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                <title>राष्ट्रीय - National Jagat Vision</title>
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                            <item>
                <title>बंगाल में उपचुनाव से पहले ‘बम कांड’ से सनसनी! रेजीनगर में धमाका, कंटेनर से बरामद हुआ विस्फोटकों का जखीरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कोलकाता। </strong>पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में रेजीनगर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले धमाके की घटना ने इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार देर शाम बेलडांगा थाना क्षेत्र के नवा पुकुड़िया इलाके में अचानक जोरदार धमाका हुआ। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर एक कंटेनर से बड़ी संख्या में बम बरामद किए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि विस्फोट में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।</p>
<p>पुलिस के मुताबिक, धमाके की सूचना मिलने के बाद टीम तत्काल मौके पर पहुंची और इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू की।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/before-the-by-elections-in-bengal-there-was-a-sensation-due/article-12518"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/bengal-by-election-blast-1789552652363_v.webp" alt=""></a><br /><p><strong>कोलकाता। </strong>पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में रेजीनगर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले धमाके की घटना ने इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार देर शाम बेलडांगा थाना क्षेत्र के नवा पुकुड़िया इलाके में अचानक जोरदार धमाका हुआ। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर एक कंटेनर से बड़ी संख्या में बम बरामद किए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि विस्फोट में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।</p>
<p>पुलिस के मुताबिक, धमाके की सूचना मिलने के बाद टीम तत्काल मौके पर पहुंची और इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू की। शुरुआती जांच में जलाशय के पास एक कंटेनर में विस्फोटक सामग्री रखे होने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कंटेनर वहां किसने रखा था और बरामद बमों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था।</p>
<p><strong>तेज धमाके के बाद धुएं से भर गया इलाका</strong><br />स्थानीय लोगों के अनुसार, मंगलवार देर शाम अचानक तेज धमाके की आवाज सुनाई दी। आवाज इतनी जोरदार थी कि आसपास के लोग घटनास्थल की ओर पहुंच गए। मौके पर पहुंचने के बाद इलाके में धुआं दिखाई दिया और कुछ समय के लिए वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया।</p>
<p>स्थानीय लोगों ने दावा किया कि धमाके के समय तालाब के पास कुछ संदिग्ध लोग मौजूद थे और कथित तौर पर बम तैयार कर रहे थे। हालांकि, पुलिस की जांच पूरी होने से पहले इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। धमाके के बाद संदिग्ध लोग मौके से चले गए या नहीं, इस बारे में भी पुलिस जांच कर रही है।</p>
<p><strong>कंटेनर में रखे थे बम, ईंट गिरने से विस्फोट का शुरुआती अनुमान</strong><br />बेलडांगा थाने के एक अधिकारी के अनुसार, जलाशय के पास मिले कंटेनर में कई बम रखे हुए थे। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि ऊपर से कंटेनर पर एक ईंट गिरने के बाद उसमें रखे कुछ बमों में विस्फोट हो गया। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कंटेनर में विस्फोटक सामग्री कितनी मात्रा में थी और उसे वहां कब लाया गया था। बरामद सामग्री की प्रकृति और उसकी जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस ने जांच तेज कर दी है।</p>
<p><strong>उपचुनाव से पहले सुरक्षा पर उठे सवाल</strong><br />रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र में यह घटना ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम बंगाल में छह अक्टूबर को दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर और पूर्व मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट शामिल है। चुनाव से कुछ सप्ताह पहले विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पुलिस और प्रशासन के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि बरामद बमों को वहां किसने जमा किया और क्या इसका चुनावी गतिविधियों से कोई संबंध है।</p>
<p><strong>भाजपा ने लगाया विपक्षी गुटों पर आरोप</strong><br />घटना के बाद भाजपा के बहरमपुर संगठनात्मक जिले के अध्यक्ष मलय महाजन ने आरोप लगाया कि उपचुनाव से पहले विपक्षी दलों का एक धड़ा बम और हथियार जमा कर रहा है। उन्होंने घटना को चुनावी माहौल से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। हालांकि, यह राजनीतिक आरोप है और पुलिस की जांच में अभी तक यह स्थापित नहीं हुआ है कि बरामद विस्फोटक किसी राजनीतिक दल या चुनावी गतिविधि से जुड़े थे। पुलिस घटना के सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।</p>
<p><strong>पुलिस जांच में सामने आएगा पूरा सच</strong><br />फिलहाल, पुलिस ने घटनास्थल की जांच के साथ-साथ बरामद विस्फोटक सामग्री के स्रोत और उसे वहां रखने वालों का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच का एक अहम पहलू यह भी होगा कि विस्फोट आकस्मिक था या इसके पीछे कोई अन्य कारण था। उपचुनाव से पहले हुई इस घटना के कारण रेजीनगर क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। पुलिस की जांच और आगे सामने आने वाले तथ्यों से ही स्पष्ट होगा कि कंटेनर में बम किसने रखे थे और इस पूरी घटना का वास्तविक मकसद क्या था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 16:12:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Arabian Sea में आमने-सामने आए भारत-पाक के युद्धपोत! टक्कर के बाद नई दिल्ली में पाक राजनयिक तलब, 1991 समझौते का हवाला</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री क्षेत्र में एक गंभीर घटना सामने आई है। 15 सितंबर 2026 की शाम उत्तरी अरब सागर में पाकिस्तानी नौसेना का एक जहाज भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत के संपर्क में आया और दोनों के बीच टक्कर हुई। घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान के चार्ज डी'अफेयर्स को विदेश मंत्रालय में तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।</p>
<p>भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, घटना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। भारतीय नौसेना का युद्धपोत उस समय नियमित निगरानी मिशन पर था। भारत का आरोप है कि पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज तेज गति से भारतीय पोत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/pakistan-diplomat-summoned-to-new-delhi-after-india-pak-warships-collide/article-12516"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/india_pakistan_naval_units_collision_1789551784.webp" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री क्षेत्र में एक गंभीर घटना सामने आई है। 15 सितंबर 2026 की शाम उत्तरी अरब सागर में पाकिस्तानी नौसेना का एक जहाज भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत के संपर्क में आया और दोनों के बीच टक्कर हुई। घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान के चार्ज डी'अफेयर्स को विदेश मंत्रालय में तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।</p>
<p>भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, घटना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। भारतीय नौसेना का युद्धपोत उस समय नियमित निगरानी मिशन पर था। भारत का आरोप है कि पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज तेज गति से भारतीय पोत के करीब आया और असुरक्षित तथा गैर-पेशेवर तरीके से मैन्युवरिंग की, जिसके परिणामस्वरूप टक्कर हुई। हालांकि, घटना में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।</p>
<p><strong>पाकिस्तान के चार्ज डी'अफेयर्स को किया गया तलब</strong><br />घटना के एक दिन बाद 16 सितंबर यानी आज भारत के विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी हाई कमीशन के चार्ज डी'अफेयर्स को तलब किया। भारत ने उनके सामने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के कथित व्यवहार को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के राजनयिक से कहा कि संबंधित पाकिस्तानी अधिकारियों तक भारत की आपत्ति पहुंचाई जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सभी सैन्य इकाइयां समुद्र में पर्याप्त सावधानी बरतें। भारत ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच लागू संबंधित समझौतों के प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>इस्लामाबाद में भी विरोध दर्ज कराने के निर्देश</strong><br />भारत की प्रतिक्रिया सिर्फ नई दिल्ली तक सीमित नहीं रही। विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में तैनात भारत के चार्ज डी'अफेयर्स को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के समक्ष समान विरोध दर्ज कराने का निर्देश दिया है। इस तरह भारत ने राजनयिक माध्यमों से दोनों स्तरों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है, नई दिल्ली में पाकिस्तानी मिशन के वरिष्ठ राजनयिक को बुलाकर और इस्लामाबाद में भारतीय मिशन के माध्यम से।</p>
<p><strong>1991 के समझौते के अनुच्छेद 10 का हवाला</strong><br />भारत ने इस मामले में अप्रैल 1991 में हुए भारत-पाकिस्तान समझौते का भी हवाला दिया है। यह समझौता सैन्य अभ्यासों, युद्धाभ्यासों और सैनिकों की आवाजाही से जुड़ी अग्रिम सूचना व्यवस्था के लिए किया गया था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज का आचरण इस समझौते के अनुच्छेद 10 के सीधे उल्लंघन के दायरे में आता है। भारत ने कहा कि संबंधित समझौते के प्रावधानों का सम्मान करना दोनों पक्षों के लिए जरूरी है। यह समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच उन विश्वास-निर्माण उपायों का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य सैन्य गतिविधियों से जुड़ी गलतफहमी और अचानक पैदा होने वाले जोखिमों को कम करना है।</p>
<p><strong>भारतीय युद्धपोत रूटीन निगरानी मिशन पर था</strong><br />मीडिया रिपोर्टों और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, घटना के समय भारतीय नौसेना का एक फ्रंटलाइन युद्धपोत उत्तरी अरब सागर में नियमित निगरानी मिशन पर तैनात था। इसी दौरान पाकिस्तानी नौसेना का एक जहाज भारतीय पोत के काफी करीब आया। भारतीय पक्ष से सामने आई जानकारी के मुताबिक पाकिस्तानी जहाज तेज गति से आगे बढ़ रहा था और उसकी मैन्युवरिंग को असुरक्षित बताया गया है। इसी दौरान दोनों जहाजों के बीच टक्कर हुई। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में दोनों जहाजों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।</p>
<p><strong>ओमान के पास हुई घटना</strong><br />रिपोर्टों के मुताबिक, यह घटना ओमान से लगभग 220 किलोमीटर पूर्व उत्तरी अरब सागर के क्षेत्र में हुई। घटना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई थी। अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दो देशों की नौसैनिक इकाइयों की गतिविधियां विशेष रूप से संवेदनशील होती हैं। ऐसे इलाकों में सैन्य जहाजों को समुद्री सुरक्षा और टकराव से बचने के लिए निर्धारित नेविगेशन नियमों और सावधानियों का पालन करना होता है। भारत ने इसी संदर्भ में पाकिस्तानी जहाज की गतिविधियों को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।</p>
<p><strong>क्या जहाज को जानबूझकर टकराया गया?</strong><br />इस घटना को लेकर सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में जानबूझकर टक्कर की बात कही जा रही है, लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय के उपलब्ध बयान में इसे जानबूझकर किया गया हमला नहीं बताया गया है। भारत का आधिकारिक पक्ष पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के “अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर” व्यवहार तथा असुरक्षित मैन्युवरिंग पर केंद्रित है। इसलिए फिलहाल इसे जानबूझकर किया गया हमला कहना उपलब्ध आधिकारिक जानकारी से आगे जाना होगा।</p>
<p><strong>कोई बड़ा नुकसान नहीं, लेकिन घटना गंभीर</strong><br />विदेश मंत्रालय के मुताबिक, टक्कर के बावजूद कोई बड़ा नुकसान रिपोर्ट नहीं हुआ है। किसी बड़े भौतिक नुकसान या गंभीर जनहानि की सूचना भी सामने नहीं आई है। इसके बावजूद भारत ने घटना को गंभीरता से लिया है। वजह यह है कि समुद्र में दो सैन्य पोतों की नजदीकी और असुरक्षित मैन्युवरिंग से न केवल जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, बल्कि भारत-पाकिस्तान जैसे संवेदनशील द्विपक्षीय संबंधों में भी तनाव बढ़ सकता है।</p>
<p><strong>भारत-पाकिस्तान के बीच पहले भी हो चुका है ऐसा विवाद</strong><br />भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं के बीच समुद्र में जोखिमपूर्ण मैन्युवरिंग को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। विदेश मंत्रालय के पुराने रिकॉर्ड में 2011 में PNS Babur और INS Godavari से जुड़ी एक घटना का उल्लेख मिलता है, जिसमें भारत ने पाकिस्तानी नौसैनिक पोत की जोखिमपूर्ण गतिविधियों पर विरोध दर्ज कराया था। उस समय भी भारत ने समुद्री नेविगेशन सुरक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नियमों और 1991 के समझौते के अनुच्छेद 10 का हवाला दिया था। हालांकि, मौजूदा घटना अलग परिस्थितियों में हुई है और इसके बारे में उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।</p>
<p><strong>अरब सागर में नौसैनिक गतिविधियां क्यों महत्वपूर्ण हैं?</strong><br />अरब सागर भारत की समुद्री सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां भारतीय नौसेना की नियमित निगरानी और समुद्री सुरक्षा गतिविधियां चलती रहती हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान की नौसेना भी अपने समुद्री क्षेत्र और रणनीतिक हितों की सुरक्षा के लिए सक्रिय रहती है। ऐसे में दोनों देशों के सैन्य जहाजों का एक-दूसरे के करीब आना संवेदनशील स्थिति पैदा कर सकता है। खासकर तब, जब दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सुरक्षा संबंध पहले से तनावपूर्ण रहे हों। समुद्र में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संचार, सुरक्षित दूरी, नेविगेशन प्रोटोकॉल और द्विपक्षीय सैन्य समझौतों का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है।</p>
<p><strong>अब आगे क्या?</strong><br />भारत ने इस घटना पर अपनी आपत्ति राजनयिक माध्यमों से दर्ज कराई है। पाकिस्तान के चार्ज डी'अफेयर्स को तलब करने के अलावा इस्लामाबाद में भारतीय मिशन को भी समान विरोध दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पाकिस्तान इस घटना पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है और क्या दोनों देशों के बीच इस मामले को लेकर आगे कोई राजनयिक या सैन्य स्तर की बातचीत होती है।</p>
<p>फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि 15 सितंबर को उत्तरी अरब सागर में भारत और पाकिस्तान की नौसैनिक इकाइयों के बीच टक्कर हुई, कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और भारत ने पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज के कथित असुरक्षित एवं गैर-पेशेवर संचालन पर औपचारिक राजनयिक विरोध दर्ज कराया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 15:53:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजनीति का नया अंदाज! गिटार बजा रहे नेता, नुक्कड़ नाटक से छात्रों से संवाद; ‘छात्रों की गूंज’ के लिए Gen Z कनेक्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>इंदौर। </strong>कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के 19 सितंबर को इंदौर में प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने प्रचार अभियान को पारंपरिक राजनीतिक आयोजनों से अलग अंदाज में आगे बढ़ाया है। पार्टी कार्यकर्ता बड़े मंच, ढोल-नगाड़े और औपचारिक स्वागत कार्यक्रमों के बजाय कॉलेजों, हॉस्टलों और युवाओं के बीच पहुंचकर कार्यक्रम का न्योता दे रहे हैं।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/15/dbgifmagic-2026-09-15t211531142_1789487128.gif" alt="dbgifmagic-2026-09-15t211531142_1789487128.gif" /></p>
<p>इस प्रचार अभियान में गिटार, संगीत, डांस और नुक्कड़ नाटक जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। नेता और कार्यकर्ता अनौपचारिक कपड़ों में युवाओं से बातचीत कर रहे हैं और उन्हें 19 सितंबर के कार्यक्रम में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/politics/new-style-of-politics-leader-playing-guitar-communicating-with-students/article-12510"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/image5.png" alt=""></a><br /><p><strong>इंदौर। </strong>कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के 19 सितंबर को इंदौर में प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने प्रचार अभियान को पारंपरिक राजनीतिक आयोजनों से अलग अंदाज में आगे बढ़ाया है। पार्टी कार्यकर्ता बड़े मंच, ढोल-नगाड़े और औपचारिक स्वागत कार्यक्रमों के बजाय कॉलेजों, हॉस्टलों और युवाओं के बीच पहुंचकर कार्यक्रम का न्योता दे रहे हैं।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/15/dbgifmagic-2026-09-15t211531142_1789487128.gif" alt="dbgifmagic-2026-09-15t211531142_1789487128.gif"></img></p>
<p>इस प्रचार अभियान में गिटार, संगीत, डांस और नुक्कड़ नाटक जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। नेता और कार्यकर्ता अनौपचारिक कपड़ों में युवाओं से बातचीत कर रहे हैं और उन्हें 19 सितंबर के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। कांग्रेस की ओर से इसे युवाओं और छात्रों के बीच सीधे संवाद की कोशिश के तौर पर पेश किया जा रहा है।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/15/dbgifmagic_-_2026-09-15t214042_292_1789488925647.gif" alt="इस तरह गिटार बजाकर दिया जा रहा युवाओं को न्योता। बाजू में टीशर्ट में खड़ी रीना बौरासी।"></img></p>
<p><strong>पारंपरिक प्रचार से अलग दिख रहा अभियान</strong><br />आमतौर पर किसी बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के प्रचार में पोस्टर, बैनर, रैलियां, बड़े मंच और नेताओं के औपचारिक दौरे नजर आते हैं। लेकिन इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ के लिए चलाए जा रहे अभियान में छोटे समूहों के बीच संवाद और सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रमुखता दी जा रही है। युवा कलाकारों की टीम अलग-अलग स्थानों पर पहुंचती है। वहां गिटार के साथ गीत, डांस और नुक्कड़ नाटक के जरिए छात्रों से जुड़े मुद्दों को सामने रखा जाता है। इसके बाद कांग्रेस के नेता युवाओं से बातचीत करते हुए कार्यक्रम की जानकारी देते हैं। इस तरह प्रचार का फोकस केवल पोस्टर या भाषण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि मनोरंजन, कला और प्रत्यक्ष संवाद को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/15/dbgifmagic_-_2026-09-15t214006_533_1789488960137.gif" alt="इस तरह बुला रहे युवाओं को।"></img></p>
<p><strong>गिटार, गाने और नुक्कड़ नाटक के जरिए युवाओं से संपर्क </strong><br />कांग्रेस के कार्यकर्ता कॉलेज, हॉस्टल और युवाओं की मौजूदगी वाले अलग-अलग स्थानों पर छोटी गतिविधियां आयोजित कर रहे हैं। इन कार्यक्रमों में कलाकार गिटार बजाते और गाने प्रस्तुत करते हैं। वहीं नुक्कड़ नाटक के जरिए छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की जाती है। इसके बाद कार्यकर्ता छात्रों को बताते हैं कि 19 सितंबर को राहुल गांधी इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्रों से संवाद करेंगे। राहुल गांधी ने भी छात्रों को कार्यक्रम से जुड़ने का आह्वान किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों से उनकी शिक्षा, करियर और व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं पर बातचीत करना है।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/15/dbgifmagic_-_2026-09-15t213924_349_1789489028471.gif" alt="नुक्कड़ नाटक करके बुलावा दिया जा रहा है।"></img></p>
<p><strong>जींस-टीशर्ट में युवाओं के बीच पहुंच रहे नेता</strong><br />अभियान की एक खास बात नेताओं का अनौपचारिक अंदाज भी बताया जा रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता जींस-टीशर्ट जैसे कैजुअल परिधान में युवाओं के बीच पहुंच रहे हैं। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी भी इस अभियान में सक्रिय नजर आ रही हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, वे कलाकारों और नुक्कड़ नाटक की टीम के साथ युवाओं के बीच जाकर संवाद कर रही हैं। खासतौर पर छात्राओं से बातचीत कर उन्हें कार्यक्रम से जुड़ने का न्योता दिया जा रहा है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और एनएसयूआई के प्रदेश प्रभारी रवि दांगी समेत अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता भी छात्रों से संपर्क अभियान में शामिल हैं।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/15/dbgifmagic_-_2026-09-15t213846_258_1789489114481.gif" alt="कांग्रेस ने भी अपना एक वीडियो जारी किया है।"></img></p>
<p><strong>कहीं खेल, कहीं छोटे कार्यक्रमों से संवाद</strong><br />युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए केवल संगीत और नुक्कड़ नाटक का ही इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। अलग-अलग जगहों पर छोटे कार्यक्रम और खेल गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। कांग्रेस का जोर ऐसे माहौल पर है, जिसमें छात्र और युवा बिना किसी बड़े मंच या औपचारिक राजनीतिक सभा के नेताओं से बातचीत कर सकें। पार्टी के इस अभियान में युवाओं को सीधे कार्यक्रम की जानकारी देने और उन्हें इंदौर के आयोजन से जोड़ने पर जोर दिखाई दे रहा है।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/15/dbgifmagic_-_2026-09-15t214833_313_1789489231687.gif" alt="dbgifmagic_-_2026-09-15t214833_313_1789489231687.gif"></img></p>
<p><strong>मैदान में छात्रों ने लिखा- ‘छात्रों की गूंज’</strong><br />प्रचार अभियान के दौरान छात्रों की भागीदारी से जुड़ा एक दृश्य भी सामने आया। विद्यार्थियों ने मैदान में ‘छात्रों की गूंज’ लिखकर कार्यक्रम के प्रति अपनी रुचि जताई। कांग्रेस इसे छात्रों के बीच अभियान को मिल रहे रिस्पॉन्स के तौर पर देख रही है। हालांकि, किसी कार्यक्रम में भागीदारी या पंजीकरण के आंकड़े को व्यापक छात्र समर्थन का प्रत्यक्ष प्रमाण मानने के लिए स्वतंत्र आंकड़ों की जरूरत होगी। रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस ने कार्यक्रम के लिए बड़ी संख्या में छात्रों के पंजीकरण का दावा किया है।</p>
<p><strong>पोस्टरों में पार्टी के बजाय कार्यक्रम पर जोर</strong><br />इंदौर में लगाए गए पोस्टरों को लेकर भी चर्चा है। उपलब्ध रिपोर्टिंग के अनुसार, कई पोस्टरों में कांग्रेस का नाम प्रमुखता से नहीं दिया गया है। नेताओं की तस्वीरें दिखाई दे रही हैं, लेकिन उनके राजनीतिक पदों का उल्लेख भी प्रमुखता से नहीं किया गया। इससे प्रचार सामग्री का फोकस सीधे ‘छात्रों की गूंज’ नाम और छात्र-केंद्रित कार्यक्रम पर रखने की रणनीति के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, यह पार्टी की आधिकारिक रणनीति है या स्थानीय स्तर पर तैयार प्रचार सामग्री का फैसला, इसकी पुष्टि अलग से जरूरी है।</p>
<p><strong>राहुल गांधी का 19 सितंबर को कार्यक्रम</strong><br />‘छात्रों की गूंज’ का इंदौर संस्करण 19 सितंबर को आयोजित होना है। यह इस श्रृंखला का पांचवां कार्यक्रम बताया गया है। इससे पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। राहुल गांधी ने कार्यक्रम को छात्रों की आवाज और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर संवाद का मंच बताया है। कांग्रेस की ओर से पेपर लीक, शिक्षा की लागत, भर्ती और रोजगार जैसे विषयों को युवाओं से जुड़े प्रमुख मुद्दों के रूप में उठाया जा रहा है।</p>
<p><strong>कार्यक्रम स्थल को लेकर भी बदली व्यवस्था</strong><br />इंदौर में कार्यक्रम की तैयारियों के दौरान आयोजन स्थल को लेकर भी बदलाव हुआ। शुरुआती तौर पर नेहरू स्टेडियम में कार्यक्रम कराने की तैयारी थी, लेकिन अनुमति से जुड़ी स्थिति के बाद आयोजन के लिए वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था की गई। रिपोर्टों के मुताबिक, इंदौर विकास प्राधिकरण ने रीजनल पार्क के पास करीब 12,000 वर्ग मीटर क्षेत्र कार्यक्रम के लिए अस्थायी तौर पर उपलब्ध कराया है। कार्यक्रम के लिए करीब 10 लाख रुपये की राशि जमा किए जाने की भी रिपोर्ट है। कांग्रेस ने पहले अनुमति में देरी को लेकर सवाल उठाए थे, जबकि प्रशासनिक स्तर पर कार्यक्रम स्थल और अनुमति की प्रक्रिया को लेकर अलग जानकारी सामने आई है। इसलिए इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग देखना जरूरी है।</p>
<p><strong>कार्यक्रम की सफलता के लिए यज्ञ-हवन की तैयारी</strong><br />कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस नेताओं और आयोजकों की ओर से धार्मिक आयोजन की भी तैयारी की गई है। राजवाड़ा स्थित प्राचीन वनखंडी हनुमान मंदिर परिसर में यज्ञ, हवन और पूजन का कार्यक्रम रखा गया है। आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम से जुड़ी कुछ प्रशासनिक और अनुमति संबंधी बाधाओं के समाधान तथा आयोजन की सफलता की कामना के लिए यह पूजन किया जाएगा। आयोजकों ने अनुमति प्रक्रिया में देरी और कथित अतिरिक्त राशि जैसी समस्याओं के आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों पर संबंधित प्रशासनिक पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट होगी।</p>
<p><strong>युवाओं से संवाद पर केंद्रित कार्यक्रम</strong><br />‘छात्रों की गूंज’ के इंदौर संस्करण में कांग्रेस का फोकस छात्रों और युवाओं से सीधे बातचीत पर है। कार्यक्रम से पहले जिस तरह का प्रचार अभियान चलाया जा रहा है, उसमें राजनीतिक सभा के पारंपरिक तरीकों की तुलना में संगीत, कला, खेल और छोटे समूहों में संवाद को अधिक जगह दी गई है। 19 सितंबर को होने वाले कार्यक्रम में इन अभियानों से जुड़े छात्र कितनी संख्या में पहुंचते हैं और राहुल गांधी के साथ संवाद में किन मुद्दों को प्रमुखता मिलती है, इस पर अब नजर रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 13:53:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Odisha News: मयूरभंज में मिला ‘BAN-2024’ टैग वाला कबूतर, बांग्लादेश कनेक्शन की जांच में जुटी पुलिस</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Mayurbhanj Pigeon News: </strong>ओडिशा के मयूरभंज जिले में एक कबूतर के पैर में धातु की रिंग और उस पर दर्ज विदेशी पहचान जैसे कोड मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। यह कबूतर मंगलवार को काशीपाड़ा गांव, बैसिंगा थाना क्षेत्र में मिला। कबूतर के पैर में लगी नीले रंग की धातु की रिंग पर ‘BAN-2024’ और ‘701831’ अंकित बताया गया है। इस कोड में ‘BAN’ लिखे होने के कारण स्थानीय स्तर पर इसे बांग्लादेश से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी तक पुलिस ने यह पुष्टि नहीं की है कि कबूतर वास्तव में बांग्लादेश से आया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/odisha-news-pigeon-with-ban-2024-tag-found-in-mayurbhanj-police/article-12509"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/kabootar-1789539737528_v.webp" alt=""></a><br /><p><strong>Mayurbhanj Pigeon News: </strong>ओडिशा के मयूरभंज जिले में एक कबूतर के पैर में धातु की रिंग और उस पर दर्ज विदेशी पहचान जैसे कोड मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। यह कबूतर मंगलवार को काशीपाड़ा गांव, बैसिंगा थाना क्षेत्र में मिला। कबूतर के पैर में लगी नीले रंग की धातु की रिंग पर ‘BAN-2024’ और ‘701831’ अंकित बताया गया है। इस कोड में ‘BAN’ लिखे होने के कारण स्थानीय स्तर पर इसे बांग्लादेश से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी तक पुलिस ने यह पुष्टि नहीं की है कि कबूतर वास्तव में बांग्लादेश से आया है या नहीं?</p>
<p>घटना की सूचना मिलने के बाद बेटनटी एसडीपीओ मिनाती बिस्वाल और बैसिंगा थाना प्रभारी बाबाशंकर सराफ समेत पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर कबूतर और उसके पैर में लगे टैग की जांच की। पुलिस अब रिंग पर दर्ज कोड और नंबर के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह पहचान चिह्न किस संस्था, कबूतर पालन समूह या रेसिंग नेटवर्क से जुड़ा है।</p>
<p><strong>गांव में कैसे मिला टैग वाला कबूतर?</strong><br />स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, काशीपाड़ा गांव में एक परिवार के सदस्यों की नजर कबूतर पर पड़ी। कबूतर के पैर में सामान्य पक्षियों से अलग दिखाई देने वाली धातु की रिंग लगी थी। जब लोगों ने रिंग को करीब से देखा तो उस पर अंग्रेजी अक्षरों और अंकों में ‘BAN-2024’ तथा ‘701831’ लिखा मिला। इसके बाद ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। बताया गया है कि स्थानीय निवासी के बेटे ने कबूतर को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने कबूतर को अपने कब्जे में लेकर रिंग पर दर्ज विवरण की जांच शुरू की।</p>
<p><strong>‘BAN-2024’ ने क्यों बढ़ाई पुलिस की दिलचस्पी?</strong><br />मामले में सबसे ज्यादा ध्यान रिंग पर लिखे ‘BAN-2024’ को लेकर है। ‘BAN’ को कुछ स्थानीय लोगों ने Bangladesh से जोड़कर देखा। इसी वजह से सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर यह चर्चा शुरू हो गई कि संभव है कि कबूतर पड़ोसी देश से आया हो। हालांकि, केवल ‘BAN’ लिखे होने के आधार पर कबूतर का बांग्लादेश से होना साबित नहीं होता। यह किसी ब्रीडिंग, रेसिंग या पक्षी-पंजीकरण व्यवस्था का कोड भी हो सकता है। पुलिस फिलहाल इसी संभावना सहित कई पहलुओं की जांच कर रही है।</p>
<p><strong>701831 नंबर का क्या है मतलब?</strong><br />रिंग पर ‘701831’ नंबर भी दर्ज है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार पुलिस अभी इस संख्या के वास्तविक अर्थ या स्रोत की पुष्टि नहीं कर पाई है। जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि यह नंबर किसी पक्षी की यूनिक आईडी है, किसी क्लब या संगठन का पंजीकरण नंबर है अथवा किसी रेसिंग/ब्रीडिंग कार्यक्रम से जुड़ा कोड है। अगर पुलिस को इस नंबर का रिकॉर्ड किसी संस्था या डेटाबेस में मिलता है तो कबूतर के मूल स्थान और उसकी यात्रा से जुड़ी जानकारी सामने आ सकती है।</p>
<p><strong>क्या कबूतर बांग्लादेश से आया है?</strong><br />इसका कोई पुख्ता प्रमाण सामने नहीं आया है। स्थानीय स्तर पर बांग्लादेश कनेक्शन की आशंका जरूर जताई जा रही है, लेकिन पुलिस ने अभी कबूतर के वास्तविक स्रोत की पुष्टि नहीं की है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी इसे केवल प्रारंभिक संदेह के तौर पर बताया गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कबूतर कहां से आया, उसके पैर में रिंग किसने लगाई और ‘BAN-2024’ का वास्तविक अर्थ क्या है। जरूरत पड़ने पर संबंधित एजेंसियों या विशेषज्ञों से भी जानकारी ली जा सकती है।</p>
<p><strong>गांव में अफवाहों का बाजार गर्म</strong><br />कबूतर के पैर में विदेशी पहचान जैसा टैग मिलने की खबर फैलते ही गांव में इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटने लगी। कुछ लोगों ने इसे बांग्लादेश से जोड़ना शुरू कर दिया, जबकि कुछ ग्रामीणों के बीच पक्षी के जरिए किसी गोपनीय गतिविधि की आशंका को लेकर भी चर्चाएं होने लगीं। हालांकि, किसी जासूसी या गैरकानूनी गतिविधि का अभी कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले ऐसी अटकलों को तथ्य मानना उचित नहीं होगा।</p>
<p><strong>कबूतर रेसिंग या ब्रीडिंग से भी हो सकता है संबंध</strong><br />पुलिस जांच का एक सामान्य और व्यावहारिक पहलू यह भी है कि कबूतर किसी रेसिंग, ब्रीडिंग या कबूतर पालन कार्यक्रम से जुड़ा हो सकता है। ऐसे मामलों में पक्षियों की पहचान के लिए पैरों में रिंग या टैग लगाए जाते हैं। इसलिए रिंग पर लिखा ‘BAN-2024’ अपने आप में विदेशी स्रोत का निर्णायक प्रमाण नहीं है। पुलिस के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इस विशेष कोड का रिकॉर्ड कहां मिलता है और क्या ‘701831’ से कबूतर की पहचान या उसके मालिक तक पहुंचा जा सकता है।</p>
<p><strong>पुलिस के सामने ये बड़े सवाल</strong><br />जांच में पुलिस मुख्य रूप से कुछ अहम सवालों के जवाब तलाश रही है </p>
<ul>
<li>कबूतर वास्तव में कहां से आया?</li>
<li>‘BAN-2024’ का क्या मतलब है?</li>
<li>रिंग पर लिखा 701831 किसकी पहचान है?</li>
<li>टैग कब और किसने लगाया?</li>
<li>क्या यह किसी कबूतर रेसिंग या ब्रीडिंग संस्था से जुड़ा है?</li>
<li>कबूतर का कोई मालिक या पंजीकरण रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं?</li>
<li>क्या यह सामान्य पक्षी है या किसी विशेष नेटवर्क से जुड़ा हुआ है?</li>
</ul>
<p>इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।</p>
<p><strong>फिलहाल जांच जारी, निष्कर्ष का इंतजार</strong><br />मयूरभंज पुलिस ने कबूतर और उसके पैर में लगे टैग को जांच का हिस्सा बनाया है। अधिकारियों द्वारा रिंग पर दर्ज कोड और नंबर की जानकारी जुटाई जा रही है। अभी तक पुलिस ने यह पुष्टि नहीं की है कि कबूतर बांग्लादेश से आया था या उसका किसी संदिग्ध गतिविधि से संबंध है। इसलिए फिलहाल इस घटना को ‘विदेशी टैग वाला कबूतर मिलने और उसके स्रोत की जांच’ के रूप में देखा जाना अधिक उचित है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ‘BAN-2024’ महज किसी पक्षी-पंजीकरण या रेसिंग व्यवस्था का कोड है या इसके पीछे कोई अन्य वजह है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 12:40:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Promotion से ज्यादा Peace जरूरी! Gen Z क्यों ठुकरा रहा Manager बनने का मौका? ‘Conscious Unbossing’ के पीछे छिपी है नई Career Thinking </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>नौकरी में प्रमोशन को लंबे समय से करियर की सफलता का सबसे बड़ा संकेत माना जाता रहा है। बेहतर पद, ज्यादा सैलरी, बड़ी टीम और निर्णय लेने की ताकत, ये सभी चीजें किसी कर्मचारी के प्रोफेशनल ग्रोथ की पहचान मानी जाती थीं। लेकिन अब वर्कप्लेस की नई पीढ़ी यानी Gen Z इस पारंपरिक करियर सीढ़ी को अपनी शर्तों पर देख रही है।</p>
<p>Gen Z काम से भागना नहीं चाहती। वह मेहनत करना चाहती है, अपनी स्किल्स विकसित करना चाहती है और अपने काम का उचित क्रेडिट भी चाहती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इसके लिए उसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/peace-is-more-important-than-promotion-why-is-gen-z/article-12489"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/266379ac-f09d-4035-b473-da4925ed1f3c.png" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>नौकरी में प्रमोशन को लंबे समय से करियर की सफलता का सबसे बड़ा संकेत माना जाता रहा है। बेहतर पद, ज्यादा सैलरी, बड़ी टीम और निर्णय लेने की ताकत, ये सभी चीजें किसी कर्मचारी के प्रोफेशनल ग्रोथ की पहचान मानी जाती थीं। लेकिन अब वर्कप्लेस की नई पीढ़ी यानी Gen Z इस पारंपरिक करियर सीढ़ी को अपनी शर्तों पर देख रही है।</p>
<p>Gen Z काम से भागना नहीं चाहती। वह मेहनत करना चाहती है, अपनी स्किल्स विकसित करना चाहती है और अपने काम का उचित क्रेडिट भी चाहती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इसके लिए उसे लगातार बढ़ती जिम्मेदारियां, लंबे काम के घंटे, टीम मैनेजमेंट और हर समय उपलब्ध रहने का दबाव भी स्वीकार करना जरूरी है? कई युवा कर्मचारियों का जवाब है, जरूरी नहीं। यही सोच अब प्रमोशन को लेकर एक नए वर्कप्लेस ट्रेंड को जन्म दे रही है, जिसे 'Conscious Unbossing' कहा जा रहा है। इसका सीधा मतलब है कि कर्मचारी जानबूझकर मैनेजर या बॉस बनने की दिशा में आगे बढ़ने से इनकार कर रहा है, भले ही उसके सामने प्रमोशन का मौका क्यों न हो ?</p>
<p><strong>प्रमोशन मिला, लेकिन कर्मचारी ने कर दिया 'No'</strong><br />पारंपरिक कॉर्पोरेट संस्कृति में अगर किसी कर्मचारी को मैनेजर बनने का मौका मिलता था तो इसे उपलब्धि माना जाता था। लेकिन Gen Z के एक हिस्से के लिए अब सवाल अलग है, 'क्या मुझे सच में मैनेजर बनना है?' कई युवा कर्मचारी मानते हैं कि प्रमोशन के साथ केवल पद नहीं बढ़ता, बल्कि जिम्मेदारियां भी कई गुना बढ़ सकती हैं। टीम के प्रदर्शन की जवाबदेही, कर्मचारियों के बीच विवाद सुलझाना, लगातार मीटिंग्स, डेडलाइन, क्लाइंट का दबाव और वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्टिंग, इन सबका बोझ भी नए पद के साथ आ सकता है। ऐसे में कुछ कर्मचारी यह हिसाब लगाने लगे हैं कि प्रमोशन के साथ मिलने वाली अतिरिक्त सैलरी वास्तव में बढ़े हुए तनाव और जिम्मेदारियों की भरपाई करती है या नहीं। अगर जवाब 'नहीं' है, तो वे प्रमोशन लेने के बजाय अपनी मौजूदा भूमिका में रहकर बेहतर प्रदर्शन करना पसंद कर रहे हैं।</p>
<p><strong>चीन से सामने आया नया वर्कप्लेस ट्रेंड</strong><br />इस बदलती सोच का एक उदाहरण चीन के वर्कप्लेस से सामने आया है, जहां कुछ युवा कर्मचारी मैनेजमेंट पदों पर जाने से बच रहे हैं। सोशल मीडिया पर बॉस को प्रमोशन के लिए मना करने वाली स्क्रिप्ट और सलाह तक शेयर की जा रही हैं। इन कर्मचारियों की सोच का आधार यह है कि करियर में आगे बढ़ने का एक ही रास्ता मैनेजर बनना नहीं है। वे अपनी विशेषज्ञता वाले क्षेत्र में बेहतर बनना, नई स्किल्स सीखना, अपनी आय बढ़ाना और काम के बाहर अपनी जिंदगी के लिए पर्याप्त समय बचाना चाहते हैं। यानी करियर का मतलब अब हर कर्मचारी के लिए 'Junior से Senior और फिर Manager' वाली सीधी सीढ़ी नहीं रह गया है।</p>
<p><strong>Robert Walters की रिसर्च ने भी दिखाई तस्वीर</strong><br />2025 में Robert Walters की ओर से जारी रिसर्च में Gen Z के मैनेजमेंट को लेकर बदलते नजरिए की तस्वीर सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, 54% Gen Z professionals ने कहा कि वे अपने करियर में मैनेजर नहीं बनना चाहते। वहीं, 71% लोगों ने दूसरों को मैनेज करने के बजाय अपने करियर और स्किल्स पर फोकस करने की प्राथमिकता जताई। रिसर्च में 65% Gen Z respondents ने middle management को ज्यादा तनाव और कम फायदे वाला रोल बताया। दूसरी ओर, 89% employers अब भी मानते हैं कि किसी संगठन के लिए middle managers की भूमिका महत्वपूर्ण है। यहीं से कंपनियों और कर्मचारियों के बीच एक नया gap दिखाई देता है। कंपनियों को ऐसे लोगों की जरूरत है जो टीम संभालें, फैसले लें और जूनियर कर्मचारियों को लीड करें। लेकिन कर्मचारियों का एक हिस्सा पूछ रहा है, 'अगर इस जिम्मेदारी के बदले मेरी जिंदगी ज्यादा तनावपूर्ण होनी है, तो मैं यह भूमिका क्यों लूं?'</p>
<p><strong>Gen Z को काम से नहीं, 'Always Available' रहने से दिक्कत?</strong><br />Gen Z को लेकर अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि यह पीढ़ी मेहनत नहीं करना चाहती। लेकिन इस ट्रेंड को केवल 'कामचोरी' के नजरिए से देखना शायद सही तस्वीर नहीं देता। असल बदलाव यह है कि Gen Z काम और निजी जिंदगी के बीच स्पष्ट सीमा चाहती है। इस पीढ़ी का एक वर्ग यह मानता है कि नौकरी जरूरी है, लेकिन नौकरी के लिए अपनी पूरी जिंदगी को नौकरी के हवाले कर देना जरूरी नहीं। ऑफिस का काम ऑफिस तक सीमित रहे और निजी समय निजी रहे, यह अपेक्षा अब ज्यादा मजबूत हो रही है। इसलिए समस्या केवल ज्यादा काम की नहीं है। समस्या उस संस्कृति से भी है जिसमें कर्मचारी से उम्मीद की जाती है कि वह छुट्टी, वीकेंड या ऑफिस टाइम के बाद भी फोन, मैसेज और ईमेल का जवाब देता रहे।</p>
<p><strong>'बड़ा पद' अब सफलता का एकमात्र पैमाना नहीं</strong><br />पुरानी वर्क कल्चर में करियर की सफलता का फॉर्मूला अपेक्षाकृत सीधा था- पदोन्नति + ज्यादा सैलरी + बड़ी टीम = सफलता। Gen Z इस फॉर्मूले में कई नए सवाल जोड़ रही है।</p>
<ul>
<li>क्या नौकरी मुझे पर्याप्त पैसा दे रही है?</li>
<li>क्या मेरे पास अपनी जिंदगी के लिए समय है?</li>
<li>क्या मैं नई स्किल सीख पा रहा हूं?</li>
<li>क्या मेरे काम की वैल्यू और पहचान मिल रही है?</li>
<li>क्या मुझे हर समय तनाव में रहना पड़ेगा?</li>
<li>और सबसे महत्वपूर्ण—क्या इस प्रमोशन के बाद मेरी जिंदगी बेहतर होगी या सिर्फ मेरा designation?</li>
</ul>
<p>यही सवाल Conscious Unbossing को समझने की कुंजी है।</p>
<p><strong>पैसे से ज्यादा Work-Life Balance?</strong><br />इसका मतलब यह नहीं है कि Gen Z के लिए पैसा महत्वपूर्ण नहीं है। बेहतर सैलरी आज भी करियर के सबसे बड़े कारणों में से एक है। लेकिन केवल सैलरी के बदले अत्यधिक तनाव स्वीकार करने की इच्छा कम होती दिखाई दे रही है। एक युवा कर्मचारी के लिए 20 फीसदी ज्यादा सैलरी का मतलब तभी आकर्षक हो सकता है, जब उसके बदले उसे 50 फीसदी ज्यादा तनाव, लगातार मीटिंग्स और काम के बाद भी उपलब्ध रहने की स्थिति न झेलनी पड़े। यही कारण है कि कई युवा कर्मचारी flexibility, autonomy, learning opportunities और work-life balance को भी compensation package का हिस्सा मानकर देखने लगे हैं।</p>
<p><strong>'Individual Contributor' बनना भी Career Growth है</strong><br />कॉर्पोरेट दुनिया में करियर ग्रोथ को अक्सर management track से जोड़ा जाता है। लेकिन अब एक दूसरा रास्ता भी ज्यादा चर्चा में है, Individual Contributor (IC) career path. इस मॉडल में कर्मचारी किसी टीम का मैनेजर बने बिना अपने technical या professional expertise में आगे बढ़ सकता है। उदाहरण के लिए कोई software engineer senior या principal engineer बन सकता है, कोई designer design specialist बन सकता है और कोई finance professional अपने domain का expert बन सकता है।इस तरह कर्मचारी को seniority और बेहतर compensation मिल सकती है, लेकिन जरूरी नहीं कि उसे बड़ी टीम के लोगों को manage करना पड़े। Gen Z के लिए यह मॉडल इसलिए आकर्षक हो सकता है क्योंकि इसमें career growth और people management को अलग-अलग चीजों के रूप में देखा जा सकता है।</p>
<p><strong>'No' कहना भी एक Career Decision है</strong><br />किसी प्रमोशन को मना करना हमेशा महत्वाकांक्षा की कमी नहीं होती। कई बार यह व्यक्ति की प्राथमिकताओं और करियर प्लान का हिस्सा हो सकता है। कोई कर्मचारी अभी management responsibility लेने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन कुछ साल बाद लेना चाहता है। कोई अपने technical skills को मजबूत करना चाहता है। कोई family या personal priorities के कारण कम दबाव वाली भूमिका चाहता है। इसलिए Gen Z के लिए 'No' कहना हमेशा 'मैं आगे नहीं बढ़ना चाहता' नहीं है। कई बार इसका मतलब होता है, 'मैं आपके बताए रास्ते पर आगे नहीं बढ़ना चाहता, लेकिन अपने रास्ते पर जरूर बढ़ना चाहता हूं।'</p>
<p><strong>कंपनियों के लिए भी बड़ा सवाल</strong><br />यह ट्रेंड केवल कर्मचारियों की पसंद का मुद्दा नहीं है। कंपनियों के लिए भी यह एक चुनौती है। अगर ज्यादा कर्मचारी management roles से बचने लगते हैं तो कंपनियों को future managers तैयार करने में मुश्किल हो सकती है। दूसरी ओर, अगर कर्मचारियों को बिना उनकी इच्छा के management track पर धकेला जाता है तो वे burnout, dissatisfaction या नौकरी छोड़ने की तरफ जा सकते हैं। इसलिए कंपनियों को career growth की परिभाषा को बदलने की जरूरत पड़ सकती है। हर अच्छे कर्मचारी को manager बनाना जरूरी नहीं। कई बार किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी ताकत लोगों को manage करना नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र में असाधारण expertise हासिल करना हो सकती है।</p>
<p><strong>आखिर Gen Z क्या चाहती है?</strong><br />सीधी भाषा में समझें तो Gen Z का संदेश कुछ ऐसा है- 'मैं काम करूंगा, लेकिन अपनी जिंदगी की कीमत पर नहीं।' 'मैं आगे बढ़ूंगा, लेकिन जरूरी नहीं कि बॉस बनकर।' 'मुझे ज्यादा कमाना है, लेकिन ज्यादा तनाव लेकर नहीं।' और शायद सबसे महत्वपूर्ण 'Promote me because I am good at my work, not because I want to manage everyone.' यही बदलती सोच आने वाले वर्षों में कंपनियों के career structures को भी प्रभावित कर सकती है। भविष्य का सफल कर्मचारी केवल वह नहीं होगा जो सबसे ऊंचे पद पर पहुंच जाए, बल्कि वह भी हो सकता है जो अपने लिए सही भूमिका, सही जिम्मेदारी और सही जीवन-संतुलन चुन सके।</p>
<p>Conscious Unbossing को केवल 'Gen Z प्रमोशन से डरती है' कहकर समझना अधूरा होगा। यह असल में करियर सफलता की बदलती परिभाषा की कहानी है। जहां पिछली पीढ़ियों के लिए 'बॉस बनना' उपलब्धि का प्रतीक था, वहीं आज का युवा पूछ रहा है, 'क्या यह भूमिका मेरे करियर और मेरी जिंदगी दोनों के लिए सही है?' शायद आने वाले समय में ऑफिस में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होगा कि 'आपको अगला प्रमोशन कब चाहिए?' बल्कि यह होगा 'आप अपने करियर में किस तरह की ग्रोथ चाहते हैं?'</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 16:03:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Blood For Mobile EMI: मोबाइल की EMI नहीं चुकाई तो युवक को बनाया बंधक! खून बेचने के लिए ब्लड बैंक ले जाने का आरोप, पुलिस पर भी उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>लखनऊ। </strong>उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से मोबाइल की EMI वसूली को लेकर कथित प्रताड़ना का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। निगोहां थाना क्षेत्र के राजारामखेड़ा गांव के रहने वाले नेवल के परिवार ने आरोप लगाया है कि मोबाइल की किश्त का भुगतान न होने पर कुछ लोगों ने युवक को जबरन अपने साथ ले जाकर बंधक बना लिया। परिवार का दावा है कि उसे ब्लड बैंक ले जाकर जबरन एक यूनिट खून निकलवाया गया और इसके बाद कई दिनों तक एक मकान में कैद रखकर उससे मजदूरी कराई गई।</p>
<p>मामला तब और गंभीर हो गया जब परिजनों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/crime/blood-for-mobile-emi-young-man-held-hostage-for-not/article-12486"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/lucknow_mobile_emi_forced_blood_extraction_news_1789455668.webp" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ। </strong>उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से मोबाइल की EMI वसूली को लेकर कथित प्रताड़ना का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। निगोहां थाना क्षेत्र के राजारामखेड़ा गांव के रहने वाले नेवल के परिवार ने आरोप लगाया है कि मोबाइल की किश्त का भुगतान न होने पर कुछ लोगों ने युवक को जबरन अपने साथ ले जाकर बंधक बना लिया। परिवार का दावा है कि उसे ब्लड बैंक ले जाकर जबरन एक यूनिट खून निकलवाया गया और इसके बाद कई दिनों तक एक मकान में कैद रखकर उससे मजदूरी कराई गई।</p>
<p>मामला तब और गंभीर हो गया जब परिजनों ने आरोप लगाया कि युवक को छोड़ने के बदले उनसे मोबाइल की किश्त के नाम पर पैसे मांगे गए और भुगतान नहीं करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। परिवार के मुताबिक, स्थानीय थाने में शिकायत के बावजूद तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पीड़ित की बुजुर्ग मां डीसीपी दक्षिणी के पास पहुंचीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीसीपी ने मुकदमा दर्ज करने, आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिस की भूमिका की जांच के निर्देश दिए हैं।</p>
<p><strong>₹21,500 के मोबाइल से शुरू हुआ विवाद</strong><br />परिवार के मुताबिक, करीब एक साल पहले नेवल ने निगोहां कस्बे की एक मोबाइल दुकान से लगभग 21,500 कीमत का Samsung मोबाइल फोन फाइनेंस पर खरीदा था। बताया गया कि फोन के लिए जीरो डाउन पेमेंट की व्यवस्था थी और हर महीने 2,799 की 12 किश्तें चुकानी थीं। परिजनों का कहना है कि शुरुआत में ही एक किश्त बकाया हो गई थी। इसके बाद दुकान से जुड़े लोग उनके घर पहुंचे और कथित तौर पर मोबाइल फोन अपने साथ ले गए। परिवार का दावा है कि फोन वापस ले लिए जाने के बावजूद कुछ समय बाद फिर से बकाया रकम को लेकर दबाव बनाया जाने लगा। यहीं से शुरू हुआ किश्त का विवाद बाद में कथित तौर पर युवक को बंधक बनाए जाने तक पहुंच गया।</p>
<p><strong>8 सितंबर को युवक को घर से ले जाने का आरोप</strong><br />पीड़ित के भाई राजकुमार और मां जदूराई के अनुसार, 8 सितंबर को दो लोग स्कूटी से उनके गांव पहुंचे। परिवार का आरोप है कि दोनों ने नेवल को अपने साथ चलने के लिए कहा और उसे जबरन अपने साथ ले गए। परिजनों को शुरुआत में यह स्पष्ट नहीं था कि युवक को कहां ले जाया गया है। परिवार के मुताबिक, बाद में उन्हें पता चला कि नेवल को एक ब्लड बैंक ले जाया गया था।</p>
<p><strong>'EMI के बदले खून' निकलवाने का आरोप</strong><br />परिवार का सबसे गंभीर आरोप यह है कि नेवल को ब्लड बैंक ले जाकर उसका एक यूनिट खून निकलवाया गया। परिजनों का दावा है कि यह सब उसकी इच्छा के खिलाफ किया गया और इसे मोबाइल की किश्त के विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला केवल EMI वसूली या मोबाइल फाइनेंस विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें जबरन ले जाने, अवैध तरीके से रोकने, धमकी देने और अन्य गंभीर अपराधों के पहलुओं की जांच की जरूरत होगी। हालांकि, युवक से रक्त किस परिस्थिति में लिया गया, ब्लड बैंक में उसकी सहमति किस तरह दर्ज हुई और रक्त लेने की पूरी प्रक्रिया क्या थी, इन सवालों का जवाब पुलिस की जांच और संबंधित संस्थान के रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगा।</p>
<p><strong>ब्लड बैंक के बाद मकान में बंधक बनाने का दावा</strong><br />परिजनों के अनुसार, ब्लड बैंक ले जाने के बाद नेवल को सदर इलाके के एक मकान में रखा गया। परिवार का आरोप है कि युवक को कई दिनों तक वहां से बाहर नहीं निकलने दिया गया और उससे जबरन मजदूरी भी कराई गई। इस दौरान परिवार उसकी स्थिति को लेकर परेशान रहा। आरोप है कि युवक से संपर्क सीमित रखा गया और परिजनों को भी उसकी सही स्थिति की जानकारी नहीं मिल पा रही थी। मामले का यह पहलू पुलिस जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यदि युवक को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी स्थान पर रखा गया था तो पुलिस को उसके बयान, उस मकान की पहचान, वहां मौजूद लोगों और CCTV या अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच करनी होगी।</p>
<p><strong>भाई को फोन कर मांगे 2,799, जान से मारने की धमकी का आरोप</strong><br />पीड़ित के भाई राजकुमार का आरोप है कि इस दौरान आरोपियों की ओर से उन्हें फोन किया गया। कथित तौर पर मोबाइल की किश्त के नाम पर 2,799 की मांग की गई। परिवार का आरोप है कि पैसे नहीं देने पर नेवल को जान से मारने की धमकी दी गई। उन्हें कथित तौर पर धमकाया गया कि अगर रकम नहीं दी गई तो युवक की हत्या कर उसे गोमती नदी में फेंक दिया जाएगा। इन धमकियों की सत्यता और फोन कॉल की वास्तविकता की जांच पुलिस के लिए अहम होगी। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन, ऑडियो रिकॉर्डिंग या अन्य डिजिटल साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।</p>
<p><strong>पांच दिन बाद रैपिडो कैब से थाने भेजने का आरोप</strong><br />पीड़ित परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। परिवार का दावा है कि उन्होंने निगोहां थाने में शिकायत की थी, लेकिन शुरुआती स्तर पर उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। परिजनों के मुताबिक, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद करीब पांचवें दिन नेवल को Rapido कैब के जरिए थाने भेजा गया। परिवार का आरोप है कि कैब का किराया भी उनसे ही भरवाया गया। जब बदहवास हालत में नेवल थाने पहुंचा तो परिजनों ने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। परिवार का दावा है कि उन्हें कार्रवाई का भरोसा देने के बजाय पुलिसकर्मियों ने कथित रूप से उन्हें ही फंसाने की धमकी दी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की भूमिका की जांच के आदेश दिए जाने के बाद अब यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर क्या कार्रवाई की गई थी और उसमें किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं।</p>
<p><strong>बुजुर्ग मां पहुंचीं DCP के पास</strong><br />स्थानीय थाने से अपेक्षित मदद नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए पीड़ित की बुजुर्ग मां जदूराई ने उच्च पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई। वह DCP दक्षिणी मोहम्मद मुश्ताक के पास पहुंचीं और पूरे मामले की जानकारी दी। DCP ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस को आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, उनकी गिरफ्तारी के प्रयास करने और स्थानीय पुलिस की भूमिका की जांच करने को कहा गया है। अब मामले की जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि युवक को किन लोगों ने अपने साथ लिया, उसे कहां-कहां ले जाया गया, रक्त कहां और किन परिस्थितियों में लिया गया तथा उसे कथित तौर पर कितने समय तक बंधक बनाकर रखा गया।</p>
<p><strong>पुलिस जांच में इन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी</strong><br />इस पूरे मामले में कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा</p>
<ul>
<li>नेवल को घर से कौन-कौन लोग लेकर गए?</li>
<li>क्या उसे उसकी इच्छा के खिलाफ कहीं ले जाया गया?</li>
<li>ब्लड बैंक में रक्त लेने की प्रक्रिया कैसे हुई?</li>
<li>क्या उसके पास रक्तदान की सहमति से संबंधित कोई रिकॉर्ड था?</li>
<li>उसे जिस मकान में रखने का आरोप है, वह किसका था?</li>
<li>वहां कितने समय तक युवक को रखा गया?</li>
<li>क्या उससे जबरन मजदूरी कराई गई?</li>
<li>₹2,799 मांगने वाले फोन कॉल किस नंबर से किए गए?</li>
<li>स्थानीय थाने में शिकायत मिलने के बाद क्या कार्रवाई की गई?</li>
<li>क्या पुलिसकर्मियों की ओर से किसी तरह की लापरवाही हुई?</li>
</ul>
<p>इन सभी बिंदुओं की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में घटनाक्रम क्या था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे?</p>
<p><strong>EMI वसूली के नाम पर ऐसी कार्रवाई पर बड़ा सवाल</strong><br />मोबाइल या किसी अन्य सामान की EMI का भुगतान न होना एक वित्तीय विवाद हो सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति को कथित तौर पर जबरन ले जाना, बंधक बनाना, धमकी देना या उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक प्रक्रिया कराना बेहद गंभीर आरोप हैं। ऐसे मामलों में वसूली की वैध प्रक्रिया और कथित दबाव या हिंसा के बीच अंतर करना जरूरी है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। आरोपी पक्ष का बयान और ब्लड बैंक सहित अन्य संबंधित संस्थानों के रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, परिवार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में आरोप साबित होना बाकी है। पुलिस जांच के निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>अपराध</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 14:11:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
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                <title>Gurugram Hit and Run Case: सड़क पर महिला बाइकर को टक्कर… फिर कार लेकर फरार! CCTV वायरल होते ही पुलिस ने राजस्थान से आरोपी को दबोचा, 307 में केस</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>गुरुग्राम।</strong> गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर महिला बाइकर को कार से टक्कर मारने के कथित हिट-एंड-रन मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मामले के आरोपी कल्याण बैंसला को राजस्थान के दौसा से गिरफ्तार किया है। पुलिस टीम आरोपी को गुरुग्राम लेकर लौट रही है। इस मामले में सामने आए CCTV फुटेज और पीड़ित पक्ष की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच तेज की थी। अब आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा 307 (IPC) के तहत कार्रवाई की गई है।</p>
<p>पुलिस के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की तलाश के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/gurugram-hit-and-run-case-woman-biker-hit-on-the/article-12484"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/image-(1)1.png" alt=""></a><br /><p><strong>गुरुग्राम।</strong> गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर महिला बाइकर को कार से टक्कर मारने के कथित हिट-एंड-रन मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मामले के आरोपी कल्याण बैंसला को राजस्थान के दौसा से गिरफ्तार किया है। पुलिस टीम आरोपी को गुरुग्राम लेकर लौट रही है। इस मामले में सामने आए CCTV फुटेज और पीड़ित पक्ष की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच तेज की थी। अब आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा 307 (IPC) के तहत कार्रवाई की गई है।</p>
<p>पुलिस के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की तलाश के लिए टीम राजस्थान भेजी गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने घटनाक्रम से जुड़े CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को भी खंगाला। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कार और महिला बाइक सवार के बीच हुई टक्कर का घटनाक्रम सामने आने के बाद मामले को लेकर लोगों में भी काफी चर्चा हुई थी।</p>
<p><strong>देर रात थाने पहुंचे परिजन, की सख्त कार्रवाई की मांग</strong><br />घटना के बाद सोमवार देर रात पीड़िता सिया उर्फ शिवानी चौहान के पिता रोशन चौहान, उनके भाई और अन्य परिजन सेक्टर-56 पुलिस स्टेशन पहुंचे। परिजनों ने पुलिस को लिखित शिकायत देकर आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। परिवार का कहना है कि घटना को महज सड़क दुर्घटना मानकर छोड़ना उचित नहीं है। उनका आरोप है कि जिस तरह कार ने महिला बाइक सवार को टक्कर मारी, उससे उसकी जान को गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। परिजनों ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।</p>
<p><strong>CCTV फुटेज सामने आने के बाद जांच में आया नया मोड़</strong><br />मामले में CCTV फुटेज सामने आने के बाद पुलिस की जांच को महत्वपूर्ण सुराग मिला। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वीडियो में कार चालक और महिला बाइकर के बीच हुई टक्कर का घटनाक्रम दिखाई देता है। पुलिस ने इसी फुटेज और शिकायत के आधार पर मामले की धाराओं की समीक्षा की। DCP East संदीप मलिक के अनुसार, उपलब्ध वीडियो को देखने के बाद प्रथम दृष्टया यह मामला सामान्य सड़क दुर्घटना से अलग प्रतीत हुआ। पुलिस का कहना है कि घटना के तरीके को देखते हुए हत्या के प्रयास की धारा जोड़ने का निर्णय लिया गया।</p>
<p><strong>'बेटी काफी दूर तक घिसटती चली गई'</strong><br />पीड़िता के पिता रोशन चौहान ने पुलिस से मुलाकात के बाद अपनी बेटी के साथ हुई घटना को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि CCTV फुटेज में उनकी बेटी कार की टक्कर के बाद काफी दूर तक घिसटती हुई दिखाई देती है। परिवार के मुताबिक, घटना के बाद सिया काफी घबरा गई थीं और इसी वजह से उन्होंने तत्काल घरवालों को पूरी जानकारी नहीं दी। बाद में जब परिवार को घटना का पता चला तो उन्होंने पुलिस से संपर्क किया। पीड़िता के पिता का कहना है कि उनकी बेटी को गंभीर नुकसान नहीं हुआ, यह राहत की बात है, लेकिन घटना की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। परिवार ने कहा है कि वह न्याय के लिए हर संभव कानूनी रास्ता अपनाएगा।</p>
<p><strong>पहले से दर्ज थी FIR, अब हत्या के प्रयास की धारा जोड़ी गई</strong><br />पुलिस ने बताया कि घटना को लेकर पहले से एक सुओ मोटू FIR दर्ज की गई थी। थाने पहुंचने पर पीड़िता के परिवार को FIR की कॉपी भी उपलब्ध कराई गई। बाद में सामने आए घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले में IPC की धारा 307 जोड़ी गई। पुलिस अब मामले में आरोपी से पूछताछ करेगी और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच करेगी। इसके साथ ही पीड़िता का बयान भी दर्ज किया जाएगा, जिससे घटना की पूरी परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सके।</p>
<p><strong>पीड़िता के वकील ने भी की कड़ी कार्रवाई की मांग</strong><br />पीड़िता की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने भी पुलिस से मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि CCTV फुटेज में सामने आए घटनाक्रम की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को सभी तथ्यों की गहराई से जांच करनी चाहिए। अब पुलिस की जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि टक्कर किन परिस्थितियों में हुई, आरोपी का उस समय क्या इरादा था और घटना के बाद वह मौके से क्यों चला गया। इन सवालों के जवाब आरोपी से पूछताछ और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद सामने आ सकते हैं।</p>
<p><strong>आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब आगे क्या?</strong><br />कल्याण बैंसला की गिरफ्तारी के बाद अब मामले की जांच अगले चरण में पहुंच गई है। पुलिस आरोपी को गुरुग्राम लाकर पूछताछ करेगी। इसके बाद उपलब्ध साक्ष्यों, CCTV फुटेज, पीड़िता के बयान और अन्य तथ्यों के आधार पर पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी। फिलहाल, इस मामले में पुलिस की जांच जारी है और अदालत में आरोप साबित होना बाकी है। इसलिए आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम परिणाम तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 12:26:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UPI Payment Charges: 2,000 तक UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई चार्ज, सरकार ने बैंकों को दिया बड़ा निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> UPI से रोजाना पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के लिए राहत की खबर है। सरकार ने साफ कर दिया है कि 2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर ग्राहकों से किसी भी तरह का शुल्क नहीं वसूल सकते। यह नियम सीधे तौर पर उन डिजिटल भुगतानों पर लागू होगा, जो UPI या RuPay से संचालित डेबिट कार्ड के जरिए किए जाते हैं।</p>
<p><strong>UPI पेमेंट पर सीधे या छिपे तौर पर भी नहीं लगेगा चार्ज</strong><br />वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम के तहत नियमों को स्पष्ट किया गया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/upi-payment-charges-no-charges-will-be-levied-on-upi/article-12482"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/upi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> UPI से रोजाना पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के लिए राहत की खबर है। सरकार ने साफ कर दिया है कि 2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर ग्राहकों से किसी भी तरह का शुल्क नहीं वसूल सकते। यह नियम सीधे तौर पर उन डिजिटल भुगतानों पर लागू होगा, जो UPI या RuPay से संचालित डेबिट कार्ड के जरिए किए जाते हैं।</p>
<p><strong>UPI पेमेंट पर सीधे या छिपे तौर पर भी नहीं लगेगा चार्ज</strong><br />वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम के तहत नियमों को स्पष्ट किया गया है। इसके मुताबिक बैंक और पेमेंट सिस्टम से जुड़े संस्थान 2,000 तक के निर्धारित डिजिटल लेनदेन के लिए ग्राहक से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं ले सकते। यानी सामान्य UPI पेमेंट करते समय यूजर पर किसी तरह का अतिरिक्त चार्ज डालने की अनुमति नहीं होगी।</p>
<p><strong>2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर क्या होगा?</strong><br />सरकार के इस स्पष्टीकरण का मतलब यह नहीं है कि हर तरह के डिजिटल पेमेंट पर MDR यानी Merchant Discount Rate हमेशा शून्य रहेगा। निर्धारित सीमा से ऊपर आने वाले कुछ चुनिंदा लेनदेन में MDR का प्रावधान हो सकता है। हालांकि, ये शुल्क पारंपरिक डेबिट या क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर लगने वाले MDR की तुलना में कम रखे जाने की बात कही गई है।</p>
<p><strong>UPI चार्ज को लेकर क्यों उठ रहे थे सवाल?</strong><br />पिछले कुछ समय से UPI के जरिए होने वाले भुगतान पर संभावित शुल्क को लेकर चर्चा तेज थी। डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल लगातार बढ़ने के बीच यह सवाल भी उठ रहा था कि भविष्य में UPI यूजर्स से ट्रांजैक्शन फीस ली जाएगी या नहीं। सरकार पहले ही उपभोक्ताओं से UPI भुगतान पर शुल्क नहीं लेने की बात स्पष्ट कर चुकी थी। अब नए नियमों के जरिए इस व्यवस्था को लेकर स्थिति और साफ की गई है।</p>
<p><strong>आम यूजर्स के लिए क्या बदलेगा?</strong><br />अगर आप दुकान, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या किसी व्यक्ति को 2,000 तक का भुगतान UPI के जरिए करते हैं, तो इस भुगतान के लिए बैंक की ओर से आपसे अलग से ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लिया जा सकता। सरकार का यह कदम डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने और UPI के इस्तेमाल को आसान बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 11:38:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bengal Politics: दुर्गा पूजा से पहले बंगाल में बड़ा ‘खेला’? TMC के 17 बागी सांसदों के BJP में जाने का दावा, पार्टी ने कहा- फैसला इतना आसान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कोलकाता। </strong>पश्चिम बंगाल की सियासत में दुर्गा पूजा से पहले एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कूचबिहार के सांसद जगदीशचंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनसीपीआई का हिस्सा बने 20 सांसदों में से 17 जल्द भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकते हैं। बसुनिया के मुताबिक, इन सांसदों के भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया पूजा से पहले पूरी की जा सकती है।</p>
<p>हालांकि, इस दावे ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। खुद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने संकेत दिया है कि किसी सांसद के पार्टी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/politics/bengal-politics-big-game-in-bengal-before-durga-puja-claim/article-12471"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/tmc-bagi-1789382230322_v.webp" alt=""></a><br /><p><strong>कोलकाता। </strong>पश्चिम बंगाल की सियासत में दुर्गा पूजा से पहले एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कूचबिहार के सांसद जगदीशचंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनसीपीआई का हिस्सा बने 20 सांसदों में से 17 जल्द भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकते हैं। बसुनिया के मुताबिक, इन सांसदों के भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया पूजा से पहले पूरी की जा सकती है।</p>
<p>हालांकि, इस दावे ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। खुद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने संकेत दिया है कि किसी सांसद के पार्टी में आने की इच्छा जताना और भाजपा की ओर से उसे स्वीकार करना दो अलग बातें हैं। यानी फिलहाल 17 सांसदों के BJP में शामिल होने की बात को आधिकारिक फैसला नहीं माना जा सकता।</p>
<p><strong>तीन मुस्लिम सांसद BJP से दूरी बनाए रखेंगे?</strong><br />बसुनिया के मुताबिक, 20 सांसदों के समूह में शामिल मुर्शिदाबाद के तीन मुस्लिम सांसद अबू ताहेर खान, खलिलुर रहमान और यूसुफ पठान भाजपा में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने दावा किया कि ये तीनों सांसद अलग रहते हुए भी NDA को समर्थन दे सकते हैं और उन्हें केंद्र की ओर से विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी मिल सकती है।</p>
<p>लेकिन अबू ताहेर खान ने इस दावे को सीधे खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि तीनों सांसद न तो भाजपा में शामिल होंगे और न ही NDA का हिस्सा बनेंगे। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक भविष्य के बारे में घोषणा करने का अधिकार किसी दूसरे नेता को नहीं है।</p>
<p>अबू ताहेर के मुताबिक, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की ओर से विकास कार्यों से जुड़ी सरकारी बैठक के लिए बुलाया जाता है तो वे उसमें शामिल हो सकते हैं, लेकिन भाजपा या NDA की राजनीतिक बैठकों से दूरी बनाए रखेंगे।</p>
<p><strong>BJP ने भी साफ नहीं की तस्वीर</strong><br />जगदीश बसुनिया के बयान के बाद भाजपा के भीतर से भी सावधानी भरा रुख सामने आया है। प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि किसी नेता या सांसद की भाजपा में शामिल होने की इच्छा मात्र से यह तय नहीं हो जाता कि पार्टी उसे सदस्यता देगी।</p>
<p>ऐसे में 17 सांसदों के भाजपा में जाने का दावा फिलहाल राजनीतिक बयान और संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। अंतिम स्थिति सांसदों के आधिकारिक फैसले और भाजपा नेतृत्व की स्वीकृति के बाद ही स्पष्ट होगी।</p>
<p><strong>20 सांसदों का राजनीतिक मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में</strong><br />दरअसल, यह पूरा विवाद उन 20 सांसदों से जुड़ा है, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के सांसद के तौर पर मान्यता देने की मांग की थी। इनमें जगदीश बसुनिया, सुदीप बनर्जी और काकोली घोष दस्तीदार समेत कई सांसद शामिल हैं।</p>
<p>हालांकि, लोकसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में ये सांसद अभी भी तृणमूल कांग्रेस के सदस्य के रूप में दर्ज हैं। इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।</p>
<p><strong>22 सितंबर तक सांसदों को देना है जवाब</strong><br />मामले में 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने एनसीपीआई का दावा करने वाले सभी 20 सांसदों को नोटिस जारी किया था। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष के सचिवालय ने भी 26 अगस्त को सांसदों को नोटिस भेजकर उनका पक्ष पूछा।</p>
<p>सांसदों ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। यह मांग स्वीकार कर ली गई और अब उन्हें 22 सितंबर तक अपना जवाब दाखिल करना है। इसलिए आने वाले दिनों में इन सांसदों का राजनीतिक भविष्य और उनकी लोकसभा सदस्यता दोनों ही महत्वपूर्ण मुद्दे बने रहेंगे।</p>
<p><strong>दो-तिहाई सांसदों के समर्थन का तर्क</strong><br />जगदीश बसुनिया का कहना है कि अगर 20 सदस्यीय समूह में से 17 सांसद भाजपा में शामिल होते हैं, तो यह संख्या दो-तिहाई से अधिक होगी। उनका तर्क है कि ऐसी स्थिति में दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने का प्रावधान लागू हो सकता है।</p>
<p>20 सांसदों के मामले में दो-तिहाई का आंकड़ा 14 सांसद बनता है। हालांकि, इस पूरे मामले में कानून की व्याख्या, सांसदों की वर्तमान संवैधानिक स्थिति और उनके समूह की वैधानिक मान्यता जैसे सवाल भी महत्वपूर्ण होंगे। अंतिम स्थिति संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।</p>
<p><strong>दुर्गा पूजा से पहले क्या बदलेगा बंगाल का सियासी समीकरण?</strong><br />यदि 17 सांसद वास्तव में भाजपा में शामिल होते हैं, तो इसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बड़ा हो सकता है। दूसरी ओर, यदि तीन मुस्लिम सांसद अपने मौजूदा रुख पर कायम रहते हैं तो पूरे घटनाक्रम की राजनीतिक तस्वीर और भी अलग होगी।</p>
<p>फिलहाल, एक तरफ भाजपा में शामिल होने का दावा है, दूसरी तरफ संबंधित सांसदों का खंडन और भाजपा नेतृत्व की सावधानी। ऐसे में दुर्गा पूजा से पहले बंगाल की राजनीति में कोई बड़ा फेरबदल होता है या यह सिर्फ सियासी बयानबाजी तक सीमित रहता है, इस पर अब सबकी नजर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 17:08:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Disha Salian Case: 6 साल बाद फिर खुला दिशा सालियान मौत का मामला, CBI ने दर्ज की FIR; आदित्य ठाकरे और रिया चक्रवर्ती समेत कई नाम चर्चा में</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले ने करीब छह साल बाद एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को FIR दर्ज कर मामले की नए सिरे से जांच शुरू कर दी है। दिशा की मौत जून 2020 में मुंबई में हुई थी। वह कुछ समय तक अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर भी रही थीं।</p>
<p>CBI की कार्रवाई से पहले दिशा के पिता सतीश सालियान ने जांच एजेंसी के सामने अपना बयान दर्ज कराया था। उनके बयान में कई लोगों के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/disha-salian-case-reopened-after-6-years-disha-salian-death/article-12470"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/disha-salian-death-1789372530169_v-(1).webp" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले ने करीब छह साल बाद एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को FIR दर्ज कर मामले की नए सिरे से जांच शुरू कर दी है। दिशा की मौत जून 2020 में मुंबई में हुई थी। वह कुछ समय तक अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर भी रही थीं।</p>
<p>CBI की कार्रवाई से पहले दिशा के पिता सतीश सालियान ने जांच एजेंसी के सामने अपना बयान दर्ज कराया था। उनके बयान में कई लोगों के नाम और मामले से जुड़े गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इनमें शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे, अभिनेता रिया चक्रवर्ती, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली समेत कई अन्य नाम शामिल हैं। हालांकि, इन नामों का FIR में उल्लेख होना अपने आप में किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध साबित नहीं करता।</p>
<p><strong>पिता के बयान में कई लोगों के नाम</strong><br />दिशा के पिता ने CBI के समक्ष दिए बयान में कथित आपराधिक साजिश, घटना को अलग रूप देने और सबूतों से कथित छेड़छाड़ जैसे आरोपों की जांच की मांग की है। बयान में राजनीतिक नेताओं, फिल्म जगत से जुड़े लोगों और कुछ पुलिस अधिकारियों समेत कई लोगों की भूमिका की जांच करने की बात कही गई है। रिपोर्टों के अनुसार, बयान में आदित्य ठाकरे और रिया चक्रवर्ती के अलावा डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, शोविक चक्रवर्ती तथा कुछ पुलिस अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। अब CBI इन दावों और उपलब्ध साक्ष्यों की स्वतंत्र रूप से जांच करेगी।<img src="https://www.jagranimages.com/images/2026/09/14/template/image/WhatsApp-Image-2026-09-14-at-15.55.51-1789382340355.webp" alt="WhatsApp Image 2026-09-14 at 15.55.51"></img></p>
<p><strong>बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद बदली जांच की दिशा</strong><br />इस मामले में बड़ा कानूनी मोड़ 2 सितंबर 2026 को आया था, जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान की मौत की जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया। अदालत ने CBI को FIR दर्ज करने और दिशा के पिता का बयान रिकॉर्ड करने को कहा था। साथ ही जांच के लिए वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि FIR दर्ज करने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को दोषी या आरोपी मान लिया गया है। जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री और उचित आधार सामने आने के बाद ही किसी व्यक्ति की भूमिका तय की जाएगी।</p>
<p><strong>मुंबई पुलिस से CBI ने मांगे पुराने रिकॉर्ड</strong><br />CBI ने जांच संभालने के बाद मामले से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड मुंबई की मालवणी पुलिस से भी मांगे हैं। इनमें पहले की जांच से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं। इससे एजेंसी अब पुराने साक्ष्यों, घटनाक्रम और जांच के दौरान सामने आई जानकारियों की दोबारा समीक्षा करेगी। मुंबई पुलिस की पिछली जांच में दिशा की मौत को आत्महत्या माना गया था और किसी साजिश का सबूत नहीं मिलने की बात कही गई थी। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद CBI इस पूरे मामले की नए सिरे से जांच कर रही है।</p>
<p><strong>सुशांत सिंह राजपूत की मौत से भी जुड़ा रहा मामला</strong><br />दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई में हुई थी। इसके कुछ ही दिन बाद, 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की भी मौत हो गई थी। दिशा के सुशांत के साथ पेशेवर संबंध होने के कारण दोनों घटनाओं को लेकर लंबे समय से तरह-तरह के दावे और सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, दोनों मामलों के बीच किसी आपराधिक संबंध की पुष्टि जांच से ही हो सकती है। अब CBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि पुराने रिकॉर्ड, तकनीकी साक्ष्यों और नए बयानों की जांच कर दिशा की मौत से जुड़े वास्तविक घटनाक्रम को स्पष्ट किया जाए। जांच आगे बढ़ने के साथ ही यह भी सामने आएगा कि पिता द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी तथ्यात्मक पुष्टि होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 17:01:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Indore News: कहीं क्रिकेट खेलते गणेश, कहीं लैपटॉप चलाते बप्पा! इंदौर के इस घर में सजे हैं 5000 से ज्यादा अनोखे गणपति</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>इंदौर। </strong>आमतौर पर किसी घर में भगवान गणेश की एक-दो प्रतिमाएं नजर आती हैं, लेकिन इंदौर में एक ऐसा घर है जहां प्रवेश करते ही हर तरफ गणपति के अलग-अलग रूप दिखाई देते हैं। बंगाली चौराहे के पास रहने वाले CA राजकुमार शाह ने करीब दो दशक में गणेश प्रतिमाओं का ऐसा अनोखा संसार तैयार किया है, जिसमें 5 हजार से ज्यादा प्रतिमाएं शामिल हैं। घर के दरवाजे से लेकर कमरों और हॉल तक बप्पा के इतने रूप नजर आते हैं कि हर प्रतिमा अपने आप में एक अलग कहानी सुनाती है।</p>
<p><strong>बप्पा के ऐसे रूप, जिन्हें देखकर ठहर जाएंगी</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/indore-news-ganesh-playing-cricket-somewhere-bappa-using-laptop-more/article-12464"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/image3.png" alt=""></a><br /><p><strong>इंदौर। </strong>आमतौर पर किसी घर में भगवान गणेश की एक-दो प्रतिमाएं नजर आती हैं, लेकिन इंदौर में एक ऐसा घर है जहां प्रवेश करते ही हर तरफ गणपति के अलग-अलग रूप दिखाई देते हैं। बंगाली चौराहे के पास रहने वाले CA राजकुमार शाह ने करीब दो दशक में गणेश प्रतिमाओं का ऐसा अनोखा संसार तैयार किया है, जिसमें 5 हजार से ज्यादा प्रतिमाएं शामिल हैं। घर के दरवाजे से लेकर कमरों और हॉल तक बप्पा के इतने रूप नजर आते हैं कि हर प्रतिमा अपने आप में एक अलग कहानी सुनाती है।</p>
<p><strong>बप्पा के ऐसे रूप, जिन्हें देखकर ठहर जाएंगी नजरें</strong><br />इस अनोखे कलेक्शन की खासियत सिर्फ इसकी संख्या नहीं, बल्कि गणपति के रूपों में दिखाई देने वाली कल्पनाशीलता है। कहीं गणेशजी किताब हाथ में लिए नजर आते हैं तो कहीं वकील की पोशाक में। कुछ प्रतिमाओं में वे क्रिकेट खेलते दिखाई देते हैं, तो किसी में लैपटॉप पर काम करते हुए। कहीं बप्पा नृत्य कर रहे हैं, कहीं शतरंज की बिसात के सामने बैठे हैं और कई प्रतिमाओं में उन्हें अलग-अलग वाद्य यंत्र बजाते हुए दिखाया गया है। आकार, रंग, मुद्रा और चेहरे के भाव में इतनी विविधता है कि एक जैसी दो प्रतिमाएं ढूंढना भी मुश्किल हो जाता है। यही विविधता राजकुमार के संग्रह को सामान्य धार्मिक संग्रह से अलग बनाती है।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/14/cover_10_1789369415686.gif" alt="इंदौर में राजकुमार शाह के घर मौजूद गणेश प्रतिमाओं का कलेक्शन। - Dainik Bhaskar"></img></p>
<p><strong>ग्रीटिंग कार्ड से शुरू हुआ शौक, फिर बना हजारों प्रतिमाओं का संसार</strong><br />राजकुमार शाह का यह जुनून अचानक शुरू नहीं हुआ था। शुरुआत गणेशजी की तस्वीरों वाले ग्रीटिंग कार्ड जमा करने से हुई। धीरे-धीरे यह रुचि प्रतिमाओं तक पहुंची और 2003 के आसपास उन्होंने अलग-अलग जगहों से गणेश प्रतिमाएं जुटाना शुरू किया। इसके बाद यात्राओं, मेलों, बाजारों और अलग-अलग शहरों से गुजरते हुए जब भी उन्हें गणपति का कोई अनोखा रूप दिखाई देता, उसे अपने संग्रह में शामिल करने की कोशिश करते। देखते ही देखते वर्षों का यह शौक 5 हजार से अधिक प्रतिमाओं के विशाल संग्रह में बदल गया।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/14/inner_14_1789369476503.gif" alt="दो दशक में तैयार हुआ 5 हजार से ज्यादा गणेश प्रतिमाओं का कलेक्शन।"></img></p>
<p><strong>सब्जी और नारियल से लेकर सोने तक के गणपति</strong><br />राजकुमार के संग्रह में गणेश प्रतिमाओं की दुनिया भी उतनी ही रंग-बिरंगी है जितनी उनकी संख्या। मिट्टी, लकड़ी, सिरेमिक और विभिन्न धातुओं से बनी प्रतिमाओं के साथ यहां सब्जियों और नारियल से तैयार किए गए गणपति भी देखने को मिलते हैं। कलेक्शन में पीपल के पत्ते पर बनाए गए सोने के गणेश और अमेरिकन डायमंड से सजी कलाकृतियां भी मौजूद हैं। कुछ प्रतिमाएं पूरी तरह पारंपरिक शैली में हैं, जबकि कुछ आधुनिक कल्पना का खूबसूरत उदाहरण हैं। इन्हीं में कहीं बप्पा क्रिकेट खेलते हैं तो कहीं आधुनिक तकनीक के साथ नजर आते हैं।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/14/inner_18_1789369433303.gif" alt="5 हजार से ज्यादा प्रतिमाओं में गणेशजी के अलग-अलग रूप।"></img></p>
<p><strong>महाराष्ट्र से लेकर इंडोनेशिया और थाईलैंड तक की झलक</strong><br />राजकुमार की यात्राएं भी उनके इस संग्रह को लगातार नया रूप देती रही हैं। देश के अलग-अलग राज्यों से जुटाई गई प्रतिमाओं के साथ उनके पास इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से लाई गई गणेश प्रतिमाएं भी हैं। महाराष्ट्र की प्रतिमाओं का संग्रह विशेष रूप से बड़ा है। इसके अलावा अलग-अलग कलाकारों द्वारा हाथ से तैयार की गई कई अनूठी कलाकृतियां भी इस घर का हिस्सा हैं। अलग-अलग देशों और संस्कृतियों में भगवान गणेश को किस तरह चित्रित किया गया है, इसकी झलक भी इस संग्रह में दिखाई देती है।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/14/inner_15_1789369466703.gif" alt="किताब, लैपटॉप और वाद्य यंत्रों वाले गणेश के अलग-अलग रूप।"></img></p>
<p><strong>रोज 3-4 घंटे सिर्फ बप्पा की देखभाल में</strong><br />इतनी बड़ी संख्या में प्रतिमाओं को संभालना अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी है। राजकुमार की पत्नी सीमा शाह के मुताबिक, संग्रह की प्रतिमाओं की नियमित सफाई की जाती है और इसमें रोज करीब 3 से 4 घंटे लग जाते हैं। हालांकि, परिवार के लिए यह कोई बोझ नहीं बल्कि बप्पा के प्रति जुड़ाव और श्रद्धा का हिस्सा है।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/14/inner_17_1789369442087.gif" alt="राजकुमार शाह के घर में सहेजी गईं गणेश प्रतिमाएं।"></img></p>
<p><strong>अब दोस्तों के लिए भी तय है ‘गणपति वाला गिफ्ट’</strong><br />राजकुमार के इस अनोखे शौक से उनके दोस्त और रिश्तेदार भी अच्छी तरह परिचित हैं। यही वजह है कि जन्मदिन या किसी खास अवसर पर उन्हें सामान्य उपहारों के बजाय अक्सर गणेश प्रतिमा ही मिलती है। विदेश से लौटने वाले परिचित भी उनके लिए कोई अनोखी गणेश प्रतिमा लेकर आते हैं। राजकुमार बताते हैं कि कई बार हर बुधवार उनके संग्रह में एक नई प्रतिमा जुड़ जाती है। कोरोना काल में संग्रह बढ़ने की रफ्तार कुछ कम जरूर हुई, लेकिन नए और अनोखे गणपति तलाशने का सिलसिला बंद नहीं हुआ।<img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2026/09/14/inner_16__1_1789369457540.gif" alt="अलग-अलग जगहों और कलाकारों से जुटाई गई गणेश प्रतिमाएं।"></img></p>
<p><strong>हर मूर्ति सिर्फ प्रतिमा नहीं, एक याद है</strong><br />राजकुमार शाह के लिए इन हजारों प्रतिमाओं की असली कीमत उनकी संख्या में नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी यादों में है। कोई प्रतिमा किसी यात्रा की निशानी है, किसी के पीछे किसी कलाकार की कहानी है तो किसी के साथ कोई निजी स्मृति जुड़ी हुई है। शायद यही वजह है कि 2003 में शुरू हुआ यह सफर आज भी थमा नहीं है। 5 हजार से ज्यादा गणपति घर में होने के बावजूद राजकुमार की नजर आज भी अगले अनोखे बप्पा की तलाश में रहती है। उनके लिए यह सिर्फ कलेक्शन नहीं, बल्कि भगवान गणेश के अलग-अलग रूपों, कला और यादों को संजोकर रखने की एक लंबी यात्रा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 13:38:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अदिती मजुमदार ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Amit Shah On UCC: उत्तराखंड के बाद अब 21 राज्यों की बारी? UCC पर अमित शाह का बड़ा बयान, 2029 से पहले लागू करने का ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मुंबई। </strong>समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर केंद्र सरकार ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले NDA की सरकारें 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 21 राज्यों में UCC लागू करेंगी। शाह ने इसे समान अधिकार और एकरूप नागरिक कानून की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता बताया।</p>
<p>अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब UCC लंबे समय से देश की राजनीति में एक अहम और बहस वाले मुद्दे के तौर पर मौजूद है। केंद्र</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/politics/amit-shah-on-ucc-after-uttarakhand-now-it-is-the/article-12458"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-09/amit_shah.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई। </strong>समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर केंद्र सरकार ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले NDA की सरकारें 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 21 राज्यों में UCC लागू करेंगी। शाह ने इसे समान अधिकार और एकरूप नागरिक कानून की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता बताया।</p>
<p>अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब UCC लंबे समय से देश की राजनीति में एक अहम और बहस वाले मुद्दे के तौर पर मौजूद है। केंद्र सरकार की रणनीति अब उन राज्यों में इसे आगे बढ़ाने की है जहां BJP या NDA की सरकारें हैं। उत्तराखंड में UCC लागू हो चुका है, जबकि अन्य राज्यों में कानून बनाने, प्रस्ताव पारित करने या प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का काम अलग-अलग चरणों में है।</p>
<p><strong>विवाह से विरासत तक बदल सकते हैं नागरिक कानून</strong><br />UCC का मूल उद्देश्य धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय नागरिक मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है। इसके दायरे में विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे विषय आते हैं। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में प्रस्तावित या लागू किए जाने वाले प्रावधानों की विस्तृत व्यवस्था राज्य के कानून और प्रक्रिया के अनुसार अलग हो सकती है। सरकार लंबे समय से UCC को समानता और समान नागरिक अधिकारों से जोड़कर पेश करती रही है। अमित शाह ने भी अपने बयान में इसे BJP की पुरानी प्रतिबद्धता बताया और कहा कि कई राज्यों में इसकी दिशा में काम पहले ही शुरू हो चुका है।</p>
<p><strong>उत्तराखंड के बाद गुजरात समेत कई राज्यों में बढ़ी रफ्तार</strong><br />उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां UCC लागू किया गया। इसके बाद गुजरात ने मार्च 2026 में विधानसभा से UCC विधेयक पारित किया। केंद्र सरकार की ओर से भी गुजरात के इस कदम का स्वागत किया गया था। अन्य NDA शासित राज्यों में भी UCC को लेकर अलग-अलग स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। ऐसे में अमित शाह का 2029 से पहले 21 राज्यों में इसे लागू करने का बयान इस मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ले आया है।</p>
<p><strong>जनजातीय समुदायों के रीति-रिवाजों पर भी सरकार का रुख</strong><br />UCC को लेकर सबसे अहम सवालों में जनजातीय समुदायों की पारंपरिक व्यवस्थाओं को लेकर चिंता भी शामिल रही है। अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि आदिवासी समुदायों की पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं को संरक्षण दिया जाएगा तथा उन्हें UCC के प्रावधानों से छूट दी जाएगी।</p>
<p><strong>विपक्ष के लिए भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा</strong><br />UCC पर सरकार के इस ऐलान के बाद राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। BJP इसे समान कानून और समान अधिकारों से जोड़ती रही है, जबकि विपक्षी दल इसके प्रावधानों, सामाजिक प्रभाव और राज्यों में लागू करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। फिलहाल, अमित शाह के बयान ने इतना स्पष्ट कर दिया है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित 21 राज्यों में UCC को आगे बढ़ाना केंद्र सरकार और BJP के एजेंडे में प्रमुख स्थान रखता है। अब नजर इस बात पर होगी कि अगले तीन वर्षों में किन राज्यों में विधायी प्रक्रिया पूरी होती है और किन राज्यों में इसे लागू किया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 11:49:55 +0530</pubDate>
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