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                <title>राजनीति - National Jagat Vision</title>
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                <description>राजनीति RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Bengal Politics: दुर्गा पूजा से पहले बंगाल में बड़ा ‘खेला’? TMC के 17 बागी सांसदों के BJP में जाने का दावा, पार्टी ने कहा- फैसला इतना आसान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कोलकाता। </strong>पश्चिम बंगाल की सियासत में दुर्गा पूजा से पहले एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कूचबिहार के सांसद जगदीशचंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनसीपीआई का हिस्सा बने 20 सांसदों में से 17 जल्द भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकते हैं। बसुनिया के मुताबिक, इन सांसदों के भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया पूजा से पहले पूरी की जा सकती है।</p>
<p>हालांकि, इस दावे ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। खुद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने संकेत दिया है कि किसी सांसद के पार्टी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/politics/bengal-politics-big-game-in-bengal-before-durga-puja-claim/article-12471"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/tmc-bagi-1789382230322_v.webp" alt=""></a><br /><p><strong>कोलकाता। </strong>पश्चिम बंगाल की सियासत में दुर्गा पूजा से पहले एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कूचबिहार के सांसद जगदीशचंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनसीपीआई का हिस्सा बने 20 सांसदों में से 17 जल्द भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकते हैं। बसुनिया के मुताबिक, इन सांसदों के भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया पूजा से पहले पूरी की जा सकती है।</p>
<p>हालांकि, इस दावे ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। खुद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने संकेत दिया है कि किसी सांसद के पार्टी में आने की इच्छा जताना और भाजपा की ओर से उसे स्वीकार करना दो अलग बातें हैं। यानी फिलहाल 17 सांसदों के BJP में शामिल होने की बात को आधिकारिक फैसला नहीं माना जा सकता।</p>
<p><strong>तीन मुस्लिम सांसद BJP से दूरी बनाए रखेंगे?</strong><br />बसुनिया के मुताबिक, 20 सांसदों के समूह में शामिल मुर्शिदाबाद के तीन मुस्लिम सांसद अबू ताहेर खान, खलिलुर रहमान और यूसुफ पठान भाजपा में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने दावा किया कि ये तीनों सांसद अलग रहते हुए भी NDA को समर्थन दे सकते हैं और उन्हें केंद्र की ओर से विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी मिल सकती है।</p>
<p>लेकिन अबू ताहेर खान ने इस दावे को सीधे खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि तीनों सांसद न तो भाजपा में शामिल होंगे और न ही NDA का हिस्सा बनेंगे। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक भविष्य के बारे में घोषणा करने का अधिकार किसी दूसरे नेता को नहीं है।</p>
<p>अबू ताहेर के मुताबिक, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की ओर से विकास कार्यों से जुड़ी सरकारी बैठक के लिए बुलाया जाता है तो वे उसमें शामिल हो सकते हैं, लेकिन भाजपा या NDA की राजनीतिक बैठकों से दूरी बनाए रखेंगे।</p>
<p><strong>BJP ने भी साफ नहीं की तस्वीर</strong><br />जगदीश बसुनिया के बयान के बाद भाजपा के भीतर से भी सावधानी भरा रुख सामने आया है। प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि किसी नेता या सांसद की भाजपा में शामिल होने की इच्छा मात्र से यह तय नहीं हो जाता कि पार्टी उसे सदस्यता देगी।</p>
<p>ऐसे में 17 सांसदों के भाजपा में जाने का दावा फिलहाल राजनीतिक बयान और संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। अंतिम स्थिति सांसदों के आधिकारिक फैसले और भाजपा नेतृत्व की स्वीकृति के बाद ही स्पष्ट होगी।</p>
<p><strong>20 सांसदों का राजनीतिक मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में</strong><br />दरअसल, यह पूरा विवाद उन 20 सांसदों से जुड़ा है, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के सांसद के तौर पर मान्यता देने की मांग की थी। इनमें जगदीश बसुनिया, सुदीप बनर्जी और काकोली घोष दस्तीदार समेत कई सांसद शामिल हैं।</p>
<p>हालांकि, लोकसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में ये सांसद अभी भी तृणमूल कांग्रेस के सदस्य के रूप में दर्ज हैं। इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।</p>
<p><strong>22 सितंबर तक सांसदों को देना है जवाब</strong><br />मामले में 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने एनसीपीआई का दावा करने वाले सभी 20 सांसदों को नोटिस जारी किया था। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष के सचिवालय ने भी 26 अगस्त को सांसदों को नोटिस भेजकर उनका पक्ष पूछा।</p>
<p>सांसदों ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। यह मांग स्वीकार कर ली गई और अब उन्हें 22 सितंबर तक अपना जवाब दाखिल करना है। इसलिए आने वाले दिनों में इन सांसदों का राजनीतिक भविष्य और उनकी लोकसभा सदस्यता दोनों ही महत्वपूर्ण मुद्दे बने रहेंगे।</p>
<p><strong>दो-तिहाई सांसदों के समर्थन का तर्क</strong><br />जगदीश बसुनिया का कहना है कि अगर 20 सदस्यीय समूह में से 17 सांसद भाजपा में शामिल होते हैं, तो यह संख्या दो-तिहाई से अधिक होगी। उनका तर्क है कि ऐसी स्थिति में दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने का प्रावधान लागू हो सकता है।</p>
<p>20 सांसदों के मामले में दो-तिहाई का आंकड़ा 14 सांसद बनता है। हालांकि, इस पूरे मामले में कानून की व्याख्या, सांसदों की वर्तमान संवैधानिक स्थिति और उनके समूह की वैधानिक मान्यता जैसे सवाल भी महत्वपूर्ण होंगे। अंतिम स्थिति संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।</p>
<p><strong>दुर्गा पूजा से पहले क्या बदलेगा बंगाल का सियासी समीकरण?</strong><br />यदि 17 सांसद वास्तव में भाजपा में शामिल होते हैं, तो इसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बड़ा हो सकता है। दूसरी ओर, यदि तीन मुस्लिम सांसद अपने मौजूदा रुख पर कायम रहते हैं तो पूरे घटनाक्रम की राजनीतिक तस्वीर और भी अलग होगी।</p>
<p>फिलहाल, एक तरफ भाजपा में शामिल होने का दावा है, दूसरी तरफ संबंधित सांसदों का खंडन और भाजपा नेतृत्व की सावधानी। ऐसे में दुर्गा पूजा से पहले बंगाल की राजनीति में कोई बड़ा फेरबदल होता है या यह सिर्फ सियासी बयानबाजी तक सीमित रहता है, इस पर अब सबकी नजर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 17:08:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Amit Shah On UCC: उत्तराखंड के बाद अब 21 राज्यों की बारी? UCC पर अमित शाह का बड़ा बयान, 2029 से पहले लागू करने का ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मुंबई। </strong>समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर केंद्र सरकार ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले NDA की सरकारें 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 21 राज्यों में UCC लागू करेंगी। शाह ने इसे समान अधिकार और एकरूप नागरिक कानून की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता बताया।</p>
<p>अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब UCC लंबे समय से देश की राजनीति में एक अहम और बहस वाले मुद्दे के तौर पर मौजूद है। केंद्र</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/politics/amit-shah-on-ucc-after-uttarakhand-now-it-is-the/article-12458"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/amit_shah.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई। </strong>समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर केंद्र सरकार ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले NDA की सरकारें 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 21 राज्यों में UCC लागू करेंगी। शाह ने इसे समान अधिकार और एकरूप नागरिक कानून की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता बताया।</p>
<p>अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब UCC लंबे समय से देश की राजनीति में एक अहम और बहस वाले मुद्दे के तौर पर मौजूद है। केंद्र सरकार की रणनीति अब उन राज्यों में इसे आगे बढ़ाने की है जहां BJP या NDA की सरकारें हैं। उत्तराखंड में UCC लागू हो चुका है, जबकि अन्य राज्यों में कानून बनाने, प्रस्ताव पारित करने या प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का काम अलग-अलग चरणों में है।</p>
<p><strong>विवाह से विरासत तक बदल सकते हैं नागरिक कानून</strong><br />UCC का मूल उद्देश्य धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय नागरिक मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है। इसके दायरे में विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे विषय आते हैं। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में प्रस्तावित या लागू किए जाने वाले प्रावधानों की विस्तृत व्यवस्था राज्य के कानून और प्रक्रिया के अनुसार अलग हो सकती है। सरकार लंबे समय से UCC को समानता और समान नागरिक अधिकारों से जोड़कर पेश करती रही है। अमित शाह ने भी अपने बयान में इसे BJP की पुरानी प्रतिबद्धता बताया और कहा कि कई राज्यों में इसकी दिशा में काम पहले ही शुरू हो चुका है।</p>
<p><strong>उत्तराखंड के बाद गुजरात समेत कई राज्यों में बढ़ी रफ्तार</strong><br />उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां UCC लागू किया गया। इसके बाद गुजरात ने मार्च 2026 में विधानसभा से UCC विधेयक पारित किया। केंद्र सरकार की ओर से भी गुजरात के इस कदम का स्वागत किया गया था। अन्य NDA शासित राज्यों में भी UCC को लेकर अलग-अलग स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। ऐसे में अमित शाह का 2029 से पहले 21 राज्यों में इसे लागू करने का बयान इस मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ले आया है।</p>
<p><strong>जनजातीय समुदायों के रीति-रिवाजों पर भी सरकार का रुख</strong><br />UCC को लेकर सबसे अहम सवालों में जनजातीय समुदायों की पारंपरिक व्यवस्थाओं को लेकर चिंता भी शामिल रही है। अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि आदिवासी समुदायों की पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं को संरक्षण दिया जाएगा तथा उन्हें UCC के प्रावधानों से छूट दी जाएगी।</p>
<p><strong>विपक्ष के लिए भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा</strong><br />UCC पर सरकार के इस ऐलान के बाद राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। BJP इसे समान कानून और समान अधिकारों से जोड़ती रही है, जबकि विपक्षी दल इसके प्रावधानों, सामाजिक प्रभाव और राज्यों में लागू करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। फिलहाल, अमित शाह के बयान ने इतना स्पष्ट कर दिया है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित 21 राज्यों में UCC को आगे बढ़ाना केंद्र सरकार और BJP के एजेंडे में प्रमुख स्थान रखता है। अब नजर इस बात पर होगी कि अगले तीन वर्षों में किन राज्यों में विधायी प्रक्रिया पूरी होती है और किन राज्यों में इसे लागू किया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 11:49:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Rajasthan Nikay Chunav Result 2026: राजस्थान के शहरों में खिला ‘कमल’, 309 निकायों में BJP का दबदबा; कांग्रेस 103 पर, निर्दलीयों ने भी दिखाया दम</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>जयपुर।</strong> राजस्थान की शहरी राजनीति में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी बढ़त हासिल की है। नगर निकाय चुनाव के सामने आए नतीजों में भाजपा ने 309 निकायों में से 163 में जीत दर्ज कर अपना दबदबा कायम किया है। कांग्रेस को 103 निकायों में सफलता मिली, जबकि 43 जगह निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारकर भाजपा-कांग्रेस दोनों के समीकरणों को दिलचस्प बना दिया।</p>
<p>राजस्थान में इस बार 309 शहरी निकायों के लिए चुनाव हुए। इनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगर पालिकाएं शामिल हैं। 14 सितंबर की सुबह मतगणना शुरू होने के साथ ही अलग-अलग शहरों से नतीजे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/politics/rajasthan-nikay-chunav-result-2026-lotus-bloomed-in-the-cities/article-12457"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/rajasthan_nikay_chunav_result_2026_1789358826.webp" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> राजस्थान की शहरी राजनीति में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी बढ़त हासिल की है। नगर निकाय चुनाव के सामने आए नतीजों में भाजपा ने 309 निकायों में से 163 में जीत दर्ज कर अपना दबदबा कायम किया है। कांग्रेस को 103 निकायों में सफलता मिली, जबकि 43 जगह निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारकर भाजपा-कांग्रेस दोनों के समीकरणों को दिलचस्प बना दिया।</p>
<p>राजस्थान में इस बार 309 शहरी निकायों के लिए चुनाव हुए। इनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगर पालिकाएं शामिल हैं। 14 सितंबर की सुबह मतगणना शुरू होने के साथ ही अलग-अलग शहरों से नतीजे सामने आने लगे और तस्वीर भाजपा के पक्ष में जाती दिखाई दी।</p>
<p><strong>शहरों की सियासत में BJP ने बनाई बढ़त</strong><br />निकाय चुनाव के नतीजे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के लिए राजनीतिक रूप से अहम माने जा रहे हैं। विधानसभा की सत्ता में आने के बाद भाजपा के सामने शहरी निकायों में अपनी पकड़ साबित करने की चुनौती थी। 163 निकायों में मिली सफलता ने पार्टी को कांग्रेस के मुकाबले स्पष्ट बढ़त दी है।</p>
<p>वहीं कांग्रेस ने भी 103 निकायों में जीत हासिल कर शहरी क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। चुनाव का तीसरा महत्वपूर्ण पक्ष निर्दलीय रहे, जिन्होंने 43 निकायों में जीत हासिल की। ऐसे में कई स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में निर्दलीय चेहरों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।</p>
<p><strong>दो चरणों में जनता ने सुनाया फैसला</strong><br />राजस्थान में निकाय चुनाव दो चरणों में कराए गए थे। 9 और 11 सितंबर को मतदान के बाद 14 सितंबर को मतगणना हुई। इस चुनाव में हजारों वार्डों के लिए प्रत्याशियों ने किस्मत आजमाई। चुनाव से पहले ही 77 प्रत्याशी निर्विरोध चुने जा चुके थे, जिनमें 44 भाजपा और 16 कांग्रेस से थे।</p>
<p><strong>भजनलाल सरकार के लिए नतीजों के क्या हैं मायने?</strong><br />निकाय चुनाव को राजस्थान की शहरी राजनीति में भाजपा और कांग्रेस की जमीनी ताकत की बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था। चुनाव से पहले भी 309 निकायों के इस मुकाबले को दोनों प्रमुख दलों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक टेस्ट माना गया था।</p>
<p>भाजपा के लिए यह प्रदर्शन राज्य सरकार की राजनीतिक स्थिति को मजबूती देने वाला माना जा सकता है, जबकि कांग्रेस के सामने अब उन शहरी क्षेत्रों के प्रदर्शन का विश्लेषण करने की चुनौती होगी जहां वह भाजपा से पीछे रही। साथ ही 43 निकायों में निर्दलीयों की सफलता यह भी बताती है कि स्थानीय चुनावों में पार्टी के साथ उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और स्थानीय मुद्दों का असर भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 11:41:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्राउंड रिपोर्ट: 1978 में जेपी ने दिया था साथ, अब छिन गया बुढ़ापे का सहारा; अनुदान प्राप्त कॉलेजों के रिटायर शिक्षकों की पेंशन बंद </title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। साल 1978 के किसी महीने का वाकया है। तब रायपुर का जयस्तंभ चौक आंदोलनों का मुख्य गढ़ हुआ करता था। शहर और आंदोलन साथ-साथ चलते थे। वैसा ही आंदोलन पूरे अविभाजित मध्यप्रदेश के अशासकीय शिक्षकों का चल रहा था। ये शिक्षक सौ फीसदी सरकारी अनुदान की मांग को लेकर डटे हुए थे।</p>
<p>आंदोलन को हर तरफ से समर्थन मिल रहा था। सुबह से रात तक जयस्तंभ चौक भाषणों और नारों से गूंजता रहता था। स्कूली छात्र भी अपने शिक्षकों के साथ धरने पर पहुंचने लगे थे। प्रशासन तब हिल गया था, जब सफाई कर्मचारियों ने भी शिक्षकों का साथ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/ground-report-jp-had-given-support-in-1978-now-the/article-12446"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/img-20260913-wa0000.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर। साल 1978 के किसी महीने का वाकया है। तब रायपुर का जयस्तंभ चौक आंदोलनों का मुख्य गढ़ हुआ करता था। शहर और आंदोलन साथ-साथ चलते थे। वैसा ही आंदोलन पूरे अविभाजित मध्यप्रदेश के अशासकीय शिक्षकों का चल रहा था। ये शिक्षक सौ फीसदी सरकारी अनुदान की मांग को लेकर डटे हुए थे।</p>
<p>आंदोलन को हर तरफ से समर्थन मिल रहा था। सुबह से रात तक जयस्तंभ चौक भाषणों और नारों से गूंजता रहता था। स्कूली छात्र भी अपने शिक्षकों के साथ धरने पर पहुंचने लगे थे। प्रशासन तब हिल गया था, जब सफाई कर्मचारियों ने भी शिक्षकों का साथ दिया और शहर की साफ-सफाई ठप पड़ने लगी।</p>
<p>उसी दौरान किसी सुबह पोस्टमैन ने यतेंद्र कुमार गर्ग के घर टेलीग्राम लाकर दिया। यह टेलीग्राम खुद जयप्रकाश नारायण की तरफ से था। यह संदेश लेकर साइकिल दौड़ाते हुए धरना स्थल पर बैठे यतेंद्र कुमार गर्ग और उनके शिक्षक साथियों तक पहुंचाया गया। वहां माइक पर संदेश पढ़ा गया, जिसमें लिखा था- 'JP is with you'।</p>
<p>जनता सरकार के दौर में जयप्रकाश नारायण के इस समर्थन का मतलब काफी बड़ा था। जयस्तंभ चौक नारों से गूंज उठा। इसके कुछ समय बाद ही तत्कालीन जनता सरकार ने अशासकीय महाविद्यालयीन शिक्षकों की सौ फीसदी अनुदान और पेंशन की मांग मान ली।</p>
<p><strong>अब बदल गए हालात</strong></p>
<p>वर्तमान स्थिति यह है कि अनुदान प्राप्त कॉलेजों में किसी शिक्षक के रिटायर होने पर उनके हिस्से का अनुदान खत्म कर दिया जाता है। खाली पद पर कॉलेज को भर्ती करनी हो, तो वह अपने बजट से करता है, सरकार पैसे नहीं देती। कॉलेज भर्तियां करते भी हैं, तो काफी कम वेतन पर। लेकिन इसके बावजूद, किसी भी सरकार ने इन कॉलेजों से रिटायर हो चुके शिक्षकों की पेंशन आज तक नहीं रोकी थी।</p>
<p>यही पेंशन इन बुजुर्गों के बुढ़ापे की लाठी थी। इसी के कारण वे आत्मनिर्भर महसूस करते थे। गुप्ता सर को अपने पोते को पैसे देने हों, या मुखर्जी सर को अपनी दवाइयां लेनी हों, उन्हें किसी का मुंह नहीं ताकना पड़ता था।</p>
<p><strong>सरकार का फैसला और शिक्षकों का दर्द</strong></p>
<p>अब छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने इन बुजुर्ग शिक्षकों से उनकी आत्मनिर्भरता छीन ली है। कैबिनेट मीटिंग में फैसला लेकर उन शिक्षकों की पेंशन रोक दी गई है, जिनके लिए यही जीवन का इकलौता आसरा थी।</p>
<p>इस फैसले से व्यथित होकर किसी रिटायर शिक्षक ने अपना दर्द बयान करते हुए मैसेज में लिखा है- "हालांकि अभी तक मैं जीवित हूं, लेकिन छत्तीसगढ़ की वर्तमान सरकार मेरी जान लेने पर तुली हुई है। उम्र भर सेवा देने के बाद हमारी पेंशन बंद कर दी गई है। हमें छठे या सातवें वेतनमान की दरकार नहीं थी, पांचवां वेतनमान ही काफी था।"</p>
<p>सरकार की वित्तीय हालत किसी से छिपी नहीं है, लेकिन क्या किसी लोक कल्याणकारी सत्ता को अपने बुजुर्गों की जिम्मेदारी से इस तरह पल्ला झाड़ लेना चाहिए? शिक्षा व्यवस्था का जो हाल हो रहा है, वह अलग विषय है। लेकिन जिन शिक्षकों ने ना जाने कितने मंत्री, मुख्यमंत्री, नेता, अफसर, पत्रकार और व्यापारी गढ़े, उन्हें आज यह दिन देखना पड़ रहा है।</p>
<p>हालात इतने तकलीफदेह हैं कि सत्ताधारी दल से ही आने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता को अपनी कलम से यह लिखना पड़ गया- "सर/मैडम हम शर्मिंदा हैं। तब हम आपके आंदोलन के साथ सड़क पर आए थे, आज बस लाचार हैं। हमें क्षमा कीजियेगा।" लंबे संघर्ष के बाद हासिल किया गया हक आज दफ्तर के आदेशों की भेंट चढ़ गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 10:05:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CG News: मुख्यमंत्री निवास में सजा छत्तीसगढ़ी रंग, तीजा-पोरा तिहार में दिखी लोक संस्कृति की खूबसूरत झलक</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और संस्कृति की खुशबू आज मुख्यमंत्री निवास में देखने को मिली। तीजा-पोरा तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आतिथ्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। पारंपरिक माहौल के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति, रीति-रिवाज और लोक जीवन की झलक नजर आई। आयोजन स्थल पर तीजा-पोरा की पारंपरिक रंगत दिखाई दी। महिलाओं की सहभागिता ने कार्यक्रम को खास बना दिया। यह आयोजन केवल एक पर्व का उत्सव नहीं रहा, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/cg-news-chhattisgarhi-colors-decorated-in-chief-ministers-residence-beautiful/article-12432"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/cm-house-teeja.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और संस्कृति की खुशबू आज मुख्यमंत्री निवास में देखने को मिली। तीजा-पोरा तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आतिथ्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। पारंपरिक माहौल के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति, रीति-रिवाज और लोक जीवन की झलक नजर आई। आयोजन स्थल पर तीजा-पोरा की पारंपरिक रंगत दिखाई दी। महिलाओं की सहभागिता ने कार्यक्रम को खास बना दिया। यह आयोजन केवल एक पर्व का उत्सव नहीं रहा, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को सामने लाने का अवसर भी बना।</p>
<p><strong>तीजा में मायके की याद और रिश्तों की मिठास</strong><br />छत्तीसगढ़ में तीजा का पर्व महिलाओं के लिए विशेष भावनात्मक महत्व रखता है। यह त्योहार मायके, ससुराल और परिवार के बीच रिश्तों की आत्मीयता से जुड़ा हुआ है। तीजा के अवसर पर महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना करती हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।</p>
<p>कई परिवारों में यह पर्व बेटियों के मायके लौटने और परिवार के साथ समय बिताने की परंपरा से भी जुड़ा है। यही वजह है कि तीजा को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति में केवल धार्मिक पर्व के तौर पर नहीं, बल्कि रिश्तों और भावनाओं के उत्सव के रूप में भी देखा जाता है।</p>
<p><strong>पोरा में खेती और पशुधन के प्रति सम्मान</strong><br />वहीं पोरा तिहार छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति से गहराई से जुड़ा पर्व है। खेती-किसानी में बैलों और पशुधन की भूमिका को सम्मान देने वाली इस परंपरा में मिट्टी से बनाए गए नंदी-बैल और पारंपरिक खिलौनों की पूजा की जाती है। किसान परिवारों के लिए यह पर्व खेत, पशुधन और ग्रामीण जीवन के साथ उनके रिश्ते को दर्शाता है। गांवों में पोरा के अवसर पर घर-आंगन से लेकर बाजारों तक विशेष रौनक रहती है और पारंपरिक वस्तुओं की खरीदारी भी की जाती है।</p>
<p><strong>मुख्यमंत्री निवास में दिखी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की रंगत</strong><br />मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही। पारंपरिक पर्व से जुड़े आयोजन ने छत्तीसगढ़ की स्थानीय संस्कृति को एक मंच पर प्रस्तुत किया। तीजा की पारिवारिक और भावनात्मक परंपरा से लेकर पोरा की कृषि आधारित मान्यताओं तक, कार्यक्रम में प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता की झलक देखने को मिली।</p>
<p>छत्तीसगढ़ में तीजा-पोरा जैसे पर्व आज भी लोगों को अपनी जड़ों और पारंपरिक जीवनशैली से जोड़ने का काम करते हैं। मुख्यमंत्री निवास का यह आयोजन इसी लोक विरासत को सम्मान देने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक सांस्कृतिक अवसर के रूप में सामने आया।</p>
<div class="youtubeplayer-responsive-iframe-outer"><iframe class="youtubeplayer-responsive-iframe" title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/dHi8mYcnAXw" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 16:32:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>BSP में बड़ा उलटफेर: मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से किया बाहर, रिश्तों को लेकर नाराजगी के बीच लिया बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ। </strong>बहुजन समाज पार्टी (BSP) में आज बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह बाहर कर दिया है। कुछ दिन पहले ही उन्हें नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी से हटाया गया था। अब पार्टी से भी मुक्त किए जाने के ऐलान के बाद आकाश आनंद की BSP में राजनीतिक भूमिका खत्म हो गई है।</p>
<p>मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सिलसिलेवार पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने आकाश आनंद पर पार्टी और आंदोलन के हितों की तुलना में पारिवारिक और व्यक्तिगत रिश्तों को ज्यादा महत्व</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/politics/big-upheaval-in-bsp-mayawati-expelled-nephew-akash-anand-from/article-12374"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/mayawati_expels_akash_anand_from_bsp_17890182331.webp" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ। </strong>बहुजन समाज पार्टी (BSP) में आज बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह बाहर कर दिया है। कुछ दिन पहले ही उन्हें नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी से हटाया गया था। अब पार्टी से भी मुक्त किए जाने के ऐलान के बाद आकाश आनंद की BSP में राजनीतिक भूमिका खत्म हो गई है।</p>
<p>मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सिलसिलेवार पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने आकाश आनंद पर पार्टी और आंदोलन के हितों की तुलना में पारिवारिक और व्यक्तिगत रिश्तों को ज्यादा महत्व देने का आरोप लगाया। मायावती के मुताबिक, ऐसी स्थिति में किसी व्यक्ति का पार्टी और मिशन के प्रति पूरी तरह समर्पित रहना सवालों के घेरे में आता है।</p>
<p><strong>‘पार्टी हित से ऊपर रिश्ते’ को लेकर मायावती नाराज</strong><br />मायावती ने अपने बयान में कहा कि आकाश आनंद को पार्टी के हित और अपने राजनीतिक भविष्य की तुलना में निजी रिश्तों और मोह-माया की अधिक चिंता है। उन्होंने यह भी नाराजगी जताई कि पार्टी प्रमुख के सोशल मीडिया पोस्ट को भी आकाश ने रीपोस्ट नहीं किया। BSP सुप्रीमो ने अपने पोस्ट में आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ को पार्टी की ओर से मिले राजनीतिक अवसरों का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि पार्टी ने दोनों को आगे बढ़ाया, लेकिन इसके बावजूद वे पार्टी की अपेक्षाओं के अनुरूप काम नहीं कर सके।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/Mayawati/status/2097891836463604118?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2097891836463604118%7Ctwgr%5Ee3cc5d3b5d74b3a990a84faf7229055541f56925%7Ctwcon%5Es1_c10&amp;ref_url=https%3A%2F%2Fwww.haribhoomi.com%2Fstate-local%2Futtar-pradesh%2Fnews%2Fmayawati-expels-akash-anand-bsp-ashok-siddharth-retirement-112313">https://twitter.com/Mayawati/status/2097891836463604118?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2097891836463604118%7Ctwgr%5Ee3cc5d3b5d74b3a990a84faf7229055541f56925%7Ctwcon%5Es1_c10&amp;ref_url=https%3A%2F%2Fwww.haribhoomi.com%2Fstate-local%2Futtar-pradesh%2Fnews%2Fmayawati-expels-akash-anand-bsp-ashok-siddharth-retirement-112313</a></blockquote>
<p>

</p>
<p><strong>पहले पद गया, अब पार्टी से भी बाहर</strong><br />आकाश आनंद को इससे पहले 3 सितंबर 2026 को पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर पद की जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया था। अब मायावती ने उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह स्वतंत्र करने का ऐलान कर दिया है। मायावती ने स्पष्ट किया कि यदि आकाश आनंद पार्टी से अलग होकर स्वतंत्र जीवन जीना चाहते हैं तो वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। उनके इस फैसले ने BSP की अंदरूनी राजनीति और पार्टी के भविष्य के नेतृत्व को लेकर चर्चाओं को और तेज कर दिया है।</p>
<p><strong>अशोक सिद्धार्थ के इस्तीफे के कुछ घंटे बाद बड़ा फैसला</strong><br />मायावती का यह ऐलान ऐसे समय आया है जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने की घोषणा की थी। सिद्धार्थ ने X पर भावुक पोस्ट लिखकर कहा था कि वह तत्काल प्रभाव से राजनीतिक और सामाजिक जीवन छोड़ रहे हैं। उन्होंने मायावती के प्रति अपनी निष्ठा जताते हुए कहा कि उनके आदेश के आगे अन्य रिश्ते उनके लिए मायने नहीं रखते। यह घटनाक्रम आकाश आनंद को लेकर मायावती की नाराजगी के बीच सामने आया था। इसके बाद अब आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह बाहर किए जाने के फैसले ने BSP के भीतर चल रहे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/MP_SiddharthBSP/status/2097855934714573014?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2097855934714573014%7Ctwgr%5Ee3cc5d3b5d74b3a990a84faf7229055541f56925%7Ctwcon%5Es1_c10&amp;ref_url=https%3A%2F%2Fwww.haribhoomi.com%2Fstate-local%2Futtar-pradesh%2Fnews%2Fmayawati-expels-akash-anand-bsp-ashok-siddharth-retirement-112313">https://twitter.com/MP_SiddharthBSP/status/2097855934714573014?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2097855934714573014%7Ctwgr%5Ee3cc5d3b5d74b3a990a84faf7229055541f56925%7Ctwcon%5Es1_c10&amp;ref_url=https%3A%2F%2Fwww.haribhoomi.com%2Fstate-local%2Futtar-pradesh%2Fnews%2Fmayawati-expels-akash-anand-bsp-ashok-siddharth-retirement-112313</a></blockquote>
<p>

</p>
<p><strong>आकाश आनंद को लेकर पहले भी बदल चुका है रुख</strong><br />आकाश आनंद को मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता रहा है और उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी दी गई थीं। हालांकि, पिछले कुछ समय में उनके राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। अब नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से हटाए जाने और फिर पार्टी से निष्कासन के बाद BSP में नेतृत्व को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। पार्टी की आगे की रणनीति और संगठन में नेतृत्व की भूमिका पर अब सबकी नजर रहेगी।</p>
<p><strong>कार्यकर्ताओं को मायावती का संदेश</strong><br />अपने संदेश के अंत में मायावती ने BSP कार्यकर्ताओं से विरोधी दलों की राजनीतिक रणनीतियों का मुकाबला करने और पार्टी को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के लक्ष्य के साथ उत्तर प्रदेश में पार्टी को मजबूत करने की अपील की। अब बड़ा सवाल यही है कि आकाश आनंद के बाहर होने के बाद BSP में नेतृत्व और संगठन की अगली तस्वीर कैसी होगी और पार्टी आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना किस रणनीति के साथ करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 11:25:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दलितों और आदिवासियों से आज भी होता हैं भेदभाव, उचित नहीं आरक्षण खत्म करने की मांग- अठावले</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">बिलासपुर : </span></strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास अठावले ने आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है। बुधवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि <strong><span style="font-family:Mangal, serif;font-weight:normal;">आरक्षण खत्म करने की बात तभी हो सकती है</span></strong></span><strong><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;font-weight:normal;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब देश से जातिवाद और जातिगत भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाए।</span></span></strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi"> उन्होंने कहा कि आज भी समाज के कई हिस्सों में दलितों और आदिवासियों के साथ भेदभाव की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में आरक्षण को खत्म करने की मांग उचित नहीं है।</span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">अठावले ने कहा कि आरक्षण ऐतिहासिक</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/dalits-and-tribals-are-still-discriminated-against-demand-to-end/article-12369"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/d7405d2c-6ef5-46c4-8e5c-c9cf00156a7b.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">बिलासपुर : </span></strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास अठावले ने आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है। बुधवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि <strong><span style="font-family:Mangal, serif;font-weight:normal;">आरक्षण खत्म करने की बात तभी हो सकती है</span></strong></span><strong><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;font-weight:normal;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब देश से जातिवाद और जातिगत भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाए।</span></span></strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi"> उन्होंने कहा कि आज भी समाज के कई हिस्सों में दलितों और आदिवासियों के साथ भेदभाव की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में आरक्षण को खत्म करने की मांग उचित नहीं है।</span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">अठावले ने कहा कि आरक्षण ऐतिहासिक रूप से वंचित वर्गों को आगे बढ़ाने और उन्हें बराबरी का अवसर देने का माध्यम है। एससी</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">एसटी और ओबीसी के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था सामाजिक संतुलन के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि समाज में वास्तविक समानता आने के बाद ही आरक्षण की जरूरत पर भविष्य में विचार किया जा सकता है।</span></span></p>
<p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">जातीय जनगणना से सामने आएगी वास्तविक तस्वीर</span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">जातीय जनगणना के सवाल पर अठावले ने कहा कि इससे देश में अलग-अलग जातियों की वास्तविक आबादी और उनकी सामाजिक स्थिति का आंकड़ा सामने आएगा। आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने पर भी भविष्य में चर्चा हो सकती है। उनका कहना था कि सामाजिक न्याय का मतलब किसी एक वर्ग को दूसरे के खिलाफ खड़ा करना नहीं</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सभी को बराबरी का अवसर देना है। जातिगत भेदभाव खत्म करने के लिए उन्होंने अंतरजातीय विवाह और सामाजिक मेलजोल बढ़ाने पर भी जोर दिया। अपने निजी जीवन का उदाहरण देते हुए अठावले ने बताया कि उनकी पत्नी ब्राह्मण समाज से हैं और वे स्वयं दलित समाज से आते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में दूरी कम होगी तो समानता की राह भी मजबूत होगी।</span></span></p>
<p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">निजी क्षेत्र में नहीं मिला रहा आरक्षण, जताई चिंता</span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">अठावले ने निजी क्षेत्र में रोजगार बढ़ने और सरकारी नौकरियों के अवसर सीमित होने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों के निजी क्षेत्र में जाने के बाद आरक्षण का लाभ उसी रूप में नहीं मिल पाता। उन्होंने युवाओं से केवल सरकारी नौकरी पर निर्भर रहने के बजाय कौशल विकास</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वरोजगार और छोटे उद्योगों की ओर बढ़ने की अपील की। महिला आरक्षण को लेकर उन्होंने कहा कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना जरूरी है। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के महिला अधिकारों से जुड़े प्रयासों का उल्लेख करते हुए महिलाओं को शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संपत्ति और राजनीतिक अधिकार देने की वकालत की।</span></span></p>
<p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ में आरपीआई को मजबूत करने की तैयारी</span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">अठावले ने छत्तीसगढ़ में अपनी पार्टी को मजबूत करने का भी ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सतनामी</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">दलित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओबीसी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्राह्मण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्य सहित सभी समाजों को साथ लेकर संगठन का विस्तार किया जाएगा। उनका दावा है कि आने वाले समय में आरपीआई छत्तीसगढ़ में अपनी अलग राजनीतिक पहचान मजबूत कर सकती है।</span></span></p>
<p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">भाजपा से गठबंधन पर बोले</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">—<span lang="hi" xml:lang="hi">सीट मिली तो साथ लड़ेंगे</span></span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन के सवाल पर अठावले ने साफ कहा कि <strong><span style="font-family:Mangal, serif;font-weight:normal;">आरपीआई एनडीए का हिस्सा है।</span></strong> यदि भाजपा उनकी पार्टी को सीट देती है तो गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा </span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">4-5 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटें देती है तो उस पर बात हो सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि पर्याप्त सीटें नहीं मिलने पर आरपीआई अपने दम पर करीब </span>8 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर सकती है। अठावले ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने छत्तीसगढ़ में कोई सीट नहीं लड़ी थी और भाजपा के पक्ष में प्रचार किया था। अब पार्टी संगठन को मजबूत कर आगामी चुनाव में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी है।</span></span></p>
<p><strong><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">राहुल गांधी पर भी साधा निशाना</span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;" xml:lang="hi">अठावले ने कहा कि राहुल गांधी को सरकार की आलोचना करने का पूरा अधिकार है</span><span style="font-size:11pt;font-family:Mangal, serif;color:#000000;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आरोप तथ्य के आधार पर लगाए जाने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि </span>2029 <span lang="hi" xml:lang="hi">के लोकसभा चुनाव में भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनेगी।</span></span><br /><br /><span style="font-family:Mangal, serif;color:#000000;"> </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिलासपुर</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 19:15:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[स्वाति मिश्रा ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिस्टम के छेद - कमीशन के बंगलों से लेकर सट्टेबाजों की सरपरस्ती तक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सत्ता बदलती है, चेहरे बदलते हैं, लेकिन सिस्टम के गलियारों में चलने वाला 'खेल' कभी नहीं बदलता। आइए आज आपको सिस्टम के भीतर चल रहे कुछ ऐसे ही दिलचस्प और चौंकाने वाले खेलों से रूबरू कराते हैं, जिनकी चर्चा बंद कमरों में तो खूब है, लेकिन कार्रवाई की फाइलों में सन्नाटा पसरा है।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य विभाग में 'अमित' छाप वसूली</strong></p>
<p>कहने को तो आईएएस अफसर जनहित के लिए होते हैं, लेकिन यहां चर्चा एक अफसर के 'ब्रदर' की है, जिनका नाम 'अमित' है। जनहित के कामों में इनकी छाप भले ही नजर न आए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के वसूली व्यवसाय में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/holes-in-the-system-from-commission-bungalows-to-patronage/article-12343"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/img-20260909-wa0002.jpg" alt=""></a><br /><p>सत्ता बदलती है, चेहरे बदलते हैं, लेकिन सिस्टम के गलियारों में चलने वाला 'खेल' कभी नहीं बदलता। आइए आज आपको सिस्टम के भीतर चल रहे कुछ ऐसे ही दिलचस्प और चौंकाने वाले खेलों से रूबरू कराते हैं, जिनकी चर्चा बंद कमरों में तो खूब है, लेकिन कार्रवाई की फाइलों में सन्नाटा पसरा है।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य विभाग में 'अमित' छाप वसूली</strong></p>
<p>कहने को तो आईएएस अफसर जनहित के लिए होते हैं, लेकिन यहां चर्चा एक अफसर के 'ब्रदर' की है, जिनका नाम 'अमित' है। जनहित के कामों में इनकी छाप भले ही नजर न आए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के वसूली व्यवसाय में इनकी छाप सचमुच 'अमिट' हो चुकी है। मंत्रालय से लेकर संचालनालय तक दबी जुबान में चर्चा है कि सर्जिकल सामानों की खरीदी में करोड़ों का कमीशन काटा गया है। यह 'सर्जिकल स्ट्राइक' सीधे सरकारी खजाने पर हो रही है, मगर सरकार सब कुछ जानकर भी खामोश बैठी है।</p>
<p>कमाई का आलम यह है कि शहर के सबसे पॉश इलाके 'स्वर्णभूमि' में इसी काली कमाई से दो आलीशान बंगले (नंबर 132 और 133) खड़े कर दिए गए हैं। बंगलों की शानो-शौकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंदर की नक्काशी और कीमती फर्नीचर के लिए खास सागौन (टीक वुड) सीधे बीजापुर के जंगलों से मंगाया गया है। सवाल यह है कि इस शाही शौक के पीछे का 'रसूख' आखिर सरकार को क्यों नहीं दिख रहा?</p>
<p><strong>नशे में 'उड़ता' अफसर</strong></p>
<p>स्वर्णभूमि के बंगलों की चकाचौंध के बीच एक और हैरान करने वाली चर्चा जोरों पर है। मंत्रालय के गलियारों में सवाल गूंज रहा है कि आखिर वो कौन सा रसूखदार अफसर है, जो बिना ड्रग्स लिए दफ्तर ही नहीं आता? जनाब इतने 'हाई' रहते हैं कि नशे की खुमारी में ही सरकारी फाइलें निपटाई जा रही हैं। दफ्तर के चपरासी से लेकर मातहतों तक सबको इस 'उड़ते अफसर' की हकीकत पता है, लेकिन बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे?</p>
<p><strong>महादेव का 'कृपापात्र' खाकीवाला</strong></p>
<p>अब बात पुलिस महकमे की। महादेव सट्टा ऐप का जिन्न फिर बोतल से बाहर आ गया है। इस ऐप का किंगपिन, जो सालों तक जेल की हवा खा चुका है और जिस पर छत्तीसगढ़ से लेकर मुंबई तक कई संगीन अपराध दर्ज हैं, उसका एक खास आईपीएस अफसर के साथ गहरा याराना रहा है। चर्चा है कि यह किंगपिन बकायदा इस खाकी वाले को मोटा कमीशन पहुंचाता था।</p>
<p>हैरानी की बात यह है कि सट्टे के सरगना से इतने गहरे तार जुड़े होने के बावजूद, पुलिस विभाग ने आज तक उस अफसर को निलंबित करने की जहमत नहीं उठाई। आखिर इस मेहरबानी के पीछे का राज क्या है? कौन सी अदृश्य शक्ति है जो इस दागदार चेहरे को आज भी सिस्टम का अहम हिस्सा बनाए हुए है?</p>
<p><strong>ओएसडी का 'निलंबन' वाला रहस्य</strong></p>
<p>सिस्टम की दरियादिली का सबसे बड़ा उदाहरण पिछली सरकार के करीबियों पर उमड़ रहा प्यार है। पूर्व मुख्यमंत्री के ओएसडी रहे डिप्टी कलेक्टर रैंक के एक अधिकारी पूरे चार साल जेल की रोटियां तोड़ने के बाद अब जमानत पर रिहा होकर बाहर आए हैं। नियम-कायदों की किताब चीख-चीख कर कहती है कि ऐसे अफसर को तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए, लेकिन मौजूदा सरकार ने अब तक निलंबन का आदेश जारी नहीं किया है।</p>
<p>प्रशासनिक हलकों में अब यह सवाल आग की तरह फैल रहा है कि आखिर नई सरकार, पिछली सरकार के चहेतों पर इतनी मेहरबान क्यों है? क्या यह महज लालफीताशाही की सुस्ती है, या फिर सरकार के भीतर ही बैठे कुछ लोग मौजूदा सरकार को बदनाम करने की कोई गहरी साजिश रच रहे हैं? तीर तो कमान से निकल चुके हैं, बस देखना यह है कि निशाना असल में कहां लगता है!</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/holes-in-the-system-from-commission-bungalows-to-patronage/article-12343</link>
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                <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 08:34:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NSUI प्रदेश अध्यक्ष पर 29 लाख से ज्यादा की ठगी का आरोप, रेत खदान और कैंटीन ठेका दिलाने के नाम पर रकम लेने की शिकायत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर।</strong> छत्तीसगढ़ NSUI के प्रदेश अध्यक्ष नीरज पाण्डेय की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उनके खिलाफ पुरानी बस्ती थाने में कथित ठगी को लेकर लिखित शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता राजू सोनकर ने नीरज पाण्डेय, उनके भाई दीपक और चाचा इंद्रासन पर रेत खदान, DKS अस्पताल की कैंटीन और एक कंपनी की एजेंसी दिलाने का भरोसा देकर 29 लाख रुपये से अधिक रकम लेने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, रकम लेने के बावजूद बताए गए काम नहीं हुए और पैसे वापस मांगने पर भी राशि लौटाई नहीं गई।</p>
<p><strong>2023 से 2025 के बीच रकम लेने का दावा</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/nsui-state-president-accused-of-fraud-of-more-than-29/article-12287"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/nsui_state_president_neeraj_pandey_1788753216.webp" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर।</strong> छत्तीसगढ़ NSUI के प्रदेश अध्यक्ष नीरज पाण्डेय की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उनके खिलाफ पुरानी बस्ती थाने में कथित ठगी को लेकर लिखित शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता राजू सोनकर ने नीरज पाण्डेय, उनके भाई दीपक और चाचा इंद्रासन पर रेत खदान, DKS अस्पताल की कैंटीन और एक कंपनी की एजेंसी दिलाने का भरोसा देकर 29 लाख रुपये से अधिक रकम लेने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, रकम लेने के बावजूद बताए गए काम नहीं हुए और पैसे वापस मांगने पर भी राशि लौटाई नहीं गई।</p>
<p><strong>2023 से 2025 के बीच रकम लेने का दावा</strong><br />पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के बंधवापारा निवासी राजू सोनकर ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि अक्टूबर 2023 से मई 2025 के बीच अलग-अलग मौकों पर उससे रकम ली गई। शिकायत के मुताबिक, उसे कारोबार और ठेके से जुड़े काम दिलाने का भरोसा दिया गया था। जब लंबे समय तक कोई काम आगे नहीं बढ़ा तो उसने रकम वापस मांगनी शुरू की। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पैसे वापस मांगने पर उसे कथित तौर पर पद और प्रभाव का हवाला दिया गया तथा रकम लौटाने से इनकार किया गया। मामले में राजू ने पुलिस से पूरे लेनदेन और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p><strong>दो महीने पहले थाने पहुंची शिकायत</strong><br />जानकारी के मुताबिक, इस मामले को लेकर शिकायत करीब दो महीने पहले 25 जुलाई को पुरानी बस्ती थाने में दी गई थी। शिकायत में रकम के लेनदेन से जुड़े दावों और ठेका दिलाने के लिए किए गए कथित वादों का उल्लेख किया गया है। पुलिस शिकायत के आधार पर मामले से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों की जांच कर रही है।</p>
<p><strong>NSUI प्रदेश अध्यक्ष के भाई ने आरोपों को बताया बेबुनियाद</strong><br />वहीं, आरोपों पर नीरज पाण्डेय के भाई दीपक ने अलग पक्ष रखा है। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता राजू सोनकर और उनके चाचा के बीच प्लॉटिंग से जुड़ा संयुक्त काम था और इसी कारोबार के सिलसिले में उनके बीच आर्थिक लेनदेन हुआ था। दीपक के मुताबिक, राजू के परिवार से उनके लंबे समय से घरेलू संबंध रहे हैं। उन्होंने NSUI प्रदेश अध्यक्ष से जुड़े ठगी के आरोपों को गलत और बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि राजू ने किन परिस्थितियों या किसके कहने पर इस तरह की शिकायत दर्ज कराई है।</p>
<p><strong>शिकायत से उठे सवाल, जांच के बाद साफ होगी तस्वीर</strong><br />फिलहाल, पूरा मामला पुलिस शिकायत और दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच है। शिकायतकर्ता ने जहां ठेका और एजेंसी दिलाने के नाम पर रकम लेने का आरोप लगाया है, वहीं आरोपी पक्ष ने इसे कारोबारी लेनदेन से जुड़ा विवाद बताया है। अब पुलिस की जांच में रकम के लेनदेन, दस्तावेजों और दोनों पक्षों के दावों की पड़ताल के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/nsui-state-president-accused-of-fraud-of-more-than-29/article-12287</link>
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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 11:50:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>झीरम घाटी कांड: भूपेश बघेल पर BJP नेता नरेश चंद्र का वार; पूछा- NIA अदालत का आदेश आ गया, आपकी जेब का साक्ष्य कहां है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर.छत्तीसगढ़ की सियासत में झीरम घाटी नक्सली हमले का मुद्दा फिर उफान पर है। NIA की विशेष अदालत द्वारा मामले की सुनवाई पूरी करने और आदेश सुनाने के बाद, भाजपा नेता नरेश चंद्र गुप्ता ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को कटघरे में खड़ा किया है। नरेश चंद्र ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर कांग्रेस पार्टी और बघेल पर साक्ष्य छिपाने का गंभीर आरोप लगाया है।</p>
<p><strong>कहां गया जेब वाला सबूत?</strong></p>
<p>सियासी गलियारों में बघेल के उस पुराने बयान पर तीखा तंज कसा जा रहा है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि झीरम हमले के साक्ष्य उनकी जेब में मौजूद हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/jheeram-valley-incident-bjp-leader-naresh-chandras-attack-on-bhupesh/article-12265"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/20260906_100746.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर.छत्तीसगढ़ की सियासत में झीरम घाटी नक्सली हमले का मुद्दा फिर उफान पर है। NIA की विशेष अदालत द्वारा मामले की सुनवाई पूरी करने और आदेश सुनाने के बाद, भाजपा नेता नरेश चंद्र गुप्ता ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को कटघरे में खड़ा किया है। नरेश चंद्र ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर कांग्रेस पार्टी और बघेल पर साक्ष्य छिपाने का गंभीर आरोप लगाया है।</p>
<p><strong>कहां गया जेब वाला सबूत?</strong></p>
<p>सियासी गलियारों में बघेल के उस पुराने बयान पर तीखा तंज कसा जा रहा है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि झीरम हमले के साक्ष्य उनकी जेब में मौजूद हैं। हमलावर होते हुए भाजपा नेता ने पूछा है कि जब NIA अदालत में मामले की सुनवाई खत्म हो गई, आदेश भी आ गया, तो वह साक्ष्य अदालत के सामने क्यों नहीं पहुंचा? नरेश चंद्र के अनुसार बघेल ने अपने उन तथाकथित साक्ष्यों को अदालत के सामने जानबूझकर नहीं रखा और उन्हें छिपा लिया।</p>
<p><strong>अपनों की मौत पर सबूत छिपाने का आरोप</strong></p>
<p>इस राजनीतिक बयानबाजी में बघेल को साक्ष्य छिपाने का आरोपी बताया गया है। नरेश चंद्र ने अपनी पोस्ट में लिखा है, "आप साक्ष्य छुपाने के आरोपी हैं, वह भी उस घटना के जिसमें आपकी पार्टी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल सहित कई बड़े और दिग्गज नेता मारे गए थे।" श्री गुप्ता ने पूछा कि इतने संवेदनशील मामले में, जिसने समूचे देश को झकझोर कर रख दिया उसमें सबूत छिपाने के पीछे राजनीतिक मंशा क्या थी? आखिर इन साक्ष्यों को अदालत की चौखट तक पहुंचने से किसने रोका?</p>
<p> </p>
<p><strong>कांग्रेस आलाकमान से भी जवाब तलब</strong></p>
<p>भाजपा नेता नरेश चंद्र गुप्ता ने इस मामले में भूपेश बघेल से सार्वजनिक तौर पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। साथ ही कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से भी जवाब मांगा है। भाजपा नेता ने पूछा है कि जब पार्टी ने अपने ही प्रथम पंक्ति के नेताओं को खोया, तो फिर सबूतों को लेकर यह पर्दादारी क्यों ? </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/jheeram-valley-incident-bjp-leader-naresh-chandras-attack-on-bhupesh/article-12265</link>
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                <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 10:08:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांग्रेस में बड़ा बदलाव 6 राज्यों में बदले प्रभारी, सचिन पायलट को पंजाब तो भूपेश बघेल को असम की कमान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: कांग्रेस ने संगठन में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने 6 राज्यों के प्रभारी बदले हैं। तत्काल प्रभाव से कई नेताओं को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाया गया है। वहीं, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी दी गई है।</p>
<p><strong>6 राज्यों में बदली जिम्मेदारी</strong></p>
<p>कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, भूपेश बघेल को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) का महासचिव प्रभारी, असम नियुक्त किया गया है। रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात का महासचिव प्रभारी बनाया गया है। सचिन पायलट को पंजाब का महासचिव प्रभारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/big-change-in-congress-in-charge-of-6-states-changed-sachin/article-12263"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/img-20260905-wa0082.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली: कांग्रेस ने संगठन में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने 6 राज्यों के प्रभारी बदले हैं। तत्काल प्रभाव से कई नेताओं को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाया गया है। वहीं, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी दी गई है।</p>
<p><strong>6 राज्यों में बदली जिम्मेदारी</strong></p>
<p>कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, भूपेश बघेल को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) का महासचिव प्रभारी, असम नियुक्त किया गया है। रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात का महासचिव प्रभारी बनाया गया है। सचिन पायलट को पंजाब का महासचिव प्रभारी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़, डॉ. सिरीवेल्ला प्रसाद को महाराष्ट्र और पी. वी. मोहन को आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है।</p>
<p><strong>सुरजेवाला को कर्नाटक की अतिरिक्त जिम्मेदारी</strong></p>
<p>कांग्रेस ने रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात के साथ कर्नाटक के महासचिव प्रभारी की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी है। यानी अब उनके पास गुजरात के साथ कर्नाटक संगठन की भी जिम्मेदारी होगी।</p>
<p><strong>इन नेताओं की जगह नई नियुक्तियां</strong></p>
<p>पार्टी ने निवर्तमान महासचिव प्रभारियों के योगदान की सराहना भी की है। इनमें जितेंद्र सिंह, रमेश चेन्निथला और मणिकम टैगोर शामिल हैं। कांग्रेस ने इन बदलावों के जरिए राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियों का नया बंटवारा किया है।</p>
<p><strong>मुकुल वासनिक की जिम्मेदारी बरकरार</strong></p>
<p>कांग्रेस ने मुकुल वासनिक को AICC महासचिव के पद पर बरकरार रखा है। पार्टी की ओर से जारी आदेश पर संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल के हस्ताक्षर हैं। सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/big-change-in-congress-in-charge-of-6-states-changed-sachin/article-12263</link>
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                <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 22:02:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक कार, तीन बड़े चेहरे और बंद कमरे की बातचीत… युवा कांग्रेस चुनाव में क्या पक रही है सियासी खिचड़ी?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ में युवा कांग्रेस के चुनाव को लेकर कांग्रेस संगठन के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं। ऑनलाइन वोटिंग के जरिए होने वाले चुनाव ने युवा नेताओं और दावेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा को रोचक बना दिया है। संगठनात्मक चुनाव होने के बावजूद इसकी हलचल अब पार्टी की व्यापक राजनीति से भी जुड़ती दिखाई दे रही है। खासतौर पर युवा कांग्रेस के चुनाव के बीच भिलाई विधायक देवेंद्र यादव की सक्रियता और वरिष्ठ नेताओं के साथ उनकी मुलाकातों ने कांग्रेस के भीतर संभावित लामबंदी को लेकर चर्चाओं को हवा दे दी है।</p>
<p>देवेंद्र यादव इन दिनों प्रदेश</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/one-car-three-big-faces-and-closed-door-conversations%E2%80%A6what-political/article-12251"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/5a34a811-3d90-4b83-ac56-cc7595af3da2.png" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ में युवा कांग्रेस के चुनाव को लेकर कांग्रेस संगठन के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं। ऑनलाइन वोटिंग के जरिए होने वाले चुनाव ने युवा नेताओं और दावेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा को रोचक बना दिया है। संगठनात्मक चुनाव होने के बावजूद इसकी हलचल अब पार्टी की व्यापक राजनीति से भी जुड़ती दिखाई दे रही है। खासतौर पर युवा कांग्रेस के चुनाव के बीच भिलाई विधायक देवेंद्र यादव की सक्रियता और वरिष्ठ नेताओं के साथ उनकी मुलाकातों ने कांग्रेस के भीतर संभावित लामबंदी को लेकर चर्चाओं को हवा दे दी है।</p>
<p>देवेंद्र यादव इन दिनों प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर युवा कार्यकर्ताओं और संगठन से जुड़े लोगों के साथ संपर्क बढ़ा रहे हैं। युवा कांग्रेस के चुनाव में ऑनलाइन वोटिंग होने के कारण उम्मीदवारों और उनके समर्थकों के सामने ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ताओं तक पहुंच बनाने की चुनौती है। ऐसे में प्रदेशभर में संपर्क अभियान और नेताओं की सक्रियता को चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, चुनाव में कौन किस उम्मीदवार के साथ खड़ा है, इसे लेकर पार्टी की ओर से अभी कोई स्पष्ट आधिकारिक तस्वीर सामने नहीं आई है।</p>
<p><strong>देवेंद्र यादव के घर पहुंचे महंत और सिंहदेव</strong><br />इसी राजनीतिक हलचल के बीच आज एक मुलाकात ने कांग्रेस के भीतर चर्चाओं को और तेज कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत और पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, देवेंद्र यादव के साथ सेक्टर-5 स्थित उनके निवास पहुंचे। बताया जा रहा है कि देवेंद्र यादव दोनों वरिष्ठ नेताओं को अपनी कार से लेकर उनके निवास पहुंचे। इसके बाद तीनों नेताओं के बीच बंद कमरे में काफी देर तक बातचीत हुई।</p>
<p>इस मुलाकात की तस्वीरें और नेताओं की मौजूदगी सामने आने के बाद कांग्रेस के राजनीतिक गलियारों में इसके अलग-अलग मायने निकाले जाने लगे है। हालांकि, बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसको लेकर नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। यही वजह है कि युवा कांग्रेस चुनाव के ठीक पहले हुई इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक अटकलों का दौर शुरू हो गया है।</p>
<p><strong>क्या युवा कांग्रेस चुनाव बनी बातचीत की वजह?</strong><br />कांग्रेस के भीतर चर्चा है कि बैठक में युवा कांग्रेस चुनाव से जुड़े संगठनात्मक मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। चुनाव में कई युवा चेहरे अपनी दावेदारी को मजबूत करने में जुटे हैं और प्रदेशभर में कार्यकर्ताओं से संपर्क साध रहे हैं। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और उनके संभावित समर्थन को चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p>हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि बैठक का एजेंडा केवल युवा कांग्रेस चुनाव तक सीमित था या इसमें पार्टी की व्यापक संगठनात्मक और राजनीतिक रणनीति पर भी चर्चा हुई। वरिष्ठ नेताओं की ओर से किसी उम्मीदवार के समर्थन में सार्वजनिक बयान नहीं आया है। इसलिए किसी खास प्रत्याशी या गुट को समर्थन दिए जाने की चर्चा को फिलहाल राजनीतिक कयास के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।</p>
<p><strong>महंत-सिंहदेव की मौजूदगी ने बढ़ाई हलचल</strong><br />इस मुलाकात की खास बात यह भी रही कि कांग्रेस के दो वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं की एक साथ मौजूदगी देखने को मिली। डॉ. चरण दास महंत और टीएस सिंहदेव दोनों ही प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में युवा नेता देवेंद्र यादव के निवास पर दोनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी को सामान्य मुलाकात से आगे जोड़कर देखा जा रहा है।</p>
<p>राजनीतिक जानकारों की नजर में संगठनात्मक चुनाव अक्सर पार्टी के भीतर जमीनी नेटवर्क और नेतृत्व की स्वीकार्यता को परखने का माध्यम भी बनते हैं। युवा कांग्रेस का चुनाव भी इसी लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें चुने जाने वाले पदाधिकारी आने वाले वर्षों में कांग्रेस के जमीनी संगठन में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।</p>
<p><strong>गुटीय समीकरणों के बीच युवा नेतृत्व पर नजर</strong><br />छत्तीसगढ़ कांग्रेस में समय-समय पर अलग-अलग नेताओं के समर्थक समूहों और संगठनात्मक समीकरणों को लेकर चर्चा होती रही है। ऐसे में युवा कांग्रेस का चुनाव सिर्फ संगठन के एक पद के लिए होने वाला चुनाव नहीं रह जाता, बल्कि यह देखने का अवसर भी बनता है कि पार्टी के भीतर कौन से युवा चेहरे किस वरिष्ठ नेतृत्व के करीब हैं और किस तरह का संगठनात्मक आधार तैयार कर रहे हैं।</p>
<p>पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े कार्यकर्ताओं की सक्रियता और अन्य वरिष्ठ नेताओं के समर्थकों की संभावित लामबंदी ने भी इस चुनाव को राजनीतिक रूप से दिलचस्प बना दिया है। हालांकि, किसी भी उम्मीदवार को किसी विशेष वरिष्ठ नेता या गुट से जोड़ने के लिए आधिकारिक समर्थन या स्पष्ट राजनीतिक बयान जरूरी होगा। ऐसी स्थिति सामने नहीं आई है, इसलिए समीकरणों को लेकर चल रही चर्चाओं को संभावनाओं और राजनीतिक आकलन के रूप में ही देखा जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/one-car-three-big-faces-and-closed-door-conversations%E2%80%A6what-political/article-12251</link>
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                <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 16:02:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
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