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                <title>राष्ट्रीय - National Jagat Vision</title>
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                <description>राष्ट्रीय RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बॉर्डर पर सुरक्षा में बड़ी सेंध? सोलर CCTV से सेना की मूवमेंट की कथित जासूसी, विदेश तक पहुंच रही थी लाइव फुटेज</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>श्रीगंगानगर/बठिंडा। </strong>देश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पंजाब पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे नेटवर्क का खुलासा होने का दावा किया गया है, जो कथित तौर पर सेना और सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार सोलर पावर से संचालित एक खुफिया CCTV कैमरे के जरिए सैन्य गतिविधियों की निगरानी कर फुटेज विदेशों तक भेजी जा रही थी। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एजेंसियां पूरे नेटवर्क और उसके कथित मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी हैं।</p>
<p>प्रारंभिक जांच</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/big-breach-in-security-on-the-border-alleged-spying-of/article-10433"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/army-movement-surveillance.webp" alt=""></a><br /><p><strong>श्रीगंगानगर/बठिंडा। </strong>देश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पंजाब पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे नेटवर्क का खुलासा होने का दावा किया गया है, जो कथित तौर पर सेना और सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार सोलर पावर से संचालित एक खुफिया CCTV कैमरे के जरिए सैन्य गतिविधियों की निगरानी कर फुटेज विदेशों तक भेजी जा रही थी। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एजेंसियां पूरे नेटवर्क और उसके कथित मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी हैं।</p>
<p>प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संदिग्ध कैमरा करीब तीन महीने से सक्रिय था। इस दौरान वह महत्वपूर्ण मार्गों से गुजरने वाले सैन्य काफिलों और सुरक्षा बलों की गतिविधियों की रिकॉर्डिंग करता रहा। अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि कैमरा इतने लंबे समय से संचालित था, तो स्थानीय निगरानी तंत्र और सुरक्षा एजेंसियों की नजर उस पर पहले क्यों नहीं पड़ी? क्या संवेदनशील क्षेत्रों में तकनीकी निगरानी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है?</p>
<p><strong>विदेशों तक पहुंच रही थी कथित संवेदनशील जानकारी</strong><br />पुलिस के अनुसार कैमरे से प्राप्त फुटेज पाकिस्तान और कनाडा में मौजूद संदिग्ध तत्वों तक पहुंचाई जा रही थी। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह केवल एक कैमरे का मामला नहीं हो सकता और अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के उपकरण लगाए गए होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि जांच में ये आशंकाएं सही साबित होती हैं, तो यह मामला केवल जासूसी तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।</p>
<p><strong>सेना की मूवमेंट पर थी नजर</strong><br />जांच में यह बात सामने आई है कि कैमरे के जरिए राजस्थान, फाजिल्का और फिरोजपुर बॉर्डर की ओर आने-जाने वाले सैन्य वाहनों और सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर कथित तौर पर नजर रखी जा रही थी। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती इलाकों में सेना की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी का गलत हाथों में पहुंचना सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील मामला माना जाता है।</p>
<p><strong>दो गिरफ्तार, लेकिन नेटवर्क कितना बड़ा?</strong><br />पुलिस ने अमृतसर के अजनाला क्षेत्र के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में दावा किया गया है कि एक आरोपी ने कैमरा, सिम कार्ड और तकनीकी उपकरणों की व्यवस्था की थी, जबकि दूसरे आरोपी ने मौके पर कैमरा स्थापित किया था। हालांकि अब भी कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब बाकी हैं। आखिर इस नेटवर्क को संचालित कौन कर रहा था? इसके पीछे वित्तीय या विदेशी समर्थन था या नहीं? और अब तक कितनी जानकारी साझा की जा चुकी है?</p>
<p><strong>श्रीगंगानगर में भी बढ़ी सतर्कता</strong><br />मामले के सामने आने के बाद श्रीगंगानगर पुलिस ने इलाके में लगे CCTV कैमरों के सत्यापन और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि श्रीगंगानगर से सीधे जुड़े किसी विशेष साक्ष्य की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 13:06:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>  री-एग्जाम से पहले Telegram पर लगाया गया अस्थायी बैन बना कानूनी विवाद, सवाल- पेपर लीक रोकने में नाकामी का बोझ अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर?  </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली पर उठे सवाल अब एक नए कानूनी मोड़ पर पहुंच गए हैं। केंद्र सरकार द्वारा Telegram पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर कंपनी ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले ने एक नई बहस छेड़ दी है कि परीक्षा सुरक्षा में आई खामियों का समाधान प्लेटफॉर्म बंद करना है या व्यवस्था को मजबूत करना। दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका के बाद अब यह मामला केवल परीक्षा सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और सरकारी हस्तक्षेप</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/temporary-ban-imposed-before-re-exam-becomes-legal-dispute-question/article-10431"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/telegram_delhi_high_court_petition_1781676159.webp" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली पर उठे सवाल अब एक नए कानूनी मोड़ पर पहुंच गए हैं। केंद्र सरकार द्वारा Telegram पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर कंपनी ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले ने एक नई बहस छेड़ दी है कि परीक्षा सुरक्षा में आई खामियों का समाधान प्लेटफॉर्म बंद करना है या व्यवस्था को मजबूत करना। दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका के बाद अब यह मामला केवल परीक्षा सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और सरकारी हस्तक्षेप जैसे मुद्दों से भी जुड़ गया है।</p>
<p><strong>पेपर लीक ने खड़े किए बड़े सवाल</strong><br />NEET-UG परीक्षा को लेकर देशभर में विवाद तब शुरू हुआ जब प्रश्न-पत्र लीक होने के आरोप सामने आए। जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रश्न-पत्रों के कथित प्रसार में सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद सरकार ने री-एग्जाम के दौरान किसी भी संभावित गड़बड़ी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने शुरू किए। इसी क्रम में Telegram पर अस्थायी रोक लगाने का निर्णय लिया गया। हालांकि आलोचकों का सवाल है कि यदि परीक्षा प्रणाली सुरक्षित और निगरानी मजबूत होती, तो क्या ऐसी नौबत आती?</p>
<p><strong>Telegram का तर्क – पूरा प्लेटफॉर्म क्यों बंद?</strong><br />कंपनी ने अदालत में दलील दी है कि किसी कथित दुरुपयोग के आधार पर पूरे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करना उचित नहीं है। कंपनी का कहना है कि यदि कुछ लोगों ने नियमों का उल्लंघन किया है, तो कार्रवाई उनके खिलाफ होनी चाहिए, न कि करोड़ों उपयोगकर्ताओं पर प्रभाव डालने वाले फैसले लिए जाएं। हालांकि अदालत में दोनों पक्षों की दलीलों के बाद ही इस मामले की वास्तविक कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।</p>
<p><strong>सरकार का पक्ष – परीक्षा की शुचिता सर्वोपरि</strong><br />सरकारी एजेंसियों का मानना है कि री-एग्जाम के दौरान किसी भी प्रकार की सूचना लीक, प्रश्न-पत्र प्रसार या नकल गिरोह की गतिविधियों को रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी कारण एहतियात के तौर पर कुछ कड़े कदम उठाए गए। लेकिन इस फैसले ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या परीक्षा माफियाओं पर कार्रवाई के बजाय तकनीकी प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाना स्थायी समाधान हो सकता है?</p>
<p><strong>क्या व्यवस्था पर भरोसे का संकट गहरा रहा है?</strong><br />शिक्षा विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि लगातार पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और फिर री-एग्जाम की स्थिति ने छात्रों और अभिभावकों के बीच भरोसे का संकट पैदा किया है। अब जब परीक्षा सुरक्षा के नाम पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक अदालत पहुंच रहे हैं, तो यह संकेत है कि मामला केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहा।</p>
<p><strong>हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें</strong><br />अब सभी की नजर दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई पर है। अदालत को यह तय करना होगा कि परीक्षा सुरक्षा और डिजिटल अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। फिलहाल, इतना तय है कि NEET पेपर लीक विवाद ने देश की परीक्षा प्रणाली, सरकारी निर्णयों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भूमिका को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में कोर्ट का रुख इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:11:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बड़ी नियुक्ति: बस्तर के नक्सल विरोधी अभियानों के चेहरा IPS सुंदरराज पी बने NIA के नए IG</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के पद पर नियुक्त किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर उनकी नियुक्ति को मंजूरी प्रदान कर दी है।</p>
<p>जारी आदेश के अनुसार वर्ष 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी की यह नियुक्ति प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) के आधार पर की गई है। मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाए, ताकि वे केंद्र में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल सकें।</p>
<p><strong>बस्तर में नक्सल</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/big-appointment-ips-sunderraj-p-becomes-the-face-of-anti-naxal/article-10425"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_000000000270720b8ebf653c41fedc24.png" alt=""></a><br /><p> नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के पद पर नियुक्त किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर उनकी नियुक्ति को मंजूरी प्रदान कर दी है।</p>
<p>जारी आदेश के अनुसार वर्ष 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी की यह नियुक्ति प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) के आधार पर की गई है। मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाए, ताकि वे केंद्र में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल सकें।</p>
<p><strong>बस्तर में नक्सल उन्मूलन के रहे प्रमुख रणनीतिकार</strong></p>
<p>सुंदरराज पी लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के सबसे संवेदनशील बस्तर रेंज के आईजी के रूप में कार्यरत रहे हैं। उन्हें राज्य में नक्सल विरोधी अभियानों के सबसे प्रभावशाली और अनुभवी अधिकारियों में गिना जाता है।</p>
<p>उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने बस्तर के दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार कड़े अभियान चलाकर माओवादी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया। उनके कार्यकाल के दौरान क्षेत्र की सुरक्षा रणनीति में कई महत्वपूर्ण व्यावहारिक बदलाव देखने को मिले।</p>
<p><strong>सशस्त्र कार्रवाई के साथ खुफिया तंत्र को किया मजबूत</strong></p>
<p>उन्होंने केवल सशस्त्र सैन्य कार्रवाई पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया, बल्कि जमीनी स्तर पर खुफिया तंत्र को मजबूत करने पर भी विशेष बल दिया। इसके साथ ही स्थानीय आदिवासी युवाओं को सुरक्षा व्यवस्था से सक्रिय रूप से जोड़ने का काम किया गया।</p>
<p>उनके दिशा-निर्देश पर संवेदनशील क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित करने और अंदरूनी विकास कार्यों को गति देने पर भी जोर दिया गया। बस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में सड़क और बुनियादी ढांचे के विस्तार में भी उनकी भूमिका अग्रिम रही।</p>
<p><strong>अबूझमाड़ में कैंप और रिकॉर्ड आत्मसमर्पण</strong></p>
<p>उनकी बनाई रणनीति के चलते सुरक्षा बलों की पहुंच उन सुदूर इलाकों तक बढ़ी जहां पहले पहुंचना अत्यंत कठिन माना जाता था। सूत्रों के अनुसार, उनके कार्यकाल में रिकॉर्ड संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा को चुना।</p>
<p>अबूझमाड़ जैसे सबसे दुर्गम और कोर नक्सली क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित कर सुरक्षा बलों की स्थायी उपस्थिति सुनिश्चित करने में उनका बड़ा योगदान रहा। इससे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती मिली।</p>
<p><strong>देशव्यापी सुरक्षा जांच में निभाएंगे अहम भूमिका</strong></p>
<p>केंद्र सरकार द्वारा उन्हें NIA जैसी देश की शीर्ष जांच एजेंसी में इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपना उनके लंबे अनुभव और उत्कृष्ट कार्यकुशलता का सीधा प्रमाण है।</p>
<p>नई भूमिका में वे देशभर में होने वाली आतंकवादी और आंतरिक सुरक्षा संबंधी गंभीर जांचों में मुख्य भूमिका निभाएंगे। इस हाई-प्रोफाइल नियुक्ति के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस और सुरक्षा महकमे में नए प्रशासनिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>प्रशासनिक </category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:27:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आबकारी मंत्री देवांगन के शराब के पैसे से चल रही महतारी वंदन योजना वाले बयान पर बवाल,कांग्रेस बोली महिलाओं का घर उजाड़कर कैसा लाभ दे रही सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब की कमाई को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन के एक बयान ने कांग्रेस को बैठे बिठाए बड़ा मुद्दा दे दिया है। मंत्री ने कहा था कि महतारी वंदन सहित सरकार की कई बड़ी योजनाएं शराब से मिलने वाले राजस्व से ही चल रही हैं। इस बयान पर कांग्रेस ने राज्य की भाजपा सरकार की जमकर घेराबंदी की है। कांग्रेस का कहना है कि अगर वाकई योजनाएं शराब के पैसे से चल रही हैं तो यह सरकार की सबसे बड़ी आर्थिक और प्रशासनिक नाकामी है।</p>
<p>कांग्रेस ने तंज कसते</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/chhattisgarh/congress-created-ruckus-on-excise-minister-devangans-statement-that-mahtari/article-10409"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/file_000000002ac871fa9cf055d800a47c8e.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब की कमाई को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन के एक बयान ने कांग्रेस को बैठे बिठाए बड़ा मुद्दा दे दिया है। मंत्री ने कहा था कि महतारी वंदन सहित सरकार की कई बड़ी योजनाएं शराब से मिलने वाले राजस्व से ही चल रही हैं। इस बयान पर कांग्रेस ने राज्य की भाजपा सरकार की जमकर घेराबंदी की है। कांग्रेस का कहना है कि अगर वाकई योजनाएं शराब के पैसे से चल रही हैं तो यह सरकार की सबसे बड़ी आर्थिक और प्रशासनिक नाकामी है।</p>
<p>कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष में रहते हुए जो भाजपा शराबबंदी के नाम पर बड़े बड़े वादे करती थी सत्ता में आते ही उसका सारा खजाना शराब की बोतलों पर टिक गया है। शायद इसी को सियासत का असली रूप कहते हैं जहां कुर्सी मिलते ही उसूल बदल जाते हैं। कांग्रेस नेताओं ने साफ कहा कि प्रदेश की महिलाओं को ऐसा कोई भी आर्थिक लाभ मंजूर नहीं होगा जिसकी कीमत उनके ही परिवार को शराबखोरी और बर्बादी के रूप में चुकानी पड़े। सरकार राजस्व जुटाने के बहाने प्रदेश में शराब की खपत बढ़ाने का काम कर रही है।</p>
<h5><strong>ओवररेटिंग और सिंडिकेट का आरोप</strong></h5>
<p>प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में शराब की बिक्री के नाम पर एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है। सरकारी संरक्षण में शराब की ओवररेटिंग धड़ल्ले से चल रही है। ग्राहकों से हर बोतल पर 60 से 80 रुपये तक ज्यादा वसूले जा रहे हैं। खुद शराब दुकानों के कर्मचारी बताते हैं कि यह अतिरिक्त वसूली का पैसा ऊपर तक जाता है। जब इस मामले ने तूल पकड़ा तो सरकार ने सिर्फ दिखावे के लिए कुछ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया। कांग्रेस का सीधा सवाल है कि जब अधिकारी सिर्फ ऊपर के निर्देशों का पालन कर रहे थे तो उन्हें बलि का बकरा क्यों बनाया गया। असली जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी।</p>
<h5><strong>नकली शराब और घोटालों की झड़ी</strong></h5>
<p>कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में शराब घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि इस नेटवर्क के जरिए हजारों करोड़ रुपये लूटे जा रहे हैं। रायगढ़ में नकली शराब की बॉटलिंग रायपुर के तेलीबांधा में नकली होलोग्राम वाली शराब और राजनांदगांव में अवैध शराब का कारोबार इसके पुख्ता सबूत हैं। बलरामपुर की सरकारी दुकान में बीयर की बोतल में गंदा पानी मिलने और जगदलपुर में अवैध शराब पकड़े जाने की घटनाओं ने पूरी सरकारी व्यवस्था की पोल खोल दी है।</p>
<h5><strong>ईडी और सीबीआई जांच की मांग</strong></h5>
<p>सरकारी शराब दुकानों में नकली और मिलावटी शराब बेचकर जो काली कमाई हो रही है उसका कोई हिसाब नहीं है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। पार्टी ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों से भी जांच कराई जानी चाहिए। अगर सरकार पारदर्शी है तो उसे जांच से डरना नहीं चाहिए। कांग्रेस ने पूछा है कि इस नकली शराब के खेल का असली सरगना कौन है और इस काली कमाई में किन किन लोगों की हिस्सेदारी है सरकार को इसका सार्वजनिक जवाब देना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 19:50:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>822 वोट से 20 सांसद तक! रातोंरात सियासत के केंद्र में आई NCPI, TMC के बागियों ने बदला ठिकाना ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारतीय राजनीति में कभी-कभी ऐसे घटनाक्रम होते हैं जो रातोंरात किसी अनजान नाम को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला देते हैं। नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। जिस पार्टी को कुछ समय पहले तक राजनीतिक गलियारों में मुश्किल से कोई पहचानता था, वही पार्टी अब देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। वजह है, तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों का, इस पार्टी में विलय, जिसने बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया है।</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में NCPI का प्रदर्शन बेहद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/politics/from-822-votes-to-20-mps-ncpi-came-to-the/article-10398"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/tmc-ribal-group-meets-om-birla-1781496421191_v.webp" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारतीय राजनीति में कभी-कभी ऐसे घटनाक्रम होते हैं जो रातोंरात किसी अनजान नाम को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला देते हैं। नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। जिस पार्टी को कुछ समय पहले तक राजनीतिक गलियारों में मुश्किल से कोई पहचानता था, वही पार्टी अब देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। वजह है, तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों का, इस पार्टी में विलय, जिसने बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया है।</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में NCPI का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था। पार्टी के उम्मीदवारों को कुल मिलाकर महज कुछ सौ वोट मिले थे और चुनाव खत्म होते ही पार्टी लगभग राजनीतिक परिदृश्य से गायब हो गई थी। लेकिन अब वही पार्टी अचानक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक दल-बदल नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत है।</p>
<p>अब सवाल यह है कि क्या NCPI सिर्फ बागी सांसदों का अस्थायी ठिकाना बनेगी या फिर यह पार्टी पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नई ताकत के रूप में उभरेगी? 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले इस घटनाक्रम ने बंगाल के राजनीतिक भविष्य को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, एक बात तय है कि जिस पार्टी को कभी सैकड़ों वोट भी मुश्किल से मिले थे, वह आज संसद और सियासत दोनों के केंद्र में खड़ी दिखाई दे रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 12:54:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल की सियासत में फिर हलचल! शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच के बीच ED के सामने पहुंचे अभिषेक बनर्जी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कोलकाता।</strong> पश्चिम बंगाल के चर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच ने एक बार फिर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी आज कोलकाता स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर पहुंचे, जहां उनसे कथित अवैध वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ की जा रही है। इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।</p>
<p>जांच एजेंसियों के अनुसार, भर्ती घोटाले की पड़ताल के दौरान कुछ वित्तीय लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की जांच में अभिषेक बनर्जी से जुड़े सवाल सामने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/politics/stir-again-in-bengal-politics-abhishek-banerjee-appears-before-ed/article-10397"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/abhishek-banerjee-pti_d_d.webp" alt=""></a><br /><p><strong>कोलकाता।</strong> पश्चिम बंगाल के चर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच ने एक बार फिर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी आज कोलकाता स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर पहुंचे, जहां उनसे कथित अवैध वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ की जा रही है। इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।</p>
<p>जांच एजेंसियों के अनुसार, भर्ती घोटाले की पड़ताल के दौरान कुछ वित्तीय लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की जांच में अभिषेक बनर्जी से जुड़े सवाल सामने आए हैं। इसी कड़ी में उनकी कंपनी 'लिप्स एंड बाउंड्स' का नाम भी जांच में आया, जिसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने उनसे पूछताछ का फैसला किया। हालांकि, मामले में आरोपों और जांच को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार जारी है।</p>
<p>ED दफ्तर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, जबकि पूरे मामले पर विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पूछताछ से जांच एजेंसियों को क्या नई जानकारी मिलती है और इस बहुचर्चित मामले में आगे क्या मोड़</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 12:36:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक अफवाह और चार जिंदगियां खत्म! ट्रेन में आग की खबर से मची भगदड़, दूसरी ट्रेन की चपेट में आए यात्री</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मुरैना।</strong> कभी-कभी एक अफवाह का अंजाम कितना भयावह हो सकता है, इसका दर्दनाक उदाहरण मध्य प्रदेश के मुरैना में देखने को मिला। सफर कर रहे यात्रियों को क्या पता था कि आग लगने की एक खबर उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी बन जाएगी। खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में आग लगने की अफवाह फैलते ही ट्रेन में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने की कोशिश में कई यात्री ट्रेन से उतरकर रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए, लेकिन कुछ ही पलों बाद वहां मौत दौड़ती हुई आ गई।</p>
<p>प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घबराए यात्री सुरक्षित जगह की तलाश में दूसरे ट्रैक पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/one-rumor-and-four-lives-ended-news-of-fire-in/article-10395"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/morena_train_accident_1781502867.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुरैना।</strong> कभी-कभी एक अफवाह का अंजाम कितना भयावह हो सकता है, इसका दर्दनाक उदाहरण मध्य प्रदेश के मुरैना में देखने को मिला। सफर कर रहे यात्रियों को क्या पता था कि आग लगने की एक खबर उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी बन जाएगी। खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में आग लगने की अफवाह फैलते ही ट्रेन में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने की कोशिश में कई यात्री ट्रेन से उतरकर रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए, लेकिन कुछ ही पलों बाद वहां मौत दौड़ती हुई आ गई।</p>
<p>प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घबराए यात्री सुरक्षित जगह की तलाश में दूसरे ट्रैक पर खड़े हो गए थे। इसी दौरान तेज रफ्तार से आ रही पातालकोट एक्सप्रेस वहां से गुजरी और कई लोग उसकी चपेट में आ गए। इस दर्दनाक हादसे में तीन महिलाओं और एक मासूम बच्चे समेत चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य यात्री घायल हो गए।</p>
<p>हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार, बिखरा सामान और अपनों को तलाशते परिजनों के दृश्य हर किसी को झकझोर देने वाले थे। सूचना मिलते ही रेलवे, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।</p>
<p>प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे की जड़ एक अफवाह थी। अब रेलवे प्रशासन पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहा है कि आखिर आग लगने की खबर कैसे फैली और क्या इस त्रासदी को रोका जा सकता था। यह हादसा एक बार फिर बता गया कि अफवाहें सिर्फ भ्रम नहीं फैलातीं, बल्कि कई बार जिंदगी भी छीन लेती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:52:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र राम मंदिर में चढ़ावा विवाद गरमाया, जांच के लिए बनी SIT; वित्तीय रिकॉर्ड से लेकर जिम्मेदारियों तक होगी जांच</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अयोध्या। </strong>करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र राम मंदिर से जुड़ा एक मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के कथित गबन की खबरों के बाद प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजनीतिक हलकों तक हलचल तेज हो गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो पूरे प्रकरण की तह तक जाने की तैयारी में है।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियां अब दान राशि के लेन-देन, वित्तीय रिकॉर्ड, तकनीकी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की पड़ताल करेंगी। जांच का मकसद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/offering-controversy-heated-up-in-ram-temple-the-center-of/article-10394"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/ram_mandir_donation.webp" alt=""></a><br /><p><strong>अयोध्या। </strong>करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र राम मंदिर से जुड़ा एक मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के कथित गबन की खबरों के बाद प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजनीतिक हलकों तक हलचल तेज हो गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो पूरे प्रकरण की तह तक जाने की तैयारी में है।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियां अब दान राशि के लेन-देन, वित्तीय रिकॉर्ड, तकनीकी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की पड़ताल करेंगी। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि कहीं किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता, लापरवाही या नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। यदि जांच में किसी की भूमिका सामने आती है तो आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है।</p>
<p>इस बीच मामले ने और तूल तब पकड़ लिया जब वरिष्ठ भाजपा नेता विनय कटियार ने कथित अनियमितताओं पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। हालांकि उनके द्वारा एफआईआर दर्ज कराने की घोषणा के बावजूद अभी तक कोई औपचारिक शिकायत पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुई है। यही वजह है कि पूरे मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p>फिलहाल, मंदिर ट्रस्ट भी अपने स्तर पर तथ्यों की जांच में जुटा हुआ है। अब सबकी निगाहें SIT की जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं। क्योंकि मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता के आरोपों का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:25:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फर्जी दस्तावेज, सरकारी नौकरी और बड़ा खेल! असम में भर्ती घोटाले ने उड़ाए होश, बाहरी उम्मीदवारों ने हड़पीं नौकरियां</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>दिसपुर। </strong>सरकारी नौकरी पाने की होड़ में अब फर्जीवाड़े का ऐसा खेल सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। असम के जोरहाट से सामने आए एक बड़े भर्ती घोटाले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सरकारी दस्तावेजों की जांच व्यवस्था कितनी मजबूत है? खुलासा हुआ है कि दूसरे राज्यों के कई उम्मीदवारों ने फर्जी निवास, जाति और आय प्रमाण पत्रों के जरिए केंद्रीय सुरक्षा बलों में नौकरियां हासिल कर लीं, जबकि उन पदों पर असम के वास्तविक और पात्र युवाओं का हक था।</p>
<p>जांच में सामने आया है कि जालसाजों ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/fake-documents-government-jobs-and-big-game-recruitment-scam-in/article-10382"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/asam-news-(1)-1781433362135_v.webp" alt=""></a><br /><p><strong>दिसपुर। </strong>सरकारी नौकरी पाने की होड़ में अब फर्जीवाड़े का ऐसा खेल सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। असम के जोरहाट से सामने आए एक बड़े भर्ती घोटाले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सरकारी दस्तावेजों की जांच व्यवस्था कितनी मजबूत है? खुलासा हुआ है कि दूसरे राज्यों के कई उम्मीदवारों ने फर्जी निवास, जाति और आय प्रमाण पत्रों के जरिए केंद्रीय सुरक्षा बलों में नौकरियां हासिल कर लीं, जबकि उन पदों पर असम के वास्तविक और पात्र युवाओं का हक था।</p>
<p>जांच में सामने आया है कि जालसाजों ने जोरहाट के नाओशोलिया गांव के नाम पर फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्र तैयार किए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और असम राइफल्स जैसी प्रतिष्ठित केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों में भर्ती हासिल की गई। जब दस्तावेजों के नंबर और रिकॉर्ड का मिलान किया गया तो पूरा फर्जीवाड़ा उजागर हो गया है।</p>
<p>सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर फर्जी प्रमाण पत्र बने कैसे? कौन लोग थे जिन्होंने सरकारी रिकॉर्ड का दुरुपयोग कर बाहरी उम्मीदवारों को असम का निवासी बना दिया? और क्या यह सिर्फ कुछ लोगों का खेल था या फिर इसके पीछे कोई संगठित भर्ती माफिया काम कर रहा था? जांच एजेंसियां अब इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही हैं।</p>
<p>मामले ने इसलिए भी गंभीर रूप ले लिया है, क्योंकि आशंका जताई जा रही है कि यह नेटवर्क सिर्फ एक गांव या एक जिले तक सीमित नहीं है। यदि जांच में यह रैकेट राज्य के अन्य हिस्सों तक फैला मिला, तो यह देश के हालिया सबसे बड़े भर्ती घोटालों में से एक साबित हो सकता है। अब पूरे मामले में निगाहें जांच एजेंसियों पर हैं। क्योंकि यह सिर्फ फर्जी दस्तावेजों का मामला नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के अधिकार और भविष्य से जुड़ा सवाल है, जिनकी जगह कथित तौर पर जालसाजों ने नौकरी हासिल कर ली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 16:40:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देहरादून में बीजेपी नेता की हत्या के बाद फूटा गुस्सा! आरोपी के घर पर चला बुलडोजर, इलाके में भारी तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>देहरादून।</strong> उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के सहसपुर क्षेत्र में भाजपा नेता की हत्या के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। एक मामूली विवाद से शुरू हुआ मामला खूनी संघर्ष में बदल गया, जिसके बाद पूरे इलाके में आक्रोश और भारी तनाव का माहौल बन गया। भाजपा ओबीसी मोर्चा के जिला सोशल मीडिया सह संयोजक विनोद कुमार की हत्या के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और आक्रोशित भीड़ आरोपितों के घरों तक पहुंच गई। इस दौरान पथराव, तोड़फोड़ और हंगामे की घटनाएं सामने आईं।</p>
<p>घटना के बाद प्रशासन और पुलिस अलर्ट मोड में आ गए। गांव में भारी संख्या में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/anger-erupted-after-the-murder-of-bjp-leader-in-dehradun/article-10375"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/untitled-5-copy-1781417319983_v.webp" alt=""></a><br /><p><strong>देहरादून।</strong> उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के सहसपुर क्षेत्र में भाजपा नेता की हत्या के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। एक मामूली विवाद से शुरू हुआ मामला खूनी संघर्ष में बदल गया, जिसके बाद पूरे इलाके में आक्रोश और भारी तनाव का माहौल बन गया। भाजपा ओबीसी मोर्चा के जिला सोशल मीडिया सह संयोजक विनोद कुमार की हत्या के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और आक्रोशित भीड़ आरोपितों के घरों तक पहुंच गई। इस दौरान पथराव, तोड़फोड़ और हंगामे की घटनाएं सामने आईं।</p>
<p>घटना के बाद प्रशासन और पुलिस अलर्ट मोड में आ गए। गांव में भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी तैनात की गई है। वहीं प्रशासनिक अधिकारी बुलडोजर लेकर आरोपितों के घर पहुंचे और कथित अवैध निर्माणों को चिन्हित कर कार्रवाई शुरू की गई है। बुलडोजर की कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।</p>
<p>बताया जा रहा है कि पानी के विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच पहले से तनाव था। आरोप है कि बड़ी संख्या में लोग हथौड़े, लाठी-डंडे और अन्य हथियारों के साथ एक परिवार के घर पहुंचे और हमला कर दिया है। इस हमले में विनोद कुमार की मौत हो गई, जबकि उनके परिजन गंभीर रूप से घायल हो गए है। घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया और लोगों ने आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग शुरू कर दी है।</p>
<p>पुलिस ने शिकायत के आधार पर कई नामजद आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की हिंसा या उपद्रव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल, देहरादून का बैरागीवाला इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका है। हत्या, उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शन और बुलडोजर कार्रवाई ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 12:21:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ब्रिटिश परंपराओं को अलविदा! भारतीय सेना की नई वर्दी नीति लागू, बंदी जैकेट से लेकर टैटू और मूंछों तक बदले नियम</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>भारतीय सेना ने अपनी वर्दी और ड्रेस कोड से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव करते हुए औपनिवेशिक दौर की कई परंपराओं को पीछे छोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया है। हाल ही में जारी ‘आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026’ मैनुअल में बंद-गले वाली बंदी जैकेट को औपचारिक ड्रेस का हिस्सा बनाया गया है, जबकि कई पुराने सैन्य प्रतीकों और परंपराओं को हटाने या सीमित करने का फैसला लिया गया है। सेना का कहना है कि ये बदलाव आधुनिक भारतीय पहचान और सैन्य गरिमा को ध्यान में रखकर किए गए हैं।</p>
<p>नए नियमों के तहत अधिकारियों को औपचारिक अवसरों पर बंदी जैकेट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/goodbye-to-british-traditions-new-uniform-policy-of-indian-army/article-10373"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/indian-army-new-dress-code-(2)-1781413009425_v.webp" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>भारतीय सेना ने अपनी वर्दी और ड्रेस कोड से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव करते हुए औपनिवेशिक दौर की कई परंपराओं को पीछे छोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया है। हाल ही में जारी ‘आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026’ मैनुअल में बंद-गले वाली बंदी जैकेट को औपचारिक ड्रेस का हिस्सा बनाया गया है, जबकि कई पुराने सैन्य प्रतीकों और परंपराओं को हटाने या सीमित करने का फैसला लिया गया है। सेना का कहना है कि ये बदलाव आधुनिक भारतीय पहचान और सैन्य गरिमा को ध्यान में रखकर किए गए हैं।</p>
<p>नए नियमों के तहत अधिकारियों को औपचारिक अवसरों पर बंदी जैकेट पहनने की अनुमति दी गई है। इसके साथ ही कुछ सेरेमोनियल ड्रेस से पाउच बेल्ट को हटाया गया है और परेड के दौरान रिव्यूइंग अधिकारियों के लिए तलवार रखना अब अनिवार्य नहीं रहेगा। सेना ने सभी रैंकों के लिए ‘3बी’ नाम की नई सर्दियों की वर्दी भी शुरू की है, जिसमें अंगोला शर्ट, बैटल जैकेट और बेरेट शामिल होंगे। मैनुअल में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सेना की पहचान को भारतीय मूल्यों के अनुरूप ढालने पर विशेष ध्यान दिया गया है।</p>
<p>वर्दी के अलावा सैनिकों की ग्रूमिंग और व्यक्तिगत प्रस्तुति से जुड़े नियम भी सख्त किए गए हैं। सेना ने टैटू और शरीर में पियर्सिंग पर पहले की तरह प्रतिबंध बनाए रखा है। यूनिफॉर्म में किसी भी प्रकार का ब्रेसलेट पहनने की अनुमति नहीं होगी, हालांकि धार्मिक परंपरा के तहत कलाई पर बंधे पवित्र धागे को छूट दी गई है। मूंछों की अधिकतम लंबाई 12 सेंटीमीटर निर्धारित की गई है और ड्यूटी के दौरान परफ्यूम या डिओडोरेंट के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है।</p>
<p>महिला सैन्य अधिकारियों के लिए भी ड्रेस कोड को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उन्हें सादे रंग की साड़ी या दुपट्टे के साथ कुर्ता-सलवार पहनने की अनुमति होगी, जबकि बिना आस्तीन वाले कुर्ते, पलाजो और अन्य कैजुअल परिधानों पर रोक रहेगी। कॉस्मेटिक्स के उपयोग को लेकर भी नियम सख्त किए गए हैं और रंगीन नेल पॉलिश, बिंदी, नोज पिन तथा अन्य आकर्षक सजावटी वस्तुओं की अनुमति नहीं होगी। केवल निर्धारित मानकों के अनुसार सिंदूर लगाने की छूट दी गई है।</p>
<p>सेना अधिकारियों का मानना है कि यह बदलाव केवल ड्रेस कोड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारतीय सैन्य परंपराओं को स्वदेशी पहचान देने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। मैनुअल में ‘रॉयल’ जैसे औपनिवेशिक शब्दों को भी हटाया गया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय सेना का यह कदम आधुनिक सैन्य जरूरतों और भारतीय सांस्कृतिक पहचान के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 12:08:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[मनीशंकर पांडेय]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फरारी के बीच मौत! नेपाल में गोली मारकर हत्या, खान सर कोचिंग बवाल से जुड़े आरोपी की संदिग्ध मौत से सनसनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>पटना। </strong>खान ग्लोबल स्टडीज में हुए चर्चित बवाल मामले से जुड़ी एक सनसनीखेज खबर ने बिहार से लेकर नेपाल तक हलचल मचा दी है। जानकारी के अनुसार ज्ञान बिंदु के डायरेक्टर रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की नेपाल में गोली मारकर हत्या कर दी गई है। बताया जा रहा है कि प्रिंस यादव उस मामले में पुलिस की तलाश में था, जो खान सर की कोचिंग में तोड़फोड़ और हंगामे से जुड़ा हुआ था। हत्या की खबर सामने आते ही पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक कोचिंग संस्थानों के विवाद के बाद दर्ज मामलों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.nationaljagatvision.com/state/death-amid-ferrari-shot-dead-in-nepal-sensation-due-to/article-10371"><img src="https://www.nationaljagatvision.com/media/400/2026-06/murder--1781412613032_v.webp" alt=""></a><br /><p><strong>पटना। </strong>खान ग्लोबल स्टडीज में हुए चर्चित बवाल मामले से जुड़ी एक सनसनीखेज खबर ने बिहार से लेकर नेपाल तक हलचल मचा दी है। जानकारी के अनुसार ज्ञान बिंदु के डायरेक्टर रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की नेपाल में गोली मारकर हत्या कर दी गई है। बताया जा रहा है कि प्रिंस यादव उस मामले में पुलिस की तलाश में था, जो खान सर की कोचिंग में तोड़फोड़ और हंगामे से जुड़ा हुआ था। हत्या की खबर सामने आते ही पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक कोचिंग संस्थानों के विवाद के बाद दर्ज मामलों में पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश कर रही थी। इसी बीच प्रिंस यादव कथित तौर पर गिरफ्तारी से बचने के लिए नेपाल चला गया था और एक गेस्ट हाउस में रह रहा था। वहीं अज्ञात हमलावरों ने उसे गोली मार दी। इस वारदात के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या यह पुरानी रंजिश का मामला है, क्या फरारी के दौरान कोई नया विवाद हुआ, या फिर इसके पीछे कोई और बड़ी वजह है? इन सवालों के जवाब अब जांच एजेंसियां तलाश कर रही हैं।</p>
<p>घटना की सूचना मिलते ही पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके समेत संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की सतर्कता बढ़ा दी गई है। पीरबहोर और कदमकुआं थाना क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। वहीं प्रिंस यादव के परिजन नेपाल के लिए रवाना हो गए हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि खान ग्लोबल स्टडीज में हुए बवाल के बाद यह मामला पहले ही सुर्खियों में था। अब इस हत्याकांड ने पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। पुलिस नेपाल में हुई हत्या के हर पहलू की जांच कर रही है और आने वाले दिनों में कई अहम खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल, एक बात साफ है कि कोचिंग विवाद से शुरू हुई कहानी अब अंतरराष्ट्रीय सीमा पार एक हत्या तक पहुंच चुकी है, जिसने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 11:04:58 +0530</pubDate>
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