, जिनके बेटे और बहू का भी डिप्टी कलेक्टर के रूप में चयन हुआ था। सीबीआई इन दोनों को पहले ही पकड़ चुकी है। अब ईडी इसी वित्तीय लेन-देन और हवाला के माध्यम से हुए धन के प्रवाह की पड़ताल कर रही है। आरोप हैं कि भर्तियों का पैसा हवाला के जरिए ही उन तक पहुंचा।</p>
<p>जांच में यह भी पाया गया है कि पूर्व चेयरमैन ने अपनी आय से कहीं अधिक संपत्तियां बनाई हैं। राज्य के दूरदराज के इलाकों में उनके और उनके परिवार के नाम पर बड़े भूखंड खरीदे गए हैं। टामन सिंह के अपने नाम पर धमतरी, कुरुद, और रायपुर के अभनपुर में लगभग 10 हेक्टेयर जमीन के दस्तावेज मिले हैं। इसके अतिरिक्त मैनपाट में एक बड़ा फार्महाउस, पैतृक गांव सरबदा में खेत और रायपुर में एक कीमती मकान भी उनकी संपत्तियों में शामिल है। उन्होंने कई जगहों पर निवेश दूसरों के नाम पर किया है।</p>
<p>उनके परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर भी काफी जमीनें खरीदी गई हैं। पत्नी डॉ. पद्मिनी के नाम पर बोरियाकला और सरबदा में दो हेक्टेयर से ज्यादा जमीन है, जिसका नामांतरण जुलाई 2021 से फरवरी 2022 के बीच हुआ। बेटी कृति के नाम पर धमतरी और धरसींवा में करीब तीन हेक्टेयर जमीन मौजूद है। वहीं, बेटे अभिषेक सोनवानी के नाम पर मैनपाट और सरबदा में ढाई हेक्टेयर से ज्यादा जमीन और मैनपाट के उरंगा में एक रिसॉर्ट होने की जानकारी भी सामने आई है।</p>
<p>इस पूरे मामले में सीबीआई इसी साल जनवरी में 29 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगा चुकी है। टामन सिंह के साथ-साथ पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, उप नियंत्रक ललित गणवीर और सेवानिवृत्त आईएएस जीवन किशोर ध्रुव पहले से ही जेल में हैं। कुल एक दर्जन गिरफ्तारियां हुई हैं। हालांकि चयनित उम्मीदवारों को अदालत से जमानत मिल गई है और विवादित अधिकारियों ने अपनी ज्वाइनिंग भी ले ली है। इसके बावजूद जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार जारी है और दस्तावेजों की सघन जांच हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अपराध</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                            <category>ब्यूरोक्रेट्स</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/crime/cgpsc-recruitment-scam-taman-singh-in-eds-custody-after-making/article-11311</link>
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                <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 09:38:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
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