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                <title>राजनीति - National Jagat Vision</title>
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                <description>राजनीति RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>आबकारी मंत्री देवांगन के शराब के पैसे से चल रही महतारी वंदन योजना वाले बयान पर बवाल,कांग्रेस बोली महिलाओं का घर उजाड़कर कैसा लाभ दे रही सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब की कमाई को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन के एक बयान ने कांग्रेस को बैठे बिठाए बड़ा मुद्दा दे दिया है। मंत्री ने कहा था कि महतारी वंदन सहित सरकार की कई बड़ी योजनाएं शराब से मिलने वाले राजस्व से ही चल रही हैं। इस बयान पर कांग्रेस ने राज्य की भाजपा सरकार की जमकर घेराबंदी की है। कांग्रेस का कहना है कि अगर वाकई योजनाएं शराब के पैसे से चल रही हैं तो यह सरकार की सबसे बड़ी आर्थिक और प्रशासनिक नाकामी है।</p>
<p>कांग्रेस ने तंज कसते</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/congress-created-ruckus-on-excise-minister-devangans-statement-that-mahtari/article-10409"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_000000002ac871fa9cf055d800a47c8e.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब की कमाई को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन के एक बयान ने कांग्रेस को बैठे बिठाए बड़ा मुद्दा दे दिया है। मंत्री ने कहा था कि महतारी वंदन सहित सरकार की कई बड़ी योजनाएं शराब से मिलने वाले राजस्व से ही चल रही हैं। इस बयान पर कांग्रेस ने राज्य की भाजपा सरकार की जमकर घेराबंदी की है। कांग्रेस का कहना है कि अगर वाकई योजनाएं शराब के पैसे से चल रही हैं तो यह सरकार की सबसे बड़ी आर्थिक और प्रशासनिक नाकामी है।</p>
<p>कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष में रहते हुए जो भाजपा शराबबंदी के नाम पर बड़े बड़े वादे करती थी सत्ता में आते ही उसका सारा खजाना शराब की बोतलों पर टिक गया है। शायद इसी को सियासत का असली रूप कहते हैं जहां कुर्सी मिलते ही उसूल बदल जाते हैं। कांग्रेस नेताओं ने साफ कहा कि प्रदेश की महिलाओं को ऐसा कोई भी आर्थिक लाभ मंजूर नहीं होगा जिसकी कीमत उनके ही परिवार को शराबखोरी और बर्बादी के रूप में चुकानी पड़े। सरकार राजस्व जुटाने के बहाने प्रदेश में शराब की खपत बढ़ाने का काम कर रही है।</p>
<h5><strong>ओवररेटिंग और सिंडिकेट का आरोप</strong></h5>
<p>प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में शराब की बिक्री के नाम पर एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है। सरकारी संरक्षण में शराब की ओवररेटिंग धड़ल्ले से चल रही है। ग्राहकों से हर बोतल पर 60 से 80 रुपये तक ज्यादा वसूले जा रहे हैं। खुद शराब दुकानों के कर्मचारी बताते हैं कि यह अतिरिक्त वसूली का पैसा ऊपर तक जाता है। जब इस मामले ने तूल पकड़ा तो सरकार ने सिर्फ दिखावे के लिए कुछ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया। कांग्रेस का सीधा सवाल है कि जब अधिकारी सिर्फ ऊपर के निर्देशों का पालन कर रहे थे तो उन्हें बलि का बकरा क्यों बनाया गया। असली जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी।</p>
<h5><strong>नकली शराब और घोटालों की झड़ी</strong></h5>
<p>कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में शराब घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि इस नेटवर्क के जरिए हजारों करोड़ रुपये लूटे जा रहे हैं। रायगढ़ में नकली शराब की बॉटलिंग रायपुर के तेलीबांधा में नकली होलोग्राम वाली शराब और राजनांदगांव में अवैध शराब का कारोबार इसके पुख्ता सबूत हैं। बलरामपुर की सरकारी दुकान में बीयर की बोतल में गंदा पानी मिलने और जगदलपुर में अवैध शराब पकड़े जाने की घटनाओं ने पूरी सरकारी व्यवस्था की पोल खोल दी है।</p>
<h5><strong>ईडी और सीबीआई जांच की मांग</strong></h5>
<p>सरकारी शराब दुकानों में नकली और मिलावटी शराब बेचकर जो काली कमाई हो रही है उसका कोई हिसाब नहीं है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। पार्टी ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों से भी जांच कराई जानी चाहिए। अगर सरकार पारदर्शी है तो उसे जांच से डरना नहीं चाहिए। कांग्रेस ने पूछा है कि इस नकली शराब के खेल का असली सरगना कौन है और इस काली कमाई में किन किन लोगों की हिस्सेदारी है सरकार को इसका सार्वजनिक जवाब देना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 19:50:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नितिन नबीन के दौरे से बढ़ी सियासी बेचैनी! क्या छत्तीसगढ़ बीजेपी में होने वाला है बड़ा बदलाव?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर। </strong>भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का 20 जून को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ दौरा राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है। संगठन इसे सामान्य दौरे के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियों और लंबे समय से लंबित राजनीतिक फैसलों को देखते हुए इसे सत्ता और संगठन दोनों के लिए अहम माना जा रहा है।</p>
<p>राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन का यह पहला छत्तीसगढ़ दौरा होगा। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह दौरा केवल संगठनात्मक बैठकों तक सीमित रहेगा या फिर प्रदेश सरकार और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/political-uneasiness-increased-due-to-nitin-nabins-visit-is-there/article-10403"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/नितिन-नबीन.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर। </strong>भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का 20 जून को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ दौरा राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है। संगठन इसे सामान्य दौरे के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियों और लंबे समय से लंबित राजनीतिक फैसलों को देखते हुए इसे सत्ता और संगठन दोनों के लिए अहम माना जा रहा है।</p>
<p>राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन का यह पहला छत्तीसगढ़ दौरा होगा। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह दौरा केवल संगठनात्मक बैठकों तक सीमित रहेगा या फिर प्रदेश सरकार और संगठन में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान, असंतोष और प्रदर्शन को लेकर भी समीक्षा होगी।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार नितिन नबीन के दौरे की सूचना मिलते ही प्रदेश भाजपा में हलचल तेज हो गई है। पार्टी पदाधिकारियों और मंत्रियों के बीच बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पिछले डेढ़ साल से मंत्रिमंडल विस्तार और संभावित फेरबदल को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच यह दौरा कई नेताओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।</p>
<p>प्रदेश में लगातार उठ रहे स्थानीय मुद्दों, प्रशासनिक चुनौतियों और संगठन की सक्रियता को लेकर भी केंद्रीय नेतृत्व फीडबैक लेने के मूड में दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि नितिन नबीन के कार्यक्रम को लेकर सत्ता और संगठन दोनों स्तर पर विशेष सतर्कता देखी जा रही है।</p>
<p>राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन विभिन्न राज्यों का दौरा कर संगठन की वास्तविक स्थिति का आकलन कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ उनके लिए नया प्रदेश नहीं है। लंबे समय तक प्रदेश प्रभारी रहने के कारण वे यहां के नेताओं, संगठनात्मक समीकरणों और सत्ता की कार्यशैली से अच्छी तरह परिचित हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि वे केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि संगठन और सरकार के कामकाज पर विस्तृत फीडबैक भी लेंगे।</p>
<p>बीजेपी के भीतर यह भी चर्चा है कि केंद्रीय संगठन के पुनर्गठन और नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन से पहले राज्यों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जा रहा है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के नेताओं की भूमिका, प्रभाव और भविष्य की जिम्मेदारियों को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।</p>
<p>हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक किसी बड़े फैसले या बदलाव को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन नितिन नबीन के प्रस्तावित दौरे ने सत्ता और संगठन दोनों में बेचैनी बढ़ा दी है। अब सभी की नजर 20 और 21 जून के कार्यक्रमों पर टिकी है, क्योंकि यह दौरा केवल राजनीतिक औपचारिकता नहीं बल्कि भाजपा की भविष्य की रणनीति और प्रदेश नेतृत्व के लिए एक अहम परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 15:22:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गरीबों की सेहत से खिलवाड़? सरकारी अस्पतालों में ‘खराब दवाओं’ की सप्लाई का आरोप, कांग्रेस ने राज्यपाल से की जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों को अमानक, नकली और निम्न स्तरीय दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे मरीजों की सेहत खतरे में पड़ रही है। इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है।</p>
<p>ज्ञापन में कांग्रेस ने दावा किया है कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) द्वारा सप्लाई की गई कई दवाओं को बाद में जांच रिपोर्ट के आधार पर अमानक घोषित कर वापस मंगाया जाता है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/congress-demands-investigation-from-governor-alleges-supply-of-bad-medicines/article-10402"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/image-94-2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों को अमानक, नकली और निम्न स्तरीय दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे मरीजों की सेहत खतरे में पड़ रही है। इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है।</p>
<p>ज्ञापन में कांग्रेस ने दावा किया है कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) द्वारा सप्लाई की गई कई दवाओं को बाद में जांच रिपोर्ट के आधार पर अमानक घोषित कर वापस मंगाया जाता है। कांग्रेस का आरोप है कि जब तक ऐसी दवाओं पर रोक लगती है, तब तक हजारों मरीज उनका सेवन कर चुके होते हैं। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी और खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p>कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा भी समय-समय पर दवाओं की गुणवत्ता को लेकर आशंकाएं जताई जाती रही हैं। इसके बावजूद संबंधित शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।</p>
<p>कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि कई अस्पतालों में दवाओं के भंडारण के लिए जरूरी मानकों का पालन नहीं किया जाता, जिससे दवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है। विपक्ष का कहना है कि यदि दवाओं की खरीद, जांच और भंडारण प्रक्रिया में लापरवाही हुई है तो इसका सीधा असर गरीब मरीजों के स्वास्थ्य पर पड़ता है।</p>
<p>ज्ञापन में राज्यपाल से मांग की गई है कि पिछले दो वर्षों में हुई दवा खरीदी और सप्लाई की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भेजी गई दवाओं की गुणवत्ता की समीक्षा के लिए एक विशेष जांच दल गठित किया जाए।</p>
<p>कांग्रेस का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा यह मामला सीधे जनता की जिंदगी और सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए दोषियों की जवाबदेही तय करते हुए सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग इन आरोपों पर क्या रुख अपनाते हैं और जांच की मांग पर क्या फैसला लिया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/congress-demands-investigation-from-governor-alleges-supply-of-bad-medicines/article-10402</link>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 15:09:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CM Helpline 1076: 5 दिन में 15 हजार शिकायतें, क्या बुनियादी सुविधाओं पर फेल हो रहा सिस्टम?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ में सुशासन और विकास के दावों के बीच मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के आंकड़ों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए हेल्पलाइन शुरू की थी, लेकिन शुरुआत के महज पांच दिनों में ही 15,434 शिकायतें और आवेदन दर्ज होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग अब भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।</p>
<p>9 जून से 13 जून तक दर्ज हुई शिकायतों का विश्लेषण बताता है कि लोगों की सबसे बड़ी परेशानियां जमीन, जल निकासी, पेयजल, बिजली</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/cm-helpline-1076-15-thousand-complaints-in-5-days-is/article-10401"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/cm-helpline-1076-shubharambh-1024x679.webp" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर। </strong>छत्तीसगढ़ में सुशासन और विकास के दावों के बीच मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के आंकड़ों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए हेल्पलाइन शुरू की थी, लेकिन शुरुआत के महज पांच दिनों में ही 15,434 शिकायतें और आवेदन दर्ज होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग अब भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।</p>
<p>9 जून से 13 जून तक दर्ज हुई शिकायतों का विश्लेषण बताता है कि लोगों की सबसे बड़ी परेशानियां जमीन, जल निकासी, पेयजल, बिजली और राशन जैसी मूलभूत जरूरतों से जुड़ी हुई हैं। सवाल यह है कि अगर सरकारी योजनाएं और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम कर रही हैं तो इतनी बड़ी संख्या में लोग शिकायत दर्ज कराने के लिए मजबूर क्यों हैं?</p>
<p><strong>राजस्व और शहरी प्रशासन सबसे ज्यादा कटघरे में</strong><br />आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक 2,470 शिकायतें राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग से संबंधित हैं। इनमें जमीन नामांतरण, सीमांकन और लंबे समय से लंबित राजस्व मामलों को लेकर लोगों की नाराजगी सामने आई है। वहीं शहरी प्रशासन विभाग के खिलाफ 2,058 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जो शहरों में साफ-सफाई, खराब सड़कों, बंद नालियों और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी समस्याओं की ओर इशारा करती हैं।</p>
<p><strong>बिजली-पानी और ग्रामीण सुविधाओं पर भी सवाल</strong><br />ऊर्जा विभाग के खिलाफ 1,921 शिकायतें दर्ज होना यह दर्शाता है कि बिजली आपूर्ति, मीटर और बिलिंग से जुड़ी समस्याएं अब भी लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ी 1,509 शिकायतें ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और पेयजल व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर करती हैं। इसके अलावा खाद्य विभाग के खिलाफ 1,235 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें राशन वितरण और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं।</p>
<p><strong>क्या शिकायतों का आंकड़ा सरकारी दावों पर सवाल है?</strong><br />मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर इतने कम समय में शिकायतों की बाढ़ आने को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्ष इसे सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर का प्रमाण बता रहा है। विपक्ष का कहना है कि यदि प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावी होती तो लोगों को अपनी मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए हेल्पलाइन का सहारा नहीं लेना पड़ता। हालांकि सरकार का दावा है कि बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज होना जनता के भरोसे का संकेत है और लोग उम्मीद के साथ अपनी समस्याएं सरकार तक पहुंचा रहे हैं। डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा है कि सरकार हर शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई करेगी।</p>
<p><strong>सबसे बड़ा सवाल</strong><br />फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या CM हेल्पलाइन केवल शिकायतें दर्ज करने का माध्यम बनकर रह जाएगी या फिर इन 15 हजार से अधिक शिकायतों का समयबद्ध और प्रभावी समाधान भी देखने को मिलेगा। क्योंकि आंकड़े साफ बताते हैं कि छत्तीसगढ़ की बड़ी आबादी आज भी उन बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है, जिन्हें किसी भी सुशासन की पहली पहचान माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/cm-helpline-1076-15-thousand-complaints-in-5-days-is/article-10401</link>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 15:02:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कन्या विवाह योजना पर उठे सवालों पर सरकार का जवाब! मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े बोलीं- जांच में नहीं मिली कोई गड़बड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर। </strong>मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना को लेकर सोशल मीडिया पर उठे सवालों के बीच प्रदेश सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। एमसीबी जिले के खड़गवां विकासखंड में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को महिला एवं बाल विकास विभाग ने जांच के बाद निराधार बताया है। विभाग का दावा है कि कार्यक्रम का संचालन शासन के तय नियमों, वित्तीय प्रावधानों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया गया है।</p>
<p>विभागीय जांच के अनुसार 184 जोड़ों के सामूहिक विवाह कार्यक्रम में प्रति हितग्राही निर्धारित 50 हजार रुपये की सहायता राशि का उपयोग नियमानुसार किया गया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/governments-answer-to-the-questions-raised-on-the-girl-marriage/article-10399"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/minister_laxmi_rajwade.png" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर। </strong>मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना को लेकर सोशल मीडिया पर उठे सवालों के बीच प्रदेश सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। एमसीबी जिले के खड़गवां विकासखंड में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को महिला एवं बाल विकास विभाग ने जांच के बाद निराधार बताया है। विभाग का दावा है कि कार्यक्रम का संचालन शासन के तय नियमों, वित्तीय प्रावधानों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया गया है।</p>
<p>विभागीय जांच के अनुसार 184 जोड़ों के सामूहिक विवाह कार्यक्रम में प्रति हितग्राही निर्धारित 50 हजार रुपये की सहायता राशि का उपयोग नियमानुसार किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से सीधे राशि हस्तांतरित की गई है, जबकि विवाह आयोजन, भोजन व्यवस्था और आवश्यक वैवाहिक सामग्री पर निर्धारित प्रावधानों के अनुसार खर्च किया गया है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि गुणवत्ता संबंधी शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कर संबंधित फर्म के भुगतान में कटौती की गई है, जिससे हितग्राहियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।</p>
<p>मामले पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रदेश सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों पर काम कर रही है। किसी भी शिकायत को गंभीरता से लेकर उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाती है। सरकार का कहना है कि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है और योजना का संचालन निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया गया है। ऐसे में अब इस पूरे मामले पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 13:12:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>822 वोट से 20 सांसद तक! रातोंरात सियासत के केंद्र में आई NCPI, TMC के बागियों ने बदला ठिकाना ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारतीय राजनीति में कभी-कभी ऐसे घटनाक्रम होते हैं जो रातोंरात किसी अनजान नाम को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला देते हैं। नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। जिस पार्टी को कुछ समय पहले तक राजनीतिक गलियारों में मुश्किल से कोई पहचानता था, वही पार्टी अब देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। वजह है, तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों का, इस पार्टी में विलय, जिसने बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया है।</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में NCPI का प्रदर्शन बेहद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/politics/from-822-votes-to-20-mps-ncpi-came-to-the/article-10398"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/tmc-ribal-group-meets-om-birla-1781496421191_v.webp" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारतीय राजनीति में कभी-कभी ऐसे घटनाक्रम होते हैं जो रातोंरात किसी अनजान नाम को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला देते हैं। नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। जिस पार्टी को कुछ समय पहले तक राजनीतिक गलियारों में मुश्किल से कोई पहचानता था, वही पार्टी अब देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। वजह है, तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों का, इस पार्टी में विलय, जिसने बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया है।</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में NCPI का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था। पार्टी के उम्मीदवारों को कुल मिलाकर महज कुछ सौ वोट मिले थे और चुनाव खत्म होते ही पार्टी लगभग राजनीतिक परिदृश्य से गायब हो गई थी। लेकिन अब वही पार्टी अचानक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक दल-बदल नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत है।</p>
<p>अब सवाल यह है कि क्या NCPI सिर्फ बागी सांसदों का अस्थायी ठिकाना बनेगी या फिर यह पार्टी पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नई ताकत के रूप में उभरेगी? 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले इस घटनाक्रम ने बंगाल के राजनीतिक भविष्य को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, एक बात तय है कि जिस पार्टी को कभी सैकड़ों वोट भी मुश्किल से मिले थे, वह आज संसद और सियासत दोनों के केंद्र में खड़ी दिखाई दे रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 12:54:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल की सियासत में फिर हलचल! शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच के बीच ED के सामने पहुंचे अभिषेक बनर्जी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कोलकाता।</strong> पश्चिम बंगाल के चर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच ने एक बार फिर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी आज कोलकाता स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर पहुंचे, जहां उनसे कथित अवैध वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ की जा रही है। इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।</p>
<p>जांच एजेंसियों के अनुसार, भर्ती घोटाले की पड़ताल के दौरान कुछ वित्तीय लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की जांच में अभिषेक बनर्जी से जुड़े सवाल सामने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/politics/stir-again-in-bengal-politics-abhishek-banerjee-appears-before-ed/article-10397"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/abhishek-banerjee-pti_d_d.webp" alt=""></a><br /><p><strong>कोलकाता।</strong> पश्चिम बंगाल के चर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच ने एक बार फिर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी आज कोलकाता स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर पहुंचे, जहां उनसे कथित अवैध वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ की जा रही है। इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।</p>
<p>जांच एजेंसियों के अनुसार, भर्ती घोटाले की पड़ताल के दौरान कुछ वित्तीय लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की जांच में अभिषेक बनर्जी से जुड़े सवाल सामने आए हैं। इसी कड़ी में उनकी कंपनी 'लिप्स एंड बाउंड्स' का नाम भी जांच में आया, जिसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने उनसे पूछताछ का फैसला किया। हालांकि, मामले में आरोपों और जांच को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार जारी है।</p>
<p>ED दफ्तर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, जबकि पूरे मामले पर विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पूछताछ से जांच एजेंसियों को क्या नई जानकारी मिलती है और इस बहुचर्चित मामले में आगे क्या मोड़</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 12:36:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>घर के पास डॉक्टर बनने का सपना टूटा, सरकारी बदइंतजामी से छत्तीसगढ़ के पांच मेडिकल कॉलेज फेल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में नए मेडिकल कॉलेज खोलने की सरकारी जल्दबाजी अब विवादों में है। पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टाफ के बिना मेडिकल कॉलेज शुरू करने की कोशिशों पर नेशनल मेडिकल कमिशन ने ब्रेक लगा दिया है। इस मुद्दे पर अब राजनीति भी गरमा गई है। वरिष्ठ इंका.नेता मुरारी गुप्ता ने सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर सीधे सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बिना तैयारी के सिर्फ चुनावी सपने दिखाने के लिए मेडिकल कॉलेजों की रेवड़ी बांटी गई।</p>
<h5><strong>बिना स्टाफ और मशीन के कैसे बनेंगे डॉक्टर</strong></h5>
<p>मुरारी गुप्ता ने मनेंद्रगढ़, कुनकुरी, दंतेवाड़ा, कबीरधाम और जांजगीर चांपा का उदाहरण देते हुए कहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/dream-of-becoming-a-doctor-near-home-shattered-five-medical/article-10388"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_00000000c088720790724f2035dfb932(1).png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में नए मेडिकल कॉलेज खोलने की सरकारी जल्दबाजी अब विवादों में है। पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टाफ के बिना मेडिकल कॉलेज शुरू करने की कोशिशों पर नेशनल मेडिकल कमिशन ने ब्रेक लगा दिया है। इस मुद्दे पर अब राजनीति भी गरमा गई है। वरिष्ठ इंका.नेता मुरारी गुप्ता ने सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर सीधे सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बिना तैयारी के सिर्फ चुनावी सपने दिखाने के लिए मेडिकल कॉलेजों की रेवड़ी बांटी गई।</p>
<h5><strong>बिना स्टाफ और मशीन के कैसे बनेंगे डॉक्टर</strong></h5>
<p>मुरारी गुप्ता ने मनेंद्रगढ़, कुनकुरी, दंतेवाड़ा, कबीरधाम और जांजगीर चांपा का उदाहरण देते हुए कहा कि इन जगहों पर मेडिकल काउंसिल ने मान्यता देने से साफ मना कर दिया है। यह स्थानीय जनता और छात्रों के साथ एक बड़ा मजाक है।</p>
<h5><strong>पूरी व्यवस्था को समझने के लिए नीचे दी गई स्थिति को देखना जरूरी है</strong></h5>
<p> </p>
<ul>
<li>  सरकार ने छोटे शहरों और कस्बों तक में मेडिकल कॉलेज की घोषणा कर दी।</li>
<li> मगर वहां न तो पर्याप्त जमीन है, न आधुनिक मशीनें और न ही पढ़ाने के लिए योग्य प्रोफेसर।</li>
<li>अब नतीजा ये है कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने निरीक्षण के बाद मान्यता देने से इनकार कर दिया।</li>
</ul>
<h5><strong>जान दांव पर लगाकर डिग्री बांटने का खेल</strong></h5>
<p>चिकित्सा शिक्षा कोई सामान्य पढ़ाई नहीं है। यह सीधे इंसानी जिंदगी से जुड़ी है। अगर बिना मशीनों और बिना डॉक्टरों के छात्र पढ़कर निकलेंगे, तो वे मरीजों का इलाज करेंगे या उनके जीवन से खिलवाड़ करेंगे। </p>
<p>लगता है कि विभाग को ऐसा लगने लगा है कि अस्पताल की बिल्डिंग खड़ी कर देने से ही डॉक्टर तैयार हो जाते हैं। किताबों और खाली कमरों के भरोसे डॉक्टरों की फौज खड़ी करने की यह जिद समझ से परे है। आधी अधूरी शिक्षा पाकर जब ये छात्र फील्ड में उतरेंगे, तो जनता के स्वास्थ्य का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।</p>
<h5><strong>युवाओं के सपनों पर फिरा पानी</strong></h5>
<p>कुनकुरी जैसे छोटे इलाकों के गरीब और होनहार छात्रों को उम्मीद जागी थी कि उन्हें घर के पास ही कम खर्च में डॉक्टरी की पढ़ाई करने का मौका मिलेगा। लेकिन सरकार की ढीली कार्यप्रणाली ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया। नेताओं के लिए यह सिर्फ एक चुनावी घोषणा हो सकती है, लेकिन छात्रों के लिए यह उनके करियर और भविष्य का सवाल है।</p>
<p>रिपोर्ट्स बताती है कि सरकार को मेडिकल कॉलेज खोलने की जिद जरूर रखनी चाहिए, लेकिन उसकी पहली शर्त पर्याप्त बजट, जमीन, प्रोफेसर और संसाधन होने चाहिए। केवल वाहवाही लूटने के लिए आनन फानन में की गई घोषणाएं आखिरकार जनता को ही भारी पड़ती हैं। काउंसिल के इस फैसले ने सरकार को आईना दिखा दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में शॉर्टकट नहीं चलता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/dream-of-becoming-a-doctor-near-home-shattered-five-medical/article-10388</link>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 09:29:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पॉवर शिफ्ट: राहुल गांधी का छत्तीसगढ़ मिशन, अब जिला अध्यक्षों के हाथ में होगी कमान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में अब जमीनी नेताओं को मजबूत करने की बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। रायपुर के अभनपुर में 21 जून से शुरू हो रहा 10 दिनों का मेगा ट्रेनिंग कैंप सिर्फ एक सामान्य प्रशिक्षण शिविर नहीं है। यह राज्य में कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को पूरी तरह बदलने का एक बड़ा कदम है। इस कैंप के जरिए जिला और शहर अध्यक्षों को सीधे बड़े अधिकार सौंपने की तैयारी है जिससे स्थानीय स्तर पर पार्टी के फैसले जल्द लिए जा सकें।</p>
<p>लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी खुद इस शिविर में शामिल होकर संगठन का नया मंत्र देंगे।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/power-shift-rahul-gandhis-chhattisgarh-mission-will-now-be-in/article-10386"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_0000000007307208b6d0893ea05af8f8.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में अब जमीनी नेताओं को मजबूत करने की बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। रायपुर के अभनपुर में 21 जून से शुरू हो रहा 10 दिनों का मेगा ट्रेनिंग कैंप सिर्फ एक सामान्य प्रशिक्षण शिविर नहीं है। यह राज्य में कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को पूरी तरह बदलने का एक बड़ा कदम है। इस कैंप के जरिए जिला और शहर अध्यक्षों को सीधे बड़े अधिकार सौंपने की तैयारी है जिससे स्थानीय स्तर पर पार्टी के फैसले जल्द लिए जा सकें।</p>
<p>लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी खुद इस शिविर में शामिल होकर संगठन का नया मंत्र देंगे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस कमेटी और सभी जिला अध्यक्षों को जरूरी निर्देश जारी कर दिए हैं।</p>
<h5><strong>जमीनी स्तर पर बढ़ेगा जिला अध्यक्षों का दबदबा</strong></h5>
<p>पार्टी के भीतर से आ रही खबरों के मुताबिक इस 10 दिवसीय शिविर का मुख्य एजेंडा जिला कांग्रेस कमेटियों को और ताकतवर बनाना है। अब तक ज्यादातर बड़े फैसलों के लिए जिला अध्यक्षों को प्रदेश मुख्यालय या दिल्ली पर निर्भर रहना पड़ता था। इस नए फॉर्मूले के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक मुद्दों और सामाजिक आंदोलनों को लेकर निर्णय लेने की क्षमता सीधे जिला अध्यक्षों के पास होगी। इससे न सिर्फ जिला अध्यक्षों की भूमिका बड़ी होगी बल्कि कार्यकर्ताओं में भी नया जोश आएगा।</p>
<p><strong>राहुल गांधी करेंगे सीधी समीक्षा</strong></p>
<p>इस मेगा कैंप के दौरान राहुल गांधी हर जिले की राजनीतिक स्थिति, सामाजिक समीकरणों और संगठन के कामकाज की खुद समीक्षा करेंगे। वे पदाधिकारियों से सीधा संवाद करेंगे और जमीन पर पार्टी को खड़ा करने की रणनीति बताएंगे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने साफ किया है कि इस शिविर की तैयारियां केंद्रीय प्रशिक्षण विभाग की देखरेख में होंगी। शिविर के शुरुआती दो दिन और आखिरी दो दिन एआईसीसी के महासचिवों, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की मौजूदगी को अनिवार्य किया गया है।</p>
<p><strong>खरगे और प्रियंका गांधी के आने की भी चर्चा</strong></p>
<p>राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी तेज चर्चा है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी भी इस शिविर का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि पार्टी ने अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है।</p>
<p>छत्तीसगढ़ में हुए पिछले चुनावों के बाद कांग्रेस के इस कदम को एक बड़ी रणनीतिक री-पैकेजिंग के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी अब पूरी तरह से नए चेहरों और जमीनी लीडरशिप को आगे रखकर भविष्य की चुनावी रणनीति तैयार कर रही है। आने वाले दिनों में इस पॉवर शिफ्ट का असर राज्य की राजनीति पर साफ दिखाई देगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:44:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठन को धार देने की तैयारी! जिला अध्यक्षों के लिए 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर, राहुल गांधी के शामिल होने की चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रायपुर।</strong> छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी उद्देश्य से 21 जून से 30 जून 2026 तक रायपुर में 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा। इस शिविर में प्रदेशभर के जिला कांग्रेस अध्यक्षों और शहर कांग्रेस अध्यक्षों को संगठनात्मक कार्यशैली, नेतृत्व क्षमता और पार्टी की रणनीतियों को लेकर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। कांग्रेस नेतृत्व इसे संगठन विस्तार और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की महत्वपूर्ण पहल मान रहा है।</p>
<p>इस प्रशिक्षण शिविर की सबसे बड़ी खासियत लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का प्रस्तावित रायपुर दौरा माना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/preparation-to-sharpen-the-organization-in-chhattisgarh-congress-discussion-of/article-10368"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-05/rahul_gandhi_congress_sandesh_c0e5edd42f.webp" alt=""></a><br /><p><strong>रायपुर।</strong> छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी उद्देश्य से 21 जून से 30 जून 2026 तक रायपुर में 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा। इस शिविर में प्रदेशभर के जिला कांग्रेस अध्यक्षों और शहर कांग्रेस अध्यक्षों को संगठनात्मक कार्यशैली, नेतृत्व क्षमता और पार्टी की रणनीतियों को लेकर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। कांग्रेस नेतृत्व इसे संगठन विस्तार और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की महत्वपूर्ण पहल मान रहा है।</p>
<p>इस प्रशिक्षण शिविर की सबसे बड़ी खासियत लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का प्रस्तावित रायपुर दौरा माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी 28 जून को रायपुर पहुंच सकते हैं और दो दिनों तक प्रदेश में रहेंगे। इस दौरान वे प्रशिक्षण शिविर में शामिल होकर कांग्रेस पदाधिकारियों और नेताओं को संबोधित करेंगे। उनके दौरे को आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक मजबूती से जोड़कर देखा जा रहा है।<img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-06/whatsapp-image-2026-06-14-at-8.15.37-am.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026-06-14 at 8.15.37 AM" width="1080" height="1485"></img></p>
<p>कांग्रेस का मानना है कि बदलते राजनीतिक माहौल में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना बेहद जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम में संगठन प्रबंधन, जनसंपर्क, चुनावी तैयारी और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। पार्टी नेतृत्व का लक्ष्य प्रदेशभर में संगठनात्मक ढांचे को अधिक प्रभावी और सक्रिय बनाना है।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल द्वारा जारी पत्र के बाद प्रशिक्षण शिविर की तैयारियां तेज हो गई हैं। राहुल गांधी के संभावित दौरे को लेकर कार्यकर्ताओं और नेताओं में उत्साह का माहौल है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कार्यक्रम केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके जरिए कांग्रेस आगामी चुनावों और राजनीतिक चुनौतियों को लेकर अपने संगठन को नई दिशा और ऊर्जा देने की कोशिश करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/preparation-to-sharpen-the-organization-in-chhattisgarh-congress-discussion-of/article-10368</link>
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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 10:33:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ममता बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें! राजनीतिक भाषण में सांप्रदायिक टिप्पणी का आरोप, शिकायत दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कोलकाता।</strong> पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख Mamata Banerjee के खिलाफ एक राजनीतिक भाषण को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। आरोप है कि वर्ष 2026 में दिए गए एक भाषण के दौरान उन्होंने ऐसी टिप्पणी की, जिसे शिकायतकर्ता ने सांप्रदायिक प्रकृति का बताया है।</p>
<p>मामले में कोलकाता के हेयर स्ट्रीट थाने में शिकायत दर्ज की गई है। पुलिस ने शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि की है और मामले की जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।</p>
<p>शिकायत दर्ज होने के बाद राज्य</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/politics/mamata-banerjees-troubles-increase-complaint-lodged-against-her-for-making/article-10339"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2025-11/mamata-banerjee-(2)-1764068627053.webp" alt=""></a><br /><p><strong>कोलकाता।</strong> पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख Mamata Banerjee के खिलाफ एक राजनीतिक भाषण को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। आरोप है कि वर्ष 2026 में दिए गए एक भाषण के दौरान उन्होंने ऐसी टिप्पणी की, जिसे शिकायतकर्ता ने सांप्रदायिक प्रकृति का बताया है।</p>
<p>मामले में कोलकाता के हेयर स्ट्रीट थाने में शिकायत दर्ज की गई है। पुलिस ने शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि की है और मामले की जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।</p>
<p>शिकायत दर्ज होने के बाद राज्य की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल इस मामले को लेकर टीएमसी नेतृत्व पर निशाना साध रहे हैं, जबकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</p>
<p>इसी बीच तृणमूल कांग्रेस को हाल के दिनों में कई राजनीतिक झटकों का सामना करना पड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्यसभा के कुछ सदस्यों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया है, जिससे पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिकायत और पार्टी के भीतर जारी घटनाक्रम आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति पर असर डाल सकते हैं। फिलहाल सभी की नजरें जांच एजेंसियों और मामले में होने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 16:18:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC में बढ़ी सियासी हलचल! राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक के इस्तीफे से ममता बनर्जी को बड़ा झटका</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है जब हाल ही में पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफों ने भी संगठन के भीतर हलचल बढ़ा दी है। लगातार हो रहे इस्तीफों से संसद के उच्च सदन में पार्टी की संख्या और राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।</p>
<p>जानकारी के अनुसार, प्रकाश चिक बड़ाईक ने राज्यसभा के सभापति को अपना इस्तीफा सौंपते हुए तत्काल प्रभाव से सदस्यता छोड़ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/politics/political-turmoil-increased-in-tmc-big-blow-to-mamata-banerjee/article-10307"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/tmc.webp" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है जब हाल ही में पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफों ने भी संगठन के भीतर हलचल बढ़ा दी है। लगातार हो रहे इस्तीफों से संसद के उच्च सदन में पार्टी की संख्या और राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।</p>
<p>जानकारी के अनुसार, प्रकाश चिक बड़ाईक ने राज्यसभा के सभापति को अपना इस्तीफा सौंपते हुए तत्काल प्रभाव से सदस्यता छोड़ने की इच्छा जताई है। अपने पत्र में उन्होंने राज्यसभा के सभापति, उपसभापति और सचिवालय के अधिकारियों का सहयोग और समर्थन के लिए आभार भी व्यक्त किया। उनके इस्तीफे के बाद राज्यसभा में टीएमसी के सांसदों की संख्या में कमी आने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p>राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि आने वाले दिनों में पार्टी के कुछ और सांसद इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लगातार सामने आ रही राजनीतिक गतिविधियों ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और असंतोष की अटकलों को और बल दिया है।<img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/2026-06/image---2026-06-11t105932.447-1781155787256.jpg" alt="image---2026-06-11T105932.447-1781155787256" width="650" height="915"></img></p>
<p>इस बीच, पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा कांग्रेस में संभावित विलय की अटकलों को खारिज किया गया है। बागी खेमे के नेताओं का कहना है कि यह पूरी तरह संगठन का आंतरिक मामला है और किसी अन्य दल में शामिल होने या विलय जैसी कोई योजना नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ कई विधायक जुड़े हुए हैं और वे जल्द ही अपनी स्थिति को लेकर औपचारिक कदम उठाएंगे।</p>
<p>उधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी संभावित विलय की चर्चाओं से दूरी बनाई है। वहीं हाल के दिनों में हुए अन्य इस्तीफों और नेताओं की राजनीतिक गतिविधियों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है, जिसका असर राज्य और राष्ट्रीय राजनीति दोनों पर पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:55:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
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