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                <title>हेल्थ - National Jagat Vision</title>
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                            <item>
                <title>गर्मियों में नाक से खून आ गया है तो तुरंत क्या करें, ये क्यों होता है</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गर्मियों में तेज गर्मी और सूखी हवा का असर शरीर पर साफ नजर आने लगता है. कई लोगों को इस मौसम में अचानक नाक से खून आने की समस्या हो जाती है, जिसे आमतौर पर नकसीर कहा जाता है. यह स्थिति बच्चों और बुजुर्गों में ज्यादा देखी जाती है, लेकिन किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है. अक्सर लोग इसे हल्की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बार-बार ऐसा होना परेशानी का संकेत हो सकता है.</p>
<p>गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी, तेज धूप और बदलती आदतों का असर सीधे तौर पर नाक के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/health/if-you-have-nose-bleeding-in-summer-what-to-do/article-9503"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/nose-bleeding-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>गर्मियों में तेज गर्मी और सूखी हवा का असर शरीर पर साफ नजर आने लगता है. कई लोगों को इस मौसम में अचानक नाक से खून आने की समस्या हो जाती है, जिसे आमतौर पर नकसीर कहा जाता है. यह स्थिति बच्चों और बुजुर्गों में ज्यादा देखी जाती है, लेकिन किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है. अक्सर लोग इसे हल्की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बार-बार ऐसा होना परेशानी का संकेत हो सकता है.</p>
<p>गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी, तेज धूप और बदलती आदतों का असर सीधे तौर पर नाक के अंदर की नाजुक नसों पर पड़ सकता है. कई बार यह समस्या अचानक होती है, जिससे लोग घबरा भी जाते हैं. ऐसे में जरूरी है कि इस स्थिति को समझा जाए और सही समय पर सही कदम उठाए जाएं. सही जानकारी होने से न सिर्फ घबराहट कम होती है, बल्कि स्थिति को जल्दी संभालने में भी मदद मिलती है. इसलिए इस विषय को समझना और सतर्क रहना बेहद जरूरी है.</p>
<p><strong>गर्मियों में नाक से खून आने के क्या कारण हैं?</strong><br />डॉ. बताते हैं कि गर्मियों में नाक से खून आने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. तेज गर्मी और सूखी हवा के कारण नाक के अंदर की झिल्ली सूख जाती है, जिससे नसें कमजोर होकर फट सकती हैं. शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन भी इसका एक बड़ा कारण है. इसके अलावा, बार-बार नाक साफ करना, चोट लगना या एलर्जी भी नकसीर की वजह बन सकती है.</p>
<p>लक्षणों की बात करें तो अचानक नाक से खून बहना इसका मुख्य संकेत है. कुछ लोगों को इससे पहले नाक में सूखापन, जलन या खुजली महसूस हो सकती है. कई बार सिर भारी लगना या हल्का चक्कर भी आ सकता है. अगर खून ज्यादा मात्रा में आए या बार-बार यह समस्या हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है.</p>
<p><strong>कैसे करें बचाव?</strong><br />नकसीर से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि शरीर को हाइड्रेट रखा जाए. पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और तरल पदार्थ जैसे नींबू पानी, छाछ आदि का सेवन करें. बहुत ज्यादा धूप में जाने से बचें और बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखें. नाक के अंदर सूखापन न हो, इसके लिए कमरे में नमी बनाए रखें या ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल कर सकते हैं. बार-बार नाक में उंगली डालने या जोर से साफ करने से बचें, क्योंकि इससे नसों को नुकसान हो सकता है.</p>
<p>ठंडी चीजों का सीमित सेवन और संतुलित डाइट लेना भी फायदेमंद होता है. अगर मौसम बहुत गर्म हो, तो घर के अंदर ठंडी और हवादार जगह पर रहें. बच्चों को खासतौर पर धूप में खेलने से रोकें और उनकी पानी पीने की आदत पर ध्यान दें. सही सावधानियां अपनाकर नकसीर की समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है.</p>
<p><strong>सावधानियां भी जानें</strong><br />अगर नाक से खून आए, तो घबराएं नहीं और तुरंत बैठकर सिर को थोड़ा आगे की ओर झुकाएं. नाक को हल्के से दबाकर कुछ मिनट तक रखें, ताकि खून रुक सके.</p>
<p>सिर पीछे की ओर झुकाने से बचें, क्योंकि इससे खून गले में जा सकता है. अगर समस्या बार-बार हो रही हो या खून ज्यादा आए, तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करें.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हेल्थ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 11:01:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या तरबूज और बिरयानी खाने से हो सकती है मौत? क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p>घटना मुंबई की है जहां एक ही परिवार के चार लोगों की मौत बिरयानी और तरबूज खाने के बाद हो गई. फिलहाल आशंका जताई जा रही है कि ये मामला फूड प्वाइजनिंग से जुड़ा हो सकता है, हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की सही जानकारी मिल पाएगी. मुंबई के पायधुनी इलाके में रहने वाले इस परिवार के 9 लोगों ने रात 10 बजे बिरयानी खाई थी. उसके बाद रात को करीब 1.30 बजे चार लोगों ने तरबूज भी खाया था. इसके बाद इनकी तबीयत बिगड़ी और एक- एक करके अस्पताल में चारों की मौत हो गई.</p>
<p>इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/health/can-eating-watermelon-and-biryani-cause-death-what-do-experts/article-9480"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/watermelon-2.webp" alt=""></a><br /><p>घटना मुंबई की है जहां एक ही परिवार के चार लोगों की मौत बिरयानी और तरबूज खाने के बाद हो गई. फिलहाल आशंका जताई जा रही है कि ये मामला फूड प्वाइजनिंग से जुड़ा हो सकता है, हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की सही जानकारी मिल पाएगी. मुंबई के पायधुनी इलाके में रहने वाले इस परिवार के 9 लोगों ने रात 10 बजे बिरयानी खाई थी. उसके बाद रात को करीब 1.30 बजे चार लोगों ने तरबूज भी खाया था. इसके बाद इनकी तबीयत बिगड़ी और एक- एक करके अस्पताल में चारों की मौत हो गई.</p>
<p>इस घटना के बाद एक सवाल लोगों के मन में आ रहा है कि क्या तरबूज और बिरयानी खाने से ऐसा हुआ है. लोगों की मौत का कारण कहीं फूड प्वाइजनिंग तो नहीं? इस बारे में एक्सपर्ट से जानते हैं.</p>
<p><strong>क्या बिरयानी और तरबूज खाने से मौत हो हुई है?</strong><br />डॉ. बताते हैं कि मौत का असली कारण तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा, लेकिन ऐसा नहीं है कि बिरयानी और इसके बाद तरबूज खाना मौत की वजह हो सकता है. इन चीजों को साथ खाने या कुछ घंटे के अंतराल के बाद खाना मौत की वजह हो. ऐसा मुमकिन नहीं है. ये मामला इन चीजों के खुले में रखने और इससे हुई फूड प्वाइजनिंग से होने की आशंका है.</p>
<p>डॉ. के मुताबिक, जब खाने की चीजों को कई घंटों तक खुले मे रखते हैं तो इनमें खतरनाक बैक्टीरिया पनप सकते हैं. फल हो या बिरयानी या कोई दूसरा भोजन इनको घंटों खुले में रखने से स्टैफिलोकोकस ऑरियस, साल्मोनेला एंटरिटिडिस और एस्चेरिचिया कोलाई जैसे बैक्टीरिया पनपने लगते हैं. ये सभी बैक्टीरिया बहुत खतरनाक होते हैं. जब कोई व्यक्ति ऐसी चीजों को खाता है तो ये पेट में चले जाते हैं और फूड प्वाइजनिंग से लेकर सेप्सिस तक का कारण बन सकते हैं.</p>
<p><strong>फूड प्वाइजनिंग कैसे बन सकती है मौत का कारण?</strong><br />डॉ. बताते हैं कि फूड प्वाइजनिंग को लेकर सामान्य उल्टी और दस्त मानते हैं, लेकिन ये कुछ मामलों में जानलेवा साबित हो सकता है. कुछ लोगों को अगर बार-बार उल्टी आती है तो इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है. इसके साथ ही इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से कम हो सकते हैं. इनके कम होने का सीधा असर बीपी पर पड़ता है. ब्लड प्रेशर तेजी से गिरकर 50 से भी नीचे जा सकता है. इस स्थिति में शॉक जैसी स्थिति बन जाती है, जो जानलेवा हो सकता है.</p>
<p>डॉ. कहते हैं कि ये सेप्सिस का भी कारण बन सकता है. ऐसा तब होता है जब बैक्टीरिया खून में फैलने लगते हैं और खून में सेप्सिस हो जाता है. सेप्सिस बहुत ही खतरनाक होता है. ये मौत का कारण भी बन सकता है.</p>
<p><strong>खुले में रखी चीजें न खाएं</strong><br />डॉ. कहते हैं कि कभी भी खुली में रखी चीजें न खाएं. खासतौर पर इस मौसम में तो बिलकुल भी नहीं. अगर आपने कोई फल काटा है तो उसको तुरंत खा लें. इसी तरह बिरयानी या कोई सब्जी और चावल भी पकाने के आधे से एक घंटे के भीतर जरूर खा लें. अगर 2 घंटे बाद किसी कारण खाना भी है तो इनको कवर करके रखें. इससे खाने की चीजों में बैक्टीरिया के पनपने की आशंका कम रहेगी.</p>
<p><strong>इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें</strong></p>
<ul>
<li>लगातार उल्टी</li>
<li>दस्त</li>
<li>तेज बुखार</li>
<li>सिरदर्द</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हेल्थ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 10:24:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CGMSC का बड़ा एक्शन: सरकारी अस्पतालों से आयरन-फोलिक एसिड दवा का बैच वापस मंगाया, रंग बदलने और टूटने की मिली थी शिकायत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) ने स्वास्थ्य महकमे में मरीजों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। कॉर्पोरेशन ने आयरन-फोलिक एसिड की एक विशिष्ट दवा बैच को वापस मंगाने (रिकॉल) का सख्त निर्देश जारी किया है। यह महत्वपूर्ण आदेश मुख्य रूप से रायपुर और बलौदाबाजार जिले के सभी प्रमुख अस्पतालों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों के लिए तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।</p>
<p><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-04/img-20260428-wa0173.jpg" alt="IMG-20260428-WA0173" width="1066" height="1200" /></p>
<p>यह पूरा मामला फेरस सल्फेट एंड फोलिक एसिड (लाल रंग) की दवा से जुड़ा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मिली</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/big-action-of-cgmsc-batch-of-iron-folic-acid-medicine-was/article-9485"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/image_search_1777436688321.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) ने स्वास्थ्य महकमे में मरीजों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। कॉर्पोरेशन ने आयरन-फोलिक एसिड की एक विशिष्ट दवा बैच को वापस मंगाने (रिकॉल) का सख्त निर्देश जारी किया है। यह महत्वपूर्ण आदेश मुख्य रूप से रायपुर और बलौदाबाजार जिले के सभी प्रमुख अस्पतालों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों के लिए तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।</p>
<p><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-04/img-20260428-wa0173.jpg" alt="IMG-20260428-WA0173" width="1066" height="1406"></img></p>
<p>यह पूरा मामला फेरस सल्फेट एंड फोलिक एसिड (लाल रंग) की दवा से जुड़ा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस दवा का ड्रग कोड डी-221-एम और बैच नंबर एफएफआर 240703 है। पिछले कुछ दिनों से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि सप्लाई की गई इस बैच की कुछ गोलियों (टैबलेट्स) का रंग बदला हुआ है। इसके अलावा कई गोलियां डिब्बों के भीतर टूटी हुई अवस्था में भी पाई गई थीं।</p>
<p>इन गंभीर शिकायतों के सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीजीएमएससी ने दवा का तत्काल दोबारा गुणवत्ता परीक्षण (क्वालिटी टेस्ट) कराया। राहत की बात यह रही कि लैब की परीक्षण रिपोर्ट में दवा की गुणवत्ता मानक के अनुरूप पाई गई। इसके बावजूद, मरीजों के स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए और जमीनी स्तर से आई शिकायतों की गंभीरता को संज्ञान में लेते हुए, प्रशासन ने कोई भी जोखिम न लेने का फैसला किया।</p>
<p>सीजीएमएससी ने संबंधित निर्माता कंपनी मेसर्स सिप्को फार्मास्यूटिकल्स को इस पूरे बैच को तत्काल वापस उठाने का कड़ा निर्देश दिया है। इसके साथ ही, दवा गोदाम शाखा रायपुर ने सभी संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों को कड़े शब्दों में निर्देशित किया है कि इस बैच का जितना भी स्टॉक उनके पास उपलब्ध है, उसे बिना किसी देरी के वापस गोदाम में जमा करा दिया जाए।</p>
<p>यह आदेश रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा), डीकेएस पोस्ट ग्रेजुएट संस्थान, शासकीय डेंटल कॉलेज के साथ-साथ रायपुर और बलौदाबाजार के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालयों को विशेष रूप से भेजा गया है।</p>
<p>स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह दवा सरकारी स्वास्थ्य ढांचे में एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसका बड़े पैमाने पर वितरण किया जाता है। नीचे दिए गए बिंदुओं से समझा जा सकता है कि यह दवा मरीजों के लिए कितनी अहम है:</p>
<p> 1. <strong>एनीमिया के इलाज में संजीवनी</strong>: शरीर में आयरन की कमी होने पर हीमोग्लोबिन का स्तर तेजी से घट जाता है। यह दवा शरीर में आयरन की पूर्ति कर खून बढ़ाने में बहुत मदद करती है।</p>
<p> 2. <strong>गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद जरूरी</strong>: गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में आयरन और फोलिक एसिड की अत्यधिक आवश्यकता होती है। यह दवा मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए जरूरी पोषण प्रदान करती है और एनीमिया के खतरे को काफी हद तक कम करती है।</p>
<p> 3. <strong>किशोरियों के लिए सप्लीमेंट</strong>: किशोरियों और प्रजनन आयु की महिलाओं में खून की कमी एक बेहद आम समस्या है। इन वर्गों में स्वास्थ्य सुधार के लिए इस दवा का उपयोग सप्लीमेंट के रूप में नियमित तौर पर किया जाता है।</p>
<p> 4. <strong>फोलिक एसिड की कमी दूर करने में सहायक</strong>: फोलिक एसिड शरीर में नई कोशिकाओं के निर्माण और रक्त संचार को बेहतर बनाने में अहम योगदान देता है। इसकी कमी से होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए यही दवा दी जाती है।</p>
<p> 5. <strong>सरकारी अभियानों का मुख्य हिस्सा</strong>: सरकारी अस्पतालों में संचालित होने वाले एनीमिया नियंत्रण कार्यक्रम, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं और पोषण अभियानों के तहत इस दवा का सबसे ज्यादा उपयोग होता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>हेल्थ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:56:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिलाओं में पीसीओडी होने के बाद कौन से 4 लक्षण जरूर दिखते हैं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आज के समय में महिलाओं में PCOD (पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज) की समस्या तेजी से बढ़ रही है. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे खराब लाइफस्टाइल, ज्यादा तनाव, हॉर्मोनल असंतुलन, गलत खानपान और शारीरिक एक्टिविटी की कमी. यह एक हॉर्मोनल समस्या है, जो शरीर के कई कार्यों को प्रभावित कर सकती है. PCOD होने के बाद शरीर में अंदरूनी बदलाव शुरू हो जाते हैं, जिनका असर धीरे-धीरे बाहर भी दिखाई देने लगता है.</p>
<p>कई बार महिलाएं इन बदलावों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे समस्या और बढ़ सकती है. बदलती दिनचर्या और खानपान की आदतें भी इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/health/which-4-symptoms-are-seen-after-pcod-in-women/article-9459"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/pcod.webp" alt=""></a><br /><p>आज के समय में महिलाओं में PCOD (पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज) की समस्या तेजी से बढ़ रही है. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे खराब लाइफस्टाइल, ज्यादा तनाव, हॉर्मोनल असंतुलन, गलत खानपान और शारीरिक एक्टिविटी की कमी. यह एक हॉर्मोनल समस्या है, जो शरीर के कई कार्यों को प्रभावित कर सकती है. PCOD होने के बाद शरीर में अंदरूनी बदलाव शुरू हो जाते हैं, जिनका असर धीरे-धीरे बाहर भी दिखाई देने लगता है.</p>
<p>कई बार महिलाएं इन बदलावों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे समस्या और बढ़ सकती है. बदलती दिनचर्या और खानपान की आदतें भी इस समस्या को बढ़ावा दे रही हैं. समय रहते ध्यान न देने पर यह समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है. इसलिए जरूरी है कि इसके कारणों को समझा जाए और शुरुआती संकेतों के प्रति सतर्क रहा जाए, ताकि समय पर सही कदम उठाए जा सकें.</p>
<p><strong>PCOD होने के बाद जरूर दिखते हैं ये 4 लक्षण</strong><br />डॉ. बताती हैं कि PCOD होने के बाद शरीर में कुछ आम लक्षण दिखाई देने लगते हैं. सबसे पहले पीरियड्स का असामान्य होना या लंबे समय तक न आना एक बड़ा संकेत हो सकता है. इसके अलावा, अचानक वजन बढ़ना या कम न होना भी आम समस्या है.</p>
<p>चेहरे, ठोड़ी या शरीर के अन्य हिस्सों पर अनचाहे बाल बढ़ना और मुंहासों की समस्या भी इसके संकेत हो सकते हैं. कई महिलाओं को बाल झड़ने या बाल पतले होने की समस्या भी होने लगती है. ये सभी लक्षण हॉर्मोनल असंतुलन के कारण होते हैं और समय रहते इन पर ध्यान देना जरूरी है, ताकि समस्या को बढ़ने से रोका जा सके.</p>
<p><strong>किसको PCOD का ज्यादा खतरा?</strong><br />जिन महिलाओं की लाइफस्टाइल खराब है, उनमें PCOD का खतरा ज्यादा होता है, जैसे जो महिलाएं ज्यादा जंक फूड खाती हैं, शारीरिक एक्टिविटी कम करती हैं या अधिक तनाव में रहती हैं, उनमें यह समस्या जल्दी हो सकती है. इसके अलावा, जिनकी फैमिली हिस्ट्री में PCOD या हॉर्मोनल समस्याएं रही हैं, उन्हें भी ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है. मोटापा और नींद की कमी भी इस खतरे को बढ़ा सकती है.</p>
<p><strong>कैसे करें बचाव?</strong><br />PCOD से बचाव के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना जरूरी है. संतुलित डाइट लें, जिसमें फल, सब्जियां और प्रोटीन शामिल हों. नियमित रूप से एक्सरसाइज करें और वजन को कंट्रोल रखें. तनाव कम करने की कोशिश करें और पर्याप्त नींद लें. समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराना भी जरूरी है, ताकि समस्या को शुरुआती चरण में ही कंट्रोल किया जा सके.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हेल्थ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 10:08:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>क्या हाई बीपी बिना लक्षण के भी हो सकता है? एक्सपर्ट से जानें</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आज के समय में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ रही है. इसे अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि कई मामलों में इसके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते. कई लोग लंबे समय तक इससे प्रभावित रहते हैं, लेकिन उन्हें इसका पता नहीं चलता. यही वजह है कि यह समस्या धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है. खराब लाइफस्टाइल, गलत खानपान, तनाव और शारीरिक एक्टिविटी की कमी इसके प्रमुख कारण बन सकते हैं.</p>
<p>कई बार व्यक्ति पूरी तरह सामान्य महसूस करता है, लेकिन अंदर ही अंदर ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ होता है. इसी कारण इसे नजरअंदाज करना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/health/can-high-bp-occur-even-without-symptoms-know-from-the/article-9438"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/blood-pressure-and-symptoms.webp" alt=""></a><br /><p>आज के समय में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ रही है. इसे अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि कई मामलों में इसके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते. कई लोग लंबे समय तक इससे प्रभावित रहते हैं, लेकिन उन्हें इसका पता नहीं चलता. यही वजह है कि यह समस्या धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है. खराब लाइफस्टाइल, गलत खानपान, तनाव और शारीरिक एक्टिविटी की कमी इसके प्रमुख कारण बन सकते हैं.</p>
<p>कई बार व्यक्ति पूरी तरह सामान्य महसूस करता है, लेकिन अंदर ही अंदर ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ होता है. इसी कारण इसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है. समय पर जांच न होने से यह समस्या अचानक गंभीर रूप ले सकती है. आज के व्यस्त जीवन में लोग अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है. इसलिए जरूरी है कि नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराई जाए और शरीर के प्रति सतर्क रहा जाए, ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके.</p>
<p><strong>बिना लक्षण के हाई बीपी क्यों खतरनाक है?</strong><br />डॉ. बताते हैं कि बिना लक्षण के हाई बीपी इसलिए खतरनाक माना जाता है, क्योंकि यह धीरे-धीरे शरीर के अहम अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है. जब ब्लड प्रेशर लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो इसका असर दिल, किडनी, आंखों और दिमाग पर पड़ सकता है. व्यक्ति को इसका अहसास तब होता है, जब समस्या गंभीर हो चुकी होती है.</p>
<p>कई मामलों में यह हार्ट अटैक, स्ट्रोक या किडनी से जुड़ी बीमारियों का कारण भी बन सकता है क्योंकि इसमें शुरुआत में कोई खास लक्षण नहीं दिखते, इसलिए लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं. यही लापरवाही आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकती है, इसलिए इसे समय रहते पहचानना जरूरी है.</p>
<p><strong>किन लोगों को ज्यादा रहता है जोखिम?</strong><br />कुछ लोगों में हाई बीपी का खतरा ज्यादा होता है, जैसे जिनकी फैमिली हिस्ट्री में ब्लड प्रेशर की समस्या रही हो, उन्हें अधिक सावधान रहने की जरूरत होती है. इसके अलावा, ज्यादा नमक का सेवन, मोटापा, तनाव, धूम्रपान और शारीरिक एक्टिविटी की कमी भी जोखिम को बढ़ाते हैं. उम्र बढ़ने के साथ भी हाई बीपी का खतरा बढ़ जाता है. अनहेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोगों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है.</p>
<p><strong>कैसे करें कंट्रोल?</strong><br />हाई बीपी को कंट्रोल में रखने के लिए संतुलित लाइफस्टाइल अपनाना जरूरी है. नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराएं और नमक का सेवन कम करें. रोजाना हल्की एक्सरसाइज या वॉक करें, जिससे शरीर एक्टिव बना रहे. तनाव कम करने की कोशिश करें और पर्याप्त नींद लें. हेल्दी डाइट अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हेल्थ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 11:02:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सिर्फ दिन की तेज गर्मी ही नहीं, रात में भी हो सकता है हीट स्ट्रोक का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गर्मी का असर सिर्फ दिन की तेज धूप तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि रात में भी इसका असर शरीर पर बना रह सकता है. कई बार रात का तापमान ज्यादा होने और उमस बढ़ने के कारण शरीर को पर्याप्त ठंडक नहीं मिल पाती, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा बना रहता है. दिनभर की गर्मी के बाद भी जब रात में राहत नहीं मिलती, तो शरीर को सामान्य तापमान पर लौटने में दिक्कत होती है.</p>
<p>शहरों में बढ़ता तापमान, कंक्रीट की इमारतें और कम होती हरियाली भी रात की गर्मी को बढ़ा देती हैं. ऐसे में लोग भले ही रात</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/health/there-can-be-a-risk-of-heat-stroke-not-only/article-9415"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/heatstroke-in-night.webp" alt=""></a><br /><p>गर्मी का असर सिर्फ दिन की तेज धूप तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि रात में भी इसका असर शरीर पर बना रह सकता है. कई बार रात का तापमान ज्यादा होने और उमस बढ़ने के कारण शरीर को पर्याप्त ठंडक नहीं मिल पाती, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा बना रहता है. दिनभर की गर्मी के बाद भी जब रात में राहत नहीं मिलती, तो शरीर को सामान्य तापमान पर लौटने में दिक्कत होती है.</p>
<p>शहरों में बढ़ता तापमान, कंक्रीट की इमारतें और कम होती हरियाली भी रात की गर्मी को बढ़ा देती हैं. ऐसे में लोग भले ही रात को सुरक्षित मान लें, लेकिन लगातार गर्म वातावरण में रहने से शरीर पर दबाव बना रहता है. कई बार लोग सोते समय भी गर्मी को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर परेशानी बढ़ा सकता है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि हीट स्ट्रोक का खतरा सिर्फ दिन तक सीमित नहीं है, बल्कि रात में भी इसका असर बना रह सकता है.</p>
<p><strong>रात में क्यों बढ़ जाता है हीट स्ट्रोक का खतरा?</strong><br />रात में हीट स्ट्रोक का खतरा इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि शरीर को ठंडा होने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता. जब दिनभर की गर्मी के बाद भी तापमान कम नहीं होता, तो शरीर लगातार गर्म वातावरण में रहता है. उमस अधिक होने पर पसीना सही तरीके से सूख नहीं पाता, जिससे शरीर का तापमान कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है.</p>
<p>इसके अलावा, बंद कमरों या बिना वेंटिलेशन वाले स्थानों में सोने से भी गर्मी और बढ़ सकती है. कई बार लोग पानी कम पीते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है. ये सभी कारण मिलकर रात में भी हीट स्ट्रोक की संभावना को बढ़ा देते हैं.</p>
<p><strong>किन लोगों को ज्यादा रहता है खतरा?</strong><br />कुछ लोगों को रात की गर्मी का असर ज्यादा होता है. खासकर बुजुर्ग, छोटे बच्चे और प्रेगनेंट महिलाएं ज्यादा सेंसिटिव होती हैं, क्योंकि उनका शरीर तापमान को जल्दी कंट्रोल नहीं कर पाता. इसके अलावा, जो लोग पहले से बीमार हैं या जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है, उन्हें भी ज्यादा खतरा रहता है. जो लोग छोटे, बंद या बिना वेंटिलेशन वाले कमरों में रहते हैं, उनमें यह जोखिम और बढ़ सकता है.</p>
<p><strong>कैसे करें बचाव?</strong><br />रात में हीट स्ट्रोक से बचने के लिए कमरे को ठंडा और हवादार रखें. सोने से पहले और बीच-बीच में पानी पीते रहें, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे. हल्के और ढीले कपड़े पहनें, जिससे शरीर को ठंडक मिल सके. अगर संभव हो, तो पंखा या कूलर का इस्तेमाल करें. ज्यादा गर्मी महसूस होने पर तुरंत उपाय करें और शरीर को ठंडा रखने की कोशिश करें.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हेल्थ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 09:59:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बढ़ती गर्मी का खतरा: छोटे बच्चों को कब दें ओआरएस, घर पर कैसे बनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश के कई राज्यों में गर्मी का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिसका सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों पर पड़ता है. तेज गर्मी के कारण बच्चों में डिहाइड्रेशन, कमजोरी, चक्कर आना, उल्टी-दस्त और सुस्ती जैसी समस्याएं हो सकती हैं. बच्चों का शरीर बड़ों की तुलना में जल्दी पानी की कमी का शिकार हो जाता है, इसलिए उन्हें खास देखभाल की जरूरत होती है. ऐसी स्थिति में ओआरएस यानी ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन बेहद फायदेमंद साबित होता है, क्योंकि यह शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी को पूरा करने में मदद करता है.</p>
<p>ओआरएस बच्चों को डिहाइड्रेशन से बचाने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/health/danger-of-increasing-heat-when-to-give-ors-to-small/article-9392"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/kid-drinking-ors.webp" alt=""></a><br /><p>देश के कई राज्यों में गर्मी का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिसका सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों पर पड़ता है. तेज गर्मी के कारण बच्चों में डिहाइड्रेशन, कमजोरी, चक्कर आना, उल्टी-दस्त और सुस्ती जैसी समस्याएं हो सकती हैं. बच्चों का शरीर बड़ों की तुलना में जल्दी पानी की कमी का शिकार हो जाता है, इसलिए उन्हें खास देखभाल की जरूरत होती है. ऐसी स्थिति में ओआरएस यानी ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन बेहद फायदेमंद साबित होता है, क्योंकि यह शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी को पूरा करने में मदद करता है.</p>
<p>ओआरएस बच्चों को डिहाइड्रेशन से बचाने का एक आसान और असरदार तरीका माना जाता है. खासकर जब बच्चा बार-बार उल्टी या दस्त से परेशान हो, तब इसकी जरूरत और बढ़ जाती है. इसलिए माता-पिता को इसके महत्व को समझना चाहिए और समय रहते सही कदम उठाना चाहिए. आइए जानते हैं कि बच्चों को ओआरएस कब देना चाहिए और इसे घर पर सही तरीके से कैसे बनाया जाए.</p>
<p><strong>बच्चों को ओआरएस कब देना चाहिए?</strong><br />डॉ. बताते हैं कि बच्चों को ओआरएस तब देना चाहिए जब उनके शरीर में पानी की कमी होने के संकेत दिखाई देने लगें, जैसे अगर बच्चा बार-बार उल्टी कर रहा हो, दस्त हो रहे हों या बहुत ज्यादा पसीना आ रहा हो, तो शरीर से पानी और जरूरी मिनरल्स तेजी से बाहर निकल जाते हैं. ऐसे में ओआरएस देना फायदेमंद होता है.</p>
<p>इसके अलावा, अगर बच्चा सुस्त दिखे, बार-बार प्यास लगे या मुंह सूखा लगे, तो यह भी डिहाइड्रेशन के संकेत हो सकते हैं. गर्मियों में बाहर खेलने के बाद या तेज धूप में रहने के बाद भी बच्चों को ओआरएस दिया जा सकता है, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो. हालांकि, ओआरएस देने से पहले बच्चे की स्थिति को समझना जरूरी है और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना भी बेहतर होता है.</p>
<p><strong>ओआरएस को घर पर कैसे बनाएं?</strong><br />ओआरएस को घर पर बनाना काफी आसान है. इसके लिए एक लीटर साफ उबला और ठंडा किया हुआ पानी लें. इसमें 6 चम्मच चीनी और आधा चम्मच नमक मिलाएं और अच्छी तरह घोल लें. ध्यान रखें कि चीनी और नमक की मात्रा सही हो, क्योंकि ज्यादा या कम मात्रा नुकसानदायक हो सकती है. तैयार घोल को दिनभर के अंदर ही इस्तेमाल कर लें और इसे ताजा ही पिलाएं. घर का बना ओआरएस शरीर में पानी और मिनरल्स की कमी को पूरा करने में मदद करता है और बच्चों को जल्दी राहत देता है.</p>
<p><strong>ये भी जरूरी</strong><br />गर्मी के मौसम में बच्चों का खास ध्यान रखना जरूरी है. उन्हें ज्यादा देर तक धूप में खेलने से बचाएं और समय-समय पर पानी पिलाते रहें. हल्का और पौष्टिक भोजन दें, ताकि उनकी एनर्जी बनी रहे. बच्चों के कपड़े हल्के और आरामदायक रखें. अगर बच्चा ज्यादा सुस्त लगे या बार-बार उल्टी-दस्त हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. समय पर ध्यान देने से बड़ी समस्या से बचा जा सकता है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हेल्थ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 10:48:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Sugarcane Juice : किन लोगों को नहीं पीना चाहिए गन्ने का जूस? डॉक्टर से जानें</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गर्मियों के मौसम में गन्ने का जूस राहत देता है. लोग इसको पीना काफी पसंद करते हैं. लेकिन क्या हर व्यक्ति को ये जूस पीना चाहिए. क्या इससे कोई नुकसान भी हो सकता है. किन लोगों को गन्ने का जूस नहीं पीना चाहिए और इससे क्या नुकसान हो सकता है. इस बारे में एक्सपर्ट से जानते हैं. डॉ. बताते हैं कि गन्ने का जूस शरीर को ताजगी देता है और इसमें मौजूद फाइबर भी अच्छा होता है. लेकिन इन लोगों को गन्ने के जूस से परहेज करने की जरूरत है.</p>
<p>डॉ. बताते हैं कि जिन लोगों को डायबिटीज है और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/health/sugarcane-juice-who-should-not-drink-sugarcane-juice-know-from/article-9368"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/sugarcane-juice.webp" alt=""></a><br /><p>गर्मियों के मौसम में गन्ने का जूस राहत देता है. लोग इसको पीना काफी पसंद करते हैं. लेकिन क्या हर व्यक्ति को ये जूस पीना चाहिए. क्या इससे कोई नुकसान भी हो सकता है. किन लोगों को गन्ने का जूस नहीं पीना चाहिए और इससे क्या नुकसान हो सकता है. इस बारे में एक्सपर्ट से जानते हैं. डॉ. बताते हैं कि गन्ने का जूस शरीर को ताजगी देता है और इसमें मौजूद फाइबर भी अच्छा होता है. लेकिन इन लोगों को गन्ने के जूस से परहेज करने की जरूरत है.</p>
<p>डॉ. बताते हैं कि जिन लोगों को डायबिटीज है और उनका शुगर लेवल हाई रहता है उनको गन्ने का जूस नहीं पीना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि इस जूस में काफी मात्रा में नेचुरल शुगर होती है. जो अचानक से शरीर में शुगर लेवल को बढ़ा सकती है. अगर डायबिटीज के मरीज गन्ने का जूस पीते हैं तो उनका शुगल लेवल बढ़ने का रिस्क होता है.</p>
<p><strong>मोटापे का शिकार लोग</strong><br />जिन लोगों का वजन बढ़ा हुआ है उनको भी गन्ने के जूस से परहेज करना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि गन्ने के जूस में कैलोरी अधिक होती है. ये तुरंत शरीर में जाकर शुगर लेवल भी बढ़ाता है. ये दोनों ही चीजें मोटापे का शिकार व्यक्ति के लिए अच्छी नहीं है. ऐसे में डॉक्टर मोटे लोगों को गन्ने का जूस न पीने की सलाह देते हैं, हालांकि ऐसा नहीं है कि ये लोग इस जूस को पीएं ही नही. अगर शुगर लेवल कंट्रोल में है और मोटापे के लिए कोई दवा नहीं खा रहे हैं तो हफ्ते में एक दिन 1 गिलास गन्ने का जूस पी सकते हैं.</p>
<p><strong>पाचन संबंधी समस्या वाले लोग</strong><br />जिन लोगों को अकसर अपच, पेट में दर्द, ज्यादा गैस बनने की समस्या रहती है उनको भी ग्नने का जूस पीने से परहेज करना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि ये जूस पेट संबंधी समस्याओं को और भी बढ़ा सकता है. इस बात का भी ध्यान रखें कि जो लोग गन्ने का जूस पीते हैं वह भी ध्यान रखें कि कभी ज्यादा मात्रा में इस जूस को न पीएं और खाली पेट जूस पीने से बचें.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हेल्थ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 10:53:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NJV EXCLUSIVE: मरीजों की जान भगवान भरोसे! क्वालिटी टेस्ट करने वाली लैब की ही 'क्वालिटी' नहीं जांच रहा CGMSC, 21 दवाओं की रिपोर्ट अब भी पेंडिंग</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों की सेहत के साथ बड़ा सिस्टेमेटिक खिलवाड़ हो रहा है। मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने का जिम्मा जिस छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) के कंधों पर है, उसका पूरा तंत्र अंधविश्वास पर टिका है। सिस्टम की सबसे बड़ी खामी यह है कि सीजीएमएससी जिन प्राइवेट लैब से दवाओं की क्वालिटी पास कराकर प्रदेश भर के अस्पतालों में सप्लाई कर रहा है, उन लैब्स की मॉनिटरिंग करने वाला कोई नहीं है। यानी, लैब में दवाइयां कैसे जांची जा रही हैं, वहां आधुनिक मशीनें या क्वालिफाइड स्टाफ हैं भी या नहीं,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/njv-exclusive-patients-lives-are-dependent-on-god-cgmsc-is/article-9376"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/file_000000000b9071faa1f28b86d114f3e6.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों की सेहत के साथ बड़ा सिस्टेमेटिक खिलवाड़ हो रहा है। मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने का जिम्मा जिस छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) के कंधों पर है, उसका पूरा तंत्र अंधविश्वास पर टिका है। सिस्टम की सबसे बड़ी खामी यह है कि सीजीएमएससी जिन प्राइवेट लैब से दवाओं की क्वालिटी पास कराकर प्रदेश भर के अस्पतालों में सप्लाई कर रहा है, उन लैब्स की मॉनिटरिंग करने वाला कोई नहीं है। यानी, लैब में दवाइयां कैसे जांची जा रही हैं, वहां आधुनिक मशीनें या क्वालिफाइड स्टाफ हैं भी या नहीं, यह देखने के लिए सीजीएमएससी के पास कोई टीम ही नहीं है।</p>
<p><strong style="font-family:Mukta, sans;font-size:1.25rem;">दागी लैब पर मेहरबानी, कागजों पर चल रहा खेल</strong></p>
<p>वर्तमान में सीजीएमएससी ने 13 अलग-अलग लैब से दवाओं की टेस्टिंग का अनुबंध किया हुआ है। नियमतः बिना लैब टेस्ट के कोई भी दवा मरीजों तक नहीं पहुंचनी चाहिए। लेकिन, अफसरों ने लैब की रिपोर्ट को ही 'ब्रह्मवाक्य' मान लिया है। इस अंधी व्यवस्था की पोल पिछले साल ही खुल गई थी, जब 3 अलग-अलग लैब को सीजीएमएससी ने खुद नोटिस थमाया था। कारण यह था कि इन लैब्स ने जिन दवाओं को पास कर दिया था, वे बाद में अस्पतालों में घटिया (अमानक/NSQ) निकली थीं। मरीजों की जान जोखिम में डालने वाली इस लापरवाही के 6-7 महीने बीत जाने के बाद भी विभाग कुंभकर्णी नींद में है और अब तक लैब चेकिंग के लिए कोई मैकेनिज्म तैयार नहीं किया गया है।</p>
<h5><strong>21 दवाओं की रिपोर्ट लटकी, कार्रवाई पर ब्रेक</strong></h5>
<p> </p>
<p>दस्तावेजों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 27 से अधिक दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें से 6 दवाइयां सीधे तौर पर अमानक (NSQ) पाई गईं। हैरानी की बात यह है कि 21 से ज्यादा दवाओं की रिपोर्ट अब भी पेंडिंग है। लैब से रिपोर्ट न मिलने के कारण न तो दागी कंपनियों पर कार्रवाई हो पा रही है और न ही सिस्टम सुधर रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी दबी जुबान में मानते हैं कि एक सख्त मॉनिटरिंग कमेटी की जरूरत है, लेकिन फाइलें ठंडे बस्ते में हैं।</p>
<p> </p>
<h5><strong>3 साल में 36 दवाएं फेल: मरीजों को बांटी फंगस लगी गोलियां</strong></h5>
<p> </p>
<p>बीते 3 सालों के आंकड़े डराने वाले हैं। अब तक 36 से ज्यादा दवाओं, सिरप और इंजेक्शन की क्वालिटी फेल हो चुकी है। पिछले ही साल 48 हजार से ज्यादा पैरासिटामोल टैबलेट्स में फंगस लगे होने का सनसनीखेज मामला सामने आया था। बैक्लोफेन, आयरन सुक्रोज और ग्लिमेपाइराइड जैसी जरूरी दवाएं टूटी हुई या गुणवत्ता विहीन मिली थीं। लैब टेस्ट में अमानक पाए जाने पर मेसर्स एजी पैरेंटेरल्स (हिमाचल प्रदेश) और मेसर्स डिवाइन लेबोरेट्रीज (गुजरात) को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट जरूर किया गया, लेकिन बीमारी की मूल जड़ यानी 'लैब की कार्यप्रणाली' पर कोई कैंची नहीं चली।</p>
<p> </p>
<h5><strong>चेयरमैन बोले- अब बनाएंगे योजना</strong></h5>
<p>इतनी बड़ी चूक के बावजूद सीजीएमएससी के चेयरमैन दीपक म्हस्के का रटा-रटाया जवाब सामने आया है। उनका कहना है, "निश्चित ही इस दिशा में काम किया जाएगा। निरीक्षण के लिए टीम नहीं है तो गठित करने की योजना तैयार की जाएगी। जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्यवाही होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>हेल्थ</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/njv-exclusive-patients-lives-are-dependent-on-god-cgmsc-is/article-9376</link>
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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 09:45:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Lungs Health: कमजोर लंग्स को कैसे करें मजबूत? एक्सपर्ट से जानें</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बढ़ता प्रदूषण और स्मोकिंग जैसी आदतें लंग्स की सेहत को खराब कर रही हैं. ऐसे में इनकी सेहत का ध्यान रखना जरूरी है. लंग्स को हेल्दी रखने के क्या तरीके हैं और क्या लंग्स भी डिटॉक्स हो सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि आज के समय में सोशल मीडिया पर कई लोग दावा करते हैं कि लंग्स डिटॉक्स हो सकते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी चाय या डिटॉक्स प्रोडक्ट से लंग्स को डिटॉक्स नहीं किया जा सकता है.</p>
<p>मेडिकल साइंस में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, हांलकि लंग्स खुद ही खुद को काफी हद तक साफ कर सकते</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/health/lungs-health-learn-from-experts-how-to-strengthen-weak-lungs/article-9344"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/lungs-detox.webp" alt=""></a><br /><p>बढ़ता प्रदूषण और स्मोकिंग जैसी आदतें लंग्स की सेहत को खराब कर रही हैं. ऐसे में इनकी सेहत का ध्यान रखना जरूरी है. लंग्स को हेल्दी रखने के क्या तरीके हैं और क्या लंग्स भी डिटॉक्स हो सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि आज के समय में सोशल मीडिया पर कई लोग दावा करते हैं कि लंग्स डिटॉक्स हो सकते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी चाय या डिटॉक्स प्रोडक्ट से लंग्स को डिटॉक्स नहीं किया जा सकता है.</p>
<p>मेडिकल साइंस में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, हांलकि लंग्स खुद ही खुद को काफी हद तक साफ कर सकते हैं. कुछ ऐसे तरीके हैं जिनको फॉलो करके लंग्स की सेहत को अच्छा रखा जा सकता है.</p>
<p><strong>फेफड़ों को हेल्दी बनाने का बेस्ट तरीका क्या है</strong><br />डॉ.बताते हैं कि फेफड़ों को हेल्दी रखने के लिए जरूरी है कि अगर आप स्मोकिंग करते हैं तो इसको छोड़ दें. ऐसा इसलिए क्योंकि स्मोकिंग से फेफड़ों में सूजन होती है और लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकता है. अगर स्मोकिंग छोड़ते हैं तो लंग्स खुद को हील करना शुरू कर देते हैं और इनके क्षमता भी पहले की तुलना में अच्छी हो जाती है.</p>
<p><strong>प्रदूषण से बचाव भी जरूरी</strong><br />आज के समय में खराब एयर क्वालिटी भी फेफड़ों के लिए बड़ा खतरा है. प्रदूषण में मौजूद छोटे- छोटे कण सांस के जरिए फेफड़ों में जाकर सूजन करते हैं. बढ़ा हुआ प्रदूषण भी स्मोकिंग की तरह ही शरीर को नुकसान करता है. इससे बचाव के लिए जरूरी है कि आप धूल – मिट्टी वाले इलाकों में जानें से बचें और मुंह पर हमेशा एन- 95 मास्क लगाकर रखें. सुबह और शाम के समय भाप भी ले सकते हैं. इस बात का भी ध्यान रखें कि जब एक्यूआई बढ़ा रहता है तो सुबह की सैर से बचें और घर के अंदर ही एक्सरसाइज कर लें.</p>
<p><strong>इस तरह की एक्सरसाइज करें</strong><br />आप रोज 30 मिनट वॉक कर सकते हैं. इसके अलावा जॉगिंग भी फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में मदद करती है. आप कुछ योग भी कर सकते हैं ये भी लंग्स के लिए फायदेमंद होते हैं. एक्सरसाइज के साथ- साथ खानपान का भी ध्यान रखें. अपनी डाइट में फल और हरी सब्जियां जरूर शामिल करें</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हेल्थ</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/health/lungs-health-learn-from-experts-how-to-strengthen-weak-lungs/article-9344</link>
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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 10:40:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कम उम्र में बढ़ रहा है माइग्रेन, एक्सपर्ट्स ने बताए ये 2 बड़े कारण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>माइग्रेन एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जिसके कारण सिर में दर्द बना रहता है. ये अकसर महिलाओं में ज्यादा होती है, लेकिन अब कम उम्र में भी लोग इसका शिकार हो रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि पहले यह समस्या 30-40 साल की उम्र के लोगों में ज्यादा देखी जाती थी, लेकिन अब 25 से 30 साल के युवाओं में भी इसके केस तेजी से सामने आ रहे हैं. कम उम्र में माइग्रेन क्यों हो रहा है और इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं. माइग्रेन से बचाव कैसे करें. इस बारे में एक्सपर्ट से जानते हैं.</p>
<p>डॉ. बताते हैं कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/health/migraine-is-increasing-at-a-young-age-experts-told-these/article-9319"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/avoid-these-migraine-mistakes-shares-by-expert-in-hindi.webp" alt=""></a><br /><p>माइग्रेन एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जिसके कारण सिर में दर्द बना रहता है. ये अकसर महिलाओं में ज्यादा होती है, लेकिन अब कम उम्र में भी लोग इसका शिकार हो रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि पहले यह समस्या 30-40 साल की उम्र के लोगों में ज्यादा देखी जाती थी, लेकिन अब 25 से 30 साल के युवाओं में भी इसके केस तेजी से सामने आ रहे हैं. कम उम्र में माइग्रेन क्यों हो रहा है और इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं. माइग्रेन से बचाव कैसे करें. इस बारे में एक्सपर्ट से जानते हैं.</p>
<p>डॉ. बताते हैं कि माइग्रेन के वैसे तो कई कारण हैं लेकिन कम उम्र में इसके होने का एक बड़ा कारण बढ़ता स्क्रीन टाइम है. अब लोग लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप का यूज करते हैं. खासतौर पर रात के समय घंटों फोन में लगे रहते हैं. इससे शरीर को दो तरह से नुकसान होता है. पहला तो नींद पूरी नहीं होती है और दूसरा आंखों और दिमाग पर दबाव डालता है, जिससे माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है. ये समस्या महिला और पुरुष दोनों में होती है. हालांकि ज्यादा केस महिलाओं में ही आते हैं.</p>
<p><strong>नींद की कमी से माइग्रेन कैसे होता है?</strong><br />नींद की कमी से ब्रेन को आराम नहीं मिलता है. इससे सिरदर्द होने लगता है और ये माइग्रेन के दर्द का कारण बनता है. यही वजह है कि युवाओं में भी माइग्रेन हो रहा है. क्योंकि ये लोग नींद पूरी नहीं ले रहे हैं और इनका लाइफस्टाइल भी काफी खराब है. नींद की कमी से हार्मोन इंबैलेंस भी हो रहा है. इस वजह से भी कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं. इनमें मोटापा बढ़ना और मानसिक तनाव भी शामिल हैं.</p>
<p><strong>क्या हैं माइग्रेन के लक्षण?</strong></p>
<ul>
<li>सिर के एक हिस्से में तेज दर्द</li>
<li>धुंधला दिखना</li>
<li>चक्कर आना</li>
<li>कभी कभी उल्टी महसूस होना</li>
</ul>
<p><strong>कैसे करें माइग्रेन से बचाव?</strong></p>
<ul>
<li>रोजाना 7-8 घंटे की नींद जरूर लें</li>
<li>स्क्रीन टाइम को सीमित करें, खासकर सोने से पहले</li>
<li>मानसिक तनाव न लें</li>
<li>हर 30-40 मिनट में स्क्रीन से ब्रेक लें</li>
<li>पानी ज्यादा पिएं और हेल्दी डाइट लें</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हेल्थ</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/health/migraine-is-increasing-at-a-young-age-experts-told-these/article-9319</link>
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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:02:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Heat Stroke: बढ़ती गर्मी में हीट स्ट्रोक का खतरा, क्या होते हैं लक्षण, कैसे करें बचाव</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश के कई राज्यों में गर्मी तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है. तेज धूप और लू के संपर्क में ज्यादा देर रहने से हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, जो एक गंभीर स्थिति बन सकती है. हीट स्ट्रोक ऐसी अवस्था है, जब शरीर का तापमान अचानक बहुत अधिक बढ़ जाता है और शरीर इसे कंट्रोल नहीं कर पाता. आमतौर पर यह समस्या तब होती है, जब व्यक्ति लंबे समय तक तेज धूप या गर्म वातावरण में रहता है. बढ़ते तापमान के साथ शरीर पर दबाव भी बढ़ता है, जिससे शरीर की सामान्य</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/health/what-is-the-risk-of-heat-stroke-in-increasing-heat/article-9299"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-04/heat-stroke-and-prevention-(1).webp" alt=""></a><br /><p>देश के कई राज्यों में गर्मी तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है. तेज धूप और लू के संपर्क में ज्यादा देर रहने से हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, जो एक गंभीर स्थिति बन सकती है. हीट स्ट्रोक ऐसी अवस्था है, जब शरीर का तापमान अचानक बहुत अधिक बढ़ जाता है और शरीर इसे कंट्रोल नहीं कर पाता. आमतौर पर यह समस्या तब होती है, जब व्यक्ति लंबे समय तक तेज धूप या गर्म वातावरण में रहता है. बढ़ते तापमान के साथ शरीर पर दबाव भी बढ़ता है, जिससे शरीर की सामान्य क्षमता प्रभावित हो सकती है.</p>
<p>पसीना ज्यादा आने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी होने लगती है, जो स्थिति को और गंभीर बना सकती है. खासकर बच्चे, बुजुर्ग और वे लोग जो बाहर काम करते हैं, इस जोखिम के अधिक शिकार होते हैं. शहरी क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी, प्रदूषण और कम होती हरियाली भी इस समस्या को और बढ़ा रही है. ऐसे में जरूरी है कि लोग इस स्थिति की गंभीरता को समझें और समय रहते सतर्क रहें.</p>
<p><strong>हीट स्ट्रोक के क्या हैं लक्षण?</strong><br />हीट स्ट्रोक के लक्षण अचानक और तेजी से सामने आ सकते हैं. इसमें शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और त्वचा गर्म व सूखी महसूस हो सकती है. चक्कर आना, सिरदर्द, कमजोरी और भ्रम की स्थिति इसके आम संकेत हैं. कुछ लोगों को मतली या उल्टी भी हो सकती है और शरीर में बेचैनी महसूस होती है.</p>
<p>गंभीर मामलों में व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है. दिल की धड़कन तेज हो जाती है और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है. कई बार शरीर पसीना छोड़ना बंद कर देता है, जो स्थिति को और खतरनाक बना सकता है. समय पर ध्यान न देने पर यह जानलेवा भी हो सकता है, इसलिए इन लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है.</p>
<p><strong>कैसे करें हीट स्ट्रोक से बचाव?</strong><br />डॉ. बताते हैं कि हीट स्ट्रोक से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि तेज धूप में बाहर जाने से बचें, खासकर दोपहर के समय बाहर निकलते वक़्त हल्के और ढीले कपड़े पहनें और सिर को ढककर रखें. पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे और डिहाइड्रेशन से बचाव हो सके.</p>
<p>नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ जैसे पेय पदार्थ भी शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं. लंबे समय तक धूप में काम करने से बचें और बीच-बीच में आराम जरूर करें. अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो छाता या सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें. घर के अंदर ठंडा वातावरण बनाए रखें और शरीर को ज्यादा गर्म होने से बचाएं.</p>
<p><strong>ये भी जरूरी</strong><br />गर्मी के मौसम में अपनी दिनचर्या में थोड़े बदलाव करना भी जरूरी होता है. हल्का और पौष्टिक भोजन करें और तला-भुना खाने से बचें, ताकि शरीर पर अधिक दबाव न पड़े. बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें, क्योंकि वे जल्दी प्रभावित होते हैं.</p>
<p>बाहर से आने के बाद तुरंत ठंडा पानी पीने से बचें और शरीर को धीरे-धीरे ठंडा होने दें. ज्यादा कैफीन या मीठे पेय पदार्थों का सेवन कम करें. अगर किसी को ज्यादा परेशानी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, ताकि समय पर इलाज मिल सके और गंभीर स्थिति से बचा जा सके.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हेल्थ</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/health/what-is-the-risk-of-heat-stroke-in-increasing-heat/article-9299</link>
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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 10:29:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
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